NavIC (Navigation with Indian Constellation) — जिसे पहले IRNSS (Indian Regional Navigation Satellite System) कहा जाता था — भारत का स्वदेशी उपग्रह आधारित नेविगेशन तंत्र है। यह अमेरिका के GPS, रूस के GLONASS और यूरोप के Galileo की तरह काम करता है, परंतु यह भारत और उसके आसपास के क्षेत्र के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है।
पृष्ठभूमि
2004 में कारगिल युद्ध के दौरान अमेरिका ने भारत को GPS डेटा देने से इनकार किया था। इस घटना ने भारत को अपना स्वदेशी नेविगेशन तंत्र विकसित करने की प्रेरणा दी। ISRO ने 2013 से 2018 के बीच सात उपग्रह लॉन्च किए।
तकनीकी विशेषताएँ
नक्षत्र (Constellation)
NavIC में कुल 8 उपग्रह हैं — 3 भूस्थिर (Geostationary) और 5 भूतुल्यकाली कक्षा (Geosynchronous Inclined Orbit) में। ये उपग्रह L5 और S बैंड आवृत्तियों पर काम करते हैं।
कवरेज
NavIC भारत के संपूर्ण क्षेत्र और उसके चारों ओर 1,500 km तक कवरेज देता है। स्थिति की सटीकता 5-10 मीटर है (मानक सेवा) और सैन्य सेवा के लिए 1 मीटर से कम।
अनुप्रयोग
नागरिक अनुप्रयोग
- मोबाइल फोन नेविगेशन (Qualcomm chipsets में NavIC सक्षम)
- मछुआरों के लिए समुद्री नेविगेशन — IRNSS रिसीवर वाली नावें
- कृषि में सटीक खेती (Precision Agriculture)
- आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाएँ
- वाहन ट्रैकिंग और फ्लीट प्रबंधन
रक्षा अनुप्रयोग
- मिसाइल मार्गदर्शन
- सैनिकों की स्थिति नेविगेशन
- ड्रोन और UAV संचालन
महत्त्व
NavIC भारत की सामरिक स्वायत्तता का प्रतीक है। युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव में विदेशी GPS पर निर्भरता ख़तरनाक हो सकती है। NavIC इस निर्भरता को समाप्त करता है।
चुनौतियाँ
- वैश्विक कवरेज नहीं — केवल क्षेत्रीय तंत्र
- NavIC-सक्षम उपकरणों का अपर्याप्त प्रसार
- कुछ उपग्रहों में घड़ी की समस्या (Clock anomaly)
यूपीएससी की दृष्टि से
NavIC GS-III (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रक्षा) के लिए महत्त्वपूर्ण है। ISRO की उपलब्धियों और अंतरिक्ष नीति पर प्रश्नों में NavIC का उल्लेख करें।