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RBI की स्थापना — इतिहास, कार्य, संरचना और गवर्नर

RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI Act 1934 के तहत हुई; 1949 में राष्ट्रीयकरण, मुख्यालय Mumbai, गवर्नर संजय मल्होत्रा, MPC व मुद्रास्फीति लक्ष्य 4±2% — पूर्ण UPSC नोट्स।

RBI की स्थापना — इतिहास, कार्य, संरचना और गवर्नर — UPSC Hindi notes

RBI (Reserve Bank of India) — हिंदी में भारतीय रिज़र्व बैंक — की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को RBI Act 1934 के अंतर्गत हुई थी। इसकी सिफारिश 1926 में हिल्टन यंग आयोग (Hilton Young Commission, औपचारिक नाम — Royal Commission on Indian Currency and Finance) ने की थी। शुरू में RBI एक निजी शेयरधारक (private shareholder) बैंक के रूप में काम करता था और इसका प्रारंभिक मुख्यालय कलकत्ता था। 1937 में मुख्यालय Mumbai (तब Bombay) स्थानांतरित हुआ, जहाँ आज भी यह स्थित है। 1 जनवरी 1949 को संसद ने Reserve Bank (Transfer to Public Ownership) Act 1948 पारित किया और RBI का राष्ट्रीयकरण (nationalisation) हुआ — तब से यह पूरी तरह केंद्र सरकार के स्वामित्व में है। 2026 में RBI के 26वें गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) हैं, जिन्होंने दिसंबर 2024 में शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das) से कार्यभार ग्रहण किया।

परिचय (Introduction)

RBI की स्थापना — इतिहास, कार्य, संरचना और गवर्नर — चित्र 1

किसी भी आधुनिक अर्थव्यवस्था का दिल उसका केंद्रीय बैंक (Central Bank) होता है। भारत में यह भूमिका RBI निभाता है — मुद्रा जारी करने वाला, मौद्रिक नीति बनाने वाला, बैंकों का पर्यवेक्षक, सरकार का बैंकर और विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक — एक ही संस्था में पाँच भूमिकाएँ।

स्वतंत्रता से पहले भारत में मुद्रा-व्यवस्था बिखरी हुई थी। पेपर करेंसी एक्ट 1861 के तहत नोट जारी करने का एकाधिकार ब्रिटिश सरकार के पास था; बैंकिंग का पर्यवेक्षण न के बराबर था। 1913 के Mehta-Chamberlain आयोग और फिर 1926 के हिल्टन यंग आयोग ने एक स्वतंत्र केंद्रीय बैंक की ज़रूरत बताई। नतीजतन RBI Act 1934 पारित हुआ और 1 अप्रैल 1935 को RBI शुरू हुआ।

आज RBI न सिर्फ़ रुपये की स्थिरता का गारंटर है, बल्कि वित्तीय समावेशन, डिजिटल भुगतान (UPI, e-rupee/CBDC), और मैक्रो-वित्तीय स्थिरता का भी संरक्षक है — यानी UPSC के लिए यह विषय Prelims और Mains GS-3 दोनों में लगातार प्रासंगिक रहता है।

मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)

  • पूर्ण नाम: Reserve Bank of India
  • हिंदी में: भारतीय रिज़र्व बैंक
  • स्थापना तिथि: 1 अप्रैल 1935
  • स्थापित अधिनियम: RBI Act 1934
  • सिफारिश: हिल्टन यंग आयोग (Hilton Young Commission), 1926
  • राष्ट्रीयकरण: 1 जनवरी 1949
  • मुख्यालय: Mumbai, महाराष्ट्र (1937 से; पहले Calcutta)
  • गवर्नर (2026): संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra), 26वें गवर्नर — Dec 2024 से
  • पूर्ववर्ती गवर्नर: शक्तिकांत दास (2018-2024), उर्जित पटेल, रघुराम राजन, डी. सुब्बाराव
  • प्रथम गवर्नर: Sir Osborne Smith (1935-37)
  • प्रथम भारतीय गवर्नर: सी. डी. देशमुख (C. D. Deshmukh, 1943-49)
  • डिप्टी गवर्नर: 4 (कानून के अनुसार)
  • मुद्रा-संकेत: ₹ (2010 में अपनाया गया, डिज़ाइनर डी. उदय कुमार)
  • मुद्रास्फीति लक्ष्य (Inflation Target): 4% (±2%) CPI — फ्लेक्सिबल इन्फ्लेशन टार्गेटिंग
  • MPC: Monetary Policy Committee — 6 सदस्य (3 RBI + 3 केंद्र-सरकार-नामित)
  • विदेशी मुद्रा भंडार (forex reserves) 2026: लगभग ~$700 अरब (US dollars)

