UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

अनुशीलन समिति: संस्थापक, युगांतर समूह और अलीपुर बम कांड

अनुशीलन समिति की कहानी: कलकत्ता का एक व्यायाम क्लब बंगाल का सबसे चर्चित क्रांतिकारी नेटवर्क कैसे बना, उसकी दो शाखाएँ कौन-सी थीं और उसके बाद क्या हुआ।

Portrait of Bengal revolutionary Barindra Kumar Ghosh as a young man with round spectacles, tousled hair and a beard

अनुशीलन समिति बंगाल की एक गुप्त क्रांतिकारी संस्था थी। इसकी शुरुआत लगभग 1902 में कलकत्ता में हुई, और तब यह नौजवानों को शारीरिक और नैतिक प्रशिक्षण देने वाला एक क्लब भर था। छह साल के भीतर इसकी दो शाखाएँ बम और अफसरों पर हमलों के रास्ते पर आ चुकी थीं। एक थी पुलिन बिहारी दास के नेतृत्व वाली ढाका अनुशीलन समिति, और दूसरा था कलकत्ता का वह दल जिसे युगांतर समूह कहा गया। इनकी सबसे चर्चित कार्रवाई थी 30 अप्रैल 1908 का मुजफ्फरपुर बम हमला। पुरानी NCERT इतिहास की किताब इसे उन वर्षों की गुप्त संस्थाओं में सबसे प्रसिद्ध बताती है। पहले विश्व युद्ध से पहले के क्रांतिकारी राष्ट्रवाद का कोई भी विवरण इससे होकर ही गुजरता है।

ज्यादातर छात्र यहाँ एक उलझन लेकर आते हैं। वे अनुशीलन और युगांतर को दो विरोधी पार्टियाँ मान लेते हैं, जिन्हें अलग-अलग लोगों ने अलग-अलग समय पर बनाया। यह तस्वीर आधी ही सही है। युगांतर असल में एक बांग्ला साप्ताहिक अखबार था। इसे मार्च 1906 में कलकत्ता समिति के भीतर बारींद्र कुमार घोष के दल ने शुरू किया था। बाद में पुलिस ने इसी अखबार का नाम पूरे पश्चिमी नेटवर्क के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। यह नोट पहले साफ करता है कि दोनों शाखाओं का आपस में क्या रिश्ता था। फिर यह समिति का पूरा सफर दिखाता है, कलकत्ता की एक व्यायामशाला से लेकर उस पार्टी तक जो आज भी लोकसभा में बैठती है।

अनुशीलन समिति क्या थी?

अनुशीलन समिति क्रांतिकारी संस्थाओं का एक भूमिगत नेटवर्क थी। यह लगभग 1902 से 1930 के दशक तक बंगाल में सक्रिय रही। इसका मकसद अर्जियों से नहीं, बल्कि हथियारबंद कार्रवाई से अंग्रेजी राज को खत्म करना था। अनुशीलन शब्द का अर्थ है अभ्यास या साधना। संस्थापकों ने यह शब्द बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के लेखन से लिया था। 1918 की सेडिशन कमेटी (रॉलेट कमेटी) ने इस नाम का अर्थ संस्कृति और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने वाली संस्था बताया।

तथ्यविवरण
स्थापनाकलकत्ता, ज्यादातर विवरणों में 1902; IGNOU की एक पाठ्य इकाई 1901 बताती है
संस्थापकसतीश चंद्र बसु और बैरिस्टर प्रमथनाथ मित्र; 2022 की एक PIB विज्ञप्ति अरविंद घोष और सरला देवी के नाम भी गिनाती है
बाहरी चेहराकसरत, ड्रिल और नैतिक प्रशिक्षण के लिए बना एक व्यायाम क्लब
पूर्वी शाखाढाका अनुशीलन समिति, जिसे 1906 में पुलिन बिहारी दास ने संगठित किया; एक समय लगभग 500 शाखाएँ
पश्चिमी शाखाबारींद्र कुमार घोष का कलकत्ता दल, जिसे मार्च 1906 में शुरू हुए उसके साप्ताहिक के नाम पर युगांतर समूह कहा गया
सबसे चर्चित कार्रवाईमुजफ्फरपुर बम हमला, 30 अप्रैल 1908, जिसे खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने अंजाम दिया
मुकदमाअलीपुर बम कांड; फैसला 6 मई 1909 को आया, जिसमें अरविंद घोष बरी हुए
प्रतिबंधक्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 1908 के तहत जनवरी 1909 में ढाका समिति गैरकानूनी घोषित
बाद में निकली धारारिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, जिसे मार्च 1940 में अनुशीलन मार्क्सवादियों ने बनाया

कलकत्ता की एक व्यायामशाला क्रांतिकारी संस्था कैसे बनी?

