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दर्शनशास्त्र वैकल्पिक: UPSC के लिए पूरी गाइड

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक के सिलेबस, उपयुक्तता, किताबें, 24 हफ्तों की योजना, उत्तर लेखन और आम गलतियों को UPSC के लिए आसान भाषा में समझिए।

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दर्शनशास्त्र वैकल्पिक तब अच्छा काम करता है जब आपकी पृष्ठभूमि और इस पेपर का मिज़ाज एक-दूसरे से मेल खाते हों। यह शॉर्टकट नहीं है। यह 500 अंकों की ज़िम्मेदारी है। अगर आपने इसे सिर्फ़ इसलिए चुना कि किसी और ने इसमें अच्छे अंक पाए थे, तो यह आपको मुश्किल में डाल देगा।

सही सवाल सीधा है: क्या आप महीनों तक दर्शनशास्त्र पढ़ सकते हैं, दबाव में सटीक उत्तर लिख सकते हैं और GS की रफ़्तार खोए बिना इसे दोहरा सकते हैं? अगर हाँ, तो यह वैकल्पिक आपके लिए अच्छा हो सकता है। अगर नहीं, तो ऐसा विषय चुनिए जिसे आप सच में लंबे समय तक निभा सकें।

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक की हिंदी गाइड: उपयुक्तता, GS ओवरलैप, जोखिम और उत्तर शैली

छोटा फैसला

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक चुनिए अगर आपको अमूर्त सोच, साफ़ दलील, GS4 नीतिशास्त्र से मेल और कम लेकिन घनी पढ़ाई पसंद है। इसे छोड़ दीजिए अगर आपको याददाश्त-भारी विषय चाहिए।

सबसे बड़ा फायदा ओवरलैप है: GS4 नीतिशास्त्र, निबंध, धर्म, सामाजिक मुद्दे और राजनीतिक विचार से मध्यम मेल। बात साफ़ है: दर्शनशास्त्र का सिलेबस छोटा है, आसान नहीं। धुंधले उत्तरों पर जल्दी अंक कटते हैं।

विषयों की पूरी तुलना के लिए दो या तीन विकल्प छँटने के बाद मुख्य वैकल्पिक केंद्र देखें: UPSC वैकल्पिक विषय।

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक एक नज़र में

पहलूइसका मतलब
अंकपेपर 1 और पेपर 2 में कुल 500 अंक
सही फिटवे उम्मीदवार जिन्हें अमूर्त सोच, साफ़ दलील, नीतिशास्त्र से मेल और कम लेकिन घनी पढ़ाई पसंद हो
GS ओवरलैपGS4 नीतिशास्त्र, निबंध, धर्म, सामाजिक मुद्दे और राजनीतिक विचार से मध्यम
तैयारी का बोझमात्रा में मध्यम, अवधारणा की कठिनाई में ज़्यादा
उत्तर शैलीसमस्या की परिभाषा दीजिए, दार्शनिक की दलील बताइए, अलग-अलग मतों की तुलना कीजिए और फिर तेज़ मूल्यांकन दीजिए।
मुख्य जोखिमदर्शनशास्त्र का सिलेबस छोटा है, आसान नहीं। धुंधले उत्तरों पर जल्दी अंक कटते हैं।

सिलेबस कैसा लगता है

सिलेबस को किताब के हिसाब से नहीं, पेपर के हिसाब से पढ़ना चाहिए। पुस्तक-सूची आपको सामग्री देती है। सिलेबस बताता है कि UPSC असल में क्या पूछ सकता है।

पेपर 1

पेपर 1 में मुख्य रूप से पश्चिमी दर्शन, भारतीय दर्शन, तर्कशास्त्र, तत्त्वमीमांसा (metaphysics), ज्ञानमीमांसा (epistemology), नीतिशास्त्र और धर्म-दर्शन आते हैं। इसे समझ की नींव मानिए। आपका लक्ष्य तथ्य इकट्ठा करना नहीं है। लक्ष्य वह शब्दावली और ढाँचा बनाना है जिसकी उम्मीद परीक्षक ऐसे उम्मीदवार से करता है जिसने विषय को सच में पढ़ा हो।

पेपर 2

पेपर 2 में मुख्य रूप से सामाजिक-राजनीतिक दर्शन, धर्म-दर्शन, भारतीय सामाजिक विचार, अधिकार, न्याय, धर्मनिरपेक्षता, लोकतंत्र और मानववाद आते हैं। यहीं उम्मीदवार अक्सर संतुलन खोते हैं। पेपर 2 ज़्यादा व्यावहारिक लग सकता है, लेकिन इसमें भी विषय की गहराई चाहिए। अच्छा उत्तर पेपर 1 की मूल अवधारणाओं को लेकर उन्हें भारतीय, व्यावहारिक या समकालीन संदर्भों में लागू करता है, जहाँ सिलेबस इसकी अनुमति देता है।

