उपयोगिता मॉडल (Utility Model) एक प्रकार का बौद्धिक सम्पदा (Intellectual Property) संरक्षण है जो पेटेंट से कम कठोर मानकों पर आधारित है। इसे “लघु पेटेंट” (Petty Patent) या “नवाचार पेटेंट” भी कहा जाता है।
उपयोगिता मॉडल और पेटेंट में अंतर
- नवीनता की आवश्यकता — पेटेंट के लिए वैश्विक नवीनता चाहिए; उपयोगिता मॉडल के लिए स्थानीय नवीनता पर्याप्त है।
- आविष्कार की ऊँचाई — पेटेंट के लिए उच्च स्तर; उपयोगिता मॉडल के लिए निम्न स्तर।
- संरक्षण अवधि — पेटेंट 20 वर्ष; उपयोगिता मॉडल 6-10 वर्ष।
- लागत — उपयोगिता मॉडल काफी सस्ता।
- प्रक्रिया — उपयोगिता मॉडल की प्रक्रिया सरल और तेज़।
MSME के लिए महत्त्व
उपयोगिता मॉडल विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए उपयोगी है क्योंकि:
- पारंपरिक पेटेंट की प्रक्रिया महँगी और जटिल होती है।
- MSME के नवाचार प्रायः छोटे पैमाने के होते हैं जो पेटेंट की ऊँची सीमा पूरी नहीं करते।
- भारत के अधिकांश नवाचार कृषि, हस्तशिल्प और परंपरागत ज्ञान में हैं।
अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य
जर्मनी, जापान, चीन, ब्राजील सहित 80 से अधिक देशों में उपयोगिता मॉडल की व्यवस्था है। चीन इसका सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है।
भारत की स्थिति
भारत में अभी तक उपयोगिता मॉडल की व्यवस्था नहीं है। DPIIT और WIPO इसे लागू करने पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। राष्ट्रीय बौद्धिक सम्पदा नीति 2016 में इसका उल्लेख किया गया है।
यूपीएससी प्रासंगिकता
यूपीएससी GS III में बौद्धिक सम्पदा अधिकार, पेटेंट और नवाचार नीति के प्रश्नों में यह विषय उपयोगी है।