श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द वे शब्द हैं जो सुनने में लगभग एक जैसे लगते हैं, पर जिनके अर्थ बिल्कुल अलग होते हैं। ‘श्रुति’ का अर्थ है सुनना, ‘सम’ का अर्थ समान और ‘भिन्नार्थक’ का अर्थ अलग अर्थ वाला। जैसे ‘पवन’ का अर्थ हवा है और ‘पावन’ का पवित्र; ‘उपयुक्त’ का अर्थ ठीक है और ‘उपर्युक्त’ का ऊपर कहा गया। इन्हें समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द भी कहते हैं, और परीक्षा में ये अर्थ-भेद, सही शब्द चुनने और वाक्य-प्रयोग के रूप में आते हैं।
ज्यादातर विद्यार्थी इन्हें लंबी सूची की तरह रटते हैं और फिर परीक्षा में आधे जोड़ों के अर्थ उलट देते हैं। असली दिक्कत यह है कि वे जोड़े को उसकी ध्वनि के अंतर से नहीं पहचानते। हर जोड़े में फर्क किसी एक जगह होता है: एक मात्रा, एक अनुस्वार, श और स, ब और व, या एक संयुक्त व्यंजन। यह नोट जोड़ों को इसी अंतर के हिसाब से बाँटता है, हर जोड़े का अर्थ और एक-एक वाक्य देता है, और आखिर में वे 20 जोड़े अलग से रखता है जिन पर सबसे ज्यादा गलती होती है।
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द एक नजर में
पूरे अध्याय का नक्शा पहले देख लीजिए।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शाब्दिक अर्थ | श्रुति (सुनना) + सम (समान) + भिन्नार्थक (अलग अर्थ वाले) |
| दूसरा नाम | समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द, शब्द-युग्म |
| पहचान | उच्चारण लगभग समान, वर्तनी में छोटा अंतर, अर्थ पूरी तरह अलग |
| अंतर के मुख्य आधार | मात्रा, अनुस्वार और चंद्रबिंदु, श-ष-स, ब-व, ण-न, ड़-र और ढ़, संयुक्त व्यंजन |
| किनसे अलग हैं | अनेकार्थी (एक शब्द, कई अर्थ), पर्यायवाची (अलग शब्द, एक अर्थ), विलोम (उलटा अर्थ) |
| परीक्षा में रूप | अर्थ-भेद लिखना, खाली जगह में सही शब्द भरना, दोनों शब्दों का वाक्य में प्रयोग |
| सबसे आम गलती | उपयुक्त और उपर्युक्त, अन्न और अन्य, दिया और दीया को एक मान लेना |
श्रुतिसम शब्द किसे कहते हैं और ये बनते कैसे हैं
परिभाषा सीधी है: जो शब्द उच्चारण में लगभग समान हों, पर वर्तनी में थोड़े अलग हों और अर्थ में पूरी तरह भिन्न हों, वे श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहलाते हैं। ‘लगभग’ शब्द पर ध्यान दीजिए। ‘पवन’ और ‘पावन’ को ध्यान से बोलें तो फर्क सुनाई देता है, पर जल्दी में या आम बोलचाल में यह फर्क दब जाता है। लिखते समय यही दबा हुआ फर्क गलती बन जाता है।
ये जोड़े ज्यादातर तत्सम शब्दों में मिलते हैं, क्योंकि संस्कृत में ह्रस्व-दीर्घ, श-ष-स और ण-न का भेद अर्थ बदल देता है, जबकि बोलचाल की हिंदी में ये भेद अक्सर धुंधले हो जाते हैं। इसीलिए तत्सम और तद्भव का फर्क समझना यहाँ सीधे काम आता है; इसके लिए तत्सम और तद्भव शब्दों वाला नोट देखिए।
इन्हें तीन मिलते-जुलते शब्द-समूहों से अलग रखना जरूरी है:
- अनेकार्थी शब्द एक ही शब्द होता है जिसके कई अर्थ होते हैं, जैसे ‘कनक’ का अर्थ सोना भी है और धतूरा भी। श्रुतिसम में दो अलग शब्द होते हैं। पूरी सूची के लिए अनेकार्थी शब्दों वाला नोट है।