दर्शनशास्त्र किसे चुनना चाहिए

यह वैकल्पिक तभी चुनिए जब तीन बातें पूरी होती हों।

पहली, आप विषय की बुनियादी भाषा को बार-बार शुरुआती सामग्री पर लौटे बिना दोहरा सकते हों। जब हर विषय पहली पढ़ाई जैसा लगे, तो वैकल्पिक की तैयारी बहुत भारी हो जाती है।

दूसरी, आप विषय की स्वाभाविक शैली में उत्तर लिख सकते हों। समस्या की परिभाषा दीजिए, दार्शनिक की दलील बताइए, अलग-अलग मतों की तुलना कीजिए और फिर तेज़ मूल्यांकन दीजिए। अगर यह सहज लगता है, तो आपके पास फायदा है। अगर बनावटी लगता है, तो तय करने से पहले विषय को दो हफ्ते आज़माइए।

तीसरी, आपकी GS योजना वैकल्पिक के बोझ को झेल सके। वैकल्पिक ज़रूरी है, लेकिन पूरा साल नहीं खा सकता। जो विषय आपको वैकल्पिक में 20 अतिरिक्त अंक दे, लेकिन GS में 50 अंक का नुकसान करा दे, वह जीत नहीं है।

पुस्तकें और स्रोत

स्रोत कम रखकर शुरू कीजिए। पहली पढ़ाई के बाद भी कोई विषय साफ़ न हो, तभी नई किताब जोड़िए।

पेपर 1 का आधार

A Critical History of Western Philosophy — Y. Masih (Motilal Banarsidass)

  • 601 पेज, Motilal Banarsidass
  • ग्रीक, मध्यकालीन और आधुनिक दर्शन, विचारक-दर-विचारक
  • Philosophy वैकल्पिक की हर सूची में Paper 1 की पश्चिमी किताब
रोज़ एक विचारक, अपनी summary sheet के साथ। किताब इसी के लिए बनी है।

A Critical Survey of Indian Philosophy — Chandradhar Sharma (Motilal Banarsidass)

  • 415 पेज, Motilal Banarsidass
  • सभी दर्शन-संप्रदाय, बौद्ध और वेदांत की बहसें तर्क सहित
  • Paper 1 के भारतीय दर्शन का मानक
घनी पर पूरी। सरल भाषा के लिए Datta & Chatterjee साथ रखिए।

An Introduction to Indian Philosophy — Datta & Chatterjee

  • 402 पेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय की क्लासिक किताब
  • हर संप्रदाय मूल सिद्धांतों से समझाया गया
  • Sharma से पहले संप्रदायों में उतरने का सरल रास्ता
पहले यह, फिर Sharma। इसी क्रम में संप्रदाय उलझते नहीं।
  • पश्चिमी दर्शन के लिए Y. Masih
  • भारतीय दर्शन के लिए C.D. Sharma
  • सामाजिक-राजनीतिक अवधारणाओं के लिए O.P. Gauba
  • भारतीय दर्शन की गहराई के लिए Datta और Chatterjee
  • IGNOU दर्शनशास्त्र नोट्स

योजना बनाए बिना किताबों का ढेर मत लगाइए। ज़्यादातर उम्मीदवारों के लिए दो अच्छी किताबें और पिछले वर्षों के प्रश्न, आधी-अधूरी पढ़ी गई सात किताबों से बेहतर हैं।

24 हफ्तों की तैयारी योजना

हफ्ते 1 से 4: सिलेबस का नक्शा

सिलेबस छापिए और हर विषय को परिचित, कमज़ोर या अनजान के रूप में चिह्नित कीजिए। एक बुनियादी स्रोत जल्दी पढ़िए। अभी भारी नोट्स न बनाइए। इस चरण पर आप एक नक्शा बना रहे हैं।

हफ्ते 5 से 12: पहली गंभीर पढ़ाई

पहले विचारकों के हिसाब से अवधारणा नोट्स बनाइए, फिर तुलना वाले उत्तर और पेपर 2 के समकालीन प्रयोग का अभ्यास कीजिए। पढ़ते समय पिछले वर्षों के प्रश्न साथ रखिए। कोई विषय बार-बार आया है, तो उसे सिर्फ़ नोट नहीं, उत्तर की इकाई की तरह तैयार कीजिए।

हफ्ते 13 से 18: नोट्स और उत्तर के ढाँचे

हर बड़े विषय को एक रिवीज़न शीट में समेटिए। अच्छे वैकल्पिक नोट में परिभाषा, मुख्य तर्क, उदाहरण, जहाँ उपयोगी हों वहाँ आरेख या डेटा और पिछले वर्षों के प्रश्नों के दो नज़रिए होने चाहिए।

हफ्ते 19 से 24: टेस्ट और रिवीज़न

पहले खंडवार टेस्ट लिखिए और फिर पूरे पेपर। आख़िरी छह हफ्ते सिर्फ़ पढ़ने की दौड़ नहीं होने चाहिए। वे यादकर लिखने की दौड़ होने चाहिए: याद कीजिए, लिखिए, जाँचिए, सुधारिए और दोहराइए।

