जैसलमेर किला पश्चिमी राजस्थान के थार रेगिस्तान में, जैसलमेर शहर के ऊपर त्रिकूट पहाड़ी पर खड़ा है। भाटी राजपूतों के रावल जैसल ने 1150 के दशक में इसकी नींव रखी, जब वे अपनी राजधानी लोद्रवा से यहाँ ले आए। ब्रिटानिका और इंपीरियल गजेटियर इसकी तारीख 1156 बताते हैं, जबकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का अपना पेज 1155 बताता है। पीले-सुनहरे पत्थर की वजह से इसे सोनार किला यानी सुनहरा किला कहा जाता है। 2013 से यह UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल राजस्थान के पहाड़ी किले (Hill Forts of Rajasthan) का हिस्सा है।
ज्यादातर पाठकों के मन में जैसलमेर की एक ही तस्वीर होती है: किसी फिल्म या पोस्टर वाला सुनहरा किला, जैसे समय वहीं थम गया हो। यही तस्वीर वे दो बातें छिपा देती है, जिनके बिना कोई उत्तर पूरा नहीं होता। यह किला कभी सिर्फ एक स्मारक नहीं रहा, क्योंकि शुरू से ही इसके भीतर एक शहर बसा हुआ है। और आज वही बसावट इसका सबसे बड़ा खतरा बन गई है, उस पानी के जरिए जिसका बोझ उठाने के लिए रेगिस्तान का यह किला कभी बना ही नहीं था। यह नोट पहले तारीखें पक्की करता है, फिर संरक्षण की उस समस्या पर आता है जो जैसलमेर को भारत के बाकी किलों से अलग बनाती है।
जैसलमेर किला कहाँ है और इसे किसने बनवाया
जैसलमेर किला रेगिस्तानी इलाके में बना एक पहाड़ी किला है, जिसकी नींव रावल जैसल ने 12वीं सदी के मध्य में रखी। अलाउद्दीन खिलजी की लूट के बाद कुछ साल यह वीरान पड़ा रहा। उन सालों को छोड़ दें, तो यह तब तक भाटियों की राजधानी बना रहा, जब तक 1949 में यह रियासत राजस्थान में नहीं मिल गई। ASI यह भी जोड़ता है कि किला संभवतः 1244 से पहले पूरा हो गया था, रावल सालिवाहन द्वितीय के समय में। यानी नींव संस्थापक ने रखी और काम उनके वंशजों ने पूरा किया।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थान | त्रिकूट पहाड़ी, जैसलमेर, थार रेगिस्तान में, जोधपुर से करीब 215 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम |
| किसने बनवाया | भाटी राजपूतों के रावल जैसल; ब्रिटानिका और इंपीरियल गजेटियर के अनुसार 1156, ASI के विवरण में 1155 |
| मुख्य दौर | संभवतः 1244 से पहले रावल सालिवाहन द्वितीय के समय पूरा हुआ; 1949 तक भाटी राजधानी |
| बाद में किसके हाथ रहा | करीब 1300 में अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने लूटा; 16वीं सदी के आखिर से मुगल अधीनता में; 1818 में अंग्रेजों से संधि |
| किले का प्रकार | रेगिस्तानी इलाके का पहाड़ी किला, जिसमें तीन समानांतर दीवारें और 10 से 25 मीटर ऊँचे परकोटे (rampart) हैं |
| क्षेत्रफल | 11.28 हेक्टेयर, करीब 50 मीटर ऊँची पहाड़ी पर |
| संरक्षण का दर्जा | 1951 से राष्ट्रीय महत्व का स्मारक, ASI के जोधपुर मंडल के तहत |
| UNESCO दर्जा | 2013 में राजस्थान के पहाड़ी किलों के छह घटकों में से एक के रूप में सूची में शामिल |
| किस बात के लिए मशहूर | शुरू से बसी हुई बस्ती, जैन मंदिर और ज्ञान भंडार नाम का पांडुलिपि पुस्तकालय |
