UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

भारत में सौर ऊर्जा: JNNSM, 500 GW लक्ष्य, PM-सूर्य घर और नेट-ज़ीरो का रास्ता

भारत में सौर ऊर्जा 2010 के 20 MW से कम से बढ़कर 2026 तक 95 GW से ऊपर पहुँच चुकी है। JNNSM, 2030 तक 500 GW ग़ैर-जीवाश्म लक्ष्य, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, PLI, PM-सूर्य घर और सबसे बड़े सोलर पार्कों पर UPSC नोट्स।

Solar Energy in India — featured image

भारत में सौर ऊर्जा देश के ऊर्जा बदलाव की बुनियाद है और उस 500 GW ग़ैर-जीवाश्म बिजली क्षमता में सबसे बड़ा हिस्सा भी, जिसे 2030 तक हासिल करने का वादा भारत सरकार ने किया है। जनवरी 2010 में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM) शुरू हुआ, तब ग्रिड से जुड़ी क्षमता क़रीब 18 MW थी; वहीं से बढ़ते हुए भारत में सौर ऊर्जा 2026 की शुरुआत तक 95 GW लगी हुई क्षमता पार कर चुकी है, और देश चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर बाज़ार बन गया है। इस बढ़त के पीछे सोलर की दरों में तेज़ गिरावट, सोलर सेल और मॉड्यूल के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना, भड़ला और पावागड़ा जैसे बड़े सोलर पार्क, एक करोड़ छतों के लिए PM-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना, और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की कूटनीति है। ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज और बिखरे हुए ऊर्जा संसाधनों के साथ मिलकर सौर ऊर्जा भारत के पेरिस समझौते के वादों और 2070 तक नेट-ज़ीरो के संकल्प के केंद्र में है।

भारत में सौर ऊर्जा की संभावना

भारत सूरज के लिहाज़ से सबसे अच्छी जगह पर बैठा है — 8°N से 37°N अक्षांश के बीच, साल में 250–300 साफ़ धूप वाले दिन, और औसतन 4–7 kWh प्रति वर्ग मीटर प्रतिदिन की सौर विकिरण। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) का अनुमान है कि ज़मीन की उपलब्धता और धूप को जोड़कर देश की कुल सौर क्षमता क़रीब 748 GW है। इस संभावना का बड़ा हिस्सा राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में है। यानी भारत में सौर ऊर्जा का सवाल संसाधन का नहीं, नीति, पैसे, ग्रिड और मैन्युफ़ैक्चरिंग का है।

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन — शुरुआत का मंच

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन (JNNSM) 11 जनवरी 2010 को शुरू हुआ, और इसका पहला लक्ष्य था 2022 तक ग्रिड से जुड़ी 20 GW सौर क्षमता। मिशन तीन चरणों में चला।

पहला चरण (2010-13)

पहले चरण का ज़ोर तकनीक को कर दिखाने और नियमों का ढाँचा खड़ा करने पर था। इस दौर में दरें ऊँची थीं — क़रीब ₹17 प्रति यूनिट। सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (SECI) और NTPC विद्युत व्यापार निगम बिजली ख़रीदने वाली संस्थाओं की भूमिका में रहे और डेवलपरों के साथ 25 साल के बिजली ख़रीद समझौते (PPA) किए। इसी चरण में उल्टी नीलामी (reverse auction) से बोली लगाने का तरीक़ा आया, जो आगे की पूरी क्षमता जोड़ने का साँचा बन गया।

दूसरा चरण (2013-17)

दूसरे चरण में लक्ष्य तीन गुना हुआ और दुनिया भर में मॉड्यूल सस्ते होने से दरें धड़ाम गिरीं। 2017 तक भड़ला फ़ेज़ III की नीलामी में भारत की सोलर दर ₹2.44 प्रति यूनिट तक आ गई — उस समय दुनिया में सबसे कम।

बदला हुआ लक्ष्य — 2022 तक 100 GW, फिर 2030 तक 500 GW

2015 में मौक़े का पैमाना समझते हुए केंद्र सरकार ने JNNSM का लक्ष्य बदलकर 2022 तक 100 GW सौर क्षमता कर दिया, जिसमें 60 GW बड़े प्लांट और 40 GW छत वाली सोलर थी। छत वाला लक्ष्य चूक गया, पर सौर क्षमता जुड़ना मज़बूत बना रहा। 2021 के ग्लासगो COP26 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के “पंचामृत” वादे रखे — इनमें 2030 तक 500 GW ग़ैर-जीवाश्म बिजली क्षमता और 2030 तक 50% बिजली ग़ैर-जीवाश्म स्रोतों से लेना शामिल है। इन 500 GW में क़रीब 60% हिस्सा सोलर से आएगा।

