हिंदी भाषा की समृद्धि का मूल आधार उसका विपुल शब्द-भंडार है। UPSC हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में पर्यायवाची शब्दों का प्रश्न लगभग प्रत्येक वर्ष पूछा जाता है। पर्यायवाची शब्दों के ज्ञान से न केवल निबंध एवं पत्र-लेखन में भाषा प्रवाहमयी बनती है, अपितु अनुवाद एवं संक्षेपण में उचित शब्द-चयन भी सहज हो जाता है। इस लेख में हमने 40 से अधिक मूल शब्दों के 300 से अधिक पर्यायवाची वाक्य-प्रयोग सहित प्रस्तुत किए हैं।
पर्यायवाची शब्द: परिभाषा
जिन शब्दों के अर्थ समान अथवा लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहा जाता है। संस्कृत में इन्हें ‘पर्याय’ तथा अंग्रेज़ी में ‘Synonyms’ कहा जाता है। यद्यपि पर्यायवाची शब्द अर्थ में समान प्रतीत होते हैं, तथापि सूक्ष्म भेद तथा प्रयोग की भिन्नता अवश्य पाई जाती है। उदाहरणार्थ — ‘सूर्य’ और ‘रवि’ पर्यायवाची हैं, किंतु ‘रविवार’ कहा जाता है, ‘सूर्यवार’ नहीं।
पर्यायवाची शब्दों का महत्व

- भाषा में विविधता तथा सौंदर्य की वृद्धि होती है।
- एक ही शब्द की पुनरावृत्ति से बचा जा सकता है।
- भाव-प्रकटीकरण में सूक्ष्मता एवं परिपूर्णता आती है।
- काव्य में छंद एवं तुक मिलाने में सहायता मिलती है।
- अनुवाद कार्य में उपयुक्त शब्द का चयन संभव होता है।
वर्गीकरण
1. पूर्ण पर्यायवाची
जिनके अर्थ में कोई भेद नहीं होता — जैसे ‘माँ’ और ‘जननी’। ऐसे शब्द बहुत कम हैं।
2. आंशिक पर्यायवाची
जिनके अर्थ में किंचित भेद होता है — जैसे ‘नारी’ सामान्य है, किंतु ‘कामिनी’ कामोत्तेजक भाव देती है तथा ‘अबला’ दुर्बलता का।
429+ पर्यायवाची शब्दों की विस्तृत तालिका

| मूल शब्द | पर्यायवाची शब्द | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| सूर्य | रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, आदित्य, सविता, प्रभाकर, मार्तण्ड, सूरज | प्रातःकाल दिनकर की किरणें पर्वत-शिखरों को स्वर्णिम बना देती हैं। |
| चंद्रमा | चाँद, शशि, राकेश, निशाकर, सुधाकर, इंदु, विधु, मयंक, हिमांशु | पूर्णिमा की रात्रि में शशि अपनी शीतल किरणों से धरती को सिंचित करता है। |
| अग्नि | आग, अनल, पावक, हुताशन, वह्नि, ज्वाला, दहन, कृशानु | यज्ञ में पावक प्रज्वलित कर आहुति दी गई। |
| जल | पानी, नीर, वारि, सलिल, अम्बु, तोय, उदक, जीवन | ग्रीष्म ऋतु में शीतल सलिल प्राणों को सुख देता है। |
| पृथ्वी | धरती, भू, वसुंधरा, धरा, मही, अचला, वसुधा, भूमि | वसुंधरा पर अनेक जीव-जंतु निवास करते हैं। |
| आकाश | नभ, गगन, अम्बर, व्योम, आसमान, अंतरिक्ष, अर्श, फलक | नील गगन में तारे जगमगा रहे थे। |
| पवन | वायु, हवा, समीर, अनिल, मारुत, प्रभंजन, वात | शीतल समीर तन-मन को आनन्दित करता है। |
| वर्षा | बरसात, बारिश, वृष्टि, पावस, मेह, बरखा | पावस में किसान के चेहरे पर प्रसन्नता आ जाती है। |
| मेघ | बादल, जलद, घन, नीरद, पयोद, वारिद, अभ्र | आकाश में नीरद छा गए और वर्षा होने लगी। |
| बिजली | विद्युत, तड़ित, चपला, दामिनी, सौदामिनी, क्षणप्रभा | आकाश में दामिनी चमक रही है। |
| सागर | समुद्र, सिंधु, जलधि, रत्नाकर, वारिधि, पयोनिधि, अर्णव, नीरधि | रत्नाकर अनेक रत्नों का भण्डार है। |
| नदी | सरिता, निर्झरिणी, तटिनी, जलमाला, तरंगिणी, स्रोतस्विनी, अपगा | पवित्र सरिता गंगा भारत की जीवन-रेखा है। |
| पर्वत | पहाड़, गिरि, अचल, शैल, भूधर, मेरु, नग, महीधर | हिमालय विश्व का सबसे ऊँचा गिरि है। |
| तारा | नक्षत्र, सितारा, तारक, खद्योत, उडु | रात्रि में असंख्य नक्षत्र आकाश में शोभा पाते हैं। |
| वन | जंगल, कानन, अरण्य, विपिन, कांतार, अटवी | राम ने चौदह वर्ष कानन में व्यतीत किए। |
| पेड़ | वृक्ष, तरु, पादप, द्रुम, विटप, रूख | आम का वृक्ष फलों से लदा हुआ था। |
| कमल | पंकज, सरोज, अरविंद, जलज, नलिन, राजीव, पद्म, उत्पल | सरोवर में खिला पंकज मनमोहक दिखता है। |
| गुलाब | सुमन, पुष्पराज, शतपत्र | उद्यान में लाल सुमन खिले हुए थे। |
| फूल | पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, पुहुप | वाटिका में अनेक प्रकार के सुमन खिले थे। |
| फल | मेवा, शस्य, फसल | परिश्रम का मेवा सदैव मीठा होता है। |
| पत्ता | पत्र, पर्ण, दल, किसलय, पल्लव | शीत ऋतु में वृक्षों के पर्ण झड़ जाते हैं। |
| दिन | दिवस, वार, अह, वासर | यह दिवस सदा स्मरणीय रहेगा। |
| रात | रात्रि, निशा, रजनी, विभावरी, यामिनी, तमिस्रा, क्षणदा | निशा में चंद्रमा चांदनी बिखेरता है। |
| प्रातःकाल | उषा, भोर, अरुणोदय, प्रभात, सवेरा | उषा की बेला में पक्षी कलरव करते हैं। |
| सायंकाल | संध्या, शाम, गोधूलि, दिनांत | गोधूलि में गायें अपने घर लौटती हैं। |
| वर्ष | साल, संवत्सर, अब्द, बरस | इस संवत्सर में अच्छी फसल हुई। |
| मुख | मुँह, वदन, आनन, चेहरा, मुखमंडल | उसका वदन प्रसन्नता से खिल उठा। |
| नेत्र | आँख, नयन, चक्षु, लोचन, दृग, अक्षि, विलोचन | भक्ति के आँसू नयनों से बह निकले। |
| कान | कर्ण, श्रोत्र, श्रवण | कर्ण में मधुर संगीत गूँज रहा था। |
