UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

हिंदी पर्यायवाची शब्द: 300+ महत्वपूर्ण उदाहरण

UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र के लिए 300+ पर्यायवाची शब्दों की विस्तृत सूची — सूर्य, चंद्र, अग्नि, जल, पृथ्वी आदि के समानार्थी शब्द उदाहरण वाक्यों सहित।

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हिंदी भाषा की समृद्धि का मूल आधार उसका विपुल शब्द-भंडार है। UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में पर्यायवाची शब्दों का प्रश्न लगभग प्रत्येक वर्ष पूछा जाता है। पर्यायवाची शब्दों के ज्ञान से न केवल निबंध एवं पत्र-लेखन में भाषा प्रवाहमयी बनती है, अपितु अनुवाद एवं संक्षेपण में उचित शब्द-चयन भी सहज हो जाता है। इस लेख में हमने 40 से अधिक मूल शब्दों के 300 से अधिक पर्यायवाची वाक्य-प्रयोग सहित प्रस्तुत किए हैं।

पर्यायवाची शब्द: परिभाषा

जिन शब्दों के अर्थ समान अथवा लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहा जाता है। संस्कृत में इन्हें ‘पर्याय’ तथा अंग्रेज़ी में ‘Synonyms’ कहा जाता है। यद्यपि पर्यायवाची शब्द अर्थ में समान प्रतीत होते हैं, तथापि सूक्ष्म भेद तथा प्रयोग की भिन्नता अवश्य पाई जाती है। उदाहरणार्थ — ‘सूर्य’ और ‘रवि’ पर्यायवाची हैं, किंतु ‘रविवार’ कहा जाता है, ‘सूर्यवार’ नहीं।

पर्यायवाची शब्दों का महत्व

हिंदी पर्यायवाची शब्द: 300+ उदाहरण — concept breakdown
मुख्य अवधारणा विश्लेषण।
  • भाषा में विविधता तथा सौंदर्य की वृद्धि होती है।
  • एक ही शब्द की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है।
  • भाव-प्रकटीकरण में सूक्ष्मता एवं परिपूर्णता आती है।
  • काव्य में छंद एवं तुक मिलाने में सहायता मिलती है।
  • अनुवाद कार्य में उपयुक्त शब्द का चयन संभव होता है।

वर्गीकरण

1. पूर्ण पर्यायवाची

जिनके अर्थ में कोई भेद नहीं होता — जैसे ‘माँ’ और ‘जननी’। ऐसे शब्द बहुत कम हैं।

2. आंशिक पर्यायवाची

जिनके अर्थ में किंचित भेद होता है — जैसे ‘नारी’ सामान्य है, किंतु ‘कामिनी’ कामोत्तेजक भाव देती है तथा ‘अबला’ दुर्बलता का।

