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जमाबंदी हरियाणा: नकल, इंतकाल की स्थिति और प्रमाणित कॉपी ऑनलाइन कैसे लें

जमाबंदी हरियाणा आसान भाषा में: मुफ्त जमाबंदी नकल, इंतकाल और डीड की जांच, फीस वाली डिजिटल प्रमाणित कॉपी, निशानदेही और आम गलतियों का हल।

Illustration for the Jamabandi Haryana guide on Anantam IAS

जमाबंदी हरियाणा, हरियाणा भूमि रिकॉर्ड की ऑनलाइन सेवा है। इसे राज्य का राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग दो वेबसाइटों से चलाता है। पहली पुरानी jamabandi.nic.in है, जो HALRIS और WebHalris सॉफ्टवेयर पर बनी है। दूसरी नया राजस्व हरियाणा पोर्टल है, जिसका पता revenueharyana.gov.in है। ज्यादातर लोग इसे इसलिए खोलते हैं कि किसी खेवट की जमाबंदी नकल पढ़ सकें, यह जांच सकें कि रजिस्ट्री के बाद बिक्री का इंतकाल हुआ या नहीं, या कोई रजिस्टर्ड डीड ढूंढ सकें। जुलाई 2026 से यही विभाग फीस लेकर डिजिटल रूप से प्रमाणित कॉपी भी ऑनलाइन देता है।

दो गलतफहमियां सबसे ज्यादा समय बर्बाद करती हैं। पहली है मुफ्त नकल को सबूत मान लेना। दोनों साइटें इसे सिर्फ जानकारी वाली कॉपी बताती हैं, जिसे अदालत या दफ्तर के काम में प्रमाणित दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। दूसरी है यह मान लेना कि एक ही वेबसाइट सारे काम करती है। मुफ्त खोज, इंतकाल की जांच और डीड की खोज अब भी jamabandi.nic.in पर हैं। वहीं रजिस्ट्रेशन, प्रमाणित कॉपी और निशानदेही (जमीन की पैमाइश) के आवेदन अब revenueharyana.gov.in पर सिटीजन लॉगिन से होते हैं। यह गाइड दोनों को अलग-अलग रखकर समझाती है।

जमाबंदी हरियाणा में क्या-क्या मिलता है

हरियाणा के रिकॉर्ड पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 के हिसाब से पढ़े जाते हैं, जो राज्य में आज भी लागू है। इसलिए यहां की शब्दावली खेवट, खतोनी (जिसे खतौनी भी लिखते हैं) और खसरा है, न कि दूसरे राज्यों वाला 7/12 जैसा कोई शब्द। नीचे की तालिका में सेवा वैसी दी गई है, जैसी वह 3 नवंबर 2026 को थी।

तथ्यविवरण
विभागराजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग, हरियाणा सरकार
मुफ्त खोज वाली साइटjamabandi.nic.in (“Jamabandi Nakal for Checking”)
प्रमाणित कॉपी और आवेदनrevenueharyana.gov.in (OTP से सिटीजन लॉगिन)
सॉफ्टवेयरWebHalris, जो पोर्टल के मुताबिक सभी 143 तहसीलों में चलता है
ऑनलाइन रिकॉर्डजमाबंदी, इंतकाल, रजिस्टर्ड डीड, स्टे ऑर्डर, कैडस्ट्रल नक्शे
प्रमाणित कॉपी की फीसजमाबंदी के पहले 10 पेज के 100 रुपये, उसके बाद हर पेज के 5 रुपये, जैसा शुरुआत के समय बताया गया (मौजूदा रकम पेमेंट स्क्रीन पर दिखती है)
इंतकाल की फीसहर इंतकाल के 200 रुपये और साथ में 50 रुपये सर्विस चार्ज (7 जनवरी 2013 की अधिसूचना)
खोज सूची में जिले23, जिनमें हांसी भी है, जो पुरानी सूचियों में नहीं दिखता
हेल्पलाइनjamabandi.nic.in पर 1800-180-2137; revenueharyana.gov.in पर हेल्प डेस्क 0172-2711693

