अपठित पद्यांश कविता का वह अंश है जो आपकी किताब से नहीं लिया गया और जिसे आप परीक्षा में पहली बार पढ़ते हैं। उसके नीचे चार-पाँच प्रश्न होते हैं: कविता का केंद्रीय भाव, उचित शीर्षक, किसी पंक्ति का भावार्थ, कुछ कठिन शब्दों के अर्थ और कभी-कभी अलंकार या रस की पहचान। Apathit padyansh का पूरा खेल यही है कि आप पंक्तियों में छिपी बात को कितनी जल्दी पकड़ते हैं और कितने साफ शब्दों में लिखते हैं।
ज्यादातर विद्यार्थी दो गलत बातें मानकर चलते हैं। पहली, कि कविता का उत्तर लिखने के लिए कवि और कविता पहले से पता होने चाहिए। ऐसा नहीं है: उत्तर का आधार सिर्फ सामने दी गई पंक्तियाँ हैं। दूसरी, कि भावार्थ का मतलब पंक्तियों को थोड़ा बदलकर दोहरा देना है। यह भी गलत है, और यहीं सबसे ज्यादा नंबर कटते हैं। यह नोट पढ़ने का तरीका सिखाता है और फिर पाँच पुरानी, कॉपीराइट से मुक्त कविताओं पर उत्तर सहित अभ्यास कराता है।
अपठित पद्यांश एक नजर में
पूरे अध्याय का नक्शा पहले देख लीजिए।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अर्थ | पाठ्यक्रम के बाहर का, पहली बार पढ़ा जाने वाला कविता का अंश |
| दूसरा नाम | अपठित काव्यांश |
| उत्तर का आधार | सिर्फ दी गई पंक्तियाँ, बाहरी जानकारी नहीं |
| आम प्रश्न | केंद्रीय भाव, शीर्षक, भावार्थ, शब्दार्थ, पर्यायवाची या विलोम, अलंकार, संदेश |
| पढ़ने का क्रम | पहले पूरी कविता, फिर प्रश्न, फिर दोबारा कविता |
| शीर्षक कब बनाएँ | सबसे आखिर में, जब पूरा भाव पकड़ में आ जाए |
| सबसे बड़ी चूक | भावार्थ में पंक्तियाँ ज्यों की त्यों उतार देना |
| गद्यांश से फर्क | कविता में बात बिंब, संकेत और अलंकार में कही जाती है |
अपठित पद्यांश क्या है और गद्यांश से कैसे अलग है
सीधी बात: अपठित का मतलब है जो पहले न पढ़ा गया हो, और पद्यांश का मतलब है पद्य यानी कविता का एक अंश। दोनों जोड़ दीजिए तो अर्थ बनता है, कविता का ऐसा टुकड़ा जो आपके पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है। इसलिए परीक्षक आपकी याददाश्त नहीं, आपकी समझ जाँचता है।
अपठित गद्यांश और पद्यांश की तकनीक लगभग एक है: पढ़िए, प्रश्न देखिए, उत्तर वाली जगह पहचानिए और अपनी भाषा में लिखिए। यह तरीका बोध प्रश्न और अपठित गद्यांश वाले नोट में कदम-दर-कदम समझाया गया है। फर्क कहने के ढंग में है। गद्य में लेखक बात सीधे कहता है, जबकि कविता में वही बात एक चित्र, एक तुलना या एक इशारे में आती है।
उदाहरण के लिए, निराला की स्त्री ‘पत्थर तोड़ती’ है और सामने ‘अट्टालिका’ यानी ऊँचा महल खड़ा है। कवि कहीं नहीं लिखता कि अमीर और गरीब के बीच खाई है, पर दोनों चित्र साथ रखकर यही कहता है। अपठित पद्यांश में आपको यही अनकहा हिस्सा पढ़ना होता है।
पद्यांश पर कौन-कौन से प्रश्न आते हैं
प्रश्न देखने में अलग-अलग लगते हैं, पर ज्यादातर सात खानों में बँट जाते हैं। हर खाने की पहचान और उत्तर लिखने का तरीका अलग है।
| प्रश्न का प्रकार | प्रश्न क्या माँगता है | उत्तर कैसे लिखें |
|---|---|---|
