भारत में जेब-से-होने वाले स्वास्थ्य व्यय (Out-of-Pocket Expenditure, OOPE) में दवाइयों की हिस्सेदारी बहुत बड़ी है — लगभग 60-70% OOPE। एक बुख़ार, एक हड्डी टूटना, या कोई पुरानी बीमारी अस्पताल में भर्ती हुए बिना भी एक परिवार को क़र्ज़ में डुबा सकती है। प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) इस मोर्चे पर सरकार का सर्वाधिक प्रत्यक्ष हस्तक्षेप है — गुणवत्तापूर्ण दवाइयों को ब्रांडेड क़ीमतों के एक अंश पर उपलब्ध कराने वाली जेनेरिक-दवा दुकानों का नेटवर्क।
यह मार्गदर्शिका PMBJP के ढाँचे, प्रगति, गुणवत्ता आश्वासन और समकालीन बहसों को स्पष्ट करती है। यूपीएससी अभ्यर्थी के लिए यह GS-II (शासन व सामाजिक न्याय) और GS-III (फार्मा क्षेत्र, IPR) — दोनों को जोड़ने वाला विषय है।
WHO के अनुसार, हर वर्ष भारत में लगभग 5.5 करोड़ लोग केवल स्वास्थ्य खर्च के कारण ग़रीबी रेखा से नीचे चले जाते हैं — और इस "विपत्तिजनक स्वास्थ्य व्यय (catastrophic health expenditure)" में दवाइयाँ सबसे बड़ी एकल मद हैं। PMBJP का मूल विचार ही यह है कि दवा-मूल्य पर एक सार्वजनिक विकल्प (public option) उपलब्ध हो, जो निजी बाज़ार पर मूल्य-दबाव बनाए रखे।
PMBJP क्या है?
PMBJP (पूर्व में जन औषधि योजना, 2008 में आरंभ; 2015-16 में पुनः-आरंभ और पुनः-ब्रांड) के उद्देश्य:
- गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ किफ़ायती क़ीमतों पर उपलब्ध कराना।
- ब्रांडेड दवाइयों के जेनेरिक समकक्षों को बढ़ावा देना।
- दवाइयों पर जेब-से-होने वाले व्यय को कम करना।
- पूरे भारत में जन औषधि केंद्र (Jan Aushadhi Kendras, JAKs) स्थापित करना।
प्रशासनिक संरचना:
- फार्मास्युटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो ऑफ़ इंडिया (PMBI) — कार्यान्वयन एजेंसी।
- फार्मास्युटिकल्स विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय।
पैमाना और पहुँच
- क्रियाशील JAKs — 2024 के अंत तक 12,500 से अधिक (लक्ष्य: 2026 तक 25,000)।
- उत्पाद टोकरी — 2,000+ दवाइयाँ और 300+ शल्य एवं उपभोग योग्य सामग्री।
- पहुँच लक्ष्य — हर ज़िले के हर ब्लॉक में कम-से-कम एक केंद्र।
- भौगोलिक कवरेज — टियर-II, टियर-III शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों, आकांक्षी ज़िलों में विस्तार।
मूल्य-निर्धारण और बचत
- क़ीमतें ब्रांडेड समकक्षों की बाज़ार-दरों से 50-80% कम पर निर्धारित।
- आरंभ से अब तक उपभोक्ताओं को संचयी बचत लगभग ₹28,000 करोड़ (2024 के अंत तक)।
- वार्षिक बिक्री — वित्त-वर्ष 2023-24 में ₹1,200 करोड़ से अधिक।
उदाहरण के लिए, मधुमेह की दवा मेटफ़ॉर्मिन का ब्रांडेड पैक यदि बाज़ार में ₹110 का है, तो जन औषधि केंद्र पर वही दवा (समान सक्रिय औषधीय घटक — Active Pharmaceutical Ingredient सहित) ₹15-20 में मिल जाती है। उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और कैंसर की दवाओं में यह बचत और भी नाटकीय है।
