सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत काम करने वाली एक स्वायत्त सोसाइटी है। 1991 से भारत की सॉफ्टवेयर निर्यात योजना यही सोसाइटी चला रही है। इसका पंजीकरण 5 जून 1991 को हुआ था। यह सिंगल विंडो यानी एक ही जगह से निर्यात इकाइयों को मंजूरी देती है और विदेश भेजे गए सॉफ्टवेयर का मूल्य प्रमाणित करती है। इसके 73 केंद्र हैं, जिनमें से ज्यादातर छोटे शहरों में हैं, और अब ये केंद्र स्टार्टअप को इनक्यूबेशन यानी शुरुआती सहारा भी देते हैं।
नाम सुनकर ज्यादातर पाठक गलत अंदाजा लगा लेते हैं। STPI मुख्य रूप से ऑफिस पार्क बनाने वाली संस्था नहीं है। STP इकाई का किसी पार्क के अंदर होना भी जरूरी नहीं है, क्योंकि योजना इकाई को भारत में कहीं भी लगाने की छूट देती है। यानी पार्क असल में कैंपस कम और कानूनी दर्जा ज्यादा है। दूसरी उलझन टैक्स छूट को लेकर है। जिस धारा 10A के टैक्स हॉलिडे की वजह से STP पंजीकरण फायदे का सौदा था, वह 31 मार्च 2011 को खत्म हो गया। फिर भी STPI में पंजीकृत इकाइयों ने 2024-25 में करीब ₹10.64 लाख करोड़ का सॉफ्टवेयर निर्यात दिखाया। यह नोट यही बातें साफ करता है: STPI असल में करता क्या है, टैक्स हॉलिडे क्यों खत्म हुआ और योजना उसके बाद भी क्यों चलती रही।
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया क्या है?
STPI एक सरकारी सोसाइटी है। यह न तो कोई कंपनी है और न ही संसद के किसी अधिनियम से बनी संस्था। यह MeitY के तहत काम करती है और विदेश व्यापार नीति में दर्ज दो निर्यात योजनाएँ चलाती है। स्टार्टअप इनक्यूबेशन का काम इसमें बाद में जुड़ा। सबसे पहले ये तथ्य याद कर लीजिए।
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| पूरा नाम | सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) |
| स्थापना | 5 जून 1991 को पंजीकरण; 1989 में बेंगलुरु, पुणे और भुवनेश्वर में बने तीन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों को मिलाकर बनी |
| कानूनी रूप | सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत स्वायत्त सोसाइटी |
| मूल मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (1991 में इलेक्ट्रॉनिकी विभाग) |
| मुख्यालय | ईस्ट किदवई नगर, नई दिल्ली |
| प्रमुख | महानिदेशक (2026 में अरविंद कुमार), जो केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और IT मंत्री की अध्यक्षता वाली शासी परिषद के सदस्य सचिव हैं |
| चलाई जाने वाली योजनाएँ | सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STP) और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (EHTP) योजनाएँ; नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम; इंडिया BPO प्रमोशन स्कीम और पूर्वोत्तर के लिए उसी जैसी योजना |
| फैलाव | 73 केंद्र, जिनमें से 65 टियर-दो और टियर-तीन शहरों में (STPI, 2026); 24 सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (लोकसभा में दिया गया उत्तर, अगस्त 2025) |
| पंजीकृत इकाइयों का निर्यात | 2024-25 में करीब ₹10.64 लाख करोड़, जो 1992-93 में सिर्फ ₹52 करोड़ था |
1991 में STPI क्यों बनाया गया
STPI इसलिए बना क्योंकि 1980 के दशक के आखिर में भारत के पास सॉफ्टवेयर की प्रतिभा तो थी, लेकिन काम को विदेशी ग्राहकों तक पहुँचाने का कोई आसान रास्ता नहीं था। STPI का अपना इतिहास 1980 के दशक के मध्य में उठाए गए कई कदमों का जिक्र करता है, जिनका मकसद सॉफ्टवेयर निर्यात बढ़ाना था। इनमें एक नई कंप्यूटर नीति और एक सॉफ्टवेयर नीति भी थी। वही इतिहास यह भी बताता है कि RBI ने सॉफ्टवेयर निर्यात के मूल्यांकन का काम इलेक्ट्रॉनिकी विभाग को सौंप दिया था।
