विजयदुर्ग किला महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले के देवगड तालुका में वाघोटन खाड़ी के मुहाने पर बना एक मराठा तटीय किला है। यह समुद्र में आगे निकली एक चट्टानी नोक (headland) पर खड़ा है। पहले इसे घेरिया कहा जाता था। 17वीं सदी के मध्य में शिवाजी ने इसे मजबूत किया, और 1698 में यह आंग्रे एडमिरलों की राजधानी बन गया। 1756 में ब्रिटिश और पेशवा के साझा हमले में यह हाथ से निकल गया। फिर जुलाई 2025 में यह UNESCO की सूची में दर्ज भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य (Maratha Military Landscapes of India) के 12 किलों में शामिल हुआ, और इनमें यही अकेला किला है जिसे तटीय किले की श्रेणी में रखा गया है।
विजयदुर्ग के बारे में दो बातें जितनी बार दोहराई जाती हैं, उतनी बार जाँची नहीं जातीं। पहली, इसे अक्सर सिंधुदुर्ग के साथ द्वीप किला मान लिया जाता है। दूसरी, इसे वह जगह बताया जाता है जहाँ अंग्रेज खगोलशास्त्री नॉर्मन लॉकयर ने 1868 में हीलियम खोजा था। पहली बात भूगोल का मामला है, और दूसरी में 30 साल के फासले पर पड़े दो ग्रहण आपस में उलझ गए हैं। यह नोट दोनों बातें साफ करता है। साथ ही सर्वेक्षकों ने किले पर जो कुछ नापा है, जिसमें समुद्र के नीचे 122 मीटर लंबा पत्थर का एक ढाँचा भी है, उसे यह नोट पर्यटन वाले ब्योरों में जोड़ी गई बातों से अलग रखता है।
विजयदुर्ग किला: एक नजर में
विजयदुर्ग एक परतदार किला है, और इसकी हर परत किसी अलग ताकत की देन है, 12वीं सदी के मूल किले से लेकर पेशवा के एडमिरलों तक। रिवीजन कार्ड पर लिखने लायक तथ्य ये हैं।
| तथ्य | ब्योरा |
|---|---|
| प्रकार | चट्टानी नोक पर बना तटीय किला; भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य में अकेला तटीय किला |
| स्थान | वाघोटन नदी के मुहाने का दक्षिणी किनारा, देवगड तालुका, सिंधुदुर्ग जिला, महाराष्ट्र (16°32′ उत्तर, 73°22′ पूर्व) |
| पुराना नाम | घेरिया, जिसका अर्थ जिला गजेटियर “घेरा” बताता है |
| पहला किला | माना जाता है कि इसे शिलाहार वंश के भोज द्वितीय ने लगभग 1192 से 1205 के बीच बनवाया |
| शिवाजी का काम | 17वीं सदी के मध्य में (ज्यादातर ब्योरों में 1653) इसे बीजापुर से छीना, नया नाम दिया और दीवारों की तीसरी कतार जोड़ी |
| आंग्रे काल | 1698 से आंग्रे तटीय इलाके की राजधानी; 1717 और 1720 में अंग्रेजों के हमले और 1724 में डचों का हमला नाकाम किया |
| पतन | फरवरी 1756 में एडमिरल वॉटसन के ब्रिटिश बेड़े और रॉबर्ट क्लाइव की फौज के हाथों, जबकि पेशवा की सेना ने जमीन की तरफ मोर्चा सँभाल रखा था |
| बाद के कब्जेदार | अक्टूबर 1756 से पेशवा; जून 1818 से अंग्रेज, जब धुलप किलेदारों ने हथियार डाले |
| संरक्षण और दर्जा | भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित; 11 जुलाई 2025 को मानदंड (iv) और (vi) के तहत विश्व धरोहर सूची में दर्ज |
विजयदुर्ग किला कहाँ है और इसका बंदरगाह क्यों अहम था
विजयदुर्ग दक्षिणी कोंकण तट पर वाघोटन नदी के प्रवेश द्वार के दक्षिणी किनारे पर खड़ा है। यह सिंधुदुर्ग जिले के देवगड तालुका में आता है। यह जिला 1 मई 1981 से रत्नागिरी से अलग करके बनाया गया था। इसलिए पुरानी किताबें, जिला गजेटियर समेत, इस किले को रत्नागिरी में दिखाती हैं।
इस जगह की असली कीमत चट्टान से ज्यादा बंदरगाह में थी। गजेटियर इसे पश्चिमी तट के सबसे अच्छे बंदरगाहों में गिनता है, जिसमें कोई बार (bar) नहीं था, यानी नदी के मुहाने पर रेत का कोई टीला आड़े नहीं आता था। इसलिए जहाज हर मौसम में भीतर आ सकते थे और पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून में यहाँ पनाह ले सकते थे। कोंकण पर ऐसा बंदरगाह बहुत कम मिलता था। यही गजेटियर दर्ज करता है कि और दक्षिण में वेंगुर्ला का बंदरगाह जून के मध्य से अगस्त के आखिर तक बंद रहता था।
