UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

खारदुंग ला: असली ऊँचाई, सबसे ऊँची सड़क का भ्रम और सियाचिन का रास्ता

खारदुंग ला को समझिए: दर्रा कहाँ है, 18,379 फीट वाला बोर्ड गलत क्यों है, सबसे ऊँची सड़क का रिकॉर्ड किसके पास है और सियाचिन के लिए यह दर्रा क्यों अहम है।

Switchback road climbing towards Khardung La across barren slopes above the Leh valley, Ladakh

खारदुंग ला लद्दाख के लेह जिले में लद्दाख श्रेणी पर बना एक पहाड़ी दर्रा है। सड़क के रास्ते यह लेह से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में पड़ता है। खारदुंग ला दर्रा लेह से आने वाली सड़क को नीचे श्योक और नुब्रा घाटियों तक ले जाता है। इसलिए यह लेह और नुब्रा के गाँवों के बीच रोज का रास्ता है। यही सड़क उन सैनिकों तक रसद भी पहुँचाती है जो 1984 से सियाचिन की ऊँचाइयों पर डटे हैं।

इस दर्रे के साथ दो धारणाएँ चलती हैं, और दोनों ऊपर चोटी पर लगे साइनबोर्ड से निकली हैं। पहली यह कि दर्रा 18,379 फीट ऊँचा है। दूसरी यह कि यह दुनिया की सबसे ऊँची मोटर चलने लायक सड़क है। दोनों में से कोई भी बात जाँच में नहीं टिकती। खुद रक्षा मंत्रालय ने 2021 में इस दर्रे की ऊँचाई 17,582 फीट बताई थी। और सबसे ऊँची सड़क का गिनीज रिकॉर्ड नवंबर 2021 से उमलिंग ला के नाम है, जो लद्दाख की ही एक दूसरी सड़क है। यह नोट पहले ऊँचाई और रिकॉर्ड का सवाल सुलझाता है। फिर यह समझाता है कि इसके बावजूद खारदुंग ला क्यों अहम है।

खारदुंग ला कहाँ है और यह किसे जोड़ता है?

खारदुंग ला लद्दाख श्रेणी को पार करने वाला एक सड़क दर्रा है। लद्दाख श्रेणी वह पर्वत-कटक है जो लेह के आसपास की सिंधु घाटी को उसके उत्तर में पड़ने वाली श्योक घाटी से अलग करती है। लद्दाखी भाषा में ला का मतलब दर्रा होता है। इसीलिए इस इलाके के इतने सारे दर्रों के नाम एक ही तरह खत्म होते हैं। सरकारी कागजों में यह नाम अक्सर जोड़कर खारदुंगला लिखा जाता है। भारत के पर्वतीय दर्रों वाला नोट इसे हिमालयी और ट्रांस-हिमालयी दर्रों के बीच रखकर देखता है। यहाँ सिर्फ इस दर्रे से जुड़े तथ्य दिए गए हैं।

तथ्यविवरण
स्थितिलेह जिला, केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख; सड़क से लेह से करीब 40 किलोमीटर (लेह जिला प्रशासन)
श्रेणीलद्दाख श्रेणी, सिंधु घाटी (लेह) और श्योक घाटी के बीच
किसे जोड़ता हैलेह को श्योक और नुब्रा घाटियों से, और आगे सियाचिन बेस कैंप की ओर
साइनबोर्ड पर लिखी ऊँचाई5,602 मीटर (18,379 फीट), यही आँकड़ा लेह जिले का पर्यटन पेज भी दोहराता है
मापी गई ऊँचाईकरीब 5,359 मीटर (17,582 फीट): रक्षा मंत्रालय (PIB, 4 अगस्त 2021), सैटेलाइट से मिले ऊँचाई डेटा से भी मेल खाती है
सड़क बनाने और खुली रखने वालासीमा सड़क संगठन (BRO): सड़क का श्रेय प्रोजेक्ट हिमांक (गठन 1985) को जाता है; प्रोजेक्ट विजयक (गठन 2010) इसे सर्दियों में खुला रखता है
सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़क?नहीं। नवंबर 2021 से गिनीज रिकॉर्ड उमलिंग ला के नाम है, जिसकी ऊँचाई 5,798 मीटर (19,024 फीट) है; अक्टूबर 2025 में BRO ने मिग ला पर 19,400 फीट की सड़क की जानकारी दी
परमिट6 अगस्त 2021 के आदेश के बाद भारतीयों को इनर लाइन परमिट की जरूरत नहीं; विदेशियों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट चाहिए
प्रस्तावित सुरंग5.5 किलोमीटर लंबी, हर मौसम में चलने वाली सुरंग; मार्च 2026 में BRO ने कहा कि वह इसका पैसा रक्षा बजट से देगा

तालिका की दो पंक्तियों में दो-दो आँकड़े हैं: एक ऊँचाई वाली पंक्ति, दूसरी रिकॉर्ड वाली। यह तालिका की लापरवाही नहीं है। ठीक यही दो जगहें हैं जहाँ आम तौर पर सुनाई जाने वाली कहानी और मापा गया रिकॉर्ड अलग-अलग राह पकड़ लेते हैं। इसलिए अगले दो हिस्से इन्हें एक-एक करके देखते हैं।

खारदुंग ला की असली ऊँचाई कितनी है?

