Rhynchostylis retusa, जिसे आम तौर पर फ़ॉक्सटेल ऑर्किड कहा जाता है, एक ख़ुशबूदार एपिफाइट (epiphyte — दूसरे पेड़ों पर टिककर उगने वाला) ऑर्किड है, जो दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के ऊँचे पेड़ों के तनों से गुलाबी-बैंगनी लंबी लटों की शक्ल में लटकता है। यह असम और अरुणाचल प्रदेश, दोनों का राज्य-पुष्प है। असम में इसे कोपौ फुल कहते हैं और यह रंगाली बिहू से गहरे जुड़ा है — वसंत का वह त्योहार जो असमिया नया साल है। बिहू नाच के वक़्त लड़कियाँ कोपौ फुल की लटें बालों में गूँथती हैं, और यह ऑर्किड असमिया सांस्कृतिक पहचान का बड़ा प्रतीक बन गया है। अरुणाचल प्रदेश में भी राज्य सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग फ़ॉक्सटेल ऑर्किड (Rhynchostylis retusa) को आधिकारिक तौर पर राज्य-पुष्प बताता है। यह प्रजाति सिर्फ़ पूर्वोत्तर भारत तक सीमित नहीं है — इसका क़ुदरती इलाक़ा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला है (Kew POWO इसे दक्षिणी चीन से लेकर उष्णकटिबंधीय एशिया तक दर्ज करता है)।

किताबों वाली उलझन साफ़ कर लीजिए: Rhynchostylis retusa असम और अरुणाचल प्रदेश, दोनों का आधिकारिक राज्य-पुष्प है। कुछ स्रोत कोपौ फुल के मज़बूत बिहू रिश्ते की वजह से सिर्फ़ असम पर ज़ोर देते हैं, लेकिन अरुणाचल प्रदेश भी फ़ॉक्सटेल ऑर्किड को अपना राज्य-पुष्प आधिकारिक रूप से बताता है (अरुणाचल DIPR का “About State” पेज देखिए)। पहले जो यह बात लिखी जाती थी कि “अरुणाचल का राज्य-पुष्प कोई और प्रजाति है”, वह ग़लत थी और सुधार ली गई है।
वर्गीकरण और वानस्पतिक पहचान
Rhynchostylis retusa कुल Orchidaceae, उपकुल Epidendroideae और ट्राइब Vandeae में आता है। वंश Rhynchostylis में सिर्फ़ चार प्रजातियाँ हैं, चारों उष्णकटिबंधीय एशिया की मूल निवासी, और इनमें Rhynchostylis retusa सबसे ज़्यादा फैली हुई है।
वैज्ञानिक वर्गीकरण
- जगत (Kingdom): Plantae
- गण (Order): Asparagales
- कुल (Family): Orchidaceae
- वंश (Genus): Rhynchostylis
- प्रजाति (Species): R. retusa (L.) Blume
आम नाम
- फ़ॉक्सटेल ऑर्किड (अंग्रेज़ी) — क्योंकि घनी भरी फूल-डंडी लोमड़ी की झबरी पूँछ जैसी लगती है
- कोपौ फुल / कोपौ-फुल (असमिया)
- द्रौपदी माला (हिंदी)
- सीतामुडी (तमिल)
- Samjirei (मणिपुरी)
- Foxtail Orchid / Common Foxtail Orchid / Blunt Rhynchostylis (अंग्रेज़ी)
बनावट और बढ़ने का तरीक़ा
Rhynchostylis retusa एक एक ही तने से ऊपर बढ़ने वाला एपिफाइट (monopodial epiphyte) है — यह दूसरे पौधों से चिपककर उगता है, पर उन्हें चूसता नहीं, और इसका एक ही सीधा तना ऊपरी सिरे से लंबा होता जाता है। एक ही मेज़बान पेड़ पर ये पौधे दशकों तक ज़िंदा रह सकते हैं।
जड़ें
मोटी, गूदेदार हवाई जड़ें, जिन पर वेलामेन ऊतक (velamen — स्पंज जैसी परत, जो बारिश का पानी और हवा की नमी सोख लेती है) होता है। ये जड़ें प्रकाश-संश्लेषण भी करती हैं — भीतरी कॉर्टेक्स में क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जो हरे धब्बों की तरह दिखते हैं।
पत्तियाँ
