आतंकी फंडिंग (terror funding) यानी वह पैसा जिससे आतंकी संगठन चलते हैं, और इस पैसे को रोकना अक्सर हथियार पकड़ने से ज़्यादा असरदार होता है — क्योंकि बंदूक की जगह भरना आसान है, पैसे की नहीं। भारत में यह पैसा नक़ली नोट, हवाला, आयात-निर्यात के फ़र्ज़ी बिल, नशीले पदार्थ और अब बढ़ते हुए क्रिप्टो के रास्ते चलता है। इसके ख़िलाफ़ खड़ा ढाँचा दो हिस्सों से बना है — एक अंतरराष्ट्रीय मानक, और एक घरेलू तंत्र जो उसे ज़मीन पर लागू करता है।
यह मनी लॉन्ड्रिंग से अलग क्यों है
दोनों जुड़े हुए हैं, पर एक नहीं हैं। और दोनों को एक मान लेने से क़ानून लागू करने का पूरा डिज़ाइन ग़लत बैठ जाता है।
- मनी लॉन्ड्रिंग (money laundering) ग़लत तरीक़े से कमाए पैसे को जायज़ दिखाने का काम करती है। स्रोत आपराधिक होता है, मंज़िल क़ानूनी।
- आतंकी फंडिंग (terror financing) अक्सर जायज़ पैसा — चंदा, कारोबार की आमदनी, धर्मार्थ दान — लेकर उसे ग़ैरक़ानूनी काम की तरफ़ मोड़ देता है। स्रोत साफ़ हो सकता है, मंज़िल नहीं।
- इसका मतलब। सिर्फ़ स्रोत खंगालने वाली जाँच आतंकी फंडिंग नहीं पकड़ पाएगी। इसीलिए संदिग्ध लेनदेन रिपोर्टिंग को स्रोत के साथ-साथ मंज़िल और पैटर्न भी देखना पड़ता है।
- रक़म का पैमाना। आतंकी ऑपरेशन सस्ते होते हैं। बड़े हमले इतनी छोटी रक़म में अंजाम दिए गए हैं कि वे ज़्यादातर रिपोर्टिंग सीमा से नीचे रह जाएँ — अमल की असली दिक़्क़त एक वाक्य में यही है।
मनी लॉन्ड्रिंग पर हमारा नोट प्लेसमेंट, लेयरिंग और इंटीग्रेशन के चक्र को विस्तार से समझाता है।
नक़ली भारतीय नोट
- बेहद बारीक़ी से छपे नक़ली नोट, जो अक्सर भारत के बाहर छपते हैं और नेपाल, बांग्लादेश, म्यांमार और खाड़ी के रास्तों से भेजे जाते हैं।
- दोहरा मक़सद: आतंकी मॉड्यूल को पैसा देना, और मुद्रा पर लोगों का भरोसा तोड़ना। इसीलिए इसे आम जालसाज़ी नहीं, आर्थिक युद्ध माना जाता है।
- 2016 की नोटबंदी के घोषित उद्देश्यों में FICN नेटवर्क तोड़ना शामिल था। नई सुरक्षा विशेषताओं ने कुछ समय के लिए इनका चलन रोका, हालाँकि जालसाज़ी बाद में ख़ुद को ढाल चुकी है।
- इस पर अमल गृह मंत्रालय के अंतर्गत FICN समन्वय समूह (FCORD) और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की अलग सेल के ज़रिए चलता है।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 489A से 489E, जो अब भारतीय न्याय संहिता में आ चुकी हैं, जालसाज़ी को अपराध बनाती हैं, और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) उच्च गुणवत्ता की जालसाज़ी को आतंकी कृत्य मानता है।
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बाक़ी रास्ते
- हवाला। भरोसे और दलालों के आपसी हिसाब-किताब पर चलने वाली अनौपचारिक व्यवस्था, जो बैंक में कोई निशान नहीं छोड़ती। बैंकिंग पर टिकी निगरानी यहाँ तक पहुँचती ही नहीं।
- व्यापार के ज़रिए लॉन्ड्रिंग। आयात-निर्यात के बिल कम या ज़्यादा दिखाकर सीमा पार पैसा पहुँचाना। यह सबसे ज़्यादा इस्तेमाल होने वाला और सबसे मुश्किल से पकड़ में आने वाला तरीक़ा है, क्योंकि यह जायज़ कारोबार के भीतर छिपा रहता है।