डिजिटल रिकॉर्ड 2002 तक पीछे जाता है, और नकल वाला पेज यह बात स्क्रीन पर ही लिखता है। इससे पुराने साल के लिए आपको रिकॉर्ड रूम की कॉपी चाहिए, जिसकी बात आगे की गई है।

हरियाणा के भूमि रिकॉर्ड में मिलने वाले शब्द

हर स्क्रीन यह मानकर चलती है कि आप पटवारी के रजिस्टरों के कुछ शब्द जानते हैं। पोर्टल की अपनी शब्दावली इनका मतलब बताती है, और इनमें से ज्यादातर शब्द सीधे अविभाजित पंजाब के बंदोबस्त रिकॉर्ड से आए हैं।

  • जमाबंदी: किसी राजस्व संपदा (गांव) का अधिकार अभिलेख (record of rights)। पटवारी इसे हर पांच साल में दोबारा लिखता है, और एक राजस्व अधिकारी इसकी तस्दीक करता है। पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 की धारा 44 के तहत इसकी प्रविष्टियों को तब तक सच माना जाता है, जब तक वे गलत साबित न हो जाएं।
  • खेवट: मालिक की होल्डिंग की सूची। ज्यादातर खोज इसी नंबर से शुरू होती है।
  • खतोनी: काश्तकार की होल्डिंग वाली पर्ची। जमाबंदी में अक्सर खेवट/खतोनी एक साथ दिखते हैं।
  • खसरा: खेतों का रजिस्टर, और किसी एक खेत का नंबर भी।
  • इंतकाल (दाखिल-खारिज): वह प्रविष्टि जो बिक्री, दान, गिरवी, विरासत, बंटवारे या अदालत की डिक्री के बाद मालिकाना हक बदलती है। हर इंतकाल अगली जमाबंदी तक पहुंचने से पहले इंतकाल रजिस्टर में दर्ज होता है।
  • शजरा किश्तवार: गांव का खेतों वाला नक्शा। यह तहसील के रिकॉर्ड रूम में रहता है, और कपड़े पर बनी उसकी कामकाजी कॉपी पटवारी के पास रहती है।
  • शजरा नसब: मालिकों का वंशवृक्ष, जो विरासत के झगड़ों में काम आता है।
  • खसरा गिरदावरी: फसल की जांच का रजिस्टर, जो हर छह महीने में, अक्तूबर और मार्च में, लिखा जाता है।
  • कनाल, मरला, बीघा और बिस्वा: रकबे की इकाइयां। एक बिस्वा बीघे का बीसवां हिस्सा होता है, और बीघे का आकार इलाके के हिसाब से बदलता है।

किसी पुराने दस्तावेज पर लिखा खेवट नंबर आज के नंबर से मेल खाए, यह जरूरी नहीं है। नई जमाबंदी लिखे जाने पर होल्डिंग के नंबर बदल जाते हैं। इसलिए हमेशा उसी जमाबंदी साल से खोजिए, जिस साल का आपका दस्तावेज है।

कौन-सा रिकॉर्ड क्या साबित करता है

हर रिकॉर्ड एक अलग सवाल का जवाब देता है, और खरीदार या बैंक को आम तौर पर एक से ज्यादा रिकॉर्ड चाहिए होते हैं।