पहला कदम 1989 में उठा, जब ऊपर की तालिका में बताए गए तीनों पार्क बने। हालाँकि STPI की केंद्रों वाली सूची इन्हें 1990 में दर्ज करती है, यानी उसके अपने इतिहास से एक साल बाद। 5 जून 1991 को इन तीनों को मिलाकर एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया गया। यह जुलाई 1991 के बजट और औद्योगिक नीति से कुछ ही हफ्ते पहले की बात है, जिनसे 1991 के LPG सुधार शुरू हुए। इसलिए STPI उदारीकरण की उपज नहीं है। यह उस निर्यात अभियान से निकला, जिसे इलेक्ट्रॉनिकी विभाग पुरानी और परमिट से लदी औद्योगिक नीति के भीतर ही चला रहा था।
इन पार्कों को अलग बनाने वाली चीज थी डेटा लिंक। STPI की टाइमलाइन के मुताबिक 1992 में उसने उपग्रह पर आधारित हाई-स्पीड डेटा कम्युनिकेशन (HSDC) शुरू किया। इससे भारतीय कंपनियाँ भारत में बैठे-बैठे अपने विदेशी ग्राहकों के कंप्यूटरों पर काम कर पाती थीं। उसी साल STP और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (EHTP) योजनाएँ सिंगल विंडो योजनाओं के रूप में काम करने लगीं। 1992-93 में पंजीकृत इकाइयों ने ₹52 करोड़ का सॉफ्टवेयर निर्यात किया।
शुरुआती STP इकाई की कल्पना कुछ ऐसे कीजिए: एक पता, जो सिर्फ निर्यात के लिए है, और उसकी छत पर लगी एक सैटेलाइट डिश। कोड विदेश जाता था, जबकि प्रोग्रामर देश में ही रहते थे। यह तस्वीर 1990 के दशक की शुरुआत पर ठीक बैठती है, जब डिश ही सबसे मुश्किल से मिलने वाली चीज थी। आज यह उतनी ठीक नहीं बैठती। अब बैंडविड्थ आम बात है, और इकाई लिंक के लिए नहीं, बल्कि मंजूरियों और कस्टम से जुड़े फायदों के लिए पंजीकरण कराती है।
STP योजना कैसे काम करती है
STP योजना कंप्यूटर सॉफ्टवेयर बनाने और उसके निर्यात के लिए एक 100% निर्यात-उन्मुख योजना है। इसमें संचार लिंक के जरिए दी जाने वाली पेशेवर सेवाएँ भी शामिल हैं। STPI इसे निर्यात-उन्मुख इकाई और टेक्नोलॉजी पार्क, इन दोनों विचारों का मेल बताता है। आज इसका कानूनी आधार विदेश व्यापार नीति 2023 का अध्याय 6 है। यही अध्याय निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOU) और हार्डवेयर और बायोटेक्नोलॉजी पार्क योजनाओं को भी कवर करता है।
STPI जिन फायदों की सूची देता है, उन्हीं से समझ आता है कि निर्यातक इस योजना में क्यों आए:
- मंजूरियाँ सिंगल विंडो क्लीयरेंस व्यवस्था से मिलती हैं;
- इकाई भारत में कहीं भी लगाई जा सकती है;
- भारतीय निवेश वाले ₹10 करोड़ से कम लागत के प्रोजेक्ट को क्षेत्राधिकार वाले STPI अधिकारी खुद मंजूरी दे सकते हैं;
- 100% विदेशी इक्विटी की इजाजत है;
- हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर का आयात ड्यूटी-फ्री है, और इसमें सेकंड-हैंड पूंजीगत सामान भी शामिल है;
- निर्यात की जिम्मेदारी बस इतनी है कि शुद्ध विदेशी मुद्रा आय पॉजिटिव रहे;
- घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA), यानी बाकी भारतीय बाजार में बिक्री की इजाजत है;
- कंप्यूटर और उनसे जुड़े उपकरणों (पेरिफेरल) पर पाँच साल में पूरा मूल्यह्रास (डेप्रिसिएशन) लिया जा सकता है।
निर्यात की यह शर्त ठीक से समझ लीजिए। शुद्ध विदेशी मुद्रा आय (NFE) का मतलब है इकाई की विदेशी मुद्रा में कमाई, जिसमें से विदेश में किया गया उसका खर्च घटा दिया जाए। यह खर्च ज्यादातर आयात पर होता है। विदेश व्यापार नीति का पैराग्राफ 6.04 कहता है कि अध्याय 6 की हर इकाई को अपना NFE पॉजिटिव रखना होगा।
एक काल्पनिक इकाई से समझिए कि यह कैसे चलता है। भुवनेश्वर की एक छोटी फर्म लंदन के एक बैंक के लिए सॉफ्टवेयर लिखती है। वह स्थानीय STPI निदेशक के पास पंजीकरण कराती है, अपने सर्वर बिना कस्टम ड्यूटी के मंगाती है और बैंक को पाउंड में बिल भेजती है। हर निर्यात की घोषणा STPI के पास होती है, और STPI उसका मूल्य प्रमाणित करता है। जब तक आने वाले पाउंड सर्वर और लाइसेंस पर विदेश में होने वाले खर्च से ज्यादा हैं, तब तक फर्म का NFE पॉजिटिव है और वह योजना के दायरे में बनी रहती है।
