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यू डाइस प्लस: स्कूल कोड, लॉगिन, स्टूडेंट मॉड्यूल और नो योर स्कूल

यू डाइस प्लस आसान भाषा में: पोर्टल कौन चलाता है, स्कूल को UDISE कोड कैसे मिलता है, राज्यवार लॉगिन और स्टूडेंट मॉड्यूल कैसे चलते हैं, और अभिभावक स्कूल की जानकारी कैसे देखें।

Illustration for the UDISE+ guide on Anantam IAS

यू डाइस प्लस (UDISE+, यानी Unified District Information System for Education Plus) शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग का राष्ट्रीय स्कूल डेटा पोर्टल है, जिसका पता udiseplus.gov.in है। प्री-प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक का हर मान्यता प्राप्त स्कूल हर शैक्षणिक वर्ष में इस पर अपना बुनियादी ढांचा, अपने शिक्षक और अपने हर छात्र का ब्योरा दर्ज करता है। ज्यादातर लोग यहां तीन कामों के लिए आते हैं: किसी स्कूल का 11 अंकों का UDISE कोड जानने के लिए, डेटा भरने वाले मॉड्यूल के राज्यवार लॉगिन के लिए, और सबके लिए खुली नो योर स्कूल (Know Your School) खोज के लिए।

ज्यादातर लोग एक गलत धारणा लेकर आते हैं। उन्हें लगता है कि यह ऐसी वेबसाइट है जिस पर अभिभावक या छात्र लॉगिन करते हैं। ऐसा नहीं है। लॉगिन सिर्फ स्कूलों के लिए हैं, और ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों के लिए। पासवर्ड की हर समस्या भी इसी सीढ़ी से ऊपर जाती है। अभिभावक पोर्टल का सार्वजनिक हिस्सा इस्तेमाल करते हैं, और छात्र का रिकॉर्ड स्कूल के स्टूडेंट मॉड्यूल के भीतर रहता है।

यू डाइस प्लस: एक नजर में

यू डाइस प्लस 2018-19 से चल रहा है। तब इसने पुराने UDISE सिस्टम की जगह ली थी। इसका डेटा ही स्कूलों के बारे में शिक्षा मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े हैं।

तथ्यविवरण
किसका पोर्टलस्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय; NIC ने बनाया और होस्ट किया
पोर्टलudiseplus.gov.in
कौन डेटा भरता हैऔपचारिक या विशेष शिक्षा देने वाले सभी मान्यता प्राप्त स्कूल, प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंडरी तक
मॉड्यूलस्कूल डायरेक्टरी, प्रोफाइल और सुविधाएं, टीचर मॉड्यूल, स्टूडेंट मॉड्यूल
मुख्य पहचान नंबर11 अंकों का UDISE कोड (स्कूल), 11 अंकों का परमानेंट एजुकेशन नंबर (छात्र), नेशनल टीचर कोड
आकार (शैक्षणिक वर्ष 2025-26)14.67 लाख स्कूल, 10.05 लाख सरकारी स्कूल, 24.72 करोड़ छात्र, 1.02 करोड़ शिक्षक
शुल्कयू डाइस प्लस की किसी भी सेवा का कोई शुल्क घोषित नहीं है
मददपहले ब्लॉक या जिला MIS; तकनीकी सवाल udiseplus-mhrd[at]gov[dot]in पर

UDISE+ क्या करता है और इसे कौन इस्तेमाल करता है

यू डाइस प्लस एक रिपोर्टिंग सिस्टम है, नागरिक सेवा वाला पोर्टल नहीं। स्कूल एक तय डेटा कैप्चर फॉर्मेट (DCF) भरता है। यह इमारतों, कक्षाओं, शौचालयों, प्रयोगशालाओं, शिक्षकों और छात्रों पर पूरे देश के लिए एक जैसी प्रश्नावली है। अधिकारी इसे एक-एक स्तर पर जांचते हैं, और उसके बाद ही यह आधिकारिक डेटा बनता है।

पोर्टल चार जुड़े हुए हिस्से (वर्टिकल) बताता है:

  • स्कूल डायरेक्टरी। स्कूलों को सिस्टम में जोड़ना और उनकी बुनियादी प्रोफाइल (प्रकार, श्रेणी, प्रबंधन, जगह) दर्ज करना। साथ में उन यूजर्स को जोड़ना जो डेटा भर सकते हैं।
  • स्कूल प्रोफाइल और सुविधाएं। इमारतें, कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, डिजिटल ढांचा, और रैंप, पीने का पानी और CWSN (विशेष जरूरत वाले बच्चों) के अनुकूल शौचालय जैसी सुविधाएं।
  • स्टूडेंट मॉड्यूल। हर छात्र का एक रिकॉर्ड, जिसमें उसकी सामान्य और शैक्षणिक प्रोफाइल होती है, और जो पूरी स्कूली पढ़ाई के दौरान बना रहता है।
  • टीचर प्रोफाइल। शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ का सामान्य, शैक्षणिक और नियुक्ति से जुड़ा ब्योरा।

इस्तेमाल करने वाले दो समूहों में बंटते हैं। स्कूल, ब्लॉक MIS स्टाफ, जिला और राज्य MIS समन्वयक और राष्ट्रीय एडमिनिस्ट्रेटर डेटा भरते हैं, जांचते हैं और प्रमाणित करते हैं। बाकी सब, यानी अभिभावक, शोधकर्ता और पत्रकार, सार्वजनिक डैशबोर्ड पढ़ते हैं। इस डेटा का महत्व पोर्टल से कहीं आगे तक जाता है। समग्र शिक्षा की योजना इसी से बनती है, और NEP 2020 के तहत प्रगति इसी पैमाने पर मापी जाती है।

UDISE कोड क्या है और नए स्कूल को यह कैसे मिलता है

UDISE कोड 11 अंकों का एक नंबर है, जो स्कूल की भौगोलिक जगह के आधार पर उसकी स्थायी राष्ट्रीय पहचान का काम करता है। यह स्कूल कोड सिर्फ उन स्कूलों को मिलता है जो मान्यता प्राप्त हैं और चल रहे हैं, या जिन्हें खुलने की मंजूरी मिल चुकी है।

कोड से जुड़े तीन नियम लोगों को अक्सर उलझा देते हैं:

  • यह कभी नहीं बदलता। FAQ कहता है कि एक बार कोड मिल गया, तो उसे बदला नहीं जा सकता। इसमें बदलाव सिर्फ शिक्षा मंत्रालय कर सकता है, और वह भी तभी जब स्कूल का जिला या राज्य बदल जाए।
  • स्कूल बंद होने पर भी यह बचा रहता है। बंद स्कूल का कोड उसी के नाम रहता है और सिस्टम में आर्काइव हो जाता है।
  • विलय हुए स्कूल का कोड चालू नहीं रहता। जब दो स्कूलों का विलय होता है, तो जिस स्कूल को मिलाया गया, उसे “merged” (विलय हुआ) दिखाया जाता है और उसका कोड चालू नहीं रहता।

पोर्टल के मुताबिक नए मान्यता प्राप्त स्कूल को कोड पांच स्टेप में मिलता है:

  1. स्कूल अपने दस्तावेज लेकर जिला स्तर के अधिकारी के पास जाता है, खासकर मान्यता पत्र या प्रमाण पत्र लेकर।
  2. जिला दस्तावेजों की जांच करता है, यू डाइस प्लस की स्कूल डायरेक्टरी में अनुरोध डालता है और उसे राज्य को भेज देता है।
  3. राज्य स्तर का अधिकारी ब्योरा और दस्तावेज देखता है। फिर वह या तो अनुरोध मंजूर करके आगे भेजता है, या स्पष्टीकरण के लिए वापस लौटा देता है।
  4. शिक्षा मंत्रालय अनुरोध की समीक्षा करता है, और वह भी इसे राज्य को लौटा सकता है।
  5. मंजूरी मिलने पर मंत्रालय कोड बनाता है। कोड बनाने का अधिकार सिर्फ मंत्रालय के पास है।