- नारको-आतंकवाद। पंजाब सीमा और अरब सागर के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी, जिसमें अब ड्रोन से सीमा पार नशा और हथियार दोनों गिराए जाने लगे हैं।
- शेल कंपनियाँ और फ़र्ज़ी बिल, और धर्मार्थ संस्थाओं और NGO का दुरुपयोग — यही वजह है कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) को कड़ा किया गया।
- रियल एस्टेट, सोना और हीरे का कारोबार, जो बड़े पैमाने पर नक़दी खपा लेते हैं और जहाँ पैसे का स्रोत पूछने की शर्तें कमज़ोर हैं।
- क्रिप्टो-संपत्तियाँ, जो छद्म नाम से सीमा पार चली जाती हैं। भारत ने 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को मनी लॉन्ड्रिंग रोधी दायरे में ला दिया।
- उगाही और वसूली उग्रवाद प्रभावित इलाक़ों में, जो लंबे समय तक वामपंथी उग्रवादी और पूर्वोत्तर के गुटों की बड़ी आमदनी रही है।
अंतरराष्ट्रीय ढाँचा
- वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF), जिसकी स्थापना 1989 में हुई, इस क्षेत्र का वैश्विक मानक तय करता है। इसकी 40 सिफ़ारिशें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकने की ज़िम्मेदारियाँ तय करती हैं, और इसकी ग्रे और ब्लैक सूची कॉरेस्पॉन्डेंट बैंकिंग की लागत और निवेशकों की झिझक के ज़रिए सचमुच आर्थिक दबाव बनाती है। भारत 2010 से इसका पूर्ण सदस्य है, और 2024 की म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट ने भारत को सबसे ऊपरी श्रेणी रेगुलर फ़ॉलो-अप में रखा।
- एशिया पैसिफ़िक ग्रुप ऑन मनी लॉन्ड्रिंग, FATF जैसा क्षेत्रीय निकाय, जिसका भारत सदस्य है।
- UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267 और उसकी प्रतिबंध समिति, जो व्यक्तियों और संस्थाओं को सूचीबद्ध करती है और संपत्ति फ़्रीज़, यात्रा प्रतिबंध और हथियार प्रतिबंध अनिवार्य करती है। भारत ने इसी रास्ते 2019 में मसूद अज़हर को सूचीबद्ध कराया।
- UNSC प्रस्ताव 1373 (2001), जो सभी देशों को आतंकी फंडिंग को अपराध घोषित करने के लिए बाध्य करता है, और आतंकवाद के वित्तपोषण के दमन पर अंतरराष्ट्रीय अभिसमय, 1999।
- एग्मॉन्ट ग्रुप, वित्तीय ख़ुफ़िया इकाइयों का नेटवर्क, जिसमें भारत की FIU-IND 2007 में शामिल हुई।
- बेसल समिति के ग्राहक जाँच (customer due diligence) मानक, और कॉमन रिपोर्टिंग स्टैंडर्ड के तहत वित्तीय सूचनाओं का स्वतः आदान-प्रदान।
- भारत की अपनी पहल: 2022 में नई दिल्ली में हुआ “नो मनी फ़ॉर टेरर” मंत्रिस्तरीय सम्मेलन, और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक अभिसमय (CCIT) की पुरानी माँग, जो आतंकवाद की सहमत परिभाषा न बन पाने के कारण अटकी हुई है।
भारत का घरेलू तंत्र
- धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (PMLA), जिसे प्रवर्तन निदेशालय लागू करता है और जिसके पास संपत्ति कुर्क करने, तलाशी लेने और मुक़दमा चलाने की शक्तियाँ हैं।