घोषणा के इस कदम का एक नाम भी है। RBI के निर्यात नियमों के तहत, जो सॉफ्टवेयर भौतिक रूप में नहीं, बल्कि ऑनलाइन निर्यात होता है, उसकी घोषणा SOFTEX फॉर्म पर होती है। इस फॉर्म को STPI प्रमाणित करता है, और किसी विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की इकाइयों के लिए यह काम SEZ प्राधिकरण करता है। उसके बाद डेटा इलेक्ट्रॉनिक तरीके से RBI के पास जाता है। यही प्रमाणन वह वजह है जिससे STPI उन फर्मों के लिए भी मायने रखता है, जिन्होंने कभी उसकी ऑफिस वाली जगह किराये पर नहीं ली। वह ठीक उस जगह बैठा है, जहाँ भारत के सेवा निर्यात की गिनती होती है।
EHTP योजना यही तर्क, यानी ड्यूटी-फ्री आयात और NFE की शर्त, इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर पर लागू करती है।
धारा 10A का टैक्स हॉलिडे और वह क्यों खत्म हुआ
STPI का इतिहास बताता है कि 1990 के दशक के मध्य से सॉफ्टवेयर निर्यात इकाइयाँ आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10A के तहत निर्यात से हुए मुनाफे पर इनकम टैक्स हॉलिडे का दावा कर सकती थीं। इस फायदे का मकसद उद्योग में निवेश खींचना था। इसकी जुड़वाँ धारा 10B निर्यात-उन्मुख इकाइयों के लिए थी। टैक्स हॉलिडे में तय समय तक मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, इसलिए नया निर्यातक अपनी कमाई का कहीं बड़ा हिस्सा अपने पास रख पाता था।
यह हॉलिडे शुरू से ही एक तय समय के लिए था, बस उसकी आखिरी तारीख आगे खिसकती रही। जुलाई 2009 के बजट भाषण में कहा गया कि धारा 10A और 10B की कटौतियाँ 2009-10 के बाद नहीं मिलेंगी। लेकिन उसी भाषण में “निर्यात में आई सुस्ती से पार पाने के लिए” इसकी सनसेट यानी खत्म होने की तारीख को एक साल और बढ़ाकर 2010-11 तक कर दिया गया। अगले दो बजटों में से किसी ने भी इसे आगे नहीं बढ़ाया। इसलिए हॉलिडे उसी साल के साथ, 31 मार्च 2011 को खत्म हो गया।
इसके बाद जो हुआ, वह सनसेट जितना ही अहम है। नई निर्यात इकाइयों के लिए अब एक ही इनकम टैक्स हॉलिडे बचा था, और वह विशेष आर्थिक क्षेत्रों के भीतर धारा 10AA के तहत था: 5 साल तक निर्यात आय पर 100% छूट, अगले 5 साल तक 50% छूट, और उसके बाद 5 साल और, दोबारा लगाए गए निर्यात मुनाफे पर 50% छूट। नई IT क्षमता टैक्स छूट के पीछे-पीछे इन जोन में चली गई, और इसके निशान आज भी दिखते हैं। 31 दिसंबर 2025 की आधिकारिक सूची के 276 चालू SEZ में से आधे से ज्यादा IT या IT-सक्षम सेवाओं वाले जोन हैं।
फिर SEZ वाला रास्ता भी संकरा होता गया:
- 2011-12 के बजट ने SEZ डेवलपरों और इकाइयों पर न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) लगाने का प्रस्ताव रखा, जो बुक प्रॉफिट यानी खातों में दिखे मुनाफे पर लगने वाला न्यूनतम टैक्स है। SEZ इकाइयों की MAT छूट 1 अप्रैल 2012 से खत्म हो गई;
- 2016-17 के बजट ने छूटों को धीरे-धीरे खत्म करने की योजना के तहत धारा 10AA को सिर्फ उन नई SEZ इकाइयों तक सीमित कर दिया, जिन्होंने 31 मार्च 2020 तक काम शुरू कर दिया हो।
इन दोनों तथ्यों को साथ रखिए, तो एक आम गलती अपने आप दूर हो जाती है। 2011 में STP योजना खत्म नहीं हुई थी, उसका टैक्स हॉलिडे खत्म हुआ था। इकाइयाँ इसके बाद भी पंजीकरण कराती रहीं, क्योंकि योजना की मंजूरियाँ और कस्टम से जुड़े फायदे अब भी उनका समय और पैसा बचाते थे।
STPI का ढाँचा कैसा है
शासी परिषद (Governing Council) STPI की सबसे ऊँची संस्था है और यही इसकी नीति की दिशा तय करती है। STPI ने इसके जो सदस्य प्रकाशित किए हैं, वे ये हैं:
- अध्यक्ष के रूप में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और IT मंत्री;
- उपाध्यक्ष के रूप में इलेक्ट्रॉनिकी और IT राज्य मंत्री;
- कार्यकारी उपाध्यक्ष के रूप में MeitY के सचिव;
- दूरसंचार विभाग, गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य विभाग और इंटेलिजेंस ब्यूरो से संयुक्त सचिव या उससे ऊपर के रैंक के अधिकारी;
- इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर निर्यात संवर्धन परिषद के चेयरमैन और उद्योग संगठनों की ओर से नामित सदस्य।
