रेलवे सुरक्षा बल (RPF) संघ का सशस्त्र बल है। इसका काम भारतीय रेलवे की संपत्ति की रक्षा करना है, और 2003 से यात्रियों और यात्री क्षेत्रों की सुरक्षा भी इसी के जिम्मे है। इसे रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के तहत बनाया गया था। फिर एक संशोधन से यह संघ का सशस्त्र बल बना, और वह संशोधन 20 सितंबर 1985 से लागू हुआ। यह बल रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है, जबकि ट्रेनों में आम पुलिसिंग राज्यों के पास ही रहती है। यही दो बातें तय करती हैं कि यह बल क्या कर सकता है और क्या नहीं।
ज्यादातर अभ्यर्थी RPF को BSF और CISF के साथ एक और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल मानकर रख देते हैं। लेकिन यह CAPF नहीं है। गृह मंत्रालय की CAPF वाली दोनों सूचियों में RPF का नाम नहीं है, न उसकी वेबसाइट पर दी गई सात बलों की सूची में, न सालाना रिपोर्ट वाली पाँच बलों की सूची में। दूसरी गलती है RPF को ट्रेन की पुलिस समझ लेना। रेलवे पर आम अपराध दर्ज करना और उसकी जाँच करना राज्य की राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) का काम है। यह नोट दोनों बातें साफ करता है: RPF किसका बल है, और उसके कानूनी अधिकार कहाँ जाकर खत्म होते हैं।
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) क्या है?
RPF का फुल फॉर्म है Railway Protection Force, यानी रेलवे सुरक्षा बल। यह रेलवे का अपना सशस्त्र बल है, जिसे संसद के एक अधिनियम ने बनाया है। इसकी कमान एक महानिदेशक के हाथ में होती है, जो रेल मंत्रालय के जरिए केंद्र सरकार के प्रति जवाबदेह है। बल की वेबसाइट के मुताबिक इसमें 74,000 से ज्यादा कर्मी हैं। ये कर्मी पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर काम करते हैं, जहाँ रेलवे बोर्ड की 2022 की गिनती के हिसाब से RPF का रोज लगभग 2.3 करोड़ यात्रियों से वास्ता पड़ता है।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| फुल फॉर्म | Railway Protection Force (RPF), यानी रेलवे सुरक्षा बल |
| मूल कानून | रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957, जो 29 अगस्त 1957 को पारित हुआ |
| दर्जा | 1985 के संशोधन (1985 का अधिनियम 60) से संघ का सशस्त्र बल, जो 20 सितंबर 1985 से लागू है |
| मूल मंत्रालय | रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय नहीं |
| प्रमुख | महानिदेशक; सोनाली मिश्रा (IPS, 1993 बैच) ने 1 अगस्त 2025 को पहली महिला DG के रूप में कार्यभार संभाला |
| जिम्मेदारी | रेलवे संपत्ति, और 2003 के संशोधन से यात्री और यात्री क्षेत्र भी |
| इसका अपना दंड कानून | रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 |
| विशेष विंग | रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF), जिसका गठन 1962 में स्पेशल इमरजेंसी फोर्स के रूप में हुआ और 1965 में इसे नया नाम मिला |
| आदर्श वाक्य और गठन दिवस | “यशो लभस्व”; गठन दिवस 20 सितंबर को |
क्या RPF केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है?
नहीं। RPF संघ का सशस्त्र बल तो है, लेकिन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) नहीं है। इन दोनों नामों का मतलब अलग-अलग है। CAPF उन बलों का परिवार है जिन्हें गृह मंत्रालय सीमा की निगरानी और आंतरिक सुरक्षा के लिए नियंत्रित करता है। संघ का सशस्त्र बल (armed force of the Union) एक कानूनी दर्जा है। संसद ने 1985 में RPF को यह दर्जा दिया, लेकिन उसे रेल मंत्रालय के अधीन ही रहने दिया।
इस परिवार में कौन-कौन है, यह गृह मंत्रालय (MHA) की वेबसाइट से तय हो जाता है। वह सात CAPF गिनाती है (मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट सिर्फ पाँच गिनती है, और असम राइफल्स और NSG का ब्योरा उसमें अलग से आता है):
- असम राइफल्स (AR)
- सीमा सुरक्षा बल (BSF)
- केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF)
- केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF)
- भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP)
- राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG)
- सशस्त्र सीमा बल (SSB)
इस सूची में RPF नहीं है, और 2026 में इसका दूसरा सबूत भी मिल गया। संसद ने 2 अप्रैल 2026 को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 पारित किया। यह कानून पाँच CAPF के लिए सेवा के साझा नियम तय करता है। इसकी अनुसूची में हर बल का नाम उसके अपने अधिनियम के जरिए दर्ज है, और RPF अधिनियम, 1957 उनमें नहीं है। पूरे परिवार की बात केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों वाले नोट में विस्तार से है।
तो फिर यह दर्जा मायने क्यों रखता है? संघ के सशस्त्र बल पर वह अनुशासन लागू होता है जो किसी नागरिक सुरक्षा विंग पर नहीं होता। 1985 के संशोधन ने RPF के सदस्यों को बिना मंजूरी के ट्रेड यूनियन या राजनीतिक संगठनों से जुड़ने से रोक दिया। विधेयक के उद्देश्यों के कथन के शब्दों में, यह रोक “संघ के दूसरे सशस्त्र बलों पर लगी ऐसी ही पाबंदियों की तर्ज पर” लगाई गई थी। इस तरह की पाबंदियों का संवैधानिक आधार अनुच्छेद 33 है। यह अनुच्छेद संसद को छूट देता है कि वह सशस्त्र बलों के सदस्यों के, और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने वाले बलों के सदस्यों के मौलिक अधिकार सीमित कर सके।
एक तुलना यहाँ काम आती है, पर उसकी भी एक सीमा है। RPF सीमा पर तैनात BSF से ज्यादा किसी स्टील प्लांट की रखवाली करने वाली CISF के करीब है, क्योंकि दोनों किसी सरहद की नहीं, एक संपत्ति की रक्षा करते हैं। लेकिन नियंत्रण के सवाल पर यह तुलना टूट जाती है: CISF गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है, और RPF रेल मंत्रालय को।
वॉच एंड वार्ड से RPF तक का सफर
RPF की शुरुआत निजी रेलवे कंपनियों के चौकीदारों के रूप में हुई थी। संघ का सशस्त्र बल बनने में इसे एक सदी से भी ज्यादा समय लगा। नीचे दी गई हर तारीख ने इसे कोई नया अधिकार दिया:
- 1854 से: ईस्ट इंडियन रेलवे और दूसरी कंपनियाँ अपने ही कर्मचारियों को पुलिस के तौर पर रखती थीं, और उनका खर्च भी खुद उठाती थीं।
- 1872 से 1881: 1872 की रेलवे पुलिस समिति ने रेलवे पुलिसिंग को दो हिस्सों में बाँटा। एक थी गवर्नमेंट पुलिस, जो आज की GRP की पूर्वज है; दूसरी थी कंपनी पुलिस, जो RPF की पूर्वज है। यह बँटवारा 1881 में लागू हुआ।
- पहले विश्व युद्ध के बाद: कंपनियों के चौकीदारों को एक सुपरिंटेंडेंट के तहत वॉच एंड वार्ड संगठन में फिर से संगठित किया गया।
- 1954 से 1956: 1954 में इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक ने एक जाँच के बाद कानूनी आधार वाले बल की सिफारिश की। इसके बाद वॉच एंड वार्ड रेलवे सिक्योरिटी फोर्स के नाम से चला।
- 29 अगस्त 1957: RPF अधिनियम पारित हुआ और रेलवे सिक्योरिटी फोर्स RPF बन गई।
- 1962 और 1965: चीन के साथ युद्ध के दौरान सीमावर्ती जिलों में ट्रेनों की रखवाली के लिए RPF के ही जवानों से स्पेशल इमरजेंसी फोर्स बनाई गई। 1965 में यही रेलवे सुरक्षा विशेष बल बनी।
- 1966: रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम ने बल को उसका अपना दंड कानून दिया।
- 20 सितंबर 1985: 1985 के अधिनियम 60 ने RPF को संघ का सशस्त्र बल बनाया; इसके बाद RPF नियमावली, 1987 आई।
- 2003: RPF अधिनियम और रेलवे अधिनियम में संशोधन से यात्री और यात्री क्षेत्र भी इसकी जिम्मेदारी में जुड़े। साथ में रेलवे अधिनियम के तहत अपराधों की जाँच करने और मुकदमा चलाने का अधिकार भी मिला।
करीब सौ साल तक इस बल का अपना कोई कानून नहीं था। 1985 तक आते-आते विधेयक के उद्देश्यों के कथन ने 1957 के अधिनियम को “बल की जरूरतें पूरी करने के लिए नाकाफी” बताया। इसका इलाज नया कानून नहीं था, बल्कि दर्जे में बढ़ोतरी थी। इसीलिए RPF 20 सितंबर को, यानी जिस दिन यह संशोधन लागू हुआ, अपना गठन दिवस मनाता है।
RPF के पास कौन-से अधिकार हैं?
