ISRO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन (Dr. V. Narayanan) हैं, जिन्होंने जनवरी 2025 में एस. सोमनाथ (S. Somanath) से कार्यभार ग्रहण किया। वे क्रायोजेनिक प्रणोदन (cryogenic propulsion) के विशेषज्ञ माने जाते हैं और इससे पहले लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), तिरुवनंतपुरम के निदेशक थे। ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई थी; इसका मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में है और यह भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) के अधीन कार्य करता है। डॉ. नारायणन ISRO के 11वें अध्यक्ष हैं और साथ ही अंतरिक्ष विभाग के सचिव तथा अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष भी हैं।
परिचय (Introduction)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) देश का प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान निकाय है। यह नागरिक उपयोग के उपग्रह बनाने, प्रक्षेपण यान विकसित करने, ग्रहों के अनुसंधान और मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों जैसे क्षेत्रों में काम करता है। UPSC प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा (GS-3) में ISRO से संबंधित प्रश्न लगभग हर वर्ष पूछे जाते हैं — संस्थान का नेतृत्व, हाल के मिशन, प्रौद्योगिकी क्षमताएँ और नीतिगत परिवर्तन प्रमुख क्षेत्र हैं।
जनवरी 2025 में नेतृत्व परिवर्तन हुआ, जब डॉ. वी. नारायणन को ISRO का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। वे रॉकेट प्रौद्योगिकी, विशेष रूप से क्रायोजेनिक इंजनों के विकास में चार दशकों से अधिक के अनुभव वाले वैज्ञानिक हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई जब ISRO गगनयान (Gaganyaan) मानव मिशन और NISAR जैसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रमों की ओर अग्रसर है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- वर्तमान अध्यक्ष: डॉ. वी. नारायणन (जनवरी 2025 से कार्यरत)
- पूर्ववर्ती अध्यक्ष: एस. सोमनाथ (2022–जनवरी 2025)
- ISRO की स्थापना: 15 अगस्त 1969
- मुख्यालय: बेंगलुरु (Bengaluru), कर्नाटक
- मूल मंत्रालय: अंतरिक्ष विभाग (Department of Space), प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन
- अंतरिक्ष आयोग का गठन: 1972
- पूर्ववर्ती संगठन: INCOSPAR (1962), डॉ. विक्रम साराभाई की पहल पर
- प्रथम अध्यक्ष: डॉ. विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai), 1969-1971
- कुल अध्यक्ष (अब तक): 11
- हाल के प्रमुख मिशन: Chandrayaan-3 (अगस्त 2023), Aditya-L1 (सितंबर 2023), NISAR (2026 अपेक्षित), Gaganyaan (2026 लक्ष्य)
- प्रमुख प्रक्षेपण यान: PSLV, GSLV Mk II, LVM3 (पूर्व GSLV Mk III), SSLV
- डॉ. नारायणन का विशेषज्ञता क्षेत्र: क्रायोजेनिक एवं तरल प्रणोदन (cryogenic and liquid propulsion)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. होमी जे. भाभा (Homi J. Bhabha) ने रखी। वर्ष 1962 में परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना हुई। 21 नवंबर 1963 को थुम्बा (केरल) से पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया, जो भारतीय अंतरिक्ष यात्रा का प्रारंभ माना जाता है।
15 अगस्त 1969 को INCOSPAR का पुनर्गठन कर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) बनाया गया। 1972 में अंतरिक्ष आयोग (Space Commission) तथा अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) का गठन हुआ — तब से ISRO अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में आया। पहला भारतीय उपग्रह आर्यभट्ट (Aryabhata) 19 अप्रैल 1975 को सोवियत संघ से प्रक्षेपित हुआ। इस लंबी यात्रा में ISRO ने स्वदेशी प्रक्षेपण यान, संचार उपग्रह, चंद्र और मंगल अभियान, तथा अब मानव अंतरिक्ष क्षमता तक का सफर तय किया है।
डॉ. वी. नारायणन — परिचय और पृष्ठभूमि