1155 और 1156 को एक ही उत्तर मानिए, जिसमें एक जाना-पहचाना छोटा-सा फर्क है। अगर किसी विकल्प में लिखा हो कि रावल जैसल ने 12वीं सदी में यह किला बनवाया, तो वह दोनों में से किसी भी तारीख के हिसाब से सही है।
रावल जैसल ने लोद्रवा छोड़कर त्रिकूट पहाड़ी को क्यों चुना
रावल जैसल ने राजधानी इसलिए बदली, क्योंकि पुरानी राजधानी को बचाया नहीं जा सकता था। इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया (Imperial Gazetteer of India) साफ कहता है कि लोद्रवा रक्षा के लिहाज से ठीक जगह नहीं थी। इसलिए जैसल ने कोई ज्यादा मजबूत जगह ढूँढ़ी, और वह उन्हें त्रिकूट पर मिली। यह ऐसी पहाड़ी थी जिसकी ऊँचाई और अलग-थलग जगह, दीवार का आधा काम खुद कर देती थी।
भाटी इससे पहले भी कई बार अपनी राजधानी बदल चुके थे। यह क्रम याद रहे, तो आप जैसलमेर को एक लंबी कहानी में सही जगह पर रख पाएँगे। इंपीरियल गजेटियर उनकी पुरानी राजधानियाँ ये गिनाता है:
- तनोट, जिसकी नींव करीब आठवीं सदी के मध्य में पड़ी, और जहाँ से भाटियों को खदेड़ दिया गया।
- देरावर, जिसे देवराज ने बनवाया। देवराज पहले भाटी सरदार थे, जिन्होंने रावल की उपाधि ली।
- लोद्रवा, लोद्रा राजपूतों से छीना गया एक बड़ा शहर, जिसके खंडहर जैसलमेर से करीब 10 मील दूर हैं।
इस बदलाव के दो सरकारी विवरण हैं, और दोनों का सुर अलग है। राजस्थान पर्यटन के मुताबिक लोद्रवा की गद्दी जैसल को नहीं, उनके छोटे सौतेले भाई को मिली, इसलिए जैसल नई राजधानी की तलाश में निकल पड़े। ASI का पेज कहता है कि वे अफगान हमलों के बढ़ते खतरे की वजह से जगह बदलना चाहते थे। उसके मुताबिक उन्होंने अपने भाई भोजदेव के खिलाफ साजिश रची, उनकी हत्या की, और फिर अपनी राजधानी जैसलमेर ले आए। नतीजे पर दोनों सहमत हैं: नई पहाड़ी पर नई राजधानी, नए नाम के साथ, यानी जैसल का किला।
बाकी कहानी दंतकथा पूरी करती है। दोनों विवरणों में कृष्ण की एक भविष्यवाणी का जिक्र है, जो उन्होंने महाभारत युद्ध के बाद थार में अर्जुन से कही थी: यदुवंश का कोई वंशज एक दिन त्रिकूट पर किला बनाएगा। भाटी खुद को इसी चंद्रवंश से जोड़ते थे। इसे राजवंश की अपने बारे में सुनाई गई कहानी मानिए। यह वैसा ही चंद्रवंशी दावा है, जैसा सूर्यवंशी दावा जोधपुर के राठौड़ करते थे। तारीखें तय करते समय इसे दूर रखिए।
रेगिस्तान में राजधानी क्यों समझ में आती थी: कारवाँ और पानी
थार रेगिस्तान के बीचोंबीच राजधानी बसाना पहली नजर में उल्टी बात लगती है, जब तक आप व्यापार के रास्ते न देख लें। ASI बताता है कि जैसलमेर ऊँटों के कारवाँ वाले रास्तों पर बसा था। ये रास्ते भारत को मध्य एशिया और पश्चिम के देशों से जोड़ते थे, और जैसलमेर धीरे-धीरे एक बड़ी व्यापारिक चौकी बन गया। ASI जिस लेन-देन का जिक्र करता है, वह दोनों तरफ चलता था:
- एक तरफ से खजूर, शराब, मसाले और सूखे मेवे।
- दूसरी तरफ से पश्चिमी और मध्य भारत के कपड़े, रत्न, नील और अफीम।
यह व्यापार छोटे रूप में बचा भी रहा। ब्रिटानिका आज भी जैसलमेर को कारवाँ व्यापार का केंद्र बताता है, और जिन चीजों की सूची वह देता है, उनमें मुल्तानी मिट्टी (fuller’s earth) भी है। यह एक महीन मिट्टी है, जिससे कभी कच्ची ऊन साफ की जाती थी।