429+ पर्यायवाची शब्दों की विस्तृत तालिका

हिंदी पर्यायवाची शब्द: 300+ उदाहरण — examples
उदाहरण और प्रयोग।
मूल शब्दपर्यायवाची शब्दवाक्य प्रयोग
सूर्यरवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, आदित्य, सविता, प्रभाकर, मार्तण्ड, सूरजप्रातःकाल दिनकर की किरणें पर्वत-शिखरों को स्वर्णिम बना देती हैं।
चंद्रमाचाँद, शशि, राकेश, निशाकर, सुधाकर, इंदु, विधु, मयंक, हिमांशुपूर्णिमा की रात्रि में शशि अपनी शीतल किरणों से धरती को सिंचित करता है।
अग्निआग, अनल, पावक, हुताशन, वह्नि, ज्वाला, दहन, कृशानुयज्ञ में पावक प्रज्वलित कर आहुति दी गई।
जलपानी, नीर, वारि, सलिल, अम्बु, तोय, उदक, जीवनग्रीष्म ऋतु में शीतल सलिल प्राणों को सुख देता है।
पृथ्वीधरती, भू, वसुंधरा, धरा, मही, अचला, वसुधा, भूमिवसुंधरा पर अनेक जीव-जंतु निवास करते हैं।
आकाशनभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अंतरिक्ष, अर्श, फलकनील गगन में तारे जगमगा रहे थे।
पवनवायु, हवा, समीर, अनिल, मारुत, प्रभंजन, वातशीतल समीर तन-मन को आनन्दित करता है।
वर्षाबरसात, बारिश, वृष्टि, पावस, मेह, बरखापावस में किसान के चेहरे पर प्रसन्नता आ जाती है।
मेघबादल, जलद, घन, नीरद, पयोद, वारिद, अभ्रआकाश में नीरद छा गए और वर्षा होने लगी।
बिजलीविद्युत, तड़ित, चपला, दामिनी, सौदामिनी, क्षणप्रभाआकाश में दामिनी चमक रही है।
सागरसमुद्र, सिंधु, जलधि, रत्नाकर, वारिधि, पयोनिधि, अर्णव, नीरधिरत्नाकर अनेक रत्नों का भण्डार है।
नदीसरिता, निर्झरिणी, तटिनी, जलमाला, तरंगिणी, स्रोतस्विनी, अपगापवित्र सरिता गंगा भारत की जीवन-रेखा है।
पर्वतपहाड़, गिरि, अचल, शैल, भूधर, मेरु, नग, महीधरहिमालय विश्व का सबसे ऊँचा गिरि है।
तारानक्षत्र, सितारा, तारक, खद्योत, उडुरात्रि में असंख्य नक्षत्र आकाश में शोभा पाते हैं।
वनजंगल, कानन, अरण्य, विपिन, कांतार, अटवीराम ने चौदह वर्ष कानन में व्यतीत किए।
पेड़वृक्ष, तरु, पादप, द्रुम, विटप, रूखआम का वृक्ष फलों से लदा हुआ था।
कमलपंकज, सरोज, अरविंद, जलज, नलिन, राजीव, पद्म, उत्पलसरोवर में खिला पंकज मनमोहक दिखता है।
गुलाबसुमन, पुष्पराज, शतपत्रउद्यान में लाल सुमन खिले हुए थे।
फूलपुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, पुहुपवाटिका में अनेक प्रकार के सुमन खिले थे।
फलमेवा, शस्य, फसलपरिश्रम का मेवा सदैव मीठा होता है।
पत्तापत्र, पर्ण, दल, किसलय, पल्लवशीत ऋतु में वृक्षों के पर्ण झड़ जाते हैं।
दिनदिवस, वार, अह, वासरयह दिवस सदा स्मरणीय रहेगा।
रातरात्रि, निशा, रजनी, विभावरी, यामिनी, तमिस्रा, क्षणदानिशा में चंद्रमा चांदनी बिखेरता है।
प्रातःकालउषा, भोर, अरुणोदय, प्रभात, सवेराउषा की बेला में पक्षी कलरव करते हैं।
सायंकालसंध्या, शाम, गोधूलि, दिनांतगोधूलि में गायें अपने घर लौटती हैं।
वर्षसाल, संवत्सर, अब्द, बरसइस संवत्सर में अच्छी फसल हुई।
मुखमुँह, वदन, आनन, चेहरा, मुखमंडलउसका वदन प्रसन्नता से खिल उठा।
नेत्रआँख, नयन, चक्षु, लोचन, दृग, अक्षि, विलोचनभक्ति के आँसू नयनों से बह निकले।
कानकर्ण, श्रोत्र, श्रवणकर्ण में मधुर संगीत गूँज रहा था।
नाकनासिका, घ्राण, शुण्डगंध नासिका द्वारा अनुभूत होती है।
हाथकर, हस्त, पाणि, बाहुउसने कर जोड़कर प्रणाम किया।
पैरचरण, पाद, पद, टाँगगुरु के चरणों में सिर झुकाया।
हृदयमन, चित्त, उर, अंतःकरण, दिलउसके उर में गहरी पीड़ा छिपी थी।
केशबाल, कच, अलक, चिकुरउसके कच घने और काले थे।
शरीरतन, देह, काया, वपु, अंग, गात्रयोगी ने तप द्वारा काया को निर्मल बनाया।
दाँतदन्त, रदन, द्विजस्वस्थ रदन सुन्दरता बढ़ाते हैं।
पितातात, जनक, बाप, पितृ, बापूजनक ने पुत्र को आशीष दिया।
मातामाँ, जननी, अम्मा, जन्मदात्री, मातृजननी की गोद स्वर्ग से बढ़कर है।
पुत्रबेटा, सुत, तनय, आत्मज, कुलदीपकआत्मज ने पिता का नाम रोशन किया।
पुत्रीबेटी, सुता, तनया, आत्मजा, दुहितासुता ने घर की शोभा बढ़ाई।
भाईभ्राता, सहोदर, बंधु, अग्रज, अनुजबड़े अग्रज ने छोटे भाई की रक्षा की।
बहनभगिनी, स्वसा, अग्रजा, अनुजाबड़ी अग्रजा ने रक्षाबंधन पर राखी बाँधी।
पतिस्वामी, कांत, भर्ता, जीवनसाथी, वल्लभस्वामी ने पत्नी की इच्छा पूरी की।
पत्नीभार्या, गृहिणी, कांता, अर्धांगिनी, वधूगृहिणी घर की धुरी होती है।
मित्रसखा, साथी, दोस्त, बन्धु, सुहृदसच्चा सखा विपत्ति में साथ देता है।
शत्रुदुश्मन, अरि, रिपु, वैरी, प्रतिपक्षीकर्ण ने अपने रिपु को क्षमा कर दिया।
गुरुशिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापकआचार्य ने शिष्यों को ज्ञान दिया।
शिष्यचेला, विद्यार्थी, अंतेवासीआज्ञाकारी चेला गुरु का आशीष पाता है।
राजानरेश, नृप, भूपति, महीपति, सम्राट, शासक, भूपालनरेश ने प्रजा के कल्याण हेतु आज्ञा दी।
रानीमहारानी, राज्ञी, सम्राज्ञी, भूपालामहारानी ने उदारतापूर्वक दान किया।
स्त्रीनारी, महिला, कामिनी, ललना, अबला, रमणी, वनितानारी शिक्षा से ही समाज उन्नति करता है।
पुरुषनर, मानव, इंसान, मनुष्य, मनुजमानव को विवेक से कार्य करना चाहिए।
बालकशिशु, बच्चा, लड़का, कुमारशिशु की मुस्कान निर्मल होती है।
हाथीगज, हस्ती, कुंजर, नाग, करेणु, मातंगगज राज-दरबार की शोभा बढ़ाते थे।
घोड़ाअश्व, तुरंग, हय, वाजि, घोटकयुद्ध में अश्व वीर का साथी होता है।
सिंहशेर, मृगराज, केसरी, वनराज, पंचाननवनराज की गर्जना से वन गूँज उठा।
