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एशिया पावर इंडेक्स: लोवी इंस्टीट्यूट के 8 पैमाने, शक्ति की श्रेणियाँ और भारत की रैंक

एशिया पावर इंडेक्स आसान भाषा में: लोवी इंस्टीट्यूट के 8 पैमाने, शक्ति की श्रेणियाँ, पावर गैप, और 2025 में 40 अंक पार करके भारत फिर प्रमुख शक्ति कैसे बना।

The blue ASEAN flag and the red and blue flag of Cambodia fly on tall poles against a cloudy sky.

एशिया पावर इंडेक्स लोवी इंस्टीट्यूट (Lowy Institute) की सालाना रैंकिंग है। यह बताती है कि एशिया में 27 देशों और क्षेत्रों के पास कितनी शक्ति है। हर देश को 100 में से अंक मिलते हैं, इस आधार पर कि उसके पास क्या है और वह उसका क्या इस्तेमाल करता है। सिडनी के इस थिंक टैंक ने इसे पहली बार 2018 में जारी किया था। इसका ताजा संस्करण 2025 का है। इसमें अमेरिका 80.5 अंक के साथ पहले, चीन 73.7 के साथ दूसरे और भारत 40.0 के साथ तीसरे स्थान पर है। इसी से भारत फिर उस 40 अंक की रेखा के पार पहुँच गया, जिसे इंडेक्स प्रमुख शक्ति की सीमा मानता है।

इस नतीजे को पढ़ने में दो गलतियाँ आम हैं। पहली, एशिया पावर इंडेक्स को फौजी ताकत की तालिका मान लेना। असल में सैन्य क्षमता 8 में से 1 पैमाना है, और उसका वजन 17.5% है। दूसरी, भारत के तीसरे स्थान का मतलब यह समझ लेना कि वह ऊपर के दोनों देशों के करीब है। सच यह है कि भारत चीन से 33.7 अंक पीछे है, और लोवी का अपना विश्लेषण कहता है कि दोनों के बीच क्षमता की खाई और चौड़ी हुई है। यह नोट दोनों बातें साफ करता है: इंडेक्स असल में गिनता क्या है, और भारत के 40.0 का मतलब क्या है और क्या नहीं।

एशिया पावर इंडेक्स क्या है?

एशिया पावर इंडेक्स एक समग्र सूचकांक (composite index) है। यानी कई छोटे संकेतकों को जोड़कर बना एक अंक, ठीक वैसे ही जैसे रिपोर्ट कार्ड का प्रतिशत हर विषय के अंकों से बनता है। लोवी शक्ति की परिभाषा यूँ देता है: किसी देश की वह क्षमता, जिससे वह दूसरे देशों के फैसलों और अपने आसपास की घटनाओं की दिशा तय कर सके। फिर इंडेक्स एक ही क्षेत्र के भीतर, देश-दर-देश, इसी क्षमता को मापने की कोशिश करता है।

तथ्यब्योरा
प्रकाशकलोवी इंस्टीट्यूट, सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) का एक स्वतंत्र थिंक टैंक
पहला संस्करण2018; इसकी पद्धति हर्वे लेमाहियू ने बनाई, जिन्होंने 2022 तक प्रोजेक्ट का नेतृत्व किया
अब तक के संस्करण2018, 2019, 2020, 2021, 2023, 2024 और 2025 (2022 का कोई संस्करण नहीं आया)
दायरा27 देश और क्षेत्र, पश्चिम में पाकिस्तान से लेकर उत्तर में रूस तक, और प्रशांत में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड
ढाँचा8 पैमाने, 30 उप-पैमाने और 131 संकेतक
शक्ति की श्रेणियाँमहाशक्ति 70 अंक और उससे ऊपर; प्रमुख शक्ति 40 और ऊपर; मध्यम शक्ति 10 और ऊपर; लघु शक्ति 10 से नीचे
2025 में शीर्ष चारअमेरिका 80.5, चीन 73.7, भारत 40.0, जापान 38.8
2025 में भारत27 में से 3रा स्थान, 40.0 अंक, प्रमुख शक्ति, पावर गैप -4.0

इस तालिका की दो बातें तय करती हैं कि आप हर नतीजे को कैसे पढ़ेंगे। श्रेणियाँ अंकों के दायरे हैं, इसलिए रैंक और श्रेणी अलग-अलग बात कह सकती हैं। 2024 में भारत 39.1 अंक के साथ 3रे स्थान पर था, फिर भी वह मध्यम शक्ति ही था। दूसरी बात, हर अंक बाकी 26 देशों के मुकाबले तय होता है। अगला हिस्सा यही समझाता है।

एशिया पावर इंडेक्स शक्ति कैसे मापता है?