बाकी सब कुछ पानी ने तय किया। जैसल ने जैसलसर नाम का एक तालाब बनवाया, और करीब 1346 में रावल गड़सी ने उससे बड़ा जलाशय खुदवाया। ASI के रिकॉर्ड के मुताबिक पास की काक नदी का पानी पहले रानीसर तालाब में लाया गया, और वहाँ से बहकर निकला पानी इस नए जलाशय में, जो आगे चलकर गड़ीसर कहलाया। इसे एक रिले दौड़ की तरह समझिए: पानी एक तालाब से अगले तालाब तक पहुँचाया जाता था, ताकि रेत में कम से कम पानी खोए।
नदी वाले किले से तुलना करने पर बात और साफ होती है। पहाड़ी किलों का एक और घटक, गागरोन, नदी से सुरक्षित है। जैसलमेर के पास बस छोटी-सी काक नदी थी। इसलिए यहाँ प्यास से बचाव भूगोल ने नहीं, इंजीनियरिंग ने किया।
घेराबंदी, मुगल अधीनता और 1818 की संधि
1156 के बाद तीन बाहरी ताकतें बारी-बारी से जैसलमेर पर हावी हुईं। हर ताकत ने भाटियों को उनकी पहाड़ी पर रहने दिया, लेकिन वे किन शर्तों पर वहाँ टिके रहेंगे, यह बदल दिया।
पहली चोट दिल्ली से आई। इंपीरियल गजेटियर के मुताबिक इस रियासत का भरोसेमंद इतिहास 13वीं सदी के आखिर और 14वीं सदी की शुरुआत से शुरू होता है। तभी भाटियों ने अलाउद्दीन खिलजी को इतना भड़का दिया कि उसकी सेना ने किले और शहर पर कब्जा करके उन्हें लूट लिया, और उसके बाद कुछ समय तक दोनों वीरान पड़े रहे। ब्रिटानिका भी मानता है कि 14वीं सदी की शुरुआत में राजधानी लूटी गई, और उसके बाद रियासत की हालत गिरती गई। यह अभियान खिलजी वंश के राजस्थान वाले बाकी अभियानों की कड़ी है, जिनमें 1303 में चित्तौड़गढ़ भी जीता गया।
मुगल दौर घेराबंदी से कम, और कूटनीति से ज्यादा आया। ASI के रिकॉर्ड के मुताबिक जैसलमेर ने 16वीं सदी में पहली बार मुगलों के प्रति वफादारी जताई। 1570 तक वह अकबर की कूटनीति के आगे झुक गया, और 1578 तक रावल भीम के सरदार और सेनाएँ अकबर के इशारे पर थीं। इंपीरियल गजेटियर सबल सिंह का नाम लेता है, जिन्होंने करीब 1651 में राज संभाला। उसके मुताबिक वे पहले भाटी शासक थे, जिन्होंने अपनी जमीन दिल्ली साम्राज्य की जागीर के रूप में रखी। अगर इन दोनों तारीखों को दो पड़ाव मानें, पहले वफादारी और सेवा, फिर जमीन का औपचारिक अनुदान, तो दोनों बातें आपस में बैठ जाती हैं। लेकिन याद रखिए, यह हमारा अपना निष्कर्ष है, दोनों में से कोई भी स्रोत ऐसा सीधे नहीं कहता। ASI यह भी बताता है कि सबल सिंह ने 1660 में ताँबे के सिक्के ढलवाए, जब रियासत अपने सबसे बड़े फैलाव पर थी।
आखिरी बदलाव 19वीं सदी में आया। मुगल साम्राज्य का दबदबा घटने के साथ हमले और असुरक्षा बढ़ी, और इन्हीं हालात में रावल मूलराज ने 12 दिसंबर 1818 को अंग्रेजों के साथ संधि की। उसी साल जोधपुर और उसके पड़ोसी राजपूत राज्यों ने भी ईस्ट इंडिया कंपनी से संधियाँ कीं। इसी व्यवस्था के तहत यह किला 1949 तक भाटी राजधानी बना रहा, जब रियासत राजस्थान में मिल गई।
दीवारें और दरवाजे, उसी क्रम में जिसमें हमलावर उनसे टकराता है
जैसलमेर की सुरक्षा ऊँचाई पर नहीं, परतों पर टिकी है। पहाड़ी सिर्फ करीब 50 मीटर ऊँची है, लेकिन ASI इसके चारों ओर तीन समानांतर दीवारों का जिक्र करता है, जिनके परकोटे 10 से 25 मीटर तक ऊँचे हैं। इसलिए जो हमलावर बाहरी घेरा तोड़ लेता, वह खुद को अगली दीवार के ठीक नीचे वाली जगह में फँसा पाता।