- ग़ैरक़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), जिसके 2019 संशोधन से अब सिर्फ़ संगठनों को नहीं, व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है, और जो आतंकी कृत्यों के लिए धन जुटाने को अपराध बनाता है।
- वित्तीय ख़ुफ़िया इकाई – भारत (FIU-IND), जहाँ संदिग्ध लेनदेन और नक़द लेनदेन की सारी रिपोर्टें जमा होती हैं।
- राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA), जिसकी आतंकी फंडिंग और नक़ली मुद्रा के लिए अलग सेल है और जिसका अधिकार क्षेत्र 2019 के संशोधन के बाद बढ़ा दिया गया।
- RBI के अपने ग्राहक को जानिए (KYC) और मनी लॉन्ड्रिंग रोधी निर्देश, जो 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं तक बढ़ा दिए गए।
- FCRA के तहत संस्थाओं की विदेशी फंडिंग पर नियंत्रण, और नारको-आतंक कड़ियों के ख़िलाफ़ NDPS अधिनियम पर अमल।
अमल कहाँ कमज़ोर पड़ता है
- हवाला अनौपचारिक और भरोसे पर टिका है, इसलिए बैंकिंग व्यवस्था पर बनी निगरानी उस तक पहुँच ही नहीं पाती।
- व्यापार आधारित लॉन्ड्रिंग पकड़ने के लिए सीमा शुल्क के आँकड़ों और वित्तीय ख़ुफ़िया जानकारी को एक साथ जोड़ना पड़ता है, और यह जुड़ाव अब भी कमज़ोर है।
- क्रिप्टो पर नियम दुनिया भर में एक जैसे नहीं हैं, इसलिए पैसा उसी देश की तरफ़ खिसक जाता है जहाँ छूट सबसे ज़्यादा हो।
- PMLA में सज़ा की दर कम है, जबकि संपत्ति कुर्की की दर ऊँची। इससे यह सवाल उठता है कि इस क़ानून का इस्तेमाल मुक़दमा चलाने के लिए हो रहा है या दबाव बनाने के लिए।
- FATF का दबाव राजनीतिक भी है। सूची में डालने के फ़ैसले सब पर एक जैसे लागू नहीं हुए, और 1267 समिति में वीटो चलता है, जिसने भारत की माँगी गई कई घोषणाओं को बार-बार टाला है।
- छोटी रक़में सीमा से बच निकलती हैं। हमले सस्ते होते हैं, इसलिए जो लेनदेन सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं वही अक्सर रिपोर्ट में आने की सबसे कम संभावना रखते हैं।
ढाँचागत बात यह है कि एक रास्ता बंद होते ही पैसा अगले रास्ते पर चला जाता है। इसलिए एजेंसियों को बैंकिंग, व्यापार, नशा और क्रिप्टो — चारों मोर्चों पर एक साथ आगे बढ़ना पड़ता है, वरना वह सिर्फ़ बहाव की दिशा बदल देता है, बहाव नहीं रोकता।
सामान्य प्रश्न
आतंकी फंडिंग क्या है?
वह पैसा जिससे आतंकी संगठन और उनके ऑपरेशन चलते हैं। मनी लॉन्ड्रिंग से उलट, यह अक्सर जायज़ पैसा — चंदा, कारोबार की आमदनी, धर्मार्थ दान — लेकर उसे ग़ैरक़ानूनी मक़सद की तरफ़ मोड़ देता है, इसीलिए सिर्फ़ स्रोत खंगालने वाली जाँच इसे पकड़ नहीं पाती।
आतंकी फंडिंग मनी लॉन्ड्रिंग से किस तरह अलग है?
मनी लॉन्ड्रिंग आपराधिक पैसे को जायज़ दिखाती है — यानी ग़ैरक़ानूनी स्रोत से क़ानूनी मंज़िल तक। आतंकी फंडिंग अक्सर उलटी दिशा में चलती है: साफ़ पैसा ग़ैरक़ानूनी मंज़िल तक। इसलिए पकड़ने के लिए सिर्फ़ स्रोत नहीं, मंज़िल और पैटर्न देखना पड़ता है।
FATF क्या है और भारत के लिए इसका महत्व क्या है?