यह 8 पैमानों का औसत निकालता है, जिनमें हर पैमाने का अपना वजन है। इनसे एक समग्र शक्ति (comprehensive power) का अंक बनता है। चार पैमाने संसाधन गिनते हैं, यानी देश के पास क्या है। बाकी चार प्रभाव गिनते हैं, यानी वह देश एशिया में उन संसाधनों से क्या करता है।

हर पैमाने में 3 से 5 उप-पैमाने हैं, और इन सबमें कुल 131 संकेतक आते हैं। आधे से ज्यादा आंकड़े लोवी के अपने शोध से आते हैं। बाकी सैकड़ों सार्वजनिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से लिए जाते हैं। कुछ संकेतक सीधी गिनती हैं, जैसे क्रय शक्ति समता (PPP) पर GDP, या किसी देश के दूतावासों की संख्या। कुछ दूसरे संकेतक विशेषज्ञों की राय हैं, जो सर्वे से जुटाई जाती है। जैसे, कोई नेता विदेश में अपने देश के आर्थिक हितों को कितनी अच्छी तरह आगे बढ़ाता है। यह आर्थिक कूटनीति का संकेतक है, जिसे 2025 के संस्करण में जोड़ा गया।

आठ पैमाने और उनका वजन

यह रहा पूरा सेट, साथ में वह वजन जो लोवी हर पैमाने को देता है:

पैमानाप्रकारवजनक्या मापता है
आर्थिक क्षमतासंसाधन17.5%PPP पर GDP, अंतरराष्ट्रीय दबदबा, तकनीक, दुनिया से जुड़ाव
सैन्य क्षमतासंसाधन17.5%रक्षा खर्च, सशस्त्र सेनाएँ, हथियार और प्लेटफॉर्म, खास क्षमताएँ, एशिया में सैन्य तैनाती की स्थिति
लचीलापनसंसाधन10%आंतरिक स्थिरता, संसाधनों की सुरक्षा, भू-आर्थिक और भू-राजनीतिक सुरक्षा, परमाणु प्रतिरोध
भविष्य के संसाधनसंसाधन10%2035 में अनुमानित आर्थिक और सैन्य संसाधन, 2050 में कामकाजी उम्र की आबादी
आर्थिक संबंधप्रभाव15%क्षेत्रीय व्यापार और निवेश के रिश्ते, आर्थिक कूटनीति
रक्षा नेटवर्कप्रभाव10%गठबंधन, क्षेत्रीय रक्षा कूटनीति, हथियार व्यापार की साझेदारियाँ
कूटनीतिक प्रभावप्रभाव10%राजनयिक नेटवर्क, बहुपक्षीय संस्थाओं में वजन, विदेश नीति
सांस्कृतिक प्रभावप्रभाव10%संस्कृति की पहुँच, सूचना का प्रवाह, लोगों का आना-जाना

प्रकार के हिसाब से वजन जोड़िए, तो संसाधनों के हिस्से स्कोर का 55% आता है और प्रभाव के हिस्से 45%। सैन्य क्षमता की गिनती खर्च किए गए पैसे से शुरू होती है। इसीलिए भारत का बढ़ता रक्षा बजट सीधे इंडेक्स में दिखता है। लेकिन यह पैमाना युद्ध का अनुभव और प्लेटफॉर्म भी तौलता है, और यह भी कि किसी एशियाई संघर्ष में सेनाएँ कितनी जल्दी तैनात हो सकती हैं। वजन खुद लोवी का चुनाव हैं। सीमाओं वाले हिस्से में हम इस बात पर फिर लौटेंगे।

फ्रंटियर से दूरी, और भारत के 40.0 का हिसाब

हर संकेतक को फ्रंटियर से दूरी (distance-to-frontier) के आधार पर अंक दिए जाते हैं। सेट में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला 100 पर होता है और सबसे कमजोर 0 पर। बाकी सब अपने असली आंकड़ों के अनुपात में इन दोनों के बीच आते हैं। यह तरीका समग्र संकेतक बनाने पर OECD की हैंडबुक से लिया गया है। इससे GDP और दूतावासों की गिनती एक ही पैमाने पर आ जाती है। लेकिन इसका मतलब यह भी है कि अंक हमेशा सापेक्ष होता है। कोई देश असल में बढ़ सकता है और फिर भी अंक गंवा सकता है, अगर सबसे आगे वाला देश उससे तेज बढ़े।

अब देखिए कि भारत का 2025 का अंक कैसे बनता है। हर पैमाने के अंक को उसके वजन से गुणा कीजिए:

पैमानावजनभारत का अंकभारत की रैंकभारित अंक
आर्थिक क्षमता17.5%27.13रा4.74
सैन्य क्षमता17.5%48.04था8.40
लचीलापन10%55.54था5.55
भविष्य के संसाधन10%55.13रा5.51
आर्थिक संबंध15%19.79वाँ2.96
रक्षा नेटवर्क10%16.411वाँ1.64
कूटनीतिक प्रभाव10%70.84था7.08
सांस्कृतिक प्रभाव10%41.54था4.15

ये गुणनफल जुड़कर 40.03 बनते हैं, जो राउंड होकर प्रकाशित 40.0 बन जाता है। अब ध्यान दीजिए कि अंक आते कहाँ से हैं। भारत को 4 संसाधन पैमानों से करीब 24.2 अंक मिलते हैं, और 4 प्रभाव पैमानों से सिर्फ 15.8। यह बँटवारा याद रखिए, क्योंकि पावर गैप इसी पर टिका है।

