मिशन कर्मयोगी — जिसे आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB) कहा जाता है — भारत सरकार का एक महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम है जो सिविल सेवकों की क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण को आधुनिक बनाने के लिए बनाया गया है। 2 सितंबर 2020 को कैबिनेट द्वारा अनुमोदित इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2021-2026 तक 46 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना है।
पृष्ठभूमि और आवश्यकता
21वीं सदी की जटिल शासन चुनौतियों के लिए सिविल सेवकों को केवल नियम-पालक नहीं, बल्कि नागरिक-केंद्रित, तकनीक-समझ और नेतृत्व में सक्षम बनाना ज़रूरी है। पारंपरिक प्रशिक्षण मॉडल कक्षा-आधारित और अनिवार्य था — कर्मयोगी इसे बदलता है।
छह मुख्य स्तंभ
1. नीति ढाँचा
केंद्र सरकार के सभी विभागों के लिए एक समान क्षमता ढाँचा — “नागरिक के साथ व्यवहार” को मापदंड बनाना।
2. संस्थागत ढाँचा
PM HRMS (Human Resource Management System) के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
3. क्षमता विकास आयोग
Capacity Building Commission (CBC) की स्थापना — प्रशिक्षण संस्थाओं का नियमन और मानक निर्धारण।
4. iGOT कर्मयोगी मंच
iGOT (Integrated Government Online Training) एक डिजिटल लर्निंग मंच है जहाँ सिविल सेवक अपनी गति से, अपनी पसंद के अनुसार पाठ्यक्रम चुन सकते हैं। यह MOOC (Massive Open Online Courses) जैसा है।
5. ई-HRMS
मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली का डिजिटलीकरण — नियुक्ति से लेकर सेवानिवृत्ति तक।
6. निगरानी और मूल्यांकन
प्रशिक्षण के प्रभाव को मापने के लिए डेटा-संचालित निगरानी तंत्र।
शासन संरचना
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में PM-HRMC (Prime Minister’s Human Resources Management Council) सर्वोच्च निकाय है। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में Coordination Unit है। Capacity Building Commission तकनीकी नियामक की भूमिका निभाता है।
मिशन कर्मयोगी की विशेषताएँ
- नियम-आधारित से भूमिका-आधारित (Rule-based to Role-based) प्रशिक्षण में बदलाव
- स्व-गति और स्व-प्रेरित (Self-paced, Self-motivated) सीखने पर जोर
- सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के सहयोग से सामग्री निर्माण
- डेटा गोपनीयता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
आलोचनाएँ और चुनौतियाँ
- डिजिटल विभाजन — सभी सिविल सेवकों की ऑनलाइन पहुँच नहीं
- पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करना
- वास्तविक कार्यस्थल व्यवहार में परिवर्तन का मापन कठिन
यूपीएससी की दृष्टि से
मिशन कर्मयोगी GS-II (लोक प्रशासन, शासन, पारदर्शिता) के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। सिविल सेवा सुधार, ई-गवर्नेंस और क्षमता निर्माण पर प्रश्नों में इसे ज़रूर उद्धृत करें।