ASI एक के बाद एक आने वाले चार दरवाजे गिनाता है। ASI का शब्द successive, यानी एक के बाद एक, इशारा करता है कि यह शायद चढ़ाई का ही क्रम है। उसी क्रम में ये दरवाजे हैं:
- अखै पोल।
- गणेश पोल।
- सूरज पोल।
- हवा पोल।
पोल का मतलब बस दरवाजा है। एक कतार में लगे दरवाजे सेना के साथ वही करते हैं, जो घूमने वाले गेटों (turnstile) की कतार भीड़ के साथ करती है। वे एक बड़े धक्के को कई धीमे धक्कों में तोड़ देते हैं, और हर धक्के पर ऊपर की दीवारों से वार होता रहता है। यह तुलना यहीं तक ठीक है, क्योंकि घूमने वाला गेट लोगों को आगे जाने देता है, जबकि घेराबंदी में दरवाजे का काम ही किसी को आगे न जाने देना है।
आखिरी दरवाजे के भीतर किला महलों का परिसर बन जाता है। ASI पाँच महलों के नाम गिनाता है:
- रंग महल।
- सर्वोत्तम विलास।
- गज महल।
- जनाना महल, यानी रानियों और महिलाओं का महल।
- मोती महल।
ब्रिटानिका शाही महल का जिक्र किले के जैन मंदिरों और उसके पुस्तकालय के साथ करता है। इससे याद रहता है कि इन दीवारों के भीतर जो कुछ था, उसमें शासकों का निवास सिर्फ एक हिस्सा था।
जैन मंदिर और दीवारों के भीतर बसा शहर
UNESCO की दलील जैसलमेर की दीवारों पर कम, और उनके भीतर की चीजों पर ज्यादा टिकी है: एक बड़ी बस्ती, जो शुरू से किले के भीतर है और आज भी आबाद है, और जैन मंदिरों का एक समूह। UNESCO के शब्दों में, ये दोनों मिलकर इसे एक पवित्र और लौकिक किले (sacred and secular fort) की मिसाल बनाते हैं, यानी एक ही जगह पर पूजा का स्थान भी और चलता-फिरता शहर भी।
मंदिर इसका पवित्र हिस्सा हैं। ASI किले के अहम मंदिरों में पार्श्वनाथ और चंद्रप्रभु मंदिरों का नाम लेता है, और उनके साथ हिंदू दरबार के लक्ष्मीनारायण मंदिर का भी। पार्श्वनाथ 23वें तीर्थंकर हैं। जैन 24 तीर्थंकरों को पूजते हैं, और उन्हें ऐसे गुरु मानते हैं जिन्होंने पुनर्जन्म के चक्र के पार उतरने का घाट (तीर्थ) बनाया। ब्रिटानिका इसमें ज्ञान भंडार भी जोड़ता है, यानी “ज्ञान का खजाना”, जो संस्कृत और प्राकृत की पुरानी पांडुलिपियों का पुस्तकालय है। प्राकृत शुरुआती भारत की बोलचाल की भाषाओं का परिवार है, जिनमें जैन धर्मग्रंथ रचे गए। यह मेल इस किले को भारत की मंदिर वास्तुकला की जैन धारा का अच्छा उदाहरण बनाता है, जो यहाँ किसी तीर्थ वाली पहाड़ी पर नहीं, बल्कि एक राजपूत किले के भीतर मिलती है।
शहर इसका लौकिक हिस्सा है। राजस्थान पर्यटन दीवारों के भीतर दुकानों, होटलों और पुरानी हवेलियों का जिक्र करता है। हवेलियाँ आँगन वाले पारंपरिक बड़े घर हैं, जिनमें पीढ़ियों से लोग रहते आ रहे हैं। UNESCO बताता है कि छह पहाड़ी किलों में से ज्यादातर के भीतर कभी शहर बसे थे, और उनमें से कुछ आज भी बचे हैं। जैसलमेर इसका सबसे साफ उदाहरण है, क्योंकि इसका शहर बाद में नहीं जुड़ा, शुरू से ही यहाँ था।
एक सांस्कृतिक फुटनोट यहीं ठीक है, इससे ज्यादा जगह इसे नहीं मिलनी चाहिए। राजस्थान पर्यटन बताता है कि यह किला सत्यजित राय की फेलुदा वाली एक जासूसी कहानी, और उस पर बनी फिल्म सोनार केल्ला (यानी सुनहरा गढ़), दोनों की अहम पृष्ठभूमि है। इंटरव्यू की बातचीत में यह काम आ सकता है, लेकिन इतिहास में यह कुछ नहीं जोड़ता।