रिकॉर्डइसमें क्या दिखता हैकहां मिलेगा
जमाबंदी नकलकिसी खेवट के मालिक, काश्तकार, हिस्से, खसरा नंबर, रकबा और टिप्पणियांjamabandi.nic.in पर “Jamabandi Nakal for Checking”; या revenueharyana.gov.in पर Jamabandi Nakal
इंतकालकोई हस्तांतरण या विरासत दर्ज होकर तय हुई या नहींjamabandi.nic.in पर “Check Mutation Status” और “View Mutation Orders”
रजिस्टर्ड डीडउप-रजिस्ट्रार दफ्तर में रजिस्टर हुई बिक्री, दान या कोई दूसरी डीडProperty Registration के नीचे “View Registered Deeds”
कैडस्ट्रल नक्शागांव के नक्शे में खसरे का आकार और उसकी जगहCadastral Maps के नीचे “View Cadastral Maps”
स्टे ऑर्डरजमीन पर दर्ज अदालत की रोक“View Stay Orders”
भार प्रमाणपत्रसंपत्ति पर दर्ज देनदारियांProperty Registration, फिर Encumbrance Certificate

Query मेनू में किसी गांव के लिए कुछ छोटी रिपोर्टें भी हैं: Owner Details, Kashatkar Details, Makbuja Details, Total Land, Irrigation Details, Majrua Land Details, Gair Majrua Land Details और Khewat/Khatoni Details। जब आपको पूरी नकल की जगह रिकॉर्ड का सिर्फ एक हिस्सा चाहिए, जैसे कुल रकबा, तब ये रिपोर्टें काम आती हैं।

jamabandi.nic.in पर जमाबंदी नकल कैसे देखें

मुफ्त खोज के लिए न लॉगिन चाहिए, न फीस। गांव का नाम तैयार रखिए, और साथ में खेवट नंबर, कोई खसरा नंबर या मालिक का नाम, इनमें से कोई एक।

  1. jamabandi.nic.in खोलिए और Jamabandi मेनू में “Jamabandi Nakal for Checking” पर क्लिक कीजिए।
  2. “Select type” में By Owner Name, By Khewat, By Khasra/Survey No. या By Date of Mutation चुनिए।
  3. जिला चुनिए, फिर तहसील या उप-तहसील, फिर गांव।
  4. जमाबंदी साल चुनिए। सबसे नया साल मौजूदा रिकॉर्ड दिखाता है, और पहले के साल पुरानी जमाबंदियां दिखाते हैं।
  5. जो मांगा जाए, वह भरिए: मालिक का नाम, खेवट नंबर या खसरा नंबर। फिर नकल खोलिए।

पेज पर लिखा है कि रिकॉर्ड उसी समय बनते हैं, और तभी मिलते हैं जब वे मौजूद हों। अगर किसी गांव या साल पर कुछ नहीं आता, तो उस साल का रिकॉर्ड डिजिटल नहीं हुआ है। तब वह सिर्फ तहसील के रिकॉर्ड रूम में मिलेगा।

राजस्व हरियाणा पोर्टल का अपना Jamabandi Nakal पेज है, जिसमें दो विकल्प ज्यादा हैं। “Online Jamabandi” मौजूदा कंप्यूटर वाला रिकॉर्ड देता है, और “Record Room Jamabandi” रिकॉर्ड रूम में रखे पिछले सालों का रिकॉर्ड खोलता है। इसके बाद आप Khewat Wise या Owner Wise कॉपी चुन सकते हैं। इसका डिस्क्लेमर हिंदी में है। वह कहता है कि यह कॉपी जानकारी के लिए है, और इसे किसी भी कानूनी, न्यायिक या सरकारी कार्यवाही में प्रमाणित दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

जमाबंदी तय करती है कि रिकॉर्ड में किसका नाम दर्ज है, और इसीलिए कर्ज देने वाले हर खेती कर्ज की शुरुआत इसी से करते हैं। यह रिश्ता भारत में कृषि ऋण वाले नोट में समझाया गया है।

मुफ्त नकल और प्रमाणित कॉपी में फर्क

मुफ्त नकल जांच के लिए है। जब बैंक, अदालत या रजिस्ट्रार जमाबंदी मांगते हैं, तो उन्हें प्रमाणित कॉपी चाहिए होती है, और हरियाणा अब इसके दो रास्ते देता है।