मापने पर खारदुंग ला की ऊँचाई करीब 5,359 मीटर (17,582 फीट) आती है। चोटी के साइनबोर्ड पर जो आँकड़ा पेंट किया गया है, वह 5,602 मीटर (18,379 फीट) है, और लेह जिले का अपना पर्यटन पेज भी यही आँकड़ा दोहराता है। यानी बोर्ड दर्रे को उसकी असली ऊँचाई से करीब 240 मीटर ज्यादा ऊँचा बताता है।

बड़ा आँकड़ा तो सड़क से भी पुराना है। विलियम ओ. डगलस अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के जज थे और लद्दाख से होकर गुजरे थे। उन्होंने 1952 में छपी अपनी किताब बियॉन्ड द हाई हिमालयाज (Beyond the High Himalayas) में खारदोंग पास की ऊँचाई 18,380 फीट लिखी। तब इस दर्रे पर मोटर सड़क बनने में बहुत समय बाकी था, और सैटेलाइट से इसे मापे जाने में तो दशकों बाकी थे। फिर भी यह आँकड़ा चिपक गया। यात्रा-वृत्तांत से यह साइनबोर्ड पर पहुँचा, और साइनबोर्ड से गाइडबुकों और वेबसाइटों तक, जिनमें सरकारी वेबसाइटें भी शामिल हैं।

तीन अलग-अलग और स्वतंत्र जाँचें दर्रे को इससे नीचे रखती हैं:

  • रक्षा मंत्रालय। उमलिंग ला सड़क की घोषणा करने वाली 4 अगस्त 2021 की PIB प्रेस विज्ञप्ति ने खारदुंग ला की ऊँचाई 17,582 फीट बताई। मीटर में यह 5,359 मीटर बैठती है।
  • पर्वतारोहण का एक रिकॉर्ड। हिमालयन जर्नल (खंड 54) में छपी एक अभियान रिपोर्ट दर्रे को 5,362 मीटर पर रखती है। यह रिपोर्ट उन पर्वतारोहियों ने लिखी थी जो लेह के उत्तर में पुराने रेशम मार्ग पर दोबारा चले थे।
  • सैटेलाइट से मिला ऊँचाई डेटा। दो सार्वजनिक ऊँचाई मॉडल, नासा का SRTM और ASTER मॉडल, दर्रे के निर्देशांकों पर 5,348 से 5,362 मीटर की ऊँचाई दिखाते हैं।

इस अंतर को ऐसे समझिए कि आँखों के सामने तस्वीर बन जाए। 5,602 में से 5,359 घटाइए, तो 243 मीटर बचते हैं, यानी करीब 800 फीट। यह एक के ऊपर एक रखी तीन कुतुब मीनारों से भी ज्यादा है। इतना बड़ा अंतर गोल करने (राउंडिंग) की गलती नहीं हो सकता। यह सीधे-सीधे एक अलग आँकड़ा है।

तो लिखित उत्तर में कौन-सा आँकड़ा जाए? मापा गया आँकड़ा, और साथ में एक छोटे वाक्यांश में अंतर का जिक्र: करीब 5,359 मीटर (17,582 फीट), हालांकि चोटी का बोर्ड 5,602 मीटर बताता है। दोनों आँकड़े जानना समझदारी है, क्योंकि सरकारी पेजों पर आज भी दोनों मिलते हैं। और जो लिखने वाला जानता है कि यह आँकड़ा विवादित है, वह बोर्ड दोहराने वाले से ज्यादा जानकार लगता है।

क्या खारदुंग ला दुनिया की सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़क है?

नहीं। दुनिया की सबसे ऊँची सड़क का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स खिताब पूर्वी लद्दाख में उमलिंग ला के ऊपर से जाने वाली सड़क के पास है। इसकी मापी गई ऊँचाई 5,798 मीटर (19,024 फीट) है, और इसे नवंबर 2021 में मान्यता मिली। अक्टूबर 2025 में BRO ने इससे भी ऊँची एक सड़क की जानकारी दी, जो मिग ला पर 19,400 फीट की ऊँचाई पर है।

ज्यादातर विवरण यही हिस्सा छोड़ देते हैं। खारदुंग ला अपने साइनबोर्ड वाले आँकड़े के सहारे भी यह रिकॉर्ड नहीं जीत सकता था। उमलिंग ला से पहले यह खिताब बोलीविया की उस सड़क के पास था जो उतुरुंकु ज्वालामुखी की ओर चढ़ती है। PIB के मुताबिक उसकी ऊँचाई 18,953 फीट थी। यह खारदुंग ला के बोर्ड पर लिखे 18,379 फीट से ज्यादा है, और दर्रे की मापी गई 17,582 फीट से तो काफी ऊपर है। “दुनिया में सबसे ऊँचा” वाला टैग एक स्थानीय दावा था, जिसकी किसी रिकॉर्ड रखने वाली संस्था ने कभी पुष्टि नहीं की।

