भारत ने विश्व को कई महान वैज्ञानिक और गणितज्ञ दिए हैं। C.V. रमन, श्रीनिवास रामानुजन और हरगोबिंद खुराना (Har Gobind Khorana) उनमें सबसे प्रमुख हैं। ये तीनों नोबेल पुरस्कार विजेता हैं और इनके योगदान ने विज्ञान को नई दिशा दी।
C.V. रमन (1888–1970)
सर चंद्रशेखर वेंकटरमन (C.V. Raman) भौतिक विज्ञानी थे। 1930 में उन्हें भौतिकी में नोबेल पुरस्कार मिला।
- रमन प्रभाव (Raman Effect) — जब प्रकाश किसी पदार्थ से गुज़रता है तो उसकी तरंग-दैर्ध्य बदल जाती है। यह खोज 1928 में हुई।
- पहले एशियाई जिन्हें विज्ञान में नोबेल पुरस्कार मिला।
- भारत रत्न (1954) से सम्मानित।
- रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट, बेंगलुरु की स्थापना।
- 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस — रमन प्रभाव की खोज की स्मृति में।
श्रीनिवास रामानुजन (1887–1920)
श्रीनिवास रामानुजन महान गणितज्ञ थे जिन्होंने बिना औपचारिक गणितीय प्रशिक्षण के संख्या सिद्धांत में क्रांतिकारी योगदान दिया।
- ब्रिटिश गणितज्ञ G.H. Hardy के साथ कार्य।
- अनंत श्रृंखलाएँ, मॉक थीटा फ़ंक्शन और विभाजन सिद्धांत पर ऐतिहासिक कार्य।
- रॉयल सोसाइटी के फेलो — इतनी कम उम्र में पहले भारतीय।
- उनकी नोटबुक आज भी शोधकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
- 22 दिसंबर — राष्ट्रीय गणित दिवस रामानुजन की जयंती पर।
हरगोबिंद खुराना (1922–2011)
हरगोबिंद खुराना (Har Gobind Khorana) जैव रसायनशास्त्री थे जिनका जन्म रायपुर, पंजाब (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
- 1968 में चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार — आनुवंशिक कोड की व्याख्या और प्रोटीन संश्लेषण में उसकी भूमिका।
- प्रयोगशाला में पहले कृत्रिम जीन का संश्लेषण।
- अमेरिकी नागरिकता ली किंतु भारतीय मूल के वैज्ञानिक के रूप में जाने जाते हैं।
यूपीएससी प्रासंगिकता
GS III में वैज्ञानिक उपलब्धियाँ और प्रेरणादायक भारतीय वैज्ञानिकों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। रमन प्रभाव, रामानुजन और खुराना के योगदान को संक्षेप में प्रस्तुत कर सकें।