- पर्यायवाची शब्द अलग-अलग होते हैं पर उनका अर्थ एक होता है, जैसे पवन, वायु और समीर। श्रुतिसम में शब्द मिलते-जुलते होते हैं और अर्थ अलग। देखिए पर्यायवाची शब्द।
- विलोम शब्द एक-दूसरे का उलटा अर्थ देते हैं, जैसे उपकार और अपकार। कुछ श्रुतिसम जोड़े संयोग से विलोम भी होते हैं, पर ज्यादातर का अर्थ बस अलग होता है, उलटा नहीं। विलोम शब्दों की सूची अलग से है।
साइट पर शब्द-युग्म वाला नोट अनिल-अनल, ग्रह-गृह, दिन-दीन जैसे 60 से ज्यादा क्लासिक जोड़ों की एक बड़ी तालिका देता है। यह नोट उन्हें दोहराता नहीं; यहाँ नए जोड़े हैं, और उन्हें इस हिसाब से बाँटा गया है कि फर्क किस ध्वनि में है।
मात्रा के अंतर से बने जोड़े
सबसे बड़ा समूह उन जोड़ों का है जिनमें सिर्फ एक मात्रा का फर्क है: इ और ई, उ और ऊ, या अ और आ। लिखते समय एक मात्रा छोटी-बड़ी हुई और अर्थ बदल गया।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| पवन / पावन | हवा / पवित्र | सुबह की पवन ठंडी थी। गंगा को पावन नदी माना जाता है। |
| सुख / सूख | आराम, आनंद / सूखना | परिवार के साथ बड़ा सुख मिलता है। धूप में कपड़े सूख गए। |
| बहु / बहू | बहुत, अनेक / बेटे की पत्नी | भारत बहुभाषी देश है। घर में नई बहू आई है। |
| चिता / चीता | शव जलाने के लिए लकड़ियों का ढेर / एक तेज दौड़ने वाला जंगली जानवर | चिता की आग देर तक जलती रही। चीता सबसे तेज दौड़ने वाला थलचर है। |
| दिया / दीया | देना क्रिया का भूतकाल / मिट्टी का दीपक | माँ ने बच्चे को खाना दिया। दिवाली पर हर घर में दीया जलता है। |
| पुरुष / परुष | आदमी / कठोर, कड़वा | पुरुष और महिला को बराबर वेतन मिलना चाहिए। उसके परुष वचन चुभ गए। |
| दशा / दिशा | हालत / तरफ | बाढ़ के बाद गाँव की दशा खराब थी। सूरज पूर्व दिशा में उगता है। |
| कलि / कली | कलियुग / बिना खिला फूल | कलि में धर्म कमजोर होने की बात पुराणों में कही गई। गुलाब की कली सुबह खिल गई। |
| हरि / हरी | भगवान विष्णु / हरे रंग की | भक्त हरि का भजन गा रहे थे। खेत में हरी घास उग आई। |
| अरि / अरी | शत्रु / स्त्री को पुकारने का शब्द | वीर ने अरि को रण में हरा दिया। अरी बहन, जरा इधर आना। |
| गिरि / गिरी | पहाड़ / गिर पड़ी | हिमालय को गिरिराज कहते हैं। फिसलकर किताब नीचे गिरी। |
| अपर / अपार | दूसरा / जिसकी कोई सीमा न हो | वे अपर जिलाधिकारी के पद पर हैं। समुद्र की गहराई अपार है। |
| कोर / कौर | किनारा / निवाला | साड़ी की कोर पर सुनहरा काम था। बच्चे ने रोटी का पहला कौर खाया। |
| अगम / आगम | जहाँ पहुँचना कठिन हो / आना, आगमन | पहाड़ का वह रास्ता अगम था। वसंत के आगम से बाग खिल उठा। |
| अभय / उभय | निडर / दोनों | राजा ने शरणागत को अभय दिया। उभय पक्षों ने समझौता मान लिया। |
इस समूह में सबसे ज्यादा गलती दिया और दीया में होती है। ‘दिया’ क्रिया है (मैंने दिया), ‘दीया’ संज्ञा है (मिट्टी का दीया)। पहचान का आसान तरीका: अगर वाक्य में ‘जलाना’ आ रहा है, तो लगभग हमेशा दीया ही होगा।
अनुस्वार और चंद्रबिंदु के अंतर से बने जोड़े