सड़क या दर्राऊँचाईरिकॉर्ड क्या कहता है
मिग ला (लिकारु-मिग ला-फुकचे सड़क), लद्दाख19,400 फीटऑल इंडिया रेडियो ने 4 अक्टूबर 2025 को इसे BRO (प्रोजेक्ट हिमांक) का नया रिकॉर्ड बताया; सितंबर 2026 में भी गिनीज की सार्वजनिक सूची में उमलिंग ला ही था
उमलिंग ला (चिसुमले-डेमचोक सड़क), लद्दाख5,798 मीटर (19,024 फीट)गिनीज के अनुसार सबसे ज्यादा ऊँचाई वाली सड़क, 9 नवंबर 2021 को हासिल
उतुरुंकु ज्वालामुखी तक की सड़क, बोलीविया18,953 फीटपहले का रिकॉर्ड, जिसे उमलिंग ला ने तोड़ा (PIB के अनुसार)
खारदुंग ला (लेह-नुब्रा सड़क), लद्दाखसाइनबोर्ड पर 18,379 फीट; मापी गई 17,582 फीटकभी पुष्ट रिकॉर्ड नहीं रहा

इस तालिका के दो आँकड़े जाँच होते ही एक बार नीचे आ चुके हैं। एक खारदुंग ला का है। दूसरा उमलिंग ला का: अगस्त 2021 में BRO की पहली प्रेस विज्ञप्ति ने इस सड़क को 19,300 फीट पर बताया था, और तीन महीने बाद गिनीज ने जाँचकर जो आँकड़ा दर्ज किया, वह 19,024 फीट था। बोर्ड पर लिखी ऊँचाई तब तक सिर्फ एक दावा है, जब तक कोई उसे माप न ले। सोचने की यह आदत यहाँ के किसी भी एक आँकड़े से ज्यादा कीमती है।

मिग ला के बारे में एक सधा हुआ वाक्य चाहिए। ऑल इंडिया रेडियो ने 4 अक्टूबर 2025 को बताया कि BRO के प्रोजेक्ट हिमांक ने मिग ला सड़क बना ली है और अपना ही गिनीज रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह सड़क सीमा के पास बसे फुकचे गाँव तक जाने वाले एक नए रास्ते का हिस्सा है। सितंबर 2026 में देखे गए गिनीज के रिकॉर्ड पेज पर अब भी उमलिंग ला का ही नाम है। वह पेज यह भी कहता है कि नए रिकॉर्ड हमेशा तुरंत ऑनलाइन नहीं छपते। इसे लिखने का सुरक्षित तरीका यह है: उमलिंग ला के पास 2021 से गिनीज का खिताब है, और अक्टूबर 2025 से BRO मिग ला पर इससे ऊँची सड़क की जानकारी दे चुका है।

कारवाँ का दर्रा सेना की सड़क कैसे बना?

सदियों तक खारदुंग ला लेह से मध्य एशिया जाने वाले गर्मियों के कारवाँ मार्ग पर सामान लादकर चलने वाले जानवरों का दर्रा था। मोटर सड़क बहुत बाद में आई। और सीमा के बदलने के साथ इस सड़क का मकसद भी बदल गया।

यारकंद तक का कारवाँ मार्ग

गर्मियों में लेह से निकलने वाले व्यापारी खारदुंग ला पार करते थे, नीचे नुब्रा घाटी में उतरते थे और फिर सासेर ला पर चढ़कर काराकोरम दर्रे की ओर बढ़ते थे। हिमालयन जर्नल का विवरण बताता है कि लेह के व्यापारी सासेर ला के आगे पड़ाव वाले शिविरों पर अपना माल उतार देते थे। वहाँ मध्य एशिया के व्यापारी यह माल अपने घोड़ों पर लादते और काराकोरम दर्रे के पार यारकंद और काशगर तक ले जाते थे। चीन की 1949 की क्रांति के बाद सीमा सील हुई, और यह व्यापार खत्म हो गया।

डगलस की 1952 की किताब भी सिंधु के उत्तर वाले रास्ते को लेह, इस दर्रे और यारकंद की राह बताती है। यारकंद को उन्होंने सिंकियांग का एक प्राचीन व्यापारिक केंद्र कहा था। उस रास्ते का दूर वाला छोर आज बंद है। लेकिन उसके पहले ऊँचे दर्रे से अब मोटर सड़क गुजरती है।

मोटर सड़क और सियाचिन

दर्रे के ऊपर से जाने वाली मोटर सड़क सीमा सड़क संगठन (BRO) की सड़क है। आप अक्सर पढ़ेंगे कि यह 1976 में बनी और 1988 में आम गाड़ियों के लिए खोली गई। लेकिन ये दोनों साल BRO या किसी सरकारी रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि दूसरे स्रोतों के विवरणों से आते हैं। इसलिए उत्तर में इन्हें अपुष्ट मानकर ही चलिए।

काम कौन करता है, इसका रिकॉर्ड ज्यादा पक्का है। द ट्रिब्यून खारदुंग ला, तांगलांग ला और चांग ला के ऊपर की सड़कों का श्रेय प्रोजेक्ट हिमांक को देता है। यह BRO का वह प्रोजेक्ट है जिसका गठन 1985 में पूर्वी लद्दाख के लिए हुआ था। 2023 की एक रिपोर्ट सर्दियों भर खारदुंग ला को खुला रखने का श्रेय प्रोजेक्ट विजयक को देती है, जिसका गठन 2010 में हुआ। इसके कर्मचारी माइनस 25 डिग्री सेल्सियस में काम करते हैं।

