Opens in a new tab
Join Anantam IAS Channel on Telegram

पश्चिमी विक्षोभ: यह क्या है, कैसे बनता है और भारत में सर्दी की बारिश कैसे लाता है

पश्चिमी विक्षोभ को समझिए: भूमध्य सागर से शुरुआत, जेट धारा की भूमिका, रबी फसलों और हिमालय की बर्फ के लिए अहमियत, ओले, शीत लहर और केदारनाथ 2013 की कड़ी।

Satellite view of a broad band of cloud from a western disturbance stretching across Afghanistan, Pakistan and northern India on 3 February 2013.

पश्चिमी विक्षोभ एक तूफानी मौसम तंत्र है, जो उपोष्ण पछुआ जेट धारा के साथ पूर्व की ओर बढ़ता है। यह उत्तर भारत को उसकी सर्दी की ज्यादातर बारिश और पश्चिमी हिमालय को उसकी ज्यादातर बर्फ देता है। NCERT इन तंत्रों की शुरुआत पूर्वी भूमध्य सागर से बताता है। वहाँ से ये पश्चिम एशिया, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान को पार करके उत्तर-पश्चिम भारत पहुँचते हैं। ये दिसंबर से मार्च के बीच सबसे ज्यादा आते हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी सालाना बारिश का लगभग 18% जनवरी से मार्च के बीच मिलता है, और इसका बड़ा हिस्सा इन्हीं तंत्रों से आता है।

इस नाम से दो दिक्कतें पैदा होती हैं। “विक्षोभ” शब्द से लगता है कि यह कोई मामूली हलचल है। लेकिन एक ताकतवर विक्षोभ हिमालय के दर्रे बंद कर सकता है, ओलों से गेहूँ बिछा सकता है और हफ्ते भर की शीत लहर शुरू कर सकता है। “पश्चिमी” शब्द से लगता है कि यह कोई चक्रवात है जो जमीन के स्तर पर बहता हुआ आता है। असल में यह तंत्र मुख्य रूप से ऊपरी क्षोभमंडल में रहता है। यह जेट धारा पर एक द्रोणी (trough) के रूप में सवार होता है, और सतह के पास इसका निम्न दाब कमजोर ही होता है। यह नोट पहले इसकी बनावट देखता है, और फिर उसके पीछे-पीछे उन खेतों, बर्फीले इलाकों और अस्पतालों तक जाता है जिन पर इसका असर पड़ता है।

पश्चिमी विक्षोभ क्या है

पश्चिमी विक्षोभ एक बाह्य-उष्णकटिबंधीय (extratropical) मौसम तंत्र है, यानी ऐसा तंत्र जो उष्णकटिबंध के बाहर पैदा होता है। इसे मध्य अक्षांशों की पछुआ हवाएँ दिशा देती हैं। किरन हंट के नेतृत्व में 2025 की एक समीक्षा, जिसके भारतीय सह-लेखकों में ए. पी. डिमरी भी हैं, इसे उपोष्ण पछुआ जेट धारा में धंसा हुआ एक सिनॉप्टिक-स्तर का तंत्र बताती है। सिनॉप्टिक-स्तर का मतलब है मौसम के नक्शे पर दिखने वाले उच्च और निम्न दाब जितना बड़ा, यानी सैकड़ों से लेकर कुछ हजार किलोमीटर चौड़ा। समीक्षा इसे ऊपरी स्तर की एक द्रोणी बताती है, जो अक्सर पश्चिमी या उत्तरी भारत के ऊपर सतह के पास के एक निम्न दाब से जुड़ी होती है। वायु राशियाँ और वाताग्र वाला नोट इसे एक हिस्से में वाताग्री तूफान के रूप में पेश करता है; नीचे का ब्योरा उससे आगे जाता है।