बाघव्याघ्र, शार्दूल, नाहरव्याघ्र अपने क्षेत्र का एकछत्र स्वामी होता है।
गायगौ, धेनु, सुरभि, कामधेनुगौ माता का दुग्ध अमृत सदृश होता है।
बैलवृषभ, ऋषभ, बलीवर्दकिसान का वृषभ खेती में अति सहायक है।
कुत्ताश्वान, कुक्कुर, शुनकस्वामिभक्त श्वान घर की रक्षा करता है।
बंदरवानर, कपि, हरि, मर्कटहनुमान जी वानरराज कहलाते हैं।
पक्षीविहंग, खग, अंडज, नभचर, पखेरू, द्विजप्रातःकाल खगों का कलरव मधुर होता है।
कौआकाक, वायस, कागकाग काँव-काँव कर उठा।
कोयलकोकिला, पिक, श्यामावसंत में कोकिला की कूक मन मोह लेती है।
मोरमयूर, कलापी, केकी, शिखंडीवर्षा में मयूर नृत्य करता है।
तोताशुक, सुवा, कीरशुक मधुर स्वर से बोलता है।
सर्पसाँप, नाग, भुजंग, फणी, व्याल, अहिशेषनाग धरती को धारण करते हैं।
मछलीमीन, मत्स्य, झष, शफरीनदी में रंग-बिरंगी मीन तैर रही थीं।
हिरणमृग, कुरंग, सारंगवन में कुरंग चौकड़ी भर रहा था।
भौंराभ्रमर, मधुप, अलि, षट्पद, मधुकरपुष्पों पर मधुप गुंजार कर रहा है।
सोनास्वर्ण, कंचन, हेम, कनक, हिरण्यसुहागिन स्त्री के आभूषण स्वर्ण के हैं।
चाँदीरजत, रूपा, चन्द्रहासरजत पात्र में भोजन परोसा गया।
धनसंपत्ति, दौलत, वित्त, सम्पदा, द्रव्य, कोषसद्बुद्धि सर्वोत्तम सम्पदा है।
वस्त्रकपड़ा, चीर, पट, अम्बर, परिधान, वसनदुल्हन ने लाल परिधान धारण किया।
घरभवन, गृह, निवास, आलय, आवास, सदन, धामगुरु का आवास सदैव पवित्र होता है।
महलप्रासाद, राजभवन, हर्म्यराजा का प्रासाद भव्य था।
मंदिरदेवालय, देवगृह, देवस्थान, शिवालयदेवालय में शंख-घंटा नाद हुआ।
मार्गराह, पथ, रास्ता, बाट, सरणिसत्य का पथ कठिन किंतु शुभ है।
पुस्तकग्रंथ, किताब, पोथी, पुस्तिकारामचरितमानस पवित्र ग्रंथ है।
पत्रचिट्ठी, खत, लेख, संदेश-पत्रपिता ने पुत्र को स्नेहभरा पत्र लिखा।
दुग्धदूध, पयस, क्षीर, गोरसगौ का क्षीर पोषण देता है।
अन्नअनाज, भोजन, खाद्य, धान्य, खानाधान्य ही जीवन का आधार है।
प्रेमप्यार, स्नेह, अनुराग, मोहब्बत, प्रणय, इश्कमाँ का स्नेह निश्छल होता है।
क्रोधकोप, आक्रोश, गुस्सा, रोष, अमर्षकोप में विवेक नष्ट हो जाता है।
भयडर, त्रास, आतंक, दहशत, भीतिनिर्भय मनुष्य को त्रास नहीं सताता।
दुखपीड़ा, कष्ट, वेदना, शोक, व्यथा, क्लेशमाता के निधन से परिवार शोक में डूब गया।
सुखआनन्द, प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास, प्रमोदविजय से हृदय हर्ष से भर गया।
मृत्युमौत, निधन, देहांत, अंत, प्राणांत, स्वर्गवासमहात्मा गांधी का देहांत 1948 में हुआ।
जीवनजिंदगी, जीवनकाल, प्राण, आयु, जीवीप्रत्येक प्राण मूल्यवान है।
ज्ञानविद्या, बोध, विवेक, पांडित्य, मेधाविद्या से ही मनुष्य पूर्ण होता है।
मूर्खताअज्ञानता, मूढ़ता, जड़ता, बुद्धिहीनतामूढ़ता का परिणाम दुखद होता है।
सुंदरमनोहर, रमणीय, रूपवान, लावण्यमय, अभिराममनोहर दृश्य देखकर सभी मुग्ध हो गए।
शक्तिबल, सामर्थ्य, ऊर्जा, ताकत, दममन का सामर्थ्य ही वास्तविक शक्ति है।
बुद्धिमति, प्रज्ञा, मेधा, धी, विवेकबालक की मति तीव्र है।
आदरसम्मान, मान, आदर-सत्कार, श्रद्धाअतिथि का सदैव सत्कार करें।
अपमानतिरस्कार, अनादर, निरादर, अवहेलनाअनादर से व्यक्ति आहत होता है।
सत्यसच, सच्चाई, यथार्थ, वास्तविकतायथार्थ को स्वीकार करना साधक का धर्म है।
असत्यझूठ, मिथ्या, अयथार्थ, अनृतमिथ्या वचन सदा दुख देते हैं।
धर्ममत, पंथ, सम्प्रदाय, कर्तव्य, आचारसत्य का पालन परम धर्म है।
पापदोष, अपराध, अधर्म, दुष्कर्मपाप का अंत दुख में ही होता है।
पुण्यशुभकर्म, सुकृत, धर्मकर्मदान-पुण्य से आत्मा शुद्ध होती है।
आत्माजीव, रूह, चेतन, प्राणी, जीवात्माआत्मा अमर है, शरीर नश्वर।
ईश्वरपरमेश्वर, भगवान, प्रभु, विश्वात्मा, अंतर्यामीप्रभु की कृपा सदैव बनी रहे।
मोक्षमुक्ति, निर्वाण, कैवल्य, अपवर्गयोगी मुक्ति के लिए तप करते हैं।
युद्धसमर, रण, संग्राम, लड़ाई, विग्रहसमर में वीर धर्म के लिए प्राण देते हैं।
विजयजीत, सफलता, फतह, प्रबलसत्य की सदैव जीत होती है।
पराजयहार, असफलता, परास्त, पराभवअसफलता ही सफलता की सीढ़ी है।
वीरशूर, बहादुर, साहसी, पराक्रमी, धीरशूर योद्धा पीठ नहीं दिखाते।
कायरडरपोक, भीरु, बुजदिलभीरु व्यक्ति युद्ध नहीं लड़ सकता।
चतुरहोशियार, कुशल, निपुण, प्रवीणकुशल नेता ही राज्य चला सकता है।
मूर्खबुद्धू, जड़, अज्ञानी, मंदबुद्धिअज्ञानी मनुष्य पशु के समान है।
सज्जनभला, शरीफ, सुजन, सत्पुरुषसज्जन व्यक्ति समाज की शोभा हैं।
दुर्जनखल, दुष्ट, पापी, कुपुरुषदुष्ट की संगति से बचना चाहिए।
उत्तमश्रेष्ठ, उत्कृष्ट, बेहतरीन, वरीयसत्य का मार्ग ही श्रेष्ठ मार्ग है।
कठिनमुश्किल, दुष्कर, दुरूह, जटिलपरीक्षा का प्रश्न-पत्र दुष्कर था।
सरलसहज, आसान, सुलभ, सुगमउनका व्यवहार सहज है।
सत्यसच, यथार्थ, निश्चय, प्रमाणिकयथार्थ ही ईश्वर का दूसरा नाम है।
नगरशहर, पुर, पुरी, नगरीअयोध्या राम की पुरी है।
गाँवग्राम, देहात, बस्तीहमारा ग्राम हरियाली से भरा है।
देशराष्ट्र, मुल्क, भूखण्डराष्ट्र की रक्षा प्रत्येक नागरिक का धर्म है।
विश्वजगत, संसार, दुनिया, ब्रह्मांड, भुवनजगत क्षणभंगुर है।
वाणीबोली, शब्द, भाषा, गिरासरस्वती वाणी की अधिष्ठात्री हैं।
सरस्वतीवीणापाणि, शारदा, भारती, वागीश्वरीशारदा ज्ञान की देवी हैं।
लक्ष्मीश्री, कमला, रमा, पद्मा, इंदिरालक्ष्मी धन और सम्पदा की देवी हैं।
दुर्गाभवानी, चण्डी, अम्बिका, सिंहवाहिनीभवानी असुरों का संहार करती हैं।
