UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना निगम (NJIC) — प्रस्ताव, आवश्यकता और यूपीएससी नोट्स

NJIC भारत की न्यायिक अवसंरचना को केंद्रीय वित्तपोषण और योजना देने का प्रस्ताव है। अदालत का बैकलॉग, NJIC की भूमिका और यूपीएससी राजव्यवस्था संदर्भ।

National Judicial Infrastructure Corporation (NJIC) — Proposal, Need & UPSC Notes — UPSC featured image

राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना निगम (National Judicial Infrastructure Corporation — NJIC) भारत की न्यायपालिका की भौतिक और तकनीकी अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए प्रस्तावित एक स्वायत्त निकाय है। यह सुप्रीम कोर्ट की पहल है और यूपीएससी GS-II के लिए महत्वपूर्ण विषय है।

NJIC की आवश्यकता क्यों?

न्यायिक लंबितता का संकट

  • सभी स्तरों पर 5 करोड़+ मुकदमे लंबित (2024)।
  • जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में ~4.4 करोड़।
  • न्यायाधीश रिक्तियाँ: उच्च न्यायालयों में ~30%।

अवसंरचना की कमी

  • अनेक जिला न्यायालयों में जीर्ण-शीर्ण इमारतें।
  • पर्याप्त अदालत कक्षों का अभाव।
  • डिजिटलीकरण असमान।

NJIC का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन CJI एन.वी. रमण ने 2021 में NJIC का प्रस्ताव रखा। उद्देश्य:

  • न्यायिक अवसंरचना के लिए केंद्रीकृत वित्तपोषण और योजना
  • राज्य सरकारों पर निर्भरता कम करना।
  • अदालत कक्ष, आवास, IT अवसंरचना का मानकीकृत निर्माण।
  • सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों और केंद्र सरकार की भागीदारी।

मौजूदा प्रयास

  • Centrally Sponsored Scheme for Development of Judiciary — अदालत भवनों के लिए।
  • eCourts Mission Mode Project — डिजिटलीकरण।
  • Fast Track Courts — POCSO और बलात्कार मामले।

NJIC की संरचना (प्रस्ताव)

  • सुप्रीम कोर्ट के CJI की अध्यक्षता।
  • केंद्र और राज्य सरकारों की भागीदारी।
  • स्वायत्त निगम के रूप में — राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त।

नवीनतम घटनाक्रम (2024-26)

  • NJIC अभी भी प्रस्ताव चरण में।
  • बजट 2024-25: न्यायिक अवसंरचना के लिए ₹1,000 करोड़।
  • Phase III eCourts — ₹7,210 करोड़; 2023-2027।
  • लंबित मामलों में कमी के लिए Mediation Act 2023

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • GS-II: न्यायपालिका, शासन, नागरिक चार्टर।
  • प्रारंभिक: 5 करोड़+ लंबित मुकदमे; eCourts Phase III।
  • मुख्य: “NJIC के माध्यम से न्यायिक सुधारों पर चर्चा करें।”

NJIC न केवल भौतिक अवसंरचना का प्रश्न है, बल्कि न्याय तक पहुँच और न्यायिक स्वतंत्रता का भी। इसे जल्द से जल्द स्थापित करना भारतीय न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता के लिए आवश्यक है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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