तथ्यविवरण
प्रकारबाह्य-उष्णकटिबंधीय, उपोष्ण पछुआ जेट धारा में धंसी ऊपरी स्तर की द्रोणी
NCERT के अनुसार उद्गमपूर्वी भूमध्य सागर, जहाँ से यह पश्चिम एशिया, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होकर आता है
अतिरिक्त नमीउत्तर में कैस्पियन सागर और दक्षिण में फारस की खाड़ी (NCERT)
मुख्य मौसमदिसंबर से मार्च
बारंबारताशुरुआती अवलोकन वाले अध्ययनों में सर्दियों में हर महीने छह से सात
उत्तर-पश्चिम भारत की बारिश में हिस्सासालाना बारिश का लगभग 18% जनवरी से मार्च में; जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में 31% (IMD)
मुख्य फायदेरबी फसलें, हिमालय की बर्फ की परत, गर्मियों में नदियों का बहाव
मुख्य खतरेभारी बर्फबारी, ओले, तंत्र के पीछे शीत लहर, कोहरा

इसके रिश्तेदार इसका बर्ताव समझाते हैं। समीक्षा बताती है कि पश्चिमी विक्षोभ की गतिकी बाह्य-उष्णकटिबंधीय चक्रवातों से मिलती है, यानी उन वाताग्री तूफानों से जो यूरोप में बारिश लाते हैं। फर्क यह है कि सतह पर ये आम तौर पर कमजोर होते हैं। उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात वाले नोट में शीतोष्ण चक्रवात वाली तुलना सही शुरुआत है, बस यह याद रखिए कि सतह का निम्न दाब अक्सर उथला होता है या होता ही नहीं।

पश्चिमी विक्षोभ कैसे काम करता है

इसका इंजन ऊपर है। सर्दियों में उपोष्ण पछुआ जेट धारा, यानी क्षोभमंडल के ऊपरी हिस्से के पास बहुत तेज हवा की एक संकरी पट्टी, दक्षिण की ओर खिसक जाती है और हिमालय के दक्षिणी किनारे के साथ बहती है। NCERT इसे पहाड़ों के दक्षिण में, उत्तर भारत के मैदान के ऊपर बताता है। इस जेट में धंसी द्रोणियाँ और निम्न दाब पूर्व की ओर वैसे ही बहा ले जाए जाते हैं जैसे तेज धारा में पत्ते। खुद जेट धारा और उसमें मोड़ डालने वाली तरंगें रॉस्बी तरंगें और जेट धाराएँ वाले नोट में समझाई गई हैं।

हंट, एंड्रयू टर्नर और लेन शैफ्री के 2018 के एक अध्ययन ने 37 वर्षों के रीएनालिसिस आँकड़ों में 3,000 से ज्यादा पश्चिमी विक्षोभों का पीछा किया और एक आम तंत्र की मिली-जुली तस्वीर बनाई:

  • ऊँचाई के साथ झुकाव। ऊपर जाने पर तंत्र उत्तर-पश्चिम की ओर झुकता है। यह एक बढ़ते तूफान का संकेत है, जो तापमान के फर्क से ऊर्जा खींच रहा है।
  • आगे की ओर उठती हवा। सबसे तेज ऊपर उठती हवा केंद्र से आगे होती है, ठीक उस जगह के ऊपर जहाँ सतह पर बारिश और बर्फ सबसे भारी होती है।
  • ठंडे के ऊपर गर्म, नम के ऊपर सूखा। परतों के ये फर्क उस चीज की निशानी हैं जिसे मौसम वैज्ञानिक तेज बैरोक्लिनिसिटी (baroclinicity) कहते हैं। इसका सीधा मतलब है कि तंत्र के आर-पार तापमान तेजी से बदलता है।
  • पहाड़ों के पास बादल। तंत्र के अपनी सबसे ज्यादा ताकत पर पहुँचने के लगभग एक दिन बाद बादल सबसे ज्यादा होते हैं, और हिमालय की तलहटी के पास ये काफी बढ़ जाते हैं।