शुरू में यह बंगाल के उन बहुत से युवा क्लबों में से एक थी, जो कसरत और चरित्र-निर्माण पर टिके थे। फिर 1905 के विभाजन पर उठे गुस्से ने इसके अंदरूनी दल को साजिश की ओर धकेल दिया। अनुशीलन समिति के संस्थापक के रूप में आम तौर पर दो नाम लिए जाते हैं। पहले हैं कलकत्ता के एक छात्र सतीश चंद्र बसु (जिनका नाम बोस भी लिखा जाता है)। दूसरे हैं बैरिस्टर प्रमथनाथ मित्र, जिन्हें पी. मित्र कहा जाता था और जो समिति के नेता थे। बांग्लापीडिया के मुताबिक दो लोगों ने मित्र की मदद की। एक थे जतींद्रनाथ बनर्जी, जिन्होंने बड़ौदा के महाराजा की सेना में प्रशिक्षण लिया था। दूसरे थे बारींद्र कुमार घोष, जो अरविंद घोष के छोटे भाई थे।

ऐसे क्लबों का लक्ष्य शरीर और चरित्र दोनों को साथ-साथ गढ़ना था। बांग्लापीडिया बताता है कि सदस्यों को जो किताबें पढ़ने को कही जाती थीं, उनमें सबसे ऊपर स्वामी विवेकानंद की रचनाएँ थीं। लेकिन बारींद्र कुछ ज्यादा कठोर रास्ता चाहते थे। वे 1902 में बड़ौदा से कलकत्ता पहुँचे थे। 1908 की गिरफ्तारियों के बाद उन्होंने एक बयान दिया, जिसे सेडिशन कमेटी ने छापा। उसमें उन्होंने कहा कि उन्हें यकीन हो गया था कि सिर्फ राजनीतिक प्रचार से काम नहीं चलेगा, और “लोगों को खतरों का सामना करने के लिए आध्यात्मिक रूप से तैयार करना होगा।”

चिंगारी विभाजन से ही भड़की। 1905 के बंगाल विभाजन और कर्जन के शिक्षा सुधारों ने, जो लोगों को बिल्कुल पसंद नहीं थे, इन क्लबों को एक मकसद दे दिया। स्वदेशी आंदोलन ने स्वयंसेवक भी दिए और पाठक भी। इसी आंदोलन ने सबसे साहसी सदस्यों को यह यकीन भी दिला दिया कि शांतिपूर्ण विरोध अब एक दीवार से टकरा चुका है। बारीसाल सम्मेलन के बाद युगांतर ने 22 अप्रैल 1906 को लिखा कि “बल को बल से ही रोकना होगा”। पुरानी NCERT किताब यह पंक्ति ठीक उस जगह उद्धृत करती है, जहाँ वह बताती है कि बंगाल उस रास्ते पर मुड़ गया जिसे वह क्रांतिकारी आतंकवाद कहती है।

यह बदलाव तीन चरणों में आया:

  • 1902 से 1905: खुले में कसरत और नैतिक प्रशिक्षण, और क्रांतिकारी मकसद पर पूरी चुप्पी।
  • 1906 से 1907: 1906 में एक अखबार और ढाका शाखा, फिर दिसंबर 1907 में बड़े अफसरों पर हमले की पहली कोशिशें।
  • 1908: अप्रैल में मुजफ्फरपुर बम हमला, और उससे शुरू हुआ साजिश का मुकदमा।

सेडिशन कमेटी ने दर्ज किया कि ढाका समिति अपने पहले दो साल खुलेआम फली-फूली। उस दौर में वह खुद को शारीरिक और धार्मिक संस्कृति की संस्था के रूप में पेश करती थी। पूरे संगठन को समझने की कुंजी यही दोहरी जिंदगी है। व्यायामशाला सच्ची थी, और उसी की आड़ में भीतर का गुप्त दल काम करता था।

अनुशीलन समिति और युगांतर का आपस में क्या संबंध था?

ये दो विरोधी पार्टियाँ नहीं थीं, बल्कि एक ही आंदोलन के दो हिस्से थे। युगांतर कलकत्ता शाखा का अखबार था, और पुलिस ने यही नाम पश्चिमी बंगाल के नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया। ढाका अनुशीलन समिति पूर्वी शाखा थी, जिसे पुलिन बिहारी दास ने अलग से संगठित किया था। बांग्लापीडिया एक ढीली-ढाली केंद्रीय समिति का जिक्र करता है। उसमें मित्र दोनों शाखाओं के नेताओं के साथ बैठते थे, और उनके नीचे की समितियाँ बाकी मामलों में आजाद थीं। बांग्लापीडिया यह भी दर्ज करता है कि सरकार ने इन्हें दो समूहों में बाँटा: युगांतर समूह और ढाका अनुशीलन समूह।

इसे याद रखने का एक आसान तरीका है। अनुशीलन को परिवार का उपनाम मान लीजिए, और युगांतर को वह घरेलू नाम जो पुलिस ने कलकत्ता वाले घर को दे दिया। लेकिन यह तुलना एक जगह टूट जाती है। ढाका वाला घर कलकत्ता से आदेश नहीं लेता था। उसका अपना नेता था और अपनी नियमावली थी। सेडिशन कमेटी के मुताबिक बंगाल के सभी समूहों में वही सबसे ताकतवर था।

कलकत्ता का युगांतर समूह

युगांतर साप्ताहिक पहली बार मार्च 1906 में निकला। बारींद्र के अपने बयान के मुताबिक उन्होंने इसे अविनाश भट्टाचार्य और भूपेंद्रनाथ दत्त के साथ शुरू किया था। सेडिशन कमेटी ने 1907 में इसकी बिक्री 7,000 प्रतियाँ आँकी। यह अखबार 1908 में बंद हो गया, जब न्यूजपेपर्स (इंसाइटमेंट टू ऑफेंसेज) एक्ट ने सरकार को भड़काऊ सामग्री छापने वाले प्रेस जब्त करने का अधिकार दे दिया।