| नाक | नासिका, घ्राण, शुण्ड | गंध नासिका द्वारा अनुभूत होती है। |
| हाथ | कर, हस्त, पाणि, बाहु | उसने कर जोड़कर प्रणाम किया। |
| पैर | चरण, पाद, पद, टाँग | गुरु के चरणों में सिर झुकाया। |
| हृदय | मन, चित्त, उर, अंतःकरण, दिल | उसके उर में गहरी पीड़ा छिपी थी। |
| केश | बाल, कच, अलक, चिकुर | उसके कच घने और काले थे। |
| शरीर | तन, देह, काया, वपु, अंग, गात्र | योगी ने तप द्वारा काया को निर्मल बनाया। |
| दाँत | दन्त, रदन, द्विज | स्वस्थ रदन सुन्दरता बढ़ाते हैं। |
| पिता | तात, जनक, बाप, पितृ, बापू | जनक ने पुत्र को आशीष दिया। |
| माता | माँ, जननी, अम्मा, जन्मदात्री, मातृ | जननी की गोद स्वर्ग से बढ़कर है। |
| पुत्र | बेटा, सुत, तनय, आत्मज, कुलदीपक | आत्मज ने पिता का नाम रोशन किया। |
| पुत्री | बेटी, सुता, तनया, आत्मजा, दुहिता | सुता ने घर की शोभा बढ़ाई। |
| भाई | भ्राता, सहोदर, बंधु, अग्रज, अनुज | बड़े अग्रज ने छोटे भाई की रक्षा की। |
| बहन | भगिनी, स्वसा, अग्रजा, अनुजा | बड़ी अग्रजा ने रक्षाबंधन पर राखी बाँधी। |
| पति | स्वामी, कांत, भर्ता, जीवनसाथी, वल्लभ | स्वामी ने पत्नी की इच्छा पूरी की। |
| पत्नी | भार्या, गृहिणी, कांता, अर्धांगिनी, वधू | गृहिणी घर की धुरी होती है। |
| मित्र | सखा, साथी, दोस्त, बन्धु, सुहृद | सच्चा सखा विपत्ति में साथ देता है। |
| शत्रु | दुश्मन, अरि, रिपु, वैरी, प्रतिपक्षी | कर्ण ने अपने रिपु को क्षमा कर दिया। |
| गुरु | शिक्षक, आचार्य, उस्ताद, अध्यापक | आचार्य ने शिष्यों को ज्ञान दिया। |
| शिष्य | चेला, विद्यार्थी, अंतेवासी | आज्ञाकारी चेला गुरु का आशीष पाता है। |
| राजा | नरेश, नृप, भूपति, महीपति, सम्राट, शासक, भूपाल | नरेश ने प्रजा के कल्याण हेतु आज्ञा दी। |
| रानी | महारानी, राज्ञी, सम्राज्ञी, भूपाला | महारानी ने उदारतापूर्वक दान किया। |
| स्त्री | नारी, महिला, कामिनी, ललना, अबला, रमणी, वनिता | नारी शिक्षा से ही समाज उन्नति करता है। |
| पुरुष | नर, मानव, इंसान, मनुष्य, मनुज | मानव को विवेक से कार्य करना चाहिए। |
| बालक | शिशु, बच्चा, लड़का, कुमार | शिशु की मुस्कान निर्मल होती है। |
| हाथी | गज, हस्ती, कुंजर, नाग, करेणु, मातंग | गज राज-दरबार की शोभा बढ़ाते थे। |
| घोड़ा | अश्व, तुरंग, हय, वाजि, घोटक | युद्ध में अश्व वीर का साथी होता है। |
| सिंह | शेर, मृगराज, केसरी, वनराज, पंचानन | वनराज की गर्जना से वन गूँज उठा। |
| बाघ | व्याघ्र, शार्दूल, नाहर | व्याघ्र अपने क्षेत्र का एकछत्र स्वामी होता है। |
| गाय | गौ, धेनु, सुरभि, कामधेनु | गौ माता का दुग्ध अमृत सदृश होता है। |
| बैल | वृषभ, ऋषभ, बलीवर्द | किसान का वृषभ खेती में अति सहायक है। |
| कुत्ता | श्वान, कुक्कुर, शुनक | स्वामिभक्त श्वान घर की रक्षा करता है। |
| बंदर | वानर, कपि, हरि, मर्कट | हनुमान जी वानरराज कहलाते हैं। |
| पक्षी | विहंग, खग, अंडज, नभचर, पखेरू, द्विज | प्रातःकाल खगों का कलरव मधुर होता है। |
| कौआ | काक, वायस, काग | काग काँव-काँव कर उठा। |
| कोयल | कोकिला, पिक, श्यामा | वसंत में कोकिला की कूक मन मोह लेती है। |
| मोर | मयूर, कलापी, केकी, शिखंडी | वर्षा में मयूर नृत्य करता है। |
| तोता | शुक, सुवा, कीर | शुक मधुर स्वर से बोलता है। |
| सर्प | साँप, नाग, भुजंग, फणी, व्याल, अहि | शेषनाग धरती को धारण करते हैं। |
| मछली | मीन, मत्स्य, झष, शफरी | नदी में रंग-बिरंगी मीन तैर रही थीं। |
| हिरण | मृग, कुरंग, सारंग | वन में कुरंग चौकड़ी भर रहा था। |
| भौंरा | भ्रमर, मधुप, अलि, षट्पद, मधुकर | पुष्पों पर मधुप गुंजार कर रहा है। |
| सोना | स्वर्ण, कंचन, हेम, कनक, हिरण्य | सुहागिन स्त्री के आभूषण स्वर्ण के हैं। |
| चाँदी | रजत, रूपा, चन्द्रहास | रजत पात्र में भोजन परोसा गया। |
| धन | संपत्ति, दौलत, वित्त, सम्पदा, द्रव्य, कोष | सद्बुद्धि सर्वोत्तम सम्पदा है। |
| वस्त्र | कपड़ा, चीर, पट, अम्बर, परिधान, वसन | दुल्हन ने लाल परिधान धारण किया। |
| घर | भवन, गृह, निवास, आलय, आवास, सदन, धाम | गुरु का आवास सदैव पवित्र होता है। |
| महल | प्रासाद, राजभवन, हर्म्य | राजा का प्रासाद भव्य था। |
| मंदिर | देवालय, देवगृह, देवस्थान, शिवालय | देवालय में शंख-घंटा नाद हुआ। |
| मार्ग | राह, पथ, रास्ता, बाट, सरणि | सत्य का पथ कठिन किंतु शुभ है। |
| पुस्तक | ग्रंथ, किताब, पोथी, पुस्तिका | रामचरितमानस पवित्र ग्रंथ है। |
| पत्र | चिट्ठी, खत, लेख, संदेश-पत्र | पिता ने पुत्र को स्नेहभरा पत्र लिखा। |
| दुग्ध | दूध, पयस, क्षीर, गोरस | गौ का क्षीर पोषण देता है। |
| अन्न | अनाज, भोजन, खाद्य, धान्य, खाना | धान्य ही जीवन का आधार है। |
| प्रेम | प्यार, स्नेह, अनुराग, मोहब्बत, प्रणय, इश्क | माँ का स्नेह निश्छल होता है। |
| क्रोध | कोप, आक्रोश, गुस्सा, रोष, अमर्ष | कोप में विवेक नष्ट हो जाता है। |
| भय | डर, त्रास, आतंक, दहशत, भीति | निर्भय मनुष्य को त्रास नहीं सताता। |
| दुख | पीड़ा, कष्ट, वेदना, शोक, व्यथा, क्लेश | माता के निधन से परिवार शोक में डूब गया। |
