मज़दूर दिवस अथवा श्रम दिवस हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग का दिवस है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस (International Workers’ Day) या May Day भी कहा जाता है। 2026 में यह शुक्रवार, 1 मई को मनाया जाएगा। इसकी जड़ें 1 मई 1886 के अमेरिकी हेमार्केट (Haymarket) आंदोलन में हैं, जहाँ शिकागो के मज़दूरों ने आठ घंटे के कार्यदिवस की माँग को लेकर ऐतिहासिक हड़ताल की थी। भारत में पहली बार 1 मई 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में कॉमरेड सिंगारवेलर (Comrade Singaravelar) के नेतृत्व में Hindustan Labour Kisan Party द्वारा यह दिवस मनाया गया, जब लाल झंडा (Red Flag) पहली बार सार्वजनिक रूप से फहराया गया। UPSC के लिए यह दिवस इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (International Labour Organization, ILO), भारत के संविधान, चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) और गिग वर्कर्स (gig workers) से जुड़े नवीनतम विकास को एक साथ समेटने का सशक्त संदर्भ है।
परिचय (Introduction)
मज़दूर दिवस केवल एक प्रतीकात्मक छुट्टी नहीं है। यह उन्नीसवीं शताब्दी के औद्योगीकरण के दौरान हुए श्रमिक संघर्षों, बीसवीं शताब्दी की समाजवादी राजनीति और इक्कीसवीं शताब्दी के नये श्रम-संबंधों — जैसे प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारी (platform workers) और गिग अर्थव्यवस्था (gig economy) — का सम्मिलित दर्पण है।
भारत में यह दिवस “अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस” के साथ-साथ महाराष्ट्र दिवस (Maharashtra Day) और गुजरात दिवस (Gujarat Day) के रूप में भी मनाया जाता है, क्योंकि 1 मई 1960 को Bombay Reorganisation Act 1960 के तहत द्विभाषी बम्बई राज्य का भाषाई आधार पर विभाजन हुआ था। केन्द्रीय ट्रेड यूनियन (INTUC, AITUC, CITU, BMS, HMS) इस दिन रैलियाँ निकालती हैं, और श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय त्रिपक्षीय (tripartite) संवाद आयोजित करता है।
मुख्य तथ्य एक नज़र में (Quick Facts at a Glance)
- तिथि: हर वर्ष 1 मई — 2026 में शुक्रवार
- अन्य नाम: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस, May Day, श्रम दिवस, Labour Day
- उद्गम घटना: हेमार्केट प्रकरण (Haymarket Affair), शिकागो — 4 मई 1886
- मुख्य माँग: आठ घंटे का कार्यदिवस (Eight-hour workday)
- अंतर्राष्ट्रीय घोषणा: Second International, पेरिस सम्मेलन, 1889
- भारत में पहला आयोजन: मद्रास (Madras / Chennai), 1 मई 1923
- भारतीय अग्रदूत: कॉमरेड सिंगारवेलर (Comrade Malayapuram Singaravelar)
- संगठन: Hindustan Labour Kisan Party
- ILO स्थापना: 1919, Treaty of Versailles के तहत
- भारत और ILO: संस्थापक सदस्य (1919)
- भारत द्वारा ILO Convention 138 और 182 का अनुसमर्थन: 2017
- भारत की श्रम संहिताएँ (Labour Codes): 4 — Code on Wages 2019; IR Code, SS Code, OSH Code (तीनों 2020)
- e-Shram पंजीकरण: 30 करोड़ से अधिक (2026)
- PLFS बेरोज़गारी दर FY 2024-25: लगभग 3.2% (usual status)
- महिला LFPR (2023-24): लगभग 37%
- संवैधानिक आधार: Concurrent List; Article 14, 16, 19, 21, 23, 24, 38, 39, 41, 42, 43, 43A
- 80+ देशों में सार्वजनिक अवकाश
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background)