डॉ. वी. नारायणन का जन्म तमिलनाडु में हुआ। उन्होंने IIT खड़गपुर से क्रायोजेनिक इंजीनियरिंग में M.Tech तथा एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका ISRO में करियर 1984 में विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) से शुरू हुआ।
- विशेषज्ञता: क्रायोजेनिक एवं तरल प्रणोदन प्रणालियाँ — GSLV Mk III (अब LVM3) के स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज (CE-20) के विकास में अग्रणी भूमिका।
- पूर्व पद: निदेशक, लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (LPSC), तिरुवनंतपुरम।
- योगदान: Chandrayaan-2 दुर्घटना के बाद Chandrayaan-3 के लैंडर एवं प्रोपल्शन डिज़ाइन की समीक्षा समिति में महत्वपूर्ण भूमिका; गगनयान मिशन की प्रणोदन प्रणालियों का नेतृत्व।
- पुरस्कार: ASI (Astronautical Society of India) Gold Medal, NDRF Award इत्यादि।
उनकी नियुक्ति इस बात का संकेत है कि ISRO का अगला दशक भारी प्रक्षेपण यानों, मानव अंतरिक्ष उड़ान और गहन अंतरिक्ष अन्वेषण पर केंद्रित रहेगा।
ISRO के अब तक के सभी अध्यक्षों की सूची
| क्रम | अध्यक्ष | कार्यकाल | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|---|
| 1 | डॉ. विक्रम साराभाई (Vikram Sarabhai) | 1969–1971 | ISRO के संस्थापक; भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक |
| 2 | प्रो. एम. जी. के. मेनन (M. G. K. Menon) | जनवरी–सितंबर 1972 | अंतरिम अध्यक्ष; अंतरिक्ष आयोग के गठन में सहायक |
| 3 | प्रो. सतीश धवन (Satish Dhawan) | 1972–1984 | SLV-3, INSAT कार्यक्रम; “ISRO संस्कृति” के निर्माता |
| 4 | प्रो. यू. आर. राव (U. R. Rao) | 1984–1994 | PSLV का विकास; आर्यभट्ट उपग्रह के पिता |
| 5 | डॉ. के. कस्तूरीरंगन (K. Kasturirangan) | 1994–2003 | PSLV का परिचालन सफल; IRS, INSAT-2 श्रृंखला |
| 6 | जी. माधवन नायर (G. Madhavan Nair) | 2003–2009 | Chandrayaan-1 मिशन; GSLV का विकास |
| 7 | डॉ. के. राधाकृष्णन (K. Radhakrishnan) | 2009–2014 | Mangalyaan (MOM) की सफलता; GSLV-D5 क्रायोजेनिक |
| 8 | ए. एस. किरण कुमार (A. S. Kiran Kumar) | 2015–2018 | IRNSS / NavIC तारामंडल का पूरा होना |
| 9 | डॉ. के. सिवन (K. Sivan) | 2018–2022 | Chandrayaan-2; Gaganyaan की घोषणा |
| 10 | एस. सोमनाथ (S. Somanath) | 2022–जनवरी 2025 | Chandrayaan-3 की ऐतिहासिक सफलता; Aditya-L1; SSLV |
| 11 | डॉ. वी. नारायणन (V. Narayanan) | जनवरी 2025–वर्तमान | Gaganyaan, NISAR, अगली पीढ़ी के क्रायोजेनिक मिशन |
संरचना और कार्य (Structure and Functions)
ISRO एक त्रि-स्तरीय शासन ढांचे के अंदर कार्य करता है:
- अंतरिक्ष आयोग (Space Commission, 1972): नीति-निर्माण का सर्वोच्च निकाय।
- अंतरिक्ष विभाग (Department of Space): क्रियान्वयन, प्रशासन और बजट प्रबंधन; प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन।
- ISRO: अनुसंधान, विकास और मिशन क्रियान्वयन।
ISRO के अध्यक्ष को एक साथ तीन भूमिकाएँ निभानी होती हैं — अंतरिक्ष विभाग के सचिव, अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष और ISRO के अध्यक्ष। ISRO के अधीन कई महत्वपूर्ण केंद्र हैं:
- VSSC (Vikram Sarabhai Space Centre), तिरुवनंतपुरम — प्रक्षेपण यान विकास।
- LPSC, तिरुवनंतपुरम/बेंगलुरु — तरल और क्रायोजेनिक इंजन।
- SAC (Space Applications Centre), अहमदाबाद — पेलोड, संचार।
- URSC (U R Rao Satellite Centre), बेंगलुरु — उपग्रह निर्माण।
- SDSC SHAR, श्रीहरिकोटा — प्रक्षेपण स्थल।
- NRSC, हैदराबाद — सुदूर संवेदन (remote sensing)।
व्यावसायिक शाखा NSIL (NewSpace India Limited, 2019) और नियामक IN-SPACe (2020) हाल के अंतरिक्ष सुधारों का हिस्सा हैं — विस्तार से IN-SPACe और NSIL की भूमिका देखें।
हाल के प्रमुख मिशन (Recent Major Missions)
Chandrayaan-3 (2023): 14 जुलाई 2023 को LVM3-M4 से प्रक्षेपण; 23 अगस्त 2023 को विक्रम लैंडर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला विश्व का पहला देश और चंद्रमा पर उतरने वाला चौथा देश बना। 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस (National Space Day) घोषित किया गया।