| सुख | आनन्द, प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास, प्रमोद | विजय से हृदय हर्ष से भर गया। |
| मृत्यु | मौत, निधन, देहांत, अंत, प्राणांत, स्वर्गवास | महात्मा गांधी का देहांत 1948 में हुआ। |
| जीवन | जिंदगी, जीवनकाल, प्राण, आयु, जीवी | प्रत्येक प्राण मूल्यवान है। |
| ज्ञान | विद्या, बोध, विवेक, पांडित्य, मेधा | विद्या से ही मनुष्य पूर्ण होता है। |
| मूर्खता | अज्ञानता, मूढ़ता, जड़ता, बुद्धिहीनता | मूढ़ता का परिणाम दुखद होता है। |
| सुंदर | मनोहर, रमणीय, रूपवान, लावण्यमय, अभिराम | मनोहर दृश्य देखकर सभी मुग्ध हो गए। |
| शक्ति | बल, सामर्थ्य, ऊर्जा, ताकत, दम | मन का सामर्थ्य ही वास्तविक शक्ति है। |
| बुद्धि | मति, प्रज्ञा, मेधा, धी, विवेक | बालक की मति तीव्र है। |
| आदर | सम्मान, मान, आदर-सत्कार, श्रद्धा | अतिथि का सदैव सत्कार करें। |
| अपमान | तिरस्कार, अनादर, निरादर, अवहेलना | अनादर से व्यक्ति आहत होता है। |
| सत्य | सच, सच्चाई, यथार्थ, वास्तविकता | यथार्थ को स्वीकार करना साधक का धर्म है। |
| असत्य | झूठ, मिथ्या, अयथार्थ, अनृत | मिथ्या वचन सदा दुख देते हैं। |
| धर्म | मत, पंथ, सम्प्रदाय, कर्तव्य, आचार | सत्य का पालन परम धर्म है। |
| पाप | दोष, अपराध, अधर्म, दुष्कर्म | पाप का अंत दुख में ही होता है। |
| पुण्य | शुभकर्म, सुकृत, धर्मकर्म | दान-पुण्य से आत्मा शुद्ध होती है। |
| आत्मा | जीव, रूह, चेतन, प्राणी, जीवात्मा | आत्मा अमर है, शरीर नश्वर। |
| ईश्वर | परमेश्वर, भगवान, प्रभु, विश्वात्मा, अंतर्यामी | प्रभु की कृपा सदैव बनी रहे। |
| मोक्ष | मुक्ति, निर्वाण, कैवल्य, अपवर्ग | योगी मुक्ति के लिए तप करते हैं। |
| युद्ध | समर, रण, संग्राम, लड़ाई, विग्रह | समर में वीर धर्म के लिए प्राण देते हैं। |
| विजय | जीत, सफलता, फतह, प्रबल | सत्य की सदैव जीत होती है। |
| पराजय | हार, असफलता, परास्त, पराभव | असफलता ही सफलता की सीढ़ी है। |
| वीर | शूर, बहादुर, साहसी, पराक्रमी, धीर | शूर योद्धा पीठ नहीं दिखाते। |
| कायर | डरपोक, भीरु, बुजदिल | भीरु व्यक्ति युद्ध नहीं लड़ सकता। |
| चतुर | होशियार, कुशल, निपुण, प्रवीण | कुशल नेता ही राज्य चला सकता है। |
| मूर्ख | बुद्धू, जड़, अज्ञानी, मंदबुद्धि | अज्ञानी मनुष्य पशु के समान है। |
| सज्जन | भला, शरीफ, सुजन, सत्पुरुष | सज्जन व्यक्ति समाज की शोभा हैं। |
| दुर्जन | खल, दुष्ट, पापी, कुपुरुष | दुष्ट की संगति से बचना चाहिए। |
| उत्तम | श्रेष्ठ, उत्कृष्ट, बेहतरीन, वरीय | सत्य का मार्ग ही श्रेष्ठ मार्ग है। |
| कठिन | मुश्किल, दुष्कर, दुरूह, जटिल | परीक्षा का प्रश्न-पत्र दुष्कर था। |
| सरल | सहज, आसान, सुलभ, सुगम | उनका व्यवहार सहज है। |
| सत्य | सच, यथार्थ, निश्चय, प्रमाणिक | यथार्थ ही ईश्वर का दूसरा नाम है। |
| नगर | शहर, पुर, पुरी, नगरी | अयोध्या राम की पुरी है। |
| गाँव | ग्राम, देहात, बस्ती | हमारा ग्राम हरियाली से भरा है। |
| देश | राष्ट्र, मुल्क, भूखण्ड | राष्ट्र की रक्षा प्रत्येक नागरिक का धर्म है। |
| विश्व | जगत, संसार, दुनिया, ब्रह्मांड, भुवन | जगत क्षणभंगुर है। |
| वाणी | बोली, शब्द, भाषा, गिरा | सरस्वती वाणी की अधिष्ठात्री हैं। |
| सरस्वती | वीणापाणि, शारदा, भारती, वागीश्वरी | शारदा ज्ञान की देवी हैं। |
| लक्ष्मी | श्री, कमला, रमा, पद्मा, इंदिरा | लक्ष्मी धन और सम्पदा की देवी हैं। |
| दुर्गा | भवानी, चण्डी, अम्बिका, सिंहवाहिनी | भवानी असुरों का संहार करती हैं। |
| विष्णु | नारायण, केशव, माधव, गोविंद, हरि, चक्रपाणि | नारायण सृष्टि के पालक हैं। |
| शिव | शंकर, महादेव, भोलेनाथ, पशुपति, नीलकंठ, रुद्र | भोलेनाथ भक्तों पर कृपा करते हैं। |
| ब्रह्मा | विधाता, पितामह, स्वयंभू, चतुर्मुख | विधाता ने सृष्टि की रचना की। |
| गंगा | भागीरथी, सुरसरिता, जाह्नवी, देवनदी, त्रिपथगा | जाह्नवी भारत की पवित्र नदी है। |
| यमुना | कालिंदी, जमुना, सूर्यसुता | कालिंदी के तट पर श्रीकृष्ण ने लीलाएँ कीं। |
| अर्जुन | पार्थ, धनंजय, किरीटी, गांडीवधारी | पार्थ ने कौरव-सेना का संहार किया। |
| कृष्ण | गोपाल, मोहन, मुरारी, बंसीवाले, माधव | मोहन ने गीता का उपदेश दिया। |
| राम | रघुपति, रघुनाथ, रघुवीर, मर्यादापुरुषोत्तम | रघुपति मर्यादा के आदर्श थे। |
| हनुमान | पवनसुत, बजरंगी, मारुतिनन्दन, महावीर | पवनसुत राम के अनन्य भक्त थे। |
| इन्द्र | सुरेश, देवराज, शक्र, पुरंदर | सुरेश वर्षा के देवता हैं। |
| यम | धर्मराज, कृतान्त, काल | धर्मराज सबको कर्मफल देते हैं। |
| अमृत | सुधा, पीयूष, अमिय, मधु | सुधा का पान करने से व्यक्ति अमर हो जाता है। |
| विष | जहर, गरल, हलाहल, कालकूट | शिव ने हलाहल पान करके देवताओं की रक्षा की। |
| हिमालय | हिमगिरि, नगराज, पर्वतराज, हिमाद्रि | नगराज भारत का मुकुट है। |
| वृक्ष | पेड़, शाखी, पादप, तरुवर | तरुवर के नीचे पथिक विश्राम करते हैं। |
| बेल | लता, वल्लरी, बल्ली | द्वार पर लता चढ़ी हुई है। |
| गंध | सुगंध, खुशबू, सौरभ, सुवास | चमेली की सुवास मनभावन है। |