2026 में लगी हुई सौर क्षमता — भारत कहाँ खड़ा है

2026 की शुरुआत तक भारत की ग्रिड से जुड़ी सौर क्षमता 95 GW से ऊपर है, और 25–30 GW और बन रही है या जिसके PPA हो चुके हैं। क्षमता इन राज्यों में सिमटी हुई है:

  • राजस्थान — 23 GW से ऊपर, जिसकी अगुवाई भड़ला सोलर पार्क करता है।
  • गुजरात — 14 GW से ऊपर, जिसमें खावड़ा का सोलर-विंड हाइब्रिड पार्क शामिल है।
  • कर्नाटक — 9 GW से ऊपर, जिसका आधार पावागड़ा सोलर पार्क है।
  • तमिलनाडु — 7 GW से ऊपर, जिसमें कामुथी परियोजना शामिल है।
  • आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश — हर एक में 5–8 GW।

छत वाली सोलर इस कुल में क़रीब 12 GW है — 40 GW के शुरुआती छत वाले लक्ष्य से अब भी काफ़ी पीछे।

बड़े सोलर पार्क — भड़ला, पावागड़ा, खावड़ा

2014 में शुरू हुई अल्ट्रा-मेगा सोलर पार्क योजना ने ज़मीन, बिजली की लाइनें और मंज़ूरियाँ एक जगह जुटाकर बड़े सोलर फ़ार्म के लिए तेज़ रास्ता बनाया।

भड़ला सोलर पार्क, राजस्थान

जोधपुर ज़िले का भड़ला भारत का सबसे बड़ा चालू सोलर पार्क है और दुनिया के सबसे बड़े पार्कों में से एक, जिसकी 2,245 MW क्षमता 14,000 एकड़ में फैली है। यहाँ गर्मियों में तापमान 48°C पार कर जाता है, और धूल से निपटने के लिए पैनल अपने आप चलने वाले रोबोट साफ़ करते हैं।

पावागड़ा सोलर पार्क, कर्नाटक

तुमकुरु ज़िले के पावागड़ा में 13,000 एकड़ पर 2,050 MW क्षमता है। ज़मीन 2,300 से ज़्यादा किसानों से 28 साल के पट्टे पर ली गई है, जिससे उन्हें हर साल किराया मिलता है — इस मॉडल को अक्सर सामाजिक रूप से इंसाफ़ भरा बताया जाता है।

खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क, गुजरात

कच्छ के रण में बसे खावड़ा को 72,600 हेक्टेयर में फैले 30 GW के सोलर-विंड हाइब्रिड पार्क के तौर पर बनाया जा रहा है। पूरा होने पर यह दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क होगा।

PM-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना — बड़े पैमाने पर छत वाली सोलर

PM-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना फ़रवरी 2024 में ₹75,021 करोड़ के ख़र्च के साथ शुरू हुई। योजना का लक्ष्य है वित्त वर्ष 2026-27 तक एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाना, और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ़्त बिजली देना। 3 kW के सिस्टम पर घरों को ₹78,000 तक की केंद्रीय सब्सिडी मिलती है, और हिस्सा ले रहे बैंकों से क़रीब 7% ब्याज पर सस्ता क़र्ज़ भी। 2026 की शुरुआत तक 14 लाख से ज़्यादा सिस्टम लग चुके हैं और 30 लाख और आवेदन कतार में हैं। PM-सूर्य घर ने छत वाली सोलर में दोबारा जान डाल दी है, जो 2023 तक क़रीब 9 GW पर अटकी हुई थी।