गुणवत्ता आश्वासन
जेनेरिक दवाइयों को प्रायः "निम्न गुणवत्ता" के रूप में कलंकित किया जाता है — PMBJP इसका प्रतिकार करती है:
- NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण।
- केवल WHO-GMP प्रमाणित निर्माताओं से खरीद।
- बैच परीक्षण अनिवार्य।
- ब्रांडेड समकक्षों के समान गुणवत्ता और प्रभावकारिता; समान सक्रिय औषधीय घटक (API), समान जैव-उपलब्धता (bioavailability)।
- इंडियन फ़ार्माकोपिया कमीशन (IPC) के मानकों के अनुरूप।
उत्पाद श्रेणियाँ
JAKs में दवाइयाँ निम्नलिखित श्रेणियों में उपलब्ध हैं:
- संक्रमणरोधी — एंटीबायोटिक्स, मलेरियारोधी, विषाणुरोधी।
- हृदय-संवहनी — उच्च रक्तचापरोधी, लिपिड-कम करने वाली।
- मधुमेहरोधी।
- ऑन्कोलॉजी — चयनित कैंसर दवाइयाँ।
- जठरांत्र।
- श्वसन।
- केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) और मनोरोग।
- दर्द और सूजन।
- महिला स्वास्थ्य — जिसमें सुविधा सैनिटरी नैपकिन ₹1 प्रति पैड पर।
- न्यूट्रास्युटिकल्स और प्रोटीन सप्लीमेंट।
- शल्य और उपभोग योग्य सामग्री।
सुविधा सैनिटरी नैपकिन
2018 में आरंभ। ऑक्सो-जैव-निम्नीकरण योग्य (oxo-biodegradable)। मूल्य ₹1 प्रति पैड। 2024 तक 55 करोड़ से अधिक पैड बिके। यह विश्व का सबसे बड़ा सब्सिडी-युक्त मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद कार्यक्रम है, और लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर पर सीधा प्रभाव डालता है।
JAK कौन खोल सकता है?
- D.Pharma/B.Pharma योग्यता वाले व्यक्ति।
- NGO / न्यास / सहकारी समितियाँ।
- सरकारी अस्पताल और शैक्षिक संस्थान।
प्रोत्साहन
- स्टार्टअप के लिए ₹5 लाख तक की वित्तीय सहायता (₹2 लाख फ़र्नीचर + ₹3 लाख परिचालन लागत — पूर्व ₹2.5 लाख से वृद्धि)।
- उत्तर-पूर्वी राज्यों, जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में — अतिरिक्त प्रोत्साहन।
- MRP पर 20% मार्जिन।
- मासिक प्रोत्साहन: ₹15,000 तक की मासिक बिक्री पर 15%।
सार्वजनिक स्वास्थ्य लक्ष्यों से जुड़ाव
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के संरचनात्मक लक्ष्य OOPE को कम करता है।
- दवा-पहुँच सुधार कर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का समर्थन।
- आयुष्मान भारत PMJAY का पूरक — अस्पताल भर्ती + किफ़ायती बाह्य-रोगी दवाइयाँ।
- SDG 3.8 — UHC और आवश्यक दवाइयों तक पहुँच — का समर्थन।
चुनौतियाँ
स्टॉक की अनुपलब्धता
- आपूर्ति श्रृंखला व्यवधान — विशेषकर ऑन्कोलॉजी और दुर्लभ-रोग दवाइयों के लिए।
- कुछ केंद्रों में बार-बार कमी।
चिकित्सकों की लिखावट की आदतें
- चिकित्सक प्रायः ब्रांडेड दवाइयाँ लिखते हैं।
- राज्यों में जेनेरिक-नुस्खा नीतियाँ असमान हैं।
- राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने अगस्त 2023 में चिकित्सकों को जेनेरिक नुस्खा अनिवार्य करने का दिशानिर्देश जारी किया; पेशेवर विरोध के बाद इसे रोक दिया गया।
