भारत के बाह्य क्षेत्र में 2024-26 में विश्वास को मज़बूत करने वाले दो बड़े आधार हैं: जेपी मॉर्गन GBI-EM और ब्लूमबर्ग EM लोकल करेंसी इंडेक्स जैसे वैश्विक सूचकांकों में भारतीय सरकारी बॉन्डों का समावेश, और सेवा निर्यात में रिकॉर्ड बढ़त, जो अब कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के विनिर्माण निर्यात के बराबर पहुँच रही है। दोनों प्रकृति में संरचनात्मक हैं और दोनों ही कुछ सूक्ष्म जोखिम भी साथ लाते हैं। यह मार्गदर्शिका इन दोनों को खोलकर व्यापक समष्टि-आर्थिक कथा से जोड़ती है।
भाग 1: वैश्विक सूचकांकों में भारतीय सरकारी बॉन्ड
पृष्ठभूमि
वैश्विक बॉन्ड सूचकांक वे मानक पोर्टफोलियो हैं जिनका अनुसरण निष्क्रिय (passive) और सक्रिय विदेशी निवेशक करते हैं। किसी देश के बॉन्डों का ऐसे सूचकांक में समावेश, सूचकांक-आधारित निधियों के खरबों डॉलर से स्वत: आवंटन लेकर आता है। कराधान, अभिरक्षा (custody) और निपटान पर वर्षों की बातचीत के बाद भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
- जेपी मॉर्गन GBI-EM ग्लोबल डाइवर्सिफाइड इंडेक्स — समावेश 28 जून 2024 से शुरू, 10 महीनों में भार बढ़ाकर 31 मार्च 2025 तक 10% की अधिकतम सीमा तक।
- ब्लूमबर्ग EM लोकल करेंसी गवर्नमेंट इंडेक्स — समावेश 31 जनवरी 2025 से।
- FTSE रसेल इमर्जिंग मार्केट्स गवर्नमेंट बॉन्ड इंडेक्स (EMGBI) — भारत को निगरानी-सूची (watchlist) में रखा गया; पूर्ण समावेश 2025-26 में अपेक्षित।
- पूर्णतः सुलभ मार्ग (Fully Accessible Route — FAR) के तहत पात्र भारतीय सरकारी बॉन्ड ही इसमें शामिल हैं।
लाभ
- उधारी लागत में कमी — सरकारी प्रतिभूतियों (G-secs) की व्यापक माँग प्रतिफल (yield) को दबाती है, जिससे सरकार की ब्याज लागत घटती है।
- कम घरेलू ब्याज दरें — चूँकि बाज़ार दरें G-secs से जुड़ी होती हैं, इसका लाभ बैंकों और कंपनियों के लिए सस्ते ऋण के रूप में मिलता है।
- विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि — 10 महीनों में लगभग 25-30 अरब डॉलर के निष्क्रिय प्रवाह का अनुमान; भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2024 में 700 अरब डॉलर के पार पहुँचा।
- गहरा कॉर्पोरेट बॉन्ड बाज़ार — सरकार द्वारा घरेलू उधारी का स्थान छोड़ने से निजी निर्गमनकर्ताओं का क्राउडिंग आउट कम होता है।
- रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण — रुपये में अंकित परिसंपत्तियों पर भरोसा बढ़ाता है, जो व्यापार में रुपये में चालान (invoicing) की दिशा में एक कदम है।
संभावित जोखिम
- मुद्रा में सराहना (appreciation) — बड़े प्रवाह रुपये को मज़बूत कर सकते हैं, जिससे निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता घटती है।
- बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशीलता — यदि वैश्विक जोखिम-विमुख (risk-off) परिस्थितियाँ बाहरी निकासी प्रेरित करें, तो बॉन्ड प्रतिफल और रुपया दोनों अस्थिरता का सामना करेंगे।