बाहर के दो आकलन बताते हैं कि इस बंदरगाह को किस नजर से देखा जाता था:
- 1538 में पुर्तगाली कप्तान डोम जोआओ डी कास्त्रो ने इस नदी को पश्चिमी भारत की सबसे उम्दा नदी कहा, और बताया कि बड़ी नदियों में यही अकेली है जिसमें न बार है, न चट्टानें।
- दिसंबर 1755 में, जब हमले से पहले एक अंग्रेज अफसर को इसका सर्वे करने भेजा गया, तब घेरिया को जिब्राल्टर जितना मजबूत माना जाता था।
पानी खुद भी पहरेदारी करता था। गहरा जलमार्ग करीब डेढ़ केबल चौड़ा है (एक केबल समुद्री मील का दसवाँ हिस्सा होता है, लगभग 185 मीटर)। यह पश्चिमी किनारे से सटकर चलता है, इसलिए भीतर आने वाले हर जहाज को किले की तोपों के ठीक नीचे से गुजरना पड़ता था। राज्य पर्यटन विभाग के मुताबिक इसके पीछे खाड़ी करीब 40 किलोमीटर भीतर तक जाती है। इससे बेड़े को खुले समुद्र की पहुँच से दूर एक सुरक्षित लंगरगाह मिल जाता था।
क्या यह द्वीप है? आज तो नहीं। राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (NIO) की सर्वे रिपोर्ट दर्ज करती है कि कभी एक लकड़ी का पुल किले को मुख्य भूमि से जोड़ता था, जिसे रात में ऊपर खींच लिया जाता था। बाद में गाद जमने से दोनों जुड़ गए। इसीलिए UNESCO विजयदुर्ग को तटीय किला मानता है, जबकि इस शृंखला के जो तीन किले आज भी समुद्र से घिरे हैं, वे द्वीप किले हैं।
विजयदुर्ग किला किसने बनवाया?
विजयदुर्ग को किसी एक शासक ने नहीं बनवाया। विजयदुर्ग किले का इतिहास तीन परतों में बना है। स्रोत आखिरी दो परतों को लेकर पक्के हैं, लेकिन पहली परत को लेकर सावधान रहते हैं। उत्तर में भी यही सावधानी दोहराना समझदारी है, ताकि आप रिकॉर्ड से ज्यादा पक्के न सुनाई दें।
शिलाहार काल का मूल किला
परंपरा पहले किले का श्रेय शिलाहार वंश के भोज द्वितीय को देती है। NIO रिपोर्ट “ऐसा माना जाता है” कहकर इस काम को लगभग 1192 से 1205 के बीच रखती है, और राज्य पर्यटन विभाग भी इसे 12वीं सदी का बताता है। इनमें से कोई भी ब्योरा किसी अभिलेख का हवाला नहीं देता। इसलिए इस तारीख को एक मान्य परंपरा की तरह पढ़ना ही ठीक है।
बीजापुर का विस्तार
17वीं सदी तक यह बंदरगाह बीजापुर के आदिलशाही सुल्तानों के हाथ में था, और गजेटियर के मुताबिक उनके दौर में किले का विस्तार हुआ। वह काम आज मुश्किल से दिखता है, क्योंकि गजेटियर के शब्दों में पुरानी मुस्लिम इमारतें मराठा निर्माणों के नीचे दबी पड़ी हैं। गजेटियर झंडे के खंभे के पास एक मस्जिद और एक मुस्लिम संत की कब्र का जिक्र करता है।
शिवाजी की तीसरी दीवार और नया नाम
शिवाजी ने यह किला बीजापुर से छीना और इसे दोबारा बनवाया। गजेटियर इसकी सबसे उम्दा खूबियों का श्रेय उन्हीं को देता है:
- दीवारों की तिहरी कतार;
- ढेर सारे बुर्ज;
- भीतर की विशाल इमारतें।
NIO रिपोर्ट ज्यादा सटीक है। उसके मुताबिक पुराने किले में गोल बुर्जों वाली एक मोटी दोहरी दीवार थी, और शिवाजी ने उसके चारों ओर तीसरी कतार जोड़ी। उन्होंने घेरिया का नाम बदलकर विजयदुर्ग रखा, यानी “जीत का किला”। गजेटियर उनके काम को सिर्फ “सत्रहवीं सदी के मध्य के आसपास” का बताता है, जबकि राज्य पर्यटन विभाग और NIO रिपोर्ट 1653 देते हैं। उत्तर में यही साल लिखिए। किलों को लेकर उनकी बड़ी नीति छत्रपति शिवाजी महाराज वाले नोट में है।
कान्होजी आंग्रे और विजयदुर्ग में मराठा नौसेना
1698 से विजयदुर्ग आंग्रे एडमिरलों की राजधानी रहा। आधी सदी से ज्यादा समय तक यहाँ से चलने वाला मराठा बेड़ा पश्चिमी तट पर यूरोपीय बेड़ों और व्यापारी जहाजों से टक्कर लेता रहा।