वित्तीय कार्रवाई कार्य बल, जिसकी स्थापना 1989 में हुई, मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग रोकने का वैश्विक मानक तय करता है। इसकी 40 सिफ़ारिशें और ग्रे-ब्लैक सूची असली आर्थिक लागत थोपती हैं। भारत 2010 से पूर्ण सदस्य है और 2024 की म्यूचुअल इवैल्यूएशन रिपोर्ट में उसे सबसे ऊपरी श्रेणी रेगुलर फ़ॉलो-अप में रखा गया।
नक़ली भारतीय नोट क्या हैं और वे सुरक्षा के लिए ख़तरा क्यों हैं?
बेहद बारीक़ी से छपे नक़ली नोट, जो अक्सर भारत के बाहर छपकर पड़ोसी देशों के रास्ते भेजे जाते हैं। इनका दोहरा मक़सद होता है — आतंकी मॉड्यूल को पैसा देना और मुद्रा पर भरोसा तोड़ना। इसीलिए इन्हें आम जालसाज़ी नहीं, आर्थिक युद्ध माना जाता है।
UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267 क्या है?
यह प्रस्ताव एक प्रतिबंध समिति बनाता है, जो घोषित आतंकी संगठनों से जुड़े व्यक्तियों और संस्थाओं को सूचीबद्ध करती है और सदस्य देशों से उनकी संपत्ति फ़्रीज़ करने, यात्रा प्रतिबंध लगाने और हथियार प्रतिबंध लागू करने को कहती है। भारत ने इसी तंत्र से 2019 में मसूद अज़हर को सूचीबद्ध कराया।
आतंकी फंडिंग पर भारत के कौन-से क़ानून लागू होते हैं?
मुख्य रूप से धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002, जिसे प्रवर्तन निदेशालय लागू करता है, और UAPA, जिसके 2019 संशोधन से व्यक्तियों को भी आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। FIU-IND संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्टें जुटाती है, और NIA आतंकी फंडिंग और नक़ली मुद्रा के लिए अलग सेल चलाती है।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) की स्थापना कब हुई?
- (a) 1979
- (b) 1989
- (c) 1999
- (d) 2001
उत्तर: (b) 1989
2. FATF के मुख्य मानक में कितनी सिफ़ारिशें हैं?
- (a) 20
- (b) 30
- (c) 40
- (d) 49
उत्तर: (c) 40
3. भारत FATF का पूर्ण सदस्य कब बना?
- (a) 2006
- (b) 2008
- (c) 2010
- (d) 2014
उत्तर: (c) 2010
4. UN सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव 1267 मुख्य रूप से किससे जुड़ा है?
- (a) परमाणु अप्रसार
- (b) आतंकवादियों और संस्थाओं को सूचीबद्ध करने वाली प्रतिबंध समिति
- (c) समुद्री डकैती
- (d) सीमा पार साइबर अपराध
उत्तर: (b) आतंकवादियों और संस्थाओं को सूचीबद्ध करने वाली प्रतिबंध समिति
5. UAPA के 2019 संशोधन के बाद आतंकवादी घोषित किया जा सकता है:
- (a) सिर्फ़ संगठनों को
- (b) सिर्फ़ विदेशी नागरिकों को
- (c) व्यक्तियों को भी और संगठनों को भी
- (d) राज्य पक्षकारों को
उत्तर: (c) व्यक्तियों को भी और संगठनों को भी
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- भारत में आतंकी फंडिंग के बड़े स्रोतों के रूप में नक़ली मुद्रा और मनी लॉन्ड्रिंग पर चर्चा कीजिए, और इन्हें रोकने के लिए हुई अंतरराष्ट्रीय कार्रवाइयों को बताइए। (15 अंक, 250 शब्द)
- आतंकी फंडिंग रोकने में FATF की भूमिका और सदस्य देशों द्वारा पालन के तरीक़ों का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- “आतंकी वित्तपोषण अक्सर साफ़ पैसे को गंदे मक़सद तक पहुँचाता है।” क़ानून लागू करने के डिज़ाइन पर इसके निहितार्थ बताइए। (10 अंक, 150 शब्द)
- भारत में आतंकी फंडिंग के उभरते रास्तों के रूप में व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग और नारको-आतंकवाद पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- PMLA और UAPA के संदर्भ में आतंकी फंडिंग के ख़िलाफ़ भारत के घरेलू क़ानूनी ढाँचे का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)