कहानी का दूसरा आधा हिस्सा नमी है। सूखे ईरान और अफगानिस्तान को पार करता भूमध्य सागर का कोई तंत्र देने के लिए ज्यादा कुछ नहीं रखता। लेकिन NCERT बताता है कि यह उत्तर में कैस्पियन सागर और दक्षिण में फारस की खाड़ी से नमी उठाता है। जब यह हिमालय और हिंदुकुश से टकराता है, तो यह नम हवा ढलानों पर ऊपर चढ़ने को मजबूर होती है। वह ठंडी होती है और ऊँचाइयों पर बर्फ और मैदानों में बारिश गिराती है।

जहाँ आँकड़े आपस में मेल नहीं खाते

हर साल कितने पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, यह पूछिए तो आपको ऐसे जवाब मिलेंगे जो आपस में मेल नहीं खाते। 2025 की समीक्षा साल में लगभग 18 से लेकर साल में लगभग 86 तक के अनुमान इकट्ठा करती है। यह इस पर निर्भर करता है कि पीछा करने का तरीका कितना सख्त है। पुराने अवलोकन वाले काम में सर्दियों में हर महीने छह से सात विक्षोभ मिले थे। इनमें से कोई भी गलत नहीं है। ढीला तरीका हर कमजोर द्रोणी को गिनता है, और सख्त तरीका सिर्फ उन तंत्रों को गिनता है जो इतने ताकतवर हों कि मौसम ला सकें। अगर कोई प्रश्न संख्या पूछे, तो सुरक्षित जवाब एक दायरा है, मौसम के नाम के साथ।

2018 के अध्ययन ने एक और नतीजा जोड़ा जो पूर्वानुमान के लिए मायने रखता है। जिन सर्दियों में उत्तर भारत के ऊपर ज्यादा पश्चिमी विक्षोभ आए, उनमें जेट धारा दक्षिण की ओर खिसकी हुई थी। इसलिए सिद्धांत रूप में जेट की स्थिति आने वाली सर्दी के गीली या सूखी होने का संकेत दे सकती है।

पश्चिमी विक्षोभ भारत को क्या देते हैं

पहले फायदे, और वे बड़े हैं। NCERT बताता है कि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सर्दी की बारिश थोड़ी होती है, लेकिन रबी फसलों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। वह यह भी बताता है कि हिमालय की बर्फ गर्मियों भर नदियों का बहाव बनाए रखती है। IMD यही बात संख्याओं में कहता है: जनवरी से मार्च उत्तर-पश्चिम भारत की सालाना बारिश का लगभग 18% लाता है, और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में लगभग 31%। IMD इसे रबी फसलों और जल प्रबंधन, दोनों के लिए बेहद अहम बताता है।

जमीन पर पैटर्न तंत्र के रास्ते के हिसाब से चलता है:

  • पश्चिम से पूर्व: NCERT के मुताबिक मैदानों में सर्दी की वर्षा पश्चिम से पूर्व की ओर घटती है, इसलिए पंजाब को बिहार से ज्यादा बारिश मिलती है।
  • उत्तर से दक्षिण: पहाड़ों में यह उत्तर से दक्षिण की ओर भी घटती है।
  • मात्रा: दिल्ली की औसत सर्दी की बारिश लगभग 53 मिमी है; उत्तर-पश्चिम भारत में अकेले फरवरी का IMD का दीर्घ अवधि औसत 65.0 मिमी है।
  • बर्फ का हिस्सा: 2025 की समीक्षा के मुताबिक हिंदुकुश को अपनी सालाना वर्षा का 80% तक सर्दियों में मिलता है, और पश्चिमी हिमालय को आधे से थोड़ा कम।

गेहूँ, सरसों और चना वे फसलें हैं जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा परवाह होती है। दाना भरने के समय सही वक्त पर हुई सर्दी की बारिश एक सिंचाई बचा देती है और फसल को ठंडा रखती है, जैसा रबी फसलें वाला नोट समझाता है। कम पश्चिमी विक्षोभ वाली सूखी सर्दी इसका उल्टा करती है। वह अप्रैल और मई में सिंधु और गंगा की सहायक नदियों में पिघलकर जाने के लिए कम बर्फ भी छोड़ती है।