विष्णुनारायण, केशव, माधव, गोविंद, हरि, चक्रपाणिनारायण सृष्टि के पालक हैं।
शिवशंकर, महादेव, भोलेनाथ, पशुपति, नीलकंठ, रुद्रभोलेनाथ भक्तों पर कृपा करते हैं।
ब्रह्माविधाता, पितामह, स्वयंभू, चतुर्मुखविधाता ने सृष्टि की रचना की।
गंगाभागीरथी, सुरसरिता, जाह्नवी, देवनदी, त्रिपथगाजाह्नवी भारत की पवित्र नदी है।
यमुनाकालिंदी, जमुना, सूर्यसुताकालिंदी के तट पर श्रीकृष्ण ने लीलाएँ कीं।
अर्जुनपार्थ, धनंजय, किरीटी, गांडीवधारीपार्थ ने कौरव-सेना का संहार किया।
कृष्णगोपाल, मोहन, मुरारी, बंसीवाले, माधवमोहन ने गीता का उपदेश दिया।
रामरघुपति, रघुनाथ, रघुवीर, मर्यादापुरुषोत्तमरघुपति मर्यादा के आदर्श थे।
हनुमानपवनसुत, बजरंगी, मारुतिनन्दन, महावीरपवनसुत राम के अनन्य भक्त थे।
इन्द्रसुरेश, देवराज, शक्र, पुरंदरसुरेश वर्षा के देवता हैं।
यमधर्मराज, कृतान्त, कालधर्मराज सबको कर्मफल देते हैं।
अमृतसुधा, पीयूष, अमिय, मधुसुधा का पान करने से व्यक्ति अमर हो जाता है।
विषजहर, गरल, हलाहल, कालकूटशिव ने हलाहल पान करके देवताओं की रक्षा की।
हिमालयहिमगिरि, नगराज, पर्वतराज, हिमाद्रिनगराज भारत का मुकुट है।
वृक्षपेड़, शाखी, पादप, तरुवरतरुवर के नीचे पथिक विश्राम करते हैं।
बेललता, वल्लरी, बल्लीद्वार पर लता चढ़ी हुई है।
गंधसुगंध, खुशबू, सौरभ, सुवासचमेली की सुवास मनभावन है।
सुगंधमहक, इत्र, सौरभ, वासपुष्पों का सौरभ वातावरण को सुगंधित कर देता है।
इच्छाचाह, मनोरथ, अभिलाषा, लालसा, कामनामनोरथ की पूर्ति ईश्वर-कृपा से होती है।
आशाउम्मीद, भरोसा, विश्वास, प्रत्याशाउम्मीद पर संसार टिका है।
निराशाहताशा, नैराश्य, उदासी, विषादनिराशा में भी आशा की किरण देखो।
आनन्दहर्ष, खुशी, प्रमोद, उल्लास, मोदउत्सव में सब प्रमोदित थे।
साहसहिम्मत, धैर्य, वीरता, पराक्रमहिम्मत से ही कठिनाइयाँ पार होती हैं।
धैर्यसहनशीलता, धीरज, संयमधीरज रखने वाला अंत में सफल होता है।
शांतिचैन, सुकून, निश्चिंतता, शांतचित्तमन को सुकून देना चाहिए।
करुणादया, कृपा, अनुकंपा, सहानुभूतिबुद्ध की करुणा अनंत थी।
नींदनिद्रा, सुषुप्ति, शयन, स्वप्नथकान से निद्रा गहरी आई।
भूखक्षुधा, अन्नेच्छाक्षुधा सर्वश्रेष्ठ पाचक है।
प्यासपिपासा, तृष्णापिपासा से गला सूख रहा था।
यात्रासफर, भ्रमण, पर्यटन, पर्यटनदेश-भ्रमण से ज्ञान बढ़ता है।
खेलक्रीड़ा, विनोद, रमत, तमाशाबालक मैदान में क्रीड़ा करते हैं।
गीतगान, संगीत, सुरगानउसका गान मधुर था।
संगीतसुर-ताल, राग, सरगमभारतीय संगीत प्राचीन कला है।
नृत्यनाच, नर्तन, ताण्डवभरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य है।
युवकतरुण, नौजवान, जवानतरुण देश का भविष्य हैं।
वृद्धबूढ़ा, बुजुर्ग, जरठवृद्धों का आदर करना चाहिए।
चोरतस्कर, चौर्यकर्मी, दस्युतस्कर पकड़ा गया।
सेनापतिसेनानायक, सेनाध्यक्ष, सिपहसालारकुशल सेनापति युद्ध जिता देता है।
किसानकृषक, खेतिहर, हलधरकृषक देश की रीढ़ है।
व्यापारीवणिक, सौदागर, व्यवसायीवणिक नाना देशों से वस्तुएँ लाते हैं।
लड़काबालक, किशोर, कुमारकुमार विद्यालय में अग्रणी है।
लड़कीबालिका, कन्या, कुमारीकन्या माता-पिता का गौरव है।
अतिथिमेहमान, पाहुन, आगन्तुक, अभ्यागतअतिथि देवो भव हमारी परंपरा है।
दाससेवक, नौकर, भृत्य, परिचारकस्वामिभक्त सेवक धन्य है।
स्वामीमालिक, प्रभु, अधिपति, शासकअच्छा मालिक सेवकों पर कृपा रखता है।
शासनराज्य, सरकार, हुकूमत, सल्तनतसरकार का कर्तव्य जनकल्याण है।
विद्वानपंडित, ज्ञानी, बुद्धिमान, मनीषीपंडित ज्ञान से समाज को समृद्ध करते हैं।
शिल्पीकलाकार, कारीगर, रचनाकारकारीगर ने अद्भुत मूर्ति गढ़ी।
नदी-किनारातट, तीर, कूल, तटबंधगंगा-तट पर संध्या आरती होती है।
घोड़े वालासवार, अश्वारोहीअश्वारोही तेज़ गति से दौड़ पड़ा।
दीपकदीया, दीप, चिराग, प्रदीपदीपक से घर रोशन हो गया।
ध्वनिआवाज, स्वर, नाद, शब्दशंख का नाद गूँज उठा।
आवाजध्वनि, स्वर, बोल, कलरवपक्षियों का कलरव मधुर था।
रंगवर्ण, रोगन, रंजनवसंत में प्रकृति विविध वर्णों से सजी होती है।
प्रकाशउजाला, ज्योति, रोशनी, आलोकज्ञान का आलोक अंधकार मिटाता है।
अंधकारअंधेरा, तम, तिमिर, तमसदीपक तिमिर को हटा देता है।
बादलमेघ, घन, जलद, वारिदमेघ बरसने लगे।
हिमबर्फ, तुषार, हिमकणहिमालय पर सदा बर्फ रहती है।
लोकसंसार, दुनिया, जगत, भुवनतीन लोकों में राम-नाम की महिमा है।
भीमवृकोदर, भीमसेन, बलभद्रवृकोदर की शक्ति अपार थी।
अश्वत्थामाद्रोणपुत्र, गुरुपुत्रद्रोणपुत्र महाभारत का एक वीर था।
कर्णराधेय, सूर्यपुत्र, अंगराजसूर्यपुत्र उदारता के प्रतीक थे।
दुर्योधनकुरुराज, सुयोधनसुयोधन ईर्ष्या से भरा था।
सीताजानकी, वैदेही, मैथिलीजानकी पतिव्रता का आदर्श हैं।
लक्ष्मणसौमित्रि, रामानुजसौमित्रि राम के अनुज और मित्र थे।
भरतभरतराज, कैकेयीपुत्रभरत ने राज्य ठुकराकर आदर्श प्रस्तुत किया।
रावणलंकेश, दशानन, दशकण्ठदशानन की अहंकार ने उसका विनाश किया।
कौरवधृतराष्ट्रपुत्र, गांधारपुत्रकौरव अपनी कुटिलता के कारण हारे।
पाण्डवकुंतीपुत्र, पांडुपुत्रपांडुपुत्र धर्म के रक्षक थे।
ऊँटउष्ट्र, लंबोष्ठ, मरुयानउष्ट्र रेगिस्तान का जहाज कहलाता है।
बकरीअजा, छागीअजा का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
भेड़मेष, उरणामेष के ऊन से कम्बल बनता है।
कबूतरपारावत, कपोतकपोत शांति का प्रतीक है।
गिद्धगृद्ध, शकुनगृद्ध ऊँचाई से शिकार देखता है।
ईगलगरुड़, खगराजगरुड़ विष्णु का वाहन है।