दूसरा समूह अनुस्वार (ं) और चंद्रबिंदु (ँ) का है। एक बिंदु लगने या हटने से, या बिंदु की जगह चंद्रबिंदु आने से, शब्द ही बदल जाता है। अनुस्वार और चंद्रबिंदु के नियम वर्तनी और विराम चिह्न वाले नोट में विस्तार से हैं।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| गोद / गोंद | गोदी / चिपकाने वाला पदार्थ | बच्चा माँ की गोद में सो गया। कागज गोंद से चिपकाओ। |
| पूछ / पूँछ | पूछना क्रिया का रूप / दुम | रास्ता किसी से पूछ लो। कुत्ता पूँछ हिला रहा था। |
| सास / साँस | पति या पत्नी की माँ / श्वास | उसकी सास बहुत स्नेही हैं। दौड़ने के बाद साँस फूल गई। |
| कहा / कहाँ | बोला / किस जगह | शिक्षक ने चुप रहने को कहा। तुम कल कहाँ गए थे? |
| सवार / सँवार | चढ़ा हुआ, सवारी करने वाला / सजाना, ठीक करना | घोड़े पर सवार सैनिक आगे बढ़ा। उसने बाल सँवार लिए। |
कहा और कहाँ की गलती इतनी आम है कि अक्सर वाक्य का अर्थ ही उलट जाता है। ‘उसने कहा’ बोलने की बात है, ‘वह कहाँ है’ जगह का सवाल। जहाँ प्रश्न जगह का हो, वहाँ चंद्रबिंदु जरूर लगाइए।
श, ष और स के अंतर से बने जोड़े
तीसरा समूह श, ष और स का है। बोलचाल में बहुत लोग तीनों को एक जैसा बोलते हैं, पर तत्सम शब्दों में यह फर्क अर्थ तय करता है।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| शाला / साला | घर, स्थान (पाठशाला, धर्मशाला) / पत्नी का भाई | गाँव की पाठशाला नई बनी है। उसका साला शादी में आया। |
| शान / सान | इज्जत, ठाट / धार तेज करने का पत्थर | तिरंगा देश की शान है। लोहार ने चाकू को सान पर चढ़ाया। |
| सुकर / शूकर | आसान / सूअर | नई सड़क से यात्रा सुकर हो गई। शूकर कीचड़ में लोट रहा था। |
| श्वेत / स्वेद | सफेद / पसीना | उसने श्वेत वस्त्र पहने थे। धूप में मजदूर का स्वेद बह रहा था। |
| शंकर / संकर | भगवान शिव / मिश्रित, दो तरह से मिलकर बना | शंकर को भोलेनाथ भी कहते हैं। वैज्ञानिकों ने गेहूँ की संकर किस्म तैयार की। |
| विषाद / विशद | दुख, उदासी / विस्तृत, साफ | हार के बाद उसके चेहरे पर विषाद था। लेखक ने विषय का विशद वर्णन किया। |
ब-व, ण-न और ड़-ढ़ के अंतर से बने जोड़े
चौथा समूह उन व्यंजनों का है जिन्हें बोलचाल में अक्सर एक जैसा बोल दिया जाता है: ब और व, ण और न, र, ड़ और ढ़।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| बाद / वाद | पीछे, उपरांत / बहस, मुकदमा, सिद्धांत | खाने के बाद टहलना अच्छा है। अदालत में वाद की सुनवाई हुई। |
| बार / वार | दफा / हमला, सप्ताह का दिन | उसने तीन बार फोन किया। दुश्मन ने पीछे से वार किया। |
| बहन / वहन | बहिन / ढोना, भार उठाना | मेरी बहन डॉक्टर है। सरकार इस योजना का खर्च वहन करेगी। |
| अणु / अनु | पदार्थ का बहुत छोटा कण / पीछे, बाद (उपसर्ग, जैसे अनुज, अनुकरण) | पानी के अणु में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन होते हैं। ‘अनुज’ में अनु उपसर्ग है। |
| नीर / नीड़ | पानी / घोंसला | प्यासे को शीतल नीर मिला। चिड़िया अपने नीड़ में लौट आई। |