पश्चिमी विक्षोभ अपने पीछे कौन-से खतरे छोड़ता है

पश्चिमी विक्षोभ तीन चरणों में परेशानी खड़ी करता है: जब वह ऊपर होता है, जब वह दूसरे तंत्रों से टकराता है, और जब वह गुजर चुका होता है। हर चरण का अपना खतरा है।

गुजरते वक्त ओले और भारी बर्फबारी

जब कोई सक्रिय तंत्र गर्म और नम निचली हवा के ऊपर पहुँचता है, खासकर मार्च और अप्रैल में, तो नतीजा तड़ित झंझा और ओले होते हैं। IMD के वैज्ञानिकों का 2017 का एक अध्ययन, जो मौसम पत्रिका में छपा, उत्तर भारत में ओलों के अनुकूल परिस्थितियों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ, निचले स्तर पर हवा की असंततता और ऊपर जेट के केंद्र को गिनाता है। इस श्रृंखला का ओलावृष्टि वाला नोट इससे होने वाले फसल नुकसान को समझाता है। पहाड़ों में यही तंत्र भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा लाते हैं।

गुजर जाने के बाद शीत लहर और कोहरा

पश्चिमी विक्षोभ के बाद की शांति अक्सर सबसे ठंडा हिस्सा होती है। शीत लहर पर NDMA के 2021 के दिशानिर्देश बताते हैं कि तंत्र गुजरते ही सूखी, ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ उत्तर और मध्य भारत में घुसती हैं, और न्यूनतम तापमान गिर जाता है, कभी-कभी शीत लहर के स्तर तक। बारिश से छूटी नम जमीन, साफ आसमान और हल्की हवा घने कोहरे के लिए भी अनुकूल होते हैं। इसलिए जो विक्षोभ सोमवार को मनचाही बारिश लाया, वही गुरुवार तक शीत लहर और रुकी हुई उड़ानें ला सकता है। इस श्रृंखला का शीत लहर वाला नोट IMD के मानदंड समझाता है।

मानसून से टकराव

गर्मियों में पश्चिमी विक्षोभ कम ही आते हैं, लेकिन जब कोई मानसून से टकराता है तो नतीजा तबाही वाला हो सकता है। भारतीय विज्ञान अकादमी के संग्रह में रखे एक मॉडलिंग अध्ययन ने 16-17 जून 2013 की केदारनाथ आकस्मिक बाढ़ की जाँच की। उसमें पाया गया कि मानसून द्रोणी असामान्य रूप से जल्दी उत्तर भारत की ओर खिसकी और उत्तराखंड के ऊपर आते हुए एक पश्चिमी विक्षोभ से टकराई। ऊपरी स्तर के ठंडे तंत्र और गर्म, उमस भरी मानसूनी हवा के बीच एक तीखी सीमा बनी। पहाड़ों पर हवा के ऊपर उठने से एक बड़ा तूफान संगठित हुआ, जिसने बेहद भारी बारिश की। लेखक बताते हैं कि ऐसा टकराव आम तौर पर इसके बजाय मानसून में विराम लाता है। इसीलिए 2013 का मामला अलग दिखता है।

