UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

कोरिओलिस बल: फेरेल का नियम, भूमध्य रेखा पर शून्य और बाथटब का मिथक

कोरिओलिस बल समझिए: पृथ्वी के घूमने से पैदा होने वाला आभासी बल, जो उत्तर में पवनों को दाईं ओर मोड़ता है, भूमध्य रेखा पर गायब हो जाता है और चक्रवातों को वहाँ से दूर रखता है।

A hurricane seen from orbit, its cloud bands spiralling around a clear central eye

कोरिओलिस बल वह बगल की ओर लगने वाला धक्का है, जो पृथ्वी का घूमना उसकी सतह पर चलती हर चीज को देता हुआ दिखता है। व्यापारिक पवन हो या महासागर की धारा, सब पर यह असर पड़ता है। यह बल चलती हवा और पानी को उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है। ध्रुवों पर यह सबसे ज्यादा होता है और भूमध्य रेखा पर शून्य। इसी पैटर्न की वजह से चक्रवात घूमते हैं, और इसी वजह से वे भूमध्य रेखा के पास लगभग कभी नहीं बनते। गैस्पार्ड-गुस्ताव डी कोरिओलिस ने 1835 में इसका गणित सामने रखा। यह बल, जिसे कोरिओलिस प्रभाव भी कहते हैं, उन्हीं के नाम पर है।

इस बल के बारे में दो धारणाएँ आम हैं, और गौर से देखने पर दोनों टिकती नहीं। पहली यह कि यह पाल पर लगती हवा जैसा कोई असली धक्का है। ऐसा नहीं है। यह तभी दिखता है जब गति को घूमती जमीन से नापा जाए, और मौसम का हर नक्शा वहीं से बनता है। दूसरी है बाथटब वाली कहानी, कि दिल्ली में पानी एक दिशा में घूमकर निकलता है और सिडनी में उल्टी दिशा में। इस बल को अपना असर दिखाने के लिए घंटों का समय और सैकड़ों किलोमीटर की दूरी चाहिए, जबकि सिंक एक मिनट से भी कम में खाली हो जाता है। दोनों गलतफहमियाँ एक ही बात से दूर होती हैं, और वह बात है अक्षांश का साइन।

कोरिओलिस बल क्या है

कोरिओलिस बल की मानक परिभाषा यांत्रिकी से आती है। यह एक जड़त्वीय बल (inertial force) है, जिसे आभासी या काल्पनिक बल भी कहते हैं। जब गति को किसी घूमते संदर्भ तंत्र (rotating frame of reference) के भीतर से नापा जाता है, जैसे पृथ्वी की सतह से, तो न्यूटन के नियमों में एक अतिरिक्त पद जोड़ना पड़ता है। वही पद कोरिओलिस बल है। ब्रिटानिका इसे इसी तरह परिभाषित करता है, और NOAA के हरिकेन शोधकर्ता इसे आभासी बल कहते हैं। यह बल गति की दिशा के समकोण पर काम करता है। इसलिए यह रास्ते को मोड़ तो देता है, लेकिन रफ्तार नहीं बदलता।

तथ्यविवरण
किसके नाम परगैस्पार्ड-गुस्ताव डी कोरिओलिस (1792-1843), फ्रांसीसी इंजीनियर और गणितज्ञ
कहाँ बताया गयाSur les équations du mouvement relatif des systèmes de corps (पिंडों के तंत्रों की सापेक्ष गति के समीकरणों पर), 1835
बल का प्रकारजड़त्वीय (आभासी) बल, जो घूमते संदर्भ तंत्र में दिखाई देता है
दिशाउत्तरी गोलार्ध में गति के दाईं ओर, दक्षिणी में बाईं ओर (फेरेल का नियम)
प्रति इकाई द्रव्यमान पर परिमाण2Ωv sin φ, जहाँ Ω पृथ्वी की कोणीय चाल है, v चलती वस्तु की चाल और φ अक्षांश
भूमध्य रेखा परशून्य, क्योंकि sin 0° = 0
ध्रुवों परअधिकतम, क्योंकि sin 90° = 1
किन चीजों को आकार देता हैव्यापारिक पवनों की दिशा, भूविक्षेपी पवनें (geostrophic wind), चक्रवात का घुमाव, महासागरीय गायर (gyre) और एकमैन बहाव
किसे आकार नहीं देतासिंक या बाथटब से निकलते पानी का भँवर

घूमती पृथ्वी पर कोरिओलिस बल कैसे काम करता है

कोरिओलिस बल रफ्तारों के बेमेल से पैदा होता है। पृथ्वी का घूमना उसके हर बिंदु को पूर्व की ओर ले जाता है। लेकिन भूमध्य रेखा पर खड़ा बिंदु एक चक्कर में पृथ्वी की पूरी परिधि नाप लेता है, जबकि ध्रुव के पास का बिंदु बस एक छोटा-सा घेरा पूरा करता है। जो भी चीज उत्तर या दक्षिण की ओर चलती है, वह अपनी पुरानी पूर्वी रफ्तार साथ लेकर ऐसी जमीन के ऊपर पहुँचती है जो अलग रफ्तार से चल रही है। इसलिए वह एक तरफ खिसक जाती है। पृथ्वी के घूमने के बारे में विस्तार से पृथ्वी का घूर्णन और परिक्रमण वाले नोट में पढ़िए।