Aditya-L1 (2023–2024): 2 सितंबर 2023 को PSLV-C57 से प्रक्षेपण; जनवरी 2024 में सूर्य-पृथ्वी के लाग्रेंज बिंदु L1 (Lagrange Point L1) के चारों ओर हेलो कक्षा (halo orbit) में प्रविष्ट हुआ। यह भारत का पहला सौर वेधशाला (solar observatory) मिशन है।
Gaganyaan (2026): भारत का पहला स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम। 2026 में मानवयुक्त (crewed) उड़ान का लक्ष्य; इससे पहले कई परीक्षण उड़ानें (TV-D1 अक्टूबर 2023, अगली अनक्रू उड़ानें 2025-26)। तीन भारतीय वायुयोद्धा अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण ले रहे हैं — विस्तृत विवरण गगनयान मिशन में।
NISAR (2026): NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar — दोहरे आवृत्ति (L-band & S-band) रडार उपग्रह; पृथ्वी विज्ञान, जलवायु और आपदा निगरानी के लिए। 2026 में प्रक्षेपण अपेक्षित।
SSLV-D3 (2024): लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान का सफल वाणिज्यिक प्रक्षेपण; निजी क्षेत्र को हस्तांतरण की प्रक्रिया।
महत्व और प्रभाव (Significance and Impact)
ISRO का योगदान केवल वैज्ञानिक नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक भी है। दूरसंचार (INSAT, GSAT), मौसम पूर्वानुमान (INSAT-3D, INSAT-3DR), टेली-शिक्षा, टेली-मेडिसिन, मत्स्य पोत संदेश, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन (NDMA को SAR उपग्रह डेटा), तथा कृषि (Bhuvan Portal) — ये सभी क्षेत्र ISRO की सेवाओं पर निर्भर हैं।
रणनीतिक दृष्टि से NavIC (Indian Regional Navigation Satellite System) ने भारत को GPS पर निर्भरता कम करने में मदद की है। साथ ही, RISAT-2BR1 जैसे रडार उपग्रह सीमा निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वैश्विक रूप से, ISRO ने अब तक 36 देशों के 433+ विदेशी उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं — जिससे अंतरिक्ष कूटनीति (space diplomacy) में भारत की हिस्सेदारी बढ़ी है।
तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)
| संगठन | देश | स्थापना | वार्षिक बजट (लगभग, 2025) | विशिष्टता |
|---|---|---|---|---|
| NASA | US | 1958 | $25 अरब | मानव चंद्र-मंगल मिशन; अंतरिक्ष विज्ञान |
| ESA | EU | 1975 | €7.7 अरब | अंतरिक्ष विज्ञान; Ariane प्रक्षेपण |
| Roscosmos | रूस | 1992 (Soyuz विरासत 1957 से) | ~$3 अरब | मानव अंतरिक्ष उड़ान, ISS |
| CNSA | चीन | 1993 | ~$14 अरब (अनुमानित) | Tiangong अंतरिक्ष स्टेशन; चांग’ई |
| ISRO | भारत | 1969 | ₹13,416 करोड़ (2026-27) | लागत-दक्षता; PSLV; Mangalyaan; Chandrayaan-3 |
ISRO की सबसे बड़ी ताकत लागत-दक्षता (cost-efficiency) है — Mangalyaan पर खर्च (~₹450 करोड़) हॉलीवुड फिल्म Gravity के बजट से भी कम था।
चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)
- भारी प्रक्षेपण क्षमता का अभाव: अमेरिका के SpaceX Falcon Heavy या चीन के Long March 5 की तुलना में LVM3 की पेलोड क्षमता सीमित।
- मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम में देरी: Gaganyaan की मूल समयरेखा 2022 थी; अब 2026 लक्ष्य।
- निजी क्षेत्र का सीमित विकास: अंतरिक्ष नीति 2023 के बाद भी निजी कंपनियों (Skyroot, Agnikul, Pixxel) को बड़े पैमाने की पूँजी चाहिए।
- गहन अंतरिक्ष क्षमता: शुक्र, बृहस्पति या क्षुद्रग्रह मिशनों में अभी भारत की उपस्थिति न्यूनतम।
- अंतरिक्ष मलबा (space debris): बढ़ते उपग्रहों के साथ केसलर सिंड्रोम का जोखिम — संदर्भ अंतरिक्ष मलबा और केसलर सिंड्रोम।
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims: ISRO के अध्यक्षों के नाम-कार्यकाल; मिशन-तिथि-प्रक्षेपण यान का मिलान (Match the following); अंतरिक्ष विभाग की स्थिति; Lagrange L1 बिंदु।