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)

ब्रिटिश काल में भारत की मुद्रा प्रणाली अव्यवस्थित थी। 1773 के Regulating Act के बाद बंगाल, बंबई और मद्रास के Presidency Banks ने सीमित बैंकिंग कार्य किए। 1921 में इन तीनों को मिलाकर Imperial Bank of India बना, जिसने अल्पकाल के लिए केंद्रीय बैंक जैसी भूमिका निभाई — पर वह वाणिज्यिक बैंक भी था, इसलिए हितों का टकराव बना रहा।

1926 में हिल्टन यंग आयोग ने स्पष्ट सिफ़ारिश दी कि भारत को एक विशुद्ध केंद्रीय बैंक चाहिए जो वाणिज्यिक बैंकिंग न करे। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर Gold Standard and Reserve Bank of India Bill 1927 में संसद में रखा गया, पर असहमति के कारण यह 1933 तक लटका रहा। अंततः RBI Act 1934 पारित हुआ और 1 अप्रैल 1935 को RBI ने काम शुरू किया।

स्थापना के समय RBI एक निजी शेयरधारक बैंक था, जिसके शेयर मुख्यतः ब्रिटिश और भारतीय निजी पूंजीपतियों के पास थे। स्वतंत्रता के बाद इसे केंद्र सरकार के नियंत्रण में लाने की माँग उठी, और Reserve Bank (Transfer to Public Ownership) Act 1948 के तहत 1 जनवरी 1949 को RBI का राष्ट्रीयकरण हुआ। तब से इसके पूरे शेयर भारत सरकार के पास हैं और यह सरकार के स्वामित्व में, परंतु संचालन में स्वायत्त एक संस्था है।

RBI Act 1934 — प्रमुख प्रावधान (Key Provisions)

RBI की स्थापना — इतिहास, कार्य, संरचना और गवर्नर — चित्र 2

RBI Act 1934 RBI की संवैधानिक रीढ़ है। इसकी कुछ महत्वपूर्ण धाराएँ हैं:

  • धारा 3: RBI की स्थापना और निगमन (incorporation)
  • धारा 7: केंद्र सरकार जनहित में RBI को निर्देश दे सकती है (RBI की स्वायत्तता पर सबसे विवादित धारा)
  • धारा 17: RBI के व्यवसाय (banking, currency issue, securities trading)
  • धारा 22: बैंक नोट जारी करने का एकाधिकार (एक रुपये के नोट और सिक्के वित्त मंत्रालय जारी करता है)
  • धारा 24: ₹2, ₹5, ₹10, ₹20, ₹50, ₹100, ₹200, ₹500, ₹2,000 — नोट denominations
  • धारा 45ZB: MPC (Monetary Policy Committee) का गठन — 2016 के संशोधन से जोड़ा गया
  • धारा 58: RBI को नियम बनाने की शक्ति

इसके साथ ही Banking Regulation Act 1949, FEMA 1999 और Payment and Settlement Systems Act 2007 RBI के क्रियात्मक अधिकारों का विस्तार करते हैं।

RBI की संगठनात्मक संरचना (Organisational Structure)

RBI का शीर्ष निकाय केंद्रीय बोर्ड (Central Board of Directors) है, जिसकी नियुक्ति केंद्र सरकार धारा 8 के तहत 4 साल की अवधि के लिए करती है।

पदसंख्याविवरण
गवर्नर1अधिकतम 5 साल का कार्यकाल
डिप्टी गवर्नर4प्रत्येक एक प्रमुख कार्यक्षेत्र देखते हैं
सरकारी नामित निदेशक2वित्त मंत्रालय से
गैर-सरकारी निदेशक10विभिन्न क्षेत्रों से
क्षेत्रीय बोर्ड के नामित निदेशक4Mumbai, Calcutta, Chennai, New Delhi

इसके अलावा 4 स्थानीय बोर्ड (Local Boards) — Mumbai (पश्चिम), Kolkata (पूर्व), Chennai (दक्षिण), New Delhi (उत्तर) — हैं, जो क्षेत्रीय मुद्दों पर सलाह देते हैं।

RBI के 27 क्षेत्रीय कार्यालय और 4 उप-कार्यालय हैं। इसके प्रमुख विभाग (departments) हैं — मौद्रिक नीति विभाग (Monetary Policy Department), वित्तीय बाज़ार संचालन विभाग (FMOD), बैंकिंग विनियमन विभाग (DBR), विदेशी मुद्रा विभाग (FED), मुद्रा प्रबंधन विभाग (DCM), और भुगतान एवं निपटान प्रणाली विभाग (DPSS)।

