भारत में पंचायती राज संस्थाएँ (Panchayati Raj Institutions — PRI) लोकतंत्र की जड़ों को जमीनी स्तर तक पहुँचाने का सबसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक साधन हैं। 73वाँ संवैधानिक संशोधन (1992) ने पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देकर भारतीय शासन में विकेंद्रीकरण की एक नई लहर शुरू की।
73वाँ संवैधानिक संशोधन (1992): मुख्य प्रावधान
- भाग IX और 11वीं अनुसूची संविधान में जोड़े गए।
- त्रि-स्तरीय पंचायत ढाँचा: ग्राम स्तर (ग्राम पंचायत), मध्यवर्ती स्तर (पंचायत समिति/ब्लॉक) और जिला स्तर (जिला परिषद)।
- 5 वर्षीय कार्यकाल और राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव।
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए कम-से-कम 1/3 सीटों का आरक्षण।
- राज्य वित्त आयोग की स्थापना पंचायतों को वित्तीय संसाधन हस्तांतरित करने के लिए।
- 11वीं अनुसूची में 29 विषयों की सूची जो पंचायतों को हस्तांतरित की जा सकती है।
ग्राम सभा की भूमिका
ग्राम सभा — ग्राम पंचायत क्षेत्र में पंजीकृत मतदाताओं का निकाय — पंचायती राज की आधारशिला है। यह:
- पंचायत के बजट और योजनाओं को अनुमोदित करती है।
- MGNREGA के तहत सोशल ऑडिट आयोजित करती है।
- लाभार्थी सूचियाँ तय करती है।
- पंचायत प्रतिनिधियों को जवाबदेह ठहराती है।
ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008
ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत गाँव-स्तर पर ग्राम न्यायालय स्थापित करने का प्रावधान है ताकि गाँव के नागरिकों को द्रुत और सस्ता न्याय मिले। ये न्यायालय:
- न्यूनतम 5,000 की आबादी पर एक ग्राम न्यायालय।
- न्याय अधिकारी (Nyaya Adhikari) की अध्यक्षता।
- सिविल और आपराधिक दोनों मामले।
पंचायती राज की चुनौतियाँ
| चुनौती | विवरण |
|---|---|
| वित्तीय कमजोरी | अपने स्वयं के राजस्व स्रोत नगण्य; केंद्र और राज्य अनुदान पर निर्भरता |
| कार्यों का हस्तांतरण | 29 विषयों में से अधिकांश अभी भी राज्य विभागों के नियंत्रण में |
| क्षमता अभाव | पंचायत प्रतिनिधियों में तकनीकी और प्रशासनिक कौशल की कमी |
| उत्तरोत्तर राजनीतिकरण | स्थानीय निकाय चुनावों में जाति और सम्प्रदाय का दबदबा |
| महिलाओं का सशक्तीकरण | अनेक जगह “सरपंच पति” की समस्या; चुनी महिलाएँ नाम की |
PESA अधिनियम और जनजातीय क्षेत्र
पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (PESA) ने पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पंचायती राज का विस्तार किया। PESA आदिवासी समुदायों को:
- प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण।
- लघु वन उपज पर स्वामित्व।
- भूमि हस्तांतरण पर वीटो का अधिकार।
UPSC के लिए प्रासंगिकता
GS II में पंचायती राज विकेंद्रीकरण, जमीनी लोकतंत्र, महिला भागीदारी और सुशासन के अंतर्गत सबसे महत्त्वपूर्ण विषयों में से एक है। 73वाँ संशोधन, 11वीं अनुसूची के 29 विषय, PESA अधिनियम और ग्राम न्यायालय — सभी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा में बारम्बार पूछे जाते हैं।