महाशक्ति, प्रमुख शक्ति, मध्यम शक्ति: श्रेणियों का मतलब

ये श्रेणियाँ अंकों के तय दायरे हैं, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांत से उधार ली गई श्रेणियाँ नहीं। किसी देश की श्रेणी सिर्फ उसके समग्र शक्ति अंक से तय होती है:

  • महाशक्ति: 70 अंक या उससे ज्यादा;
  • प्रमुख शक्ति: 40 अंक या उससे ज्यादा;
  • मध्यम शक्ति: 10 अंक या उससे ज्यादा;
  • लघु शक्ति: 10 अंक से कम।

2025 में इन दायरों ने 27 देशों को ऐसे बाँटा:

  • महाशक्तियाँ: अमेरिका और चीन।
  • प्रमुख शक्ति: अकेला भारत।
  • मध्यम शक्तियाँ: 15 देश और क्षेत्र, जापान (38.8) से लेकर ब्रुनेई (10.6) तक।
  • लघु शक्तियाँ: 9, कंबोडिया (9.5) से लेकर पापुआ न्यू गिनी (4.6) तक।

दायरे तय हैं, इसलिए 1 अंक का बदलाव भी लेबल बदल सकता है। पहले संस्करण में जापान और भारत, दोनों प्रमुख शक्ति थे। 2021 तक लोवी ने लिखा कि दोनों 40 अंक की सीमा से जरा-सा नीचे रह गए। 2025 में भारत फिर इस रेखा के ऊपर पहुँच गया, जबकि 38.8 पर खड़ा जापान नहीं पहुँच पाया। लेबल बस एक फुटे पर खिंची रेखा है। इसलिए हर बार उसके साथ अंक भी पढ़ना समझदारी है।

पावर गैप

पावर गैप उसी डेटा पर इंडेक्स की दूसरी नजर है। लोवी हर देश के संसाधन अंक को उसके प्रभाव अंक के सामने प्लॉट करता है, और लीनियर रिग्रेशन से उनके बीच एक ट्रेंड लाइन खींचता है। यह रेखा बताती है कि संसाधनों के किसी भी स्तर पर कितनी शक्ति की उम्मीद की जाए। गैप वह दूरी है, जो किसी देश के असली नतीजे और इस उम्मीद के बीच है। पॉजिटिव गैप का मतलब है कि देश अपने संसाधनों से ट्रेंड के अनुमान से ज्यादा प्रभाव निकाल रहा है। नेगेटिव गैप का मतलब है कि वह कम निकाल रहा है।

दो छात्रों के बारे में सोचिए, जिनके पास बराबर किताबें हैं और पढ़ाई के बराबर घंटे। एक छात्र इनके दम पर उस रैंक से कहीं ऊपर पहुँच जाता है, जिसकी इन चीजों से उम्मीद थी। दूसरा पीछे रह जाता है। यह मिसाल एक जगह टूटती है। छात्र के अंक पूर्ण होते हैं, जबकि यहाँ हर अंक 26 दूसरे देशों के मुकाबले तय होता है। इसलिए ट्रेंड लाइन खुद साल-दर-साल खिसकती रहती है।

2025 में सबसे बड़ा पॉजिटिव गैप जापान का था, +11.3। उसने 27.5 की अनुमानित शक्ति को 38.8 के असली अंक में बदल दिया, और लोवी उसे स्मार्ट पावर कहता है। भारत का असली अंक 40.0 था, जबकि अनुमान 44.0 का था, यानी -4.0 का गैप। इससे भारत 27 में 25वें स्थान पर रहा, और इंडेक्स की भारत प्रोफाइल इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा गैप बताती है। सिर्फ रूस (-6.8) और उत्तर कोरिया (-8.2) का हाल इससे बुरा था।

2018 से भारत की रैंक कैसे बदली?

हर संस्करण में भारत 4थे या 3रे स्थान पर रहा है, यानी एशिया पावर इंडेक्स में भारत की रैंक कभी इन दो पायदानों से नीचे नहीं गई। 2020 के दशक की शुरुआत में वह प्रमुख शक्ति की रेखा से नीचे खिसक गया। फिर 2023 से वापस चढ़ा। 2024 में उसने जापान को पीछे छोड़कर 3रा स्थान लिया, और 2025 में 40 अंक पार कर लिए।

संस्करणभारत की रैंकभारत का अंक (मौजूदा सीरीज)
20184था41.1
20194था41.0
20204था39.7
20214था37.7
20234था36.3
20243रा39.1
20253रा40.0

इन्हें याद करने से पहले एक सावधानी। ये आंकड़े इंडेक्स के ऐतिहासिक डेटा से हैं, जैसा वह आज है। पहली बार छपने के बाद से यह पिछली सीरीज संशोधित हो चुकी है। 2018 की रिपोर्ट में भारत 41.5 पर और जापान 42.1 पर छपा था, जबकि मौजूदा सीरीज उसी साल के लिए 41.1 और 42.8 दिखाती है। अलग-अलग सालों में भारत की तुलना एक ही सीरीज के भीतर कीजिए। पुरानी रिपोर्ट का कोई अंक मौजूदा प्लेटफॉर्म के अंक के साथ मत मिलाइए।