लंबी, चमड़े जैसी, पट्टी की शक्ल की, दो कतारों में लगी हुई (distichous)। बीच की नस उभरी हुई, और पत्ती का सिरा हल्का दो भागों में बँटा — इसी से retusa नाम पड़ा, जो लैटिन में “भोथरा” के लिए है।
फूल
इस प्रजाति की पहचान है इसकी लंबी, झुकी हुई फूल-डंडी — 60 सेमी तक — जो अप्रैल से जून के बीच पत्ती की कोख से निकलती है। हर डंडी पर 100-200 छोटे, गहरी ख़ुशबू वाले फूल होते हैं, गुलाबी-बैंगनी रंग के, जिन पर गहरे धब्बे होते हैं। होंठ (labellum) ऊपर की ओर मुड़ा होता है, जिससे परागण करने वाले कीड़ों को बैठने की जगह मिल जाती है। एक फूल क़रीब 8-10 दिन टिकता है; पूरी डंडी महीने भर से ज़्यादा खिली रहती है।
परागण
जंगल में Rhynchostylis retusa का परागण मधुमक्खियाँ और छोटी तितलियाँ करती हैं, जो इसकी तेज़ ख़ुशबू से खिंची चली आती हैं। यह ख़ुशबू भोर के वक़्त सबसे तेज़ होती है।
कहाँ-कहाँ मिलता है
Rhynchostylis retusa इन इलाक़ों में दूर तक फैला हुआ है:
- पूर्वोत्तर भारत — असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा
- पूर्वी हिमालय की तलहटी — भूटान, सिक्किम, पूर्वी नेपाल
- पश्चिमी घाट — केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ हिस्सों में
- इंडो-बर्मा — म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, कंबोडिया
- इंडोनेशिया (सुमात्रा, जावा, बोर्नियो), मलेशिया, फिलीपींस, श्रीलंका
भारत में यह ऑर्किड असम और पूर्वी हिमालय के नम उष्णकटिबंधीय जंगलों में सबसे ज़्यादा मिलता है। यह इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट का एक बड़ा चेहरा है — देखिए हमारा पिलर पेज भारत के जैव विविधता हॉटस्पॉट।
आवास
Rhynchostylis retusa बड़े पर्णपाती और अर्ध-सदाबहार पेड़ों के तनों और डालियों पर उगता है — इसे साल (Shorea robusta), सिरिस (Albizia), आम (Mangifera indica) और कई तरह के बरगद-पीपल ख़ास पसंद हैं। इसे 1,000 मीटर से नीचे की ऊँचाई, छनकर आती धूप और ख़ूब नमी चाहिए। ब्रह्मपुत्र घाटी, अपनी ज़्यादा नमी और बचे हुए जंगलों के साथ, इसके लिए बेहतरीन जगह है — इसीलिए असम Rhynchostylis retusa को अपना वानस्पतिक चेहरा मानता है।

सांस्कृतिक महत्व
कोपौ फुल और बिहू
रंगाली बिहू (जिसे बोहाग बिहू भी कहते हैं) असमिया नए साल और खेती के मौसम की शुरुआत का त्योहार है। यह अप्रैल के मध्य में पड़ता है — ठीक उसी हफ़्ते, जब Rhynchostylis retusa सबसे ज़्यादा खिलता है। लड़कियाँ बिहू नाच करते वक़्त कोपौ फुल की लटें बालों में गूँथती हैं। यह फूल त्योहार का पर्याय बन चुका है।
2003 में असम ने Rhynchostylis retusa को आधिकारिक रूप से राज्य-पुष्प घोषित किया। इसकी तस्वीर असमिया डाक टिकटों, पर्यटन लोगो और राज्य सरकार के विभागों की आधिकारिक साज-सज्जा तक पर दिखती है।

धार्मिक इस्तेमाल
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के मंदिरों में वसंत के त्योहारों के दौरान Rhynchostylis retusa चढ़ाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे सीता पुष्पम कहते हैं, और लोक कथाओं में माना जाता है कि इसे सीता पहनती थीं।
असमिया गीतों और बिहू संस्कृति में ज़िक्र
असमिया कवि ज्योति प्रसाद अगरवाला के गीतों और बिहू के बोलों में इस फूल का ज़िक्र आता है, जिससे इसकी सांस्कृतिक जगह और पक्की हुई है।