| सुगंध | महक, इत्र, सौरभ, वास | पुष्पों का सौरभ वातावरण को सुगंधित कर देता है। |
| इच्छा | चाह, मनोरथ, अभिलाषा, लालसा, कामना | मनोरथ की पूर्ति ईश्वर-कृपा से होती है। |
| आशा | उम्मीद, भरोसा, विश्वास, प्रत्याशा | उम्मीद पर संसार टिका है। |
| निराशा | हताशा, नैराश्य, उदासी, विषाद | निराशा में भी आशा की किरण देखो। |
| आनन्द | हर्ष, खुशी, प्रमोद, उल्लास, मोद | उत्सव में सब प्रमोदित थे। |
| साहस | हिम्मत, धैर्य, वीरता, पराक्रम | हिम्मत से ही कठिनाइयाँ पार होती हैं। |
| धैर्य | सहनशीलता, धीरज, संयम | धीरज रखने वाला अंत में सफल होता है। |
| शांति | चैन, सुकून, निश्चिंतता, शांतचित्त | मन को सुकून देना चाहिए। |
| करुणा | दया, कृपा, अनुकंपा, सहानुभूति | बुद्ध की करुणा अनंत थी। |
| नींद | निद्रा, सुषुप्ति, शयन, स्वप्न | थकान से निद्रा गहरी आई। |
| भूख | क्षुधा, अन्नेच्छा | क्षुधा सर्वश्रेष्ठ पाचक है। |
| प्यास | पिपासा, तृष्णा | पिपासा से गला सूख रहा था। |
| यात्रा | सफर, भ्रमण, पर्यटन, पर्यटन | देश-भ्रमण से ज्ञान बढ़ता है। |
| खेल | क्रीड़ा, विनोद, रमत, तमाशा | बालक मैदान में क्रीड़ा करते हैं। |
| गीत | गान, संगीत, सुरगान | उसका गान मधुर था। |
| संगीत | सुर-ताल, राग, सरगम | भारतीय संगीत प्राचीन कला है। |
| नृत्य | नाच, नर्तन, ताण्डव | भरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य है। |
| युवक | तरुण, नौजवान, जवान | तरुण देश का भविष्य हैं। |
| वृद्ध | बूढ़ा, बुजुर्ग, जरठ | वृद्धों का आदर करना चाहिए। |
| चोर | तस्कर, चौर्यकर्मी, दस्यु | तस्कर पकड़ा गया। |
| सेनापति | सेनानायक, सेनाध्यक्ष, सिपहसालार | कुशल सेनापति युद्ध जिता देता है। |
| किसान | कृषक, खेतिहर, हलधर | कृषक देश की रीढ़ है। |
| व्यापारी | वणिक, सौदागर, व्यवसायी | वणिक नाना देशों से वस्तुएँ लाते हैं। |
| लड़का | बालक, किशोर, कुमार | कुमार विद्यालय में अग्रणी है। |
| लड़की | बालिका, कन्या, कुमारी | कन्या माता-पिता का गौरव है। |
| अतिथि | मेहमान, पाहुन, आगन्तुक, अभ्यागत | अतिथि देवो भव हमारी परंपरा है। |
| दास | सेवक, नौकर, भृत्य, परिचारक | स्वामिभक्त सेवक धन्य है। |
| स्वामी | मालिक, प्रभु, अधिपति, शासक | अच्छा मालिक सेवकों पर कृपा रखता है। |
| शासन | राज्य, सरकार, हुकूमत, सल्तनत | सरकार का कर्तव्य जनकल्याण है। |
| विद्वान | पंडित, ज्ञानी, बुद्धिमान, मनीषी | पंडित ज्ञान से समाज को समृद्ध करते हैं। |
| शिल्पी | कलाकार, कारीगर, रचनाकार | कारीगर ने अद्भुत मूर्ति गढ़ी। |
| नदी-किनारा | तट, तीर, कूल, तटबंध | गंगा-तट पर संध्या आरती होती है। |
| घोड़े वाला | सवार, अश्वारोही | अश्वारोही तेज़ गति से दौड़ पड़ा। |
| दीपक | दीया, दीप, चिराग, प्रदीप | दीपक से घर रोशन हो गया। |
| ध्वनि | आवाज, स्वर, नाद, शब्द | शंख का नाद गूँज उठा। |
| आवाज | ध्वनि, स्वर, बोल, कलरव | पक्षियों का कलरव मधुर था। |
| रंग | वर्ण, रोगन, रंजन | वसंत में प्रकृति विविध वर्णों से सजी होती है। |
| प्रकाश | उजाला, ज्योति, रोशनी, आलोक | ज्ञान का आलोक अंधकार मिटाता है। |
| अंधकार | अंधेरा, तम, तिमिर, तमस | दीपक तिमिर को हटा देता है। |
| बादल | मेघ, घन, जलद, वारिद | मेघ बरसने लगे। |
| हिम | बर्फ, तुषार, हिमकण | हिमालय पर सदा बर्फ रहती है। |
| लोक | संसार, दुनिया, जगत, भुवन | तीन लोकों में राम-नाम की महिमा है। |
| भीम | वृकोदर, भीमसेन, बलभद्र | वृकोदर की शक्ति अपार थी। |
| अश्वत्थामा | द्रोणपुत्र, गुरुपुत्र | द्रोणपुत्र महाभारत का एक वीर था। |
| कर्ण | राधेय, सूर्यपुत्र, अंगराज | सूर्यपुत्र उदारता के प्रतीक थे। |
| दुर्योधन | कुरुराज, सुयोधन | सुयोधन ईर्ष्या से भरा था। |
| सीता | जानकी, वैदेही, मैथिली | जानकी पतिव्रता का आदर्श हैं। |
| लक्ष्मण | सौमित्रि, रामानुज | सौमित्रि राम के अनुज और मित्र थे। |
| भरत | भरतराज, कैकेयीपुत्र | भरत ने राज्य ठुकराकर आदर्श प्रस्तुत किया। |
| रावण | लंकेश, दशानन, दशकण्ठ | दशानन की अहंकार ने उसका विनाश किया। |
| कौरव | धृतराष्ट्रपुत्र, गांधारपुत्र | कौरव अपनी कुटिलता के कारण हारे। |
| पाण्डव | कुंतीपुत्र, पांडुपुत्र | पांडुपुत्र धर्म के रक्षक थे। |
| ऊँट | उष्ट्र, लंबोष्ठ, मरुयान | उष्ट्र रेगिस्तान का जहाज कहलाता है। |
| बकरी | अजा, छागी | अजा का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। |
| भेड़ | मेष, उरणा | मेष के ऊन से कम्बल बनता है। |
| कबूतर | पारावत, कपोत | कपोत शांति का प्रतीक है। |
| गिद्ध | गृद्ध, शकुन | गृद्ध ऊँचाई से शिकार देखता है। |
| ईगल | गरुड़, खगराज | गरुड़ विष्णु का वाहन है। |
| छिपकली | गृहगौलिका, मूषिकभक्षी | दीवार पर गृहगौलिका चढ़ी है। |
| मक्खी | मक्षिका, मधुलिह | मक्षिका भोजन पर बैठ गई। |
| चींटी | पिपीलिका, कीटिका | पिपीलिका परिश्रम का प्रतीक है। |
| मेंढक | दर्दुर, भेक, मंडूक | बरसात में दर्दुर टर्राते हैं। |
| कछुआ | कच्छप, कमठ | कच्छप धीमी गति का पर्याय है। |