FAQ के मुताबिक राज्य की जांच पूरी होने के बाद इसमें करीब एक हफ्ता लगता है। लंबित अनुरोध की स्थिति देखने के लिए होम पेज पर Check Status Of New UDISE Code Application (नए UDISE कोड आवेदन की स्थिति देखें) पर जाइए और School Request Id या जवाब देने वाले व्यक्ति का मोबाइल नंबर डालिए। अगर दस्तावेज गलत या अधूरे हों, तो राज्य या मंत्रालय में से कोई भी अनुरोध खारिज कर सकता है।

यू डाइस प्लस लॉगिन: राज्यवार मॉड्यूल कैसे काम करते हैं

होम पेज पर एक अकेला लॉगिन बॉक्स नहीं है। Login For All Modules पर क्लिक कीजिए, Select State For Login में अपना राज्य चुनिए और GO दबाइए। केंद्रीय स्कूल व्यवस्थाएं भी इसी सूची में ऐसे दिखती हैं जैसे वे राज्य हों: केंद्रीय विद्यालय संगठन, नवोदय विद्यालय समिति, MSRVVP, नेवी एजुकेशन सोसाइटी और IAF EC सोसाइटी। केंद्र के अधिकारी इसकी जगह National Level Login (राष्ट्रीय स्तर का लॉगिन) इस्तेमाल करते हैं।

इसके बाद राज्य वाले पेज पर अलग-अलग लॉगिन बटन दिखते हैं:

  • Login For School Directory / User Management, स्कूलों को जोड़ने और यूजर्स को संभालने के लिए।
  • Profile & Facilities, स्कूल के बुनियादी ढांचे वाले DCF के लिए।
  • Teacher Module, स्टाफ के रिकॉर्ड के लिए।
  • Students Module, छात्रों के रिकॉर्ड के लिए।
  • UDISE+ Common Login, सभी मॉड्यूल के लिए एक साझा साइन-इन पेज।

हर बटन एक साइन-इन पेज खोलता है, जिसमें यूजरनेम, पासवर्ड और कैप्चा मांगा जाता है। इसी राज्य वाले पेज पर UDISE+ Previous Years Data (पिछले वर्षों का डेटा) का लिंक भी है, जिसमें 2018-19 से आगे का डेटा रखा है।

उत्तर प्रदेश के लिए, जिसे लोग “udise plus up” लिखकर खोजते हैं, रास्ता वही है: UTTAR PRADESH चुनिए और GO दबाइए। इस डेटा के लिए UP का कोई अलग पोर्टल नहीं है। राज्य के स्कूल और अधिकारी अपने-अपने लॉगिन विवरण से इसी राष्ट्रीय सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं।

यू डाइस प्लस का स्टूडेंट मॉड्यूल और PEN

स्टूडेंट मॉड्यूल में हर छात्र का एक रिकॉर्ड रहता है। 2022-23 के चक्र से राष्ट्रीय डेटा इन्हीं अलग-अलग रिकॉर्ड से बनता है। 2021-22 तक स्कूलवार कुल आंकड़े इस्तेमाल होते थे। इसी बदलाव की वजह से 2022-23 और उसके बाद के आंकड़ों की पुरानी रिपोर्टों से सीधी तुलना ठीक नहीं बैठती।

हर छात्र को यू डाइस प्लस पर एक परमानेंट एजुकेशन नंबर (PEN) मिलता है, जो 11 अंकों का होता है। PEN बच्चे के साथ अगली कक्षाओं में भी चलता है और स्कूल बदलने पर भी। पुराना स्कूल रिकॉर्ड एक्सपोर्ट करता है और नया स्कूल उसे इंपोर्ट करता है, इसलिए स्कूल बदलने से एक ही बच्चे का दूसरा रिकॉर्ड नहीं बनता। इसी वजह से शिक्षकों को भी एक अलग नेशनल टीचर कोड मिलता है।

स्कूलों के लिए कुछ काम की बातें:

  • नाम ठीक वैसे ही भरिए जैसे दाखिला रजिस्टर और आधार में है। मेल न खाने वाले नाम आगे चलकर छात्रवृत्ति और बोर्ड रजिस्ट्रेशन में दिक्कत खड़ी करते हैं।
  • नई प्रविष्टि नहीं, ट्रांसफर इस्तेमाल कीजिए। जो छात्र किसी दूसरे स्कूल से आया है, उसका रिकॉर्ड इंपोर्ट कीजिए, दोबारा मत भरिए।
  • सब कुछ पूरा होने पर ही प्रमाणित कीजिए। एक बार DCF प्रमाणित हो गया, तो उसमें बदलाव के लिए ऊपर के अधिकारी से डी-सर्टिफिकेशन कराना पड़ता है।

स्कूली छात्र की APAAR ID की शुरुआत भी स्टूडेंट मॉड्यूल से ही होती है। अभिभावक की सहमति के बाद स्कूल छात्र के यू डाइस प्लस रिकॉर्ड से यह ID बनाता है। ID के बारे में APAAR ID गाइड में पूरी जानकारी है, और APAAR रिकॉर्ड फिर डिजिलॉकर के जरिए छात्र तक पहुंचता है। जुलाई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि सहमति की प्रक्रिया में अभिभावकों को साफ तौर पर मना करने (opt-out) का विकल्प मिले। इसकी जानकारी APAAR सहमति पर करेंट अफेयर्स नोट में है।

नो योर स्कूल और दूसरे सार्वजनिक टूल

अभिभावक और छात्र पोर्टल का सार्वजनिक हिस्सा इस्तेमाल करते हैं, और वहां सबसे काम का टूल नो योर स्कूल (kys.udiseplus.gov.in) है। इसमें आप स्कूल के नाम, UDISE कोड या पिन कोड से खोज सकते हैं। 2021-22 से आगे का कोई शैक्षणिक वर्ष, या रियल टाइम, चुनिए और स्कूल की प्रोफाइल और उसके संकेतक देखिए। इसी पेज पर इसके मोबाइल ऐप का लिंक भी है।

होम पेज पर ये सार्वजनिक टूल भी मिलते हैं:

  • परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स, जिसमें राज्य PGI और जिला PGI हैं। यह स्कूली शिक्षा के संकेतकों पर राज्यों और जिलों को ग्रेड देता है।
  • Dashboard & Reports (Powered By NEP-2020), जिसमें राज्य और राष्ट्रीय स्तर की तालिकाएं हैं।
  • डेटा शेयरिंग पोर्टल, उन शोधकर्ताओं के लिए जिन्हें डेटा साझा करने की नीति के तहत माइक्रो-डेटा चाहिए।
  • UDISE+ आर्काइव, पुराने डेटा के लिए।
  • UDISE+ GIS कैप्चर, स्कूलों की लोकेशन के लिए।

सालाना रिपोर्ट इसका सबसे बड़ा नतीजा है। जुलाई 2026 में जारी UDISE+ 2025-26 रिपोर्ट सबसे नई है। 17 अगस्त 2026 के PIB बैकग्राउंडर ने इसका सार 14.67 लाख स्कूल और 24.72 करोड़ छात्र बताया।

आम गलतियां और उनका हल

यू डाइस प्लस की ज्यादातर दिक्कतें लॉगिन और पहुंच की होती हैं, और उनका हल लगभग हमेशा एक स्तर ऊपर मिलता है। FAQ तय करता है कि कौन किसकी मदद करेगा:

आपकी भूमिकाकिसके पास जाएं
स्कूल यूजरब्लॉक MIS
ब्लॉक एंट्री यूजरब्लॉक MIS
ब्लॉक स्तरजिला स्तर
जिला स्तरराज्य स्तर
राज्य स्तरराष्ट्रीय स्तर का एडमिन

इस सीढ़ी को ध्यान में रखिए, तो हल ऐसे निकलते हैं:

  • पासवर्ड भूल गए। साइन-इन पेज पर Forgot Password पर क्लिक कीजिए, User-ID और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालिए। नया पासवर्ड मोबाइल और ईमेल पर आ जाता है।
  • मोबाइल नंबर खो गया या बदल गया। रीसेट आप तक नहीं पहुंच पाएगा, इसलिए ऊपर की तालिका में अपने से अगले स्तर के अधिकारी से पासवर्ड रीसेट करने को कहिए।
  • लॉगिन विवरण हैं ही नहीं। नए स्कूल यूजर को लॉगिन विवरण ब्लॉक MIS से मिलते हैं।
  • प्रमाणित करने के बाद बदलाव करना है। अगले स्तर के अधिकारी से DCF का डी-सर्टिफिकेशन कराइए। फिर आप बदलाव करके दोबारा प्रमाणित कर सकते हैं।
  • साझा इमारत या शिफ्ट वाला स्कूल। FAQ कहता है कि दोनों स्कूल साझा सुविधाएं और अपनी इस्तेमाल की हुई कक्षाएं दर्ज करें, भले ही वे साझा हों।
  • प्रशासन ने स्कूल बंद कर दिया। कोई DCF नहीं भरा जाता, लेकिन स्कूल को CLOSED (बंद) दिखाया जाना चाहिए।
  • डेटा भरने की खिड़की बंद हो गई। मंत्रालय हर साल यह समय तय करता है और कभी-कभी बढ़ा भी देता है। 1 दिसंबर 2025 के नोटिस ने डेटा एंट्री 15 दिसंबर 2025 तक बढ़ाई थी। होम पेज का Notice सेक्शन देखते रहिए।

शिकायत कहां करें या मदद कहां मांगें

यूजरनेम, पासवर्ड या मोबाइल नंबर से जुड़ी किसी भी बात के लिए पोर्टल का Contact Us पेज आपको जिला या ब्लॉक MIS के पास भेजता है। उसी पेज पर एक खोज सुविधा है, जो आपके राज्य, जिले, ब्लॉक और UDISE कोड से उनका संपर्क ब्योरा निकाल देती है। हर राज्य का एक नामित राज्य MIS समन्वयक भी इसी पेज पर दिया गया है।

तकनीकी सवालों के लिए पता udiseplus-mhrd[at]gov[dot]in है, हालांकि पेज कहता है कि तकनीकी दिक्कतें पहले ब्लॉक या जिला MIS के पास ले जाइए। डेटा कैप्चर फॉर्मेट से जुड़े सवाल ddgstats-sel[at]gov[dot]in पर जाते हैं। मंत्रालय का डाक पता है: स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शास्त्री भवन, नई दिल्ली 110001। पोर्टल पर कोई हेल्पलाइन फोन नंबर नहीं दिया गया है।

2026 में यू डाइस प्लस

इस समय दो बदलाव पोर्टल की दिशा तय कर रहे हैं। 3 अगस्त 2026 का नोटिस शैक्षणिक वर्ष 2026-27 का यू डाइस प्लस डेटा पूरा करने के बारे में है। यही नोटिस AWES (आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी) स्कूलों के लिए रिपोर्टिंग का एक अलग हिस्सा भी बनाता है। 27 और 28 फरवरी 2026 को भुवनेश्वर में हुए UDISE+ राष्ट्रीय सम्मेलन में मंत्रालय ने इस सिस्टम और APAAR के जरिए सीखने के नतीजों और पढ़ाई छोड़ने वाले बच्चों पर नजर रखने की बात कही। इसका ब्योरा UDISE+ सम्मेलन पर इस नोट में है।

इस दिशा में सही एंट्री की अहमियत और बढ़ जाती है। यू डाइस प्लस का डेटा समग्र शिक्षा की योजना और राज्यों के परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में जाता है। इसलिए आज स्टूडेंट मॉड्यूल में की गई लापरवाह एंट्री कल किसी बच्चे की छूटी हुई छात्रवृत्ति, या उसे “ड्रॉपआउट” दिखाने की वजह बन सकती है। हर स्कूल के लिए समझदारी यही है कि वह DCF को हर बच्चे का रिकॉर्ड माने, कोई ऐसा फॉर्म नहीं जिसे बस डेडलाइन से पहले निपटाना है।

सामान्य प्रश्न

UDISE कोड क्या है?