अब इसे आँकड़ों में देखिए। NASA के मुताबिक पृथ्वी की भूमध्यरेखीय त्रिज्या 6,378 किलोमीटर है, और तारों के सापेक्ष नापी गई उसकी घूर्णन अवधि 23.93 घंटे है। तो भूमध्य रेखा पर एक बिंदु 2 × 3.1416 × 6,378 ÷ 23.93, यानी लगभग 1,670 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पूर्व की ओर चलता है। 30° उत्तर पर अक्षांश का घेरा cos 30°, यानी 0.866 के गुणक से छोटा हो जाता है। इसलिए वहाँ की जमीन लगभग 1,450 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पूर्व की ओर चलती है।

अब भूमध्य रेखा से ठीक उत्तर की ओर एक गोला दागिए। ब्रिटानिका यही उदाहरण देता है। गोला भूमध्य रेखा की 1,670 किलोमीटर प्रति घंटा वाली पूर्वी रफ्तार लेकर निकलता है। उसके नीचे की जमीन पूर्व की ओर लगातार धीमी होती जाती है। इसलिए गोला आगे निकल जाता है और अपने निशाने के पूर्व में जा गिरता है। उत्तर की ओर मुँह करके खड़े हों, तो पूर्व आपके दाएँ हाथ पर होता है। यही उत्तरी गोलार्ध का विक्षेपण है, जो नक्शे पर बस दो रफ्तारों के फर्क से बनता है।

ठीक पूर्व की ओर दागा गया गोला एक ही अक्षांश पर रहता है। तो क्या वह इस असर से बच जाता है? नहीं। ब्रिटानिका बताता है कि गोला किसी भी दिशा में दागा जाए, इसी तरह का खिसकाव होता है।

कक्षा में इसे मेरी-गो-राउंड, यानी गोल घूमने वाले झूले से समझाया जाता है। घूमते प्लेटफॉर्म पर एक गेंद सीधी लुढ़काइए। झूले पर बैठे व्यक्ति को गेंद मुड़ती दिखेगी, जबकि जमीन पर खड़े व्यक्ति को वह सीधी रेखा में जाती दिखेगी। यह उपमा एक बात सही पकड़ती है: मोड़ झूले पर बैठे व्यक्ति के नजरिए का हिस्सा है। लेकिन एक बात में यह गलत है। मेरी-गो-राउंड एक खड़ी धुरी पर घूमता है, और पृथ्वी की सतह पूरी तरह ऐसा सिर्फ ध्रुवों पर करती है। बाकी हर जगह वह स्थानीय ऊर्ध्वाधर के चारों ओर सिर्फ आंशिक रूप से घूमती है, और कितना घूमती है, यह अक्षांश का साइन बताता है।

भौतिकविद झूले पर बैठे व्यक्ति के इस नजरिए को घूमता संदर्भ तंत्र कहते हैं, और मौसम का हर चार्ट ऐसे ही तंत्र में बनता है।

हर अक्षांश पर कोरिओलिस बल कितना ताकतवर होता है

ब्रिटानिका के मुताबिक प्रति इकाई द्रव्यमान पर इसकी ताकत 2Ωv sin φ है। यही कोरिओलिस बल का सूत्र है। इसमें जो हिस्सा सिर्फ जगह पर निर्भर करता है, यानी 2Ω sin φ, उसे अमेरिकन मौसम विज्ञान सोसाइटी कोरिओलिस पैरामीटर कहती है और f से लिखती है। इस सूत्र के भीतर तीन चीजें बैठी हैं:

  • Ω, पृथ्वी की कोणीय चाल: 23.93 घंटे में एक चक्कर, यानी लगभग 0.0000729 रेडियन प्रति सेकंड। पृथ्वी के लिए यह तय है।
  • v, हवा या पानी की चाल: चाल दोगुनी कीजिए, तो धक्का भी दोगुना हो जाता है। NCERT भी कहती है कि पवन का वेग ज्यादा हो तो विक्षेपण ज्यादा होता है।
  • sin φ, अक्षांश का साइन: भूमध्य रेखा पर 0, 30° पर 0.5 और ध्रुवों पर 1।

तालिका का आखिरी कॉलम दिखाता है कि अक्षांश को सीधी रेखा की तरह पढ़ें, तो कौन-सा गलत जवाब मिलेगा।

अक्षांशकहाँ पड़ता हैsin φकोरिओलिस पैरामीटर f (प्रति सेकंड)ध्रुवीय मान का हिस्सासीधी रेखा वाला अनुमान (φ ÷ 90)
भूमध्य रेखा0.00000%0%
चक्रवात-मुक्त पट्टी का किनारा0.0870.0000139%6%
10°निम्न अक्षांश0.1740.00002517%11%
15°उष्णकटिबंध0.2590.00003826%17%
23.5°कर्क रेखा0.3990.00005840%26%
30°उपोष्ण उच्च दाब पट्टी0.5000.00007350%33%
45°मध्य अक्षांश0.7070.00010371%50%
60°ऊँचे मध्य अक्षांश0.8660.00012687%67%
90°ध्रुव1.0000.000146100%100%

NCERT के कक्षा 11 के वायुमंडलीय परिसंचरण वाले अध्याय में लिखा है कि यह बल अक्षांश के कोण के सीधे अनुपात में होता है। इसे शब्दशः पढ़ें, तो 30° पर बल ध्रुवीय मान का एक-तिहाई होना चाहिए, क्योंकि 30, 90 का एक-तिहाई है। लेकिन साइन कहता है आधा। यह अंतर उष्णकटिबंध में सबसे ज्यादा है, और भारत वहीं है। 15° उत्तर पर सीधी रेखा वाला अनुमान 17% देता है, जबकि साइन 26% देता है। किताब की पंक्ति बदलाव की दिशा सही बताती है, लेकिन कोई भी गणना करनी हो, तो नियम साइन वाला ही है।