आज का जैसलमेर किला: UNESCO दर्जा और रिसाव की समस्या
जैसलमेर किला विश्व धरोहर स्थल भी है और केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक भी। लेकिन इस पर एक ऐसा खतरा है, जो बाकी पाँच किलों पर इस रूप में नहीं है: इसकी पहाड़ी पानी को लेकर बहुत नाजुक है। पहले दर्जे से जुड़े तथ्य:
- UNESCO: 21 जून 2013 को, नोम पेन्ह में हुए विश्व धरोहर समिति के 37वें सत्र में, इसे राजस्थान के पहाड़ी किले के छह घटकों में से एक के रूप में सूची में शामिल किया गया। बाकी घटक हैं चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, गागरोन और आमेर, जिसे UNESCO अंबर लिखता है।
- मानदंड (ii): ये किले किलों की योजना और कला में विचारों के लेन-देन को दिखाते हैं। राजपूत निर्माताओं ने सल्तनत और मुगल शैलियों से चीजें लीं, और बदले में मराठा वास्तुकला पर असर डाला।
- मानदंड (iii): ये राजपूत कुलों की सांस्कृतिक परंपराओं को, और धर्म, कला और साहित्य को मिले उनके संरक्षण को दर्ज करते हैं।
- ASI: 1951 से राष्ट्रीय महत्व का स्मारक। जोधपुर मंडल इसे “प्राचीन मंदिरों सहित किला” के रूप में दर्ज करता है।
- प्रबंधन: 11 मई 2011 को बनी राज्य स्तरीय शीर्ष सलाहकार समिति (State Level Apex Advisory Committee) छहों किलों का काम देखती है। इसकी अध्यक्षता राजस्थान के मुख्य सचिव करते हैं।
छह किलों की यह श्रृंखला आपस में कैसे जुड़ती है, यह चित्तौड़गढ़ किले वाले नोट में समझाया गया है। और भारत में UNESCO विश्व धरोहर स्थलों वाला नोट इसे राष्ट्रीय सूची में सही जगह पर रखता है।
अब समस्या पर आते हैं। पहला अंदाजा यही होता है कि पुराना पत्थर बस घिस रहा है। ऐसा नहीं है। सूची में शामिल करते समय ही UNESCO ने चेताया था कि जिस पहाड़ी पर जैसलमेर टिका है, उसकी स्थिरता पानी के रिसाव से खतरे में है, क्योंकि बुनियादी ढाँचा काफी नहीं है। UNESCO ने यह भी कहा था कि आसपास के शहर में बेलगाम निर्माण से किले का परिवेश बिगड़ सकता है।
2025 की रिपोर्टिंग बताती है कि पानी भीतर कैसे पहुँचता है। मोंगाबे इंडिया (Mongabay India) की 31 जुलाई 2025 की रिपोर्ट एक ऐसे किले की बात करती है, जो सूखी जलवायु के लिए बना था, लेकिन अब उस पर ज्यादा बारिश भी होती है और पाइप से पानी भी आता है। पर्यटन बढ़ने के साथ कई घर गेस्ट हाउस बन गए हैं, और पानी की निकासी एक समस्या बन गई है। यह पानी किले के नीचे की चिकनी मिट्टी वाली जमीन में रिसता है, उसे अस्थिर करता है और ढहने की घटनाओं की वजह बनता है। इसी रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में उत्तर भारत में सामान्य बारिश से सबसे बड़ा फर्क उत्तराखंड के बागेश्वर के बाद जैसलमेर में ही दर्ज हुआ। रिपोर्ट एक विशेषज्ञ के हवाले से यह भी बताती है कि एक मानसून के दौरान किले की दीवार का एक हिस्सा गिर गया था, जिसे ASI ने फिर से ठीक किया। इससे पहले वर्ल्ड मॉन्यूमेंट्स फंड (World Monuments Fund) किले का भू-तकनीकी अध्ययन कर चुका है।