| खरगोश | शश, शशक, मृगशावक | शश तेज गति से दौड़ता है। |
| लोमड़ी | लोमशा, जम्बुक | लोमशा चतुराई में प्रसिद्ध है। |
| भेड़िया | वृक, ईहामृग | वृक झुंड में शिकार करता है। |
| भालू | रीछ, भल्लूक | रीछ जंगल में रहता है। |
| चीता | चित्रक, तेंदुआ | चित्रक अत्यंत फुर्तीला होता है। |
| सियार | श्रृगाल, जम्बुक | श्रृगाल रात में हुआँ-हुआँ करता है। |
| मुनि | साधु, संत, ऋषि, तपस्वी, योगी | ऋषि ने वन में तपस्या की। |
| यात्री | पथिक, राही, मुसाफ़िर | पथिक विश्राम-गृह में रुक गया। |
| जंगल | वन, कानन, अरण्य, बन | बन में अनेक जीव-जंतु रहते हैं। |
| शेषनाग | अनन्त, विष्णुशयन | अनन्त पर विष्णु शयन करते हैं। |
| कामदेव | मदन, मन्मथ, कंदर्प, अनंग | कामदेव को अनंग भी कहते हैं। |
| अंधा | नेत्रहीन, सूरदास, दृष्टिहीन | नेत्रहीन भी संगीत से प्रसन्न होते हैं। |
| दीन | निर्धन, गरीब, कंगाल, रंक | निर्धनों की सहायता करना पुण्य है। |
| धनी | धनवान, अमीर, धनपति, कुबेर | कुबेर देवताओं के कोषाध्यक्ष हैं। |
| समीप | निकट, पास, नज़दीक, प्रत्यासन्न | गाँव शहर के निकट है। |
| दूर | फासले पर, परे, अपवर्ग, विप्रकृष्ट | लक्ष्य अभी दूर है। |
| क्षणभंगुर | अनित्य, नश्वर, क्षणिक, अस्थिर | संसार अनित्य है। |
| नित्य | शाश्वत, सनातन, चिरंतन, अखंड | आत्मा शाश्वत है। |
| आरंभ | प्रारंभ, शुरुआत, उद्गम, आदि | शुभ कार्य का प्रारंभ मंगलमय हो। |
| अंत | समाप्ति, समापन, अवसान, पर्यवसान | जीवन की अंतिम घड़ी तक कर्म करो। |
| बढ़िया | उत्तम, श्रेष्ठ, उम्दा | उम्दा लेखन सराहा जाता है। |
| खराब | बुरा, घटिया, निकृष्ट, अधम | निकृष्ट कर्मों से बचना चाहिए। |
| पवित्र | शुद्ध, पाक, पुनीत, निर्मल | गंगा का जल पुनीत माना जाता है। |
| अशुद्ध | अपवित्र, गंदा, मलिन, दूषित | मलिन वस्त्र धोने चाहिए। |
| शरीर का अंग | अवयव, अंग-प्रत्यंग | प्रत्येक अवयव महत्वपूर्ण है। |
| सम्पूर्ण | पूरा, समस्त, समग्र, अखण्ड | समग्र कार्य समय पर पूरा हुआ। |
| अधूरा | अपूर्ण, अधिकल्पित, खण्डित | अपूर्ण कार्य असफलता लाता है। |
| इंद्रधनुष | सप्तवर्ण, रंगाली, सुरचाप | आकाश में सप्तवर्ण शोभा पा रहा था। |
| स्वर्ग | देवलोक, सुरलोक, वैकुण्ठ, त्रिदिव | सुकृति देवलोक में वास करते हैं। |
| नरक | यमलोक, यमपुरी, कुम्भीपाक | पापी यमपुरी में पीड़ित होते हैं। |
| इच्छुक | उत्सुक, लालायित, आतुर, अभिलाषी | वह ज्ञान का लालायित था। |
| अंतरिक्ष | आकाश, नभ, अंभस, व्योम | अंतरिक्ष में ग्रह-उपग्रह विचरते हैं। |
| शिला | चट्टान, पाषाण, पत्थर, प्रस्तर | पाषाण पर पुष्प उग आया। |
| बगीचा | उद्यान, बाग, वाटिका, उपवन | उद्यान पुष्पों से सुगंधित था। |
| कुआँ | कूप, जलाशय, वापी | कूप का शीतल जल प्यास बुझाता है। |
| तालाब | सरोवर, सर, जलाशय, कासार, पोखर | सरोवर में मछलियाँ खेल रही थीं। |
| झील | सर, तालाब-विस्तार, तटाक | डल सर कश्मीर की शोभा है। |
| पथिक | यात्री, राही, बटोही, मुसाफिर | बटोही ने दोपहर में वृक्ष की छाया ली। |
| माया | भ्रम, माया-मोह, मायाजाल, छलना | संसार एक मायाजाल है। |
| स्मृति | याद, स्मरण, सुरति, चित्तस्मरण | बचपन की स्मृति मन में ताजा है। |
| विस्मृति | भूल, विलोप, प्रमाद, प्रमादी | पाठ की विस्मृति से अंक कम आए। |
| खाद्य | भोजन, आहार, खान-पान, आहार्य | स्वस्थ भोजन शरीर के लिए आवश्यक है। |
| वस्त्राभूषण | श्रृंगार, सौंदर्य-साधन | वधू का श्रृंगार मनोहारी था। |
| ओढ़नी | चुनरी, दुपट्टा, चादर | लाल चुनरी में वह शोभायमान थी। |
| पलंग | शय्या, बिछौना, शैय्या | थकान से शैय्या पर सो गया। |
| भवन | इमारत, भवनचय, अट्टालिका | अट्टालिका आकाश को छू रही थी। |
| खिड़की | झरोखा, गवाक्ष, वातायन | गवाक्ष से ठंडी हवा आ रही थी। |
| किवाड़ | द्वार, दरवाजा, कपाट | कपाट बंद कर दो। |
| चौराहा | तिराहा, चतुष्पथ, सड़क-संगम | चतुष्पथ पर यातायात बाधित था। |
| मूर्ति | प्रतिमा, मूरत, बुत, शिल्प | मंदिर में सुंदर प्रतिमा स्थापित है। |
| चित्र | तस्वीर, आकृति, छवि, प्रतिरूप | दीवार पर पूर्वजों की छवि लगी थी। |
| स्वर्गीय | दिवंगत, मृत, परलोकगत | दिवंगत आत्मा को शांति मिले। |
| अमर | अनश्वर, अविनाशी, नित्य, शाश्वत | आत्मा अविनाशी है। |
| नश्वर | मर्त्य, क्षयी, मरणशील | यह शरीर मर्त्य है। |
| विनाश | नाश, ध्वंस, क्षय, संहार | अहंकार संहार का मूल है। |
| उत्पत्ति | जन्म, उद्भव, उद्गम, आरंभ | प्रकृति की उत्पत्ति अनादि है। |
| सृष्टि | रचना, विधान, उत्पत्ति, संरचना | ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की। |
| कला | विद्या, शिल्प, चातुर्य | संगीत एक दिव्य कला है। |
| संस्कार | परिष्कार, सुधार, शुभ कर्म | संस्कार से चरित्र बनता है। |
| सभा | परिषद, गोष्ठी, समिति, सम्मेलन | परिषद में विद्वानों ने विचार प्रस्तुत किए। |
| उत्सव | पर्व, त्यौहार, समारोह, सोहला | दीपावली का पर्व धूमधाम से मनाया गया। |
| भाषण | व्याख्यान, उद्बोधन, वक्तव्य | नेताजी का व्याख्यान प्रेरक था। |