ऑनलाइन, राजस्व हरियाणा पोर्टल से। Certified Copies मॉड्यूल 27 जुलाई 2026 की तारीख वाले यूजर मैनुअल और SOP के साथ शुरू हुआ। इसमें चार दस्तावेज आते हैं: Jamabandi, Mutation, Registry (Deed) और Fard Badar (सुधार का आदेश)।

  1. revenueharyana.gov.in खोलिए, “Register” पर क्लिक कीजिए और “Citizen Registration” चुनिए।
  2. INDIAN या NRI टैब चुनिए, और अपना 10 अंकों का मोबाइल नंबर, पूरा नाम, पिता का नाम, 12 अंकों का आधार नंबर, ईमेल और लिंग भरिए। CAPTCHA डालिए और “REGISTER NOW” पर क्लिक कीजिए।
  3. SMS से आया 6 अंकों का OTP डालिए और “Verify OTP” पर क्लिक कीजिए। रजिस्ट्रेशन मुफ्त है, और खाता तुरंत खुल जाता है।
  4. “Login” और फिर “Citizen Login” से, अपने मोबाइल नंबर, CAPTCHA और OTP के साथ लॉगिन कीजिए।
  5. बाईं तरफ के पैनल से “Certified Copies” खोलिए और नया अनुरोध शुरू कीजिए। सिस्टम एक आवेदन ID देता है।
  6. दस्तावेज का प्रकार चुनिए, फिर जिला, तहसील और गांव। इसके बाद फॉर्म जो मांगे, वह रजिस्ट्री नंबर या दूसरी पहचान भरिए।
  7. सबमिट कीजिए। अनुरोध पटवारी के पास जाता है, जो टिप्पणी के साथ उसे मंजूर या नामंजूर करता है।
  8. मंजूरी के बाद “Pay Now” बटन दिखता है। पेमेंट गेटवे से फीस भरिए।
  9. सिस्टम डिजिटल रूप से प्रमाणित कॉपी बनाता है, और आप उसे डैशबोर्ड से डाउनलोड कर लेते हैं।

27 जुलाई 2026 को शुरुआत के समय फीस बताई गई थी: जमाबंदी के पहले 10 पेज के 100 रुपये और उसके बाद हर पेज के 5 रुपये। इंतकाल, रजिस्टर्ड डीड या फर्द बदर की कॉपी के लिए एक जैसे 100 रुपये, चाहे कॉपी कितनी भी लंबी हो। पोर्टल का मैनुअल यह रकम नहीं छापता, इसलिए पेमेंट स्क्रीन पर इसे पक्का कर लीजिए। पैसा पटवारी की मंजूरी के बाद ही देना होता है, इसलिए जो अनुरोध मंजूर नहीं हुआ, उस पर कुछ भी खर्च नहीं होता।

फर्द केंद्र या पटवारी से। विभाग की अधिसूचित सेवा सूची में काउंटर से मिलने वाली कॉपी की समय-सीमा अब भी दी गई है। फर्द केंद्र पर प्रमाणित कॉपी 1 दिन में मिलनी चाहिए। गांव के पटवारी से हाथ से बनी कॉपी 5 पेज से कम हो तो 2 दिन में, 5 से 15 पेज हो तो 3 दिन में, और 15 पेज से ज्यादा हो तो 7 दिन में मिलनी चाहिए। कॉपी देर से मिले, तो तहसील दफ्तर में बात कीजिए।

jamabandi.nic.in पर अब भी “Get Verifiable copy of Nakal” लिंक है, जो रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर मांगता है। लेकिन प्रमाणित कॉपी के लिए विभाग अब राजस्व हरियाणा का जुलाई 2026 वाला मॉड्यूल ही बताता है, जिसका अपना मैनुअल और SOP है। इसलिए शुरुआत वहीं से कीजिए।

हरियाणा में इंतकाल: फीस, स्थिति और आपत्ति

रजिस्टर्ड बिक्री डीड अपने-आप जमाबंदी नहीं बदलती। पटवारी इंतकाल दर्ज करता है, एक राजस्व अधिकारी उसकी तस्दीक करता है, और तभी नया मालिक रिकॉर्ड में दिखता है।