छिपकलीगृहगौलिका, मूषिकभक्षीदीवार पर गृहगौलिका चढ़ी है।
मक्खीमक्षिका, मधुलिहमक्षिका भोजन पर बैठ गई।
चींटीपिपीलिका, कीटिकापिपीलिका परिश्रम का प्रतीक है।
मेंढकदर्दुर, भेक, मंडूकबरसात में दर्दुर टर्राते हैं।
कछुआकच्छप, कमठकच्छप धीमी गति का पर्याय है।
खरगोशशश, शशक, मृगशावकशश तेज गति से दौड़ता है।
लोमड़ीलोमशा, जम्बुकलोमशा चतुराई में प्रसिद्ध है।
भेड़ियावृक, ईहामृगवृक झुंड में शिकार करता है।
भालूरीछ, भल्लूकरीछ जंगल में रहता है।
चीताचित्रक, तेंदुआचित्रक अत्यंत फुर्तीला होता है।
सियारश्रृगाल, जम्बुकश्रृगाल रात में हुआँ-हुआँ करता है।
मुनिसाधु, संत, ऋषि, तपस्वी, योगीऋषि ने वन में तपस्या की।
यात्रीपथिक, राही, मुसाफ़िरपथिक विश्राम-गृह में रुक गया।
जंगलवन, कानन, अरण्य, बनबन में अनेक जीव-जंतु रहते हैं।
शेषनागअनन्त, विष्णुशयनअनन्त पर विष्णु शयन करते हैं।
कामदेवमदन, मन्मथ, कंदर्प, अनंगकामदेव को अनंग भी कहते हैं।
अंधानेत्रहीन, सूरदास, दृष्टिहीननेत्रहीन भी संगीत से प्रसन्न होते हैं।
दीननिर्धन, गरीब, कंगाल, रंकनिर्धनों की सहायता करना पुण्य है।
धनीधनवान, अमीर, धनपति, कुबेरकुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं।
समीपनिकट, पास, नज़दीक, प्रत्यासन्नगाँव शहर के निकट है।
दूरफासले पर, परे, अपवर्ग, विप्रकृष्टलक्ष्य अभी दूर है।
क्षणभंगुरअनित्य, नश्वर, क्षणिक, अस्थिरसंसार अनित्य है।
नित्यशाश्वत, सनातन, चिरंतन, अखंडआत्मा शाश्वत है।
आरंभप्रारंभ, शुरुआत, उद्गम, आदिशुभ कार्य का प्रारंभ मंगलमय हो।
अंतसमाप्ति, समापन, अवसान, पर्यवसानजीवन की अंतिम घड़ी तक कर्म करो।
बढ़ियाउत्तम, श्रेष्ठ, उम्दाउम्दा लेखन सराहा जाता है।
खराबबुरा, घटिया, निकृष्ट, अधमनिकृष्ट कर्मों से बचना चाहिए।
पवित्रशुद्ध, पाक, पुनीत, निर्मलगंगा का जल पुनीत माना जाता है।
अशुद्धअपवित्र, गंदा, मलिन, दूषितमलिन वस्त्र धोने चाहिए।
शरीर का अंगअवयव, अंग-प्रत्यंगप्रत्येक अवयव महत्वपूर्ण है।
सम्पूर्णपूरा, समस्त, समग्र, अखण्डसमग्र कार्य समय पर पूरा हुआ।
अधूराअपूर्ण, अधिकल्पित, खण्डितअपूर्ण कार्य असफलता लाता है।
इंद्रधनुषसप्तवर्ण, रंगाली, सुरचापआकाश में सप्तवर्ण शोभा पा रहा था।
स्वर्गदेवलोक, सुरलोक, वैकुण्ठ, त्रिदिवसुकृति देवलोक में वास करते हैं।
नरकयमलोक, यमपुरी, कुम्भीपाकपापी यमपुरी में पीड़ित होते हैं।
इच्छुकउत्सुक, लालायित, आतुर, अभिलाषीवह ज्ञान का लालायित था।
अंतरिक्षआकाश, नभ, अंभस, व्योमअंतरिक्ष में ग्रह-उपग्रह विचरते हैं।
शिलाचट्टान, पाषाण, पत्थर, प्रस्तरपाषाण पर पुष्प उग आया।
बगीचाउद्यान, बाग, वाटिका, उपवनउद्यान पुष्पों से सुगंधित था।
कुआँकूप, जलाशय, वापीकूप का शीतल जल प्यास बुझाता है।
तालाबसरोवर, सर, जलाशय, कासार, पोखरसरोवर में मछलियाँ खेल रही थीं।
झीलसर, तालाब-विस्तार, तटाकडल सर कश्मीर की शोभा है।
पथिकयात्री, राही, बटोही, मुसाफिरबटोही ने दोपहर में वृक्ष की छाया ली।
मायाभ्रम, माया-मोह, मायाजाल, छलनासंसार एक मायाजाल है।
स्मृतियाद, स्मरण, सुरति, चित्तस्मरणबचपन की स्मृति मन में ताजा है।
विस्मृतिभूल, विलोप, प्रमाद, प्रमादीपाठ की विस्मृति से अंक कम आए।
खाद्यभोजन, आहार, खान-पान, आहार्यस्वस्थ भोजन शरीर के लिए आवश्यक है।
वस्त्राभूषणश्रृंगार, सौंदर्य-साधनवधू का श्रृंगार मनोहारी था।
ओढ़नीचुनरी, दुपट्टा, चादरलाल चुनरी में वह शोभायमान थी।
पलंगशय्या, बिछौना, शैय्याथकान से शैय्या पर सो गया।
भवनइमारत, भवनचय, अट्टालिकाअट्टालिका आकाश को छू रही थी।
खिड़कीझरोखा, गवाक्ष, वातायनगवाक्ष से ठंडी हवा आ रही थी।
किवाड़द्वार, दरवाजा, कपाटकपाट बंद कर दो।
चौराहातिराहा, चतुष्पथ, सड़क-संगमचतुष्पथ पर यातायात बाधित था।
मूर्तिप्रतिमा, मूरत, बुत, शिल्पमंदिर में सुंदर प्रतिमा स्थापित है।
चित्रतस्वीर, आकृति, छवि, प्रतिरूपदीवार पर पूर्वजों की छवि लगी थी।
स्वर्गीयदिवंगत, मृत, परलोकगतदिवंगत आत्मा को शांति मिले।
अमरअनश्वर, अविनाशी, नित्य, शाश्वतआत्मा अविनाशी है।
नश्वरमर्त्य, क्षयी, मरणशीलयह शरीर मर्त्य है।
विनाशनाश, ध्वंस, क्षय, संहारअहंकार संहार का मूल है।
उत्पत्तिजन्म, उद्भव, उद्गम, आरंभप्रकृति की उत्पत्ति अनादि है।
सृष्टिरचना, विधान, उत्पत्ति, संरचनाब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की।
कलाविद्या, शिल्प, चातुर्यसंगीत एक दिव्य कला है।
संस्कारपरिष्कार, सुधार, शुभ कर्मसंस्कार से चरित्र बनता है।
सभापरिषद, गोष्ठी, समिति, सम्मेलनपरिषद में विद्वानों ने विचार प्रस्तुत किए।
उत्सवपर्व, त्यौहार, समारोह, सोहलादीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया गया।
भाषणव्याख्यान, उद्बोधन, वक्तव्यनेताजी का व्याख्यान प्रेरक था।
लेखकरचयिता, साहित्यकार, ग्रंथकार, रचनाकाररचयिता की कल्पना अद्भुत है।
कविकविजन, काव्यकार, सुकवितुलसीदास महान सुकवि थे।
विद्यालयपाठशाला, स्कूल, गुरुकुल, शालागुरुकुल में शिष्य शिक्षा पाते थे।
प्रयोगशालालैब, परीक्षणागारवैज्ञानिक परीक्षणागार में कार्यरत हैं।
अस्पतालचिकित्सालय, स्वास्थ्यगृह, हास्पिटलचिकित्सालय में रोगियों की सेवा हो रही है।
रोगबीमारी, व्याधि, रुग्णता, आमयव्याधि से बचने के लिए स्वच्छता आवश्यक है।
चिकित्साउपचार, इलाज, औषधोपचारकुशल चिकित्सा से जान बची।
औषधिदवा, भैषज्य, दवाईउचित औषधि रोग हर लेती है।