औद्योगीकरण के दौर में अमेरिकी मज़दूर 12–16 घंटे की पाली में काम करने को विवश थे। 1884 में Federation of Organized Trades and Labor Unions ने प्रस्ताव पारित किया कि 1 मई 1886 से क़ानूनी कार्यदिवस आठ घंटे का होगा, और यदि आवश्यक हुआ तो हड़ताल की जाएगी। उस दिन पूरे संयुक्त राज्य अमेरिका में 3 से 5 लाख मज़दूर हड़ताल पर गये। शिकागो इसका केंद्र बना। 4 मई 1886 को हेमार्केट चौक (Haymarket Square) में शान्तिपूर्ण रैली के दौरान बम विस्फोट हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी और नागरिक मारे गये। उसके बाद हुए मुकदमे में अगस्त स्पाइस (August Spies), अल्बर्ट पार्सन्स (Albert Parsons) सहित कई श्रमिक नेताओं को फाँसी दे दी गयी, जिससे यह घटना अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक आंदोलन का प्रतीक बन गयी। यूजीन डेब्स (Eugene Debs) जैसे अमेरिकी समाजवादी नेताओं ने इसी मुक़दमे से राजनीतिक प्रेरणा ली।
1889 में पेरिस में हुई Second International की बैठक में फ़्रांसीसी क्रांति की शताब्दी के अवसर पर 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित किया गया, ताकि हेमार्केट के शहीदों को श्रद्धांजलि दी जा सके। 1891 के ब्रसेल्स (Brussels) सम्मेलन में इसे वार्षिक आयोजन का स्वरूप मिला।
भारत में मज़दूर दिवस का सूत्रपात कॉमरेड सिंगारवेलर (Comrade Singaravelar / Malayapuram Singaravelu Chettiar) ने किया। 1 मई 1923 को मद्रास के त्रिप्लिकेन (Triplicane) समुद्र तट और मद्रास उच्च न्यायालय के सामने दो सभाएँ आयोजित की गयीं। उन्होंने Hindustan Labour Kisan Party के तत्वावधान में लाल झंडा फहराया — भारत में लाल झंडे का यह पहला सार्वजनिक प्रदर्शन माना जाता है — और प्रस्ताव पारित किया कि सरकार 1 मई को मज़दूरों के लिए राष्ट्रीय अवकाश घोषित करे। आगे चलकर All India Trade Union Congress (AITUC, 1920) — जिसकी स्थापना में NM जोशी और लाला लाजपत राय की भूमिका प्रमुख थी — और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इसे संस्थागत स्वरूप दिया।
ILO की भूमिका (Role of ILO)
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की स्थापना 1919 में Treaty of Versailles के तहत हुई। यह संयुक्त राष्ट्र की एकमात्र विशेष एजेंसी है जिसमें त्रिपक्षीय (tripartite) संरचना है — सरकार, नियोक्ता और श्रमिक तीनों के प्रतिनिधि। मुख्यालय: जिनेवा (Geneva), स्विट्ज़रलैंड। भारत 1919 से इसका संस्थापक सदस्य (founder member) है।
ILO के आठ मूल अभिसमय (core conventions) हैं — Convention 87 और 98 (संगठन की स्वतंत्रता), 29 और 105 (बेगार/forced labour का प्रतिषेध), 100 और 111 (समान पारिश्रमिक और भेदभाव-निषेध), तथा 138 और 182 (न्यूनतम आयु एवं बाल श्रम के सबसे ख़राब रूप)। भारत ने Convention 138 और 182 का अनुसमर्थन 2017 में किया, जिससे कुल अनुसमर्थनों की संख्या 47 हो गयी।
ILO का State of Social Justice 2025 report 2026 के विमर्श का आधार बना हुआ है, जिसमें असंगठित (unorganised), गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा (social security) के अंतर को पाटने पर ज़ोर है। 2026 का मज़दूर दिवस की औपचारिक थीम (theme) ILO द्वारा तिथि के निकट घोषित की जाती है।
संवैधानिक आधार (Constitutional Basis)
भारत में श्रम (labour) सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची (Concurrent List) का विषय है, यानी केंद्र और राज्य दोनों इस पर क़ानून बना सकते हैं।
- Article 19(1)(c): संगठन/यूनियन बनाने की स्वतंत्रता।
- Article 23: बेगार और मानव-तस्करी का निषेध।
- Article 24: 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को ख़तरनाक उद्योगों में रोज़गार पर प्रतिबंध।