महानिदेशक (Director General) परिषद के सदस्य सचिव होते हैं, और सोसाइटी चलाने की कार्यकारी शक्तियाँ उन्हीं के पास हैं। महानिदेशक के नीचे निदेशकों की एक कार्यकारी समिति नई योजनाओं और बजट की जाँच करती है। जिस भी राज्य में STPI का केंद्र है, वहाँ एक स्थायी कार्यकारी बोर्ड (Standing Executive Board) राज्य सरकार और उद्योग के साथ कड़ी का काम करता है।
जमीनी स्तर पर STPI 14 क्षेत्राधिकार वाले निदेशालयों और 73 केंद्रों के जरिए काम करता है। हर केंद्र का निदेशक उसका तकनीकी और प्रशासनिक प्रमुख होता है। STP और EHTP इकाइयों के लिए क्षेत्राधिकार वाला अधिकारी भी वही है, यानी वह अफसर जिससे इकाई का असल में वास्ता पड़ता है। गृह मंत्रालय और इंटेलिजेंस ब्यूरो की सीटें उस संस्था के लिए समझ में आती हैं, जिसकी शुरुआत ही अंतरराष्ट्रीय डेटा लिंक चलाने से हुई थी।
STPI की नई भूमिकाएँ: इनक्यूबेशन, CoE और NGIS
टैक्स हॉलिडे खत्म होने के बाद स्टार्टअप को आगे बढ़ाना STPI का दूसरा काम बन गया, खासकर महानगरों से बाहर। इनक्यूबेशन नया नहीं था। STPI की टाइमलाइन पहली इनक्यूबेशन सेवाओं को 1992 में रखती है। बदला उसका पैमाना और मकसद, जिसे राष्ट्रीय सॉफ्टवेयर उत्पाद नीति (NPSP), 2019 ने तय किया। यह नीति चाहती है कि भारत मुख्य रूप से सेवाओं का निर्यातक बने रहने के बजाय सॉफ्टवेयर उत्पाद बनाने वाला देश बने।
सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप (CoE) किसी खास क्षेत्र पर केंद्रित इनक्यूबेटर हैं। हर CoE एक तकनीकी क्षेत्र के इर्द-गिर्द बना है, और STPI ने इन्हें 2010 के दशक के आखिर में बनाना शुरू किया। अगस्त 2025 के एक लोकसभा उत्तर में इनकी गिनती 24 थी। वहीं जुलाई 2026 में अपडेट हुआ STPI का CoE पेज 27 से ज्यादा नियोजित CoE में से 26 को शुरू हो चुका बताता है। कुछ उदाहरण इनका फैलाव दिखाते हैं:
- नई दिल्ली का इलेक्ट्रोप्रेन्योर पार्क, जो इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) के लिए है;
- चेन्नई का फिनब्लू और गांधीनगर की गिफ्ट सिटी में फिनग्लोब, जो फिनटेक के लिए हैं;
- OCTANE, जो पूर्वोत्तर में फैले 8 CoE का एक समूह है, अगरतला में डेटा एनालिटिक्स से लेकर आइजोल में गेमिंग तक।
नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम (NGIS) इसकी फंडिंग वाली शाखा है, जो 2019 की नीति को अमल में लाने के लिए 2020 में शुरू हुई। MeitY ने यह योजना STPI को सौंपी और इसके लिए 3 साल में ₹95.03 करोड़ का बजट तय किया। लक्ष्य 300 सॉफ्टवेयर उत्पाद स्टार्टअप का है, और हर एक को ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग मिल सकती है। जो संस्थापक अभी आइडिया के स्तर पर हैं, वे छह महीने के प्री-इनक्यूबेशन ट्रैक से जुड़ सकते हैं, जिसमें हर महीने ₹10,000 मिलते हैं। यह योजना 12 टियर-दो शहरों से चलती है, पूर्वोत्तर के अगरतला से लेकर दक्षिण के विजयवाड़ा तक।
6 अगस्त 2025 को लोकसभा में दिए गए सरकार के उत्तर ने अब तक के नतीजे बताए:
- STPI की योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए 1,121 स्टार्टअप को मदद मिली, जिन पर कुल ₹445.77 करोड़ का बजट रहा;
- पिछले 3 वित्त वर्षों में 590 स्टार्टअप को सीधी फंडिंग के रूप में ₹39.86 करोड़ दिए गए;
- CoE और NGIS के तहत मदद पाने वाले गैर-महानगरीय स्टार्टअप ने करीब 9,800 नौकरियाँ दर्ज कीं।
यह सब भारत के बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम का हिस्सा है। STPI का CoE पेज इन CoE को स्टार्टअप इंडिया से जोड़ता है, जिसकी कार्ययोजना 16 जनवरी 2016 को आई थी।
STPI डिजिटल इंडिया के तहत दो BPO योजनाएँ भी चलाता है, जिनका मकसद छोटे कस्बों में रोजगार पैदा करना है:
- इंडिया BPO प्रमोशन स्कीम (IBPS), जिसका लक्ष्य BPO और IT-सक्षम सेवाओं की 48,300 सीटें बनाना है। ये सीटें राज्यों में आबादी के अनुपात में बाँटी गई हैं और इसका बजट ₹493 करोड़ है;
- नॉर्थ ईस्ट BPO प्रमोशन स्कीम (NEBPS), जो पूर्वोत्तर में 5,000 सीटों के लिए है और जिसका बजट ₹50 करोड़ है।
दोनों योजनाएँ पूंजीगत या संचालन खर्च का 50% तक लौटाती हैं, लेकिन इसकी ऊपरी सीमा ₹1 लाख प्रति सीट है।