| पड़ना / पढ़ना | गिरना, होना / पढ़ाई करना | रात भर बारिश पड़ती रही। वह रोज दो घंटे पढ़ता है। |
| गड़ना / गढ़ना | धँसना, चुभना / आकार देना, बनाना | पैर में काँटा गड़ गया। कुम्हार मिट्टी से घड़ा गढ़ता है। |
संयुक्त व्यंजन और एक वर्ण के अंतर से बने जोड़े
पाँचवाँ और सबसे मुश्किल समूह उन जोड़ों का है जिनमें एक संयुक्त व्यंजन, एक र, या एक अतिरिक्त वर्ण फर्क पैदा करता है। ये ज्यादातर तत्सम हैं और प्रशासनिक व औपचारिक हिंदी में खूब आते हैं।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
|---|---|---|
| उपयुक्त / उपर्युक्त | ठीक, सही / ऊपर कहा गया | इस पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार चुना गया। उपर्युक्त नियम सभी पर लागू होंगे। |
| अन्न / अन्य | अनाज / दूसरा | किसान अन्न उगाता है। कोई अन्य उपाय सोचो। |
| मद / मद्य | घमंड, नशा / शराब | धन के मद में वह सबको भूल गया। राज्य में मद्य की बिक्री पर रोक लगी। |
| उद्धत / उद्यत | उद्दंड, अक्खड़ / तैयार | उसका उद्धत व्यवहार किसी को पसंद नहीं आया। सैनिक हर समय लड़ने को उद्यत रहते हैं। |
| कर्म / क्रम | काम / सिलसिला, तरतीब | गीता कर्म करने का उपदेश देती है। नाम वर्णमाला के क्रम में लिखो। |
| चर्म / चरम | चमड़ा / सबसे ऊँचा, अंतिम | चर्म रोग का इलाज समय पर कराना चाहिए। गर्मी जून में चरम पर होती है। |
| ग्रंथ / ग्रंथि | पुस्तक / गाँठ, शरीर की ग्रंथि | रामचरितमानस एक प्रसिद्ध ग्रंथ है। थायरॉइड गले की एक ग्रंथि है। |
| दीप / द्वीप | दीपक / टापू | मंदिर में दीप जल रहा था। अंडमान बंगाल की खाड़ी में द्वीपों का समूह है। |
| तप्त / तृप्त | गरम / संतुष्ट | तप्त लोहे पर हथौड़ा चलाया गया। भोजन करके अतिथि तृप्त हो गए। |
| छात्र / क्षात्र | विद्यार्थी / क्षत्रिय संबंधी | छात्र पुस्तकालय में पढ़ रहे थे। क्षात्र धर्म में रक्षा को कर्तव्य माना गया। |
| प्रकार / प्राकार | तरह, किस्म / किले या नगर की चारदीवारी, परकोटा | फूल कई प्रकार के होते हैं। किले का प्राकार पत्थर से बना था। |
| प्रणाम / प्रमाण | नमस्कार / सबूत | उसने गुरु को प्रणाम किया। अदालत ने प्रमाण माँगा। |
| प्रण / प्राण | प्रतिज्ञा / जान | भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का प्रण लिया। डॉक्टर ने घायल के प्राण बचा लिए। |
| कृपण / कृपाण | कंजूस / तलवार | कृपण व्यक्ति दान नहीं करता। सैनिक के हाथ में कृपाण थी। |
| क्रांति / क्लांति | बड़ा बदलाव / थकान | हरित क्रांति ने अनाज का उत्पादन बढ़ाया। लंबी यात्रा के बाद क्लांति घेर लेती है। |
| निर्धन / निधन | गरीब / मृत्यु | निर्धन परिवारों को राशन मुफ्त मिलता है। कवि के निधन पर शोक सभा हुई। |
| मात्र / मातृ | केवल / माता संबंधी | उसके पास मात्र दस रुपये थे। हिंदी मेरी मातृभाषा है। |
| इतर / इत्र | दूसरा, अलावा / सुगंधित तेल | पाठ्यक्रम से इतर गतिविधियाँ भी जरूरी हैं। कन्नौज का इत्र मशहूर है। |
| अपत्य / अपथ्य | संतान / सेहत के लिए नुकसानदेह | गुरु ने उसे अपने अपत्य की तरह पाला। बीमारी में तला भोजन अपथ्य है। |