सीधी बात यह है कि दीवारें सतह से नहीं, नीचे से कमजोर हो रही हैं। इसीलिए यहाँ संरक्षण का मतलब चिनाई जितना ही नालियाँ और पानी की सप्लाई भी है। और इसीलिए यह काम किले के भीतर रहने वाले लोगों के साथ के बिना कामयाब नहीं हो सकता।
परीक्षा के लिए जैसलमेर किला कैसे पढ़ें
जैसलमेर का किला सिलेबस के चार हिस्सों में आता है:
- मध्यकालीन इतिहास में: दिल्ली सल्तनत और मुगलों के साथ राजपूत राज्यों के संबंध।
- कला-संस्कृति में: राजपूत किलों की वास्तुकला और जैन मंदिर।
- भूगोल में: थार रेगिस्तान और उसके व्यापारिक रास्ते।
- GS पेपर I में: धरोहर का संरक्षण।
Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में 2013 से 2026 तक के 1,403 प्रश्नों में से 94 पर कला एवं संस्कृति का टैग लगा है, यानी करीब पंद्रह में से एक। इसलिए यह किला अकेले सवाल बनकर कम, और पहाड़ी किलों या राजपूत वास्तुकला वाले किसी सवाल के भीतर ज्यादा आएगा।
मुख्य परीक्षा इसे उदाहरण की तरह इस्तेमाल करती है। मुख्य परीक्षा 2020, GS पेपर I में पूछा गया: “भारत में स्मारकों और उनकी कला की परिकल्पना और उन्हें आकार देने में भारतीय दर्शन और परंपरा ने अहम भूमिका निभाई है। चर्चा कीजिए।” एक राजपूत किले के भीतर जैन मंदिर और पांडुलिपियों का पुस्तकालय, इस विचार का एक छोटा और सटीक उदाहरण हैं। इतिहास ऑप्शनल 2025, पेपर I में उम्मीदवारों से कहा गया: “संरचनात्मक विविधता, सांस्कृतिक मेलजोल और प्रांतीय सत्ता-समीकरणों की प्रकृति के आलोक में, मुगल साम्राज्य के तहत अलग-अलग प्रांतीय स्थापत्य शैलियों के उदय को परिभाषित कीजिए।” अकबर के शासन से सबल सिंह के समय तक मुगल व्यवस्था में शामिल होती गई यह रेगिस्तानी राजधानी, इस सवाल को परखने का एक अच्छा उदाहरण है।
इन तथ्यों को तब तक दोहराइए, जब तक ये बिना जोर लगाए याद न आने लगें:
- भाटी राजपूत रावल जैसल ने 1156 में (ASI के अनुसार 1155 में) त्रिकूट पहाड़ी पर इस किले की नींव रखी, और अपनी राजधानी लोद्रवा से यहाँ ले आए।
- सुनहरे पत्थर की वजह से इसे सोनार किला कहते हैं, और यह संभवतः 1244 से पहले पूरा हो गया था।
- अलाउद्दीन खिलजी की सेना ने करीब 1300 में इसे लूटा। अकबर के शासन से यह मुगल अधीनता में आया। इसके शासक ने 12 दिसंबर 1818 को अंग्रेजों से संधि की।
- तीन समानांतर दीवारें एक के बाद एक आने वाले चार दरवाजों को घेरती हैं: अखै पोल, गणेश पोल, सूरज पोल और हवा पोल।
- बड़ा जलाशय गड़ीसर करीब 1346 में रावल गड़सी के समय बना।
- UNESCO ने इसे 2013 में मानदंड (ii) और (iii) के तहत सूची में शामिल किया, और यह 1951 से राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है।
- इसका सबसे बड़ा खतरा पहाड़ी में रिसता पानी है।
तीन गलतफहमियाँ आम हैं। पहली, जैसलमेर UNESCO सूची का घटक है, लेकिन जोधपुर का मेहरानगढ़ नहीं, भले ही दोनों अक्सर साथ पढ़ाए जाते हैं। दूसरी, नींव की तारीख स्रोत के हिसाब से 1155 और 1156 के बीच डोलती है, और दोनों 12वीं सदी में ही आती हैं। तीसरी, सोनार किला इस किले का नाम है, जबकि सोनार केल्ला सत्यजित राय की वह कहानी और फिल्म है, जिसकी पृष्ठभूमि यही किला है।