फीस। पोर्टल से जुड़ी फीस सूची हरियाणा की 7 जनवरी 2013 की अधिसूचना है, जो पंजाब भू-राजस्व अधिनियम, 1887 की धारा 38 के तहत जारी हुई थी। इसमें रजिस्टर्ड डीड, अदालत की डिक्री, बंटवारे के आदेश या विरासत पर आधारित हर इंतकाल के 200 रुपये लगते हैं। साथ में 50 रुपये सर्विस चार्ज भी लगता है, जो जिला सूचना प्रौद्योगिकी सोसाइटी को जाता है। भूदान की जमीन की प्रविष्टियों पर कोई फीस नहीं लगती। ग्रामीण जनता आवास योजना के तहत अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के परिवारों को मुफ्त दिए गए प्लॉटों की प्रविष्टियों पर भी कोई फीस नहीं है।

समय-सीमा। बिना विवाद वाले इंतकाल की तस्दीक का अधिसूचित समय 30 दिन है, और यह काम सर्किल राजस्व अधिकारी करता है। पहला शिकायत अधिकारी SDM है, और दूसरा डिप्टी कमिश्नर (उपायुक्त)।

रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की स्थिति कैसे देखें:

  1. jamabandi.nic.in पर Mutation मेनू खोलिए और “Check Mutation Status” पर क्लिक कीजिए।
  2. जिला और तहसील चुनिए।
  3. अपनी डीड से रजिस्ट्री नंबर और रजिस्ट्री की तारीख भरिए।
  4. नतीजा बताता है कि उस डीड पर इंतकाल दर्ज हुआ है या नहीं।

“Mutation Status of Deeds” भी इसी तरह काम करता है। “Check Mutation of Deed and Raise Objection” दो रजिस्ट्री तारीखों के बीच की डीड की सूची देता है, और इसी से कोई मालिक ऐसा सौदा पकड़ सकता है जो उसने किया ही नहीं। “View Mutation Orders” के लिए मोबाइल नंबर से लॉगिन करना पड़ता है।

राजस्व हरियाणा पोर्टल पर “Latest Mutation Notification” नाम का एक पेज भी है। इसमें पिछले दस दिनों में तय हुए इंतकाल दिखते हैं, साथ में UL नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, प्रकार (जैसे खून के रिश्ते में हस्तांतरण) और दस्तावेज का लिंक। इसकी सूचना कहती है कि जिसे आपत्ति हो, वह तहसीलदार के पास जाए। अगर कोई नहीं जाता, तो 10 दिन बाद बदलाव सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो जाता है। आपके खेवट से जुड़ी किसी भी बिक्री के बाद के दिनों में यह पेज देखते रहिए।

नक्शे, डीड, भार प्रमाणपत्र और निशानदेही

मेनू का बाकी हिस्सा मालिकों से ज्यादा खरीदारों के काम का है, और हर विकल्प एक छोटे से सवाल का जवाब देता है।

  • कैडस्ट्रल नक्शा: “View Cadastral Maps” राज्य के नक्शा व्यूअर पर ले जाता है, जहां खसरा गांव के शजरे पर दिखता है। जब लोग हरियाणा का जमाबंदी नक्शा खोजते हैं, तो ज्यादातर उनका मतलब यही स्टेप होता है।
  • रजिस्टर्ड डीड: “View Registered Deeds” राज्य के सिस्टम से रजिस्टर हुई डीड ढूंढता है, और “Collector Rates” वह सर्किल रेट बताता है, जिस पर स्टांप ड्यूटी का हिसाब बनता है।
  • भार प्रमाणपत्र: Property Registration, फिर Encumbrance Certificate, फिर “Apply New” पर जाइए। मोबाइल नंबर और OTP से लॉगिन कीजिए, अपनी और संपत्ति की जानकारी भरिए, नकल अपलोड कीजिए, और आवेदन मंजूर होने पर प्रमाणपत्र डाउनलोड कर लीजिए।
  • निशानदेही: राजस्व हरियाणा पर लॉगिन किया हुआ नागरिक “Apply for Demarcation” चुन सकता है। SOP में दो भुगतान तय हैं: 200 रुपये आवेदन फीस, और सरकारी दर पर खेत में नपाई की फीस। सेवा सूची में, जहां फसल खड़ी न हो, 45 दिन की मोहलत है, जबकि ऑनलाइन SOP ज्यादा से ज्यादा 40 दिन तय करता है।