उपभोक्ता विश्वास
- निरंतर यह धारणा कि जेनेरिक "निम्न गुणवत्ता" की हैं।
- सुदृढ़ जागरूकता अभियानों की आवश्यकता।
वितरण
- टियर-III शहर और ग्रामीण क्षेत्र — पहुँच विस्तार में, परंतु असमान।
- दूरस्थ ज़िलों में अंतिम-मील उपलब्धता सीमित।
गुणवत्ता धारणा
- कभी-कभार गुणवत्ता-नियंत्रण की त्रुटियाँ समग्र विश्वास को आघात पहुँचाती हैं।
- बैच परीक्षण पर अधिक पारदर्शिता आवश्यक।
नियामक समन्वय
- CDSCO, राज्य औषधि नियंत्रकों और निजी फ़ार्मेसियों के साथ समन्वय आवश्यक।
हालिया सुधार
- बजट 2024-25 — 2026 तक 25,000 JAK का विस्तार लक्ष्य।
- डिजिटल एकीकरण — इन्वेंट्री और आपूर्ति श्रृंखला हेतु e-Aushadhi पोर्टल।
- PMBI पुनर्गठन — विस्तार के लिए अधिक परिचालन स्वायत्तता।
- विस्तारित उत्पाद टोकरी — अधिक ऑन्कोलॉजी और दीर्घकालिक रोग की दवाइयाँ।
समान योजनाओं से तुलना
- तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन (TNMSC) — सार्वजनिक क्षेत्र में दवा खरीद और वितरण।
- अम्मा मरुंथगम, जनता बाज़ार — राज्य-स्तरीय जेनेरिक स्टोर।
- AIIMS और ESIC फ़ार्मेसियाँ — संस्थान-आधारित जेनेरिक आपूर्ति।
PMBJP इन राज्य और संस्थागत नेटवर्कों का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि पूरक है।
PMBJP बनाम ब्रांडेड बाज़ार: तुलनात्मक झलक
| आयाम | ब्रांडेड बाज़ार | PMBJP जेनेरिक |
|---|---|---|
| मूल्य (मेटफ़ॉर्मिन 30 गोलियाँ) | ~₹110 | ~₹15-20 |
| सक्रिय औषधीय घटक | समान | समान |
| निर्माण मानक | WHO-GMP | WHO-GMP |
| विपणन व्यय | उच्च (मूल्य का 30-40%) | नगण्य |
| उपलब्धता | हर मेडिकल स्टोर | केवल JAK में |
| नुस्खा | ब्रांड-नाम सामान्य | जेनेरिक-नाम आवश्यक |
नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)
विस्तार लक्ष्य। बजट 2024-25 में 2026 तक 25,000 JAK की पुष्टि।
सुविधा बिक्री। 2024 के अंत तक 55 करोड़ से अधिक पैड बिके।
उत्पाद टोकरी का विस्तार। ऑन्कोलॉजी दवाइयों का विस्तार जिससे और अधिक जीवनरक्षक दवाइयाँ कवर हों।
NMC जेनेरिक नुस्खा दिशानिर्देश। अगस्त 2023 का जेनेरिक नुस्खा अनिवार्य करने वाला नियमन विरोध के बाद रोका गया; संशोधनों पर चर्चा जारी।
डिजिटल e-Aushadhi। JAKs में रियल-टाइम इन्वेंट्री ट्रैकिंग।
आयुष्मान वय वंदना (2024)। PMJAY को वरिष्ठ नागरिकों तक विस्तारित — दीर्घकालिक दवाओं पर OOPE घटाने में PMBJP का पूरक।
जाति जनगणना 2025। केंद्रीय कैबिनेट ने अगली राष्ट्रीय जनगणना (अप्रैल 2025) में जातीय गणना को मंज़ूरी दी; स्वास्थ्य-वहनीयता आँकड़े नवीनीकृत होंगे।
MPI 2024। वैश्विक बहुआयामी ग़रीबी सूचकांक 2024 ने पुष्टि की कि 2005-06 और 2019-21 के बीच 41.5 करोड़ भारतीय बहुआयामी ग़रीबी से बाहर निकले; निरंतर ग़रीबी-निकास में स्वास्थ्य-वहनीयता एक प्रमुख कारक है।