1907 की शुरुआत से बारींद्र ने कलकत्ता के उपनगर मानिकतला के एक बगीचे वाले मकान में 14 या 15 नौजवानों की एक टोली जुटाई, और हथियार इकट्ठा करने लगे। अरविंद घोष भी बड़ौदा से आकर अपने भाई के साथ जुड़ चुके थे। वे उस समय अंग्रेजी के राष्ट्रवादी अखबार बंदे मातरम का संपादन कर रहे थे। सेडिशन कमेटी के अनुसार इसी दल के हेमचंद्र दास ने वह बम बनाया था, जो मुजफ्फरपुर में इस्तेमाल हुआ।

ढाका अनुशीलन समिति

पुलिन बिहारी दास पहले ढाका गवर्नमेंट कॉलेज में शिक्षक थे, और बाद में ढाका के नेशनल स्कूल के पहले हेडमास्टर बने। बिपिन चंद्र पाल ने ढाका में विभाजन के खिलाफ भाषण दिया, और उसके बाद पुलिन दास ने लगभग 80 नौजवानों के साथ ढाका समिति बनाई। बांग्लापीडिया इसकी स्थापना सितंबर 1906 में बताता है, जबकि कुछ विवरण इसे 1905 के आखिर में रखते हैं। पुरानी NCERT किताब कहती है कि अकेले ढाका वाले हिस्से की 500 शाखाएँ थीं।

एक गुप्त संस्था के हिसाब से इसका ढाँचा असामान्य रूप से व्यवस्थित था। नवंबर 1908 में पुलिस ने ढाका में समिति के ठिकाने की तलाशी ली, और वहाँ पुलिन दास के दस्तखत वाला एक परिपत्र जब्त किया। इस परिपत्र ने बंगाल को इकाइयों की एक सीढ़ी में बाँट रखा था:

  • सबसे ऊपर जिला समितियाँ;
  • उनके नीचे महकुमा (उप-मंडल) समितियाँ;
  • परगना समितियाँ, जहाँ परगना का मतलब है राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज गाँवों का एक समूह;
  • केंद्रीय समितियाँ, जिनमें से हर एक कुछ छोटी स्थानीय समितियों की देखरेख करती थी।

समिति में दाखिला शपथ के साथ मिलता था। बारीसाल षड्यंत्र केस के एक गवाह ने, जिसकी गवाही अदालत ने मानी, इसका ब्योरा दिया। उसने बताया कि उसने आद्य (पहली) और अंत्य (अंतिम) शपथ ली, और फिर ढाका के एक मंदिर में देवी काली के सामने एक खास शपथ ली। यह शपथ पुलिन दास ने दिलाई थी। बांग्लापीडिया बताता है कि इन शपथों में गीता का इस्तेमाल होता था, और यही एक वजह थी कि मुसलमानों को सदस्य नहीं बनाया जा सकता था। उसके मुताबिक ज्यादातर सदस्य हिंदू भद्रलोक परिवारों के स्कूल और कॉलेज के छात्र थे। भद्रलोक यानी बंगाल का पढ़ा-लिखा उच्च और मध्य वर्ग।

हर सदस्य इससे सहज नहीं था। IGNOU की पाठ्य इकाई दर्ज करती है कि भूपेंद्रनाथ दत्त ने सिर्फ हिंदू शास्त्रों पर शपथ लेने से मना कर दिया था। कुछ शुरुआती क्रांतिकारियों ने यह शिकायत भी की कि इन रस्मों की वजह से संभावित मुसलमान हमदर्द दूर रह जाते थे। पैसे का बड़ा हिस्सा हथियारबंद लूट से आता था, जिसे सरकारी रिकॉर्ड डकैती कहते हैं।

मुजफ्फरपुर बम हमला और अलीपुर बम कांड

30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में डगलस किंग्सफोर्ड को निशाना बनाकर फेंके गए बम से दो अंग्रेज महिलाओं की मौत हो गई। मुजफ्फरपुर तब बंगाल प्रेसीडेंसी में था, और आज बिहार में है। दो दिन बाद कलकत्ता पुलिस ने मानिकतला में युगांतर समूह के बगीचे वाले मकान की तलाशी ली। इसके बाद जो मुकदमा चला, उसे अलीपुर बम कांड कहा जाता है। इसमें बारींद्र और अरविंद घोष एक साल तक कटघरे में रहे।

किंग्सफोर्ड पहले कलकत्ता के चीफ प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट रह चुके थे। वहाँ उन्होंने राष्ट्रवादी अखबारों से जुड़े लोगों पर मुकदमे चलाए और उन्हें सजा दी। IGNOU की इकाई यह भी जोड़ती है कि उन्होंने नौजवानों को कोड़े लगवाने का आदेश दिया था। 1908 तक वे मुजफ्फरपुर में जज बन चुके थे। खुदीराम बोस, जो तब 18 साल के थे, और प्रफुल्ल चाकी ने एक बग्घी पर बम फेंका, जिसे वे किंग्सफोर्ड की बग्घी समझ बैठे थे। उसमें मिसेज कैनेडी और मिस कैनेडी बैठी थीं, और दोनों मारी गईं।