पश्चिमी विक्षोभ आज

पश्चिमी विक्षोभ IMD के रोज के पूर्वानुमानों का स्थायी हिस्सा हैं। इनमें हर तंत्र का नाम, उसकी स्थिति और उसके संभावित असर बताए जाते हैं। उदाहरण के लिए, 29 मार्च 2026 को IMD ने एक पश्चिमी विक्षोभ को उत्तरी ईरान और कैस्पियन सागर के ऊपर ऊपरी हवा के एक चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बताया, जिसकी द्रोणी 23° उत्तरी अक्षांश के उत्तर में 57° पूर्वी देशांतर के साथ थी। उसने उपोष्ण पछुआ जेट धारा को उत्तर भारत के ऊपर बताया, जिसके केंद्र में 12.6 किमी की ऊँचाई पर हवा लगभग 80 नॉट की थी। उसने उत्तर-पश्चिम भारत में कहीं-कहीं ओलावृष्टि का पूर्वानुमान दिया, और 2 अप्रैल 2026 से एक नए तंत्र की ओर इशारा किया। इस एक बुलेटिन में इस नोट का हर हिस्सा है: द्रोणी, जेट धारा, ओले और कतार में अगला तंत्र।

असली बहस यह है कि किसी घटना का कारण किसे माना जाए। अगस्त 2026 में जब नेपाल की त्रिशूली नदी में आकस्मिक बाढ़ आई, तो उत्तर भारत को पार कर चुके एक पश्चिमी विक्षोभ को एक वजह के रूप में चर्चा में लाया गया। लेकिन IMD ने सावधान किया कि इसे बारिश की बड़ी परिस्थिति में सिर्फ एक संभावित कारक माना जाए, साबित कारण नहीं, जैसा नेपाल आकस्मिक बाढ़ वाला व्याख्यात्मक लेख दर्ज करता है। यही सावधानी सही नमूना है। हिमालय की हर आपदा पश्चिमी विक्षोभ की कहानी नहीं होती। 2025 की समीक्षा खुद जोर देती है कि गर्माहट के साथ ये तंत्र कैसे बदलेंगे, इस पर अभी बहुत कुछ अनिश्चित है।

पूर्वानुमान बेहतर हो रहा है। IMD अब उत्तर-पश्चिम भारत में सर्दी की बारिश के लिए मासिक अनुमान जारी करता है, क्योंकि उसके अपने शब्दों में, जनवरी से मार्च की बारिश रबी फसलों और जल प्रबंधन के लिए बेहद अहम है। विभाग की भूमिका भारत मौसम विज्ञान विभाग वाले नोट में बताई गई है।

परीक्षा के लिए पश्चिमी विक्षोभ कैसे पढ़ें

पश्चिमी विक्षोभ GS पेपर I के जलवायु विज्ञान में आता है। वहाँ यह तीन अध्यायों को जोड़ता है, जिन्हें आम तौर पर अलग-अलग पढ़ा जाता है: वायुमंडलीय परिसंचरण और जेट धाराएँ, वायु राशियाँ और शीतोष्ण चक्रवात, और भारत की जलवायु और ऋतुएँ। यह कृषि और आपदा प्रबंधन के जरिए GS पेपर III तक भी पहुँचता है। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 प्रश्नों में से 82 भूगोल के तहत दर्ज हैं, और उत्तर-पश्चिम भारत की सर्दी की बारिश उस भंडार में बार-बार आने वाला विषय है।

मुख्य परीक्षा इसे वायु राशि और जलवायु के बड़े प्रश्नों के जरिए परखती है। मुख्य परीक्षा 2016 के GS पेपर I में पूछा गया था: “वायु राशि की अवधारणा की चर्चा कीजिए और बड़े पैमाने के जलवायु परिवर्तनों में इसकी भूमिका समझाइए।” पश्चिमी विक्षोभ इस बात का सबसे साफ भारतीय उदाहरण है कि वायु राशियों की सीमा मौसम कैसे पैदा करती है। रबी खेती या हिमालय की जल सुरक्षा पर किसी प्रश्न में भी इस पर एक अनुच्छेद फायदा देता है।

इन्हें तब तक दोहराइए जब तक ये जुबान पर न चढ़ जाएँ:

  • बाह्य-उष्णकटिबंधीय: उष्णकटिबंध के बाहर पैदा होता है; न उष्णकटिबंधीय चक्रवात है और न मानसून अवदाब।
  • उपोष्ण पछुआ जेट धारा: दिशा देने वाली धारा, जो सर्दियों में हिमालय के दक्षिण में रहती है।
  • पूर्वी भूमध्य सागर: NCERT का बताया उद्गम, जिसमें कैस्पियन सागर और फारस की खाड़ी से नमी जुड़ती है।
  • दिसंबर से मार्च: मुख्य मौसम; शुरुआती अवलोकन वाले अध्ययनों में सर्दियों में हर महीने छह से सात।
  • 18% और 31%: जनवरी से मार्च की बारिश का सालाना बारिश में हिस्सा, उत्तर-पश्चिम भारत में और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में।
  • रबी और बर्फ की परत: दो बड़े फायदे; गेहूँ और सरसों के लिए बारिश, गर्मियों में नदियों के बहाव के लिए बर्फ।
  • गुजरने के बाद: ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ, शीत लहर और कोहरा।

तीन भ्रम नंबर कटवाते हैं। पश्चिमी विक्षोभ सतह का चक्रवात नहीं है; यह ऊपरी स्तर की द्रोणी है, जिसका सतह वाला निम्न दाब कमजोर होता है या होता ही नहीं। यह बंगाल की खाड़ी या अरब सागर का तंत्र नहीं है; यह जेट धारा के साथ पश्चिम से आता है। और यह ऊपर रहते हुए शीत लहर नहीं लाता; ठंड इसके गुजर जाने के बाद आती है, जब आसमान साफ होता है।

बिंदुपश्चिमी विक्षोभउष्णकटिबंधीय चक्रवातमानसून अवदाब
जन्मस्थानमध्य अक्षांश, जिसका उद्गम पूर्वी भूमध्य सागर तक जाता हैगर्म उष्णकटिबंधीय समुद्रबंगाल की खाड़ी का शीर्ष
दिशा देने वाली धाराउपोष्ण पछुआ जेट धाराव्यापारिक पवनें और ऊपरी स्तर का प्रवाहमानसूनी प्रवाह
भारत के ऊपर मौसममुख्य रूप से दिसंबर से मार्चमानसून से पहले और मानसून के बाद के चरमजून से सितंबर
ऊर्जा का स्रोतपछुआ हवाओं में तापमान का फर्कगर्म समुद्र के ऊपर गुप्त ऊष्मामानसून द्रोणी में गुप्त ऊष्मा
आम मौसमसर्दी की बारिश और बर्फ, ओले, फिर शीत लहरविनाशकारी हवा, तूफानी लहर, भारी बारिशबड़े इलाके में भारी बारिश

पश्चिमी विक्षोभ वह विषय है जिससे भारतीय जलवायु विज्ञान की पूरी बात समझ में आ जाती है। एक बार आप जेट धारा को भूमध्य सागर की द्रोणियों को हिमालय तक ले जाते देख लें, तो पंजाब की सर्दी की बारिश, मार्च के ओले, जनवरी की शीत लहर और 2013 की केदारनाथ बाढ़ तक एक जुड़ी हुई कड़ी बन जाते हैं। जो उत्तर यह कड़ी बनाता है, एक संख्या और एक तारीख के साथ, वह उन ढेरों उत्तरों से अलग दिखेगा जो “यह सर्दी की बारिश लाता है” पर रुक जाते हैं।

सामान्य प्रश्न

आसान शब्दों में पश्चिमी विक्षोभ क्या है?

पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों का एक तूफानी तंत्र है, जो उपोष्ण पछुआ जेट धारा के साथ पूर्व की ओर बढ़ता है और पश्चिम से उत्तर-पश्चिम भारत पहुँचता है। यह ज्यादातर दिसंबर से मार्च के बीच मैदानों में बारिश और हिमालय पर बर्फ लाता है। यह एक बाह्य-उष्णकटिबंधीय तंत्र है, यानी बंगाल की खाड़ी और अरब सागर पर बनने वाले चक्रवातों से अलग।

पश्चिमी विक्षोभ कहाँ से शुरू होते हैं?