गजेटियर आंग्रे इलाके को करीब 150 मील लंबे तट पर और 30 से 60 मील भीतर तक फैला बताता है। NIO रिपोर्ट के मुताबिक 1699 तक कान्होजी आंग्रे मराठा नौसेना के एडमिरल बन चुके थे, और यही रिपोर्ट समझाती है कि यह बंदरगाह उनके काम का क्यों था। उनके ग्रैब और गैलिवट छोटे युद्धपोत थे, जिनका ड्राफ्ट कम था (ड्राफ्ट यानी जहाज का पेंदा पानी की सतह से कितना नीचे रहता है)। ये जहाज खाड़ी में घुस जाते थे, जहाँ ज्यादा ड्राफ्ट वाले यूरोपीय जहाज उनका पीछा नहीं कर पाते थे।
किले ने जो हमले नाकाम किए, वे इसी ताकत को दिखाते हैं:
- अप्रैल 1717: एक अंग्रेज बेड़े ने दीवार तोड़ने की कोशिश की; धावा बोलने वाले दस्ते को भारी नुकसान के साथ पीछे हटना पड़ा।
- 1720: वॉल्टर ब्राउन की अगुवाई में एक अंग्रेज बेड़े ने आंग्रे के 16 जहाज नष्ट किए, लेकिन किले पर कोई असर नहीं डाल पाया।
- 1724: बटाविया से आए एक डच बेड़े ने हमला किया, और उसका नतीजा भी इससे बेहतर नहीं रहा।
अब शब्दों पर एक बात। गजेटियर ईस्ट इंडिया कंपनी के नौसैनिक इतिहासों पर टिका है, और वह आंग्रे को “समुद्री डाकुओं का सरदार” कहता है। यह कंपनी का नजरिया था, उस बेड़े के बारे में जो उसके जहाज पकड़ लेता था। मराठा राज्य के लिए आंग्रे उसके तट की रखवाली करने वाले एडमिरल थे। उत्तर में एडमिरल और बेड़ा ही सुरक्षित शब्द हैं, और औपनिवेशिक ठप्पे को ठप्पे की तरह उद्धरण में ही रखिए।
1756 में विजयदुर्ग कैसे गिरा
विजयदुर्ग फरवरी 1756 में एक साझा अभियान में गिरा। एडमिरल वॉटसन की अगुवाई में ब्रिटिश बेड़े ने समुद्र की ओर से हमला किया, और पेशवा की सेना ने जमीन की तरफ का रास्ता बंद कर दिया। पेशवा यानी मराठा राज्य के मुख्य मंत्री। यह किला तोपों से जितना हारा, उतना ही मराठा दुनिया के भीतर की फूट से भी हारा।
योजना 1755 की थी। तब पेशवा और बंबई सरकार के बीच तय हुआ कि पेशवा की फौज जमीन से आंग्रे पर हमला करेगी और अंग्रेज समुद्र से। यह तरीका एक बार पहले काम कर चुका था। अप्रैल 1755 में कमोडोर जेम्स ने हर्णै के पास आंग्रे के द्वीप किले सुवर्णदुर्ग पर गोलाबारी की, उसे जीता और मराठों को सौंप दिया। उसी दिसंबर उन्होंने घेरिया का सर्वे किया और उसे उसकी शोहरत जैसा नहीं पाया। उन्हें वहाँ गोल बुर्जों वाली इमारतों का एक बड़ा ढेर दिखा, जिसके साथ लंबी पर्दा-दीवारें (curtain walls) थीं, यानी दो बुर्जों के बीच की दीवार के हिस्से।
हमला, जैसा गजेटियर बताता है:
- 12 युद्धपोतों का बेड़ा था, जिनमें 6 रॉयल नेवी के और 6 कंपनी के थे। यह करीब 1,400 सैनिक लेकर चला, साथ में बम-जहाज थे और ग्रैब-गैलिवट वाली एक मराठा टुकड़ी भी।
- बेड़ा 11 तारीख को घेरिया के सामने पहुँचा। उस समय घेरिया पर काबिज आंग्रे सरदार तुलाजी आंग्रे किले को अपने भाई के हवाले छोड़कर निकल गए और पेशवा के सेनापति के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।
- 12 तारीख को बेड़ा नदी में घुसा, उत्तरी दीवारों से करीब 50 गज की दूरी पर लंगर डाला और गोलाबारी शुरू की। किले के नीचे एक-दूसरे से बँधे आंग्रे के जहाजों में एक गोले से आग लगी, और वे सब एक साथ जल गए।
- क्लाइव को पता चला कि किला मराठों को सौंपा जाने वाला है। तब वे उतरे और पेशवा की सेना और किले के बीच की जमीन पर जम गए।
- किले की सेना ने अगली दोपहर हथियार डाल दिए, और 14 तारीख को क्लाइव की फौज भीतर पहुँची।
महीने को लेकर किताबों में मतभेद है। रॉयल म्यूजियम्स ग्रीनविच ने हमले की अपनी पेंटिंग का नाम द कैप्चर ऑफ गेरिया, फरवरी 1756 रखा है, जबकि जिला गजेटियर और NIO रिपोर्ट अप्रैल की तारीखें छापते हैं। ज्यादातर स्रोत फरवरी मानते हैं, और उत्तर में यही लिखिए।
कंपनी ने बाणकोट के बदले घेरिया अपने पास रखने की कोशिश की, लेकिन पेशवा नहीं माने और अक्टूबर 1756 में किला ले लिया। यह उनके एडमिरल आनंदराव धुलप का ठिकाना बना। मई 1818 में कर्नल इमलैक की अगुवाई में अंग्रेजों का एक हमला नाकाम कर दिया गया। लेकिन तब तक यह जिला अंग्रेजों के हाथ जा चुका था, और जून 1818 में किले की कमान सँभाल रहे दोनों धुलप भाइयों ने हथियार डाल दिए।