आगे जो हुआ, वहीं रिवीजन नोट्स में अक्सर दोनों नाम आपस में बदल जाते हैं। प्रफुल्ल चाकी गिरफ्तार होने ही वाले थे कि उन्होंने खुद को गोली मार ली। खुदीराम बोस ने अदालत में अपना जुर्म कबूल किया। उन पर मुकदमा चला, और 11 अगस्त 1908 को मुजफ्फरपुर सेंट्रल जेल में उन्हें फाँसी दे दी गई।

2 मई 1908 की मानिकतला तलाशी में बम मिले, और चिट्ठियों का एक पूरा सिलसिला भी हाथ लगा। सेडिशन कमेटी दर्ज करती है कि 34 लोगों पर साजिश का आरोप लगा। उनमें से एक, नरेंद्रनाथ गोसाईं, सरकारी गवाह (approver) बन गया, यानी ऐसा आरोपी जो क्राउन की ओर से गवाही देने को राजी हो जाए। मुकदमा चल ही रहा था कि उसके दो साथी आरोपियों ने जेल के अंदर ही उसे गोली मार दी। इन दोनों को बाद में फाँसी दी गई। फिर 10 फरवरी 1909 को इस केस के सरकारी वकील की कलकत्ता में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

सेशंस अदालत में मुकदमा अक्टूबर 1908 में जज सी. पी. बीचक्रॉफ्ट के सामने शुरू हुआ। अरविंद की पैरवी चित्तरंजन दास ने की। 6 मई 1909 को बीचक्रॉफ्ट ने अरविंद घोष को बरी कर दिया। उनका कहना था कि सबूत इतने नहीं थे कि अरविंद को दोषी ठहराया जा सके। बारींद्र और उल्लासकर दत्त को मौत की सजा सुनाई गई। हाई कोर्ट में अपील हुई, तो दोनों की सजा बदलकर आजीवन कालापानी कर दी गई। सेडिशन कमेटी के हिसाब से 15 आरोपी ब्रिटिश सम्राट के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के दोषी पाए गए।

अब सवाल उठता है। अगर अदालत ने अरविंद को बरी कर दिया, तो किताबें उन्हें इस कहानी के बीच में क्यों रखती हैं? बरी होने का मतलब सिर्फ इतना था कि साजिश में उनकी भूमिका साबित नहीं हुई। इसका उनकी राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था। उनके लेखन ने इस आंदोलन को उसकी भाषा का बड़ा हिस्सा दिया था। इसीलिए IGNOU की इकाई उन्हें क्रांतिकारी विचारधारा में सबसे बड़ा योगदान देने वालों में गिनती है।

मुजफ्फरपुर की हत्याओं पर मई और जून 1908 में केसरी में छपे दो लेखों के लिए बाल गंगाधर तिलक को दोषी ठहराया गया, और छह साल की सजा हुई। यह बात सेडिशन कमेटी ने दर्ज की है। IGNOU की इकाई तिलक का यह तर्क भी उद्धृत करती है कि बम का जवाब दमन नहीं, बल्कि राजनीतिक सुधार है।

सरकार ने समिति का जवाब कैसे दिया?

सरकार ने 1908 से 1916 के बीच एक के बाद एक कई खास कानून बनाकर जवाब दिया। इन कानूनों से वह संस्थाओं पर पाबंदी लगा सकती थी, और संदिग्धों को बिना मुकदमे के बंद रख सकती थी। सेडिशन कमेटी के रिकॉर्ड में इनका क्रम यह है:

  • 1908: न्यूजपेपर्स (इंसाइटमेंट टू ऑफेंसेज) एक्ट ने प्रेस जब्त करने की छूट दी, और युगांतर का छपना बंद हो गया।
  • 11 दिसंबर 1908: क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट (1908 का एक्ट XIV) आया। इससे हाई कोर्ट के तीन जजों की विशेष बेंच बिना जूरी के मुकदमा चला सकती थी, और गवर्नर-जनरल इन काउंसिल किसी भी संगठन को गैरकानूनी घोषित कर सकते थे।
  • 1908 के आखिर में: पुलिन बिहारी दास और आठ अन्य लोगों को 1818 के रेगुलेशन III के तहत निर्वासित किया गया। यह एक पुराना नियम था, जो बिना मुकदमे के हिरासत की इजाजत देता था। पुलिन को 1910 में रिहा किया गया।
  • जनवरी 1909: ढाका अनुशीलन समिति और पूर्वी बंगाल की चार अन्य समितियाँ गैरकानूनी घोषित की गईं।
  • 9 फरवरी 1910: इंडियन प्रेस एक्ट ने सरकार को छापाखानों से जमानत राशि माँगने का अधिकार दिया। इसके बाद राजद्रोही साहित्य गुप्त छापाखानों में छपने लगा।
  • 1915: डिफेंस ऑफ इंडिया एक्ट आया। पहले इसका इस्तेमाल कम हुआ, लेकिन 1916 के मध्य के बाद बंगाल में इसे जमकर इस्तेमाल किया गया।