UDISE कोड 11 अंकों का नंबर है, जो स्कूल की जगह के आधार पर उसकी स्थायी राष्ट्रीय पहचान का काम करता है। यह मान्यता प्राप्त स्कूलों को मिलता है और कभी नहीं बदलता। स्कूल बंद हो जाए, तब भी नहीं; तब उसका कोड आर्काइव हो जाता है।

किसी स्कूल को नया UDISE कोड कैसे मिलता है?

स्कूल मान्यता पत्र के साथ अपने जिला अधिकारी के जरिए आवेदन करता है। जिला स्कूल डायरेक्टरी में अनुरोध डालता है, राज्य उसकी जांच करता है और शिक्षा मंत्रालय कोड बनाता है। FAQ के मुताबिक राज्य की जांच के बाद इसमें करीब एक हफ्ता लगता है।

क्या अभिभावक या छात्र यू डाइस प्लस पर लॉगिन कर सकते हैं?

नहीं। लॉगिन सिर्फ स्कूलों और ब्लॉक, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों के लिए हैं। अभिभावक सार्वजनिक नो योर स्कूल टूल पर किसी भी स्कूल को नाम, UDISE कोड या पिन कोड से खोज सकते हैं।

यू डाइस प्लस के स्टूडेंट मॉड्यूल में PEN क्या है?

PEN यानी परमानेंट एजुकेशन नंबर, जो यू डाइस प्लस पर हर छात्र को मिलने वाला 11 अंकों का नंबर है। यह कक्षाएं बदलने और स्कूल बदलने पर भी छात्र का रिकॉर्ड लगातार बनाए रखता है। स्कूल बदलने पर एक स्कूल रिकॉर्ड एक्सपोर्ट करता है और अगला स्कूल उसे इंपोर्ट करता है।

यू डाइस प्लस का भूला हुआ पासवर्ड कैसे रीसेट करें?

साइन-इन पेज पर Forgot Password पर क्लिक कीजिए और अपनी User-ID और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालिए। नया पासवर्ड आपके मोबाइल और ईमेल पर आ जाता है। अगर वह मोबाइल खो गया है, तो अगले स्तर के अधिकारी से कहिए; स्कूल के लिए यह ब्लॉक MIS है।

उत्तर प्रदेश के लिए यू डाइस प्लस पर लॉगिन कैसे करें?

udiseplus.gov.in पर Login For All Modules पर क्लिक कीजिए, उत्तर प्रदेश चुनिए और GO दबाइए। फिर जरूरत का मॉड्यूल चुनिए, जैसे Students Module या Profile & Facilities, और अपने यूजरनेम, पासवर्ड और कैप्चा से साइन इन कीजिए।

क्या UDISE कोड बदला जा सकता है?

नहीं। एक बार मिलने के बाद कोड स्थायी होता है। इसमें बदलाव सिर्फ शिक्षा मंत्रालय कर सकता है, और वह भी तभी जब स्कूल का जिला या राज्य बदल जाए।

यू डाइस प्लस की दिक्कतों के लिए स्कूल किससे संपर्क करे?

शुरुआत ब्लॉक या जिला MIS से कीजिए। उनका संपर्क ब्योरा Contact Us पेज राज्य, जिले, ब्लॉक और UDISE कोड से निकाल देता है। तकनीकी सवाल udiseplus-mhrd at gov dot in पर ईमेल से भी भेजे जा सकते हैं, और DCF से जुड़े सवाल ddgstats-sel at gov dot in पर।

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Gaurav Tiwari

Written by

Gaurav Tiwari

UPSC Content Team Head · Web Developer & Designer · AnantamIAS

Recognized as one of India’s best content marketers, Gaurav Tiwari is an SEO strategist, WordPress developer, and founder of Gatilab. He builds websites that load in under a second, creates content that ranks on Google’s first page, and develops WordPress plugins and tools used on thousands of live sites.

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