NCERT इनकी शुरुआत पूर्वी भूमध्य सागर से बताता है। वहाँ से ये पश्चिम एशिया, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होकर उत्तर-पश्चिम भारत पहुँचते हैं। रास्ते में ये उत्तर में कैस्पियन सागर और दक्षिण में फारस की खाड़ी से नमी उठाते हैं। शोधकर्ता इन्हें उपोष्ण पछुआ जेट धारा में धंसी द्रोणियाँ बताते हैं।

पश्चिमी विक्षोभ भारत के लिए क्यों जरूरी हैं?

ये उत्तर भारत की सर्दी की बारिश और पश्चिमी हिमालय की बर्फ का बड़ा हिस्सा देते हैं। IMD के मुताबिक उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी सालाना बारिश का लगभग 18% जनवरी से मार्च के बीच मिलता है, और जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लगभग 31%। यह बारिश गेहूँ और सरसों जैसी रबी फसलों की मदद करती है, और बर्फ गर्मियों भर नदियों का बहाव बनाए रखती है।

जेट धारा पश्चिमी विक्षोभ पर कैसे असर डालती है?

उपोष्ण पछुआ जेट धारा पश्चिमी विक्षोभों को पूर्व की ओर ले जाती है। सर्दियों में जेट दक्षिण की ओर खिसक जाती है और हिमालय के दक्षिणी किनारे के साथ बहती है, जिससे ये तंत्र उत्तर भारत में आते हैं। शोध बताते हैं कि जिन सर्दियों में उत्तर भारत के ऊपर ज्यादा पश्चिमी विक्षोभ आते हैं, उनमें जेट धारा और दक्षिण की ओर खिसकी होती है।

क्या पश्चिमी विक्षोभ शीत लहर लाते हैं?

परोक्ष रूप से। जब पश्चिमी विक्षोभ ऊपर होता है, तो बादल रातों को नरम रखते हैं। उसके गुजर जाने के बाद सूखी, ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ और साफ आसमान आते हैं। NDMA बताता है कि तब न्यूनतम तापमान गिर जाता है, कभी-कभी शीत लहर के स्तर तक, और अक्सर घने कोहरे के साथ।

क्या गर्मियों में पश्चिमी विक्षोभ आते हैं?

गर्मियों में ये कम आते हैं, लेकिन बिल्कुल गायब नहीं होते। जब कोई विक्षोभ मानसून द्रोणी से टकराता है, तो हिमालय पर बेहद भारी बारिश हो सकती है। जून 2013 की केदारनाथ आपदा के एक अध्ययन में पाया गया कि मानसून द्रोणी के जल्दी पहुँचने और एक पश्चिमी विक्षोभ से उसके टकराव ने वह बेहद भारी बारिश पैदा की।

हर साल कितने पश्चिमी विक्षोभ भारत को प्रभावित करते हैं?

अनुमान इस्तेमाल किए गए तरीके के साथ बदलते हैं। शुरुआती अवलोकन वाले अध्ययनों ने सर्दियों में हर महीने छह से सात गिने। आधुनिक ट्रैकिंग अध्ययन साल में लगभग 18 से लेकर लगभग 86 तक की संख्या देते हैं, यह इस पर निर्भर करता है कि किसी तंत्र की परिभाषा कितनी सख्त है। सबसे सुरक्षित जवाब यह है कि सर्दियों के हर महीने में कई विक्षोभ गुजरते हैं, और गर्मियों में कम।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. पश्चिमी विक्षोभों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उपोष्ण पछुआ जेट धारा इन्हें भारत की ओर ले आती है। 2. ये बंगाल की खाड़ी पर बनते हैं और पश्चिम की ओर बढ़ते हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a) ये जेट धारा के साथ पश्चिम से आते हैं; बंगाल की खाड़ी के तंत्र उष्णकटिबंधीय होते हैं।

2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तर-पश्चिम भारत को अपनी सालाना बारिश का लगभग 18% जनवरी से मार्च के बीच मिलता है। 2. उत्तरी मैदानों में सर्दी की वर्षा पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है। 3. पश्चिमी विक्षोभों से हुई बर्फबारी हिमालयी नदियों में गर्मियों का बहाव बनाए रखने में मदद करती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) मैदानों में सर्दी की वर्षा पश्चिम से पूर्व की ओर घटती है।

3. पश्चिमी विक्षोभों का सबसे अच्छा वर्णन क्या है?