सोलर सेल और मॉड्यूल के लिए PLI योजना

भारत अपने ज़्यादातर सोलर सेल और मॉड्यूल बाहर से मँगाता है, ख़ासकर चीन से। देश में यह पूरा तंत्र खड़ा करने के लिए सरकार ने 2021 में ज़्यादा दक्षता वाले सोलर PV मॉड्यूल के लिए PLI योजना शुरू की (पहली किस्त — ₹4,500 करोड़) और 2022 में इसे बढ़ाया (दूसरी किस्त — ₹19,500 करोड़)। दूसरी किस्त में पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल तक पूरी तरह जुड़ी हुई 39,600 MW क्षमता रिलायंस न्यू एनर्जी, वारी, टाटा पावर, अदाणी सोलर, अवादा, विक्रम सोलर और फ़र्स्ट सोलर जैसी कंपनियों को दी गई। पहली और दूसरी किस्त मिलाकर 2026 तक देश की मॉड्यूल क्षमता 65 GW और सेल क्षमता 30 GW पार कर जाती है।

PLI के साथ आयात की तरफ़ से भी क़दम उठाए गए हैं — मॉडल और निर्माताओं की मंज़ूर सूची (ALMM), और सेल पर 25% और मॉड्यूल पर 40% की बेसिक सीमा शुल्क — ताकि देसी निर्माताओं को सुरक्षित दौड़ने की जगह मिले।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) की शुरुआत भारत और फ़्रांस ने मिलकर नवंबर 2015 में पेरिस के COP21 में की, और दिसंबर 2017 में यह संधि पर टिका पूरा संगठन बन गया। गुरुग्राम में मुख्यालय वाले ISA के 2025 तक 120 देशों ने दस्तख़त कर रखे थे, और इसका लक्ष्य 2030 तक विकासशील और उष्णकटिबंधीय देशों में सौर ऊर्जा में 1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश जुटाना है। ISA के बड़े कार्यक्रमों में सोलर से गर्म और ठंडा करने की पहल, बड़े पैमाने पर सस्ती फ़ाइनेंसिंग, सीमा पार हरित ग्रिड जोड़ने का वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (OSOWOG) ढाँचा और STAR-C ट्रेनिंग केंद्र शामिल हैं।

ISA भारत की जलवायु कूटनीति की सबसे कामयाब चीज़ों में है, और यह दिखाता है कि ग्लोबल साउथ की भू-राजनीति सोलर पर टिकी ऊर्जा व्यवस्था की तरफ़ खिसक रही है।

सोलर की दरों का सफ़र

भारत में सौर ऊर्जा इतने बड़े पैमाने पर क्यों पहुँची, इसकी सबसे बड़ी वजह दरों का तेज़ी से गिरना है। 2010 में ₹17 प्रति यूनिट से दरें 2016 में ₹4.34 पर आईं, 2017 में भड़ला में ₹2.44 पर, और 2021-23 की नीलामियों में क़रीब ₹2.40-2.60 पर। हाल की नीलामियाँ, जिनमें SECI की हाइब्रिड और चौबीसों घंटे बिजली वाली निविदाएँ शामिल हैं, ₹2.50-2.95 प्रति यूनिट पर तय हुई हैं। इसमें मॉड्यूल और इनवर्टर की बढ़ी क़ीमतें दिखती हैं, पर यह भी पक्का होता है कि सोलर के साथ स्टोरेज अब पूरी उम्र की औसत लागत (levelised cost) के हिसाब से नए कोयले से सस्ता पड़ता है।

भारत में सौर ऊर्जा के सामने चुनौतियाँ

  • डिस्कॉम की माली हालत। राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों के खाते कमज़ोर हैं, और उन्होंने कई बार भुगतान टाला है या सोलर PPA दोबारा तय करने की कोशिश की है। इससे डेवलपरों के लिए पूँजी महँगी हो जाती है।
  • ज़मीन और बिजली की लाइनें। बड़े सोलर पार्कों को एक साथ लगी ज़मीन और बिजली निकालने का अपना ढाँचा चाहिए — दोनों कई राज्यों में कम भी हैं और राजनीतिक रूप से संवेदनशील भी।
  • मॉड्यूल बनाने में गहराई। PLI के बावजूद भारत अपना ज़्यादातर पॉलीसिलिकॉन और वेफ़र चीन से मँगाता है। कच्चे माल तक अपनी पहुँच बनाने का काम चल रहा है, पर पूरा नहीं हुआ है।
  • उम्र पूरी होने के बाद का कचरा। सोलर मॉड्यूल की डिज़ाइन उम्र 25 साल है; बड़े प्लांटों की पहली खेप 2035 के बाद रिटायर होने लगेगी। भारत के पास सोलर PV कचरे के प्रबंधन का अभी सिर्फ़ मसौदा ढाँचा है।
  • ग्रिड से जोड़ना। सोलर ऊपर-नीचे होती रहती है। बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और माँग घटाने-बढ़ाने के इंतज़ाम के बिना ज़्यादा सोलर आने पर ग्रिड का संतुलन बिगड़ता है।