सबक गजेटियर के अपने फैसले में है। उसके मुताबिक चट्टानी किलेबंदी इतनी मजबूत थी कि डटी हुई सेना किसी भी समुद्री हमले के सामने इसे बचा सकती थी। घेरिया इसलिए टूटा कि उसका बेड़ा उसकी दीवारों के नीचे जल गया और उसका सरदार जमीन पर आत्मसमर्पण कर चुका था। यह इसलिए भी गिरा कि हमले को पेशवा की जरूरत थी; अकेले ब्रिटिश बेड़े 1717 और 1720 में नाकाम रहे थे। इसके कुछ ही समय बाद क्लाइव बंगाल चले गए, और वह कहानी रॉबर्ट क्लाइव वाले नोट में आगे चलती है।
विजयदुर्ग की किलेबंदी: जहाज के कप्तान की नजर से
विजयदुर्ग इस तरह बनाया गया था कि उस तक समुद्र की ओर से पहुँचा जाए। इसलिए इसकी किलेबंदी को उसी क्रम में समझना सबसे आसान है, जिस क्रम में एक जहाज का कप्तान उससे टकराता, यानी पानी के नीचे से शुरू करके।
समुद्र के नीचे की दीवार
1995 में NIO के एक पानी के भीतर के सर्वे में किले के पश्चिमी हिस्से के पास एक पत्थर का ढाँचा मिला। लोकप्रिय ब्योरों में यही “समुद्र के नीचे की दीवार” कहलाता है। टीम की 1998 की रिपोर्ट ने इसे नापा:
- लगभग 122 मीटर लंबा, जो पहले पूर्व-पश्चिम दिशा में चलता है और फिर उत्तर-दक्षिण की ओर मुड़ जाता है;
- लगभग 7 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊँचा;
- मौसम से घिसे बड़े पत्थरों और कुछ तराशे हुए ब्लॉकों से बना, जिन्हें बिना गारे के जमाया गया है।
रिपोर्ट का अनुमान है कि इसका मकसद दुश्मन के जहाजों को तोड़ना और किले को लहरों-धाराओं से बचाना था। ढाँचा दर्ज है; उसका मकसद सर्वेक्षकों की व्याख्या है। राज्य पर्यटन विभाग समुद्र के नीचे 200 मीटर लंबी भागने की एक सुरंग का भी जिक्र करता है, जिसका NIO रिपोर्ट में कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए सुरंग को एक दावा ही मानिए।
जलमार्ग और चट्टान
दीवार पार करने के बाद जहाज को पश्चिमी किनारे के साथ चलने वाला संकरा जलमार्ग ही लेना पड़ता था, जो किले की मार के भीतर था। NIO के ब्योरे के मुताबिक किला खुद ठोस चट्टान पर बैठा है, जिसका सामने का हिस्सा करीब 15 मीटर ऊँचा है और लगभग सीधा खड़ा है। गजेटियर पूरे किले को नदी से करीब 100 फुट ऊपर बताता है।
तीन दीवारें और 27 बुर्ज
दीवारें तीन कतारों में चलती हैं। भीतर की दो कतारें पुरानी हैं, और बाहर वाली शिवाजी की है। गजेटियर 27 बुर्ज गिनता है। बुर्ज यानी दीवार से बाहर निकली मीनारें, ताकि रक्षक दीवार की पूरी लंबाई पर गोली चला सकें। सबसे ऊँची जगह पर ये एक बड़े गोल बुर्ज में बदल जाते हैं। 1862 की एक सरकारी सूची के मुताबिक यह घेरा करीब 20 एकड़ जमीन को घेरता है, जिसे राज्य पर्यटन विभाग अब 17 एकड़ बताता है। घेरे का जो हिस्सा कमोडोर जेम्स को दिख रहा था, उस पर उन्होंने नीचे 32 झरोखे गिने, यानी मुंडेर में बने तोप चलाने के छेद, और ऊपर 15।
पानी, भंडार और गोदी
समुद्री किला कितने दिन टिकेगा, यह मीठे पानी से तय होता था, और गजेटियर भीतर अच्छे कुएँ दर्ज करता है। बेड़े का कारखाना खाड़ी में 3 किलोमीटर ऊपर था, जहाँ NIO टीम ने एक ज्वारीय गोदी (tidal dockyard) का सर्वे किया:
- करीब 110 गुणा 75 मीटर का एक बेसिन, जिसका फर्श चूने के गारे का है;
- एक प्रवेश द्वार, जो नीचे 7 मीटर और ऊपर 11 मीटर चौड़ा है;
- दीवारें, जो कुछ हिस्सों में चट्टान काटकर बनाई गई हैं।
NIO रिपोर्ट इसे बनाने का श्रेय कान्होजी आंग्रे को देती है, और 500 टन तक के जहाजों के लिए इसे बड़ा करने का श्रेय आनंदराव धुलप को। गजेटियर की पुरानी नाप, 355 गुणा 227 फुट, भी इससे मेल खाती है।
क्या लॉकयर ने विजयदुर्ग में हीलियम खोजा था?