- Mains GS-3 (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी): “भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम का सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान”; “Chandrayaan-3 की वैज्ञानिक उपलब्धियाँ”; “NISAR मिशन का महत्व”; “अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी”।
- Mains GS-2 (अंतर्राष्ट्रीय संबंध): अंतरिक्ष कूटनीति; US, फ्रांस, जापान, रूस के साथ सहयोग।
- Essay: “अंतरिक्ष: मानवता की अगली सीमा” / “विज्ञान और राष्ट्र-निर्माण”।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- ISRO के नेतृत्व परिवर्तन और हाल के मिशनों (Chandrayaan-3, Aditya-L1, NISAR) के संदर्भ में चर्चा कीजिए कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम किस प्रकार की रणनीतिक दिशा अपना रहा है। (150 शब्द / 10 अंक)
- भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के सामाजिक-आर्थिक लाभों की समीक्षा कीजिए तथा बताइए कि निजी क्षेत्र की भागीदारी (अंतरिक्ष नीति 2023, IN-SPACe, NSIL) से किस प्रकार के नए अवसर उत्पन्न हो सकते हैं। (250 शब्द / 15 अंक)
निष्कर्ष (Conclusion)
डॉ. वी. नारायणन के नेतृत्व में ISRO एक नए दशक में प्रवेश कर रहा है — जहाँ मानव अंतरिक्ष उड़ान, अगली पीढ़ी का प्रक्षेपण यान (NGLV), भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station, 2035 लक्ष्य) और चंद्रमा पर भारतीय की उपस्थिति (2040 लक्ष्य) जैसी बड़ी महत्वाकांक्षाएँ हैं। साराभाई से नारायणन तक की यह यात्रा बताती है कि भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम सीमित संसाधनों के बावजूद अनुसंधान-गुणवत्ता, टीम-संस्कृति और समस्या-समाधान दृष्टिकोण के कारण विश्व-स्तरीय बना है। UPSC अभ्यर्थी के लिए ISRO का अध्ययन केवल नामों और तिथियों का नहीं, बल्कि भारत की वैज्ञानिक नीति, अंतरिक्ष कूटनीति और आत्मनिर्भरता की कहानी का अध्ययन है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
ISRO के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?
ISRO के वर्तमान अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन हैं, जिन्होंने जनवरी 2025 में पदभार ग्रहण किया। वे क्रायोजेनिक प्रणोदन के विशेषज्ञ हैं और इससे पहले LPSC के निदेशक थे।
ISRO के पहले अध्यक्ष कौन थे?
ISRO के प्रथम अध्यक्ष डॉ. विक्रम साराभाई थे, जिन्होंने 1969 से 1971 तक नेतृत्व किया। उन्हें “भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जनक” कहा जाता है।
ISRO का मुख्यालय कहाँ है?
ISRO का मुख्यालय बेंगलुरु, कर्नाटक में स्थित है। यह अंतरिक्ष विभाग के अधीन कार्य करता है।
ISRO की स्थापना कब हुई थी?
ISRO की स्थापना 15 अगस्त 1969 को हुई। इसका पूर्ववर्ती संगठन INCOSPAR था जिसकी स्थापना 1962 में हुई थी।
एस. सोमनाथ ISRO के कौन से अध्यक्ष थे?
एस. सोमनाथ ISRO के 10वें अध्यक्ष थे और जनवरी 2022 से जनवरी 2025 तक कार्यरत रहे। उनके कार्यकाल में Chandrayaan-3 की ऐतिहासिक चंद्र-लैंडिंग और Aditya-L1 का प्रक्षेपण हुआ।
ISRO अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?
ISRO अध्यक्ष की नियुक्ति केंद्रीय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (Appointments Committee of the Cabinet) करती है। नियुक्ति आमतौर पर तीन वर्ष की अवधि के लिए होती है।
Gaganyaan मिशन कब लॉन्च होगा?
Gaganyaan का पहला मानवयुक्त मिशन 2026 के लिए लक्षित है। इससे पहले कई अनक्रू (बिना चालक दल) परीक्षण उड़ानें होंगी।
NISAR मिशन क्या है?
NISAR (NASA-ISRO Synthetic Aperture Radar) NASA और ISRO का संयुक्त पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। यह दोहरी आवृत्ति वाले रडार से जलवायु, हिमनद, वन और आपदाओं की निगरानी करेगा। 2026 में प्रक्षेपण अपेक्षित।
ISRO का अंतरिक्ष विभाग के साथ क्या संबंध है?
अंतरिक्ष विभाग (Department of Space) नीति-निर्माण और प्रशासनिक नियंत्रण करता है, जबकि ISRO क्रियान्वयन एजेंसी है। ISRO अध्यक्ष अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी होते हैं और सीधे प्रधानमंत्री को रिपोर्ट करते हैं।