UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारतीय संघ की संवैधानिक बनावट: अनुच्छेद 245 से 263 और एकात्मक झुकाव

अवशिष्ट शक्तियाँ संसद के पास हैं, और यही भारतीय संघ का गुरुत्व केंद्र तय करता है। अनुच्छेद 245 से 263 तक के प्रावधान, उनका असल इस्तेमाल, और वह संयम जो इस व्यवस्था को संघ की तरह चलाता है।

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पूछिए कि अवशिष्ट शक्तियाँ (residuary powers) किसके पास हैं, और आपने उस संघ का गुरुत्व केंद्र पहचान लिया। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में ये राज्यों के पास हैं। भारत में अनुच्छेद 248 इन्हें सिर्फ़ संसद को देता है। भारतीय संघ की संवैधानिक बनावट इसी चुनाव के इर्द-गिर्द खड़ी है, और यही वजह है कि इस व्यवस्था को संघीय नहीं, अर्ध-संघीय कहा जाता है।

विधायी संबंध: अनुच्छेद 245 से 255

अनुच्छेदप्रावधानझुकाव
245संसद पूरे भारत के लिए क़ानून बनाती है; राज्य विधानमंडल सिर्फ़ अपने राज्य के लिएकेंद्र
246सातवीं अनुसूची से विषयों का बँटवारा: संघ सूची 97, राज्य सूची 66, समवर्ती सूची 47केंद्र
246Aसंसद और राज्य विधानमंडलों को समवर्ती GST शक्ति (101वाँ संशोधन, 2016)सहकारी
248अवशिष्ट शक्तियाँ सिर्फ़ संसद के पासकेंद्र
249राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत से संसद को राष्ट्रहित में राज्य सूची के विषय पर क़ानून बनाने की इजाज़त दे सकती है; प्रस्ताव एक साल चलता है और दोहराया जा सकता हैकेंद्र
250राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान संसद राज्य सूची के विषयों पर क़ानून बना सकती हैकेंद्र
252दो या ज़्यादा राज्यों के अनुरोध पर संसद राज्य सूची के विषय पर क़ानून बना सकती हैसहकारी
253अंतरराष्ट्रीय संधियाँ लागू करने के लिए संसद किसी भी विषय पर क़ानून बना सकती हैकेंद्र
254विरोधाभास: केंद्रीय क़ानून ऊपर रहता है; राष्ट्रपति की स्वीकृति पाया राज्य क़ानून उस राज्य में ऊपर रहता हैकेंद्र
200 / 201राज्यपाल राज्य विधेयक राष्ट्रपति के लिए सुरक्षित रख सकते हैं; राष्ट्रपति स्वीकृति रोक सकते हैंकेंद्र

असल में इनका इस्तेमाल कैसे हुआ।

  • अनुच्छेद 246 और प्रविष्टि 97। अवशिष्ट शक्ति के सहारे साइबर अपराध, डेटा संरक्षण, बाह्य अंतरिक्ष, क्रिप्टोकरेंसी, ड्रोन और उपग्रह संचार जैसे विषय संभाले गए, जो सूचियाँ बनाते वक़्त थे ही नहीं।
  • अनुच्छेद 249। 1952 में आवश्यक वस्तुओं के लिए इस्तेमाल हुआ; 2020 के कृषि क़ानून विवाद में इसका मौजूद होना ही केंद्र-राज्य समीकरणों को आकार देता रहा।
  • अनुच्छेद 250। 1962 और 1971 के संघर्षों में इस्तेमाल हुआ, और आपातकाल ख़त्म होने के छह महीने बाद वे क़ानून ख़ुद ही समाप्त हो गए।
  • अनुच्छेद 252। पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम 1955 और मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994, दोनों राज्यों के अपने अनुरोध पर बने।
  • अनुच्छेद 253। CITES को लागू करने वाला वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और स्टॉकहोम घोषणा को लागू करने वाला पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, दोनों संधि के रास्ते राज्यों की सहमति को किनारे रखकर बने।
  • अनुच्छेद 254। केरल किराया नियंत्रण अधिनियम राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ ऊपर रहा, हालाँकि एम. करुणानिधि बनाम भारत संघ (1979) ने पुष्टि की कि केंद्र नया क़ानून बनाकर उसे पलट सकता है।
  • अनुच्छेद 200 और 201। तमिलनाडु का NEET छूट विधेयक, केरल का ऑनलाइन गेमिंग विनियमन विधेयक और जातीय संघर्ष के दौरान मणिपुर के विधेयक। पंजाब राज्य बनाम राज्यपाल के प्रधान सचिव (2023) में तय हुआ कि राज्यपाल अनिश्चित काल तक स्वीकृति नहीं रोक सकते।