RPF के अधिकार असली हैं, लेकिन सीमित हैं। कौन-सा अधिकार लागू होगा, यह इस पर निर्भर करता है कि मामला किसकी संपत्ति का है, या कौन-सा कानून लागू हो रहा है। यह काम कानून की तीन परतें करती हैं।
RPF अधिनियम, 1957 के तहत
अधिनियम की धारा 11, अपने 1985 वाले रूप में, हर अधिकारी और सदस्य के कर्तव्य तय करती है:
- ऊपर के अधिकारियों के कानूनी आदेशों का तुरंत पालन करना और उन्हें अमल में लाना;
- रेलवे संपत्ति की रक्षा और हिफाजत करना;
- रेलवे संपत्ति की आवाजाही में आने वाली किसी भी रुकावट को हटाना;
- ऐसा कोई भी दूसरा काम करना जिससे रेलवे संपत्ति की सुरक्षा और बेहतर हो।
2003 के संशोधन ने इस जिम्मेदारी को यात्रियों और यात्री क्षेत्रों तक फैला दिया। धारा 12 किसी भी सदस्य को कुछ तय हालात में बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार देती है। जैसे, ड्यूटी पर तैनात किसी सदस्य पर हमला हो, या किसी व्यक्ति पर रेलवे संपत्ति से जुड़े संज्ञेय अपराध का वाजिब शक हो। इसके बाद वह प्रावधान आता है जो बताता है कि RPF क्या नहीं है। धारा 14 के तहत गिरफ्तारी करने वाले सदस्य को उस व्यक्ति को बिना बेवजह देरी किए किसी पुलिस अधिकारी को सौंपना होता है, या नजदीकी थाने पहुँचाना होता है।
RPF पकड़ता है; मामला पुलिस आगे बढ़ाती है।
रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 के तहत
यहाँ RPF अपने आप में एक थाने की तरह काम करता है। अगर किसी के पास ऐसी रेलवे संपत्ति मिले जिसके चोरी का माल होने का वाजिब शक हो, तो पहले अपराध पर पाँच साल तक की जेल हो सकती है। कम से कम एक साल की सजा तय है, जब तक कि अदालत कोई खास वजह दर्ज न करे। कोई भी सदस्य संदिग्ध को बिना वारंट गिरफ्तार कर सकता है। इसके बाद बल का अधिकारी (सहायक उप-निरीक्षक और उससे ऊपर) थाने के प्रभारी अधिकारी की शक्तियों के साथ जाँच करता है (धारा 6 और 8)।
सुप्रीम कोर्ट ने इस अधिकार के चारों ओर एक लकीर खींची है। बालकिशन ए. देवीदयाल बनाम महाराष्ट्र राज्य (31 जुलाई 1980) मामले में कोर्ट ने कहा कि 1966 के अधिनियम के तहत जाँच करने वाला RPF अधिकारी साक्ष्य अधिनियम की धारा 25 के मायने में “पुलिस अधिकारी” नहीं है। वजह यह है कि वह दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 के तहत चार्जशीट दाखिल नहीं कर सकता। इसलिए उसके सामने किया गया इकबालिया बयान अपने आप खारिज नहीं होता, जैसे पुलिस के सामने किया गया बयान हो जाता है।
रेलवे अधिनियम, 1989 और NDPS अधिनियम के तहत
2003 के संशोधन ने RPF को रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत अपराधों की जाँच करने और मुकदमा चलाने का अधिकार भी दिया। टिकटों की दलाली, या महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों में पुरुषों का घुस जाना, ऐसे ही अपराध हैं। इससे अलग, सहायक उप-निरीक्षक और उससे ऊपर के RPF अधिकारियों को NDPS अधिनियम के तहत नशीले पदार्थ जब्त करने और तस्करों को गिरफ्तार करने का अधिकार है। इसके बाद वे आरोपी को उन एजेंसियों को सौंप देते हैं जिन्हें आगे की कार्रवाई का अधिकार है।
इसे एक ही ट्रेन की दो चोरियों से समझिए। अंबाला के पास किसी यात्री का फोन बर्थ से उठा लिया गया। यह एक व्यक्ति के खिलाफ अपराध है, जो आम आपराधिक कानून के तहत आता है, और वह कानून अब भारतीय न्याय संहिता है। इसलिए FIR GRP के पास जाती है, और चोर को पकड़ने वाला RPF एस्कॉर्ट भी उसे आगे सौंप देता है। अब उसी सेक्शन पर ओवरहेड तांबे के तार का एक टुकड़ा गायब हो जाता है। यह रेलवे संपत्ति है, इसलिए RPF खुद संदिग्ध को गिरफ्तार करता है और 1966 के अधिनियम के तहत जाँच भी खुद करता है।
बल वही, ट्रेन वही, लेकिन अधिकार दो अलग-अलग।
RPF और GRP में अंतर क्या है?