| आवरण / आभरण | ढकने वाली परत, पर्दा / गहना | किताब का आवरण फट गया। दुल्हन ने सोने के आभरण पहने। |
| अवलंब / अविलंब | सहारा / बिना देर किए | बुढ़ापे में बेटा ही उसका अवलंब था। घायल को अविलंब अस्पताल पहुँचाओ। |
| उपल / उत्पल | पत्थर, ओला / कमल | तेज उपल-वृष्टि से फसल बर्बाद हो गई। तालाब में उत्पल खिले थे। |
| परिच्छेद / परिच्छद | अध्याय, खंड / वस्त्र, पोशाक | पुस्तक के पहले परिच्छेद में भूमिका है। राजा ने कीमती परिच्छद पहना। |
| तरंग / तुरंग | लहर / घोड़ा | समुद्र की तरंगें किनारे से टकराईं। सेनापति तुरंग पर सवार था। |
| कंगाल / कंकाल | बहुत गरीब / हड्डियों का ढाँचा | जुए ने उसे कंगाल बना दिया। संग्रहालय में डायनासोर का कंकाल रखा है। |
| भाग / भाग्य | हिस्सा / किस्मत | संपत्ति के चार भाग किए गए। मेहनत से भाग्य भी बदलता है। |
20 श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द जिन पर सबसे ज्यादा गलती होती है
अगर समय कम है, तो पहले ये 20 जोड़े पक्के कर लीजिए। हर जोड़े के साथ उसका अर्थ और फर्क पकड़ने का एक संकेत दिया गया है।
- उपयुक्त / उपर्युक्त: ठीक / ऊपर कहा गया। ‘उपर्’ में ऊपर छिपा है।
- अन्न / अन्य: अनाज / दूसरा। अन्न खाया जाता है, अन्य चुना जाता है।
- दिया / दीया: दे दिया / दीपक। जलाने की बात हो तो दीया।
- पवन / पावन: हवा / पवित्र। पावन से ही पावनता बनती है।
- कहा / कहाँ: बोला / किस जगह। जगह के सवाल में चंद्रबिंदु।
- सास / साँस: पति या पत्नी की माँ / श्वास।
- बहु / बहू: बहुत / बेटे की पत्नी। बहू में ऊ की लंबी मात्रा।
- चिता / चीता: शव जलाने की लकड़ियाँ / जानवर।
- श्वेत / स्वेद: सफेद / पसीना।
- कर्म / क्रम: काम / सिलसिला।
- दीप / द्वीप: दीपक / टापू। द्वीप में संयुक्त ‘द्व’ है, दीप में नहीं।
- निर्धन / निधन: गरीब / मृत्यु।
- प्रणाम / प्रमाण: नमस्कार / सबूत।
- कृपण / कृपाण: कंजूस / तलवार। कृपाण में आ की मात्रा तलवार की लंबाई जैसी।
- तप्त / तृप्त: गरम / संतुष्ट।
- मद / मद्य: घमंड या नशा / शराब।
- उद्धत / उद्यत: उद्दंड / तैयार।
- अवलंब / अविलंब: सहारा / बिना देर।
- बाद / वाद: पीछे / बहस या मुकदमा।
- पुरुष / परुष: आदमी / कठोर।
पहचान का तरीका और आम गलतियाँ
किसी जोड़े पर अटकें, तो तीन कदम में फैसला कीजिए:
- दोनों शब्दों में फर्क कहाँ है, यह ढूँढ़िए: मात्रा, बिंदु, श-स, ब-व या संयुक्त व्यंजन।
- वाक्य में पूछिए कि कौन-सा शब्द-भेद चाहिए: संज्ञा, क्रिया या विशेषण। ‘दिया’ क्रिया है, ‘दीया’ संज्ञा; ‘तप्त’ और ‘तृप्त’ दोनों विशेषण हैं, इसलिए वहाँ अर्थ देखना होगा।
- एक छोटा परखने वाला वाक्य बनाइए। ‘नियम ऊपर दिए गए हैं’ कहने की जगह ‘उपर्युक्त नियम’ बैठता है, ‘उपयुक्त नियम’ नहीं।
गलतियाँ ज्यादातर तीन तरह की होती हैं। पहली, सरकारी और औपचारिक लेखन में उपयुक्त और उपर्युक्त का उलटा प्रयोग, जो पत्र और निबंध दोनों में नंबर काटता है। दूसरी, अनुस्वार और चंद्रबिंदु को एक मान लेना, जिससे ‘कहाँ’ की जगह ‘कहा’ और ‘साँस’ की जगह ‘सास’ लिख जाता है। तीसरी, ब और व को बोलचाल की तरह लिख देना, जिससे ‘वाद’ ‘बाद’ बन जाता है। वाक्य-स्तर की ऐसी अशुद्धियाँ पकड़ने के लिए वाक्य शुद्धि का अभ्यास साथ में कीजिए।