प्रशासनिक संबंध: अनुच्छेद 256 से 263

अनुच्छेद 256 राज्यों पर यह ज़िम्मेदारी डालता है कि केंद्रीय क़ानूनों का पालन सुनिश्चित हो, यानी राज्य की कार्यपालिका शक्ति संसद के क़ानून के रास्ते में नहीं आ सकती। 2020 में जब पंजाब ने कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ अपना क़ानून पारित किया, तब केंद्र के रुख़ के पीछे यही संवैधानिक तर्क था।

अनुच्छेद 257 राज्य की कार्यपालिका शक्ति को संघ की कार्यपालिका शक्ति के आड़े आने से रोकता है, और तय मामलों में केंद्र को निर्देश देने का अधिकार देता है।

अनुच्छेद 263 अंतर-राज्य परिषद का प्रावधान करता है, जो राज्यों के आपसी विवादों और साझा हित के विषयों की जाँच करके सलाह देती है। सहयोग के लिए यही मुख्य संवैधानिक मंच है, और इसकी बैठकें अनियमित होना लगातार आलोचना का विषय रहा है।

बनावट में छिपा पैटर्न

तालिका में झुकाव गिन लीजिए और दिशा साफ़ हो जाती है: आठ केंद्र की ओर झुके प्रावधानों के मुक़ाबले सिर्फ़ दो सहकारी।

यह जान-बूझकर किया गया था। संविधान सभा ने यह दस्तावेज़ विभाजन और रियासतों के विलय के बीच गढ़ा, और निर्माताओं ने बनावट का पलड़ा संघ को जोड़े रखने की ओर झुकाया। अंबेडकर की अपनी सफ़ाई यह थी कि संविधान सामान्य समय में संघीय रह सकता है और हालात माँगें तो एकात्मक हो सकता है।

इसका नतीजा यह है कि भारतीय संघवाद ढाँचागत गारंटियों के बजाय परंपरा और संयम पर टिका है। अनुच्छेद 253 केंद्र को इजाज़त देता है कि वह कोई संधि करके राज्य सूची के किसी भी विषय पर क़ानून बना ले। अनुच्छेद 249 राज्यसभा के प्रस्ताव से यही इजाज़त देता है। अनुच्छेद 201 राज्य के विधेयक को अनिश्चित काल तक लटकाने की इजाज़त देता था, कम से कम तब तक जब तक उच्चतम न्यायालय ने 2023 में इसके उलट नहीं कहा।

इनमें से किसी का भी इस्तेमाल उसकी पूरी संवैधानिक हद तक नहीं हुआ है। यही संयम, न कि संविधान का पाठ, इस व्यवस्था को एक संघ की तरह चलाता है।

आगे का रास्ता

  • अंतर-राज्य परिषद की बैठक नियमित कीजिए, जैसा संविधान सोचता है, न कि कभी-कभार।
  • अनुच्छेद 200 और 201 के तहत समय-सीमा तय कीजिए, ताकि 2023 के फ़ैसले को क़ानूनी शक्ल मिल सके।
  • अनुच्छेद 252 का ज़्यादा इस्तेमाल कीजिए, क्योंकि राज्यों का ख़ुद संसद को क़ानून बनाने के लिए बुलाना वही सहकारी रास्ता है जो निर्माताओं ने दिया था, और वह लगभग बरता ही नहीं जाता।
  • संधि वाले रास्ते पर संयम रखिए। अनुच्छेद 253 राज्य सूची के विषयों के लिए आम शॉर्टकट नहीं बन जाना चाहिए।
  • समवर्ती सूची के क़ानूनों पर परामर्श को नियमबद्ध कीजिए, ताकि विरोधाभास के विवाद अदालत में जाने के बजाय पहले ही टल जाएँ।