आज का STPI: केंद्र, निर्यात और 2026 के बदलाव
आज STPI पहले से कहीं बड़ा है, और STP और EHTP इकाइयों को मंजूरी देने और उनका प्रमाणन करने वाला प्राधिकरण भी अब तक वही है। इसका नेटवर्क फरवरी 2025 के 67 केंद्रों से बढ़कर 2026 में इसकी वेबसाइट पर 73 केंद्रों तक पहुँच गया, जिनमें से 65 टियर-दो और टियर-तीन शहरों में हैं। तारीख के साथ याद रखने लायक घटनाएँ ये हैं:
- 5 जून 2024: अपने 33वें स्थापना दिवस पर STPI ने अनंत (Ananta) नाम के सॉवरेन क्लाउड की घोषणा की, जो भारत में बना है। साथ ही उसने स्टार्टअप के लिए दो पोर्टल, सायुजनेट और STPI-वर्कस्पेस, शुरू किए।
- 20 फरवरी 2025: इसने कोलकाता के सॉल्ट लेक में एक इनक्यूबेशन सुविधा खोली, जो 2 लाख वर्ग फुट में फैली है और जिसमें 75,000 वर्ग फुट की खाली इनक्यूबेशन जगह है।
- 6 अगस्त 2025: एक लोकसभा उत्तर ने STPI के 68 केंद्र बताए, जिनमें से 60 टियर-दो और टियर-तीन शहरों में थे। उसी उत्तर के मुताबिक 2024-25 में STPI में पंजीकृत इकाइयों का सॉफ्टवेयर निर्यात करीब ₹10.64 लाख करोड़ रहा।
- 13 जनवरी 2026: RBI ने FEMA के तहत निर्यात और आयात के नए नियम अधिसूचित किए, जो 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। ये 2015 के नियमों की जगह लेते हैं और सामान, सॉफ्टवेयर और सेवाओं के लिए एक ही एक्सपोर्ट डिक्लेरेशन फॉर्म तय करते हैं। घरेलू टैरिफ क्षेत्र से होने वाले सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए यह फॉर्म ऑथराइज्ड डीलर बैंक या STPI के पास भरा जाता है।
- 2026: STPI ने अपने 69वें से 73वें केंद्र खोले, और सबसे नए केंद्रों में अमृतसर और ईटानगर शामिल हैं।
- 5 जून 2026: 35वें स्थापना दिवस पर हुए STPI टेक समिट में राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि “हर जिले में एक सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क” होना चाहिए।
निर्यात के आँकड़े के साथ एक सावधानी जरूरी है। STPI की वेबसाइट 2024-25 के लिए ₹10,69,270.59 करोड़ का आँकड़ा देती है और इसे भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात का लगभग आधा बताती है। वहीं उसी साल के लिए संसद में सरकार का आँकड़ा करीब ₹10.64 लाख करोड़ है। दोनों में से कोई भी आँकड़ा लीजिए, 1992-93 के ₹52 करोड़ से यह बढ़त नॉमिनल रुपयों में करीब 20,000 गुना है, और इसमें महँगाई का हिसाब नहीं जोड़ा गया है। पैमाने का अंदाजा देने के लिए देखिए: उसी उत्तर में दिया गया नैसकॉम का अनुमान 2024-25 में पूरे IT उद्योग की निर्यात आय 224.4 अरब डॉलर बताता है।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पर लिखा नोट, यानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की अपनी इन-हाउस टेक्नोलॉजी शाखाओं पर लिखा नोट, इसका स्वाभाविक साथी है। वह बताता है कि IT निर्यात आगे किस दिशा में जा रहा है।
STPI मॉडल कहाँ पीछे रह जाता है
निर्यात के मामले में STPI का रिकॉर्ड सबसे मजबूत है। लेकिन उसने बाद में जो दो लक्ष्य अपनाए, उन पर वह कमजोर पड़ता है: बड़े केंद्रों से बाहर नौकरियाँ फैलाना और सेवा देने वाली फर्मों को उत्पाद बनाने वाली कंपनियों में बदलना।
पहले फैलाव की बात कीजिए। STPI के 73 केंद्रों में से 65 छोटे शहरों में हैं, लेकिन नौकरियाँ उसी पैमाने पर वहाँ नहीं पहुँचीं। सरकार ने 31 मार्च 2025 तक गैर-महानगरीय शहरों की STPI-पंजीकृत इकाइयों में 2,98,250 नौकरियाँ बताईं। इसे उन 5.8 मिलियन लोगों के सामने रखिए, जिन्हें IT उद्योग सीधे रोजगार देता है। यह आँकड़ा उसी उत्तर में दिए गए नैसकॉम के आँकड़ों से है। तब गैर-महानगरीय हिस्सा करीब बीस में से एक नौकरी बैठता है। फैलाव असली है। पर छोटा भी है।
उत्पाद बनाने वाली कोशिश के सामने भी ऐसा ही हिसाब है। STPI ने 1,121 स्टार्टअप को मदद दी है, जबकि नैसकॉम भारत में 32,000 से ज्यादा टेक स्टार्टअप गिनता है। छोटे शहरों में यह काम उपयोगी है, लेकिन कुल संख्या में इसका हिस्सा छोटा है।