संरक्षण की स्थिति
IUCN ने Rhynchostylis retusa का वैश्विक आकलन नहीं किया है, लेकिन बाक़ी सभी ऑर्किड की तरह यह भी CITES परिशिष्ट II में दर्ज है — यानी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर नियम लगते हैं। भारत में यह ऑर्किड वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची VI (जिसमें कुछ ख़ास पौधे आते हैं) के तहत सुरक्षित है।
ख़तरे
- ज़रूरत से ज़्यादा तोड़ाई — बाग़वानी के कारोबार के लिए जंगली पौधे पेड़ों से नोचकर गुवाहाटी, कोलकाता और बैंकॉक के फूल बाज़ारों में बेचे जाते हैं
- आवास का ख़त्म होना — जंगल चाय बाग़ानों और बस्तियों में बदलते जा रहे हैं
- जलवायु का दबाव — बढ़ता तापमान और बदलती बारिश नमी का पूरा हिसाब बिगाड़ देते हैं
- मेज़बान पेड़ों का कटना — पुराने पर्णपाती पेड़, जिन पर बड़ी एपिफाइट बस्तियाँ टिकी होती हैं, तेज़ी से कम हो रहे हैं
संरक्षण की कोशिशें
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, तिपी (अरुणाचल) का ऑर्किड रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर और सिक्किम का ICAR-NRC ऑर्किड्स टिशू कल्चर और बीज बैंक के ज़रिए मूल जगह से बाहर (ex situ) संरक्षण चलाते हैं। काज़ीरंगा और मानस के इलाक़े (और दूसरे वन्यजीव अभयारण्य) इसकी बड़ी जंगली आबादी को बचाए हुए हैं।
खेती
थाईलैंड, फिलीपींस और पूर्वोत्तर भारत में Rhynchostylis retusa की व्यावसायिक खेती कटे हुए फूल और गमले वाले सजावटी पौधे, दोनों के लिए होती है। इसे इस तरह उगाया जाता है:
- लकड़ी के तख़्तों पर या टोकरियों में (ठोस गमलों में कभी नहीं — जड़ों को हवा चाहिए)
- स्फैगनम मॉस या नारियल के छिलके के बिछावन के साथ
- 50-60 फ़ीसदी छाया में
- 25-30 C तापमान और ख़ूब नमी में
- गर्मियों में रोज़ और सर्दियों में हफ़्ते में एक बार पानी देकर
- पंद्रह दिन में एक बार पतली ऑर्किड खाद देकर
अच्छी हालत में तैयार एक पौधा साल भर में 2-3 लंबी फूल-डंडियाँ देता है।
दवा और लोक-वनस्पति से जुड़ी बातें
असम और अरुणाचल प्रदेश की आदिवासी चिकित्सा में Rhynchostylis retusa के अर्क का इस्तेमाल घाव भरने, गुर्दे की तकलीफ़ और ताक़त की दवा के तौर पर होता है। आज के रासायनिक अध्ययनों में इसमें से फिनॉलिक यौगिक और फ्लेवोनॉइड निकाले गए हैं, जिनमें एंटीऑक्सिडेंट गुण हैं — हालाँकि इलाज में इनका इस्तेमाल अभी साबित नहीं हुआ है।
भारत के राज्य-पुष्प: एक झलक
| राज्य | राज्य-पुष्प |
|---|---|
| असम | Rhynchostylis retusa (कोपौ फुल / फ़ॉक्सटेल ऑर्किड) |
| अरुणाचल प्रदेश | फ़ॉक्सटेल ऑर्किड (आम तौर पर यही चलता है; आधिकारिक अधिसूचना भी अक्सर Rhynchostylis retusa बताती है, और अरुणाचल की मौजूदा MoEFCC सूची में Rhynchostylis retusa ही है) |
| सिक्किम | नोबल डेंड्रोबियम (Dendrobium nobile) |
| मेघालय | लेडीज़ स्लिपर ऑर्किड (Paphiopedilum insigne) |
| कर्नाटक | कमल |
| तमिलनाडु | ग्लोरी लिली (Gloriosa superba) |
| केरल | कनिकोन्ना (Cassia fistula) |
राज्य-दर-राज्य पूरी सूची के लिए हमारी गाइड भारत के राज्य-पुष्प देखिए।
UPSC प्रीलिम्स के लिए सबसे सुरक्षित वाक्य यह है: Rhynchostylis retusa (फ़ॉक्सटेल ऑर्किड) असम और अरुणाचल प्रदेश, दोनों का राज्य-पुष्प है। जिस भी MCQ में इन दोनों राज्यों को आमने-सामने रखा जाए, वहाँ यही चुनिए।