जमीन पर कर्ज की प्रविष्टियां भी इसी सिस्टम पर पटवारी या किसी अधिकृत अधिकारी के जरिए होती हैं। इसके लिए कर्ज की प्रविष्टि वाली एक अलग SOP है, जो प्रविष्टि के लिए तीन कामकाजी दिन की सीमा तय करती है।

आम गलतियां और उनका हल

ज्यादातर खोजें जमीन न होने से नहीं, बल्कि चुनाव वाली स्क्रीनों की वजह से फेल होती हैं।

  • नकल नहीं खुलती या स्क्रीन अटक जाती है। Jamabandi मेनू में “Check Webhalris Server Status” खोलिए। यह बताता है कि कौन-सी तहसीलें ऑनलाइन हैं। अगर आपकी तहसील ऑफलाइन है, तो बाद में कोशिश कीजिए।
  • सूची में गांव नहीं है। देखिए कि गांव किसी उप-तहसील में तो नहीं आता, और कहीं अब किसी नए जिले में तो नहीं चला गया। राजस्व हरियाणा की सूची में हांसी पहले से जिले के रूप में दिखता है।
  • खेवट नंबर नहीं मिल रहा। हो सकता है आप गलत जमाबंदी साल में खोज रहे हों। हर नई जमाबंदी पर होल्डिंग के नंबर बदलते हैं, इसलिए साल अपने दस्तावेज से मिलाइए।
  • मालिक का नाम नहीं मिल रहा। रिकॉर्ड हिंदी में हैं, और एक ही नाम की वर्तनी अलग-अलग हो सकती है। इसकी जगह खेवट या खसरा से खोजिए।
  • पुराने साल पर कुछ नहीं दिखता। डिजिटल रिकॉर्ड 2002 से शुरू होता है। राजस्व हरियाणा पर “Record Room Jamabandi” इस्तेमाल कीजिए, या तहसील में आवेदन कीजिए।
  • प्रमाणित कॉपी के अनुरोध पर “No Record Found” आता है। रजिस्ट्री नंबर या गांव मेल नहीं खा रहा। दोनों को डीड से हूबहू उतारिए।
  • पेमेंट फेल हो गया। डैशबोर्ड पर “Payment Failed” दिखता है और डाउनलोड बंद रहता है। “Pay Now” पर फिर से क्लिक कीजिए।
  • OTP की मियाद खत्म हो गई। प्रमाणित कॉपी वाले लॉगिन पर OTP 5 मिनट चलता है, और 60 सेकंड बाद दोबारा भेजा जा सकता है।
  • दफ्तर ने गलत दस्तावेज अपलोड कर दिया। SOP के मुताबिक सुधार के अनुरोध सरकारी ईमेल से विभाग के मुख्यालय को जाते हैं, और अपलोड की जिम्मेदारी पटवारी की होती है।

जमाबंदी में ही कोई गलत प्रविष्टि हो, जैसे नाम की गलत वर्तनी या गलत हिस्सा, तो वह किसी भी पोर्टल पर ठीक नहीं होती। इसके लिए राजस्व अधिकारी का सुधार आदेश (फर्द बदर) चाहिए। उसके बाद सुधरा हुआ रिकॉर्ड ऑनलाइन दिखने लगता है।