- मौद्रिक नीति का त्रिलेम्मा — RBI को मुद्रा अस्थिरता, पूँजी प्रवाह और मुद्रास्फीति नियंत्रण को एक साथ संतुलित करना पड़ सकता है।
- राजकोषीय अनुशासन पर निर्भरता — एक भी रेटिंग डाउनग्रेड या राजकोषीय फिसलन सूचकांक में पुनः भारांकन को जन्म दे सकती है।
| सूचकांक | समावेश तिथि | अधिकतम भार |
|---|---|---|
| जेपी मॉर्गन GBI-EM GD | 28 जून 2024 | 10% (सीमा) |
| ब्लूमबर्ग EM LC | 31 जनवरी 2025 | ~9% अपेक्षित |
| FTSE रसेल EMGBI | निगरानी-सूची में | तय होना बाक़ी |
भाग 2: सेवा निर्यात
पृष्ठभूमि
भारत का सेवा निर्यात अब बाह्य खाते की सबसे मूल्यवान निधि बन चुका है। वित्त वर्ष 2023-24 में सेवा निर्यात 341 अरब डॉलर रहा; वित्त वर्ष 2024-25 के अनुमानों में यह 385 अरब डॉलर के पार चला गया, जो वस्तु व्यापार घाटे के एक बड़े हिस्से की भरपाई करता है। GATS के अंतर्गत सेवा वितरण के चार तरीक़े (modes):
- Mode 1 — सीमा-पार वितरण (जैसे, किसी विदेशी ग्राहक को IT-BPM सेवाएँ)।
- Mode 2 — विदेश में उपभोग (जैसे, चिकित्सा/शिक्षा पर्यटन)।
- Mode 3 — वाणिज्यिक उपस्थिति (जैसे, कोई भारतीय कंपनी विदेश में स्थापित)।
- Mode 4 — प्राकृतिक व्यक्तियों की आवाजाही (पेशेवरों का अस्थायी रूप से विदेश में कार्य करना)।
भारतीय सेवा निर्यात की संरचना
| खंड | सेवा निर्यात में अनुमानित हिस्सा |
|---|---|
| IT-BPM एवं सॉफ़्टवेयर | ~45-50% |
| व्यवसाय सेवाएँ (कंसल्टिंग, R&D, GCCs) | ~25% |
| यात्रा एवं परिवहन | ~15% |
| वित्तीय सेवाएँ | ~5% |
| अन्य सेवाएँ | शेष |
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCCs) — भारत में लगभग 1,700 केंद्र, जिनमें 1.9 मिलियन से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं — अब “अन्य व्यवसाय सेवाओं” के निर्यात में बढ़ता हिस्सा रखते हैं।
सेवा निर्यात की सीमाएँ
- सख़्त वीज़ा मानदंड — अमेरिका में H-1B की सीमाएँ, ब्रिटेन और EU में सेवा वीज़ा में देरी Mode 4 निर्यात को बाधित करती हैं।
- डेटा नियम — EU का GDPR और इसी तरह के सीमा-पार डेटा स्थानांतरण प्रतिबंध अनुपालन लागत बढ़ाते हैं।
- FTA में सेवाओं का कम समावेश — भारत के कई मुक्त व्यापार समझौते वस्तुओं पर शुल्क कटौती पर केंद्रित हैं; सेवाओं पर प्रतिबद्धताएँ कम रहती हैं।
- Mode 1 पर झुकाव — सीमा-पार IT सेवाओं पर अत्यधिक निर्भरता; Mode 2 (चिकित्सा पर्यटन) और Mode 4 की बाधाएँ क्षमता को अछूता छोड़ देती हैं।
- आयात पर निर्भरता — भारत सॉफ़्टवेयर उत्पादों का बड़ा उत्पादक नहीं है; Microsoft, Oracle, Adobe, SAP जैसी कंपनियों को रॉयल्टी भुगतान से आयात, रॉयल्टी और लाभ प्रत्यावर्तन के माध्यम से विदेशी मुद्रा का रिसाव होता है।
- कम रोज़गार लोच — सेवा निर्यात वृद्धि उत्पादकता-प्रेरित है, इसलिए रोज़गार उसी अनुपात में नहीं बढ़ते।
रणनीतियाँ
- द्विपक्षीय FTA में सेवाओं पर प्रतिबद्धताओं को आगे बढ़ाना — भारत-ब्रिटेन, भारत-EFTA, भारत-EU वार्ताएँ।
- डिजिटल सेवा कराधान — प्रतिस्पर्धी शर्तों को समान करना; भारत का equalisation levy (अब निरस्त/पुनर्संरचित) इसी दिशा में एक कदम था।