RPF और GRP में अंतर एक वाक्य में समझिए: GRP रेलवे पर राज्य की पुलिस है, और RPF रेलवे का अपना सशस्त्र बल। यह बँटवारा संविधान से आता है। राज्य सूची की प्रविष्टि 2 में लिखा है “पुलिस (जिसमें रेलवे और ग्राम पुलिस शामिल हैं)”। इसलिए ट्रेनों में होने वाला अपराध राज्य का मामला है, भले ही पटरियाँ कई राज्यों से होकर गुजरती हों। सातवीं अनुसूची वाला नोट यही बात समझाता है।
रेल मंत्रालय ने भी 27 नवंबर 2024 के अपने लिखित जवाब में यही कहा है। रेलवे पर अपराध की रोकथाम से लेकर जाँच तक का काम राज्यों का है, जो GRP और जिला पुलिस के जरिए होता है। RPF इस काम में उनकी “पूरक” भूमिका निभाता है।
| बिंदु | RPF | GRP |
|---|---|---|
| नियंत्रण | केंद्र सरकार, रेल मंत्रालय के जरिए | राज्य सरकार, राज्य पुलिस के हिस्से के रूप में |
| कानूनी आधार | RPF अधिनियम, 1957, जिसमें 1985 और 2003 में संशोधन हुए | राज्य सूची की प्रविष्टि 2 और राज्य का पुलिस कानून |
| मुख्य काम | रेलवे संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्री | स्टेशनों और ट्रेनों में व्यवस्था; अपराध की रोकथाम और उसका पता लगाना |
| आम अपराध की FIR | नहीं; गिरफ्तार लोग धारा 14 के तहत पुलिस को सौंपे जाते हैं | हाँ; FIR दर्ज करती है और जाँच करती है |
| कौन-से विशेष कानून चलाता है | RP(UP) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989 | आम आपराधिक कानून, यानी अब भारतीय न्याय संहिता |
| पहुँच | पूरे नेटवर्क पर कमान की एक ही कड़ी | राज्य की सीमा पर खत्म |
| गुड्स शेड, वैगन और पार्सल दफ्तर | RPF की जिम्मेदारी | GRP की जिम्मेदारी नहीं |
पहुँच की इस समस्या की सबसे साफ मिसाल RPF के अपने इतिहास वाले पेज पर मिलती है। अंबाला से कालका तक के 70 किलोमीटर के एक घंटे के सफर में एक यात्री की देखभाल चार GRP इकाइयाँ करती हैं। रेलवे का मुख्य तर्क यही है कि उसे ऐसा बल चाहिए जिसका अधिकार शुरू से आखिर तक चले।
तालमेल के लिए एक औपचारिक व्यवस्था भी है। हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में एक राज्य स्तरीय रेलवे सुरक्षा समिति (SLSCR) होती है, जिसकी अध्यक्षता वहाँ के पुलिस प्रमुख करते हैं। संवेदनशील रूटों पर RPF के एस्कॉर्ट GRP के एस्कॉर्ट के साथ चलते हैं।
यहाँ एक सवाल अपने आप उठता है: पूरी रेलवे पुलिसिंग RPF को ही क्यों न सौंप दी जाए? जवाब यह है कि रेलवे पुलिस राज्य सूची में है, इसलिए रेलवे पुलिसिंग कुल मिलाकर राज्यों का विषय है। 2003 में संसद ने बस इतना किया कि RPF की अपनी जिम्मेदारी बढ़ा दी। FIR और आम अपराध की जाँच उसने GRP के पास ही रहने दी।
RPF का संगठन कैसा है?
कागज पर कमान का ढाँचा सीधा है। अधिनियम की धारा 8 के तहत बल का अधीक्षण केंद्र सरकार के पास है, और कमान महानिदेशक के पास। हर जोनल रेलवे में वरिष्ठ RPF अधिकारी महाप्रबंधक (जनरल मैनेजर) की सामान्य निगरानी में बल चलाते हैं। इस तरह एक सशस्त्र बल रेलवे जोन की नागरिक प्रशासन वाली कड़ी से जुड़ जाता है।
सीधी भर्ती वाले अधिकारी सिविल सेवा परीक्षा से आते हैं। उनकी ट्रेनिंग लखनऊ की जगजीवन राम RPF अकादमी में होती है, जो बल का केंद्रीय प्रशिक्षण संस्थान है। हाल के दो महानिदेशक, मनोज यादव और सोनाली मिश्रा, IPS अधिकारी हैं।
जोनल इकाइयों के अलावा बल की वेबसाइट कुछ विशेष शाखाएँ भी गिनाती है:
- रेलवे सुरक्षा विशेष बल (RPSF): यह बटालियनों में संगठित है (3री बटालियन लखनऊ में है), और 1962 की स्पेशल इमरजेंसी फोर्स से निकला है।
- प्रशिक्षण नेटवर्क: लखनऊ की अकादमी के अलावा जोनल प्रशिक्षण केंद्र, और कुत्तों के लिए K-9 स्कूल।
बल में महिलाओं का हिस्सा छह साल में लगभग तीन गुना हो गया है। 2018 से पहले यह स्वीकृत संख्या का करीब 3% था, और नवंबर 2024 तक मौजूदा संख्या का 9.38% हो गया।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते, मेरी सहेली और AAHT क्या हैं?