- DPSP — Article 38, 39(d-e), 41, 42, 43, 43A: मानवीय कार्य-स्थितियाँ, समान कार्य के लिए समान वेतन, जीवन-योग्य मज़दूरी (living wage), मातृत्व लाभ, और प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी।
भारत की चार श्रम संहिताएँ (India’s Four Labour Codes)
केंद्र सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) में समेकित किया —
1. Code on Wages 2019 — Minimum Wages Act 1948, Payment of Wages Act 1936, Payment of Bonus Act 1965 तथा Equal Remuneration Act 1976 का समेकन। राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (national floor wage) की वैधानिक अवधारणा प्रस्तुत की गयी, जिससे नीचे कोई राज्य न्यूनतम वेतन तय नहीं कर सकता।
2. Industrial Relations (IR) Code 2020 — Industrial Disputes Act 1947, Trade Unions Act 1926, Industrial Employment (Standing Orders) Act 1946 का समेकन। छटनी (retrenchment) की अनुमति की सीमा 100 से बढ़ाकर 300 कर्मचारी की गयी; निश्चित-अवधि रोज़गार (fixed-term employment) को संस्थागत स्वरूप मिला; मान्यता-प्राप्त वार्ताकारी संघ (negotiating union) की औपचारिक प्रक्रिया।
3. Code on Social Security (SS Code) 2020 — EPF, ESI, Gratuity, Maternity Benefit, Employees’ Compensation आदि का समेकन। पहली बार गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों (gig and platform workers) को क़ानूनी मान्यता; aggregator से turnover का 1–2% (अधिकतम वार्षिक मज़दूरी का 5%) अंशदान।
4. Occupational Safety, Health and Working Conditions (OSH) Code 2020 — Factories Act 1948, Mines Act 1952, Contract Labour Act 1970, Inter-State Migrant Workmen Act 1979 सहित 13 क़ानूनों का समेकन; अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों (inter-state migrant workers) के लिए एकीकृत पंजीकरण।
2026 की स्थिति: लगभग सभी राज्यों ने श्रम संहिताओं के तहत नियम पूर्व-प्रकाशित (pre-publish) कर दिये हैं, परंतु पूर्ण अधिसूचना अभी असमान है। केरल, पश्चिम बंगाल और कुछ पूर्वोत्तर राज्य अभी अपने नियमों को अंतिम रूप दे रहे हैं।
श्रम शक्ति नीति 2025 (Shram Shakti Niti 2025)
मंत्रिमंडल द्वारा 2025 में अनुमोदित राष्ट्रीय श्रम नीति (Shram Shakti Niti 2025) चार श्रम संहिताओं के ऊपर एक रूपरेखा (roadmap) के रूप में काम करती है। इसके मुख्य लक्ष्य —
- 2030 तक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा (universal social security) का विस्तार।
- कम-से-कम 50% असंगठित श्रमिकों का औपचारीकरण (formalisation)।
- e-Shram का EPFO, ESIC और Ayushman Bharat डेटाबेस के साथ एकीकरण।
- त्रिपक्षीय National Labour Council का गठन — श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की निगरानी हेतु।
e-Shram पोर्टल और असंगठित श्रमिक
e-Shram पोर्टल अगस्त 2021 में श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय द्वारा शुरू किया गया था। यह विश्व का सबसे बड़ा असंगठित श्रमिकों का एकल रजिस्टर है। 2026 तक इस पर 30 करोड़ से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण हो चुका है। प्रत्येक पंजीकृत श्रमिक को 12-अंकीय Universal Account Number (UAN) मिलता है, जिसके माध्यम से उसे PMSBY (₹2 लाख दुर्घटना बीमा) सहित कई कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाता है।
विस्तृत संदर्भ के लिए देखें — भारत में प्रवासी, आंतरिक प्रवासन, अंतर-राज्यीय श्रमिक और e-Shram ढाँचा और श्रम बाज़ार, LFPR और महिला भागीदारी.
गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारी (Gig & Platform Workers in 2026)
Code on Social Security 2020 दुनिया के पहले क़ानूनों में से एक है जिसने गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों को क़ानूनी परिभाषा दी। 2026 में दो राज्य क़ानून केंद्रीय ढाँचे से आगे बढ़ चुके हैं —
- Rajasthan Platform Based Gig Workers (Registration and Welfare) Act 2023 — Welfare Board, aggregator transactions पर welfare fee, और राज्य-प्रबंधित कोष।
- Karnataka Platform-Based Gig Workers (Social Security and Welfare) Act 2024 — अनिवार्य अनुबंध, शिकायत निवारण, एल्गोरिथमिक पारदर्शिता (algorithmic transparency), तथा 1–5% लेनदेन-स्तरीय कल्याण शुल्क।
तेलंगाना और तमिलनाडु इसी तर्ज़ पर अपने विधेयक तैयार कर रहे हैं। ILO की State of Social Justice 2025 report ने भारत के इस ढाँचे को दक्षिण एशियाई template बताया है।
रोज़गार और श्रम-शक्ति 2026 (Employment & Labour Force 2026)
Periodic Labour Force Survey (PLFS) FY 2024-25 के अनुसार —
- अखिल-भारतीय बेरोज़गारी दर (usual status): लगभग 3.2% — एक दशक का न्यूनतम।
- कुल LFPR: लगभग 60.1%।
- महिला LFPR (2023-24): लगभग 37% — 2010 के दशक के अंत के 25% से कम स्तरों की तुलना में सुधार, परंतु ILO वैश्विक औसत से अब भी कम।
- ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-नियोजित (self-employed) और अवैतनिक पारिवारिक श्रमिकों का अनुपात ऊँचा।
MoSPI ने 2025 में मासिक PLFS की शुरुआत की है, और RBI का KLEMS database अब त्रैमासिक रोज़गार ट्रैकर देता है। संक्षेप में 2026 की तस्वीर — हेडलाइन बेरोज़गारी में गिरावट, पर अनौपचारिकता और लैंगिक अंतर बरक़रार। महिला भागीदारी पर विस्तृत नोट के लिए देखें — भारत में महिला श्रम-बल भागीदारी.
तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis)
| विशेषता | भारत (Labour Codes) | ILO मानक | जर्मनी | संयुक्त राज्य अमेरिका |
|---|---|---|---|---|
| साप्ताहिक घंटे | 48; दैनिक 8–9 | 40 (संदर्भ) | 40 | 40 + ओवरटाइम |
| न्यूनतम मज़दूरी | राष्ट्रीय floor + राज्य | अनिवार्य नहीं | 2015 से वैधानिक | संघीय + राज्य |
| यूनियन मान्यता | वार्ताकारी संघ | Convention 87, 98 | Works councils | NLRA |
| सामाजिक सुरक्षा | EPFO, ESIC, e-Shram | Convention 102 | Bismarck मॉडल | Social Security Act 1935 |
| गिग कर्मचारी | SS Code + राज्य क़ानून | Recommendation R205 | Scheinselbständig सुधार | राज्य-स्तरीय बिखराव |
| छटनी सीमा | 300 कर्मचारी | निर्धारित नहीं | Works council सहमति | At-will employment |
भारत यूरोपीय मॉडल (मज़बूत सामाजिक सुरक्षा) और अमेरिकी मॉडल (लचीली नियुक्ति) के बीच मध्य-मार्ग अपना रहा है, साथ ही विशाल असंगठित कार्यबल को कवर करने की चुनौती भी झेल रहा है।
चुनौतियाँ और आलोचना (Challenges and Criticism)
(1) श्रम संहिताओं का असमान क्रियान्वयन — कुछ राज्यों के नियम अब भी अधिसूचित नहीं हैं; नियोक्ता और श्रमिक दोनों ही “double regime” की शिकायत करते हैं।
(2) छटनी की 300 कर्मचारी सीमा — केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का तर्क है कि इससे नौकरी की सुरक्षा कमज़ोर होती है; उद्योग का पक्ष — इससे औपचारीकरण को प्रोत्साहन मिलेगा।
(3) गिग वर्कर्स के लिए अंशदान — aggregator turnover-आधारित अंशदान दर पर अब भी विवाद; केंद्रीय कोष (central fund) FY 2026-27 में सक्रिय करने का लक्ष्य।
(4) महिला भागीदारी — 26-सप्ताह मातृत्व अवकाश के बावजूद crèche सुविधा सार्वभौमिक नहीं; POSH Act का क्रियान्वयन असमान; SC का Aureliano Fernandes (2023) निर्णय अनुपालन का दबाव बढ़ा रहा है।
(5) हड़ताल का अधिकार — IR Code 2020 के तहत हड़ताल से पहले 14-दिन की अग्रिम सूचना अनिवार्य की गयी है, जिसे यूनियनें “अधिकार का सीमांकन” मानती हैं।
महाराष्ट्र दिवस और गुजरात दिवस