| लेखक | रचयिता, साहित्यकार, ग्रंथकार, रचनाकार | रचयिता की कल्पना अद्भुत है। |
| कवि | कविजन, काव्यकार, सुकवि | तुलसीदास महान सुकवि थे। |
| विद्यालय | पाठशाला, स्कूल, गुरुकुल, शाला | गुरुकुल में शिष्य शिक्षा पाते थे। |
| प्रयोगशाला | लैब, परीक्षणागार | वैज्ञानिक परीक्षणागार में कार्यरत हैं। |
| अस्पताल | चिकित्सालय, स्वास्थ्यगृह, हास्पिटल | चिकित्सालय में रोगियों की सेवा हो रही है। |
| रोग | बीमारी, व्याधि, रुग्णता, आमय | व्याधि से बचने के लिए स्वच्छता आवश्यक है। |
| चिकित्सा | उपचार, इलाज, औषधोपचार | कुशल चिकित्सा से जान बची। |
| औषधि | दवा, भैषज्य, दवाई | उचित औषधि रोग हर लेती है। |
| विज्ञान | शास्त्र, विद्या-अनुशासन | विज्ञान का युग है। |
| प्रकृति | निसर्ग, कुदरत, सर्ग | निसर्ग का सौंदर्य अनुपम है। |
| प्रयास | परिश्रम, चेष्टा, उद्यम, यत्न | यत्न से ही सिद्धि होती है। |
| आलस्य | सुस्ती, प्रमाद, जड़ता, शिथिलता | प्रमाद विद्यार्थी का शत्रु है। |
| गरीबी | निर्धनता, दरिद्रता, दीनता, अकिंचनता | दरिद्रता अनेक दुखों का मूल है। |
| धनाढ्य | सम्पन्न, समृद्ध, खाता-पीता | समृद्ध परिवार में उसका जन्म हुआ। |
| स्वतंत्रता | आजादी, मुक्ति, छुटकारा | आजादी अनेक बलिदानों से मिली। |
| पराधीनता | दासता, गुलामी, पराश्रयता | गुलामी अभिशाप है। |
| न्याय | इंसाफ, धर्म, विवेक-निर्णय | इंसाफ में देरी अन्याय के समान है। |
| अन्याय | अधर्म, अन्यायाचार, अत्याचार | अत्याचार का विरोध आवश्यक है। |
| अनुराग | प्रेम, लगाव, प्रीति, आसक्ति | संगीत से उसे अनुराग है। |
| विरक्ति | उदासीनता, अनासक्ति, वैराग्य | संत की वैराग्य भावना प्रेरक है। |
| लज्जा | शर्म, लाज, संकोच, हया | कन्या की लाज सुरक्षित रखनी चाहिए। |
| साहस से भरा | बहादुर, पराक्रमी, दिलेर | वह दिलेर सैनिक था। |
| नर्म | मुलायम, कोमल, सुकुमार, कमनीय | बच्चे के हाथ कोमल हैं। |
| कठोर | सख्त, कर्कश, दुष्कर, रूखा | न्याय की वाणी कर्कश हो सकती है। |
| शांत | स्थिर, निश्चल, मौन, शिथिल | समाधि में ऋषि मौन हो गए। |
| चंचल | अस्थिर, चपल, अस्थिरचित्त | बालक बड़ा चपल है। |
| गहरा | गंभीर, अगाध, गहन | गंभीर विचार चिंतन से उत्पन्न होते हैं। |
| उथला | सतही, अल्प, हल्का | सतही ज्ञान से कुछ प्राप्त नहीं होता। |
| रमणीय | मनोरम, मनभावन, मनोहर, सुखद | कश्मीर का दृश्य मनभावन है। |
| वीरता | शौर्य, शूरता, पराक्रम | शौर्य से शत्रु भयभीत होते हैं। |
| पतन | गिरावट, अधोगति, अवनति | अहंकार से पतन होता है। |
| उन्नति | प्रगति, विकास, अभ्युदय, उत्कर्ष | विकास निरंतर चलता रहे। |
| मधुर | मीठा, रसीला, स्वादिष्ट, प्रिय | आम का रस रसीला है। |
| कड़वा | तिक्त, कटु, कड़ुआ | करेला का स्वाद तिक्त है। |
| श्रद्धा | भक्ति, विश्वास, आस्था, पूज्य-भाव | गुरु पर आस्था रखना शिष्य का धर्म है। |
| पश्चाताप | पछतावा, मनस्ताप, अनुताप, क्षोभ | गलती पर पछतावा उचित है। |
| आशीष | आशीर्वाद, मंगलकामना, वरदान | माता का आशीर्वाद कवच के समान है। |
| अभिशाप | शाप, श्राप, कोसना | क्रोधी ऋषियों के शाप प्रसिद्ध हैं। |
| बलिदान | त्याग, कुर्बानी, आत्मोत्सर्ग | कुर्बानी देश के लिए गौरव है। |
| स्वार्थ | निज-लाभ, अहंभाव, खुदगर्जी | स्वार्थ से समाज कमजोर होता है। |
| निस्वार्थ | निर्लोभ, परोपकारी, उदार | परोपकारी मनुष्य सदा स्मरणीय रहते हैं। |
| उदार | दानी, सरलहृदय, दरियादिल | दानी व्यक्ति समाज का गौरव होता है। |
| कंजूस | कृपण, सूमड़, लोभी | कृपण अपने धन को भोग नहीं पाता। |
| संपत्ति | दौलत, सम्पदा, धन-दौलत, माल | सम्पदा से अधिक चरित्र मूल्यवान है। |
| कामना | इच्छा, आकांक्षा, लिप्सा, स्पृहा | मोक्ष की आकांक्षा श्रेष्ठ है। |
| पुण्यात्मा | सत्कर्मी, धर्मनिष्ठ, शुभाचारी | धर्मनिष्ठ व्यक्ति सबके प्रिय होते हैं। |
| भोजनालय | रसोई, भोजनशाला, पाकशाला | पाकशाला में स्वादिष्ट भोजन बना। |
| कुम्हार | कुंभकार, मृत्तिकाशिल्पी | कुंभकार मिट्टी से मटकी बनाता है। |
| लोहार | लौहशिल्पी, लोहशिल्पी | लोहशिल्पी हथियार तैयार करता है। |
| जुलाहा | तंतुवाय, वस्त्र-शिल्पी | तंतुवाय सुंदर कपड़े बुनता है। |
| पंच | पंचायत, न्यायी-समूह | पंचायत ने निर्णय दिया। |
| सम्मेलन | अधिवेशन, सभा, समागम | अधिवेशन में विद्वान एकत्र हुए। |
| क्रांति | आंदोलन, विद्रोह, उपद्रव | आंदोलन से बड़े बदलाव आए। |
| सेना | फौज, दल, बल, लश्कर | सेना देश की रक्षक है। |
| तीर | बाण, शर, इषु, विशिख | अर्जुन का बाण लक्ष्य पर लगा। |
| धनुष | चाप, कार्मुक, कोदण्ड | राम ने शिव-धनुष तोड़ा। |
| तलवार | खड्ग, कृपाण, करवाल, असि | वीर ने खड्ग से शत्रु को परास्त किया। |
| भाला | बरछा, कुंत, शूल | सैनिक भाला चला रहा है। |
| ढाल | फलक, वर्म, फलकवर्म | ढाल वार से रक्षा करती है। |
| युद्धभूमि | रणभूमि, समरांगण, संग्रामभूमि | रणभूमि में शूर वीर गति को प्राप्त हुए। |
| विजय-पताका | ध्वज, केतु, पताका | विजय का ध्वज फहराया गया। |
| रथ | शकट, स्यंदन | कृष्ण अर्जुन के सारथि बने। |
