UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

राज्य के राज्यपाल: भूमिका, शक्तियाँ और सुधार (यूपीएससी राजव्यवस्था)

भारत में राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख और राष्ट्रपति के प्रतिनिधि हैं। विवेकाधीन शक्तियाँ, सुप्रीम कोर्ट निर्णय और यूपीएससी GS-II संदर्भ।

Governor of a State: Role, Powers and Reforms (UPSC Polity) — UPSC featured image

भारत में राज्यपाल (Governor) संविधान के अनुच्छेद 153-167 के तहत राज्य का संवैधानिक प्रमुख है। वह राष्ट्रपति का प्रतिनिधि और राज्य-केंद्र के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी है। राज्यपाल की भूमिका यूपीएससी GS-II का एक विवादास्पद और महत्वपूर्ण विषय है।

संवैधानिक प्रावधान

  • अनुच्छेद 153: प्रत्येक राज्य में एक राज्यपाल।
  • अनुच्छेद 154: कार्यकारी शक्ति राज्यपाल में निहित।
  • अनुच्छेद 155: राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति।
  • अनुच्छेद 156: 5 वर्ष का कार्यकाल; राष्ट्रपति की इच्छापर्यंत।

राज्यपाल की शक्तियाँ

कार्यकारी शक्तियाँ

  • मुख्यमंत्री की नियुक्ति, मंत्रिपरिषद को पद की शपथ।
  • विश्वविद्यालयों के कुलाध्यक्ष।

विधायी शक्तियाँ

  • विधानसभा सत्र, विधेयकों पर स्वीकृति, अध्यादेश।
  • कुछ विधेयकों को राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित रखना।

विवेकाधीन शक्तियाँ

  • त्रिशंकु विधानसभा में मुख्यमंत्री की नियुक्ति।
  • विधेयकों पर अनुमति देने में देरी।
  • अनुच्छेद 356 की सिफारिश — राष्ट्रपति शासन।

विवाद और आलोचनाएँ

  • राजनीतिक पक्षपात — विपक्षी राज्यों में केंद्र के एजेंट की भूमिका।
  • विधेयकों पर अनिश्चितकाल रोक — संवैधानिक संकट।
  • अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग — S.R. Bommai केस (1994) से नियंत्रित।

महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय

  • S.R. Bommai बनाम भारत संघ (1994) — अनुच्छेद 356 के दुरुपयोग पर अंकुश।
  • नाबाम रेबिया (2016) — राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने में मनमानी नहीं कर सकते।
  • पंजाब बनाम राज्यपाल (2023) — सुप्रीम कोर्ट: राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चितकाल नहीं रोक सकते।

सुधार के सुझाव

  • सरकारिया आयोग (1988): राज्यपाल की नियुक्ति में CM से परामर्श।
  • पुंछी आयोग (2010): निश्चित कार्यकाल; हटाने की प्रक्रिया।

यूपीएससी प्रासंगिकता

  • GS-II: राज्यपाल की भूमिका, केंद्र-राज्य संबंध।
  • प्रारंभिक: अनुच्छेद 153-167; S.R. Bommai (1994)।
  • मुख्य: “राज्यपाल की विवेकाधीन शक्तियाँ और संघीय ढाँचे पर प्रभाव।”

राज्यपाल पद संवैधानिक सिद्धांत और राजनीतिक वास्तविकता के बीच की कड़ी है। S.R. Bommai से लेकर 2023 के सुप्रीम कोर्ट निर्णयों तक — न्यायपालिका ने इस पद की मर्यादाएँ तय की हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

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