उत्तर लिखने की रणनीति

वैकल्पिक के उत्तर लंबे GS उत्तर नहीं हैं। पहली कुछ पंक्तियों में ही विषय पर पकड़ दिखनी चाहिए।

यह बुनियादी ढाँचा अपनाइए:

  1. अवधारणा परिभाषित करें या मुद्दे को पकड़ें।
  2. विषय की शब्दावली लेकर आइए।
  3. विषय की माँग के अनुसार प्रमाण, सिद्धांत, आरेख, मामला या डेटा जोड़ें।
  4. प्रश्न विश्लेषण माँगता हो तो दोनों पक्षों का मूल्यांकन करें।
  5. धुंधली पंक्ति के बजाय साफ़ निष्कर्ष दें।

वैकल्पिक से बाहर मुख्य परीक्षा उत्तर अभ्यास के लिए UPSC मुख्य परीक्षा उत्तर लेखन देखें। समय और ढाँचे का तरीका वही है, लेकिन वैकल्पिक में विषय की शब्दावली ज़्यादा सटीक चाहिए।

आम गलतियाँ

  • दर्शनशास्त्र का सिलेबस छोटा है, आसान नहीं। धुंधले उत्तरों पर जल्दी अंक कटते हैं।
  • सिलेबस पूरा होने तक पिछले वर्षों के प्रश्नों को न देखना।
  • ऐसे नोट्स बनाना जिन्हें आख़िरी 30 दिनों में दोहराना बहुत लंबा हो।
  • जब वैकल्पिक में विषय की शब्दावली चाहिए, तब सामान्य GS उत्तर लिखना।

आख़िरी सलाह

दर्शनशास्त्र इसलिए न चुनें कि यह चलन लगता है। इसे इसलिए चुनें कि आप इसे तीन बार दोहराने के बाद भी ऊर्जा के साथ लिख सकें। वैकल्पिक की असली परीक्षा यही है।

अगर आप इस और किसी दूसरे वैकल्पिक के बीच उलझे हैं, तो तीन चीज़ों की तुलना करें: पहले 20 पिछले वर्षों के प्रश्न, किसी मानक किताब का एक अध्याय और किसी टॉपर की उत्तर कॉपी। किसी सामान्य रैंकिंग सूची से आपका फैसला इतना साफ़ नहीं होगा।

मिलते-जुलते वैकल्पिक विषय

तय करने से पहले दर्शनशास्त्र की तुलना कुछ मिलते-जुलते वैकल्पिक विषयों से कीजिए। दो या तीन विषयों को दो हफ्ते आज़माना किसी रैंकिंग सूची से बेहतर है।

सामान्य प्रश्न

क्या दर्शनशास्त्र UPSC के लिए अच्छा वैकल्पिक है?

अगर आपकी पृष्ठभूमि और रुचि विषय से मेल खाती हैं, तो यह अच्छा वैकल्पिक हो सकता है। दर्शनशास्त्र उन उम्मीदवारों के लिए काम करता है जो इसकी तैयारी का बोझ और उत्तर शैली संभाल सकते हैं। यह हर उम्मीदवार के लिए अपने-आप अच्छा नहीं है।

दर्शनशास्त्र वैकल्पिक की तैयारी में कितना समय लगता है?

अधिकांश उम्मीदवारों को पहली पूरी पढ़ाई और उत्तर लेखन के लिए 4 से 6 महीने चाहिए। अगर आप विषय में नए हैं, तो नींव बनाने के लिए अतिरिक्त समय रखिए।

क्या दर्शनशास्त्र वैकल्पिक का GS से ओवरलैप है?

GS4 नीतिशास्त्र, निबंध, धर्म, सामाजिक मुद्दे और राजनीतिक विचार से मध्यम ओवरलैप है। ओवरलैप को अतिरिक्त फायदा मानिए, विषय चुनने की अकेली वजह नहीं।

क्या मैं बिना कोचिंग के दर्शनशास्त्र वैकल्पिक तैयार कर सकता हूँ?

हाँ, अगर आपके पास भरोसेमंद स्रोत, पिछले वर्षों के प्रश्नों की सख़्त योजना और उत्तर की जाँच है। जब सिलेबस बिखरा हुआ लगे या आप खुद उत्तर की गुणवत्ता न आँक पाएँ, तब कोचिंग उपयोगी हो सकती है।

इस वैकल्पिक को अंतिम रूप देने से पहले मुझे क्या जाँचना चाहिए?

सिलेबस पढ़िए, 5 पिछले वर्षों के प्रश्नों को हल या रूपरेखा कीजिए और एक मानक अध्याय पढ़िए। अगर ये तीनों संभाले जा सकें, तो वैकल्पिक पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

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