| केंद्रीय भाव | पूरी कविता की मूल बात | दो-तीन वाक्य, कविता के शब्द कम से कम |
| शीर्षक | कविता का उपयुक्त नाम | दो से चार शब्द, केंद्रीय भाव से निकला हुआ |
| भावार्थ या आशय | किसी पंक्ति का छिपा अर्थ | पंक्ति का अर्थ खोलिए, फिर उसका इशारा बताइए |
| शब्दार्थ | कठिन शब्द का अर्थ | संदर्भ वाला अर्थ, शब्दकोश की पूरी सूची नहीं |
| पर्यायवाची या विलोम | समान या उल्टा अर्थ वाला शब्द | एक या दो सही शब्द |
| अलंकार या रस | काव्य-सौंदर्य की पहचान | नाम और एक पंक्ति में कारण |
| संदेश या सीख | कवि पाठक से क्या कहना चाहता है | आज के जीवन से जुड़ा एक साफ वाक्य |
शब्दार्थ और पर्याय वाले प्रश्नों के लिए पर्यायवाची शब्द और विलोम शब्द की सूचियाँ साथ में दोहराते चलिए। कविता में कई शब्द अपने आम अर्थ में नहीं आते; निराला की कविता में ‘गुरु हथौड़ा’ का अर्थ भारी हथौड़ा है, शिक्षक से इसका कोई संबंध नहीं। ऐसे शब्दों के लिए अनेकार्थी शब्द वाला अध्याय काम आता है।
अपठित पद्यांश हल करने के पाँच चरण
कविता को गद्यांश की तरह एक बार में निचोड़ने की कोशिश मत कीजिए। ये पाँच चरण क्रम से अपनाइए:
- पहली बार पूरी कविता लय के साथ पढ़िए, मन में बोलते हुए, और सिर्फ इतना पकड़िए कि कविता किस बारे में है और उसका स्वर कैसा है: उदास, उत्साह भरा, व्यंग्य वाला या प्रेरणा देने वाला।
- अब सारे प्रश्न पढ़िए, ताकि दूसरी बार पढ़ते समय आँखें उत्तर वाली पंक्तियों पर रुकें।
- दूसरी बार धीरे पढ़िए और हर प्रश्न से जुड़ी पंक्ति पर हल्का निशान लगाइए। कठिन शब्द का अर्थ आसपास के शब्दों से अंदाजा लगाइए।
- सीधे प्रश्न पहले हल कीजिए: शब्दार्थ, पर्याय, विलोम और अलंकार। फिर भावार्थ और केंद्रीय भाव लिखिए।
- शीर्षक सबसे आखिर में दीजिए, क्योंकि पूरा भाव पकड़ने के बाद ही सही नाम सूझता है।
एक नियम पूरे अध्याय पर लागू है: जो बात पंक्तियों में नहीं है, वह उत्तर में भी नहीं जानी चाहिए। आपको पता हो कि कविता किस संग्रह से है या कवि का जीवन कैसा था, तो भी वह जानकारी उत्तर में नंबर नहीं दिलाती।
केंद्रीय भाव, शीर्षक और भावार्थ कैसे लिखें
इन तीन प्रश्नों में सबसे ज्यादा अंक होते हैं और सबसे ज्यादा कटते भी यहीं हैं। तीनों का तरीका अलग है, इसलिए एक-एक करके देखिए।
केंद्रीय भाव
केंद्रीय भाव पूरी कविता का निचोड़ है, किसी एक पंक्ति का नहीं। खुद से पूछिए: अगर कवि को यह कविता एक वाक्य में कहनी हो, तो वह क्या कहेगा? वही वाक्य आपका पहला वाक्य बनेगा। फिर एक-दो वाक्य में बताइए कि कवि यह बात किस चित्र या उदाहरण से कहता है। कविता के शब्द कम से कम उठाइए।
शीर्षक
अच्छा शीर्षक छोटा होता है, केंद्रीय भाव से निकलता है और पूरी कविता को ढकता है। ‘बचपन’ अधूरा है, ‘बचपन की मीठी याद’ पूरा। कविता की कोई पंक्ति सीधे शीर्षक बना देना तभी ठीक है जब वही पंक्ति बार-बार लौटती हो, जैसे गुप्त जी की ‘नर हो, न निराश करो मन को’।
भावार्थ