शिकायत कहां करें

आपके रिकॉर्ड का दफ्तर तहसील है। पटवारी रजिस्टर रखता है, तहसीलदार और सर्किल राजस्व अधिकारी उन पर फैसला करते हैं, और उनके ऊपर SDM शिकायतें सुनते हैं। सबसे पहले आपका काम किससे पड़ेगा, यह पटवारी की भूमिका और वेतन वाला नोट बताता है।

  • अधिसूचित सेवा में देरी: सेवा सूची में लिखे पहले शिकायत अधिकारी से शिकायत कीजिए, फिर दूसरे से। सेवा का अधिकार अधिनियम, 2014 के तहत हरियाणा में अपील का रास्ता सरल हरियाणा गाइड में दिया गया है।
  • पोर्टल की दिक्कतें: 1800-180-2137 (jamabandi.nic.in का संपर्क पेज), या राजस्व हरियाणा हेल्प डेस्क 0172-2711693, सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9:30 से शाम 5:30 बजे तक, ईमेल [email protected]।
  • WhatsApp पर मदद: राजस्व हरियाणा पोर्टल पर भूमि रिकॉर्ड के सवालों के लिए BHU-MITRA चैटबॉट का लिंक है, जिसका नंबर 95933 00009 है।
  • विवाद: राजस्व अदालत के मामले “Revenue Court Status” लिंक से ट्रैक किए जा सकते हैं, और दीवानी मामले “Civil Court Status” से।

हरियाणा का ऑनलाइन रिकॉर्ड एक राष्ट्रीय कार्यक्रम का एक राज्य वाला रूप है। DILRMP क्या है और मालिकाना हक की गारंटी क्यों नहीं मिलती, यह भारत में भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन वाला नोट समझाता है। हर राज्य की ऐसी साइट राज्यवार भूमि रिकॉर्ड पोर्टल वाली तालिका में दी गई है। इन रिकॉर्ड को किसान ID से जोड़ने की खेत-स्तर की कोशिश AgriStack और भूमि रिकॉर्ड वाले नोट में बताई गई है।

जमाबंदी हरियाणा क्या नहीं कर सकता

ये पोर्टल रिकॉर्ड दिखाते हैं, उसकी कॉपी देते हैं और उसे ट्रैक करते हैं। मालिकाना हक ये तय नहीं करते।

  • मुफ्त नकल किसी भी साइट पर प्रमाणित कॉपी नहीं है।
  • पोर्टल नाम, हिस्से या रकबा ठीक नहीं करते; इसके लिए राजस्व अधिकारी का आदेश चाहिए।
  • ये झगड़े नहीं सुलझाते; जिस प्रविष्टि को चुनौती दी गई है, वह राजस्व अदालत में जाती है।
  • ये किसी सौदे को नहीं रोकते; आपत्ति तहसीलदार के जरिए होती है, और बेहतर है कि 10 दिन की खिड़की के भीतर हो।

समझदारी वाला क्रम छोटा है। जमीन पर कोई भी एडवांस देने से पहले मौजूदा साल की मुफ्त नकल निकालिए। विक्रेता ने खुद जो जमीन खरीदी थी, उसके इंतकाल की स्थिति जांचिए। कैडस्ट्रल नक्शा और स्टे ऑर्डर देखिए। और प्रमाणित कॉपी तभी खरीदिए, जब बैंक, रजिस्ट्रार या अदालत उसे मांगे।

सामान्य प्रश्न

जमाबंदी हरियाणा क्या है?

जमाबंदी हरियाणा, राज्य के राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग की ऑनलाइन भूमि रिकॉर्ड सेवा है। हरियाणा जमाबंदी की मुफ्त नकल, इंतकाल की जांच और डीड की खोज jamabandi.nic.in पर है, जबकि प्रमाणित कॉपी और आवेदन revenueharyana.gov.in पर हैं। दोनों साइटें राज्य के सभी जिलों को कवर करती हैं।

क्या jamabandi.nic.in की जमाबंदी नकल बैंक या अदालत में मान्य है?