RPF का ज्यादातर सार्वजनिक काम अब देशभर में चलने वाले, नाम वाले ऑपरेशनों के रूप में होता है। परीक्षा के लिहाज से तीन सबसे अहम हैं। तीनों यात्रियों के अलग-अलग समूह की रक्षा करते हैं, और इनके नाम आपस में आसानी से गड्डमड्ड हो जाते हैं।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते (यानी “छोटे देवदूत”; कुछ सरकारी विज्ञप्तियों में इसकी अंग्रेजी वर्तनी Nanhe Faristey भी मिलती है) स्टेशनों और ट्रेनों पर ऐसे बच्चों को बचाता है जिन्हें देखभाल और सुरक्षा की जरूरत है। इनमें ज्यादातर घर से भागे हुए बच्चे होते हैं। मंत्रालय की प्रकाशित गिनती 2018 से शुरू होती है। तब से मई 2024 तक RPF ने 84,119 बच्चों को बचाया, और सबसे ज्यादा 17,756 बच्चे 2022 में बचाए गए। 2025 का आँकड़ा, जो सिर्फ नवंबर तक गिना गया, तब तक 17,231 पहुँच चुका था। बचाए गए बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति को सौंपा जाता है, जो उन्हें उनके माता-पिता तक पहुँचाती है।
मेरी सहेली
मेरी सहेली (यानी “मेरी दोस्त”) लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए है। यह उन्हें शुरुआती स्टेशन से मंजिल तक सुरक्षा देती है। इसकी शुरुआत दक्षिण पूर्व रेलवे पर एक पायलट के रूप में हुई थी, और 17 अक्टूबर 2020 से इसे सभी जोनल रेलवे तक बढ़ा दिया गया। महिला RPF कर्मियों की एक टीम शुरुआती स्टेशन पर इन यात्रियों से मिलती है और उन्हें सावधानियों के बारे में बताती है। वे जो हेल्पलाइन नंबर देती हैं, वह अब 139 है, क्योंकि पुरानी सुरक्षा हेल्पलाइन 182 को 1 अप्रैल 2021 से इसी में मिला दिया गया।
ऑपरेशन AAHT
ऑपरेशन AAHT का पूरा नाम Action Against Human Trafficking है, यानी मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई। यह उन तस्करों को निशाना बनाता है जो लंबी दूरी की ट्रेनों में महिलाओं और बच्चों को ले जाते हैं। रेलवे बोर्ड के 2 फरवरी 2022 के परिपत्र ने RPF की भूमिका तय की, और उसकी सीमा भी साफ-साफ बता दी। RPF को तस्करी के मामलों की जाँच का अधिकार नहीं है। इसलिए उसका काम पीड़ितों को पहचानना, उन्हें बचाना और मामला पुलिस को सौंपना है।
मई 2025 का एक मामला दिखाता है कि यह कड़ी कैसे काम करती है। नेपाल सीमा पर रक्सौल में RPF की एक टीम ने GRP और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर सत्याग्रह एक्सप्रेस से 13 से 17 साल की चार लड़कियों को बचाया। FIR GRP रक्सौल में दर्ज हुई, RPF ने दर्ज नहीं की। 2024-25 में इस ऑपरेशन में 929 पीड़ितों को बचाया गया, जिनमें 874 बच्चे थे, और 274 तस्कर गिरफ्तार हुए। 2025 में नवंबर तक यह गिनती 978 बचाए गए लोगों और 292 गिरफ्तारियों तक पहुँची। इसकी बड़ी तस्वीर के लिए देखिए कि तस्करी कैसे पलायन के सहारे पनपती है।
इनके साथ-साथ कुछ और नाम वाले अभियान भी चलते हैं। नीचे 2025 में नवंबर तक के आँकड़े हैं:
- ऑपरेशन अमानत: छूटे हुए सामान के 53,607 मामलों में सामान लौटाया गया।
- ऑपरेशन नार्कोस: नशीले पदार्थों के 1,980 मामले पकड़े गए।
- ऑपरेशन उपलब्ध: टिकट दलालों के खिलाफ 2,449 मामले।
RPF से जुड़े हाल के घटनाक्रम
2003 के बाद से RPF का कानूनी आधार नहीं बदला है। लेकिन पिछले दो सालों में इसके नेतृत्व और साझेदारियों में बदलाव आए हैं:
- 27 अक्टूबर 2024: जोखिम में पड़े बच्चों की सुरक्षा के लिए संशोधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया), जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ मिलकर जारी किया गया।
- 2024: तस्करी के मुद्दे पर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के साथ औपचारिक साझेदारी।
- नवंबर 2024: 452 उप-निरीक्षकों और 4,208 कांस्टेबलों की भर्ती जारी, जिसमें 15% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
- 1 अगस्त 2025: सोनाली मिश्रा ने कार्यभार संभाला। मंत्रालय जिसे बल का 143 साल का सफर कहता है, उसमें वे पहली महिला महानिदेशक हैं। उनकी नियुक्ति 31 अक्टूबर 2026 तक है।
- 23 फरवरी 2026: NCW ने RPF और कोंकण रेलवे के साथ मिलकर मडगाँव में रेलवे कर्मचारियों के लिए तस्करी-रोधी कार्यशाला की।