स्रोत और संदर्भ
- सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार — “About State” (राज्य-पुष्प के तौर पर Foxtail Orchid / Rhynchostylis retusa दर्ज है)
- Plants of the World Online (POWO), Royal Botanic Gardens, Kew — Rhynchostylis retusa (L.) Blume (मान्य प्रजाति, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में मूल इलाक़ा)
- India Biodiversity Portal — Rhynchostylis retusa (L.) Blume (आम नाम, फैलाव, पारिस्थितिकी)
- IndiaCode — वन्य जीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, अनुसूची VI (अनुसूची VI के पौधों की आधिकारिक सूची; Rhynchostylis retusa फ़िलहाल इसमें शामिल नहीं है)
- DGFT — Orchidaceae spp. के लिए CITES परिशिष्ट सूची (परिशिष्ट II का दायरा, और जिन प्रजातियों पर सख़्त नियम लगते हैं वे परिशिष्ट I में)
- क्षेत्रीय ऑर्किड वनस्पति पर असम वन विभाग के तकनीकी बुलेटिन (फूल खिलने के समय के आँकड़ों के लिए)
सामान्य प्रश्न
Rhynchostylis retusa क्या है?
Rhynchostylis retusa दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया का एक ख़ुशबूदार एपिफाइट ऑर्किड है। यह अपनी लंबी गुलाबी-बैंगनी फूल-डंडियों के लिए मशहूर है, जो लोमड़ी की पूँछ जैसी दिखती हैं।
Rhynchostylis retusa असम का राज्य-पुष्प है या अरुणाचल प्रदेश का?
Rhynchostylis retusa असम और अरुणाचल प्रदेश, दोनों का राज्य-पुष्प है। असम में इसे कोपौ फुल कहते हैं और यह रंगाली बिहू से सांस्कृतिक रूप से जुड़ा है। अरुणाचल प्रदेश सरकार का सूचना एवं जनसंपर्क विभाग भी फ़ॉक्सटेल ऑर्किड (Rhynchostylis retusa) को आधिकारिक तौर पर अपना राज्य-पुष्प बताता है।
Rhynchostylis retusa को फ़ॉक्सटेल ऑर्किड क्यों कहते हैं?
क्योंकि इसकी लंबी, झुकी हुई फूल-डंडी पर 100-200 नन्हे फूल इतने घने भरे रहते हैं कि वह लोमड़ी की झबरी पूँछ जैसी लगती है।
Rhynchostylis retusa कब खिलता है?
यह अप्रैल से जून के बीच खिलता है और अप्रैल के मध्य में सबसे ज़्यादा — यही असम के वसंत त्योहार रंगाली बिहू का वक़्त होता है।
जंगल में Rhynchostylis retusa कहाँ मिलता है?
यह पूर्वोत्तर भारत के नम उष्णकटिबंधीय जंगलों, पूर्वी हिमालय की तलहटी, पश्चिमी घाट के कुछ हिस्सों और म्यांमार से लेकर इंडोनेशिया व फिलीपींस तक दक्षिण-पूर्व एशिया में मिलता है।
क्या Rhynchostylis retusa संकटग्रस्त है?
IUCN ने इसे औपचारिक रूप से संकटग्रस्त नहीं बताया है, लेकिन यह CITES परिशिष्ट II में है और भारत के वन्य जीव संरक्षण अधिनियम से सुरक्षित है। जंगली आबादी पर बाग़वानी के कारोबार के लिए तोड़े जाने का भारी दबाव है।
कोपौ फुल क्या है?
कोपौ फुल Rhynchostylis retusa का असमिया नाम है। बिहू नाच के वक़्त औरतें इसे बालों में लगाती हैं, और इसी से यह असम की सांस्कृतिक पहचान बन गया है।
Rhynchostylis retusa का परागण कैसे होता है?
जंगल में इसका परागण मुख्य रूप से मधुमक्खियाँ और छोटी तितलियाँ करती हैं, जो इसकी तेज़ मीठी ख़ुशबू से खिंची चली आती हैं। यह ख़ुशबू सुबह-सुबह सबसे तेज़ होती है।