भावार्थ के दो हिस्से होते हैं। पहले पंक्ति का सीधा अर्थ, फिर उसका इशारा। ‘कोई न छायादार पेड़’ का सीधा अर्थ है कि वहाँ छाया देने वाला पेड़ नहीं है। इशारा यह है कि मजदूर स्त्री को धूप से बचाने वाला कोई सहारा नहीं है। सिर्फ पहला हिस्सा लिखा तो आधे नंबर; दोनों लिखे तो पूरे।
उत्तर सहित अपठित पद्यांश
नीचे पाँच पद्यांश हैं। सभी ऐसे कवियों के हैं जिनका निधन 1965 से पहले हुआ: मैथिलीशरण गुप्त (1964), सुभद्राकुमारी चौहान (1948), अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ (1947), जयशंकर प्रसाद (1937) और निराला (1961)। पंक्तियाँ एक लाइन में ‘ / ‘ से अलग की गई हैं। हर पद्यांश को पहले खुद हल कीजिए, फिर उत्तर मिलाइए।
पद्यांश 1: मैथिलीशरण गुप्त, ‘नर हो, न निराश करो मन को’
नर हो, न निराश करो मन को / कुछ काम करो, कुछ काम करो / जग में रह कर कुछ नाम करो / यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो / समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो / कुछ तो उपयुक्त करो तन को / नर हो, न निराश करो मन को।
- पद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है? उत्तर: मनुष्य को निराश होकर बैठना नहीं चाहिए। उसे कर्म करना चाहिए और अपने जीवन को किसी सार्थक काम में लगाना चाहिए, ताकि जन्म बेकार न जाए।
- पद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। उत्तर: ‘कर्म ही जीवन है’ या ‘निराशा छोड़ो, कर्म करो’।
- ‘यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो’ का भाव स्पष्ट कीजिए। उत्तर: कवि पूछता है कि यह जीवन किस प्रयोजन के लिए मिला है। इशारा यह है कि हर व्यक्ति अपने जन्म का उद्देश्य पहचाने और उसे बेकार न जाने दे।
- ‘कुछ काम करो, कुछ काम करो’ में कौन-सा अलंकार है? उत्तर: पुनरुक्ति प्रकाश, क्योंकि एक ही शब्द-समूह जोर देने के लिए दोहराया गया है। ‘कुछ काम करो’ में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति से अनुप्रास भी है।
- ‘व्यर्थ’ का विलोम और ‘जग’ का पर्यायवाची लिखिए। उत्तर: व्यर्थ का विलोम ‘सार्थक’; जग के पर्याय ‘संसार’ और ‘दुनिया’।
पद्यांश 2: सुभद्राकुमारी चौहान, ‘मेरा नया बचपन’
बार-बार आती है मुझको मधुर याद बचपन तेरी। / गया ले गया तू जीवन की सबसे मस्त खुशी मेरी॥ / चिंता-रहित खेलना-खाना वह फिरना निर्भय स्वच्छंद। / कैसे भूला जा सकता है बचपन का अतुलित आनंद? / ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था छुआछूत किसने जानी? / बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी॥
- कवयित्री को बचपन क्यों याद आता है? उत्तर: क्योंकि बचपन में जीवन चिंता से खाली था। खेलना, खाना और बिना डर के घूमना, यही उसकी सबसे बड़ी खुशी थी, जो बड़े होने पर छिन गई।
- ‘बनी हुई थी वहाँ झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी’ का भाव लिखिए। उत्तर: बचपन में झोंपड़ी भी महल लगती थी और फटे कपड़ों में भी बच्चा खुद को रानी समझता था। इशारा यह है कि बचपन की खुशी अमीरी-गरीबी पर नहीं टिकी होती।