RBI के मुख्य कार्य (Key Functions of RBI)

RBI के कार्यों को मोटे तौर पर सात श्रेणियों में बाँटा जा सकता है:

  1. मुद्रा जारी करना (Issuer of Currency): धारा 22 के तहत भारत में ₹2 और उससे ऊपर के सभी बैंक नोट केवल RBI जारी करता है। एक रुपये का नोट और सिक्के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) जारी करता है, पर वितरण RBI ही करता है।
  1. मौद्रिक नीति का संचालन (Monetary Policy): मुद्रास्फीति, ब्याज दर और मुद्रा-आपूर्ति का प्रबंधन MPC के माध्यम से। मुख्य उपकरण — रेपो दर (Repo Rate), रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate), CRR, SLR, OMO, MSF।
  1. सरकार का बैंकर (Banker to Government): केंद्र और राज्य सरकारों के लिए खाते रखना, ऋण प्रबंधन (G-Sec auctions), Ways and Means Advances।
  1. बैंकों का बैंकर (Banker to Banks): अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) के लिए CRR खाता, अंतर-बैंक निपटान, और अंतिम ऋणदाता (Lender of Last Resort) की भूमिका।
  1. बैंकिंग विनियमन (Banking Regulation): Banking Regulation Act 1949 के तहत बैंकों के लाइसेंस, पूंजी पर्याप्तता (Basel III), संपत्ति वर्गीकरण (NPA norms) और शासन।
  1. विदेशी मुद्रा प्रबंधन (Forex Management): FEMA 1999 के तहत विदेशी मुद्रा भंडार का प्रबंधन, रुपये की विनिमय दर की स्थिरता, बाज़ार में हस्तक्षेप।
  1. विकासात्मक भूमिका (Developmental Role): प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL), वित्तीय समावेशन, RRBs/NBFCs/co-operative banks का पर्यवेक्षण, और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा (UPI, RuPay, BBPS, e-rupee/CBDC)।

मौद्रिक नीति समिति (Monetary Policy Committee)

MPC (Monetary Policy Committee) की स्थापना 2016 में Finance Act के संशोधन से RBI Act 1934 की धारा 45ZB के तहत हुई।

  • सदस्य संख्या: 6
  • RBI से: गवर्नर (Chairperson), मौद्रिक नीति प्रभारी डिप्टी गवर्नर, और एक RBI अधिकारी
  • केंद्र-सरकार-नामित: 3 बाहरी विशेषज्ञ (4 साल का कार्यकाल)
  • बैठक: वर्ष में कम-से-कम 6 बार (आमतौर पर हर 2 महीने)
  • निर्णय: बहुमत से; टाई होने पर गवर्नर का casting vote
  • लक्ष्य: CPI मुद्रास्फीति 4% (±2%) — Flexible Inflation Targeting (FIT) frameworks

MPC ही रेपो दर (Repo Rate) तय करती है, जो भारत की संदर्भ ब्याज दर है। 2026 की शुरुआत में रेपो दर लगभग 5.5–6.5% के दायरे में है।

यह विषय भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण की चुनौतियाँ से सीधे जुड़ा है।

RBI के प्रमुख गवर्नर — चयनित सूची

क्रमगवर्नरकार्यकालविशेष पहचान
1Osborne Smith1935-1937प्रथम गवर्नर (ब्रिटिश)
4C. D. Deshmukh1943-1949प्रथम भारतीय गवर्नर; राष्ट्रीयकरण की अगुवाई
8L. K. Jha1967-1970बैंक राष्ट्रीयकरण 1969
14Y. V. Reddy2003-2008Subprime crisis से बचाव की प्रशंसा
22रघुराम राजन (Raghuram Rajan)2013-2016Inflation Targeting framework, AQR
24उर्जित पटेल (Urjit Patel)2016-2018विमुद्रीकरण (demonetisation) काल
25शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das)2018-2024COVID-19 राहत, e-rupee पायलट
26संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra)Dec 2024-वर्तमानपूर्व राजस्व सचिव; FY26-27 की दर-नीति

मौद्रिक नीति के प्रमुख उपकरण (Tools of Monetary Policy)