इस गिरावट और वापसी की वजहें लोवी की रिपोर्टें खुद बताती हैं:

  • 2021: लोवी ने पाया कि महामारी के दौरान यह क्षेत्र ज्यादा द्विध्रुवीय और कम बहुध्रुवीय हो गया था। उस साल जापान और भारत, दोनों ने चीन से ज्यादा जमीन गंवाई।
  • 2024: भारत ने 39.1 अंक के साथ जापान को पीछे छोड़कर 3रा स्थान लिया, लेकिन वह अब भी मध्यम शक्ति के दायरे में था।
  • 2025: भारत की आर्थिक और सैन्य क्षमता, दोनों बढ़ीं। लोवी कहता है कि सैन्य बढ़त ज्यादातर विशेषज्ञों के बेहतर आकलन से आई, जिस पर शायद मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का असर था।
  • 2025: आर्थिक संबंधों में भारत 9वें स्थान पर पहुँचा, और इस पैमाने पर यह उसकी पहली बढ़त थी। वजह यह थी कि 10 साल के कुल निवेश के मामले में भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया और अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा ठिकाना बन गया।

भारत कहाँ मजबूत है और कहाँ पीछे

भारत के संसाधन एशिया में सबसे ऊपर की कतार में हैं, लेकिन उसका प्रभाव नहीं। ऊपर की हिसाब वाली तालिका को रैंक के हिसाब से पढ़िए, तो पैटर्न साफ दिखता है। हर संसाधन पैमाने पर भारत 3रा या 4था है। कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव पर भी यही हाल है। लेकिन आर्थिक संबंधों में वह 9वाँ है और रक्षा नेटवर्क में 11वाँ। इन 2 पैमानों का वजन मिलाकर एक-चौथाई बनता है।

रक्षा नेटवर्क का पैमाना गठबंधनों के इर्द-गिर्द बना है। इसका पहला उप-पैमाना, क्षेत्रीय गठबंधन नेटवर्क, इन बातों पर अंक देता है:

  • लिखित सुरक्षा गारंटी;
  • दूसरे इंडेक्स देशों में तैनात सहयोगी सेनाएँ;
  • सहयोगियों के साथ संयुक्त प्रशिक्षण, साझा अभियान और हथियारों की खरीद।

इस क्षेत्र में भारत का कोई संधि वाला सहयोगी नहीं है। यह रणनीतिक स्वायत्तता को अहमियत देने वाली विदेश नीति का सोचा-समझा नतीजा है। इस तरह बना पैमाना भारत को उन छोटे देशों से नीचे रखेगा, जिनके सहयोगी हैं। 2025 में फिलीपींस और थाईलैंड, दोनों ने उसे पीछे छोड़ दिया। क्वाड जैसे समूह गठबंधन नहीं, संवाद हैं। इसलिए इन्हें रक्षा कूटनीति में गिना हुआ मानना बेहतर है, जहाँ इनका वजन कम है। यह जितना भारत पर फैसला है, उतना ही इस पैमाने की बनावट का गुण भी है।

आर्थिक संबंधों का पैमाना पूछता है कि दूसरी एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ किसी देश पर खरीदार, विक्रेता और निवेशक के रूप में कितनी निर्भर हैं। लोवी बताता है कि 2025 में क्षेत्र के भीतर भारत के व्यापारिक रिश्ते नहीं सुधरे, भले ही बाहर से निवेश का आना बढ़ा। उसका कुल आकलन यह है कि भारत की अपनी शक्ति धीरे-धीरे बढ़ रही है, लेकिन महत्वाकांक्षा और प्रभाव के बीच एक खाई बनी हुई है, खासकर चीन के मुकाबले। लोवी को यह भी मिला कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के क्षेत्रीय या वैश्विक नेतृत्व को विशेषज्ञों ने पहले से बेहतर नहीं आंका। उसने हिचकते हुए यह सुझाव भी दिया कि बहु-संरेखण (multi-alignment) और ग्लोबल साउथ पर जोर, अपने-आप ज्यादा प्रभाव दिलाने वाला रास्ता नहीं है।

यह इंडेक्स क्यों मायने रखता है, और कहाँ चूकता है

एशिया पावर इंडेक्स एशिया में शक्ति को अंकों में बाँधने की सबसे विस्तृत सार्वजनिक कोशिश है। फिर भी यह एक संस्थान का मॉडल ही है। उत्तर लिखते समय इस बात के दोनों हिस्से मायने रखते हैं।

इसकी खूबियाँ असली हैं:

  • यह संसाधनों को प्रभाव से अलग करता है। इससे वह सवाल सामने आता है जो हर विदेश मंत्रालय पूछता है: जो हमारे पास है, उसके बदले हमें मिल क्या रहा है?
  • यह पारदर्शी है। संकेतक, वजन और स्रोत प्रकाशित हैं। एक ऑनलाइन कैलकुलेटर की मदद से कोई भी पाठक पैमानों का वजन बदलकर देशों की रैंक दोबारा निकाल सकता है।
  • यह 2018 से चल रहा है, इसलिए बदलाव की दिशा अक्सर किसी एक साल की रैंक से ज्यादा कुछ बताती है।