भूमध्य रेखा पर कोरिओलिस बल शून्य क्यों है

उत्तरी ध्रुव पर जमीन आपके पैरों के नीचे दिन में एक बार घूमती है, ठीक किसी टर्नटेबल की तरह। वहाँ पृथ्वी का पूरा घूमना आपके स्थानीय ऊर्ध्वाधर के चारों ओर होता है। भूमध्य रेखा पर जमीन आपके ऊर्ध्वाधर के चारों ओर जरा भी मरोड़ नहीं खाती। वह धुरी के चारों ओर वैसे ही घूमती है जैसे पहिये के किनारे का कोई बिंदु, और यहाँ धुरी सपाट लेटी हुई उत्तर की ओर इशारा करती है। कोरिओलिस पैरामीटर सिर्फ इसी मरोड़ को नापता है, और अमेरिकन मौसम विज्ञान सोसाइटी इसे इसी तरह परिभाषित करती है। इसलिए क्षैतिज बल ध्रुवों पर पूरा होता है और भूमध्य रेखा पर गायब।

भूमध्य रेखा के आसपास भी यह कमजोर ही रहता है: 5° पर यह ध्रुवीय मान का सिर्फ 9% होता है। NCERT समझाती है कि कोरिओलिस बल न हो, तो पवन समदाब रेखाओं (isobars) को सीधे काटते हुए निम्न दाब में घुस जाती है और उसे भर देती है। समदाब रेखाएँ वे रेखाएँ हैं जो बराबर दाब वाली जगहों को जोड़ती हैं। इसलिए निम्न दाब कभी गहराकर चक्रवात नहीं बन पाता।

यह धक्का सिर्फ घंटों और लंबी दूरी में ही क्यों मायने रखता है

30° उत्तर पर 10 मीटर प्रति सेकंड, यानी 36 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हवा लीजिए। इसका बगल की ओर त्वरण 2 × 0.0000729 × 10 × 0.5, यानी लगभग 0.00073 मीटर/सेकंड² है। यह गुरुत्व के दस-हजारवें हिस्से से भी कम है। किसी कमरे के भीतर यह कुछ भी नहीं, लेकिन यह कभी रुकता नहीं। एक घंटे में यह हवा 36 किलोमीटर चलती है, और जिस रेखा पर चली थी, उससे लगभग 4.7 किलोमीटर दाईं ओर पहुँच जाती है। पूरे दिन में यही लगातार खिसकाव निम्न दाब की ओर जाती हवा को उसके चारों ओर चक्कर लगाने वाली हवा बना देता है।

फेरेल का नियम और इसे समझने वाले लोग

फेरेल का नियम दिशा वाली इसी बात को नियम की शक्ल में रखता है: पृथ्वी पर किसी भी दिशा में चलती वस्तु उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती है। इसका नाम अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक विलियम फेरेल (1817-1891) के नाम पर पड़ा। यह विचार कई कदमों में आकार लेता गया:

  • 1835: कोरिओलिस दिखाते हैं कि घूमते संदर्भ तंत्र में भी न्यूटन के नियम लागू रहते हैं, बशर्ते गति के समकोण पर काम करने वाला एक अतिरिक्त जड़त्वीय बल जोड़ दिया जाए।
  • 1856: फेरेल का निबंध An Essay on the Winds and Currents of the Ocean (महासागर की पवनों और धाराओं पर एक निबंध) अक्टूबर में नैशविल जर्नल में छपता है। इसमें वे तर्क देते हैं कि पृथ्वी का घूमना पवनों और धाराओं, दोनों को जरूर मोड़ता होगा।
  • 1857: डच मौसम वैज्ञानिक सी.एच.डी. बाइस बैलट प्रेक्षण के आधार पर पवन और दाब का एक नियम बताते हैं, और बाद में मानते हैं कि फेरेल यह बात पहले कह चुके थे।
  • 1858: फेरेल वह नियम बताते हैं जिसे आज फेरेल का नियम कहा जाता है।
  • 1902: वाग्न वालफ्रिड एकमैन उस सर्पिल का सिद्धांत देते हैं, जो यह विक्षेपण हवा से चलने वाले समुद्री पानी में पैदा करता है।

फेरेल ने वायुमंडल के सामान्य परिसंचरण का तीन कोशिकाओं वाला चित्र भी बनाया था। NCERT आज भी पछुआ पवनों वाली मध्य-अक्षांशीय कोशिका को फेरेल कोशिका (Ferrel cell) कहती है। लेकिन डिक्शनरी ऑफ साइंटिफिक बायोग्राफी एक चेतावनी जोड़ती है: लगभग 1950 से तीन कोशिकाओं वाले इस औसत चित्र को पढ़ाने का एक ढाँचा माना जाता है, ऐसा पैटर्न नहीं जिसकी आँकड़े पुष्टि करते हों।