  • रेपो दर (Repo Rate): वह दर जिस पर RBI बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है
  • रिवर्स रेपो दर (Reverse Repo Rate): वह दर जिस पर RBI बैंकों से धन उधार लेता है
  • CRR (Cash Reserve Ratio): बैंक की कुल जमा का वह प्रतिशत जो RBI के पास नकद रूप में रखना अनिवार्य है
  • SLR (Statutory Liquidity Ratio): जो हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियों, सोने में रखना अनिवार्य है
  • OMO (Open Market Operations): सरकारी बॉन्ड की खुले बाज़ार में खरीद/बिक्री
  • MSF (Marginal Standing Facility): आपातकालीन उच्च-दर ऋण व्यवस्था
  • LAF (Liquidity Adjustment Facility): दैनिक तरलता प्रबंधन का ढाँचा

RBI और डिजिटल भुगतान — 2026 का परिदृश्य

RBI ने पिछले एक दशक में डिजिटल भुगतान का परिदृश्य बदल दिया है:

  • UPI (Unified Payments Interface): NPCI द्वारा 2016 में शुरू, RBI के निरीक्षण में — 2026 में मासिक 17 अरब+ लेनदेन
  • e-rupee / CBDC: Central Bank Digital Currency का खुदरा (e₹-R) और थोक (e₹-W) पायलट दिसंबर 2022 में शुरू; 2026 में विस्तारित परीक्षण
  • BBPS, NEFT, RTGS, IMPS: 24×7 कार्यरत
  • Digital Lending Guidelines 2022: First Loss Default Guarantee (FLDG) और customer-protection ढाँचा

विस्तृत जानकारी के लिए देखें — केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) e-rupee — RBI और UPSC

RBI vs अन्य नियामक (Regulatory Landscape)

पहलूRBISEBIIRDAIPFRDA
क्षेत्रबैंकिंग, मौद्रिक नीतिप्रतिभूति बाज़ारबीमापेंशन
अधिनियमRBI Act 1934SEBI Act 1992IRDA Act 1999PFRDA Act 2013
मुख्यालयMumbaiMumbai (BKC)HyderabadNew Delhi
संरचनाकेंद्रीय बैंकसांविधिक बोर्डसांविधिक प्राधिकरणसांविधिक प्राधिकरण

संबंधित गहन विवरण — भारत में स्वतंत्र नियामक संस्थाएँ — RBI, SEBI, TRAI।

चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)

  • स्वायत्तता बनाम जवाबदेही: धारा 7 के तहत सरकार के निर्देश का अधिकार — 2018 में पटेल-सरकार विवाद का केंद्र
  • NPA संकट: 2015 के AQR के बाद PSBs में NPAs तेज़ी से उभरे; ऋण-वसूली अब भी एक बड़ी चुनौती
  • Inflation Targeting की सीमाएँ: आपूर्ति-जनित (खाद्य, ईंधन) महंगाई पर मौद्रिक नीति का सीमित असर
  • NBFC संकट: IL&FS (2018), DHFL — पर्यवेक्षण के अंतर पर सवाल
  • डिजिटल मुद्रा-धोखाधड़ी: क्रिप्टो-संदेहास्पद दृष्टिकोण और CBDC अपनाने की धीमी रफ़्तार
  • जलवायु जोखिम: हरित वित्त (green finance) के लिए स्पष्ट ढाँचे का अभाव

UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)

  • Prelims: स्थापना तिथि (1 अप्रैल 1935), RBI Act 1934, हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश, राष्ट्रीयकरण 1949, MPC संरचना, धारा 7 का प्रावधान, मुद्रास्फीति लक्ष्य 4±2%, प्रथम भारतीय गवर्नर C. D. Deshmukh, गवर्नर का अधिकतम कार्यकाल 5 वर्ष।
  • Mains GS-3: मौद्रिक नीति बनाम राजकोषीय नीति समन्वय; RBI की स्वायत्तता; NPA समाधान और bad bank (NARCL); CBDC के मैक्रो-प्रभाव; UPI और वित्तीय समावेशन।
  • Mains GS-2: सांविधिक बनाम कार्यकारी निकाय की बहस; नियामक स्वतंत्रता; सरकार-RBI संबंध।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)

  1. RBI Act 1934 की धारा 7 के संदर्भ में केंद्र सरकार और RBI के बीच स्वायत्तता-जवाबदेही के संतुलन पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द)
  2. “Flexible Inflation Targeting का ढाँचा भारत के लिए मिश्रित रहा है।” 2016 के बाद के अनुभव के आलोक में MPC की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए। (250 शब्द)
  3. केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) के लाभ और जोखिम क्या हैं? भारत के e-rupee अनुभव के संदर्भ में लिखिए। (250 शब्द)

निष्कर्ष (Conclusion)