- ‘बचपन तेरी’ और ‘गया ले गया तू’ में कवयित्री किससे बात कर रही है, और इससे कौन-सा अलंकार बनता है? उत्तर: वह बचपन से ऐसे बात कर रही है जैसे वह कोई व्यक्ति हो जो उसकी खुशी ले गया। निर्जीव या भाव को व्यक्ति की तरह दिखाने से यहाँ मानवीकरण है।
- ‘बार-बार’ में कौन-सा अलंकार है? उत्तर: पुनरुक्ति प्रकाश।
- ‘निर्भय’ का विलोम और ‘स्वच्छंद’ का अर्थ लिखिए। उत्तर: निर्भय का विलोम ‘भयभीत’; स्वच्छंद का अर्थ है अपनी मर्जी से, बिना बंधन के।
- शीर्षक दीजिए। उत्तर: ‘बचपन की मीठी याद’।
पद्यांश 3: अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, ‘एक बूँद’
कविता की शुरुआत में बादल से निकली एक बूँद डर रही है कि अब उसका क्या होगा। उसके बाद की पंक्तियाँ ये हैं:
बह गयी उस काल एक ऐसी हवा / वह समुन्दर ओर आई अनमनी / एक सुन्दर सीप का मुँह था खुला / वह उसी में जा पड़ी मोती बनी। / लोग यों ही हैं झिझकते, सोचते / जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर / किन्तु घर का छोड़ना अक्सर उन्हें / बूँद लौं कुछ और ही देता है कर।
- बूँद का क्या हुआ? उत्तर: हवा उसे उदास मन से समुद्र की ओर ले आई। वहाँ एक खुली सीप में गिरकर वह मोती बन गई।
- कवि ने बूँद के माध्यम से क्या संदेश दिया है? उत्तर: लोग घर छोड़ने से डरते और हिचकते हैं, पर घर से बाहर निकलना अक्सर उन्हें बूँद की तरह कुछ बेहतर और कीमती बना देता है। अनजाने रास्ते से डरना स्वाभाविक है, पर वही रास्ता नई पहचान दे सकता है।
- ‘अनमनी’ और ‘झिझकते’ का अर्थ लिखिए। उत्तर: अनमनी यानी उदास, बेमन; झिझकते यानी हिचकिचाते, संकोच करते।
- ‘बूँद लौं’ में किसकी तुलना किससे की गई है? उत्तर: घर छोड़ने वाले लोगों की तुलना बूँद से की गई है। यहाँ ‘लौं’ ‘की तरह’ के अर्थ में आया है, इसलिए यह उपमा का उदाहरण है।
- शीर्षक दीजिए। उत्तर: ‘बूँद से मोती’ या ‘घर छोड़ने का फल’।
पद्यांश 4: जयशंकर प्रसाद, ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’
अरुण यह मधुमय देश हमारा। / जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा।। / सरल तामरस गर्भ विभा पर, नाच रही तरुशिखा मनोहर। / छिटका जीवन हरियाली पर, मंगल कुंकुम सारा।। / लघु सुरधनु से पंख पसारे, शीतल मलय समीर सहारे। / उड़ते खग जिस ओर मुँह किए, समझ नीड़ निज प्यारा।।
- पद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है? उत्तर: कवि अपने देश की सुंदरता और उदारता का गुणगान करता है। यह देश इतना मधुर और स्नेह भरा है कि अनजान लोगों और दूर से आने वाले पक्षियों को भी यहाँ अपना घर-सा सहारा मिलता है।
- ‘जहाँ पहुँच अनजान क्षितिज को मिलता एक सहारा’ का आशय लिखिए। उत्तर: दूर से आए अनजान को भी इस देश में आश्रय मिलता है। इशारा भारत की शरण देने वाली उदार परंपरा की ओर है।
- ‘नाच रही तरुशिखा मनोहर’ में कौन-सा अलंकार है? उत्तर: मानवीकरण, क्योंकि पेड़ों की चोटियों को नाचते हुए दिखाया गया है, जैसे वे मनुष्य हों।
- ‘लघु सुरधनु से पंख पसारे’ में अलंकार और उसका कारण बताइए। उत्तर: उपमा। पक्षियों के रंगीन पंखों की तुलना छोटे इंद्रधनुष से की गई है और ‘से’ वाचक शब्द है।