व्यापार वाले इस दर्रे को सेना की अहम सड़क बनाने वाली घटना थी ऑपरेशन मेघदूत13 अप्रैल 1984 को थलसेना और वायुसेना सियाचिन ग्लेशियर पर पहुँचीं। मकसद था नुब्रा घाटी पर नजर रखने वाली साल्टोरो रिज की ऊँचाइयों को अपने कब्जे में लेना। तब से खारदुंग ला के ऊपर की सड़क नुब्रा के गाँवों की सड़क तो रही ही, ग्लेशियर पर तैनात सैनिकों की सप्लाई लाइन भी बन गई। 2023 की रिपोर्ट इसे दोनों की जीवनरेखा कहती है।

खारदुंग ला रणनीतिक रूप से अहम क्यों है?

खारदुंग ला इसलिए अहम है क्योंकि इसी से होकर लेह से उन घाटियों तक सीधी सड़क जाती है, जो आगे सियाचिन की ओर ले जाती हैं। सड़क के साथ-साथ उत्तर की ओर चलिए, तो भूगोल अपने आप साफ हो जाता है:

  • सिंधु घाटी में बसे लेह से सड़क करीब 40 किलोमीटर चढ़कर लद्दाख श्रेणी पर बने दर्रे तक पहुँचती है।
  • फिर यह उतरकर श्योक घाटी में खलसर पहुँचती है।
  • एक शाखा नुब्रा नदी के साथ-साथ तिरित होते हुए पनामिक तक जाती है, यानी सियाचिन बेस कैंप की ओर।
  • दूसरी शाखा श्योक के साथ चलकर हुंडर और डिस्किट पहुँचती है, और आगे तुरतुक की ओर बढ़ती है।

दोनों नदियाँ सिंधु नदी तंत्र का हिस्सा हैं। NCERT श्योक और नुब्रा को सिंधु की हिमालयी सहायक नदियों में गिनाता है। बाकी बेसिन का नक्शा सिंधु नदी तंत्र वाले नोट में मिलेगा।

नुब्रा घाटी सिर्फ ग्लेशियर तक जाने वाला गलियारा नहीं है। लेह जिला प्रशासन इसके बारे में ये तथ्य दर्ज करता है:

  • यह लेह से करीब 120 किलोमीटर उत्तर में है, और इसके पुराने नाम ल्दुमरा का मतलब है फूलों की घाटी।
  • दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊँट हुंडर के रेत के टीलों पर चरते हैं।
  • डिस्किट इस घाटी का सबसे बड़ा कस्बा है।
  • घाटी के पश्चिमी छोर पर बसा तुरतुक 1971 के युद्ध तक पाकिस्तान के नियंत्रण में था।
  • सियाचिन ग्लेशियर इस घाटी के ऊपरी सिरे पर है।

लद्दाख एक शीत मरुस्थल है, और नुब्रा में इसके दोनों रूप दिखते हैं: एक तरफ हुंडर में रेत के टीले, और दूसरी तरफ फलों के इतने बाग कि जिला प्रशासन इस घाटी को लद्दाख का फलों का बाग कहता है।

खारदुंग ला को नुब्रा घाटी का मुख्य दरवाजा समझिए। ज्यादातर आवाजाही इसी दरवाजे से होती है। और जब भूस्खलन या भारी बर्फबारी इसे बंद कर देती है, तो पीछे की हर चीज को इंतजार करना पड़ता है। लेकिन यह मिसाल एक जगह जाकर टूटती है, और यही टूटना मायने रखता है, क्योंकि इस घर में बगल के दरवाजे भी हैं।

चांग ला, डुरबुक और श्योक घाटी से होकर अघम के रास्ते जाने वाला एक लंबा घुमावदार रास्ता खारदुंग ला पार किए बिना नुब्रा पहुँचता है। अक्टूबर 2021 में BRO ने खलसर से अघम होते हुए श्योक तक के 70 किलोमीटर हिस्से को अपग्रेड करने का काम शुरू किया। उसी दिन उसने सिंधु घाटी के हनुथांग से तुरतुक तक, स्टकपुचन श्रेणी के पार, 26.6 किलोमीटर की एक नई सड़क का काम भी शुरू किया। PIB के मुताबिक यह सड़क खारदुंग ला पार किए बिना तुरतुक तक का सफर नौ घंटे से घटाकर साढ़े तीन घंटे कर देगी।

यहाँ एक भ्रम पहले ही दूर कर लीजिए। दौलत बेग ओल्डी की सड़क बिलकुल अलग रास्ता है। दरबुक-श्योक-DBO सड़क दरबुक से उत्तर की ओर श्योक घाटी में ऊपर जाती है, और 920 मीटर लंबी श्योक सुरंग इसी सड़क पर है। खारदुंग ला की सड़क नुब्रा और सियाचिन के काम आती है। सियाचिन ग्लेशियर और वह साल्टोरो रिज, जिस पर सियाचिन की चौकियाँ टिकी हैं, काराकोरम श्रेणी वाले नोट में समझाए गए हैं।