छहों घटक तब आसानी से याद रहते हैं, जब हर एक के साथ उसकी एक पहचान जुड़ी हो। UNESCO उन्हें ऐसे बताता है:
| घटक | जिला | UNESCO किस बात को खास मानता है |
|---|---|---|
| चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ | सिसोदियों की पुरानी राजधानी, जिसमें 8वीं से 16वीं सदी तक की इमारतें हैं |
| कुंभलगढ़ | राजसमंद | एक ही दौर में, एक ही प्रक्रिया से बना; डिजाइन वास्तुकार मंडन का माना जाता है |
| रणथंभौर | सवाई माधोपुर | जंगल वाला पहाड़ी किला, जिसमें हम्मीर के महल के अवशेष हैं |
| गागरोन | झालावाड़ | नदी से सुरक्षित किला, जो व्यापारिक रास्तों पर नियंत्रण रखता था |
| आमेर (अंबर) | जयपुर | 17वीं सदी की राजपूत-मुगल दरबारी शैली |
| जैसलमेर | जैसलमेर | रेगिस्तानी पहाड़ी किला, जिसमें शुरू से बसी बस्ती और जैन मंदिर हैं |
जैसलमेर वह किला है, जो जीवित धरोहर (living heritage) की दलील आपके लिए खुद तैयार कर देता है। यह दिखाता है कि जिस स्मारक के भीतर लोग रहते हों, उसे खंडहर की तरह नहीं बचाया जा सकता। यह भी दिखाता है कि भारतीय धरोहर के लिए अगला खतरा सेनाओं से नहीं, बारिश और पाइपलाइनों से आ सकता है। इसे इसी उदाहरण के रूप में पढ़िए, तो यह किसी एक किले वाले सवाल से कहीं आगे जाकर आपको अंक दिलाएगा।
सामान्य प्रश्न
जैसलमेर किला किसने बनवाया?
भाटी राजपूतों के शासक रावल जैसल ने जैसलमेर किले की नींव रखी, जब वे अपनी राजधानी लोद्रवा से त्रिकूट पहाड़ी पर ले आए। ASI के मुताबिक किला संभवतः 1244 से पहले रावल सालिवाहन द्वितीय के समय में पूरा हो गया था।
जैसलमेर किला कब बना?
ब्रिटानिका और इंपीरियल गजेटियर ऑफ इंडिया इसकी नींव की तारीख 1156 बताते हैं, जबकि ASI का अपना पेज 1155 बताता है। दोनों इसे 12वीं सदी के मध्य में रखते हैं, और ASI का इशारा है कि काम 1244 से पहले पूरा हो गया था।
जैसलमेर किले को सोनार किला क्यों कहते हैं?
सोनार किला का मतलब है सुनहरा किला, और यह नाम इसके पत्थर के पीले-सुनहरे रंग से पड़ा। ASI भी इसी वजह से इसे सोनार किल्ला (Sonar Killa) कहता है।
क्या जैसलमेर किला UNESCO विश्व धरोहर स्थल है?
हाँ। इसे 21 जून 2013 को, नोम पेन्ह में हुए विश्व धरोहर समिति के 37वें सत्र में, मानदंड (ii) और (iii) के तहत राजस्थान के पहाड़ी किलों के छह घटकों में से एक के रूप में सूची में शामिल किया गया।
क्या जैसलमेर किले के भीतर आज भी लोग रहते हैं?
हाँ। UNESCO के मुताबिक किले में शुरू से एक बड़ी बस्ती रही है और वह आज भी आबाद है। राजस्थान पर्यटन भी भीतर की दुकानों, होटलों और पुरानी हवेलियों का जिक्र करता है, जिनमें परिवार पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं।
जैसलमेर किला खतरे में क्यों है?
सबसे बड़ा खतरा पानी है। सूची में शामिल करते समय UNESCO ने चेताया था कि बुनियादी ढाँचा काफी न होने से पहाड़ी की स्थिरता पर रिसाव का खतरा है। 2025 की रिपोर्टिंग इस समस्या को बढ़ती बारिश, पाइप से आने वाले पानी और खराब निकासी से जोड़ती है, और यह सब एक ऐसे किले में हो रहा है जो सूखी जलवायु के लिए बना था।
जैसलमेर किले में किन दरवाजों से होकर पहुँचते हैं?