यह बनावट हड्डियों में एकात्मक है और बरताव में संघीय। यही फ़ासला वह जगह है जहाँ पूरा केंद्र-राज्य रिश्ता तय होता है, और इसीलिए भारत में संवैधानिक परंपरा उससे कहीं ज़्यादा मायने रखती है जितना अकेला पाठ बताता है।

सामान्य प्रश्न

संविधान विधायी विषयों का बँटवारा कैसे करता है?

अनुच्छेद 246 के तहत सातवीं अनुसूची से: 97 विषयों की संघ सूची, 66 की राज्य सूची और 47 की समवर्ती सूची। 2016 में 101वें संशोधन से जोड़ा गया अनुच्छेद 246A इसमें GST के लिए एक विशेष समवर्ती कराधान शक्ति और जोड़ देता है।

भारत में अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास हैं?

अनुच्छेद 248 के तहत सिर्फ़ संसद के पास। जो विषय राज्य या समवर्ती सूची में नहीं है, वह संघ के हिस्से आता है। यह अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से उलटा है, और भारत के अर्ध-संघीय चरित्र का सबसे तीखा ढाँचागत संकेत है। इसी के सहारे क्रिप्टोकरेंसी, ड्रोन, साइबर अपराध, डेटा संरक्षण, बाह्य अंतरिक्ष और उपग्रह संचार पर क़ानून बने हैं।

अनुच्छेद 249 क्या इजाज़त देता है?

राज्यसभा दो-तिहाई बहुमत के प्रस्ताव से संसद को राष्ट्रहित में राज्य सूची के किसी विषय पर क़ानून बनाने की इजाज़त दे सकती है। यह प्रस्ताव एक साल के लिए वैध रहता है और दोहराया जा सकता है। 1952 में आवश्यक वस्तुओं के लिए इसका इस्तेमाल हुआ था।

अनुच्छेद 252 और अनुच्छेद 253 में क्या फ़र्क़ है?

अनुच्छेद 252 सहकारी है: संसद राज्य सूची के विषय पर तभी क़ानून बनाती है जब दो या ज़्यादा राज्य ख़ुद अनुरोध करें, जैसा पुरस्कार प्रतियोगिता अधिनियम 1955 और मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 में हुआ। अनुच्छेद 253 केंद्र की ओर झुका है: अंतरराष्ट्रीय संधि लागू करने के लिए संसद राज्य सूची समेत किसी भी विषय पर, राज्यों की सहमति के बिना, क़ानून बना सकती है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 इसी के तहत बने।

अनुच्छेद 254 का विरोधाभास नियम क्या है?

समवर्ती सूची के किसी विषय पर राज्य का क़ानून केंद्रीय क़ानून से टकराए तो केंद्रीय क़ानून ऊपर रहता है। जिस राज्य क़ानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिल चुकी हो, वह उस राज्य में ऊपर रहता है, पर संसद बाद में नया क़ानून बनाकर उसे पलट सकती है, जैसा एम. करुणानिधि बनाम भारत संघ (1979) में तय हुआ।

अनुच्छेद 200 और 201 क्या प्रावधान करते हैं?

राज्यपाल किसी राज्य विधेयक को राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकते हैं, और राष्ट्रपति स्वीकृति रोक सकते हैं। ये संघवाद के टकराव बिंदु बन चुके हैं, जिनमें तमिलनाडु का NEET छूट विधेयक और केरल का ऑनलाइन गेमिंग विनियमन विधेयक शामिल हैं। पंजाब राज्य बनाम राज्यपाल के प्रधान सचिव (2023) में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राज्यपाल अनिश्चित काल तक स्वीकृति नहीं रोक सकते।

अनुच्छेद 256 और 257 राज्यों से क्या माँगते हैं?