- 2 अप्रैल 2026: संसद ने CAPF (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026 पारित किया, जिसकी अनुसूची में RPF शामिल नहीं है।
रेलवे पुलिसिंग पर बहस
RPF की अपनी वेबसाइट पर रेलवे का पक्ष यह है कि मौजूदा बँटवारे में “गंभीर विसंगतियाँ” हैं। GRP का अधिकार क्षेत्र हर राज्य की सीमा पर टूट जाता है। और कई वर्दीधारी एजेंसियों के सामने खड़ा यात्री नहीं जानता कि शिकायत किससे करे। राज्यों का पक्ष संविधान है। खुद रेलवे बोर्ड का 2022 का परिपत्र भी मानता है कि रेलवे पर अपराध मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है।
दोनों में से कोई भी छोर समझदारी नहीं है। रेलवे पुलिसिंग राज्यों से ले लेने का मतलब होगा रेलवे पुलिस को राज्य सूची से बाहर करना। वहीं RPF को सिर्फ माल की रखवाली करने वाला मानना 2003 के संशोधन को नजरअंदाज करना होगा। अब तक का व्यावहारिक रास्ता तालमेल है। यह तालमेल राज्य स्तरीय समितियों से होता है, और उस एक 139 हेल्पलाइन से जो अब 112 आपातकालीन नंबर से जुड़ी है। राज्य पुलिस होने के नाते GRP की जवाबदेही के बड़े सवाल भारत में पुलिस सुधार की बहस का हिस्सा हैं।
परीक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल कैसे पढ़ें
RPF, GS पेपर III में “विभिन्न सुरक्षा बल, संस्थाएँ और उनके अधिदेश” वाले हिस्से में आता है। सातवीं अनुसूची और केंद्र-राज्य संबंधों के जरिए यह GS पेपर II तक भी पहुँचता है। Anantam IAS के प्रश्न बैंक में 2013 से 2026 तक का कोई भी मुख्य परीक्षा प्रश्न RPF का नाम नहीं लेता।
यह विषय संगठित अपराध के रास्ते आता है। मुख्य परीक्षा 2018 के GS पेपर III में पूछा गया था: “दुनिया के दो सबसे बड़े अवैध अफीम उगाने वाले देशों से भारत की निकटता ने उसकी आंतरिक सुरक्षा की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मादक पदार्थों की तस्करी और हथियारों की तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसी दूसरी अवैध गतिविधियों के बीच के संबंधों को समझाइए। इन्हें रोकने के लिए क्या जवाबी उपाय किए जाने चाहिए?” ऐसे सवाल में जवाबी उपायों की मिसाल के तौर पर RPF के NDPS अधिकार और ऑपरेशन AAHT अच्छा उदाहरण बनते हैं।
प्रीलिम्स में सवाल संवैधानिक पहलू पर टिकते हैं। Anantam IAS के 2013 से 2026 तक के 1,403 प्रीलिम्स प्रश्नों वाले बैंक में सुरक्षा बल अलग विषय के रूप में नहीं हैं। पुलिस और सातवीं अनुसूची वाला पहलू भारतीय राजव्यवस्था में आता है, जिसके हिस्से 1,403 में से 240 प्रश्न हैं।
इन तथ्यों को तब तक दोहराइए जब तक ये बिना जोर लगाए याद न आने लगें:
- 29 अगस्त 1957: RPF अधिनियम पारित हुआ; रेलवे सिक्योरिटी फोर्स RPF बनी।
- 20 सितंबर 1985: संघ का सशस्त्र बल बना, और यही तारीख गठन दिवस के रूप में मनाई जाती है।
- 1966: RP(UP) अधिनियम, यानी बल का अपना दंड कानून, जिसमें पहले अपराध पर पाँच साल तक की सजा है।
- 2003: यात्री और यात्री क्षेत्र जिम्मेदारी में जुड़े, और साथ में रेलवे अधिनियम के अधिकार भी मिले।
- रेल मंत्रालय: गृह मंत्रालय नहीं, और MHA की CAPF सूचियों में भी नहीं।
- धारा 14: RPF अपने अधिनियम के तहत जिसे भी गिरफ्तार करता है, उसे पुलिस को सौंपा जाता है।
- ऑपरेशन: बच्चों के लिए नन्हे फरिश्ते, अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए मेरी सहेली, और तस्करी के खिलाफ AAHT।
तीन गलतफहमियाँ सबसे ज्यादा अंक कटवाती हैं। पहली: संघ का सशस्त्र बल एक कानूनी दर्जा है, और CAPF गृह मंत्रालय के बलों का परिवार; RPF के पास सिर्फ पहला है। दूसरी: RPF और GRP का सवाल तब सुलझ जाता है जब आप पूछते हैं कि संपत्ति किसकी है, या कौन-सा कानून लागू होता है। तीसरी: 1966 का अधिनियम चोरी की रेलवे संपत्ति से जुड़ा है, जबकि रेलवे अधिनियम, 1989 दलाली जैसे अपराधों को देखता है।
इसके जैसे दूसरे बलों को साथ रखकर पढ़ना सबसे आसान है। सीमा सुरक्षा बल और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड वाले नोट सीमा और आतंकवाद-रोधी पहलू को समझाते हैं। आंतरिक सुरक्षा ग्रिड वाला नोट दिखाता है कि ये एजेंसियाँ आपस में कैसे जुड़ती हैं।