- शब्दार्थ लिखिए: तामरस, सुरधनु, खग, नीड़। उत्तर: तामरस यानी कमल, सुरधनु यानी इंद्रधनुष, खग यानी पक्षी, नीड़ यानी घोंसला।
- ‘समीर’ के दो पर्यायवाची लिखिए। उत्तर: पवन और वायु।
पद्यांश 5: सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’, ‘तोड़ती पत्थर’
कवि इलाहाबाद की एक सड़क पर पत्थर तोड़ती एक स्त्री को देखता है। उसी के बारे में आगे की पंक्तियाँ हैं:
कोई न छायादार / पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; / श्याम तन, भर बंधा यौवन, / नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन, / गुरु हथौड़ा हाथ, / करती बार-बार प्रहार: / सामने तरु-मालिका अट्टालिका, प्राकार।
- पद्यांश का केंद्रीय भाव क्या है? उत्तर: एक मजदूर स्त्री बिना छाया के बैठकर भारी हथौड़े से लगातार पत्थर तोड़ रही है। सामने पेड़ों की कतार से घिरा ऊँचा महल है। दोनों चित्र साथ रखकर कवि मेहनतकश की कठिन जिंदगी और अमीर-गरीब की खाई दिखाता है।
- ‘कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार’ का भाव लिखिए। उत्तर: जिस पेड़ के नीचे वह बैठी है, वह छाया नहीं देता, फिर भी उसने इस हालत को स्वीकार कर लिया है। इशारा यह है कि उसके पास कोई सहारा या चुनाव नहीं है।
- ‘नत नयन, प्रिय-कर्म-रत मन’ से स्त्री के बारे में क्या पता चलता है? उत्तर: उसकी आँखें झुकी हैं और मन अपने काम में लगा है। वह शिकायत नहीं करती, चुपचाप और पूरे ध्यान से मेहनत करती है।
- ‘गुरु’ शब्द का यहाँ क्या अर्थ है? उत्तर: भारी। इस पंक्ति में ‘गुरु’ का अर्थ शिक्षक नहीं है।
- ‘बार-बार प्रहार’ में कौन-सा अलंकार है? उत्तर: ‘बार-बार’ में पुनरुक्ति प्रकाश; साथ में ‘ब’ और ‘र’ की आवृत्ति से अनुप्रास भी है।
- ‘अट्टालिका’ और ‘प्राकार’ का अर्थ लिखिए। उत्तर: अट्टालिका यानी ऊँचा महल या भवन; प्राकार यानी चारदीवारी।
वे जोड़े जिनमें सबसे ज्यादा नंबर कटते हैं
इन जोड़ों में अंतर पक्का कर लीजिए। अलंकार वाले जोड़ों के लिए पूरा अध्याय अलंकार के भेद और उदाहरण में है।
| जोड़ा | पहचान | फर्क |
|---|---|---|
| केंद्रीय भाव और भावार्थ | पूरी कविता या एक पंक्ति? | केंद्रीय भाव पूरी कविता का, भावार्थ एक पंक्ति का |
| केंद्रीय भाव और संदेश | कविता क्या कहती है या पाठक को क्या सीख देती है? | ‘एक बूँद’ का भाव बूँद का मोती बनना, संदेश घर छोड़ने से न डरना |
| शब्दार्थ और भावार्थ | शब्द का अर्थ या पंक्ति का इशारा? | ‘नीड़’ का शब्दार्थ घोंसला; ‘समझ नीड़ निज प्यारा’ का भाव अपनापन |
| उपमा और मानवीकरण | तुलना है या इंसानी काम? | ‘सुरधनु से पंख’ उपमा; ‘नाच रही तरुशिखा’ मानवीकरण |
| पुनरुक्ति प्रकाश और यमक | दोहराए शब्द का अर्थ एक या अलग? | ‘बार-बार’ में अर्थ एक, इसलिए पुनरुक्ति; अर्थ बदले तो यमक |
| अपठित गद्यांश और पद्यांश | बात सीधी या संकेत में? | गद्य में सीधी, कविता में बिंब और अलंकार के सहारे |
अपठित पद्यांश में आम गलतियाँ
