हरित हाइड्रोजन (Green Hydrogen) को 21वीं सदी का “स्वच्छ ईंधन” कहा जा रहा है। यह एक ऐसा ऊर्जा वाहक है जो केवल पानी उत्पन्न करता है — कोई CO₂ नहीं। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM) को मंज़ूरी दी जो 2030 तक 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखता है।
हाइड्रोजन के प्रकार
ग्रे हाइड्रोजन
प्राकृतिक गैस से उत्पादित — CO₂ उत्सर्जन होता है। अभी वैश्विक हाइड्रोजन उत्पादन का 95% ग्रे हाइड्रोजन है।
ब्लू हाइड्रोजन
प्राकृतिक गैस से उत्पादित परंतु CO₂ को Carbon Capture and Storage (CCS) से हटाया जाता है।
हरित हाइड्रोजन
नवीकरणीय ऊर्जा से पानी के इलेक्ट्रोलिसिस द्वारा उत्पादित — शून्य कार्बन। यही भारत का लक्ष्य है।
NGHM के मुख्य लक्ष्य (2030 तक)
- 5 मिलियन टन हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता
- 125 GW अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता
- ₹8 लाख करोड़ से अधिक का निवेश
- 6 लाख से अधिक नौकरियाँ
- जीवाश्म ईंधन आयात में ₹1 लाख करोड़ की कमी
SIGHT कार्यक्रम
NGHM के तहत SIGHT (Strategic Interventions for Green Hydrogen Transition) कार्यक्रम प्रारंभिक परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देता है।
अनुप्रयोग
- उद्योग: इस्पात, उर्वरक, पेट्रोरसायन में डीकार्बनाइज़ेशन
- परिवहन: हाइड्रोजन ईंधन सेल बस, ट्रेन
- ऊर्जा भंडारण: नवीकरणीय ऊर्जा की अनिश्चितता को संतुलित करना
- निर्यात: भारत को हरित हाइड्रोजन निर्यातक देश बनाना
चुनौतियाँ
- उत्पादन लागत अभी भी अधिक
- इलेक्ट्रोलाइज़र विनिर्माण में चीन पर निर्भरता
- भंडारण और परिवहन की तकनीकी चुनौतियाँ
- बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा की उपलब्धता
यूपीएससी की दृष्टि से
हरित हाइड्रोजन GS-III (ऊर्जा, पर्यावरण, विज्ञान) के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय है। 2070 नेट-ज़ीरो लक्ष्य और जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में परीक्षा में इसका महत्त्व बढ़ रहा है।