  • (a) अरब सागर के उष्णकटिबंधीय चक्रवात
  • (b) उपोष्ण पछुआ जेट धारा में धंसे बाह्य-उष्णकटिबंधीय तंत्र
  • (c) मानसून से पहले के मौसम के स्थानीय संवहनी तूफान
  • (d) मानसून द्रोणी में बने अवदाब

उत्तर: (b) ये मध्य अक्षांशों के तंत्र हैं, जिन्हें जेट धारा पूर्व की ओर ले जाती है।

4. NCERT के अनुसार, भारत आते हुए पश्चिमी विक्षोभ निम्नलिखित में से किनसे अतिरिक्त नमी उठाते हैं?

  • (a) लाल सागर और अरब सागर
  • (b) कैस्पियन सागर और फारस की खाड़ी
  • (c) काला सागर और बंगाल की खाड़ी
  • (d) अराल सागर और हिंद महासागर

उत्तर: (b) NCERT उत्तर में कैस्पियन सागर और दक्षिण में फारस की खाड़ी का नाम लेता है।

5. सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ के गुजर जाने के बाद उत्तर भारत में आम तौर पर निम्नलिखित में से कौन-सी मौसमी परिस्थिति आती है?

  • (a) गर्म, सूखी लू
  • (b) सूखी, ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ, जिनसे न्यूनतम तापमान गिरता है
  • (c) उत्तर-पूर्वी मानसून की शुरुआत
  • (d) उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का बनना

उत्तर: (b) तंत्र के पीछे आने वाली ठंडी उत्तर-पश्चिमी हवाएँ शीत लहर और कोहरा ला सकती हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. पश्चिमी विक्षोभ क्या हैं? उन्हें उत्तर भारत तक लाने में उपोष्ण पछुआ जेट धारा की भूमिका समझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)
  2. पश्चिमी विक्षोभ रबी खेती और हिमालय की जल सुरक्षा के लिए वरदान हैं, लेकिन खतरों का स्रोत भी हैं। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. 2013 की केदारनाथ आपदा के संदर्भ में समझाइए कि पश्चिमी विक्षोभ और मानसून द्रोणी के बीच का टकराव हिमालय में बेहद भारी बारिश कैसे पैदा कर सकता है। (15 अंक, 250 शब्द)
  4. उत्तर भारत के मैदानों में पश्चिम से पूर्व की ओर सर्दी की वर्षा घटने के कारण बताइए। (10 अंक, 150 शब्द)
  5. पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में शीत लहर, कोहरे और ओलावृष्टि को कैसे प्रभावित करते हैं? (15 अंक, 250 शब्द)

Share this

PDF

Gaurav Tripathi Sir

Written by

Gaurav Tripathi Sir

Faculty — Geography & Environment · Anantam IAS

Gaurav Tripathi handles Geography and Environment at Anantam IAS. His classroom focus is map-based learning, conceptual clarity across physical and human geography, and linking static geography to the year's environment and ecology current affairs.

Specialises in · Physical, human and Indian geography; environment and ecology Experience · 10+ years Visit website ↗

UPSC की तैयारी हिंदी माध्यम में — एक निशुल्क डेमो क्लास

न कोई सेल्स कॉल, न कोई ब्रोशर। सोमवार सुबह की असली GS क्लास देखिए — हमारे अनुभवी शिक्षकों के साथ।