नहीं। विजयदुर्ग से जोड़ी जाने वाली हीलियम की कहानी में दो ग्रहण आपस में उलझ गए हैं। खोज का रिकॉर्ड यह है:
- 18 अगस्त 1868 को फ्रांसीसी खगोलशास्त्री पियरे जानसेन ने दक्षिण भारत के गुंटूर में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखा, और सूरज के स्पेक्ट्रम में एक नई पीली रेखा पहचानी।
- उसी साल बाद में अंग्रेज खगोलशास्त्री नॉर्मन लॉकयर ने लंदन के धुएँ भरे कोहरे (smog) के बीच से सूरज को देखकर वही रेखा दर्ज की, और उस अनजान तत्व का नाम हीलियम रखा।
विजयदुर्ग से लॉकयर का असली नाता 22 जनवरी 1898 का पूर्ण ग्रहण है। उनके अभियान दल ने यह ग्रहण इसी किले से देखा, जिसकी वर्तनी रिपोर्ट में “विजियाड्रग” (Viziadrug) है। इसके नतीजे 1901 में फिलॉसॉफिकल ट्रांजैक्शंस ऑफ द रॉयल सोसाइटी में छपे। यानी यह किला सौर भौतिकी के इतिहास का हिस्सा जरूर है, बस हीलियम की खोज का नहीं।
विजयदुर्ग किला आज: UNESCO दर्जा और संरक्षण
विजयदुर्ग भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित है। 11 जुलाई 2025 से यह विश्व धरोहर सूची में दर्ज भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 घटक किलों में से एक है। विश्व धरोहर समिति ने पेरिस में अपने 47वें सत्र में इस शृंखला को भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति के रूप में दर्ज किया।
मुख्य बातें, UNESCO की सूची और 11 जुलाई 2025 की PIB विज्ञप्ति के आधार पर:
- मानदंड: (iv), किसी तरह की इमारत या इमारतों के समूह का ऐसा उत्कृष्ट उदाहरण जो इतिहास के किसी दौर को दिखाता हो, और (vi), घटनाओं और जीवित परंपराओं से सीधा नाता।
- क्षेत्रफल: 1,577.63 हेक्टेयर, साथ में 96,500.43 हेक्टेयर का बफर जोन, जो हर किले के आसपास के परिवेश को बचाता है।
- संरक्षण: 12 में से 8 किले, जिनमें विजयदुर्ग भी है, ASI के संरक्षण में हैं, और बाकी 4 महाराष्ट्र के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के।
- प्रक्रिया: भारत ने जनवरी 2024 में नामांकन भेजा, और PIB विज्ञप्ति के मुताबिक 20 सदस्य देशों में से 18 ने इसका समर्थन किया।
31 जुलाई 2025 को राज्यसभा में मराठा किलों की मान्यता पर एक लिखित जवाब में केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री ने कहा कि ASI का संरक्षण कार्य लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके लिए हर स्मारक की जरूरत के हिसाब से पैसा दिया जाता है। वहीं पर्यटन विकास की अगुवाई राज्य करते हैं, और इसमें उन्हें स्वदेश दर्शन 2.0 जैसी योजनाओं से मदद मिलती है।
रिकॉर्ड उन दबावों के नाम गिनाते हैं जिनका जवाब अब किसी प्रबंधन योजना को देना होगा। 1880 में गजेटियर ने पाया कि पश्चिमी दीवारें कई जगह समुद्र की मार से टूट चुकी थीं और पेड़ों-बेलों ने उन्हें ढीला कर दिया था। संशोधित गजेटियर किले के भीतर और आसपास बनी बाद की इमारतों की सूची देता है। इनमें मुख्य दरवाजे के सामने पुलिस क्वार्टर और उसके आगे 1951 में बना मछली सुखाने का एक अहाता भी है।
समिति के सत्र की पूरी बात सूची में दर्ज होने पर करंट अफेयर्स ब्रीफ में है। इस शृंखला के पाँच पहाड़ी किलों पर अलग नोट हैं:
- रायगड, जहाँ 1674 में शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ;
- राजगड, उनकी पहली राजधानी;
- शिवनेरी, उनका जन्मस्थान;
- प्रतापगड, जहाँ 1659 में अफजल खान से लड़ाई हुई;
- लोहगड, ASI द्वारा संरक्षित एक पहाड़ी किला।
सिंधुदुर्ग किला, वह द्वीप किला जिसे शिवाजी ने यहाँ से करीब 73 किलोमीटर दक्षिण में बनवाया, आगे पढ़ने के लिए सबसे स्वाभाविक पड़ाव है, और उसका नोट इसी शृंखला में आगे आता है।