- घरेलू सॉफ़्टवेयर उत्पादों को बढ़ावा — IndiaAI मिशन और सेमीकंडक्टर/सॉफ़्टवेयर के लिए DLI योजना के माध्यम से।
- मेडिकल वैल्यू ट्रैवल — Heal in India अभियान को प्रोत्साहित करना; चिकित्सा वीज़ा को सरल बनाना।
- Mode 4 हेतु कौशल विकास — प्रशिक्षण को गंतव्य-देश की मान्यता से जोड़ना, विशेषकर नर्सिंग, स्वास्थ्य सेवा और आतिथ्य क्षेत्रों में।
हालिया घटनाक्रम (2024-26)
- सेवा व्यापार अधिशेष वित्त वर्ष 2024-25 में 170 अरब डॉलर से ऊपर अनुमानित, जो चालू खाते को सहारा दे रहा है।
- चालू खाता घाटा सेवा निर्यात और प्रेषण (remittances) के सहारे GDP के लगभग 0.7-1.0% तक नरम हुआ।
- प्रेषण — विश्व बैंक के अनुमान के अनुसार 2024 में भारत को 129 अरब डॉलर, जो विश्व में सर्वाधिक है।
- बजट 2025-26 में राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन की घोषणा और राज्य नीतियों के माध्यम से IT/GCC प्रोत्साहन जारी।
- रुपये में चालान हेतु RBI का ढाँचा विस्तारित; अब 21 देशों के साथ रुपये-आधारित व्यापार के लिए वोस्त्रो खाता व्यवस्थाएँ हैं।
- विदेशी मुद्रा भंडार 2024 में संक्षेप में 700 अरब डॉलर पार कर गया, जो विश्व में चौथा सबसे बड़ा है।
- जेपी मॉर्गन समावेश के एक वर्ष के भीतर G-secs में सूचकांक-प्रेरित प्रवाह 18 अरब डॉलर के पार।
- भारत-ब्रिटेन FTA (2025) में IT पेशेवरों के लिए सेवाओं और Mode 4 आवाजाही सहित एक उन्नत व्यापार साझेदारी शामिल।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS-III मैपिंग
- बाह्य क्षेत्र — BoP, CAD, FDI, FPI, भंडार।
- भारतीय अर्थव्यवस्था — बॉन्ड बाज़ार का गहनीकरण, कॉर्पोरेट बॉन्ड।
- सेवा क्षेत्र — IT-BPM, GCCs, पर्यटन।
- व्यापार नीति — FTAs, सेवाओं पर प्रतिबद्धताएँ, वीज़ा प्रावधान।
प्रारंभिक परीक्षा के तथ्य
- जेपी मॉर्गन GBI-EM GD — भारत को 28 जून 2024 से शामिल; अधिकतम भार 10%।
- पूर्णतः सुलभ मार्ग (FAR) — RBI का मार्ग जो अनिवासियों को निर्दिष्ट G-secs में बिना सीमा के निवेश की अनुमति देता है।
- ब्लूमबर्ग EM लोकल करेंसी इंडेक्स — भारत को 31 जनवरी 2025 को शामिल किया गया।
- वित्त वर्ष 2023-24 में भारत के सेवा निर्यात — लगभग 341 अरब डॉलर।
- GATS के तहत Mode 4 — प्राकृतिक व्यक्तियों की (अस्थायी) आवाजाही।
- भारत में GCCs — 1,700 से अधिक, 1.9 मिलियन से अधिक पेशेवर कार्यरत।
- विदेशी मुद्रा भंडार — 2024 में 700 अरब डॉलर के पार।
- equalisation levy — अनिवासियों से डिजिटल सेवाओं पर भारत का कर (2024-25 बजट में पुनर्संरचित)।
मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण
- “वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में भारत का समावेश वित्तीय परिपक्वता का संकेत तो है, पर यह मौद्रिक नीति को वैश्विक प्रवाहों से और अधिक कसकर जोड़ भी देता है।” विवेचना कीजिए।
- “भारत के बाह्य क्षेत्र की समूची मज़बूती की कहानी केवल सेवा निर्यात नहीं हो सकती। क्या बदलना चाहिए?” आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।