आज का खारदुंग ला

आज इस दर्रे को लेकर तीन सवाल अहम हैं: इसे कौन पार कर सकता है, क्या कोई सुरंग इसे बायपास करेगी, और इसका पुराना रिकॉर्ड वाला दावा अब कैसा दिखता है। हर जवाब के साथ एक तारीख जुड़ी है।

भारतीयों और विदेशियों के लिए परमिट

भारतीय नागरिकों को अब खारदुंग ला पार करने के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) की जरूरत नहीं है। ILP जिला प्रशासन की ओर से जारी होने वाला एक पास था। इसके सहारे कोई भारतीय पर्यटक तय समय के लिए लद्दाख के संरक्षित इलाकों में जा सकता था। इसकी समय-रेखा छोटी है:

  • 13 मार्च 2020। लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने कोविड-19 से बचाव के तौर पर पहले से जारी सारे ILP वापस ले लिए और नए ILP देना बंद कर दिया।
  • 6 अगस्त 2021। लद्दाख प्रशासन ने नुब्रा घाटी, खारदुंग ला, पैंगोंग त्सो, त्सो मोरीरी, तुरतुक और हानले समेत कई इलाकों में घरेलू पर्यटकों के लिए ILP की शर्त हटा दी।
  • अब। भारतीय पर्यटकों को आज भी लेह जिले के ऑनलाइन परमिट सिस्टम पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है और उसकी फीस भरनी होती है। जिले का नुब्रा पेज बताता है कि सियाचिन इलाका घरेलू पर्यटकों के लिए सिर्फ बेस कैंप तक खुला है।

विदेशियों के लिए रास्ता अलग है। उन्हें फॉरेनर्स (प्रोटेक्टेड एरियाज) ऑर्डर, 1958 के तहत प्रोटेक्टेड एरिया परमिट (PAP) लेना पड़ता है। गृह मंत्रालय ने 2018 में मंजूर सर्किटों की जो सूची जारी की, उसमें इस दर्रे से होकर जाने वाले दो सर्किट हैं: लेह-खारदुंग ला-खलसर-तिरित से पनामिक तक, और लेह-खारदुंग ला-खलसर से हुंडर तक। ये दो या उससे ज्यादा लोगों के उन समूहों के लिए खुले हैं जो किसी मान्यता प्राप्त ट्रैवल एजेंट के साथ ज्यादा से ज्यादा सात दिन के लिए जाएँ। ILP और PAP अलग-अलग कानूनों से क्यों निकलते हैं, यह इनर लाइन परमिट वाला नोट समझाता है।

खारदुंग ला सुरंग

दर्रे के नीचे 5.5 किलोमीटर लंबी, हर मौसम में काम आने वाली सुरंग का प्रस्ताव कम से कम 2022 से चर्चा में है। 24 नवंबर 2022 को लद्दाख प्रशासन ने बताया कि सलाहकार खारदुंग ला, फोटू ला, नमिका ला और की ला पर सुरंगों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। खारदुंग ला सुरंग के पक्ष में प्रशासन ने तीन वजहें गिनाईं:

  • इससे लेह से नुब्रा घाटी का सफर करीब एक घंटा छोटा हो जाएगा।
  • यह गाड़ियों को सड़क के उन हिस्सों से बचाकर निकालेगी जहाँ भूस्खलन और हिमस्खलन का खतरा रहता है।
  • यह खारदुंग ग्लेशियर को गाड़ियों की आवाजाही से पैदा होने वाली गर्मी से बचाएगी। यह ग्लेशियर लेह शहर के पानी का एक बड़ा स्रोत है।

फिर पैसे के सवाल पर परियोजना अटक गई। 24 मार्च 2026 को BRO ने कहा कि काम इसलिए शुरू नहीं हो पाया क्योंकि केंद्रशासित प्रदेश ने इसके लिए पैसा नहीं दिया। अब वह यह सुरंग प्राथमिकता के साथ रक्षा बजट से बनाएगा। रोहतांग दर्रे के नीचे बनी अटल सुरंग इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि ऊँचे दर्रे वाली सड़क की जगह सुरंग कैसे ले सकती है।

रिकॉर्ड और सड़क निर्माण का ताजा काम

रिकॉर्ड रखने वाली संस्था के अपने पेज पर आज भी उमलिंग ला का 2021 वाला गिनीज खिताब ही दर्ज है। BRO की मिग ला सड़क नया दावा है, जिसकी जानकारी 4 अक्टूबर 2025 को 19,400 फीट की ऊँचाई के साथ दी गई थी। खारदुंग ला इन दोनों में कहीं नहीं है। लेकिन इसके आसपास निर्माण का बड़ा अभियान जारी है। 7 दिसंबर 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख से BRO की 125 परियोजनाएँ देश को समर्पित कीं। यह BRO के इतिहास में एक दिन में हुआ सबसे बड़ा उद्घाटन था, और इसमें सबसे खास श्योक सुरंग थी। उस पूरी खेप की जानकारी BRO की सीमा बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं वाले नोट में है।