श्रुतिसम शब्द अलंकार के अध्याय में भी काम आते हैं। यमक में एक ही शब्द दो बार आता है और हर बार अर्थ अलग होता है, और श्लेष में एक ही शब्द में कई अर्थ होते हैं। श्रुतिसम में दो अलग शब्द होते हैं जो सिर्फ सुनने में मिलते हैं। इस फर्क को अलंकार वाले नोट के यमक और श्लेष खंड के साथ पढ़िए, तो तीनों की सीमा साफ हो जाती है।
परीक्षा में श्रुतिसम शब्द कैसे पूछे जाते हैं
राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य हिंदी प्रश्नपत्र में ये जोड़े आम तौर पर तीन रूपों में आते हैं: किसी जोड़े का सही अर्थ-भेद चुनना, वाक्य की खाली जगह में सही शब्द भरना, और दोनों शब्दों का अलग-अलग वाक्य में प्रयोग करना। सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में यह शब्द-ज्ञान वाले हिस्से में आता है; पूरे व्याकरण का नक्शा अनिवार्य हिंदी व्याकरण वाले नोट में है।
यह अध्याय रटने से कम और ध्यान से सुनने और लिखने से ज्यादा सुधरता है। हर जोड़े में फर्क की एक जगह पहचानिए और उसके साथ अपना एक वाक्य बना लीजिए; नई सूची सामने आएगी, तब भी वही आदत सही शब्द तक ले जाएगी।
अभ्यास प्रश्न
पहले दस प्रश्नों में कोष्ठक के दो शब्दों में से सही शब्द चुनकर खाली जगह भरिए। बाकी प्रश्नों में अर्थ-भेद लिखिए। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।
- ______ नियमों का पालन सभी कर्मचारियों को करना होगा। (उपयुक्त / उपर्युक्त)
- दिवाली पर हर आँगन में ______ जला। (दिया / दीया)
- भोजन करके अतिथि ______ हो गए। (तप्त / तृप्त)
- श्रीलंका एक ______ देश है। (दीप / द्वीप)
- घायल को ______ अस्पताल ले जाओ। (अवलंब / अविलंब)
- सरकार इस खर्च का ______ करेगी। (बहन / वहन)
- चिड़िया अपने ______ में लौट आई। (नीर / नीड़)
- उसके ______ व्यवहार से सब नाराज थे। (उद्धत / उद्यत)
- कवि के ______ पर शोक सभा हुई। (निर्धन / निधन)
- कुत्ता ______ हिला रहा था। (पूछ / पूँछ)
- ‘कृपण’ और ‘कृपाण’ का अर्थ-भेद लिखिए।
- ‘अपत्य’ और ‘अपथ्य’ का अर्थ-भेद लिखिए।
- ‘प्रकार’ और ‘प्राकार’ को अलग-अलग वाक्य में प्रयोग कीजिए।
- श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द और अनेकार्थी शब्द में एक अंतर लिखिए।
उत्तर
- उपर्युक्त (ऊपर कहे गए नियम)।
- दीया (दीपक)।
- तृप्त (संतुष्ट)।
- द्वीप (टापू)।
- अविलंब (बिना देर किए)।
- वहन (भार उठाना)।
- नीड़ (घोंसला)।
- उद्धत (उद्दंड)।
- निधन (मृत्यु)।
- पूँछ (दुम)।
- कृपण का अर्थ कंजूस है, कृपाण का अर्थ तलवार।
- अपत्य का अर्थ संतान है, अपथ्य का अर्थ सेहत के लिए नुकसानदेह खान-पान या व्यवहार।
- फूल कई प्रकार के होते हैं। किले का प्राकार पत्थर से बना था।
- श्रुतिसम में दो अलग शब्द होते हैं जो सुनने में मिलते-जुलते हैं, जैसे पवन और पावन। अनेकार्थी में एक ही शब्द के कई अर्थ होते हैं, जैसे कनक का अर्थ सोना और धतूरा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द किसे कहते हैं?