परीक्षा के लिए विजयदुर्ग किला कैसे पढ़ें
विजयदुर्ग सिलेबस के तीन हिस्सों में आता है:
- GS पेपर I, कला और संस्कृति: मराठा किला स्थापत्य और भारत की विश्व धरोहर संपत्तियाँ;
- GS पेपर I, आधुनिक इतिहास: मराठा नौसेना और पश्चिमी तट पर ईस्ट इंडिया कंपनी का उभार;
- इतिहास वैकल्पिक विषय: पेशवाओं के दौर का मराठा राज्य।
प्रीलिम्स के लिए यह किला ज्यादातर अपनी UNESCO शृंखला और अपने प्रकार से जुड़ा एक धरोहर तथ्य है। Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक के 1,403 प्रश्नों में से 94 कला और संस्कृति के हैं, और 184 इतिहास के। मुख्य परीक्षा में यह किला सबूत का काम करता है। मुख्य परीक्षा 2026 के इतिहास वैकल्पिक पेपर I में पूछा गया: “शिवाजी से पेशवा बालाजी बाजीराव तक मराठा राजव्यवस्था के सफर का खाका खींचिए। पानीपत की तीसरी लड़ाई (1761) का मराठा राज्य पर क्या असर पड़ा? विश्लेषण कीजिए।” आंग्रे और पेशवा का जो टकराव विजयदुर्ग पर खत्म हुआ, वह इसी सफर के भीतर आता है। मुख्य परीक्षा 2024 के इतिहास वैकल्पिक पेपर I में पूछा गया: “मराठों की छापामार युद्ध-नीति ने बड़ी और ज्यादा जमी-जमाई सेनाओं के खिलाफ उनकी सैन्य सफलताओं में कैसे योगदान दिया?” विजयदुर्ग जैसे किले उस उत्तर का ठोस, भौतिक पक्ष हैं।
सात तथ्य ज्यादातर प्रश्नों का बोझ उठाते हैं:
- प्रकार: भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 किलों में अकेला तटीय किला, जो 2025 में मानदंड (iv) और (vi) के तहत दर्ज हुआ।
- स्थान: वाघोटन खाड़ी, देवगड तालुका, सिंधुदुर्ग जिला, जो 1 मई 1981 को रत्नागिरी से अलग होकर बना।
- परतें: भोज द्वितीय (लगभग 1192 से 1205) के नाम दर्ज शिलाहार मूल किला, जिसका बीजापुर ने विस्तार किया और शिवाजी ने दोबारा निर्माण किया (ज्यादातर ब्योरों में 1653)।
- आंग्रे अड्डा: 1698 से राजधानी; इसने 1717 और 1720 में अंग्रेजों को पीछे धकेला, फिर 1724 में डचों को।
- पतन: फरवरी 1756 में, समुद्र से वॉटसन और क्लाइव और जमीन से पेशवा के हाथों; अक्टूबर 1756 से पेशवा का; जून 1818 से अंग्रेजों का।
- नापी गई खूबियाँ: गजेटियर में 27 बुर्ज; NIO सर्वे में समुद्र के नीचे 122 मीटर लंबा ढाँचा और 110 गुणा 75 मीटर की गोदी।
- हीलियम: 1868 में जानसेन गुंटूर में और लॉकयर लंदन में; लॉकयर 1898 के ग्रहण के लिए विजयदुर्ग आए।
तीन उलझनें अंक कटवाती हैं:
- तटीय बनाम द्वीप। विजयदुर्ग जमीन से जुड़ा है; शृंखला के द्वीप किले नीचे की तालिका में हैं।
- घेरिया बनाम जंजीरा। घेरिया विजयदुर्ग का पुराना नाम है। मुरुड के पास का जंजीरा सिद्दियों का द्वीप किला था, जिसे मराठा घेराबंदियाँ कभी नहीं जीत पाईं, और यह 2025 की शृंखला का हिस्सा नहीं है; जंजीरा किला वाला नोट इस पर है।
- 1756 में किला किसके पास रहा। आत्मसमर्पण कंपनी के बेड़े ने लिया, लेकिन साल भर के भीतर किला पेशवा के पास चला गया और अंग्रेजों तक 1818 में ही पहुँचा।
विजयदुर्ग और उसके पड़ोसी समुद्री किलों की तुलना इस तरह है:
| किला | 2025 की सूची में प्रकार | संरक्षक | क्या इसे अलग बनाता है |
|---|---|---|---|
| विजयदुर्ग | तटीय किला | ASI | तीन कतार दीवारों वाला चट्टानी नोक का किला; 1698 से आंग्रे राजधानी |
| सिंधुदुर्ग | द्वीप किला | ASI | शिवाजी के लिए 1664 में मालवण के पास शुरू हुआ, और हिरोजी इंदुलकर इसके मुख्य वास्तुकार थे |
| सुवर्णदुर्ग | द्वीप किला | ASI | रत्नागिरी जिले में हर्णै के पास; 1698 से आंग्रे बेड़े का ठिकाना, जिसे अप्रैल 1755 में कमोडोर जेम्स ने जीता और मराठों को सौंपा |