इसकी सीमाएँ, जिनमें से ज्यादातर लोवी ने खुद मानी हैं:

  • वजन एक राय हैं। लोवी कहता है कि ये उसके विशेषज्ञों की सामूहिक राय दिखाते हैं, जो अकादमिक साहित्य और क्षेत्र के नीति-निर्माताओं से सलाह-मशविरे पर टिकी है। वह मानता है कि दूसरे लोग पैमानों को अलग वजन दे सकते हैं। उसका संवेदनशीलता विश्लेषण कहता है कि रैंकिंग को वजन से ज्यादा डेटा हिलाता है।
  • कुछ इनपुट राय पर टिके हैं। एशिया में सैन्य तैनाती की स्थिति, विदेश नीति और आर्थिक कूटनीति के आंकड़े विशेषज्ञ सर्वे से आते हैं। लोवी बताता है कि अमेरिकी नेतृत्व पर 2025 का सर्वे अक्टूबर 2025 के गाजा युद्धविराम से पहले हुआ था। इससे पता चलता है कि समय किसी धारणा वाले अंक को कैसे बदल सकता है।
  • ढाँचा एशिया का है। यह एक ही क्षेत्र के भीतर शक्ति की रैंक देता है। इसलिए किसी देश का दूसरी जगहों पर जो प्रभाव है, वह नहीं गिना जाता।
  • सापेक्ष अंक असली बढ़त छिपा लेते हैं। फ्रंटियर से दूरी वाले तरीके में कोई देश सुधरकर भी नीचे खिसक सकता है।
  • एक नजरिया। यह प्रोजेक्ट लोवी के एंगेजिंग एशिया प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो ऑस्ट्रेलियाई सरकार के पैसे से शुरू हुआ। जब विश्लेषण इस पर आता है कि नतीजों का ऑस्ट्रेलिया के लिए क्या मतलब है, तब यह बात जानना काम का है। लेकिन यह इस बात का सबूत नहीं है कि आंकड़े पक्षपाती हैं।

इस तरह का कोई भी इंडेक्स यह नहीं पकड़ सकता कि दबाव में कोई देश कैसे बर्ताव करता है। यानी संकट में उसके फैसलों की गुणवत्ता, और कीमत चुकाने के लिए उसकी जनता की तैयारी। युद्ध और बातचीत इन्हीं से तय होते हैं, और ये बातें 131 संकेतकों तक तभी पहुँचती हैं जब सब कुछ हो चुका होता है।

यह इंडेक्स दूसरे सूचकांकों और विचारों से कैसे जुड़ता है

एशिया पावर इंडेक्स समग्र रैंकिंग के एक परिवार का हिस्सा है, जो पूरे सिलेबस में बार-बार सामने आती हैं। इनमें से हर एक कुछ अलग मापती है:

  • ग्लोबल पीस इंडेक्स बताता है कि देश कितने शांतिपूर्ण हैं। बड़ी सेना किसी देश का शांति अंक घटा सकती है और साथ ही उसका शक्ति अंक बढ़ा सकती है।
  • मानव विकास सूचकांक लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और आय को मापता है, किसी देश की विदेश में पहुँच को नहीं।
  • ग्लोबल हंगर इंडेक्स अल्पपोषण और बाल मृत्यु दर पर नजर रखता है। यह याद दिलाता है कि लोवी के पैमाने पर प्रमुख शक्ति भी देश के भीतर बड़ी कमियाँ ढो सकती है।

सैद्धांतिक रूप से यह इंडेक्स व्यापक राष्ट्रीय शक्ति (comprehensive national power) को मापने की एक आधुनिक कोशिश है। यानी यह विचार कि किसी देश की ताकत कई क्षमताओं का जोड़ है, सिर्फ उसकी सेना या सिर्फ उसकी अर्थव्यवस्था नहीं। इसका सांस्कृतिक प्रभाव वाला पैमाना सॉफ्ट पावर के सबसे करीब है, यानी वह खिंचाव जो कोई देश अपनी संस्कृति और विचारों से पैदा करता है। यह इंडेक्स उस पुरानी बहस को भी अंकों में बदलता है कि एशिया द्विध्रुवीय बन रहा है या बहुध्रुवीय। बदलते शक्ति संतुलन वाला नोट इस बहस को सिद्धांत के स्तर पर उठाता है।

आज का एशिया पावर इंडेक्स

सितंबर 2026 तक, इंडेक्स की वेबसाइट पर 2025 का संस्करण ही सबसे ताजा है। एशिया पावर इंडेक्स 2025 में 27 देश और क्षेत्र हैं, जबकि 2018 में 25 थे। पापुआ न्यू गिनी 2020 में जुड़ा और तिमोर-लेस्ते 2024 में। लोवी ने 2025 के नतीजों को 7 निष्कर्षों में रखा:

  • अमेरिका जमीन गंवा रहा है;
  • चीन बढ़त बना रहा है;
  • भारत प्रमुख शक्ति के दर्जे पर पहुँचा;
  • रूस फिर उभर रहा है;
  • जापान जहाँ था, वहीं है;
  • दक्षिण-पूर्व एशिया के विजेता और पिछड़ने वाले;
  • ऑस्ट्रेलिया के सामने चुनौतियाँ।

अमेरिका अब भी सबसे आगे है, लेकिन उसका अंक 1.2 अंक गिरा, जो किसी भी देश की सबसे बड़ी गिरावट थी। वजह यह थी कि सर्वे में शामिल विशेषज्ञों ने उसकी विदेश नीति को कम अंक दिए। चीन 1.0 अंक चढ़ा। उसने कूटनीतिक प्रभाव में वह सबसे ऊँचा अंक दर्ज किया, जो इंडेक्स में आज तक किसी देश ने पाया है। 2 महाशक्तियों के बीच का फासला घटकर 6.8 अंक रह गया, जबकि चीन और भारत के बीच का फासला अब भी उसका करीब 5 गुना है।

भारत के लिए सबसे अहम निष्कर्ष वह है, जिसे लोवी साफ शब्दों में कहता है: भारत के 40 पार करने के बावजूद चीन के साथ उसकी क्षमता की खाई चौड़ी हुई है। लोवी इसे बहुध्रुवीय व्यवस्था के भारत के सपने के लिए एक लंबी चुनौती कहता है। भारत-चीन संबंधों वाला नोट इस खाई के द्विपक्षीय पहलू को देखता है। 2025 के कई निष्कर्ष, जापान में नेतृत्व की उथल-पुथल से लेकर रूस की वापसी तक, भारत की हिंद-प्रशांत रणनीति पर असर डालते हैं। ये रैंकिंग लोवी इंस्टीट्यूट का आकलन हैं, कोई आधिकारिक भारतीय या बहुपक्षीय आंकड़ा नहीं। इसलिए इन्हें लोवी के निष्कर्ष के रूप में ही उद्धृत कीजिए।

परीक्षा के लिए एशिया पावर इंडेक्स कैसे पढ़ें

यह इंडेक्स GS पेपर II के अंतरराष्ट्रीय संबंध वाले हिस्से में आता है। वहाँ यह भारत के उभार, चीन के साथ उसके रिश्तों और दूसरे देशों की नीतियों से भारत के हितों पर पड़ने वाले असर का सबूत बनता है। यह GS पेपर IV में राष्ट्रीय शक्ति वाले उत्तरों में भी काम आता है। दुनिया में भारत की जगह पर लिखे निबंधों में और PSIR वैकल्पिक विषय के शक्ति संतुलन वाले हिस्से में भी इसका इस्तेमाल कीजिए।

प्रीलिम्स में सूचकांकों पर सवाल अक्सर इस पर आते हैं कि उन्हें कौन जारी करता है और वे क्या मापते हैं। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 सवालों में से 104 अंतरराष्ट्रीय संबंधों के हैं। इस क्षेत्र में मुख्य परीक्षा के सवाल इंडेक्स के बारे में नहीं, बल्कि उस चीज के बारे में पूछते हैं जिसे इंडेक्स मापता है। मुख्य परीक्षा 2024 के GS पेपर II में उम्मीदवारों से इस कथन को समझाने को कहा गया: “पश्चिम भारत को चीन की आपूर्ति श्रृंखला पर निर्भरता घटाने के विकल्प के रूप में, और चीन के राजनीतिक और आर्थिक दबदबे का मुकाबला करने वाले रणनीतिक सहयोगी के रूप में बढ़ावा दे रहा है।” मुख्य परीक्षा 2020 के GS पेपर IV में उम्मीदवारों से कहा गया: “व्यापक राष्ट्रीय शक्ति (CNP) के निम्नलिखित तीन प्रमुख घटकों को बढ़ाने में नैतिकता और मूल्यों की भूमिका पर चर्चा कीजिए“। यह वही विचार है जिसे एशिया पावर इंडेक्स अंकों में बदलता है।

ये तथ्य दोहराइए:

  • प्रकाशक: लोवी इंस्टीट्यूट, सिडनी; पहला संस्करण 2018; 2022 का कोई संस्करण नहीं।
  • दायरा: 2025 में 27 देश और क्षेत्र, जो 2018 में 25 थे।
  • ढाँचा: 8 पैमाने, 30 उप-पैमाने, 131 संकेतक; वजन में संसाधनों का हिस्सा 55% और प्रभाव का 45%।
  • श्रेणियाँ: महाशक्ति 70+, प्रमुख शक्ति 40+, मध्यम शक्ति 10+, लघु शक्ति 10 से नीचे।
  • 2025 के शीर्ष चार: अमेरिका 80.5, चीन 73.7, भारत 40.0, जापान 38.8।
  • भारत: 2018 से 2023 तक 4था, 2024 से 3रा, 2025 में फिर प्रमुख शक्ति, पावर गैप -4.0, सबसे कमजोर रक्षा नेटवर्क पर (11वाँ)।