| सारथी | रथवाहक, सूत | सूत रथ को कुशलता से चलाता है। |
| आयुध | अस्त्र, शस्त्र, हथियार | शस्त्र का प्रयोग विवेकपूर्वक करें। |
| प्रणाम | नमस्कार, अभिवादन, वंदन | गुरु को सादर वंदन किया। |
| आदरणीय | पूज्य, सम्माननीय, श्रद्धेय | पूज्य पिताजी का आशीर्वाद मिला। |
| सर्वश्रेष्ठ | उत्कृष्ट, अनुपम, बेमिसाल | अनुपम सौंदर्य था वहाँ। |
| मिलन | भेंट, मुलाकात, संयोग | मित्रों का मिलन आनन्दकारी होता है। |
| वियोग | विरह, जुदाई, अलगाव | विरह में हृदय व्याकुल होता है। |
| सौभाग्य | भाग्य, खुशकिस्मती, भाग्यरेखा | सौभाग्य से उसे यह अवसर मिला। |
| दुर्भाग्य | अभाग्य, बदकिस्मती, विधिवक्रता | दुर्भाग्य से दुर्घटना हो गई। |
| ज्योति | चमक, प्रकाश, प्रभा, दीप्ति | ज्ञान की ज्योति जगाइए। |
| शीतलता | ठंडक, शैत्य, शीत | शैत्य से मन को शांति मिलती है। |
| गर्मी | उष्णता, ताप, उष्मा | ग्रीष्म की उष्णता असह्य थी। |
| चंद्रकला | कला, ज्योत्स्ना, चंद्रिका | पूर्णिमा की चंद्रिका सुंदर थी। |
| भक्त | उपासक, भजनकर्ता, पूजक | सच्चा भक्त भगवान को प्रिय है। |
| संगीतकार | गायक, वादक, स्वरकार | स्वरकार ने अद्भुत रचना की। |
| चित्रकार | चित्रकर्ता, रंगकर्मी, चित्रशिल्पी | चित्रकार ने अपनी कला दिखाई। |
| तपोवन | आश्रम, ऋषिकुल, तपस्थली | तपोवन में ऋषिगण तप करते थे। |
| आशीर्वचन | आशीष, शुभ-कामना, दुआ | माँ की दुआ सदा साथ रहे। |
| पानी का बर्तन | घट, कलश, गगरी, घड़ा | कलश में जल भरा था। |
| बाग़वान | उद्यानी, मालाकार, माली | माली ने पौधों को सींचा। |
| द्वारपाल | द्वाररक्षक, पहरेदार, प्रहरी | प्रहरी द्वार पर तैनात था। |
| खाद्य-पदार्थ | भोज्य, भोजन-सामग्री, पक्वान्न | उत्सव में अनेक पक्वान्न बने। |
| समयावधि | अवधि, कालखण्ड, समय-सीमा | निश्चित अवधि में कार्य पूरा करें। |
| भूल | त्रुटि, गलती, प्रमाद, भ्रम | त्रुटि को सुधार लेना चाहिए। |
| सुधार | परिष्कार, संशोधन, दुरुस्ती | भूल का संशोधन आवश्यक है। |
| सत्य-निष्ठा | सत्याग्रह, सच्चाई, ईमानदारी | ईमानदारी सर्वश्रेष्ठ नीति है। |
| धोखा | कपट, छल, धूर्तता, प्रवंचना | छल से मिली सफलता क्षणिक है। |
| उपकार | भलाई, सहायता, हित-चिंतन | उपकार करने वाले सदैव पूज्य होते हैं। |
| कृतज्ञता | आभार, धन्यवाद, ऋण-स्वीकार | गुरु के प्रति आभार सदा रहे। |
| कृतघ्न | नमकहराम, कृतनाशी, विश्वासघाती | विश्वासघाती को कोई पसंद नहीं करता। |
| पर्यावरण | परिवेश, वातावरण, परिस्थितिकी | पर्यावरण की रक्षा हमारा धर्म है। |
| प्रदूषण | अपवित्रता, कलुष, दूषण | वायु-प्रदूषण स्वास्थ्य को हानि पहुँचाता है। |
| साधना | तप, अभ्यास, अनुष्ठान, तपस्या | साधना से ही सिद्धि मिलती है। |
| ध्यान | समाधि, चिंतन, मनन | ध्यान से मन स्थिर होता है। |
| विचार | सोच, चिंतन, मनन, परामर्श | उत्कृष्ट विचार जीवन बदलते हैं। |
| भाषण देने वाला | वक्ता, उद्गाता, कथाकार | वक्ता की शैली मनमोहक थी। |
| सर्वसम्मति | एकमत, ऐकमत्य, सहमति | सदस्यों की सहमति से निर्णय हुआ। |
| मतभेद | असहमति, विरोध, द्वंद्व, विवाद | मतभेद को संवाद से सुलझाना चाहिए। |
| निमंत्रण | बुलावा, आमंत्रण, न्योता | विवाह का निमंत्रण प्राप्त हुआ। |
| मेहनत | परिश्रम, श्रम, उद्यम | मेहनत का फल मीठा होता है। |
| योद्धा | सैनिक, सिपाही, शूरवीर | सैनिक सीमा पर तैनात हैं। |
| भिखारी | याचक, मंगता, भिक्षुक | याचक को भोजन देना धर्म है। |
| दानी | उदार, दानशील, दाता | दानशील व्यक्ति समाज की पूँजी हैं। |
| चिंता | फिक्र, व्यग्रता, उद्विग्नता | निष्कारण चिंता त्यागें। |
| समीक्षा | विवेचन, परीक्षण, पुनरीक्षण | पुस्तक की समीक्षा प्रकाशित हुई। |
| खजाना | कोष, धनागार, सम्पदागृह | राज्य का कोष भरा हुआ था। |
| साक्षी | गवाह, द्रष्टा, अवलोकक | गवाह ने सच्चाई बयान की। |
| प्रलय | विनाश, संहार, महाविनाश | प्रलय में सृष्टि विलीन होती है। |
| सृष्टि-आरंभ | उत्पत्ति, आविर्भाव, सर्ग | सर्ग की गाथा पुराणों में है। |
| अनुभव | तजुर्बा, बोध, प्रत्यक्षीकरण | अनुभव से ज्ञान पक्का होता है। |
| परिश्रमी | उद्यमी, कर्मठ, श्रमिक | कर्मठ व्यक्ति ही सफल होते हैं। |
| आलसी | सुस्त, निकम्मा, प्रमादी | सुस्ती पतन की ओर ले जाती है। |
| अनुमति | इजाजत, स्वीकृति, सहमति | प्रबंधक की स्वीकृति मिल गई। |
| विलंब | देर, ढील, मंद-गति | कार्य में ढील नहीं होनी चाहिए। |
| शीघ्रता | तीव्रता, त्वरा, फुर्ती | त्वरा से निर्णय लिया गया। |
| आदेश | हुक्म, आज्ञा, निर्देश, फरमान | गुरु की आज्ञा शिरोधार्य है। |
| नियम | विधि, कानून, विधान, अनुशासन | नियम का पालन सभ्य नागरिक का धर्म है। |
| कर्तव्य | फर्ज, धर्म, दायित्व | देश-सेवा प्रत्येक का फर्ज है। |
| अधिकार | हक, स्वामित्व, प्राधिकार | हर नागरिक को शिक्षा का हक है। |
| सुरक्षा | रक्षा, संरक्षण, बचाव | वन की संरक्षण आवश्यक है। |
| खतरा | संकट, विपत्ति, आपदा, विपदा | बाढ़ से आपदा आई। |
| विश्वविद्यालय | महाविद्यालय, उच्चशिक्षा-केंद्र | महाविद्यालय में अनुसंधान हो रहा है। |