फेरेल का नियम याद रखना हो, तो उसी दिशा में मुँह कीजिए जिधर हवा जा रही है: उत्तरी गोलार्ध में वह आपके दाएँ हाथ की ओर मुड़ती है। बाइस बैलट का नियम इसी भौतिकी को दूसरे सिरे से पढ़ता है। उत्तरी गोलार्ध में हवा की ओर पीठ करके खड़े हों, तो निम्न दाब आपके बाईं ओर होगा। ब्रिटानिका यह भी जोड़ता है कि यह नियम भूमध्य रेखा के पास लागू नहीं होता, क्योंकि वहाँ कोरिओलिस प्रभाव कमजोर है।

मौसम और महासागरों को कोरिओलिस बल कहाँ आकार देता है

जहाँ भी गति बड़े इलाके में फैली हो और घंटों या दिनों तक चले, वहाँ कोरिओलिस बल मायने रखता है। नीचे इसके पाँच असर हैं।

व्यापारिक पवनें और दक्षिण-पश्चिम मानसून

30° उत्तर के पास उपोष्ण उच्च दाब में नीचे उतरती हवा वापस भूमध्य रेखा की ओर बहती है। NOAA बताता है कि कोरिओलिस प्रभाव उसे दाईं ओर मोड़ देता है, इसलिए वह उत्तर-पूर्व से उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनों के रूप में पहुँचती है। दक्षिणी गोलार्ध में इसका आईने जैसा उल्टा प्रवाह दक्षिण-पूर्व से आता है। ये दोनों अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) में मिलती हैं, जिसे NOAA लगभग 5° उत्तर और 5° दक्षिण के बीच रखता है। पट्टी-दर-पट्टी पूरी तस्वीर वायुदाब पेटियाँ और पवन तंत्र वाले नोट में है।

इसका सबसे साफ उदाहरण भारत में मिलता है। जुलाई तक ITCZ गंगा के मैदान के ऊपर लगभग 20° उत्तर से 25° उत्तर पर पहुँच जाता है, और दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें 40° पूर्व और 60° पूर्व के बीच भूमध्य रेखा पार करके इधर खिंच आती हैं। भूमध्य रेखा के उत्तर में कोरिओलिस बल उन्हें बाईं के बजाय दाईं ओर मोड़ देता है, और वे दक्षिण-पश्चिम से पहुँचती हैं। NCERT की भारत: भौतिक पर्यावरण दक्षिण-पश्चिम मानसून को दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों का ही विस्तार बताती है, जो भूमध्य रेखा पार करने के बाद मुड़ जाती हैं। आगे की कहानी भारतीय मानसून वाले नोट में है।

भूविक्षेपी पवनें

भूविक्षेपी पवन वह पवन है जिसमें दो धक्के एक-दूसरे को काट देते हैं। दाब प्रवणता बल हवा को उच्च दाब से निम्न दाब की ओर, समदाब रेखाओं के समकोण पर धकेलता है। कोरिओलिस बल चलती हवा के समकोण पर काम करता है। NCERT का नियम है कि 2 से 3 किलोमीटर ऊपर, जहाँ घर्षण नहीं होता, समदाब रेखाएँ सीधी हों तो ये दोनों बल बराबर हो जाते हैं, और पवन उनके समानांतर बहती है।

जमीन के पास घर्षण हवा को धीमा कर देता है। NCERT के मुताबिक घर्षण 1 से 3 किलोमीटर की ऊँचाई तक असर डालता है और समुद्र के ऊपर सबसे कमजोर होता है। धीमी हवा पर कोरिओलिस का धक्का भी कमजोर पड़ता है। इसलिए सतह की पवनें समदाब रेखाओं को काटते हुए निम्न दाब की ओर बढ़ती हैं।

चक्रवात और 5 डिग्री का नियम

चक्रवात के भीतर घुमाव कोरिओलिस बल से आता है, और यही बल निम्न दाब को भरने से रोकता है। उत्तरी गोलार्ध में निम्न दाब की ओर तेजी से आती हवा अपनी दाईं ओर मुड़ जाती है। इसलिए वह केंद्र के चारों ओर घड़ी की सुई की उल्टी दिशा में घूमती है, जिसे NCERT वामावर्त कहती है। दक्षिणी गोलार्ध में घुमाव घड़ी की सुई की दिशा में होता है।

भूमध्य रेखा के पास इन दोनों में से किसी भी काम के लिए बल बहुत कम है। NCERT की भारत: भौतिक पर्यावरण चक्रवात-मुक्त पट्टी को 0° से 5° अक्षांश के बीच रखती है। NOAA के हरिकेन शोधकर्ता कहते हैं कि तूफान को भूमध्य रेखा से कम से कम 300 मील दूर होना चाहिए, यानी लगभग 480 किलोमीटर, या अक्षांश के 4° से थोड़ा ज्यादा। दोनों आँकड़े मोटे तौर पर एक ही सीमा बताते हैं। चक्रवात कुछ खास समुद्रों में ही क्यों जमा होते हैं, यह उष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चक्रवात वाले नोट में है।

महासागरीय गायर

NCERT महासागरीय धाराओं के पीछे चार मुख्य बल गिनाती है:

  • सूरज की गर्मी, जिससे पानी फैलता है;
  • पवन, जो सतह के पानी को घसीटती है;
  • गुरुत्व, जो जमा हुए पानी को ढलान पर नीचे खींचता है;
  • कोरिओलिस बल, जो चलते पानी को उत्तर में दाईं ओर और दक्षिण में बाईं ओर मोड़ता है।