फिर जाँच की बारी आई। 10 दिसंबर 1917 को भारत सरकार ने सेडिशन कमेटी बनाई, जिसके अध्यक्ष जस्टिस एस. ए. टी. रॉलेट थे। इसका काम क्रांतिकारी साजिशों पर रिपोर्ट देना और कानून बनाने पर सलाह देना था। इसकी रिपोर्ट पर 15 अप्रैल 1918 को कलकत्ता में दस्तखत हुए। रिपोर्ट बंगाल के आँकड़े देती है: 1906 के बाद से 210 क्रांतिकारी वारदातें और 101 कोशिशें। पुलिस के पास 1,038 लोगों की जानकारी थी, लेकिन सजा सिर्फ 84 को हुई। यानी हर 12 संदिग्धों पर लगभग एक सजा। यही अंतर विशेष शक्तियों के पक्ष में कमेटी का सबसे बड़ा तर्क बना।

इन संस्थाओं के बारे में कमेटी ने कोई लाग-लपेट नहीं रखी। उसने ढाका समिति को बंगाल के संगठनों में सबसे ताकतवर बताया, और लिखा कि सिर्फ उसका होना ही जनता के लिए खतरा बन जाता। इन पंक्तियों को सरकार का पक्ष मानकर पढ़ना ही समझदारी है। कमेटी बनी ही कानून सुझाने के लिए थी। उसकी रिपोर्ट 1919 के रॉलेट एक्ट का आधार बनी, और उसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों का भी।

समिति बंगाल से बाहर कैसे फैली?

इसके तौर-तरीके बंगाली छात्रों और बंगाल छोड़कर निकले लोगों के साथ आगे बढ़े। पहले ये बनारस और दिल्ली पहुँचे, और फिर 1920 के दशक में उत्तर भारत के क्रांतिकारी समूहों तक। सेडिशन कमेटी ने पाया कि ढाका समिति के सदस्य पाँच दूसरे प्रांतों में और पूना में सक्रिय थे, पूरब में असम से लेकर उत्तर-पश्चिम में पंजाब तक।

बनारस में शचींद्रनाथ सान्याल नाम के एक युवा बंगाली छात्र ने 1908 में अनुशीलन समिति नाम से एक क्लब शुरू किया। नाम उन्होंने ढाका से उधार लिया था। जब ढाका वाली संस्था पर मुकदमे चलने लगे, तो बनारस के क्लब ने अपना नाम बदलकर यंग मेंस एसोसिएशन कर लिया। सेडिशन कमेटी ने पाया कि बाद में बनारस षड्यंत्र केस में जिन बनारस निवासियों पर आरोप लगे, उनमें से लगभग सभी इसी क्लब के सदस्य थे।

दिल्ली में बंगाली क्रांतिकारी रासबिहारी बोस के संगठित किए एक दल ने 23 दिसंबर 1912 को वायसराय लॉर्ड हार्डिंग पर बम फेंका। हार्डिंग उस समय एक सरकारी जुलूस में हाथी पर सवार थे। पुरानी NCERT किताब और सेडिशन कमेटी, दोनों दर्ज करती हैं कि वे घायल हुए। लेकिन IGNOU की इकाई कहती है कि वे बिना चोट खाए बच निकले।

पहले विश्व युद्ध के दौरान पश्चिमी समूहों ने जतींद्रनाथ मुखर्जी के नेतृत्व में जर्मन हथियारों के सहारे विद्रोह की योजना बनाई। जतींद्रनाथ को लोग बाघा जतीन के नाम से जानते थे। अप्रैल 1915 में इन समूहों ने जर्मन एजेंटों से मिलने के लिए नरेन भट्टाचार्जी को बटाविया भेजा। योजना नाकाम रही, और सितंबर 1915 में जतीन ने अपने घावों के कारण दम तोड़ दिया। इससे कुछ ही दिन पहले बालासोर के मजिस्ट्रेट की अगुवाई वाले एक पुलिस दल से उनकी मुठभेड़ हुई थी।

1920 के दशक में बंगाल वाला मॉडल फिर उभरा। पुरानी NCERT किताब के मुताबिक हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना अक्टूबर 1924 में सशस्त्र क्रांति संगठित करने के लिए हुई। IGNOU की इकाई योगेश चंद्र चटर्जी को इसका मुख्य संस्थापक बताती है। वह यह भी बताती है कि इसके सदस्य तब भी आनंदमठ और अरविंद से प्रेरणा लेते थे। HRA की सबसे चर्चित कार्रवाई 1925 का काकोरी ट्रेन एक्शन था। सितंबर 1928 में यही संगठन हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन बन गया, जो भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद का संगठन था।

अनुशीलन समिति आज

अनुशीलन समिति अब एक संगठन के रूप में मौजूद नहीं है, लेकिन उसके दो धागे आज भी दिखते हैं:

  • एक राजनीतिक पार्टी। अनुशीलन से जुड़े लोगों का एक हिस्सा मार्क्सवादी हो गया। बुद्धदेव भट्टाचार्य के लिखे पार्टी के इतिहास के मुताबिक, मार्च 1940 में, कांग्रेस के रामगढ़ अधिवेशन के समय, इन अनुशीलन मार्क्सवादियों ने रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी बनाई। इसी पार्टी के एन. के. प्रेमचंद्रन ने 2024 के लोकसभा चुनाव में केरल की कोल्लम सीट जीती, और वे 18वीं लोकसभा के सदस्य हैं।
  • सरकारी स्तर पर याद। एक PIB विज्ञप्ति के मुताबिक 24 जुलाई 2022 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने समिति की इमारत पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया, और NCERT से कहा कि वह नई राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा में समिति को जगह दे। 11 अगस्त 2026 को आकाशवाणी ने बताया कि खुदीराम बोस की फाँसी की बरसी पर देश भर में कार्यक्रम हुए।

कानूनी धागा 1908 की विशेष बेंच से 1919 के रॉलेट एक्ट तक जाता है। और यह पूरा धागा एक ही दावे पर टिका है: कि आम अदालतें राजनीतिक साजिश से नहीं निपट सकतीं।

परीक्षा के लिए अनुशीलन समिति कैसे पढ़ें

समिति आधुनिक भारत के इतिहास का हिस्सा है, जो GS पेपर I और प्रीलिम्स दोनों में काम आता है। इतिहास वैकल्पिक विषय के पेपर II में क्रांतिकारी आंदोलनों के तहत इसकी अपनी अलग जगह है। प्रीलिम्स में यह अक्सर मिलान वाले प्रश्नों में आती है, जैसे संस्थापक को संस्था से या घटना को साल से मिलाना। मुख्य परीक्षा इसे राष्ट्रीय आंदोलन की एक धारा के रूप में पूछती है। सबसे मजबूत उत्तर वे होते हैं जो समझाते हैं कि यह 1905 के बाद क्यों उभरी, और छोटी क्यों रह गई।

मुख्य परीक्षा 2020 के GS पेपर I में पूछा गया था: “लॉर्ड कर्जन की नीतियों और राष्ट्रीय आंदोलन पर उनके दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन कीजिए।” विभाजन और उससे पैदा हुई क्रांतिकारी संस्थाएँ इन्हीं दीर्घकालिक प्रभावों में आती हैं। 2022 में इतिहास वैकल्पिक के पेपर II में पूछा गया: “विश्लेषण कीजिए कि क्रांतिकारियों ने लोगों को आत्मविश्वास कैसे सिखाया और स्वतंत्रता आंदोलन का सामाजिक आधार कैसे बढ़ाया।” प्रीलिम्स की बात करें, तो Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में पिछले वर्षों के 1,403 प्रश्नों में से 184 इतिहास के हैं। ऐसे मिलान वाले प्रश्न कैसे बनाए जाते हैं, यह देखने की सबसे अच्छी जगह वही है।

इन तथ्यों को तब तक दोहराइए, जब तक आप इन्हें बिना नोट्स देखे लिख न सकें:

  • 1902, कलकत्ता: सतीश चंद्र बसु और पी. मित्र; नाम बंकिम के अनुशीलन वाले विचार से आया।
  • मार्च 1906: युगांतर साप्ताहिक, जिसे बारींद्र कुमार घोष के दल ने शुरू किया।
  • सितंबर 1906, ढाका: पुलिन बिहारी दास ने ढाका समिति बनाई, जो जनवरी 1909 के प्रतिबंध से पहले लगभग 500 शाखाओं तक फैल गई।
  • 30 अप्रैल 1908: किंग्सफोर्ड के लिए फेंके गए मुजफ्फरपुर बम से दो अंग्रेज महिलाओं की मौत हुई; खुदीराम बोस को 11 अगस्त 1908 को फाँसी दी गई।
  • 6 मई 1909: सी. पी. बीचक्रॉफ्ट का अलीपुर फैसला; अरविंद बरी हुए, और बारींद्र की मौत की सजा बाद में बदली गई।
  • 15 अप्रैल 1918: सेडिशन कमेटी की रिपोर्ट, जो 1919 के रॉलेट एक्ट का आधार बनी।
  • मार्च 1940: अनुशीलन मार्क्सवादियों ने रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी बनाई।

वे उलझनें जिनसे अंक कटते हैं, और उन्हें अलग रखने का तरीका:

  • अनुशीलन बनाम युगांतर। अनुशीलन संस्था है; युगांतर कलकत्ता का अखबार है, और पश्चिमी शाखा के लिए पुलिस का दिया नाम भी।
  • किंग्सफोर्ड बनाम कैनेडी परिवार। निशाना किंग्सफोर्ड थे और वे बच गए; जान दोनों महिलाओं की गई।
  • चाकी बनाम खुदीराम। चाकी ने खुद को गोली मारी; खुदीराम पर मुकदमा चला और उन्हें फाँसी हुई।
  • अरविंद बनाम बारींद्र। अरविंद बरी हुए; उनके छोटे भाई को सजा हुई।
  • अनुशीलन बनाम अभिनव भारत। पहली बंगाल की संस्था है, 1902 की; दूसरी वी. डी. सावरकर की संस्था है, जो 1904 में महाराष्ट्र में बनी।

इस तालिका में समिति को उसकी साथी संस्थाओं के साथ रखकर देखिए:

संगठनस्थापनाप्रमुख लोगआधार क्षेत्रकिस बात के लिए जाना जाता है
अनुशीलन समिति1902सतीश चंद्र बसु, पी. मित्रकलकत्ताव्यायाम क्लब के रूप में शुरू हुई मूल संस्था
ढाका अनुशीलन समिति1906पुलिन बिहारी दासढाका और पूर्वी बंगाललगभग 500 शाखाएँ; 1909 में प्रतिबंध
युगांतर समूह1906बारींद्र कुमार घोष, बाद में जतींद्रनाथ मुखर्जीकलकत्ता और पश्चिम बंगालमुजफ्फरपुर, मानिकतला और 1915 की जर्मन साजिश
अभिनव भारत1904वी. डी. सावरकरनासिक, बाद में पूनामहाराष्ट्र की गुप्त संस्था
HRA, बाद में HSRA1924 और 1928योगेश चंद्र चटर्जी; भगत सिंह और चंद्रशेखर आजादसंयुक्त प्रांत और पंजाब1925 का काकोरी और 1928 का समाजवादी मोड़

पहली बार पढ़ने के लिए क्रांतिकारी धाराओं पर IGNOU की इकाई छोटी है, और मुफ्त भी। लेकिन इसकी तारीखों को पुरानी NCERT किताब से मिलाकर देखिए। दोनों कई ब्योरों पर अलग-अलग बात कहती हैं, जैसे स्थापना का साल और हार्डिंग पर हुए हमले का नतीजा।

अनुशीलन समिति पर एक हफ्ते के नोट्स से ज्यादा फायदा एक शाम की ध्यान से की गई पढ़ाई देती है। अगर आप समझा सकें कि एक व्यायामशाला साजिश में कैसे बदली, और वह साजिश कभी जन आंदोलन क्यों नहीं बन पाई, तो आपके पास वह सब है जो क्रांतिकारी राष्ट्रवाद पर ज्यादातर प्रश्न असल में पूछते हैं। प्रीलिम्स में सबसे ज्यादा तारीखें काम आती हैं, और मुख्य परीक्षा में कारण।

सामान्य प्रश्न

अनुशीलन समिति की स्थापना किसने की?

अनुशीलन समिति की स्थापना का श्रेय आम तौर पर कलकत्ता के छात्र सतीश चंद्र बसु और बैरिस्टर प्रमथनाथ मित्र को दिया जाता है, जो लगभग 1902 से समिति का नेतृत्व कर रहे थे। शिक्षा मंत्रालय की 2022 की एक विज्ञप्ति अरविंद घोष और सरला देवी को भी इसके संस्थापकों में गिनती है। बारींद्र कुमार घोष और जतींद्रनाथ बनर्जी ने इसे क्रांतिकारी काम की ओर मोड़ने में मदद की।

अनुशीलन समिति की स्थापना कब हुई?

बांग्लापीडिया समेत ज्यादातर विवरण कलकत्ता समिति की स्थापना 1902 में बताते हैं, जबकि IGNOU की एक पाठ्य इकाई 1901 बताती है। इसके बाद 1906 में पुलिन बिहारी दास के नेतृत्व में ढाका शाखा बनी। परीक्षा में 1902 लिखना ज्यादा सुरक्षित है।

अनुशीलन समिति और युगांतर में क्या अंतर है?

दोनों एक ही आंदोलन के हिस्से थे। युगांतर एक बांग्ला साप्ताहिक था, जिसे मार्च 1906 में बारींद्र कुमार घोष के दल ने शुरू किया। पुलिस ने इसी नाम को पश्चिमी बंगाल के क्रांतिकारी नेटवर्क के लिए इस्तेमाल किया, जबकि पूर्वी नेटवर्क ढाका अनुशीलन समिति थी। दोनों शाखाओं का नेतृत्व ढीले तौर पर साझा था, लेकिन ज्यादातर काम वे अपने दम पर चलाती थीं।

ढाका अनुशीलन समिति की स्थापना किसने की?

इसे पुलिन बिहारी दास ने संगठित किया, जो एक शिक्षक थे और बाद में ढाका के नेशनल स्कूल के पहले हेडमास्टर बने। बिपिन चंद्र पाल के ढाका में विभाजन-विरोधी भाषण के बाद, 1906 में पुलिन दास ने लगभग 80 नौजवानों के साथ यह समिति बनाई। यह लगभग 500 शाखाओं तक फैल गई। सरकार ने जनवरी 1909 में इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया।

अलीपुर बम कांड क्या था?

यह साजिश का वह मुकदमा था, जो 2 मई 1908 को कलकत्ता के मानिकतला में एक बगीचे वाले मकान की पुलिस तलाशी के बाद चला। यह तलाशी मुजफ्फरपुर बम हमले के दो दिन बाद हुई थी। अरविंद घोष, बारींद्र कुमार घोष और दूसरे लोगों पर ब्रिटिश सम्राट के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप लगा। जज सी. पी. बीचक्रॉफ्ट ने 6 मई 1909 को फैसला सुनाया।

क्या अलीपुर बम कांड में अरविंद घोष को दोषी ठहराया गया था?

नहीं। जज बीचक्रॉफ्ट ने 6 मई 1909 को उन्हें बरी कर दिया, क्योंकि सबूत उनका दोष साबित करने के लिए काफी नहीं थे। उनके वकील चित्तरंजन दास थे। उनके भाई बारींद्र और उल्लासकर दत्त को मौत की सजा सुनाई गई, और बाद में हाई कोर्ट ने दोनों की सजा बदलकर आजीवन कालापानी कर दी।

बाद में अनुशीलन समिति का क्या हुआ?