2011 के सनसेट ने यह भी दिखाया कि शुरुआती आकर्षण में कितना बड़ा हिस्सा टैक्स का था। नई क्षमता SEZ कैंपस में चली गई, और STPI को इनक्यूबेशन में अपना दूसरा मकसद ढूँढ़ना पड़ा। यही चिंता सेवा-आधारित विकास की बहस में भी दिखती है: क्या कुशल सेवाओं पर टिका निर्यात मॉडल उस पैमाने पर नौकरियाँ पैदा कर सकता है, जिस पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग करती है।
डिजाइन को लेकर एक सवाल उठाना भी जायज है। जो संस्था किसी इकाई के निर्यात को प्रमाणित करती है, वही उसकी मकान-मालिक और बैंडविड्थ देने वाली भी हो सकती है। संस्थाओं में सुधार पर लिखे उत्तर में आप इन भूमिकाओं को अलग रखने की दलील दे सकते हैं।
परीक्षा के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया कैसे पढ़ें
STPI GS पेपर III का विषय है, जहाँ अर्थव्यवस्था के सिलेबस में औद्योगिक नीति और निवेश मॉडल आते हैं। प्रीलिम्स के लिए यह संस्था से जुड़े तथ्यों का एक सेट है, ठीक उसी तरह का जिस पर दो कथनों वाला सवाल बन सकता है।
मुख्य परीक्षा आमतौर पर निर्यात जोन और टैक्स छूट के रास्ते STPI तक पहुँचती है। मुख्य परीक्षा 2015 के GS पेपर III में पूछा गया: “इस बात को साफ तौर पर माना गया है कि विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) औद्योगिक विकास, विनिर्माण और निर्यात का एक साधन हैं। इस क्षमता को पहचानते हुए SEZ के पूरे तंत्र को और मजबूत करने की जरूरत है। कराधान, शासी कानूनों और प्रशासन के संदर्भ में SEZ की सफलता में बाधा बन रहे मुद्दों की चर्चा कीजिए।” 2011 के बाद धारा 10A से धारा 10AA की ओर हुआ बदलाव, और 2012 से SEZ पर लगा MAT, इसके कराधान वाले हिस्से के लिए तैयार उदाहरण हैं। प्रीलिम्स की तरफ देखें तो Anantam IAS के 2013 से 2026 तक के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 सवालों में से 256 भारतीय अर्थव्यवस्था के हैं, जो किसी भी एक विषय में सबसे ज्यादा है।
दोहराने के लिए जरूरी तथ्य:
- STPI का पंजीकरण 5 जून 1991 को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में हुआ, और अब यह MeitY के तहत काम करता है।
- यह 1989 में बेंगलुरु, पुणे और भुवनेश्वर में बने पार्कों को मिलाकर बना।
- यह STP (सॉफ्टवेयर) और EHTP (इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर) योजनाएँ चलाता है, और ये दोनों विदेश व्यापार नीति 2023 के अध्याय 6 में हैं।
- STP इकाई भारत में कहीं भी हो सकती है, पूरी तरह विदेशी स्वामित्व वाली हो सकती है, ड्यूटी-फ्री आयात करती है और उसे अपना NFE पॉजिटिव रखना होता है।
- STP इकाइयों के लिए धारा 10A का हॉलिडे 31 मार्च 2011 को खत्म हुआ; धारा 10AA वाला SEZ हॉलिडे उन इकाइयों के लिए बंद है, जिन्होंने 31 मार्च 2020 के बाद काम शुरू किया।
- NGIS में 300 स्टार्टअप के लिए ₹95.03 करोड़ हैं, ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग के साथ, और यह 12 टियर-दो शहरों में चलती है।
- 2026 में STPI के 73 केंद्र थे, जिनमें से 65 टियर-दो और टियर-तीन शहरों में थे, और इसकी इकाइयों ने 2024-25 में करीब ₹10.64 लाख करोड़ का निर्यात किया।
जिन उलझनों में नंबर कटते हैं, और उन्हें अलग-अलग कैसे रखें:
- STPI सोसाइटी है, STP योजना वह है जिसे यह चलाता है, और STP इकाई वह कंपनी है जो उस योजना के तहत पंजीकृत है।
- STP इकाई एक दर्जा है जो कहीं भी हो सकता है, जबकि SEZ इकाई को SEZ अधिनियम, 2005 के तहत अधिसूचित जोन के अंदर ही होना होता है।
- धारा 10A (STP इकाइयाँ, 2011 में खत्म) और धारा 10AA (SEZ इकाइयाँ, 2020 से नई इकाइयों के लिए बंद) एक चीज नहीं हैं।
- STPI एक सरकारी सोसाइटी है, जबकि नैसकॉम एक उद्योग संगठन है, जिसके अनुमानों का हवाला सरकार अक्सर देती है।
सबसे अहम तुलना STP बनाम SEZ की है, क्योंकि 2011 के बाद नई IT क्षमता ने SEZ वाला रास्ता ही पकड़ा। SEZ की बड़ी बहस के लिए साइट का विशेष आर्थिक क्षेत्रों का मूल्यांकन आपको और आगे ले जाता है।