मुड़ता हुआ पानी उन ढेरों के चारों ओर घूमता है, जो पवन और गर्मी मिलकर बनाते हैं। इन बड़े घेरों को गायर कहते हैं। NOAA 5 बड़े गायर गिनता है: उत्तरी और दक्षिणी अटलांटिक में एक-एक, उत्तरी और दक्षिणी प्रशांत में एक-एक, और एक हिंद महासागर में। भूमध्य रेखा के उत्तर में ये घड़ी की सुई की दिशा में घूमते हैं और दक्षिण में उल्टी दिशा में। भूमध्य रेखा पर कोई गायर नहीं बनता, क्योंकि वहाँ कोरिओलिस प्रभाव होता ही नहीं। नक्शा महासागरीय धाराएँ वाले नोट में है।

एकमैन परिवहन और उत्प्रवाह

पवन समुद्र की सिर्फ ऊपरी परत को घसीटती है। उसके नीचे की हर परत को ऊपर वाली परत घसीटती है, और वह थोड़ी धीमी चलती है। कोरिओलिस बल हर परत को मोड़ता जाता है, और NOAA के मुताबिक लगभग 100 मीटर की गहराई पर गति खत्म हो जाती है। इसका नतीजा है एकमैन सर्पिल (Ekman spiral)। ब्रिटानिका बताता है कि उत्तरी गोलार्ध में सतह की परत पवन की दिशा से 45° दाईं ओर चलती है, और काफी गहराई पर पानी सतह की उल्टी दिशा में भी बह सकता है। इस पूरी परत का कुल बहाव एकमैन परिवहन (Ekman transport) कहलाता है।

इसका फायदा दिखता है उत्प्रवाह (upwelling) में। NOAA अमेरिका के पश्चिमी तट का उदाहरण देता है। गर्मियों में वहाँ उत्तर से दक्षिण की ओर चलने वाली पवनें सतह के पानी को तट से दूर ले जाती हैं, और उसकी जगह लेने के लिए नीचे से ठंडा, पोषक तत्वों से भरा पानी ऊपर आता है। तट से दूर जाने वाली बात कोरिओलिस बल समझाता है: पश्चिम की ओर मुँह वाले तट के साथ दक्षिण की ओर धकेला गया पानी दाईं ओर मुड़ता है, यानी पश्चिम की ओर, जमीन से दूर। NOAA अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तटों के पास मछली पकड़ने के इलाकों को साल भर चलने वाले तटीय उत्प्रवाह से जोड़ता है। इसकी पूरी ज्यामिति एकमैन परिवहन वाले नोट में समझाई गई है।

क्या कोरिओलिस बल तय करता है कि सिंक का पानी किस दिशा में घूमकर निकलेगा?

नहीं। NOAA का हरिकेन शोध विभाग कहता है कि कोरिओलिस बल इतना ताकतवर नहीं है कि सिंक और टॉयलेट पर असर डाल सके। दोनों गोलार्धों में उल्टी दिशा में फ्लश होने की बात को वह मिथक बताता है। बेसिन में बनने वाला भँवर कहीं ज्यादा ताकतवर वजहों से आता है, खासकर उसकी बनावट से और भरते समय पानी में बची रह गई गति से।

आँकड़े इसकी वजह दिखाते हैं। 30° उत्तर पर कोरिओलिस पैरामीटर लगभग 0.000073 प्रति सेकंड है। इसका व्युत्क्रम लगभग 13,700 सेकंड, यानी करीब चार घंटे बैठता है। मोटे तौर पर इतना समय यह बल चलते पानी को एक रेडियन, यानी लगभग 57°, घुमाने में लेता है। सिंक एक मिनट से भी कम में खाली हो जाता है।

यह मिथक एक सच्चे तथ्य से उधार लिया गया है: चक्रवात हर गोलार्ध में सचमुच एक ही दिशा में घूमते हैं। लेकिन NCERT बंगाल की खाड़ी के चक्रवात का व्यास 600 से 1,200 किलोमीटर बताती है, और वह कई दिनों तक चलता है। सिंक आधा मीटर चौड़ा होता है और सेकंडों में खाली हो जाता है।

आज का कोरिओलिस बल: चक्रवात सेन्यार और 5 डिग्री का नियम

किसी भौतिक बल की कोई कानूनी स्थिति नहीं होती जिस पर नजर रखनी पड़े, इसलिए काम का अपडेट सबूतों से आता है। NCERT के कक्षा 11 वाले अध्याय के 2026-27 के पुनर्मुद्रण में भी वही विवरण है, 1844 वाली तारीख समेत। लेकिन नवंबर 2025 में मौसम ने 5 डिग्री वाले नियम की परीक्षा ले ली।

नवंबर 2025 के आखिर में प्रायद्वीपीय मलेशिया और सुमात्रा के बीच मलक्का जलडमरूमध्य के ऊपर चक्रवाती तूफान सेन्यार बना। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की 27 नवंबर 2025 की प्रेस विज्ञप्ति ने उसके कमजोर पड़ते केंद्र को लगभग 3.7° उत्तर पर बताया, यानी NCERT की चक्रवात-मुक्त पट्टी के भीतर। NASA की अर्थ ऑब्जर्वेटरी ने 5 दिसंबर 2025 को लिखा कि इस जलडमरूमध्य में बनने वाला यह सिर्फ दूसरा दर्ज उष्णकटिबंधीय चक्रवात है। वहाँ कोरिओलिस प्रभाव आमतौर पर इतना कमजोर होता है कि तूफान संगठित नहीं हो पाते।