इसके तौर-तरीके बनारस और दिल्ली तक फैले, और 1920 के दशक में उत्तर भारत के क्रांतिकारी समूहों को ताकत देते रहे। इनमें 1924 की हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन भी शामिल थी। इसके सदस्यों का एक हिस्सा मार्क्सवादी हो गया। मार्च 1940 में इन अनुशीलन मार्क्सवादियों ने रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी बनाई, जिसने 2024 में केरल की कोल्लम सीट जीती।

अनुशीलन का अर्थ क्या है?

अनुशीलन का अर्थ है अभ्यास या साधना, और संस्थापकों ने यह शब्द बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के लेखन से लिया था। 1918 की सेडिशन कमेटी ने समिति के नाम का अर्थ संस्कृति और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने वाली संस्था बताया। यह नाम उसके बाहरी चेहरे पर सही बैठता था, यानी कसरत और नैतिक प्रशिक्षण वाले क्लब पर।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. अनुशीलन समिति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी शुरुआत कलकत्ता में नौजवानों के शारीरिक और नैतिक प्रशिक्षण की संस्था के रूप में हुई। 2. इसकी ढाका शाखा को पुलिन बिहारी दास ने संगठित किया था। 3. इसकी स्थापना वी. डी. सावरकर ने नासिक में की थी। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 2 और 3
  • (c) केवल 1 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (a) सावरकर ने 1904 में महाराष्ट्र में अभिनव भारत संगठित किया था; अनुशीलन समिति बंगाल की संस्था थी।

2. खुदीराम बोस और प्रफुल्ल चाकी ने 30 अप्रैल 1908 को मुजफ्फरपुर में जो बम फेंका था, वह किसके लिए था?

  • (a) लॉर्ड मिंटो
  • (b) डगलस किंग्सफोर्ड
  • (c) लॉर्ड हार्डिंग
  • (d) चार्ल्स टेगार्ट

उत्तर: (b) बम इसकी जगह मिसेज कैनेडी और मिस कैनेडी की बग्घी पर गिरा, और किंग्सफोर्ड को कोई चोट नहीं आई।

3. अलीपुर बम कांड के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह मई 1908 में मानिकतला के एक बगीचे वाले मकान की पुलिस तलाशी के बाद शुरू हुआ। 2. अरविंद घोष को दोषी ठहराकर आजीवन कालापानी की सजा दी गई। 3. चित्तरंजन दास ने अरविंद घोष की पैरवी की। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) अरविंद 6 मई 1909 को बरी हो गए थे; सजा उनके भाई बारींद्र को सुनाई गई थी।

4. युगांतर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?

  • (a) यह बाल गंगाधर तिलक द्वारा संपादित एक मराठी साप्ताहिक था।
  • (b) यह एक बांग्ला साप्ताहिक था, जिसे 1906 में कलकत्ता में बारींद्र कुमार घोष और उनके साथियों ने शुरू किया।
  • (c) यह ढाका अनुशीलन समिति का एक अंग्रेजी दैनिक था।
  • (d) यह 1924 में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन द्वारा शुरू किया गया एक अखबार था।

उत्तर: (b) न्यूजपेपर्स (इंसाइटमेंट टू ऑफेंसेज) एक्ट के बाद 1908 में इसका छपना बंद हो गया।

5. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ढाका अनुशीलन समिति को क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 1908 के तहत जनवरी 1909 में गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया। 2. रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी का गठन 1940 में अनुशीलन परंपरा के मार्क्सवादियों ने किया। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (c) दोनों बातें रिकॉर्ड में दर्ज हैं: जनवरी 1909 का प्रतिबंध और मार्च 1940 में RSP का गठन।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. 1920 के दशक से राष्ट्रीय आंदोलन ने कई वैचारिक धाराएँ अपनाईं और इस तरह अपना सामाजिक आधार बढ़ाया। चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2020, GS पेपर I।
  2. स्वदेशी आंदोलन ने बंगाल की व्यायाम संस्थाओं को क्रांतिकारी संगठनों में कैसे बदल दिया? अनुशीलन समिति के उदाहरण से स्पष्ट कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. 1905 से 1918 के बीच बंगाल में क्रांतिकारी राष्ट्रवाद जन आंदोलन क्यों नहीं बन सका? अनुशीलन समिति और युगांतर समूह के संदर्भ में मूल्यांकन कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  4. 1908 से 1919 के बीच औपनिवेशिक कानूनों ने बंगाल की क्रांतिकारी संस्थाओं का जवाब कैसे दिया, इसका परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
  5. बंगाल की क्रांतिकारी संस्थाओं और बाद के संगठनों, जैसे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी, के बीच की कड़ियों का पता लगाइए। (10 अंक, 150 शब्द)

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Written by

Kaustubh Gaurh Sir

Kaustubh Gaurh teaches Ancient and Medieval History at Anantam IAS. He moves between dynasties, temple architecture and the Bhakti and Sufi traditions, and draws on Indian philosophical thought to ground GS IV ethics answers in more than the standard Western thinkers.

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