UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

संसद का इतिहास: बदलती गतिशीलता का दर्पण (UPSC राजव्यवस्था)

भारतीय संसद के इतिहास और बदलती कार्यप्रणाली पर UPSC गाइड: प्रथम संसद से नई संसद तक, बजट सत्र, प्रश्नकाल, व्यवधान और विधायी दक्षता।

Parliament's Past: A Mirror to Changing Dynamics (UPSC Polity) — UPSC featured image

भारत की संसद — लोकसभा और राज्यसभा — जनता की आकांक्षाओं, राष्ट्रीय बहसों और राजनीतिक परिवर्तनों का जीवंत दर्पण है। 1952 में प्रथम लोकसभा के गठन से लेकर 2023 में नई संसद भवन के उद्घाटन तक, भारतीय संसद की यात्रा देश की लोकतांत्रिक परिपक्वता की कहानी कहती है।

प्रारंभिक वर्ष: गठनकारी काल (1952-1967)

पहली लोकसभा (1952-57) के दौर में संसद में विस्तृत और गहन बहसें हुईं। संविधान सभा के कई दिग्गज — नेहरू, पटेल, डॉ. आंबेडकर — संसद के पहले सदस्य भी थे। इस काल की विशेषताएँ थीं: लंबे प्रश्नकाल, विस्तृत समिति चर्चाएँ, और बिना व्यवधान के विधायी कार्य।

संसद की उत्पादकता का मापन

लोकसभाऔसत बैठक दिन/वर्षउत्पादकता (%)
1वीं-3वीं (1952-67)~130 दिनउच्च
4वीं-7वीं (1967-84)~100 दिनमध्यम
10वीं-14वीं (1991-2009)~70 दिनघटती
15वीं-17वीं (2009-24)~55-60 दिनअत्यंत परिवर्तनशील

महत्त्वपूर्ण बदलाव और प्रवृत्तियाँ

व्यवधान की बढ़ती समस्या

1990 के दशक से संसद में व्यवधान (disruptions) एक संस्थागत समस्या बन गए हैं। PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार 17वीं लोकसभा (2019-24) की उत्पादकता अनेक सत्रों में 50% से भी नीचे रही।

प्रश्नकाल का क्षरण

प्रश्नकाल — जो सरकार की जवाबदेही का सबसे प्रभावी उपकरण है — व्यवधानों में अक्सर बाधित हो जाता है। तारांकित प्रश्नों की संख्या और गुणवत्ता दोनों में गिरावट आई है।

संसदीय समितियों का महत्त्व

संसदीय स्थायी समितियाँ (Parliamentary Standing Committees) विधायी गुणवत्ता की रक्षक हैं। हालाँकि हाल के वर्षों में विधेयकों को समितियों के पास भेजे बिना पारित करने की प्रवृत्ति बढ़ी है।

नई संसद भवन (2023)

मई 2023 में नए संसद भवन का उद्घाटन एक ऐतिहासिक क्षण था। त्रिकोणीय आकार वाली इस इमारत में लोकसभा के लिए 888 और राज्यसभा के लिए 384 सीटें हैं।

सुधार की आवश्यकता

  • संसद के सत्रों की न्यूनतम संख्या निर्धारित करना।
  • विधेयकों को समितियों के पास अनिवार्य रूप से भेजना।
  • व्यवधान के लिए दंड-व्यवस्था।
  • प्रश्नकाल को पूर्ण मानसून सत्र में बहाल करना।
  • लाइव स्ट्रीमिंग और डिजिटल नागरिक भागीदारी।

UPSC के लिए प्रासंगिकता

GS II में संसद की कार्यप्रणाली, विधायी प्रक्रिया, संसदीय समितियाँ और सुधार — ये सभी UPSC के प्रमुख विषय हैं। विधेयकों की संख्या, सत्र की अवधि और व्यवधान के आँकड़े प्रारंभिक परीक्षा में भी आते हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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