ASI एक के बाद एक आने वाले चार दरवाजे गिनाता है: अखै पोल, गणेश पोल, सूरज पोल और हवा पोल। ये करीब 50 मीटर ऊँची पहाड़ी पर तीन समानांतर दीवारों वाली सुरक्षा के भीतर हैं।
जैसलमेर किले और सत्यजित राय का क्या संबंध है?
राजस्थान पर्यटन बताता है कि यह किला सत्यजित राय की फेलुदा वाली एक जासूसी कहानी, और उस पर बनी फिल्म सोनार केल्ला, दोनों की अहम पृष्ठभूमि है। यह एक सांस्कृतिक फुटनोट भर है, जैसलमेर किले का इतिहास नहीं।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. जैसलमेर किले के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसकी नींव 12वीं सदी में भाटी राजपूतों के रावल जैसल ने रखी थी।
2. इसे 2013 में राजस्थान के पहाड़ी किलों के हिस्से के रूप में विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया।
3. यह केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारक नहीं, बल्कि राजस्थान का राज्य संरक्षित स्मारक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) जैसलमेर 1951 से ASI के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है। गागरोन और आमेर राज्य द्वारा संरक्षित घटक हैं।
2. राजस्थान के पहाड़ी किलों के घटकों और UNESCO द्वारा बताई गई उनकी खासियत के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. गागरोन: नदी से सुरक्षित किला
2. रणथंभौर: जंगल वाला पहाड़ी किला
3. जैसलमेर: रेगिस्तानी पहाड़ी किला, जिसकी बस्ती आज भी आबाद है
ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) तीनों युग्म इस श्रृंखला के UNESCO विवरण से मेल खाते हैं।
3. रावल जैसल भाटी राजधानी को त्रिकूट पहाड़ी पर कहाँ से लाए थे?
- (a) मंडोर
- (b) लोद्रवा
- (c) आमेर
- (d) नागौर
उत्तर: (b) इंपीरियल गजेटियर दर्ज करता है कि लोद्रवा रक्षा के लिहाज से ठीक जगह नहीं थी, इसलिए जैसल ने जैसलमेर बसाया।
4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ASI जैसलमेर किले की नींव की तारीख 1155 बताता है, जबकि ब्रिटानिका 1156 बताता है।
2. जैसलमेर के शासक ने 12 दिसंबर 1818 को अंग्रेजों के साथ संधि की थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) दोनों बातें दर्ज हैं: नींव की दोनों तारीखें ASI और ब्रिटानिका के विवरणों में हैं, और रावल मूलराज की 12 दिसंबर 1818 की संधि भी।
5. सूची में शामिल करते समय UNESCO ने जैसलमेर किले की पहाड़ी की स्थिरता के लिए निम्नलिखित में से किसे मुख्य खतरा बताया था?
- (a) बफर जोन में खनन
- (b) बुनियादी ढाँचा काफी न होने से पानी का रिसाव
- (c) आगे बढ़ते रेत के टीले
- (d) सीमेंट कारखानों से वायु प्रदूषण
उत्तर: (b) UNESCO ने बताया था कि बुनियादी ढाँचा काफी न होने से पहाड़ी पर रिसाव का खतरा है। खदानें और सीमेंट कारखाने चित्तौड़गढ़ की चिंताएँ थीं।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- भारतीय कला विरासत की रक्षा करना इस समय की जरूरत है। चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2018, GS पेपर I।
- “जैसलमेर किले को उम्र से कम, और उसके भीतर चल रही जिंदगी से ज्यादा खतरा है।” पानी के रिसाव की वजहों और उससे निपटने के विकल्पों के संदर्भ में इस कथन का परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- थार रेगिस्तान के कारवाँ व्यापार और वहाँ पानी की कमी ने जैसलमेर की जगह और बनावट को कैसे आकार दिया? (10 अंक, 150 शब्द)
- राजस्थान के पहाड़ी किलों को छह अलग-अलग स्थलों के बजाय एक सीरियल प्रॉपर्टी (कई जगहों को मिलाकर बनी एक धरोहर) के रूप में सूची में शामिल किया गया। इस श्रृंखला में जैसलमेर की जगह के संदर्भ में सीरियल नामांकन का तर्क समझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)
- UNESCO जैसलमेर को पवित्र और लौकिक, दोनों तरह का किला बताता है। इसके मंदिरों, पुस्तकालय और बस्ती के संदर्भ में इस विवरण को समझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)