उसी विज्ञप्ति में श्रीलंका के तट के पास लगभग 6.7° उत्तर पर एक गहरे अवदाब का जिक्र था। चक्रवात दितवाह वाले ब्रीफ के मुताबिक यह उसी सुबह बाद में चक्रवाती तूफान दितवाह बन गया। एक ही सुबह 3.7° और 6.7° पर दो तूफान दिखाते हैं कि 5 डिग्री वाला नियम एक बहुत मजबूत प्रवृत्ति है, कोई दीवार नहीं। सेन्यार आखिर संगठित कैसे हुआ, यह सवाल उस पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों के लिए है।

परीक्षा के लिए कोरिओलिस बल कैसे पढ़ें

कोरिओलिस बल पाठ्यक्रम में तीन जगह आता है:

  • GS पेपर I में, विश्व के भौतिक भूगोल के तहत, जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान वाले हिस्से में;
  • प्रीलिम्स में, भारत और विश्व के भौतिक भूगोल में;
  • भूगोल वैकल्पिक विषय के पेपर I में, जलवायु विज्ञान और समुद्र विज्ञान में।

प्रश्न में इसका नाम कम ही आता है, लेकिन यही वह कदम है जो पवनों या धाराओं के वर्णन को व्याख्या में बदल देता है। मुख्य परीक्षा 2015 के GS पेपर I में पूछा गया था: “महासागरीय धाराओं की उत्पत्ति के लिए जिम्मेदार कारकों को समझाइए। वे क्षेत्रीय जलवायु, मत्स्यन और नौवहन को कैसे प्रभावित करती हैं?” और मुख्य परीक्षा 2014 के GS पेपर I में पूछा गया: “उष्णकटिबंधीय चक्रवात अधिकतर दक्षिण चीन सागर, बंगाल की खाड़ी और मैक्सिको की खाड़ी तक ही सीमित रहते हैं। क्यों?

दोनों में से किसी प्रश्न में इस बल का नाम नहीं है, लेकिन दोनों को इसकी जरूरत है। यह धाराओं के पीछे का एक मुख्य बल है, और तीनों चक्रवात क्षेत्रों के भूमध्य रेखा से काफी दूर होने की एक वजह भी यही है। प्रीलिम्स की बात करें, तो Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में 2013 से 2026 तक के 1,403 प्रश्नों में से 82 पर भूगोल का टैग लगा है।

इन्हें तब तक दोहराइए, जब तक ये बिना सोचे याद न आने लगें:

  • 1835: घूमते तंत्रों में सापेक्ष गति पर कोरिओलिस का शोध-पत्र।
  • 2Ωv sin φ: प्रति इकाई द्रव्यमान पर बल; अकेला 2Ω sin φ कोरिओलिस पैरामीटर f है।
  • भूमध्य रेखा पर शून्य, ध्रुवों पर अधिकतम: 30° पर ध्रुवीय मान का आधा, क्योंकि sin 30° = 0.5।
  • फेरेल का नियम: उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर, दक्षिणी में बाईं ओर; विलियम फेरेल ने इसे 1858 में बताया।
  • भूविक्षेपी पवन: दाब प्रवणता बल और कोरिओलिस बल का संतुलन, सीधी समदाब रेखाओं के समानांतर, लगभग 2 से 3 किलोमीटर की ऊँचाई से ऊपर।
  • चक्रवात: नियम के तौर पर NCERT की 0° से 5° वाली पट्टी में कोई नहीं; NOAA के मुताबिक भूमध्य रेखा से कम से कम 300 मील दूर।
  • गायर: 5 बड़े गायर, उत्तर में घड़ी की सुई की दिशा में और दक्षिण में उल्टी दिशा में।

चार उलझनें अंक कटवाती हैं:

  • 1835 या 1844। NCERT के कक्षा 11 वाले अध्याय में लिखा है कि कोरिओलिस ने यह बल 1844 में बताया। ब्रिटानिका शोध-पत्र की तारीख 1835 बताता है, और 1844 को वह साल बताता है जब ठोस पिंडों की यांत्रिकी पर उनका ग्रंथ उनकी मृत्यु के बाद छपा। अगर प्रश्न साल पर टिका हो, तो 1835 ही बचाव लायक जवाब है।
  • अक्षांश या उसका साइन। बल sin φ के साथ बढ़ता है, φ के साथ नहीं। इसलिए 30° पर यह ध्रुवीय मान का आधा होता है, एक-तिहाई नहीं।
  • दाईं ओर मुड़ना, फिर भी घड़ी की उल्टी दिशा में घूमना। उत्तरी गोलार्ध में दोनों बातें सही हैं। निम्न दाब की ओर हर तरफ से आती हवा अपनी-अपनी दाईं ओर मुड़ती है, इसलिए पूरा घेरा निम्न दाब के चारों ओर घड़ी की उल्टी दिशा में घूमता है। उच्च दाब से बाहर निकलती हवा उसके चारों ओर घड़ी की दिशा में घूमती है।
  • फेरेल का नियम या बाइस बैलट का नियम। फेरेल का नियम विक्षेपण की दिशा बताता है। बाइस बैलट का नियम पवन से दाब पढ़ता है: उत्तर में हवा की ओर पीठ कीजिए, तो निम्न दाब बाईं ओर होगा।

कोरिओलिस बल को उन दूसरे बलों के साथ रखकर देखना भी मदद करता है, जिन्हें NCERT पवन के लिए गिनाती है:

बलक्या करता हैदिशाकहाँ सबसे ज्यादा मायने रखता है
दाब प्रवणता बलपवन को शुरू करता है, उच्च दाब से निम्न दाब की ओरसमदाब रेखाओं के समकोण परजहाँ समदाब रेखाएँ पास-पास हों
कोरिओलिस बलचलती हवा को उसकी रफ्तार बदले बिना मोड़ता हैगति के समकोण पर: उत्तर में दाईं ओर, दक्षिण में बाईं ओरध्रुवों की ओर; भूमध्य रेखा पर शून्य
घर्षणपवन को धीमा करता है और उसे समदाब रेखाएँ काटने देता हैगति के विपरीतसतह के पास, 1 से 3 किलोमीटर ऊपर तक फीका पड़ जाता है; समुद्र के ऊपर सबसे कम
गुरुत्वहवा को नीचे थामे रखता हैनीचे की ओरहर जगह; यह सारी हवा पर काम करता है

कोरिओलिस बल उस अभ्यर्थी का साथ देता है, जो इसे असरों की सूची की जगह एक नियम की तरह सीखता है। अक्षांश का साइन और उत्तर में दाईं ओर का मोड़ पक्का कर लीजिए। फिर पाठ्यक्रम की हर पवन और हर धारा उसी नियम का इस्तेमाल बन जाती है, रटने वाला एक और तथ्य नहीं। लेकिन बाथटब वाली कहानी गलत लिख दी, तो बाकी ठीक-ठाक जवाब भी परीक्षक को बता देगा कि बात समझ में आई ही नहीं।

सामान्य प्रश्न

आसान शब्दों में कोरिओलिस बल क्या है?

कोरिओलिस बल वह आभासी, बगल की ओर लगने वाला धक्का है, जो पृथ्वी का घूमना चलती हवा, पानी और प्रक्षेप्यों को देता है। यह उन्हें उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मोड़ देता है। इसे आभासी इसलिए कहते हैं, क्योंकि यह तभी दिखता है जब गति को घूमती पृथ्वी से नापा जाए, लेकिन पवनों और धाराओं पर इसके असर पूरी तरह असली हैं।

कोरिओलिस बल भूमध्य रेखा पर शून्य क्यों होता है?

कोरिओलिस बल अक्षांश के साइन पर निर्भर करता है, और sin 0° शून्य है। भौतिक रूप से देखें, तो पृथ्वी के घूमने पर भूमध्य रेखा की जमीन स्थानीय ऊर्ध्वाधर के चारों ओर मरोड़ नहीं खाती। वह धुरी के चारों ओर पहिये के किनारे के किसी बिंदु की तरह घूमती है। मरोड़ न होने से वहाँ क्षैतिज गति को बगल की ओर कोई विक्षेपण नहीं मिलता, और दोनों तरफ कई डिग्री तक यह बल कमजोर ही रहता है।

फेरेल का नियम क्या है?

फेरेल का नियम कहता है कि पृथ्वी पर किसी भी दिशा में चलती वस्तु उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ जाती है। इसका नाम अमेरिकी मौसम वैज्ञानिक विलियम फेरेल के नाम पर है, जिन्होंने इसे 1858 में बताया था। यह कोरिओलिस बल का दिशा वाला नियम है, जिसे पवनों और महासागरीय धाराओं पर लागू किया जाता है।

कोरिओलिस बल का सूत्र क्या है?

प्रति इकाई द्रव्यमान पर कोरिओलिस बल 2Ωv sin φ होता है, जहाँ Ω पृथ्वी की कोणीय चाल है, v चलती वस्तु की चाल है और φ अक्षांश है। 2Ω sin φ वाले पद को कोरिओलिस पैरामीटर कहते हैं। Ω तय है, इसलिए यह बल चाल और अक्षांश, दोनों के साथ बढ़ता है, और 30° पर अपने ध्रुवीय मान का आधा होता है।

क्या कोरिओलिस बल तय करता है कि सिंक का पानी किस दिशा में निकलेगा?

नहीं। सिंक या बाथटब से निकलता पानी इतना छोटा और इतना जल्दी खत्म होने वाला मामला है कि कोरिओलिस बल उस पर असर डालने के लिए बहुत कमजोर पड़ता है। NOAA के हरिकेन शोधकर्ता दोनों गोलार्धों में उल्टी दिशा में फ्लश होने की कहानी को मिथक कहते हैं। भँवर बेसिन की बनावट से और पानी में पहले से मौजूद गति से आता है।

भूमध्य रेखा के पास चक्रवात क्यों नहीं बनते?

चक्रवात को घुमाव शुरू करने और निम्न दाब वाले केंद्र को भरने से रोकने के लिए कोरिओलिस बल चाहिए। भूमध्य रेखा के पास यह बल शून्य या बहुत कमजोर होता है, इसलिए अंदर आती हवा निम्न दाब के चारों ओर घूमने की बजाय सीधे उसमें चली जाती है। NCERT चक्रवात-मुक्त पट्टी को 0° से 5° अक्षांश के बीच रखती है, हालाँकि नवंबर 2025 के चक्रवाती तूफान सेन्यार जैसे दुर्लभ तूफान इसके भीतर भी बने हैं।

क्या कोरिओलिस बल असली बल है?