सबसे आम गलती भावार्थ में पंक्ति ज्यों की त्यों उतार देना है। परीक्षक देखना चाहता है कि आपने पंक्ति को समझा या नहीं, इसलिए अपने शब्दों में लिखिए और इशारा भी खोलिए। दूसरी गलती बाहर की जानकारी जोड़ना है। प्रसाद की कविता पढ़कर उनके नाटकों के बारे में लिखना उत्तर को लंबा करता है, बेहतर नहीं।
तीसरी गलती शब्द का आम अर्थ लगा देना है। ‘गुरु’ को शिक्षक या ‘किस अर्थ’ के ‘अर्थ’ को पैसा पढ़ लिया, तो उत्तर गलत हो जाता है; संदर्भ से अर्थ तय कीजिए। चौथी, अलंकार बताते समय सिर्फ नाम लिखना। नाम के साथ एक पंक्ति में कारण लिखिए, जैसे ‘से’ वाचक शब्द है, इसलिए उपमा।
पाँचवीं गलती शीर्षक को लंबा वाक्य बना देना है। ‘कवि अपने देश की सुंदरता का वर्णन करता है’ शीर्षक नहीं, केंद्रीय भाव है। शीर्षक दो से चार शब्द का रखिए: ‘हमारा मधुमय देश’। कविता में रस भी पूछा जा सकता है, इसलिए रस के भेद और लय समझने के लिए छंद वाले नोट भी एक बार देख लीजिए।
परीक्षा में अपठित पद्यांश
स्कूल की हिंदी, जिसमें कक्षा 9 और 10 भी शामिल हैं, और कई प्रतियोगी परीक्षाओं के हिंदी खंड में अपठित अंश आता है, कभी गद्य में और कभी पद्य में। कितने पद्यांश आएँगे और कितने अंक के, यह हर बोर्ड या परीक्षा का अपना पाठ्यक्रम और नमूना प्रश्नपत्र तय करता है, इसलिए उसी साल का पैटर्न मिलाकर तैयारी कीजिए।
UPSC मुख्य परीक्षा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में भी बोध का खंड होता है, और वहाँ की तकनीक अनिवार्य हिंदी में बोध प्रश्न वाले नोट में है। पद्यांश का अभ्यास वहाँ भी काम आता है, क्योंकि दोनों जगह कौशल एक है: कम समय में किसी अनजाने अंश का मूल भाव पकड़कर साफ भाषा में लिखना। व्याकरण के बाकी अध्यायों का क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण में मिलेगा।
अपठित पद्यांश रटने का नहीं, पढ़ने का अध्याय है। हर हफ्ते दो-तीन अनजानी कविताएँ उठाइए, पहले केंद्रीय भाव एक वाक्य में लिखिए, फिर शीर्षक; कुछ ही हफ्तों में कविता की भाषा आपको डराना छोड़ देगी।
अभ्यास प्रश्न
पहले सात प्रश्न नीचे दिए पद्यांश पर हैं; बाकी ऊपर के पद्यांशों और नियमों पर। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।
सुभद्राकुमारी चौहान, ‘वीरों का कैसा हो वसंत’:
भर रही कोकिला इधर तान / मारू बाजे पर उधर गान / है रंग और रण का विधान; / मिलने को आए आदि अंत / वीरों का कैसा हो वसंत
- पद्यांश का केंद्रीय भाव दो वाक्यों में लिखिए।
- ‘इधर’ और ‘उधर’ किन दो चीजों को आमने-सामने रखते हैं?
- ‘रंग और रण’ से कवयित्री क्या कहना चाहती है?
- ‘कोकिला’ का एक पर्यायवाची लिखिए।
- ‘मारू बाजे’ किस भाव से जुड़े हैं?
- ‘रंग और रण’ में कौन-सा अलंकार है?
- पद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए।
- ‘नर हो, न निराश करो मन को’ में ‘न’ वर्ण की आवृत्ति से कौन-सा अलंकार बनता है?
- ‘एक बूँद’ पद्यांश में ‘सीप’ का क्या महत्व है?
- ‘लघु सुरधनु से पंख पसारे’ में उपमेय और उपमान बताइए।
- केंद्रीय भाव और भावार्थ में एक अंतर लिखिए।
- शीर्षक लिखते समय दो बातों का ध्यान रखिए, वे कौन-सी हैं?