परीक्षा के लिए खारदुंग ला कैसे पढ़ें

खारदुंग ला सिलेबस में दो जगह आता है। GS पेपर I में यह हिमालय के भौतिक स्वरूप और लद्दाख के दर्रों का हिस्सा है। GS पेपर III में यह सीमा प्रबंधन और सीमा सड़कों से जुड़ता है। मुख्य परीक्षा इस दर्रे का नाम लेकर सवाल नहीं पूछती। वह लद्दाख और सीमा के बारे में पूछती है, और यह दर्रा वह ठोस उदाहरण है जो उत्तर का स्तर ऊपर उठा देता है।

मुख्य परीक्षा 2026 में GS पेपर III ने पूछा: “लद्दाख रणनीतिक रूप से चीन और पाकिस्तान के बीच स्थित है। स्थानीय लोगों का दिल और दिमाग जीतने के उपाय के तौर पर केंद्र सरकार के सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रमों (BADP) और सेना की नागरिक कार्रवाइयों की चर्चा कीजिए। साथ ही लद्दाख के लिए संविधान की छठी अनुसूची के प्रावधान लागू करने की माँग पर भी चर्चा कीजिए।” वहाँ कनेक्टिविटी पर लिखे उत्तर में सड़कों के नाम चाहिए। खारदुंग ला, उमलिंग ला और श्योक सुरंग वे तीन नाम हैं जिन्हें आपको सबसे पहले लिखना चाहिए।

मुख्य परीक्षा 2016 में GS पेपर III ने इसी का बड़ा रूप पूछा था: “दुर्गम भू-भाग और कुछ देशों के साथ शत्रुतापूर्ण संबंधों के कारण सीमा प्रबंधन एक जटिल काम है। प्रभावी सीमा प्रबंधन की चुनौतियों और रणनीतियों को स्पष्ट कीजिए।” “दुर्गम भू-भाग” वह वाक्यांश है जिसे यह दर्रा सबसे अच्छी तरह समझाता है।

प्रीलिम्स इस दर्रे के आसपास का नक्शा परखता है। 2020 के पेपर में पूछा गया था कि सियाचिन ग्लेशियर कहाँ है, और सही उत्तर था: नुब्रा घाटी के उत्तर में। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 सवालों में से 82 भूगोल के हैं। ऐसे सवालों में नंबर उसी को मिलते हैं जो जानता है कि कौन-सी घाटी किस दर्रे के पीछे है।

रिवीजन के लिए ये तथ्य साथ रखिए:

  • स्थिति: लद्दाख श्रेणी, लेह जिला; लेह से करीब 40 किलोमीटर; लेह को श्योक और नुब्रा घाटियों से जोड़ता है।
  • ऊँचाई: मापी गई करीब 5,359 मीटर (17,582 फीट); साइनबोर्ड पर 5,602 मीटर (18,379 फीट)।
  • सबसे ऊँची सड़क: उमलिंग ला, 5,798 मीटर (19,024 फीट), नवंबर 2021 से गिनीज रिकॉर्ड; मिग ला, 19,400 फीट, जिसकी जानकारी BRO ने अक्टूबर 2025 में दी।
  • बनाने वाले: BRO; सड़क का श्रेय प्रोजेक्ट हिमांक (गठन 1985) को जाता है, और प्रोजेक्ट विजयक (गठन 2010) इसे सर्दियों में खुला रखता है।
  • सियाचिन से जुड़ाव: ऑपरेशन मेघदूत 13 अप्रैल 1984 को शुरू हुआ, और दर्रे के ऊपर की सड़क ग्लेशियर तक की सप्लाई लाइन है।
  • परमिट: 6 अगस्त 2021 से भारतीयों के लिए कोई ILP नहीं; विदेशियों को PAP चाहिए।
  • सुरंग: 5.5 किलोमीटर की सुरंग प्रस्तावित है; मार्च 2026 में BRO ने कहा कि वह इसका पैसा रक्षा बजट से देगा।

चार भ्रम बार-बार सामने आते हैं, और हर एक का इलाज एक पंक्ति में है:

  • खारदुंग ला और काराकोरम दर्रा। खारदुंग ला लद्दाख श्रेणी पर बना एक भीतरी सड़क दर्रा है। काराकोरम दर्रा बहुत दूर उत्तर में, यारकंद जाने वाले पुराने कारवाँ मार्ग पर है। 1949 के बाद सीमा सील होने से वह रास्ता उस व्यापार के लिए बंद है।
  • खारदुंग ला और चांग ला। दोनों लेह से निकलने वाले सड़क दर्रे हैं। खारदुंग ला नुब्रा की ओर ले जाता है; चांग ला डुरबुक (दरबुक) और पैंगोंग की तरफ ले जाता है।
  • उमलिंग ला और मिग ला। गिनीज का खिताब उमलिंग ला के पास है (2021)। मिग ला BRO की नई और ज्यादा ऊँची सड़क है (2025)।
  • ILP और PAP। ILP भारतीयों के लिए था और अब हट चुका है; PAP विदेशियों के लिए है और आज भी लागू है।

आसपास के दर्रों को अलग-अलग याद रखने का सबसे आसान तरीका है यह देखना कि हर दर्रे से कौन-सी सड़क गुजरती है:

दर्राउससे गुजरने वाली सड़कक्या याद रखें
खारदुंग लालेह से श्योक और नुब्रा घाटियाँऊँचाई का विवाद और सियाचिन तक की सप्लाई लाइन
चांग लालेह से डुरबुक और पैंगोंग की तरफदरबुक तक ले जाता है, जहाँ से DS-DBO सड़क शुरू होती है
जोजी लाश्रीनगर से कारगिल और लेहश्रीनगर-लेह सड़क पर सर्दियों में रास्ता रोकने वाली अड़चन; अप्रैल 2025 में BRO ने सर्दियों में बंद होने के 31 दिन के भीतर इसे फिर खोल दिया
उमलिंग लाचिसुमले से डेमचोकगिनीज के अनुसार सबसे ऊँची सड़क, 19,024 फीट (2021)
मिग लालिकारु से फुकचे19,400 फीट, 2025 में BRO ने जानकारी दी
काराकोरम दर्राकोई सड़क नहीं; यारकंद जाने वाला पुराना कारवाँ मार्ग1949 के बाद सीमा सील होने पर व्यापार खत्म हुआ

खारदुंग ला छोटा विषय है, लेकिन इसमें बड़ा सबक छिपा है। यह किसी आँकड़े को दोहराने से पहले उसे जाँचने की आदत डालता है। और लद्दाख पर लिखे किसी भी उत्तर को टिकने के लिए एक ठोस सड़क देता है। इसे किसी रिकॉर्ड की तरह नहीं, बल्कि लेह और सियाचिन के बीच की कड़ी की तरह याद रखिए, क्योंकि सिलेबस असल में इसका इस्तेमाल इसी रूप में करता है।

सामान्य प्रश्न

खारदुंग ला किस श्रेणी और किस जिले में स्थित है?

खारदुंग ला केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के लेह जिले में, लद्दाख श्रेणी पर स्थित है। सड़क के रास्ते यह लेह से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में है। यह लेह के आसपास की सिंधु घाटी से सड़क को श्योक और नुब्रा घाटियों तक ले जाता है।

खारदुंग ला की असली ऊँचाई कितनी है?

मापने पर खारदुंग ला की ऊँचाई करीब 5,359 मीटर, यानी 17,582 फीट, आती है। यही आँकड़ा रक्षा मंत्रालय ने 2021 में इस्तेमाल किया था, और सैटेलाइट से मिला ऊँचाई डेटा भी इसी का समर्थन करता है। चोटी का साइनबोर्ड और कुछ पर्यटन पेज 5,602 मीटर, यानी 18,379 फीट, बताते हैं। यह एक पुराना आँकड़ा है, जो करीब 240 मीटर ज्यादा है।

क्या खारदुंग ला दुनिया की सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़क है?

नहीं। सबसे ऊँची सड़क का गिनीज रिकॉर्ड पूर्वी लद्दाख की उमलिंग ला सड़क के पास है, जिसकी ऊँचाई 5,798 मीटर या 19,024 फीट है और जिसे नवंबर 2021 में मान्यता मिली। अक्टूबर 2025 में BRO ने मिग ला पर इससे भी ऊँची, 19,400 फीट की सड़क की जानकारी दी। जबकि खारदुंग ला की मापी गई ऊँचाई करीब 17,582 फीट ही है।

खारदुंग ला दर्रा किस घाटी की ओर ले जाता है?

खारदुंग ला दर्रा लेह से चलकर खलसर पर श्योक घाटी में उतरता है। वहाँ सड़क दो हिस्सों में बँटती है: एक नुब्रा घाटी से होकर पनामिक और सियाचिन की ओर, और दूसरी श्योक के साथ-साथ हुंडर और डिस्किट की ओर। यही लेह और नुब्रा घाटी के बीच की सीधी सड़क है।

सियाचिन के लिए खारदुंग ला क्यों अहम है?

13 अप्रैल 1984 को ऑपरेशन मेघदूत शुरू होने के बाद से सेना नुब्रा घाटी के ऊपर की साल्टोरो रिज की ऊँचाइयों पर डटी है, और लेह से नुब्रा जाने वाली सड़क खारदुंग ला के ऊपर से गुजरती है। इसलिए यह दर्रा सियाचिन सेक्टर में तैनात सैनिकों की सप्लाई लाइन भी है और नुब्रा के गाँवों की जीवनरेखा भी। यही वजह है कि BRO इसे सर्दियों भर खुला रखता है।

क्या भारतीयों को खारदुंग ला के लिए इनर लाइन परमिट चाहिए?

नहीं। लद्दाख प्रशासन ने 6 अगस्त 2021 के एक आदेश से घरेलू पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट की शर्त हटा दी। भारतीय पर्यटकों को आज भी लेह जिले के ऑनलाइन परमिट सिस्टम पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। वहीं विदेशी नागरिकों को प्रोटेक्टेड एरिया परमिट लेना पड़ता है और मंजूर समूहों में ही यात्रा करनी होती है।

खारदुंग ला सड़क किसने बनाई और इसकी देखरेख कौन करता है?

यह सीमा सड़क संगठन की सड़क है। पूर्वी लद्दाख के लिए 1985 में गठित प्रोजेक्ट हिमांक को खारदुंग ला, तांगलांग ला और चांग ला के ऊपर की सड़कों का श्रेय दिया जाता है। वहीं 2010 में गठित प्रोजेक्ट विजयक इस दर्रे को सर्दियों भर खुला रखता है।

क्या खारदुंग ला के नीचे सुरंग बन रही है?