| पहलू | STP इकाई | SEZ इकाई |
|---|---|---|
| नियम-पुस्तिका | विदेश व्यापार नीति 2023 का अध्याय 6 | SEZ अधिनियम, 2005 |
| जगह | भारत में कहीं भी | सिर्फ अधिसूचित जोन के अंदर |
| प्रशासन | STPI का क्षेत्राधिकार वाला निदेशक | जोन का विकास आयुक्त |
| इनकम टैक्स हॉलिडे | धारा 10A, 31 मार्च 2011 को खत्म | धारा 10AA, सिर्फ उन इकाइयों के लिए जिन्होंने 31 मार्च 2020 तक काम शुरू किया |
| सॉफ्टवेयर निर्यात की घोषणा | STPI प्रमाणित करता है | SEZ प्राधिकरण प्रमाणित करता है |
| निर्यात की शर्त | पॉजिटिव शुद्ध विदेशी मुद्रा आय | पॉजिटिव शुद्ध विदेशी मुद्रा आय |
STPI पर समय लगाना उसके तथ्यों से कम, उसके सबक की वजह से ज्यादा फायदेमंद है। सुविधा देने पर टिकी एक योजना उस टैक्स हॉलिडे के बाद भी चलती रही, जिसके लिए वह मशहूर थी। वहीं हॉलिडे ने ज्यादातर यही तय किया कि नई क्षमता कहाँ जाएगी। निर्यात प्रोत्साहन या सेवा-आधारित विकास पर लिखे उत्तर में जब आपको भारत का एक ऐसा उदाहरण चाहिए जो काम कर गया, और यह भी कि क्यों, तो यही उदाहरण लीजिए।
सामान्य प्रश्न
STPI का फुल फॉर्म क्या है?
STPI का फुल फॉर्म सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया है। यह इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त सोसाइटी है, जिसका पंजीकरण 5 जून 1991 को हुआ था। यह निर्यातकों के लिए सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क और इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर टेक्नोलॉजी पार्क योजनाएँ चलाती है।
STPI की स्थापना कब हुई?
STPI का पंजीकरण 5 जून 1991 को सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत हुआ, और उस समय यह इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के अधीन था। इसे 1989 में बेंगलुरु, पुणे और भुवनेश्वर में बने तीन सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्कों को मिलाकर बनाया गया।
क्या STPI एक वैधानिक संस्था है?
नहीं। STPI एक पंजीकृत सोसाइटी है, संसद के किसी अधिनियम से बनी संस्था नहीं। इसका नियामक काम, जैसे STP इकाइयों को मंजूरी देना और सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रमाणित करना, विदेश व्यापार नीति और RBI के निर्यात नियमों से आता है, और यह इन्हें सरकार की ओर से लागू करता है।
STP योजना क्या है?
सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क योजना सॉफ्टवेयर और IT-सक्षम सेवाओं के लिए एक 100% निर्यात-उन्मुख योजना है। इसमें इकाई भारत में कहीं भी लगाई जा सकती है और उसे सिंगल विंडो मंजूरी और ड्यूटी-फ्री आयात मिलता है। इकाई पूरी तरह विदेशी स्वामित्व वाली हो सकती है, लेकिन उसकी शुद्ध विदेशी मुद्रा आय पॉजिटिव होनी चाहिए।
क्या STP इकाइयों को अब भी इनकम टैक्स छूट मिलती है?
नहीं। STP इकाइयों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 10A का टैक्स हॉलिडे 31 मार्च 2011 को खत्म हो गया। इससे पहले जुलाई 2009 के बजट ने इसे आखिरी बार एक साल के लिए बढ़ाया था। धारा 10AA वाला SEZ हॉलिडे भी उन इकाइयों के लिए बंद है, जिन्होंने 31 मार्च 2020 के बाद काम शुरू किया।
STPI के कितने केंद्र हैं?
2026 में STPI की वेबसाइट पर 73 केंद्र दर्ज थे, जिनमें से 65 टियर-दो और टियर-तीन शहरों में हैं। अगस्त 2025 में लोकसभा में सरकार के एक उत्तर ने यह संख्या 68 बताई थी, और सबसे नए केंद्रों में अमृतसर और ईटानगर शामिल हैं।
नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम क्या है?
NGIS, MeitY की एक योजना है जिसे STPI चलाता है। यह 12 टियर-दो शहरों से सॉफ्टवेयर उत्पाद स्टार्टअप को मदद देती है। इसका बजट 3 साल में ₹95.03 करोड़ है, और इसका लक्ष्य 300 स्टार्टअप में से हर एक को ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग देना है।
STP इकाई और SEZ इकाई में क्या अंतर है?