| खांदेरी | द्वीप किला | महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय | शृंखला का अकेला द्वीप किला जो ASI के संरक्षण में नहीं है |
| जंजीरा | घटक नहीं | ASI | मुरुड के पास सिद्दियों का द्वीप किला, जिसे मराठा घेराबंदियाँ कभी नहीं जीत सकीं |
आपकी तैयारी में विजयदुर्ग की कीमत उस एक पंक्ति से कहीं ज्यादा है, जो ज्यादातर किला-सूचियों में इसे मिलती है। 2025 की शृंखला में यही एक किला है जिसके सहारे आप एक ही पैराग्राफ में मराठा समुद्री ताकत और कंपनी के नौसैनिक उभार पर लिख सकते हैं, और हर दावे के पीछे नापी गई खूबियाँ और तारीखों वाली घेराबंदियाँ रख सकते हैं। 1756 का घटनाक्रम ठीक से याद कर लीजिए। फिर यह मराठा नौसेना और पेशवाओं, दोनों पर लिखे उत्तरों में काम आएगा।
सामान्य प्रश्न
विजयदुर्ग किला किसने बनवाया?
विजयदुर्ग किला किसी एक शासक ने नहीं बनवाया, यह परतों में बना। परंपरा, जिसे राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान का सर्वे और राज्य पर्यटन विभाग दोनों दोहराते हैं, पहले किले का श्रेय शिलाहार राजा भोज द्वितीय को देती है, लगभग 1192 से 1205 के बीच। बीजापुर के सुल्तानों ने इसका विस्तार किया, और 17वीं सदी के मध्य में शिवाजी ने इसे दीवारों की तिहरी कतार और आज का नाम दिया।
विजयदुर्ग को पूरब का जिब्राल्टर क्यों कहते हैं?
यह उपनाम एक ऐसे समुद्री किले की शोहरत से आया, जिसे जीता नहीं जा सकता था। जिला गजेटियर दर्ज करता है कि 1755 में अंग्रेज घेरिया किला जिब्राल्टर जितना मजबूत मानते थे, और राज्य पर्यटन विभाग आज भी यही नाम इस्तेमाल करता है। यह शोहरत 1717 से 1724 के बीच अंग्रेज और डच बेड़ों के खिलाफ मिली असली कामयाबियों पर टिकी थी, हालाँकि 1756 में किला आखिरकार गिर गया।
क्या विजयदुर्ग किला UNESCO विश्व धरोहर स्थल है?
हाँ, भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के 12 घटक किलों में से एक के रूप में। इसे 11 जुलाई 2025 को पेरिस में विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र में सूची में दर्ज किया गया। यह शृंखला मानदंड (iv) और (vi) के तहत दर्ज हुई और भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति है। शृंखला में विजयदुर्ग अकेला किला है जिसे तटीय किले की श्रेणी में रखा गया है।
क्या विजयदुर्ग द्वीप किला है?
नहीं। यह किला वाघोटन खाड़ी के मुहाने पर एक चट्टानी नोक पर खड़ा है। जहाँ कभी पानी के ऊपर लकड़ी का पुल था, वहाँ गाद जमने से यह मुख्य भूमि से जुड़ गया है। इसीलिए UNESCO और संस्कृति मंत्रालय इसे तटीय किला मानते हैं, जबकि इसी शृंखला के तीन किले द्वीप किले हैं।
कान्होजी आंग्रे का विजयदुर्ग से क्या नाता था?
1698 से विजयदुर्ग आंग्रे तटीय इलाके की राजधानी था, और 1699 तक कान्होजी आंग्रे मराठा बेड़े के एडमिरल बन चुके थे। खाड़ी की वजह से उनके कम ड्राफ्ट वाले ग्रैब और गैलिवट वहाँ पनाह ले पाते थे, जहाँ ज्यादा ड्राफ्ट वाले यूरोपीय जहाज पीछा नहीं कर सकते थे। इस जगह का समुद्री सर्वे खाड़ी में ऊपर की ओर बनी गोदी का श्रेय भी उन्हीं को देता है।
अंग्रेजों ने विजयदुर्ग पर कब्जा कब किया?
एडमिरल वॉटसन के ब्रिटिश बेड़े ने, जिसमें फौज की कमान रॉबर्ट क्लाइव के पास थी, फरवरी 1756 में किले का आत्मसमर्पण लिया, जबकि पेशवा की सेना ने जमीन की तरफ मोर्चा सँभाल रखा था। अक्टूबर 1756 में अंग्रेजों ने इसे पेशवा को सौंप दिया। आखिरकार जून 1818 में, जब इसके धुलप किलेदारों ने हथियार डाले, तब यह हमेशा के लिए अंग्रेजों के हाथ आया।
क्या विजयदुर्ग में सच में समुद्र के नीचे दीवार है?