अभी नहीं। 5.5 किलोमीटर लंबी, हर मौसम में काम आने वाली सुरंग की योजना कम से कम 2022 से बनी हुई है। इसका मकसद लेह से नुब्रा का सफर एक घंटा छोटा करना और खारदुंग ग्लेशियर को बचाना है, जिससे लेह को पानी मिलता है। मार्च 2026 में BRO ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश ने इसके लिए पैसा नहीं दिया, इसलिए अब वह यह सुरंग रक्षा बजट से बनाएगा।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. खारदुंग ला के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह लद्दाख श्रेणी पर स्थित है। 2. इससे लेह से नुब्रा घाटी जाने वाली सड़क गुजरती है। 3. सबसे ऊँची मोटर योग्य सड़क का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड इसके नाम है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) सबसे ऊँची सड़क का गिनीज रिकॉर्ड उमलिंग ला सड़क के नाम है, जिसे नवंबर 2021 में मान्यता मिली।

2. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उमलिंग ला के ऊपर से जाने वाली सड़क पूर्वी लद्दाख में चिसुमले और डेमचोक को जोड़ती है। 2. गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने 2021 में उमलिंग ला सड़क को सबसे ज्यादा ऊँचाई वाली सड़क के रूप में मान्यता दी। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) उमलिंग ला से चिसुमले-डेमचोक सड़क गुजरती है, जिसे गिनीज ने नवंबर 2021 में 5,798 मीटर (19,024 फीट) की ऊँचाई पर मान्यता दी।

3. सियाचिन ग्लेशियर निम्नलिखित में से किस घाटी के ऊपरी सिरे पर स्थित है?

  • (a) जांस्कर घाटी
  • (b) नुब्रा घाटी
  • (c) सुरु घाटी
  • (d) स्पीति घाटी

उत्तर: (b) सियाचिन ग्लेशियर नुब्रा घाटी के ऊपरी हिस्से में है, और खारदुंग ला के ऊपर की सड़क इसी घाटी को लेह से जोड़ती है।

4. नुब्रा घाटी की यात्रा के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अगस्त 2021 से भारतीय नागरिकों को यहाँ जाने के लिए इनर लाइन परमिट की जरूरत नहीं है। 2. विदेशी नागरिकों को फॉरेनर्स (प्रोटेक्टेड एरियाज) ऑर्डर, 1958 के तहत जारी प्रोटेक्टेड एरिया परमिट चाहिए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) लद्दाख प्रशासन ने 6 अगस्त 2021 को घरेलू पर्यटकों के लिए ILP हटा दिया, जबकि विदेशियों के लिए PAP की व्यवस्था जारी है।

5. दर्रे और उससे गुजरने वाली सड़क के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. खारदुंग ला: लेह से नुब्रा घाटी 2. चांग ला: लेह से डुरबुक 3. जोजी ला: श्रीनगर से कारगिल। ऊपर दिए गए युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?

  • (a) केवल एक
  • (b) केवल दो
  • (c) तीनों
  • (d) कोई भी नहीं

उत्तर: (c) खारदुंग ला नुब्रा की ओर ले जाता है, चांग ला डुरबुक और पैंगोंग की तरफ, और जोजी ला से श्रीनगर-कारगिल-लेह सड़क गुजरती है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. चीन और पाकिस्तान के साथ भारत की सीमा लंबी और अशांत है, और यह विवादित मुद्दों से भरी है। सीमा पर टकराव वाले मुद्दों और सुरक्षा चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। साथ ही बताइए कि सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (BADP) के तहत इन इलाकों में कौन-सा विकास हो रहा है। सीमा बुनियादी ढाँचा और प्रबंधन (BIM) योजना के तहत हो रहा विकास भी बताइए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2024, GS पेपर III।
  2. विकास की पहलों और पर्यटन के नकारात्मक असर से पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे बहाल किया जा सकता है? (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2019, GS पेपर I।
  3. खारदुंग ला के ऊपर की सड़क सियाचिन सेक्टर के सैनिकों और नुब्रा घाटी के गाँवों, दोनों के काम आती है। लद्दाख में दोहरे इस्तेमाल वाली सड़कें सैन्य रसद और नागरिक जरूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाती हैं, इसका परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  4. प्रस्तावित खारदुंग ला सुरंग छोटे सफर और लेह को पानी देने वाले एक ग्लेशियर की सुरक्षा का वादा करती है। ट्रांस-हिमालय में ऊँचे दर्रों की जगह सुरंगें बनाने के फायदों और पारिस्थितिक जोखिमों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  5. 2021 में लद्दाख में घरेलू पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट हटाए जाने से संवेदनशील सीमावर्ती घाटियों तक लोगों की पहुँच बढ़ गई। नुब्रा घाटी में पर्यटन, सुरक्षा और पारिस्थितिकी के बीच संतुलन कैसे बनाया जा सकता है, इसका आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)

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Written by

Amit Singh Sir

Amit Singh teaches Geography and Indian Economy at Anantam IAS. His notes work through agriculture, industrial policy and India's capital markets, staying close to the Economic Survey and the Budget so students can answer GS III questions with current data.

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