| बल | मंत्रालय | मूल कानून | किसकी रक्षा करता है |
|---|---|---|---|
| RPF | रेल | RPF अधिनियम, 1957 | रेलवे संपत्ति, यात्री क्षेत्र और यात्री |
| GRP | राज्य सरकार | राज्य पुलिस कानून, राज्य सूची की प्रविष्टि 2 के तहत | राज्य के भीतर रेलवे पर व्यवस्था और अपराध नियंत्रण |
| CISF | गृह | CISF अधिनियम, 1968 | औद्योगिक उपक्रम और दूसरे अधिसूचित प्रतिष्ठान |
| CRPF | गृह | CRPF अधिनियम, 1949 | राज्यों में आंतरिक सुरक्षा |
| BSF | गृह | BSF अधिनियम, 1968 | पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी सीमाएँ |
आपकी तैयारी में RPF को एक दिन नहीं, एक घंटा दीजिए। चार तारीखें और धारा 14 का नियम याद कर लीजिए, तो ज्यादातर सवाल आप संभाल लेंगे। असली फायदा उस आदत का है जो यह विषय बनाता है। कोई विषय किस सूची में है, यह पूछने की आदत GS पेपर II में पुलिस से लेकर सार्वजनिक व्यवस्था तक, कई सवाल सुलझा देती है।
सामान्य प्रश्न
RPF का फुल फॉर्म क्या है?
RPF का फुल फॉर्म Railway Protection Force है, यानी रेलवे सुरक्षा बल। यह संघ का सशस्त्र बल है, जिसे रेलवे संपत्ति की रक्षा के लिए रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957 के तहत बनाया गया। 2003 से यात्री और यात्री क्षेत्र भी इसके दायरे में आते हैं। यह रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है।
क्या RPF केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) है?
नहीं। गृह मंत्रालय की CAPF वाली दोनों सूचियों में RPF नहीं है, न वेबसाइट पर दी गई सात बलों की सूची में, न सालाना रिपोर्ट वाली पाँच बलों की सूची में। वजह यह है कि यह रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है। यह संघ का सशस्त्र बल है, यानी इसके पास 1985 में मिला एक कानूनी दर्जा है, और यह CAPF होने से अलग बात है।
RPF और GRP में क्या अंतर है?
RPF केंद्र सरकार के अधीन रेलवे का अपना सशस्त्र बल है, जबकि राजकीय रेलवे पुलिस राज्य पुलिस का हिस्सा है। पुलिस राज्य सूची का विषय है, इसलिए ट्रेनों और स्टेशनों पर आम अपराध की FIR GRP दर्ज करती है और जाँच भी वही करती है। RPF रेलवे संपत्ति और यात्रियों की रक्षा करता है, और आम अपराध में जिसे गिरफ्तार करता है, उसे पुलिस को सौंप देता है।
क्या RPF FIR दर्ज कर सकता है?
आम अपराध के लिए नहीं, जैसे किसी यात्री का फोन चोरी होना; ऐसी FIR GRP या जिला पुलिस दर्ज करती है। लेकिन रेलवे के विशेष कानूनों के तहत RPF अपने मामले खुद चलाता है। इनमें मुख्य हैं रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 और रेलवे अधिनियम, 1989, जिनमें इसके अधिकारी जाँच करते हैं और मुकदमा चलाते हैं।
RPF संघ का सशस्त्र बल कब बना?
RPF, रेलवे सुरक्षा बल (संशोधन) अधिनियम, 1985 के जरिए संघ का सशस्त्र बल बना, जो 20 सितंबर 1985 को लागू हुआ। बल हर साल 20 सितंबर को अपना गठन दिवस मनाता है।
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते क्या है?
ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते RPF का अभियान है, जो रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों पर देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों को बचाता है। इनमें ज्यादातर घर से भागे हुए बच्चे होते हैं। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक 2018 से मई 2024 के बीच 84,119 बच्चों को बचाया गया। बचाए गए बच्चे जिला बाल कल्याण समिति को सौंपे जाते हैं, जो उन्हें उनके परिवारों तक लौटाती है।
RPF की मेरी सहेली पहल क्या है?
मेरी सहेली RPF की एक पहल है, जो लंबी दूरी की ट्रेनों में अकेले सफर करने वाली महिलाओं के लिए है। यह उन्हें शुरुआती स्टेशन से मंजिल तक सुरक्षा देती है। महिला RPF कर्मियों की टीमें ट्रेन रवाना होने से पहले इन यात्रियों को जरूरी बातें बताती हैं। इसकी शुरुआत दक्षिण पूर्व रेलवे पर एक पायलट के रूप में हुई थी, और 17 अक्टूबर 2020 से इसे सभी जोन तक बढ़ा दिया गया।
रेलवे सुरक्षा बल का प्रमुख कौन होता है?