हाँ, समुद्र में डूबा पत्थर का एक ढाँचा मौजूद है और उसे नापा भी गया है। 1995 में शुरू हुए राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान के सर्वे ने किले के पश्चिमी हिस्से के पास बिना गारे के जमाए पत्थरों का एक ढाँचा दर्ज किया, जो करीब 122 मीटर लंबा, 7 मीटर चौड़ा और 3 मीटर ऊँचा है। इसका मकसद, चाहे दुश्मन के जहाज तोड़ना हो या लहरें रोकना, सर्वेक्षकों की व्याख्या है, कोई दर्ज तथ्य नहीं।
क्या विजयदुर्ग किले में हीलियम खोजा गया था?
नहीं। सूरज के स्पेक्ट्रम की नई पीली रेखा 18 अगस्त 1868 के ग्रहण के दौरान पियरे जानसेन ने गुंटूर में देखी थी, और उसी साल बाद में नॉर्मन लॉकयर ने लंदन में दर्ज की थी। विजयदुर्ग से लॉकयर का असली नाता 22 जनवरी 1898 का पूर्ण सूर्य ग्रहण है, जिसे उनके अभियान दल ने वहीं से देखा।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. विजयदुर्ग किले के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य में इसे द्वीप किले की श्रेणी में रखा गया है। 2. यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b) UNESCO और संस्कृति मंत्रालय विजयदुर्ग को शृंखला का अकेला तटीय किला मानते हैं, और यह ASI द्वारा संरक्षित 8 घटकों में से एक है।
2. घेरिया, जो कोंकण तट के 18वीं सदी के ब्रिटिश रिकॉर्ड में आने वाला नाम है, निम्नलिखित में से किस किले को दर्शाता है?
- (a) सुवर्णदुर्ग
- (b) विजयदुर्ग
- (c) सिंधुदुर्ग
- (d) जंजीरा
उत्तर: (b) घेरिया विजयदुर्ग का पुराना नाम है, जिसका अर्थ जिला गजेटियर “घेरा” बताता है।
3. 1756 में घेरिया के पतन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एडमिरल वॉटसन के नेतृत्व में एक ब्रिटिश बेड़े ने समुद्र की ओर से किले पर हमला किया। 2. तुलाजी आंग्रे के खिलाफ अभियान में पेशवा की सेना शामिल थी। 3. ईस्ट इंडिया कंपनी ने किले को 1818 तक अपने पास रखा। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2 और 3
- (c) केवल 1 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (a) कंपनी ने अक्टूबर 1756 में घेरिया पेशवा को सौंप दिया था, और अंग्रेजों ने इसे जून 1818 में ही लिया।
4. भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के निम्नलिखित घटकों में से कौन-सा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जगह महाराष्ट्र सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय द्वारा संरक्षित है?
- (a) विजयदुर्ग
- (b) सिंधुदुर्ग
- (c) सुवर्णदुर्ग
- (d) खांदेरी
उत्तर: (d) खांदेरी राज्य निदेशालय के तहत आने वाले चार घटकों में से एक है; बाकी तीनों विकल्प ASI द्वारा संरक्षित हैं।
5. हीलियम की खोज के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पियरे जानसेन ने भारत में 18 अगस्त 1868 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान सौर स्पेक्ट्रम में एक नई पीली रेखा देखी। 2. नॉर्मन लॉकयर ने उसी रेखा का अपना 1868 का अवलोकन विजयदुर्ग किले से किया था। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (a) लॉकयर ने यह रेखा लंदन में देखी थी; विजयदुर्ग से उनका नाता 22 जनवरी 1898 के ग्रहण का है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- “उपनिवेशों पर वर्चस्व की होड़ में, खासकर कर्नाटक युद्धों में, बेहतर समुद्री ताकत इंग्लैंड का सबसे असरदार हथियार साबित हुई।” (10 अंक, 150 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2026, इतिहास वैकल्पिक पेपर II।
- “1756 में विजयदुर्ग ब्रिटिश तोपों से कम, और मराठा राज्य के भीतर की फूट से ज्यादा गिरा।” आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- कोंकण तट के भूगोल ने मराठा तटीय किलों की बनावट और इस्तेमाल को कैसे आकार दिया? विजयदुर्ग के उदाहरण से समझाइए। (10 अंक, 150 शब्द)
- सीरियल विश्व धरोहर संपत्तियाँ कई किलों को एक ही सूचीकरण में ले आती हैं। विजयदुर्ग जैसे तटीय किले के लिए इससे पैदा होने वाली संरक्षण की चुनौतियों की चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- मराठा नौसैनिक इतिहास के लिखित रिकॉर्ड में समुद्री पुरातत्व क्या जोड़ सकता है? विजयदुर्ग में हुए सर्वेक्षण के नतीजों के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)