विज्ञानशास्त्र, विद्या-अनुशासनविज्ञान का युग है।
प्रकृतिनिसर्ग, कुदरत, सर्गनिसर्ग का सौंदर्य अनुपम है।
प्रयासपरिश्रम, चेष्टा, उद्यम, यत्नयत्न से ही सिद्धि होती है।
आलस्यसुस्ती, प्रमाद, जड़ता, शिथिलताप्रमाद विद्यार्थी का शत्रु है।
गरीबीनिर्धनता, दरिद्रता, दीनता, अकिंचनतादरिद्रता अनेक दुखों का मूल है।
धनाढ्यसम्पन्न, समृद्ध, खाता-पीतासमृद्ध परिवार में उसका जन्म हुआ।
स्वतंत्रताआजादी, मुक्ति, छुटकाराआजादी अनेक बलिदानों से मिली।
पराधीनतादासता, गुलामी, पराश्रयतागुलामी अभिशाप है।
न्यायइंसाफ, धर्म, विवेक-निर्णयइंसाफ में देरी अन्याय के समान है।
अन्यायअधर्म, अन्यायाचार, अत्याचारअत्याचार का विरोध आवश्यक है।
अनुरागप्रेम, लगाव, प्रीति, आसक्तिसंगीत से उसे अनुराग है।
विरक्तिउदासीनता, अनासक्ति, वैराग्यसंत की वैराग्य भावना प्रेरक है।
लज्जाशर्म, लाज, संकोच, हयाकन्या की लाज सुरक्षित रखनी चाहिए।
साहस से भराबहादुर, पराक्रमी, दिलेरवह दिलेर सैनिक था।
नर्ममुलायम, कोमल, सुकुमार, कमनीयबच्चे के हाथ कोमल हैं।
कठोरसख्त, कर्कश, दुष्कर, रूखान्याय की वाणी कर्कश हो सकती है।
शांतस्थिर, निश्चल, मौन, शिथिलसमाधि में ऋषि मौन हो गए।
चंचलअस्थिर, चपल, अस्थिरचित्तबालक बड़ा चपल है।
गहरागंभीर, अगाध, गहनगंभीर विचार चिंतन से उत्पन्न होते हैं।
उथलासतही, अल्प, हल्कासतही ज्ञान से कुछ प्राप्त नहीं होता।
रमणीयमनोरम, मनभावन, मनोहर, सुखदकश्मीर का दृश्य मनभावन है।
वीरताशौर्य, शूरता, पराक्रमशौर्य से शत्रु भयभीत होते हैं।
पतनगिरावट, अधोगति, अवनतिअहंकार से पतन होता है।
उन्नतिप्रगति, विकास, अभ्युदय, उत्कर्षविकास निरंतर चलता रहे।
मधुरमीठा, रसीला, स्वादिष्ट, प्रियआम का रस रसीला है।
कड़वातिक्त, कटु, कड़ुआकरेला का स्वाद तिक्त है।
श्रद्धाभक्ति, विश्वास, आस्था, पूज्य-भावगुरु पर आस्था रखना शिष्य का धर्म है।
पश्चातापपछतावा, मनस्ताप, अनुताप, क्षोभगलती पर पछतावा उचित है।
आशीषआशीर्वाद, मंगलकामना, वरदानमाता का आशीर्वाद कवच के समान है।
अभिशापशाप, श्राप, कोसनाक्रोधी ऋषियों के शाप प्रसिद्ध हैं।
बलिदानत्याग, कुर्बानी, आत्मोत्सर्गकुर्बानी देश के लिए गौरव है।
स्वार्थनिज-लाभ, अहंभाव, खुदगर्जीस्वार्थ से समाज कमजोर होता है।
निस्वार्थनिर्लोभ, परोपकारी, उदारपरोपकारी मनुष्य सदा स्मरणीय रहते हैं।
उदारदानी, सरलहृदय, दरियादिलदानी व्यक्ति समाज का गौरव होता है।
कंजूसकृपण, सूमड़, लोभीकृपण अपने धन को भोग नहीं पाता।
संपत्तिदौलत, सम्पदा, धन-दौलत, मालसम्पदा से अधिक चरित्र मूल्यवान है।
कामनाइच्छा, आकांक्षा, लिप्सा, स्पृहामोक्ष की आकांक्षा श्रेष्ठ है।
पुण्यात्मासत्कर्मी, धर्मनिष्ठ, शुभाचारीधर्मनिष्ठ व्यक्ति सबके प्रिय होते हैं।
भोजनालयरसोई, भोजनशाला, पाकशालापाकशाला में स्वादिष्ट भोजन बना।
कुम्हारकुंभकार, मृत्तिकाशिल्पीकुंभकार मिट्टी से मटकी बनाता है।
लोहारलौहशिल्पी, लोहशिल्पीलोहशिल्पी हथियार तैयार करता है।
जुलाहातंतुवाय, वस्त्र-शिल्पीतंतुवाय सुंदर कपड़े बुनता है।
पंचपंचायत, न्यायी-समूहपंचायत ने निर्णय दिया।
सम्मेलनअधिवेशन, सभा, समागमअधिवेशन में विद्वान एकत्र हुए।
क्रांतिआंदोलन, विद्रोह, उपद्रवआंदोलन से बड़े बदलाव आए।
सेनाफौज, दल, बल, लश्करसेना देश की रक्षक है।
तीरबाण, शर, इषु, विशिखअर्जुन का बाण लक्ष्य पर लगा।
धनुषचाप, कार्मुक, कोदण्डराम ने शिव-धनुष तोड़ा।
तलवारखड्ग, कृपाण, करवाल, असिवीर ने खड्ग से शत्रु को परास्त किया।
भालाबरछा, कुंत, शूलसैनिक भाला चला रहा है।
ढालफलक, वर्म, फलकवर्मढाल वार से रक्षा करती है।
युद्धभूमिरणभूमि, समरांगण, संग्रामभूमिरणभूमि में शूर वीर गति को प्राप्त हुए।
विजय-पताकाध्वज, केतु, पताकाविजय का ध्वज फहराया गया।
रथशकट, स्यंदनकृष्ण अर्जुन के सारथि बने।
सारथीरथवाहक, सूतसूत रथ को कुशलता से चलाता है।
आयुधअस्त्र, शस्त्र, हथियारशस्त्र का प्रयोग विवेकपूर्वक करें।
प्रणामनमस्कार, अभिवादन, वंदनगुरु को सादर वंदन किया।
आदरणीयपूज्य, सम्माननीय, श्रद्धेयपूज्य पिताजी का आशीर्वाद मिला।
सर्वश्रेष्ठउत्कृष्ट, अनुपम, बेमिसालअनुपम सौंदर्य था वहाँ।
मिलनभेंट, मुलाकात, संयोगमित्रों का मिलन आनन्दकारी होता है।
वियोगविरह, जुदाई, अलगावविरह में हृदय व्याकुल होता है।
सौभाग्यभाग्य, खुशकिस्मती, भाग्यरेखासौभाग्य से उसे यह अवसर मिला।
दुर्भाग्यअभाग्य, बदकिस्मती, विधिवक्रतादुर्भाग्य से दुर्घटना हो गई।
ज्योतिचमक, प्रकाश, प्रभा, दीप्तिज्ञान की ज्योति जगाइए।
शीतलताठंडक, शैत्य, शीतशैत्य से मन को शांति मिलती है।
गर्मीउष्णता, ताप, उष्माग्रीष्म की उष्णता असह्य थी।
चंद्रकलाकला, ज्योत्स्ना, चंद्रिकापूर्णिमा की चंद्रिका सुंदर थी।
भक्तउपासक, भजनकर्ता, पूजकसच्चा भक्त भगवान को प्रिय है।
संगीतकारगायक, वादक, स्वरकारस्वरकार ने अद्भुत रचना की।
चित्रकारचित्रकर्ता, रंगकर्मी, चित्रशिल्पीचित्रकार ने अपनी कला दिखाई।
तपोवनआश्रम, ऋषिकुल, तपस्थलीतपोवन में ऋषिगण तप करते थे।
आशीर्वचनआशीष, शुभ-कामना, दुआमाँ की दुआ सदा साथ रहे।
पानी का बर्तनघट, कलश, गगरी, घड़ाकलश में जल भरा था।
बाग़वानउद्यानी, मालाकार, मालीमाली ने पौधों को सींचा।
द्वारपालद्वाररक्षक, पहरेदार, प्रहरीप्रहरी द्वार पर तैनात था।
खाद्य-पदार्थभोज्य, भोजन-सामग्री, पक्वान्नउत्सव में अनेक पक्वान्न बने।
समयावधिअवधि, कालखण्ड, समय-सीमानिश्चित अवधि में कार्य पूरा करें।