महिला आरक्षण अधिनियम। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 — परिसीमन के बाद महिला स्वास्थ्य और मासिक धर्म स्वच्छता पर विधायी ध्यान बढ़ने की संभावना।
वैश्विक लैंगिक अंतराल सूचकांक 2024। भारत 146 में 129वें स्थान पर; किफ़ायती मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद और प्रजनन स्वास्थ्य दवाइयाँ लैंगिक समता एजेंडे का हिस्सा।
नीतिगत सिफ़ारिशें
- चिकित्सक नुस्खा नीति — सार्वजनिक संस्थानों में जेनेरिक नुस्खा अनिवार्य।
- आपूर्ति श्रृंखला सुदृढ़ीकरण — स्टॉक-कमी के लिए बफ़र भंडार।
- गुणवत्ता नियंत्रण पारदर्शिता — बैच परीक्षण का सार्वजनिक डैशबोर्ड।
- जागरूकता अभियान — धारणा-अंतराल को संबोधित करना।
- अस्पताल एकीकरण — ज़िला अस्पताल, चिकित्सा महाविद्यालय, PHC में स्थल पर JAK।
- बीमा कवरेज — PMBJP खरीद को स्वास्थ्य बीमा प्रतिपूर्ति से जोड़ना।
- ई-फ़ार्मेसी नियम — JAK से होम डिलीवरी सक्षम करना।
- NGO और CSR साझेदारियाँ — सामुदायिक-स्तरीय विस्तार।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS पेपर II — शासन, सामाजिक न्याय
- सामाजिक क्षेत्र / सेवाओं — स्वास्थ्य — के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
- कमज़ोर वर्गों के लिए कल्याण योजनाएँ।
GS पेपर III — अर्थव्यवस्था
- फ़ार्मा क्षेत्र; IPR; दवा मूल्य-निर्धारण।
संभावित मेन्स प्रश्न
- "PMBJP जेब-से-होने वाले स्वास्थ्य व्यय पर एक संरचनात्मक हस्तक्षेप है। इसके रचना और प्रदर्शन की समीक्षा कीजिए।" (250 शब्द)
- "वैज्ञानिक समकक्षता के बावजूद जेनेरिक दवाइयाँ कलंक का सामना करती हैं। कारण और उपायों की चर्चा कीजिए।" (150 शब्द)
- "PMBJP और आयुष्मान भारत PMJAY UHC के पूरक उपकरण हैं। मूल्यांकन कीजिए।" (150 शब्द)
प्रीलिम्स बिंदु। PMBJP (पुनः-आरंभ 2015-16); पूर्व जन औषधि योजना (2008); PMBI — फार्मास्युटिकल्स एवं चिकित्सा उपकरण ब्यूरो ऑफ़ इंडिया; फार्मास्युटिकल्स विभाग, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय; 12,500+ JAK (2024 अंत); लक्ष्य 2026 तक 25,000; सुविधा सैनिटरी नैपकिन (₹1/पैड, 2018); e-Aushadhi पोर्टल; NMC जेनेरिक नुस्खा दिशानिर्देश (अगस्त 2023 — रोके गए); SDG 3.8।
निबंध-कोण। "ग़रीबी के बिना दवा"; "जेनेरिक भी दवा है"; "वहनीयता और पहुँच"।
PMBJP एक फ़ार्मेसी नेटवर्क के वेश में संरचनात्मक सुधार है। अगले तीन वर्षों में इसका विस्तार विपत्तिजनक स्वास्थ्य व्यय को कम करने का भारत के पास सबसे प्रत्यक्ष लीवरों में से एक है।
सामान्य प्रश्न
PMBJP क्या है?
प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) एक केंद्रीय योजना है जो जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाइयाँ ब्रांडेड समकक्षों की क़ीमत के 50-80% कम पर उपलब्ध कराती है। यह 2008 की जन औषधि योजना का 2015-16 में पुनर्गठित रूप है।
जन औषधि केंद्र (JAK) क्या होते हैं?