अनुच्छेद 256 राज्यों पर यह ज़िम्मेदारी डालता है कि केंद्रीय क़ानूनों का पालन सुनिश्चित हो, यानी राज्य की कार्यपालिका शक्ति संसद के क़ानून के आड़े नहीं आ सकती। अनुच्छेद 257 कहता है कि राज्य की कार्यपालिका शक्ति संघ की कार्यपालिका शक्ति के रास्ते में नहीं आनी चाहिए, और तय मामलों में केंद्र को राज्यों को निर्देश देने देता है।

अनुच्छेद 263 क्या है?

यह अंतर-राज्य परिषद का प्रावधान करता है, जो राज्यों के बीच विवादों की जाँच करके सलाह देती है और साझा हित के विषयों पर पड़ताल और चर्चा करती है। सहकारी संघवाद के लिए यही मुख्य संवैधानिक मंच है, और इसकी बैठकें अनियमित रूप से होती रही हैं।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

  1. भारतीय संविधान के तहत अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास हैं?
    (a) राज्यों के पास
    (b) संसद के पास
    (c) समवर्ती सूची में
    (d) उच्चतम न्यायालय के पास
    उत्तर: (b) अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया के उलट, अनुच्छेद 248 अवशिष्ट शक्तियाँ केवल संसद को देता है।
  2. 101वें संशोधन से जोड़ा गया अनुच्छेद 246A किससे जुड़ा है?
    (a) आपातकालीन शक्तियाँ
    (b) वस्तु एवं सेवा कर
    (c) अंतर-राज्य व्यापार
    (d) अवशिष्ट शक्तियाँ
    उत्तर: (b) इसने पहली समवर्ती कराधान शक्ति बनाई, जो अनुच्छेद 279A के तहत GST परिषद से चलती है।
  3. मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम 1994 किसके तहत बना?
    (a) अनुच्छेद 249
    (b) अनुच्छेद 250
    (c) अनुच्छेद 252
    (d) अनुच्छेद 253
    उत्तर: (c) अनुच्छेद 252 दो या ज़्यादा राज्यों के अनुरोध पर संसद को राज्य सूची के विषय पर क़ानून बनाने देता है।
  4. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 किस शक्ति के तहत बना?
    (a) अनुच्छेद 249
    (b) अनुच्छेद 252
    (c) अनुच्छेद 253
    (d) अनुच्छेद 254
    उत्तर: (c) अनुच्छेद 253 अंतरराष्ट्रीय समझौते लागू करने के लिए क़ानून बनाने देता है, यहाँ CITES के दायित्व।
  5. पंजाब राज्य बनाम राज्यपाल के प्रधान सचिव (2023) में उच्चतम न्यायालय ने राज्यपालों के बारे में क्या कहा?
    (a) उन्हें हर विधेयक को स्वीकृति देनी होगी
    (b) वे अनिश्चित काल तक स्वीकृति नहीं रोक सकते
    (c) वे बिना कारण बताए कोई भी विधेयक सुरक्षित रख सकते हैं
    (d) उन्हें धन विधेयकों पर पूर्ण वीटो प्राप्त है
    उत्तर: (b) यह फ़ैसला अनुच्छेद 200 और 201 के तहत स्वीकृति देने या रोकने में अनिश्चित देरी पर था।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. भारतीय संघवाद की संवैधानिक बनावट में एक व्यवस्थित एकात्मक झुकाव है। विधायी शक्तियों के बँटवारे के संदर्भ में परीक्षण कीजिए। (250 शब्द)
  2. अनुच्छेद 249 से 254 तक के सहकारी और केंद्र की ओर झुके प्रावधानों की तुलना कीजिए और व्यवहार में उनके इस्तेमाल का आकलन कीजिए। (250 शब्द)
  3. अनुच्छेद 200 और 201 केंद्र-राज्य संबंधों में टकराव के बिंदु बन गए हैं। हाल के उदाहरणों के साथ चर्चा कीजिए। (250 शब्द)
  4. संघ के पास अवशिष्ट शक्तियाँ होना भारत के अर्ध-संघीय चरित्र का सबसे तीखा संकेत है। आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)
  5. सहकारी संघवाद के औज़ार के रूप में अनुच्छेद 263 के तहत बनी अंतर-राज्य परिषद का मूल्यांकन कीजिए। (150 शब्द)

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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