भूलत्रुटि, गलती, प्रमाद, भ्रमत्रुटि को सुधार लेना चाहिए।
सुधारपरिष्कार, संशोधन, दुरुस्तीभूल का संशोधन आवश्यक है।
सत्य-निष्ठासत्याग्रह, सच्चाई, ईमानदारीईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है।
धोखाकपट, छल, धूर्तता, प्रवंचनाछल से मिली सफलता क्षणिक है।
उपकारभलाई, सहायता, हित-चिंतनउपकार करने वाले सदैव पूज्य होते हैं।
कृतज्ञताआभार, धन्यवाद, ऋण-स्वीकारगुरु के प्रति आभार सदा रहे।
कृतघ्ननमकहराम, कृतनाशी, विश्वासघातीविश्वासघाती को कोई पसंद नहीं करता।
पर्यावरणपरिवेश, वातावरण, परिस्थितिकीपर्यावरण की रक्षा हमारा धर्म है।
प्रदूषणअपवित्रता, कलुष, दूषणवायु-प्रदूषण स्वास्थ्य को हानि पहुँचाता है।
साधनातप, अभ्यास, अनुष्ठान, तपस्यासाधना से ही सिद्धि मिलती है।
ध्यानसमाधि, चिंतन, मननध्यान से मन स्थिर होता है।
विचारसोच, चिंतन, मनन, परामर्शउत्कृष्ट विचार जीवन बदलते हैं।
भाषण देने वालावक्ता, उद्गाता, कथाकारवक्ता की शैली मनमोहक थी।
सर्वसम्मतिएकमत, ऐकमत्य, सहमतिसदस्यों की सहमति से निर्णय हुआ।
मतभेदअसहमति, विरोध, द्वंद्व, विवादमतभेद को संवाद से सुलझाना चाहिए।
निमंत्रणबुलावा, आमंत्रण, न्योताविवाह का निमंत्रण प्राप्त हुआ।
मेहनतपरिश्रम, श्रम, उद्यममेहनत का फल मीठा होता है।
योद्धासैनिक, सिपाही, शूरवीरसैनिक सीमा पर तैनात हैं।
भिखारीयाचक, मंगता, भिक्षुकयाचक को भोजन देना धर्म है।
दानीउदार, दानशील, दातादानशील व्यक्ति समाज की पूँजी हैं।
चिंताफिक्र, व्यग्रता, उद्विग्नतानिष्कारण चिंता त्यागें।
समीक्षाविवेचन, परीक्षण, पुनरीक्षणपुस्तक की समीक्षा प्रकाशित हुई।
खजानाकोष, धनागार, सम्पदागृहराज्य का कोष भरा हुआ था।
साक्षीगवाह, द्रष्टा, अवलोककगवाह ने सच्चाई बयान की।
प्रलयविनाश, संहार, महाविनाशप्रलय में सृष्टि विलीन होती है।
सृष्टि-आरंभउत्पत्ति, आविर्भाव, सर्गसर्ग की गाथा पुराणों में है।
अनुभवतजुर्बा, बोध, प्रत्यक्षीकरणअनुभव से ज्ञान पक्का होता है।
परिश्रमीउद्यमी, कर्मठ, श्रमिककर्मठ व्यक्ति ही सफल होते हैं।
आलसीसुस्त, निकम्मा, प्रमादीसुस्ती पतन की ओर ले जाती है।
अनुमतिइजाजत, स्वीकृति, सहमतिप्रबंधक की स्वीकृति मिल गई।
विलंबदेर, ढील, मंद-गतिकार्य में ढील नहीं होनी चाहिए।
शीघ्रतातीव्रता, त्वरा, फुर्तीत्वरा से निर्णय लिया गया।
आदेशहुक्म, आज्ञा, निर्देश, फरमानगुरु की आज्ञा शिरोधार्य है।
नियमविधि, कानून, विधान, अनुशासननियम का पालन सभ्य नागरिक का धर्म है।
कर्तव्यफर्ज, धर्म, दायित्वदेश-सेवा प्रत्येक का फर्ज है।
अधिकारहक, स्वामित्व, प्राधिकारहर नागरिक को शिक्षा का हक है।
सुरक्षारक्षा, संरक्षण, बचाववन की संरक्षण आवश्यक है।
खतरासंकट, विपत्ति, आपदा, विपदाबाढ़ से आपदा आई।
विश्वविद्यालयमहाविद्यालय, उच्चशिक्षा-केंद्रमहाविद्यालय में अनुसंधान हो रहा है।
शपथप्रतिज्ञा, व्रत, सौगंधसत्य की प्रतिज्ञा अटल रहे।
हथियार चलाने वालायोद्धा, सेनानी, शस्त्रधारीशस्त्रधारी वीर युद्ध में उतरे।
नीतिसिद्धांत, नीतिशास्त्र, आचारराज-नीति का पालन राजा का धर्म है।
कथनवचन, उक्ति, कथनीगांधी जी की उक्ति प्रेरक है।
चित्तमन, अंतःकरण, हृदयचित्त को स्थिर करो।
अहंकारअभिमान, गर्व, दर्पअहंकार पतन का कारण है।
नम्रताविनम्रता, सौजन्य, दीनताविनम्रता महान गुण है।
शिक्षाविद्या, अध्ययन, अध्यापन, ज्ञानार्जनशिक्षा सबसे बड़ा निवेश है।
संस्कृतिसभ्यता, रहन-सहन, आचार-विचारभारतीय संस्कृति विविधतापूर्ण है।
मंदिर में पुजारीपुरोहित, आचार्य, याज्ञिकपुरोहित ने पूजा सम्पन्न की।
दीवारप्राचीर, भित्ति, दीवालपुरानी भित्ति जर्जर है।
चौपालपंचायत-भवन, ग्राम-समागाँव की चौपाल में बैठक हुई।
सुख-शांतिस्वास्थ्य-लाभ, सौख्यपरिवार में सौख्य रहे।
गुरुत्वभार, वजन, गुरुताधरती का गुरुत्व वस्तुओं को खींचता है।
तेजप्रखर, दीप्त, उज्ज्वलविद्वान का तेज मुख पर झलकता था।
पोषणपालन, पालन-पोषण, भरणमाता-पिता संतान का पोषण करते हैं।
समर्पणन्यौछावर, अर्पण, आत्मनिवेदनगुरु के चरणों में समर्पण ही सर्वस्व है।
कृषिखेती, किसानी, कृषिकर्मभारत कृषि-प्रधान देश है।
बाजारहाट, बाज़ार, विपणिहाट में वस्तुओं की बिक्री हो रही है।
व्यापारवाणिज्य, सौदागरी, क्रय-विक्रयवाणिज्य से राष्ट्र समृद्ध होता है।
प्रसिद्धिख्याति, कीर्ति, नामउनकी कीर्ति चारों ओर फैली।
बदनामीअपयश, कलंक, अपकीर्तिअपयश से बचना चाहिए।
दयाकरुणा, रहम, अनुकंपादया धर्म का मूल है।
निर्दयताक्रूरता, निष्ठुरता, निर्ममतानिष्ठुरता पशुता है।
गुप्तछिपा हुआ, गोपनीय, प्रच्छन्नगोपनीय पत्र को सहेजकर रखें।
प्रकटसार्वजनिक, अभिव्यक्त, उद्घाटितसत्य देर-सवेर प्रकट हो ही जाता है।
चतुराईचपलता, कौशल, होशियारीचतुराई से कार्य शीघ्र होता है।
गंभीरधीर, शांत, स्थिरचित्तवह गंभीर व्यक्ति है।
बदलाप्रतिशोध, प्रतिकार, प्रतिदानबदले की भावना त्यागें।
क्षमामाफी, क्षमाशीलता, सहिष्णुताक्षमा वीर का भूषण है।
त्यागपरित्याग, छोड़ना, तर्कभोग का त्याग तप है।
अभिमानदर्प, गर्व, मदअभिमान करने से पतन होता है।
दैवभाग्य, विधि, नियति, प्रारब्धनियति अटल है।
वायुयानहवाई-जहाज, विमान, उड़न-यानविमान आकाश में उड़ चला।
रेलरेलगाड़ी, ट्रेन, धूम्रशकटरेल से यात्रा सुगम है।
नौकानाव, तरणी, पोत, जहाजतरणी सागर पार कर गई।
घर्षणरगड़, घिसाव, संघर्षरगड़ से ऊष्मा उत्पन्न होती है।
संघर्षझगड़ा, द्वंद्व, कलहजीवन संघर्षों का नाम है।