1 मई 1960 को Bombay Reorganisation Act 1960 के तहत द्विभाषी बम्बई राज्य का विभाजन महाराष्ट्र (मराठी) और गुजरात (गुजराती) में हुआ। दोनों राज्य 1 मई को राज्य स्थापना दिवस के रूप में मनाते हैं। महाराष्ट्र दिवस का मुख्य आयोजन शिवाजी पार्क, मुंबई में और गुजरात दिवस का गांधीनगर में होता है।
UPSC के लिए प्रासंगिकता (UPSC Relevance)
- Prelims (तथ्यात्मक हुक): हेमार्केट 1886, Second International 1889, मद्रास 1 मई 1923, सिंगारवेलर, AITUC 1920, ILO 1919, Convention 138 और 182 का 2017 में अनुसमर्थन, 4 श्रम संहिताएँ, e-Shram (2021), 30 करोड़ पंजीकरण, श्रम शक्ति नीति 2025, Karnataka 2024, Rajasthan 2023, Article 23-24, 39, 43A, Concurrent List, PLFS 3.2%, महिला LFPR 37%, 1 मई 1960 — महाराष्ट्र-गुजरात।
- Mains GS-I: आधुनिक भारत में ट्रेड यूनियन आंदोलन; 1923 का मद्रास आयोजन; AITUC; काँग्रेस का 1929 लाहौर अधिवेशन और श्रम अधिकारों का समर्थन।
- Mains GS-II: ILO के अभिसमय; भारत के संवैधानिक प्रावधान; श्रम संहिताओं का संघीय आयाम; Karnataka और Rajasthan के राज्य क़ानून बनाम केंद्रीय ढाँचा।
- Mains GS-III: रोज़गार-सृजन, गिग अर्थव्यवस्था, PLFS आँकड़े, सामाजिक सुरक्षा का विस्तार, e-Shram-EPFO-ESIC एकीकरण।
- Essay / Ethics: “श्रम की गरिमा” (dignity of labour), Article 39(d) “समान कार्य के लिए समान वेतन”।
मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Questions)
- “भारत की चार श्रम संहिताएँ कारोबारी सुगमता और श्रमिक संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास हैं।” विशाल असंगठित कार्यबल और श्रम शक्ति नीति 2025 के संदर्भ में आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। (250 शब्द)
- “अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस केवल प्रतीकात्मक नहीं है।” 2026 के सामाजिक न्याय एजेंडे के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिये, गिग वर्कर्स और महिला LFPR के विशेष संदर्भ में। (150 शब्द)
- भारत के श्रम क़ानूनों के संघीय (federal) आयाम पर विचार कीजिये। Karnataka Platform-Based Gig Workers Act 2024 और Rajasthan Act 2023 जैसे राज्य-स्तरीय नवाचारों ने केंद्रीय Code on Social Security 2020 को कैसे प्रभावित किया है? (250 शब्द)
निष्कर्ष (Conclusion)
मज़दूर दिवस 1886 के हेमार्केट से लेकर 1923 के मद्रास तट पर सिंगारवेलर के लाल झंडे तक, और 2026 में Bengaluru–Gurugram–Mumbai के aggregator दफ़्तरों के बाहर खड़े डिलीवरी राइडरों तक, श्रमिक संघर्ष की एक सतत कड़ी है। UPSC अभ्यर्थी के लिए यह दिवस इतिहास, संविधान, ILO ढाँचा, चार श्रम संहिताएँ, श्रम शक्ति नीति 2025, e-Shram पंजीकरण और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों के अधिकारों — इन सभी को एक ही फ़ाइल में रखने का अवसर देता है। चुनौती यह है कि श्रम संहिताओं का राज्य-स्तरीय क्रियान्वयन, aggregator अनुपालन, ट्रेड यूनियन संवाद और सामाजिक सुरक्षा का सार्वभौमिक विस्तार — ये सभी आज भी अधूरे हैं। संक्षेप में, 1 मई 2026 कारोबारी सुगमता और श्रम की गरिमा के बीच निरंतर पुनर्संतुलन की वार्षिक स्मृति है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
मज़दूर दिवस क्या है और कब मनाया जाता है?
मज़दूर दिवस — जिसे श्रम दिवस, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस अथवा May Day भी कहा जाता है — हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर वर्ग का दिवस है। यह 1886 के हेमार्केट (Haymarket) आंदोलन में शहीद हुए मज़दूरों की स्मृति में और आठ घंटे के कार्यदिवस की माँग के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। 80 से अधिक देशों में यह सार्वजनिक अवकाश है।
भारत में मज़दूर दिवस पहली बार कब मनाया गया?
भारत में मज़दूर दिवस पहली बार 1 मई 1923 को मद्रास (अब चेन्नई) में कॉमरेड सिंगारवेलर (Comrade Singaravelar) के नेतृत्व में Hindustan Labour Kisan Party द्वारा मनाया गया। त्रिप्लिकेन समुद्र तट और मद्रास उच्च न्यायालय के सामने दो सभाएँ हुईं, जहाँ लाल झंडा फहराया गया और सरकार से 1 मई को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की माँग की गयी।
1 मई को ही मज़दूर दिवस क्यों मनाया जाता है?