नहीं। मुफ्त नकल सिर्फ जांच के लिए है, और पोर्टल कहता है कि इसे कानूनी या सरकारी कार्यवाही में प्रमाणित दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। बैंक, अदालत या रजिस्ट्रार के लिए राजस्व हरियाणा से डिजिटल रूप से प्रमाणित कॉपी लीजिए, या फर्द केंद्र से प्रमाणित कॉपी।

हरियाणा में प्रमाणित जमाबंदी कॉपी की फीस कितनी है?

जुलाई 2026 में शुरुआत की खबरों के मुताबिक जमाबंदी के पहले 10 पेज के 100 रुपये लगते हैं, और उसके बाद हर पेज के 5 रुपये। इंतकाल, रजिस्टर्ड डीड और फर्द बदर की कॉपी के एक जैसे 100 रुपये हैं; मौजूदा रकम पेमेंट स्क्रीन पर दिखती है। पटवारी के अनुरोध मंजूर करने के बाद ही आप ऑनलाइन पैसा भरते हैं।

हरियाणा में रजिस्ट्री के बाद इंतकाल की स्थिति कैसे देखें?

jamabandi.nic.in पर ‘Check Mutation Status’ खोलिए, जिला और तहसील चुनिए, और अपनी डीड से रजिस्ट्री नंबर और रजिस्ट्री की तारीख भरिए। राजस्व हरियाणा पोर्टल अपने ‘Latest Mutation Notification’ पेज पर हाल में तय हुए इंतकाल भी दिखाता है।

हरियाणा में इंतकाल में कितना समय लगता है?

बिना विवाद वाले इंतकाल की तस्दीक की अधिसूचित समय-सीमा 30 दिन है, और यह काम सर्किल राजस्व अधिकारी करता है। इंतकाल तय होने के बाद राजस्व पोर्टल तहसीलदार के जरिए आपत्ति के लिए 10 दिन देता है। उसके बाद ही बदलाव रिकॉर्ड में दर्ज होता है।

हरियाणा में इंतकाल की फीस कितनी है?

हरियाणा की 7 जनवरी 2013 की अधिसूचना के तहत हर इंतकाल के 200 रुपये लगते हैं, और साथ में 50 रुपये सर्विस चार्ज। भूदान की जमीन की प्रविष्टियों पर कोई फीस नहीं लगती। अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के परिवारों को मुफ्त दिए गए आवास वाले प्लॉटों पर भी नहीं।

क्या जमाबंदी हरियाणा पर जमीन का नक्शा देख सकते हैं?

हां। jamabandi.nic.in पर ‘View Cadastral Maps’ लिंक राज्य का नक्शा व्यूअर खोलता है, जो गांव के नक्शे पर हर खसरा दिखाता है। खेत ढूंढने के लिए अपनी नकल का खसरा नंबर उससे मिलाइए।

हरियाणा में खेवट और खसरा में क्या अंतर है?

खेवट किसी मालिक की होल्डिंग है, और एक खेवट में कई खेत और कई सह-मालिक हो सकते हैं। खसरा नंबर एक अकेले खेत की पहचान है। खसरा से खोजने पर वह खेवट मिल जाता है जिसमें वह खेत है। फिर जमाबंदी उस खेवट के सारे मालिक दिखाती है।

मेरी पुरानी जमाबंदी ऑनलाइन क्यों नहीं मिल रही?

हरियाणा में डिजिटल रिकॉर्ड 2002 से शुरू होता है। इससे पुराने सालों के लिए राजस्व हरियाणा पोर्टल पर ‘Record Room Jamabandi’ चुनिए, या तहसील के रिकॉर्ड रूम में आवेदन कीजिए। यह भी देख लीजिए कि आपने सही जमाबंदी साल चुना है, क्योंकि खेवट नंबर एक जमाबंदी से दूसरी जमाबंदी में बदल जाते हैं।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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