90 वर्षों की यात्रा में RBI ने केवल एक मुद्रा-प्राधिकरण से कहीं आगे बढ़कर भारत की मैक्रो-वित्तीय स्थिरता का स्तंभ रच लिया है। 1935 में हिल्टन यंग आयोग की मामूली सिफ़ारिश से उठकर 2026 में लगभग $700 अरब के विदेशी मुद्रा भंडार, MPC आधारित inflation targeting, और दुनिया के सबसे तेज़ डिजिटल भुगतान ढाँचे (UPI) का संरक्षक बनना — यह एक संस्थागत परिपक्वता है। आगे की चुनौतियाँ साफ़ हैं — आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति, NBFC-शैडो-बैंकिंग, क्रिप्टो-नियमन, हरित वित्त, और CBDC का जन-स्वीकार्य रूप। UPSC उम्मीदवारों के लिए RBI एक “single-topic, multi-paper” विषय है — यह Prelims के factual प्रश्न और Mains के विश्लेषणात्मक प्रश्न दोनों में समान रूप से लौटता है, इसलिए स्थापना, संरचना, MPC ढाँचा, और हालिया नीतिगत बदलावों — चारों स्तर तैयार रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

RBI की स्थापना कब हुई थी?

RBI की स्थापना 1 अप्रैल 1935 को हुई थी, RBI Act 1934 के अंतर्गत। यह सिफ़ारिश 1926 के हिल्टन यंग आयोग ने दी थी।

RBI का मुख्यालय कहाँ है?

RBI का मुख्यालय Mumbai (मुंबई), महाराष्ट्र में है। 1935 में जब RBI की स्थापना हुई तब इसका मुख्यालय Calcutta था; 1937 में स्थायी रूप से Mumbai में स्थानांतरित किया गया।

RBI का राष्ट्रीयकरण कब हुआ?

RBI का राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ। Reserve Bank (Transfer to Public Ownership) Act 1948 के तहत निजी शेयरधारकों के सभी शेयर भारत सरकार को हस्तांतरित कर दिए गए।

RBI के वर्तमान गवर्नर कौन हैं?

2026 में RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) हैं — वह 26वें गवर्नर हैं और दिसंबर 2024 में शक्तिकांत दास के बाद कार्यभार संभाला। उनका पिछला पद केंद्र सरकार में राजस्व सचिव (Revenue Secretary) था।

RBI का प्रथम गवर्नर कौन था?

RBI के प्रथम गवर्नर Sir Osborne Smith थे, जिनका कार्यकाल 1935 से 1937 तक रहा। प्रथम भारतीय गवर्नर सी. डी. देशमुख (C. D. Deshmukh) थे (1943-49) — उन्होंने राष्ट्रीयकरण की अगुवाई की।

MPC में कितने सदस्य होते हैं?

Monetary Policy Committee (MPC) में 6 सदस्य होते हैं — 3 RBI से (गवर्नर अध्यक्ष, मौद्रिक नीति डिप्टी गवर्नर, और एक RBI अधिकारी) और 3 केंद्र सरकार द्वारा नामित बाहरी विशेषज्ञ। टाई होने पर गवर्नर का casting vote होता है।

भारत में मुद्रास्फीति लक्ष्य क्या है?

RBI Act की धारा 45ZA के तहत केंद्र सरकार ने मुद्रास्फीति लक्ष्य CPI 4% (±2% सहन-सीमा) तय किया है — यानी 2% से 6% के बीच। यह “Flexible Inflation Targeting” ढाँचे के तहत हर 5 साल पर समीक्षा किया जाता है।

एक रुपये का नोट कौन जारी करता है?

एक रुपये का नोट और सभी सिक्के वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) जारी करता है, जिस पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर होते हैं। ₹2 और उससे ऊपर के नोट RBI जारी करता है (RBI Act की धारा 22)। हालाँकि वितरण सभी का RBI ही करता है।

RBI सरकार से कितना स्वतंत्र है?

RBI संचालन (operations) में स्वायत्त है, परंतु RBI Act की धारा 7 के तहत केंद्र सरकार जनहित में निर्देश दे सकती है — यह स्वायत्तता-जवाबदेही का संतुलन-बिंदु है। मौद्रिक नीति निर्णय MPC लेती है, जो स्वतंत्र निकाय है।

RBI और SEBI में क्या अंतर है?

RBI बैंकिंग और मौद्रिक नीति का नियामक है, जबकि SEBI प्रतिभूति बाज़ार (शेयर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड) का। RBI का अधिनियम 1934 का है, SEBI को 1992 में सांविधिक दर्जा मिला। दोनों के मुख्यालय Mumbai में हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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