1 मई 1886 को संयुक्त राज्य अमेरिका में 3 से 5 लाख मज़दूरों ने आठ घंटे के कार्यदिवस की माँग को लेकर हड़ताल की। 4 मई को शिकागो के हेमार्केट चौक पर हुई रैली हिंसक हो गयी। बाद में पेरिस में 1889 के Second International सम्मेलन ने हेमार्केट के शहीदों की स्मृति में 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस घोषित किया।
2026 में मज़दूर दिवस कब है और इसकी थीम क्या है?
2026 में मज़दूर दिवस शुक्रवार, 1 मई 2026 को है। ILO द्वारा औपचारिक थीम तिथि के निकट घोषित की जाती है — अप्रैल 2026 तक 2026 की थीम औपचारिक रूप से जारी नहीं हुई है। ILO का व्यापक विमर्श State of Social Justice 2025 report पर आधारित है, जिसमें असंगठित, गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा अंतर पाटने पर ज़ोर है।
भारत की चार श्रम संहिताएँ कौन-कौन सी हैं?
भारत ने 29 केंद्रीय श्रम क़ानूनों को चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) में समेकित किया है — Code on Wages 2019, Industrial Relations Code 2020, Code on Social Security 2020 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020। इनमें राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन, गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों की क़ानूनी मान्यता, छटनी की 300-कर्मचारी सीमा और अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए एकीकृत पंजीकरण जैसे प्रावधान हैं।
श्रम शक्ति नीति 2025 क्या है?
Shram Shakti Niti 2025 भारत की राष्ट्रीय श्रम नीति है, जिसे 2025 में मंत्रिमंडल ने अनुमोदित किया। यह 2030 तक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, कम-से-कम 50% असंगठित श्रमिकों का औपचारीकरण, e-Shram का EPFO-ESIC-Ayushman Bharat के साथ एकीकरण और त्रिपक्षीय National Labour Council के गठन का लक्ष्य रखती है।
e-Shram पोर्टल पर कितने श्रमिक पंजीकृत हैं?
e-Shram पोर्टल अगस्त 2021 में श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय ने शुरू किया था। 2026 तक इस पर 30 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। यह विश्व का सबसे बड़ा असंगठित श्रमिकों का एकल रजिस्टर है और इसे EPFO, ESIC तथा Ayushman Bharat डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है।
गिग वर्कर्स के लिए भारत में क्या क़ानूनी सुरक्षा है?
केंद्रीय Code on Social Security 2020 ने गिग और प्लेटफ़ॉर्म कर्मचारियों को क़ानूनी परिभाषा दी और aggregator से turnover का 1–2% (अधिकतम वार्षिक मज़दूरी का 5%) अंशदान का प्रावधान किया। राज्य स्तर पर Rajasthan Platform Based Gig Workers Act 2023 और Karnataka Platform-Based Gig Workers Act 2024 ने Welfare Board, transaction-स्तरीय कल्याण शुल्क और एल्गोरिथमिक पारदर्शिता जैसे और सख़्त प्रावधान जोड़े हैं।
महाराष्ट्र और गुजरात 1 मई को राज्य दिवस क्यों मनाते हैं?
1 मई 1960 को Bombay Reorganisation Act 1960 के तहत द्विभाषी बम्बई राज्य का भाषाई आधार पर विभाजन हुआ — मराठी-भाषी महाराष्ट्र और गुजराती-भाषी गुजरात अलग राज्य बने। इसी कारण दोनों राज्य 1 मई को महाराष्ट्र दिवस और गुजरात दिवस के रूप में मनाते हैं। यह आयोजन सामान्यतः मज़दूर दिवस के सार्वजनिक अवकाश के साथ ही होता है।
PLFS के अनुसार 2026 में बेरोज़गारी की स्थिति क्या है?
Periodic Labour Force Survey (PLFS) FY 2024-25 के अनुसार अखिल-भारतीय बेरोज़गारी दर लगभग 3.2% (usual status) है — एक दशक का न्यूनतम। कुल LFPR लगभग 60.1% और महिला LFPR (2023-24) लगभग 37% है। MoSPI ने 2025 में मासिक PLFS की शुरुआत की है, जिससे रोज़गार आँकड़ों की उच्च-आवृत्ति निगरानी संभव हुई है।