आगे का रास्ता

500 GW ग़ैर-जीवाश्म लक्ष्य को सहारा देने के लिए भारत में सौर ऊर्जा को अब 2030 तक क़रीब 280–300 GW तक पहुँचना होगा। इसके लिए हर साल 40-50 GW की नीलामी लगातार चलानी होगी, बैटरी और पंप्ड-स्टोरेज हाइब्रिड गहराई से लगाने होंगे, PM-सूर्य घर के ज़रिए छत वाली सोलर तेज़ करनी होगी, और पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल तक पूरी देसी सप्लाई चेन खड़ी करनी होगी। उद्योगों से कार्बन घटाने के लिए ग्रीन हाइड्रोजन के साथ मिलकर सौर ऊर्जा भारत की नेट-ज़ीरो अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी ईंट होगी।

सामान्य प्रश्न

भारत में सौर ऊर्जा की लगी हुई क्षमता कितनी है?

2026 की शुरुआत तक भारत में ग्रिड से जुड़ी 95 GW से ज़्यादा सौर क्षमता थी, जिससे यह चीन और अमेरिका के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा सोलर बाज़ार बन जाता है।

JNNSM क्या है?

जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन 11 जनवरी 2010 को शुरू हुआ था, और इसका पहला लक्ष्य था 2022 तक ग्रिड से जुड़ी 20 GW सौर क्षमता। यह लक्ष्य बढ़ाकर 2022 तक 100 GW किया गया और अब 2030 तक 500 GW ग़ैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य है।

PM-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना क्या है?

PM-सूर्य घर मुफ़्त बिजली योजना छत वाली सोलर की योजना है, जो फ़रवरी 2024 में ₹75,021 करोड़ के ख़र्च के साथ शुरू हुई। इसका लक्ष्य एक करोड़ घरों की छतों पर सोलर लगाना है और हर महीने 300 यूनिट तक मुफ़्त बिजली देना है।

भारत का सबसे बड़ा सोलर पार्क कौन-सा है?

राजस्थान का भड़ला सोलर पार्क 2,245 MW के साथ भारत का सबसे बड़ा चालू सोलर पार्क है। गुजरात में बन रहा खावड़ा नवीकरणीय ऊर्जा पार्क पूरा होने पर 30 GW का होगा।

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन क्या है?

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन संधि पर टिका संगठन है, जिसे भारत और फ़्रांस ने 2015 में मिलकर बनाया, ताकि विकासशील देशों में सौर ऊर्जा के लिए निवेश जुटाया जा सके। इसका मुख्यालय गुरुग्राम में है और 120 देशों ने इस पर दस्तख़त किए हैं।

सोलर के लिए PLI योजना क्या है?

ज़्यादा दक्षता वाले सोलर PV मॉड्यूल की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना का कुल ख़र्च दो किस्तों में ₹24,000 करोड़ है, और इसके तहत पॉलीसिलिकॉन से मॉड्यूल तक जुड़ी हुई 48,000 MW क्षमता बड़ी भारतीय और विदेशी कंपनियों को दी गई है।

भारत में सोलर की सबसे कम दरें क्या रही हैं?

भारत में सोलर की दर 2010 के ₹17 प्रति यूनिट से गिरकर 2020 में रीवा सोलर पार्क में ₹2.36 प्रति यूनिट के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँची, और हाल की नीलामियाँ ₹2.50-2.95 प्रति यूनिट पर तय हुई हैं।

भारत में सौर ऊर्जा की मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं?

डिस्कॉम की कमज़ोर माली हालत, ज़मीन और बिजली की लाइनों की अड़चनें, बाहर से आने वाले पॉलीसिलिकॉन और वेफ़र पर निर्भरता, उम्र पूरी कर चुके PV कचरे का प्रबंधन और ग्रिड से जोड़ना — ये मुख्य चुनौतियाँ हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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