STP इकाई विदेश व्यापार नीति के तहत एक दर्जा है, जो भारत में कहीं भी हो सकती है और जिसका प्रशासन STPI करता है। SEZ इकाई को SEZ अधिनियम, 2005 के तहत अधिसूचित जोन के अंदर होना होता है, और उसका प्रशासन जोन का विकास आयुक्त करता है। दोनों के इनकम टैक्स हॉलिडे भी अलग-अलग थे, धारा 10A और धारा 10AA के तहत।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसाइटी के रूप में पंजीकृत है। 2. यह वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) STPI का पंजीकरण 5 जून 1991 को उस समय के इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के अधीन एक सोसाइटी के रूप में हुआ था। अब यह MeitY के तहत काम करता है, वाणिज्य मंत्रालय के तहत नहीं।
2. सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STP) योजना के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. STP इकाई को STPI के स्वामित्व वाले पार्क परिसर के अंदर ही होना चाहिए। 2. STP इकाई की शुद्ध विदेशी मुद्रा आय पॉजिटिव होनी चाहिए। 3. STP इकाई में 100% विदेशी इक्विटी की इजाजत है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) योजना इकाई को भारत में कहीं भी लगाने की छूट देती है, इसलिए कथन 1 गलत है। NFE की शर्त और पूरा विदेशी स्वामित्व, दोनों इस योजना का हिस्सा हैं।
3. आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10A के तहत सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क इकाइयों के लिए इनकम टैक्स हॉलिडे आखिरी बार किस वित्त वर्ष के लिए उपलब्ध था?
- (a) 2005-06
- (b) 2008-09
- (c) 2010-11
- (d) 2019-20
उत्तर: (c) जुलाई 2009 के बजट ने सनसेट को एक साल बढ़ाकर 2010-11 तक कर दिया, और बाद के किसी बजट ने इसे आगे नहीं बढ़ाया। इसलिए हॉलिडे 31 मार्च 2011 को खत्म हो गया।
4. STPI द्वारा लागू की जा रही नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम (NGIS) किस उद्देश्य से बनाई गई है?
- (a) पूर्वोत्तर राज्यों में BPO सीटों को प्रोत्साहन देना
- (b) टियर-दो शहरों में सॉफ्टवेयर उत्पाद स्टार्टअप को इनक्यूबेशन और सीड फंडिंग से मदद देना
- (c) सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन प्लांट को सब्सिडी देना
- (d) SEZ में IT इकाइयों को इनकम टैक्स हॉलिडे देना
उत्तर: (b) NGIS 12 टियर-दो शहरों से सॉफ्टवेयर उत्पाद स्टार्टअप को मदद देती है, और 300 स्टार्टअप में से हर एक को ₹25 लाख तक की सीड फंडिंग मिलती है।
5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जनवरी 2026 में RBI द्वारा अधिसूचित निर्यात नियमों के तहत, घरेलू टैरिफ क्षेत्र का कोई सॉफ्टवेयर निर्यातक अपनी निर्यात घोषणा STPI के पास दाखिल कर सकता है। 2. आयकर अधिनियम की धारा 10AA के तहत कटौती उस SEZ इकाई को मिलती है, जिसने 2024 में काम शुरू किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) 2026 के नियम घरेलू टैरिफ क्षेत्र से होने वाले सॉफ्टवेयर निर्यात के लिए ऑथराइज्ड डीलर या STPI को प्राधिकरण बताते हैं। वहीं धारा 10AA उन इकाइयों के लिए बंद है, जिन्होंने 31 मार्च 2020 के बाद काम शुरू किया।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- भारत में स्टार्टअप उद्यमिता, नवाचार और रोजगार को कैसे बढ़ावा दे रहे हैं? उनके कामकाज में आने वाली वैश्विक और घरेलू चुनौतियों की चर्चा कीजिए और इन चुनौतियों से पार पाने के लिए उपयुक्त उपाय सुझाइए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2026, GS पेपर III।
- सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क योजना ने निर्यात जोन के फायदों को भारत में कहीं भी इकाई लगाने की आजादी के साथ जोड़ा। परीक्षण कीजिए कि इस डिजाइन ने 1991 के बाद भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ाने में कैसे मदद की। (15 अंक, 250 शब्द)
- टैक्स हॉलिडे यह तो बदल सकते हैं कि निवेश कहाँ जाए, लेकिन निवेश की कुल मात्रा में ज्यादा इजाफा नहीं करते। 2011 में STP इकाइयों के लिए धारा 10A का हॉलिडे खत्म होने और IT SEZ के विकास के संदर्भ में इस दावे की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- IT उद्योग को टियर-दो और टियर-तीन शहरों तक फैलाने में सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इसमें यह कहाँ तक सफल रहा है? (10 अंक, 150 शब्द)
- भारत को सॉफ्टवेयर उत्पाद राष्ट्र बनाने के साधनों के रूप में नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम और STPI के सेंटर ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप का मूल्यांकन कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)