जो शब्द सुनने में लगभग एक जैसे लगें, पर वर्तनी में थोड़े अलग हों और अर्थ में पूरी तरह भिन्न हों, उन्हें श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द कहते हैं। जैसे पवन का अर्थ हवा है और पावन का पवित्र। इन्हें समोच्चरित भिन्नार्थक शब्द भी कहा जाता है।
श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द के उदाहरण क्या हैं?
कुछ आम उदाहरण हैं: उपयुक्त और उपर्युक्त (ठीक और ऊपर कहा गया), अन्न और अन्य (अनाज और दूसरा), दीप और द्वीप (दीपक और टापू), और कृपण और कृपाण (कंजूस और तलवार)। हर जोड़े में फर्क एक मात्रा, एक बिंदु या एक संयुक्त व्यंजन का होता है। अर्थ याद करते समय वही फर्क पकड़िए।
श्रुतिसम और अनेकार्थी शब्द में क्या अंतर है?
श्रुतिसम में दो अलग शब्द होते हैं जो सुनने में मिलते-जुलते हैं, जैसे दिया और दीया। अनेकार्थी में एक ही शब्द के कई अर्थ होते हैं, जैसे कनक का अर्थ सोना भी है और धतूरा भी। पहले में वर्तनी बदलती है, दूसरे में नहीं।
श्रुतिसम शब्द और शब्द-युग्म एक ही हैं क्या?
परीक्षा की भाषा में श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्दों को अक्सर शब्द-युग्म भी कहा जाता है, क्योंकि ये जोड़े में पढ़े जाते हैं। दोनों नामों से एक ही तरह के प्रश्न आते हैं: अर्थ-भेद, सही शब्द चुनना और वाक्य-प्रयोग। नाम कोई भी हो, तैयारी जोड़े के फर्क को पहचानने की ही है।
उपयुक्त और उपर्युक्त में क्या अंतर है?
उपयुक्त का अर्थ है ठीक या सही, जैसे इस काम के लिए उपयुक्त व्यक्ति। उपर्युक्त का अर्थ है ऊपर कहा गया, जैसे उपर्युक्त नियम सब पर लागू होंगे। उपर्युक्त उपरि (ऊपर) और उक्त (कहा गया) की संधि से बना है, इसलिए इसमें र आता है, जबकि उपयुक्त उप और युक्त से बना है।
दिया और दीया में क्या अंतर है?
दिया देना क्रिया का भूतकाल है, जैसे माँ ने खाना दिया। दीया मिट्टी का दीपक है, जैसे दिवाली पर दीया जलाया। वाक्य में जलाने की बात हो तो लगभग हमेशा दीया सही होता है।
श्रुतिसम शब्द याद कैसे करें?
लंबी सूची रटने के बजाय हर जोड़े में फर्क की जगह पहचानिए: मात्रा, बिंदु, श-स, ब-व या संयुक्त व्यंजन। फिर दोनों शब्दों के साथ अपना एक छोटा वाक्य बनाइए। समूह के हिसाब से पढ़ने पर एक ही नियम से कई जोड़े याद हो जाते हैं।
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