JAK वे फ़ार्मेसियाँ हैं जो PMBI द्वारा खरीदी गई जेनेरिक दवाइयाँ बेचती हैं। 2024 के अंत तक देश में 12,500 से अधिक JAK क्रियाशील हैं और 2026 तक 25,000 का लक्ष्य है। हर ज़िले के हर ब्लॉक में कम-से-कम एक केंद्र खोलने का लक्ष्य है।
क्या जेनेरिक दवाइयाँ ब्रांडेड दवाइयों जितनी प्रभावी होती हैं?
हाँ। PMBJP की दवाइयाँ WHO-GMP प्रमाणित निर्माताओं से खरीदी जाती हैं और NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में परीक्षण होता है। इनमें वही सक्रिय औषधीय घटक (API), वही जैव-उपलब्धता और वही प्रभावकारिता होती है जो ब्रांडेड दवाइयों में होती है।
PMBJP की क़ीमतें इतनी कम कैसे होती हैं?
क़ीमतें ब्रांडेड समकक्षों से 50-80% कम होती हैं क्योंकि विपणन, ब्रांडिंग और वितरक मार्जिन की लागत न्यूनतम होती है। PMBI सीधे थोक में खरीद करता है, जिससे पैमाने की मितव्ययिता मिलती है।
सुविधा सैनिटरी नैपकिन क्या है?
सुविधा PMBJP की पहल है जो ऑक्सो-जैव-निम्नीकरण योग्य सैनिटरी नैपकिन ₹1 प्रति पैड पर उपलब्ध कराती है। 2018 में आरंभ हुई इस योजना के तहत 2024 तक 55 करोड़ से अधिक पैड बिक चुके हैं।
PMBJP और आयुष्मान भारत PMJAY में क्या अंतर है?
PMJAY अस्पताल भर्ती के लिए ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज देता है। PMBJP बाह्य-रोगी (OPD) दवाइयों की लागत घटाता है। दोनों मिलकर सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज का संरचनात्मक ढाँचा बनाते हैं।
कोई व्यक्ति जन औषधि केंद्र कैसे खोल सकता है?
D.Pharma या B.Pharma योग्यता वाला व्यक्ति, NGO/न्यास/सहकारी समिति, या सरकारी अस्पताल JAK खोल सकते हैं। ₹5 लाख तक की वित्तीय सहायता, MRP पर 20% मार्जिन और मासिक प्रोत्साहन मिलते हैं। उत्तर-पूर्वी, जनजातीय और पहाड़ी क्षेत्रों में अतिरिक्त प्रोत्साहन हैं।
PMBJP की मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?
आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान (विशेषकर ऑन्कोलॉजी और दुर्लभ-रोग दवाइयों के लिए), चिकित्सकों द्वारा ब्रांडेड दवाइयों की लिखावट, उपभोक्ता धारणा कि जेनेरिक "निम्न गुणवत्ता" की हैं, टियर-III शहरों में असमान पहुँच, और कभी-कभार गुणवत्ता-नियंत्रण की त्रुटियाँ।
NMC के जेनेरिक नुस्खा दिशानिर्देश का क्या हुआ?
अगस्त 2023 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने चिकित्सकों को जेनेरिक नुस्खा अनिवार्य करने का दिशानिर्देश जारी किया था, परंतु पेशेवर संगठनों (विशेषकर IMA) के विरोध के बाद इसे रोक दिया गया। संशोधित रूप पर चर्चा जारी है।
PMBJP का यूपीएससी पाठ्यक्रम में क्या स्थान है?
यह GS-II के अंतर्गत स्वास्थ्य से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं और GS-III के अंतर्गत फ़ार्मा क्षेत्र, IPR और मूल्य-निर्धारण के विषयों में आता है। निबंध पत्र में "स्वास्थ्य की वहनीयता", "जेनेरिक बनाम ब्रांडेड" जैसे विषय आ सकते हैं। SDG 3.8 (UHC) के क्रियान्वयन का यह प्रमुख उपकरण है।