उत्तर
- वसंत में एक ओर प्रकृति उत्सव मना रही है और दूसरी ओर युद्ध का बुलावा है। कवयित्री पूछती है कि ऐसे समय में वीरों का वसंत कैसा हो: प्रेम और रंग का या युद्ध का।
- ‘इधर’ कोयल की मीठी तान को और ‘उधर’ युद्ध के मारू बाजे के गान को आमने-सामने रखता है।
- एक ही समय में उत्सव (रंग) और युद्ध (रण) दोनों की माँग है, और वीर को इनमें से चुनना है।
- कोयल (या पिक)।
- युद्ध और वीरता के भाव से।
- अनुप्रास: ‘र’ वर्ण की आवृत्ति।
- ‘वीरों का वसंत’ या ‘रंग और रण’।
- अनुप्रास।
- सीप में गिरकर ही बूँद मोती बनती है; यानी सही मौका और जगह मिलने पर साधारण चीज भी कीमती बन जाती है।
- उपमेय: पक्षियों के पंख; उपमान: छोटा इंद्रधनुष (लघु सुरधनु); वाचक शब्द: से।
- केंद्रीय भाव पूरी कविता का निचोड़ है, जबकि भावार्थ किसी एक पंक्ति का अर्थ और इशारा।
- शीर्षक छोटा हो (दो से चार शब्द) और पूरी कविता के केंद्रीय भाव को ढके।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अपठित पद्यांश किसे कहते हैं?
अपठित पद्यांश कविता का वह अंश है जो पाठ्यक्रम से बाहर का हो और जिसे विद्यार्थी परीक्षा में पहली बार पढ़े। उसके आधार पर केंद्रीय भाव, शीर्षक, भावार्थ, शब्दार्थ और अलंकार जैसे प्रश्न पूछे जाते हैं। इसे अपठित काव्यांश भी कहते हैं।
Apathit padyansh meaning in Hindi क्या है?
Apathit का अर्थ है जो पहले न पढ़ा गया हो, और padyansh का अर्थ है पद्य यानी कविता का एक अंश। दोनों मिलकर अर्थ बनता है, ऐसी कविता का टुकड़ा जो आपकी किताब में नहीं है। इसमें आपकी याददाश्त नहीं, समझ की परीक्षा होती है।
अपठित गद्यांश और अपठित पद्यांश में क्या अंतर है?
गद्यांश गद्य का अंश होता है, जिसमें लेखक बात सीधे कहता है। पद्यांश कविता का अंश होता है, जिसमें बात बिंब, संकेत, तुलना और अलंकार के सहारे कही जाती है। हल करने का तरीका दोनों में लगभग एक है, पर पद्यांश में छिपा अर्थ खोलना ज्यादा जरूरी होता है।
अपठित पद्यांश हल करने का सही तरीका क्या है?
पहले पूरी कविता लय के साथ पढ़िए, फिर सारे प्रश्न पढ़िए और दोबारा कविता पढ़ते हुए उत्तर वाली पंक्तियाँ चिह्नित कीजिए। सीधे प्रश्न पहले हल कीजिए, फिर भावार्थ और केंद्रीय भाव लिखिए। शीर्षक सबसे आखिर में दीजिए।
पद्यांश का शीर्षक कैसे लिखें?
शीर्षक दो से चार शब्द का हो, केंद्रीय भाव से निकले और पूरी कविता को ढके। पूरा वाक्य शीर्षक नहीं होता। अगर कविता की कोई पंक्ति बार-बार लौटती हो, तो वही पंक्ति भी अच्छा शीर्षक बन सकती है।
भावार्थ लिखते समय क्या ध्यान रखें?
पहले पंक्ति का सीधा अर्थ अपने शब्दों में लिखिए, फिर बताइए कि कवि उससे किस ओर इशारा कर रहा है। पंक्ति को ज्यों का त्यों दोहराने पर नंबर कटते हैं। बाहर की जानकारी मत जोड़िए, सिर्फ दी गई पंक्तियों पर टिके रहिए।
क्या अपठित पद्यांश में अलंकार भी पूछे जाते हैं?
हाँ, अक्सर एक प्रश्न अलंकार या रस की पहचान का होता है। अनुप्रास, पुनरुक्ति प्रकाश, उपमा, रूपक और मानवीकरण सबसे ज्यादा आते हैं। अलंकार का नाम लिखने के साथ एक पंक्ति में कारण भी लिखिए।
कक्षा 9 के अपठित पद्यांश की तैयारी कैसे करें?
हर हफ्ते दो-तीन अनजानी कविताएँ लेकर उनका केंद्रीय भाव एक वाक्य में और शीर्षक दो-चार शब्दों में लिखने का अभ्यास कीजिए। साथ में पर्यायवाची, विलोम और प्रमुख अलंकार दोहराते रहिए। प्रश्नों की संख्या और अंक अपने बोर्ड के उसी साल के नमूना प्रश्नपत्र से मिलाइए।
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