| शपथ | प्रतिज्ञा, व्रत, सौगंध | सत्य की प्रतिज्ञा अटल रहे। |
| हथियार चलाने वाला | योद्धा, सेनानी, शस्त्रधारी | शस्त्रधारी वीर युद्ध में उतरे। |
| नीति | सिद्धांत, नीतिशास्त्र, आचार | राज-नीति का पालन राजा का धर्म है। |
| कथन | वचन, उक्ति, कथनी | गांधी जी की उक्ति प्रेरक है। |
| चित्त | मन, अंतःकरण, हृदय | चित्त को स्थिर करो। |
| अहंकार | अभिमान, गर्व, दर्प | अहंकार पतन का कारण है। |
| नम्रता | विनम्रता, सौजन्य, दीनता | विनम्रता महान गुण है। |
| शिक्षा | विद्या, अध्ययन, अध्यापन, ज्ञानार्जन | शिक्षा सबसे बड़ा निवेश है। |
| संस्कृति | सभ्यता, रहन-सहन, आचार-विचार | भारतीय संस्कृति विविधतापूर्ण है। |
| मंदिर में पुजारी | पुरोहित, आचार्य, याज्ञिक | पुरोहित ने पूजा सम्पन्न की। |
| दीवार | प्राचीर, भित्ति, दीवाल | पुरानी भित्ति जर्जर है। |
| चौपाल | पंचायत-भवन, ग्राम-समा | गाँव की चौपाल में बैठक हुई। |
| सुख-शांति | स्वास्थ्य-लाभ, सौख्य | परिवार में सौख्य रहे। |
| गुरुत्व | भार, वजन, गुरुता | धरती का गुरुत्व वस्तुओं को खींचता है। |
| तेज | प्रखर, दीप्त, उज्ज्वल | विद्वान का तेज मुख पर झलकता था। |
| पोषण | पालन, पालन-पोषण, भरण | माता-पिता संतान का पोषण करते हैं। |
| समर्पण | न्यौछावर, अर्पण, आत्मनिवेदन | गुरु के चरणों में समर्पण ही सर्वस्व है। |
| कृषि | खेती, किसानी, कृषिकर्म | भारत कृषि-प्रधान देश है। |
| बाजार | हाट, बाज़ार, विपणि | हाट में वस्तुओं की बिक्री हो रही है। |
| व्यापार | वाणिज्य, सौदागरी, क्रय-विक्रय | वाणिज्य से राष्ट्र समृद्ध होता है। |
| प्रसिद्धि | ख्याति, कीर्ति, नाम | उनकी कीर्ति चारों ओर फैली। |
| बदनामी | अपयश, कलंक, अपकीर्ति | अपयश से बचना चाहिए। |
| दया | करुणा, रहम, अनुकंपा | दया धर्म का मूल है। |
| निर्दयता | क्रूरता, निष्ठुरता, निर्ममता | निष्ठुरता पशुता है। |
| गुप्त | छिपा हुआ, गोपनीय, प्रच्छन्न | गोपनीय पत्र को सहेजकर रखें। |
| प्रकट | सार्वजनिक, अभिव्यक्त, उद्घाटित | सत्य देर-सवेर प्रकट हो ही जाता है। |
| चतुराई | चपलता, कौशल, होशियारी | चतुराई से कार्य शीघ्र होता है। |
| गंभीर | धीर, शांत, स्थिरचित्त | वह गंभीर व्यक्ति है। |
| बदला | प्रतिशोध, प्रतिकार, प्रतिदान | बदले की भावना त्यागें। |
| क्षमा | माफी, क्षमाशीलता, सहिष्णुता | क्षमा वीर का भूषण है। |
| त्याग | परित्याग, छोड़ना, तर्क | भोग का त्याग तप है। |
| अभिमान | दर्प, गर्व, मद | अभिमान करने से पतन होता है। |
| दैव | भाग्य, विधि, नियति, प्रारब्ध | नियति अटल है। |
| वायुयान | हवाई-जहाज, विमान, उड़न-यान | विमान आकाश में उड़ चला। |
| रेल | रेलगाड़ी, ट्रेन, धूम्रशकट | रेल से यात्रा सुगम है। |
| नौका | नाव, तरणी, पोत, जहाज | तरणी सागर पार कर गई। |
| घर्षण | रगड़, घिसाव, संघर्ष | रगड़ से ऊष्मा उत्पन्न होती है। |
| संघर्ष | झगड़ा, द्वंद्व, कलह | जीवन संघर्षों का नाम है। |
प्रयोग के नियम
- प्रत्येक पर्यायवाची का स्वतंत्र प्रयोग संभव नहीं — सन्दर्भ देखकर ही शब्द चुनें।
- काव्य में छंद तथा तुक के अनुसार शब्द का चयन करें।
- औपचारिक लेखन में तत्सम पर्याय उपयुक्त, अनौपचारिक में तद्भव।
- पर्यायवाची को रटने के स्थान पर वाक्य में प्रयोग करके याद रखें।
सामान्य गलतियाँ
- हर पर्यायवाची को हर जगह प्रयोग कर देना — जैसे ‘जल’ को ‘मूत्र’ समझ लेना (जबकि ‘मूत्र’ भी जल का पर्याय है, किंतु विशिष्ट सन्दर्भ में)।
- ‘स्त्री’ के लिए ‘अबला’ का प्रयोग आधुनिक लेखन में आपत्तिजनक।
- तत्सम एवं तद्भव पर्यायों का मिश्रण — एक ही वाक्य में ‘अग्नि’ और ‘आग’ दोनों का अनावश्यक प्रयोग।
अभ्यास प्रश्न
- ‘पृथ्वी’ के पाँच पर्यायवाची लिखिए।
- ‘कमल’ के आठ पर्यायवाची शब्द लिखकर किन्हीं दो का वाक्य प्रयोग कीजिए।
- निम्नलिखित में पर्यायवाची युग्म छाँटिए — अनल, पावक, सलिल, तोय।
- ‘गंगा’ के पाँच पर्याय लिखिए तथा एक वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- पर्यायवाची और अनेकार्थी में क्या अंतर है? उदाहरण दीजिए।
Frequently Asked Questions
पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं?
जिन शब्दों के अर्थ समान या लगभग समान होते हैं, उन्हें पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहते हैं। जैसे — कमल के पर्यायवाची जलज, पंकज, सरोज, अरविंद।
क्या सभी पर्यायवाची शब्द हर स्थान पर प्रयोग किए जा सकते हैं?
नहीं। पर्यायवाची शब्दों में सूक्ष्म अर्थभेद होता है, अतः सन्दर्भ के अनुसार ही उचित शब्द का चयन करना चाहिए।
UPSC में पर्यायवाची से कितने अंक का प्रश्न आता है?
हिंदी अनिवार्य प्रश्नपत्र में पर्यायवाची/विलोम/मुहावरे के खंड से 10–20 अंक तक के प्रश्न प्रायः पूछे जाते हैं।
सूर्य के पाँच प्रमुख पर्यायवाची क्या हैं?
रवि, भानु, दिनकर, दिवाकर, आदित्य।
तत्सम पर्यायवाची अधिक उपयुक्त कब होते हैं?
औपचारिक, साहित्यिक एवं शास्त्रीय लेखन में तत्सम पर्यायवाची अधिक उपयुक्त माने जाते हैं।
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