तीन उलझनें ज्यादातर पाठकों को फँसाती हैं। प्रकाशक को लेकर साफ रहिए: यह इंडेक्स ऑस्ट्रेलियाई है, UN का उत्पाद नहीं। रैंक और श्रेणी को अलग रखिए: 2024 में 3रा स्थान भी मध्यम शक्ति ही था। पावर गैप का चिह्न भी ठीक से पढ़िए: नेगेटिव गैप का मतलब है संसाधनों से कम प्रभाव। इसलिए भारत का -4.0 उसकी अपनी क्षमता के मुकाबले कम प्रदर्शन है, कोई सजा नहीं।

सूचकांकप्रकाशकक्या मापता हैअंक कैसे पढ़ें
एशिया पावर इंडेक्सलोवी इंस्टीट्यूटएशिया में शक्ति, संसाधन और प्रभाव के जरिएज्यादा यानी ज्यादा शक्ति
ग्लोबल पीस इंडेक्सइंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीसशांतिपूर्णताकम यानी ज्यादा शांत
मानव विकास सूचकांकUNDPस्वास्थ्य, शिक्षा और आयज्यादा यानी ज्यादा विकसित
ग्लोबल हंगर इंडेक्सवेल्टहंगरहिल्फे और कंसर्न वर्ल्डवाइडभूख और अल्पपोषणकम यानी कम भूख

एशिया पावर इंडेक्स को सबूत की तरह बरतिए, फैसले की तरह नहीं। भारत के लिए इसका सबसे काम का आंकड़ा 3रा स्थान नहीं, बल्कि -4.0 का पावर गैप है। क्योंकि यह आगे का काम बताता है: बड़ी अर्थव्यवस्था और सेना को साझेदारियों और प्रभाव में बदलना। जो उत्तर यह बात कहे, और साथ में 40 अंक की रेखा और चीन से फासला भी रखे, वह सिर्फ रैंक गिनाने वाले उत्तर से अलग दिखेगा।

सामान्य प्रश्न

एशिया पावर इंडेक्स क्या है?

एशिया पावर इंडेक्स ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट की सालाना रैंकिंग है, जो एशिया के 27 देशों और क्षेत्रों की सापेक्ष शक्ति को आंकती है। यह हर देश को 100 में से अंक देती है। इसके लिए 131 संकेतकों का इस्तेमाल होता है, जो संसाधन और प्रभाव के 8 पैमानों में बँटे हैं। इसे पहली बार 2018 में जारी किया गया था।

एशिया पावर इंडेक्स कौन जारी करता है?

एशिया पावर इंडेक्स को सिडनी का स्वतंत्र थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट जारी करता है। यह संयुक्त राष्ट्र या भारत सरकार की रैंकिंग नहीं है। यह प्रोजेक्ट संस्थान के एंगेजिंग एशिया प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो ऑस्ट्रेलियाई सरकार के पैसे से शुरू हुआ था।

एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत की रैंक क्या है?

2025 के संस्करण में भारत 40.0 अंक के साथ 27 में से 3रे स्थान पर रहा। उससे आगे अमेरिका (80.5) और चीन (73.7) थे। जापान 38.8 अंक के साथ 4थे स्थान पर रहा। भारत का अंक 2024 के मुकाबले 0.9 अंक बढ़ा।

क्या एशिया पावर इंडेक्स में भारत प्रमुख शक्ति है?

हाँ, 2025 के संस्करण के हिसाब से। इंडेक्स 40 या उससे ज्यादा अंक को प्रमुख शक्ति का दर्जा मानता है। कई साल इस सीमा से जरा नीचे रहने के बाद भारत के 40.0 ने इसे छू लिया। पहले संस्करण, यानी 2018 में भी भारत के पास यह लेबल था।

एशिया पावर इंडेक्स में पावर गैप क्या है?

पावर गैप किसी देश के असली अंक की तुलना उस अंक से करता है, जिसकी उसके संसाधनों से उम्मीद थी। इसके लिए रिग्रेशन ट्रेंड लाइन का इस्तेमाल होता है। पॉजिटिव गैप का मतलब है संसाधनों के अनुमान से ज्यादा प्रभाव, और नेगेटिव गैप का मतलब है कम। 2025 में भारत का गैप -4.0 था, जबकि जापान का +11.3।

एशिया पावर इंडेक्स के आठ पैमाने कौन-से हैं?

चार संसाधन पैमाने हैं: आर्थिक क्षमता, सैन्य क्षमता, लचीलापन और भविष्य के संसाधन। चार प्रभाव पैमाने हैं: आर्थिक संबंध, रक्षा नेटवर्क, कूटनीतिक प्रभाव और सांस्कृतिक प्रभाव। आर्थिक और सैन्य क्षमता का वजन 17.5% है, आर्थिक संबंधों का 15%, और बाकी हर पैमाने का 10%।

इंडेक्स में भारत रक्षा नेटवर्क पर कमजोर क्यों है?