प्रयोग के नियम

  • प्रत्येक पर्यायवाची का स्वतंत्र प्रयोग संभव नहीं — सन्दर्भ देखकर ही शब्द चुनें।
  • काव्य में छंद तथा तुक के अनुसार शब्द का चयन करें।
  • औपचारिक लेखन में तत्सम पर्याय उपयुक्त, अनौपचारिक में तद्भव।
  • पर्यायवाची को रटने के स्थान पर वाक्य में प्रयोग करके याद रखें।

सामान्य गलतियाँ

  • हर पर्यायवाची को हर जगह प्रयोग कर देना — जैसे ‘जल’ को ‘मूत्र’ समझ लेना (जबकि ‘मूत्र’ भी जल का पर्याय है, किंतु विशिष्ट सन्दर्भ में)।
  • ‘स्त्री’ के लिए ‘अबला’ का प्रयोग आधुनिक लेखन में आपत्तिजनक।
  • तत्सम एवं तद्भव पर्यायों का मिश्रण — एक ही वाक्य में ‘अग्नि’ और ‘आग’ दोनों का अनावश्यक प्रयोग।

अभ्यास प्रश्न

  • ‘पृथ्वी’ के पाँच पर्यायवाची लिखिए।
  • ‘कमल’ के आठ पर्यायवाची शब्द लिखकर किन्हीं दो का वाक्य प्रयोग कीजिए।
  • निम्नलिखित में पर्यायवाची युग्म छाँटिए — अनल, पावक, सलिल, तोय।
  • ‘गंगा’ के पाँच पर्याय लिखिए तथा एक वाक्य में प्रयोग कीजिए।
  • पर्यायवाची और अनेकार्थी में क्या अंतर है? उदाहरण दीजिए।

Frequently Asked Questions

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?

जिन शब्दों के अर्थ समान या लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसे — कमल के पर्यायवाची जलज, पंकज, सरोज, अरविंद।

क्या सभी पर्यायवाची शब्द हर स्थान पर प्रयोग किए जा सकते हैं?

नहीं। पर्यायवाची शब्दों में सूक्ष्म अर्थभेद होता है, अतः सन्दर्भ के अनुसार ही उचित शब्द का चयन करना चाहिए।

UPSC में पर्यायवाची से कितने अंक का प्रश्न आता है?

हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में पर्यायवाची/विलोम/मुहावरे के खंड से 10–20 अंक तक के प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।

सूर्य के पाँच प्रमुख पर्यायवाची क्या हैं?

रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, आदित्य।

तत्सम पर्यायवाची अधिक उपयुक्त कब होते हैं?

औपचारिक, साहित्यिक एवं शास्त्रीय लेखन में तत्सम पर्यायवाची अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।

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Gaurav Tiwari

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Gaurav Tiwari

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