यह एक जड़त्वीय बल है, जिसे भौतिकविद आभासी या काल्पनिक बल भी कहते हैं। अंतरिक्ष से देखने वाले को चलती वस्तु सीधी रेखा में जाती दिखती है, जबकि नीचे पृथ्वी घूमती रहती है, यानी कोई असली धक्का नहीं लग रहा। लेकिन पृथ्वी पर खड़े प्रेक्षक को, और सारा मौसम यहीं से नापा जाता है, पवनें और धाराएँ किधर जाएँगी, इसका अनुमान लगाने के लिए यह बल जोड़ना ही पड़ता है।

कोरिओलिस बल की खोज किसने की, और कब?

फ्रांसीसी इंजीनियर और गणितज्ञ गैस्पार्ड-गुस्ताव डी कोरिओलिस ने 1835 में पिंडों के तंत्रों की सापेक्ष गति के समीकरणों पर लिखे एक शोध-पत्र में इसका वर्णन किया। NCERT के कक्षा 11 वाले अध्याय में साल 1844 दिया गया है, जब ठोस पिंडों की यांत्रिकी पर उनका ग्रंथ उनकी मृत्यु के बाद छपा था। बल के लिए ब्रिटानिका जो तारीख दर्ज करता है, वह 1835 है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. कोरिओलिस बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह ध्रुवों पर अधिकतम और भूमध्य रेखा पर शून्य होता है। 2. यह चलती हवा की चाल बदलता है, लेकिन उसकी दिशा नहीं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a) यह बल गति के समकोण पर काम करता है, इसलिए दिशा बदलता है और चाल को वैसा ही छोड़ देता है; इसका परिमाण sin φ के साथ बदलता है।

2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तरी गोलार्ध में चलती हवा दाईं ओर मुड़ जाती है। 2. भूविक्षेपी पवन घर्षण परत के ऊपर सीधी समदाब रेखाओं के समानांतर बहती है। 3. घरेलू सिंक से पानी किस दिशा में निकलेगा, यह कोरिओलिस बल तय करता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) कोरिओलिस बल सिंक पर असर डालने के लिए बहुत कमजोर है, क्योंकि सिंक एक मिनट से भी कम में खाली हो जाता है।

3. समान चाल के लिए, किस अक्षांश पर चलती वस्तु पर कोरिओलिस बल ध्रुवों वाले मान का आधा होता है?

  • (a) 15°
  • (b) 30°
  • (c) 45°
  • (d) 60°

उत्तर: (b) बल sin φ के साथ बदलता है, और sin 30° = 0.5।

4. उष्णकटिबंधीय चक्रवात 0° और 5° अक्षांश के बीच शायद ही बनते हैं, इसकी मुख्य वजह यह है कि:

  • (a) वहाँ समुद्र की सतह का तापमान 27°C से नीचे रहता है
  • (b) वहाँ कोरिओलिस बल घुमाव शुरू करने के लिए बहुत कमजोर है
  • (c) भूमध्यरेखीय समुद्रों के ऊपर नमी की कोई आपूर्ति नहीं होती
  • (d) वहाँ व्यापारिक पवनें कभी नहीं मिलतीं

उत्तर: (b) कोरिओलिस बल कम होने से हवा निम्न दाब के चारों ओर घूमने की बजाय सीधे उसमें जाकर उसे भर देती है।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उत्तरी गोलार्ध के बड़े उपोष्ण गायर घड़ी की सुई की दिशा में घूमते हैं। 2. एकमैन सर्पिल में गहराई पर पानी सतह की धारा की उल्टी दिशा में चल सकता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) NOAA उत्तर में घड़ी की दिशा में घूमते गायरों का वर्णन करता है, और एकमैन की उन गहरी परतों का भी, जो मुड़ते-मुड़ते सतह की धारा की उल्टी दिशा में बहने लगती हैं।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. महासागरीय धाराओं को प्रभावित करने वाले बल कौन-से हैं? विश्व के मत्स्य उद्योग में उनकी भूमिका का वर्णन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2022, GS पेपर I।
  2. कोरिओलिस बल को आभासी बल कहा जाता है, फिर भी ग्रहीय पवनों का पैटर्न यही तय करता है। इस दिखने वाले विरोधाभास को समझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)
  3. उष्णकटिबंधीय चक्रवात भूमध्य रेखा के 5 डिग्री के भीतर शायद ही क्यों बनते हैं? कोरिओलिस बल और हाल के अपवादों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  4. समझाइए कि कोरिओलिस बल भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनों को दक्षिण-पश्चिम मानसून में कैसे बदल देता है। (10 अंक, 150 शब्द)
  5. भूविक्षेपी पवन और सतही पवन में अंतर स्पष्ट कीजिए। घर्षण और कोरिओलिस बल मिलकर इस अंतर को कैसे समझाते हैं? (15 अंक, 250 शब्द)

Share this

PDF

Gaurav Tripathi Sir

Written by

Gaurav Tripathi Sir

Faculty — Geography & Environment · Anantam IAS

Gaurav Tripathi handles Geography and Environment at Anantam IAS. His classroom focus is map-based learning, conceptual clarity across physical and human geography, and linking static geography to the year's environment and ecology current affairs.

Specialises in · Physical, human and Indian geography; environment and ecology Experience · 10+ years Visit website ↗

UPSC की तैयारी हिंदी माध्यम में — एक निशुल्क डेमो क्लास

न कोई सेल्स कॉल, न कोई ब्रोशर। सोमवार सुबह की असली GS क्लास देखिए — हमारे अनुभवी शिक्षकों के साथ।