RPF का प्रमुख महानिदेशक होता है, जिसे केंद्र सरकार नियुक्त करती है। 1993 बैच की IPS अधिकारी सोनाली मिश्रा ने 1 अगस्त 2025 को कार्यभार संभाला। वे इस बल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला हैं, और उनकी नियुक्ति 31 अक्टूबर 2026 तक के लिए मंजूर है।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह गृह मंत्रालय द्वारा सूचीबद्ध केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में से एक है।
2. 1985 में RPF अधिनियम में संशोधन करके इसे संघ का सशस्त्र बल घोषित किया गया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b) RPF रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है और MHA की CAPF सूचियों में नहीं है; 1985 के संशोधन ने इसे संघ का सशस्त्र बल बनाया।
2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सातवीं अनुसूची में राज्य सूची की प्रविष्टि 2 रेलवे पुलिस को शामिल करती है।
2. रेलवे पर आम अपराध दर्ज करना और उसकी जाँच करना मुख्य रूप से राजकीय रेलवे पुलिस और जिला पुलिस की जिम्मेदारी है।
3. RPF अधिनियम, 1957 के तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने वाले RPF सदस्य को उसे किसी पुलिस अधिकारी को सौंपना होता है, या नजदीकी थाने ले जाना होता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (d) पुलिस, जिसमें रेलवे पुलिस भी शामिल है, राज्य सूची का विषय है, और RPF अधिनियम की धारा 14 के तहत गिरफ्तार व्यक्तियों को पुलिस को सौंपना जरूरी है।
3. रेलवे सुरक्षा बल का ऑपरेशन AAHT किसके खिलाफ है?
- (a) यात्रियों के सामान की चोरी
- (b) रेल नेटवर्क के जरिए मानव तस्करी
- (c) आरक्षित टिकटों की दलाली
- (d) रेल से वन्यजीवों की तस्करी
उत्तर: (b) AAHT का पूरा नाम Action Against Human Trafficking है; टिकट दलाली ऑपरेशन उपलब्ध के तहत आती है, और सामान लौटाना ऑपरेशन अमानत के तहत।
4. किस कानून के तहत रेलवे सुरक्षा बल का अधिकारी किसी अपराध की जाँच उन शक्तियों के साथ कर सकता है जो किसी संज्ञेय मामले की जाँच करने वाले थाना प्रभारी अधिकारी के पास होती हैं?
- (a) भारतीय रेलवे अधिनियम, 1890
- (b) रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966
- (c) रेलवे सुरक्षा बल अधिनियम, 1957
- (d) पुलिस अधिनियम, 1861
उत्तर: (b) 1966 के अधिनियम की धारा 8 बल के अधिकारी को जाँच की ये शक्तियाँ देती है; इसके उलट RPF अधिनियम कहता है कि गिरफ्तार व्यक्तियों को पुलिस को सौंपा जाए।
5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरी सहेली पहल को अक्टूबर 2020 में सभी जोनल रेलवे तक बढ़ाने से पहले दक्षिण पूर्व रेलवे पर पायलट के रूप में चलाया गया था।
2. ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते का मकसद रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों पर देखभाल और सुरक्षा की जरूरत वाले बच्चों को बचाना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (c) दोनों कथन इन दोनों पहलों के बारे में रेल मंत्रालय के आधिकारिक विवरण से मेल खाते हैं।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- रेलवे सुरक्षा बल संघ का सशस्त्र बल है, लेकिन केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल नहीं। इस अंतर को समझाइए, और बताइए कि बल के अधिकारों के लिए इसका क्या मतलब है। (10 अंक, 150 शब्द)
- रेलवे पर पुलिसिंग राज्य का विषय है, फिर भी एक ही रेल यात्रा अक्सर कई राज्यों से होकर गुजरती है। RPF और राजकीय रेलवे पुलिस के बीच काम का बँटवारा यात्रियों की सुरक्षा पर कैसे असर डालता है, इसका परीक्षण कीजिए, और तालमेल बेहतर करने के उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द)
- ऑपरेशन AAHT और ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते के संदर्भ में, रेल नेटवर्क पर मानव तस्करी रोकने और जोखिम में पड़े बच्चों की सुरक्षा में रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- वॉच एंड वार्ड संगठन से संघ के सशस्त्र बल तक, रेलवे सुरक्षा बल के विकास का क्रम बताइए। 1985 और 2003 के संशोधनों ने इसके स्वरूप को कैसे बदला? (15 अंक, 250 शब्द)
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि रेलवे संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम, 1966 के तहत जाँच करने वाला RPF अधिकारी पुलिस अधिकारी नहीं है। इसके पीछे के तर्क को समझाइए, और रेलवे संपत्ति से जुड़े अपराधों में मुकदमा चलाने पर इसके असर की चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)