रक्षा नेटवर्क का पैमाना औपचारिक गठबंधनों, सहयोगी सेनाओं की तैनाती और सहयोगियों से हथियार खरीद को अंक देता है। भारत की विदेश नीति रणनीतिक स्वायत्तता को तरजीह देती है, इसलिए इस क्षेत्र में उसका कोई संधि वाला सहयोगी नहीं है। इसी वजह से 2025 में इस पैमाने पर वह 11वें स्थान पर रहा। यह कुछ हद तक इस पैमाने की बनावट का नतीजा है।

क्या एशिया पावर इंडेक्स भरोसेमंद है?

यह विस्तृत और पारदर्शी है, क्योंकि इसके संकेतक, वजन और स्रोत प्रकाशित हैं। फिर भी यह एक संस्थान का मॉडल ही है। वजन लोवी की अपनी राय दिखाते हैं, और कई संकेतक विशेषज्ञ सर्वे से आते हैं। इसे किसी देश की शक्ति पर आखिरी फैसले की तरह नहीं, बल्कि रुझानों के सबूत की तरह इस्तेमाल करना सबसे अच्छा है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. एशिया पावर इंडेक्स के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसे लोवी इंस्टीट्यूट प्रकाशित करता है। 2. इसे पहली बार 2018 में प्रकाशित किया गया था। 3. यह देशों की रैंक केवल उनकी सैन्य क्षमता के आधार पर तय करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) सैन्य क्षमता 8 में से केवल 1 पैमाना है, और उसका वजन 17.5% है।

2. एशिया पावर इंडेक्स में जिस देश का समग्र शक्ति अंक 40 या उससे ज्यादा, लेकिन 70 से कम हो, उसे किस श्रेणी में रखा जाता है?

  • (a) महाशक्ति
  • (b) प्रमुख शक्ति
  • (c) मध्यम शक्ति
  • (d) लघु शक्ति

उत्तर: (b) इंडेक्स के दायरे हैं: 70+ महाशक्ति, 40+ प्रमुख शक्ति, 10+ मध्यम शक्ति और 10 से नीचे लघु शक्ति।

3. एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत जापान से आगे, 3रे स्थान पर रहा। 2. भारत का सबसे नीची रैंक वाला पैमाना रक्षा नेटवर्क था। 3. भारत का पावर गैप पॉजिटिव था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) भारत का पावर गैप -4.0 था, यानी उसका प्रभाव उसके संसाधनों से पीछे रहा।

4. निम्नलिखित में से कौन-सा एशिया पावर इंडेक्स के आठ पैमानों में से एक नहीं है?

  • (a) लचीलापन
  • (b) भविष्य के संसाधन
  • (c) सांस्कृतिक प्रभाव
  • (d) मानव विकास

उत्तर: (d) मानव विकास को UNDP का मानव विकास सूचकांक मापता है, एशिया पावर इंडेक्स नहीं।

5. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए (सूचकांक : प्रकाशक): 1. एशिया पावर इंडेक्स : लोवी इंस्टीट्यूट 2. ग्लोबल पीस इंडेक्स : इंस्टीट्यूट फॉर इकोनॉमिक्स एंड पीस 3. मानव विकास सूचकांक : विश्व बैंक। ऊपर दिए गए युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) मानव विकास सूचकांक UNDP प्रकाशित करता है, विश्व बैंक नहीं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. “चीन अपने आर्थिक संबंधों और सकारात्मक व्यापार अधिशेष को एशिया में संभावित सैन्य शक्ति का दर्जा हासिल करने के औजार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।” इस कथन के आलोक में, उसके पड़ोसी के रूप में भारत पर इसके असर की चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2017, GS पेपर II।
  2. एशिया पावर इंडेक्स यह अलग करके देखता है कि देशों के पास क्या है और वे उसका क्या करते हैं। 2025 के संस्करण में भारत के पावर गैप का इस्तेमाल करते हुए चर्चा कीजिए कि एशिया में भारत का प्रभाव उसके संसाधनों से पीछे क्यों है। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. “तय किए गए वजन और विशेषज्ञ सर्वे पर बनी रैंकिंग जितना शक्ति को मापती है, उतना ही शक्ति की धारणाओं को भी।” एशिया पावर इंडेक्स जैसे समग्र सूचकांकों के संदर्भ में इस कथन का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  4. रणनीतिक स्वायत्तता भारत को औपचारिक सैन्य गठबंधनों से बाहर रखती है। हिंद-प्रशांत में भारत की हैसियत के लिए इस चुनाव की कीमत और फायदों का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  5. क्या एशिया बहुध्रुवीय के बजाय द्विध्रुवीय बन रहा है? अमेरिका, चीन, भारत और जापान की सापेक्ष शक्ति के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

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Written by

Rahul Puri Sir

Director & Mentor · Anantam IAS

Rahul Puri is the Director & Mentor at Anantam IAS. He leads the institution's teaching philosophy — focused not on syllabus completion but on the thinking, clarity and consistency that actually crack UPSC. A long-time mentor to hundreds of civil services aspirants and interview toppers (including AIR 28, 48, 56, 73, 96, 106, 116, 143 in CSE 2025), he anchors Anantam's flagship Interview Guidance Programme.

Specialises in · Institutional leadership, mentoring and programme design Experience · 10+ years Visit website ↗

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