UPSC CSE 2026 Essay Paper Discussion

सशस्त्र सीमा बल (SSB): खुली सीमाएँ, सीमा के लोगों से जुड़ी जड़ें और SSB अधिनियम

सशस्त्र सीमा बल की पूरी तस्वीर: 1963 में शुरुआत, नेपाल और भूटान की खुली सीमाएँ, SSB अधिनियम, 2007, और यह ITBP या BSF से कैसे अलग है।

A dirt track winding along the forested Singalila ridge near Phalut, West Bengal, above layers of blue hills

सशस्त्र सीमा बल (SSB) वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जो नेपाल और भूटान से लगी भारत की सीमाओं की रखवाली करता है। नेपाल वाली सीमा 1,751 किलोमीटर लंबी है और भूटान वाली 699 किलोमीटर। इसकी शुरुआत 1963 में हुई, चीन के साथ युद्ध के कुछ ही महीनों बाद। तब इसे सीमा के गाँवों में लोगों के बीच काम करने के लिए बनाया गया था। 2001 से यह गृह मंत्रालय की ओर से नेपाल सीमा संभाल रहा है। इसे बाकी बलों से अलग बनाती है खुद वह सीमा, जिस पर यह तैनात है। भारतीय और उस पार रहने वाले उनके पड़ोसी इस सीमा को बिना पासपोर्ट या वीजा के पार करते हैं।

SSB, इन अक्षरों के साथ दो गलतफहमियाँ हमेशा चलती रहती हैं। पहली है सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड, जो सेनाओं में अफसर प्रशिक्षण के लिए उम्मीदवारों को परखता है। इस बल से उसका कोई लेना-देना नहीं है। दूसरी गलतफहमी एक तारीख की है। कई नोट्स, और गृह मंत्रालय की सालाना रिपोर्ट की एक पंक्ति भी, नए नाम को 2001 में ही डाल देते हैं। लेकिन बल का अपना रिकॉर्ड कहता है कि स्पेशल सर्विस ब्यूरो 15 दिसंबर 2003 को सशस्त्र सीमा बल बना। यह नोट साफ करता है कि कौन-सा बदलाव कब हुआ। यह यह भी समझाता है कि खुली सीमा की निगरानी, बाड़ वाली सीमा की रखवाली से अलग काम क्यों है।

सशस्त्र सीमा बल क्या है?

सशस्त्र सीमा बल शांति के समय दो खुली स्थलीय सीमाओं की रखवाली करता है। गृह मंत्रालय (MHA) की सालाना रिपोर्ट इसे पाँच केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) में गिनती है। नाम का मतलब सीधा है: हथियारबंद सीमा बल, यानी अंग्रेजी में ‘armed border force’। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों वाला नोट दिखाता है कि यह पूरा परिवार किस तरह बँटा हुआ है।

तथ्यविवरण
पूरा नामसशस्त्र सीमा बल (SSB); पहले स्पेशल सर्विस ब्यूरो
शुरुआतस्पेशल सर्विस बॉडी, जो 1962 के युद्ध के बाद 1963 की शुरुआत में बनी; 1966 में इसका नाम स्पेशल सर्विस ब्यूरो हुआ
मंत्रालय15 जनवरी 2001 से गृह मंत्रालय; उससे पहले कैबिनेट सचिवालय
कानूनसशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 (2007 का अधिनियम संख्या 53), जिसे 20 दिसंबर 2007 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली; SSB नियम 1 अगस्त 2009 से लागू
किन सीमाओं की रखवालीभारत-नेपाल, 1,751 किलोमीटर (19 जून 2001 से), और भारत-भूटान, 699 किलोमीटर (12 मार्च 2004 से)
संख्या बल और इकाइयाँ31 दिसंबर 2024 को 94,202 कर्मी, 73 बटालियनों में (गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25)
मुख्यालय और प्रमुखफोर्स मुख्यालय, ईस्ट ब्लॉक-V, आर.के. पुरम, नई दिल्ली; कमान एक महानिदेशक के हाथ में, और 2026 का CAPF अधिनियम यह पद प्रतिनियुक्ति पर आए IPS अफसरों के लिए आरक्षित करता है
आदर्श वाक्यसेवा, सुरक्षा और बंधुत्व (Service, Security and Brotherhood)
स्थापना दिवस20 दिसंबर; 61वाँ स्थापना दिवस 20 दिसंबर 2024 को सिलीगुड़ी में मनाया गया

SSB का गठन 1963 में क्यों हुआ?

SSB का गठन सीमा के लोगों के साथ काम करने के लिए हुआ था, किसी मोर्चे को थामे रखने के लिए नहीं। गृह मंत्रालय के शब्दों में, चीन से टकराव के बाद 1963 की शुरुआत में स्पेशल सर्विस ब्यूरो बनाया गया, ताकि “सीमा पार से आने वाली भड़काऊ गतिविधियों, घुसपैठ और तोड़फोड़ के खतरों के खिलाफ सीमावर्ती आबादी का मनोबल और क्षमता बढ़ाई जा सके”। यहाँ भड़काऊ गतिविधि (subversion) का मतलब है दुश्मन का स्थानीय लोगों को उनके अपने ही देश के खिलाफ खड़ा कर देना। इसीलिए इसका जवाब लोगों से शुरू हुआ।

बल की वेबसाइट का इतिहास वाला पेज इस सोच की बाकी तस्वीर भरता है। उसके मुताबिक स्पेशल सर्विस बॉडी का विचार नवंबर 1962 में बना, और मार्च 1963 में कैबिनेट सचिवालय के तहत इसे खड़ा किया गया। इसका लक्ष्य था दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में “संपूर्ण सुरक्षा तैयारी”, और युद्ध छिड़ने पर स्टे-बिहाइंड (stay-behind) भूमिका। स्टे-बिहाइंड बल वह होता है जो किसी इलाके पर दुश्मन का कब्जा हो जाने पर भी नियमित सेना के साथ पीछे नहीं हटता, बल्कि स्थानीय लोगों के बीच ही रुका रहता है। इसके काम के पहले इलाके ये थे:

  • उत्तरी असम और उत्तरी बंगाल;
  • उत्तर प्रदेश के पहाड़ी जिले, जो आज उत्तराखंड हैं;
  • हिमाचल प्रदेश और पंजाब का एक हिस्सा;
  • पुराने जम्मू-कश्मीर राज्य का लद्दाख इलाका।

पहले ठिकाने असम के तेजपुर में और NEFA में बने, जिसे आज अरुणाचल प्रदेश कहते हैं। बी. एन. मलिक इसके पहले निदेशक बनाए गए।

महीना इस पर निर्भर करता है कि आप कौन-सा रिकॉर्ड पढ़ रहे हैं। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट 1963 की शुरुआत बताती है, और इतिहास वाला पेज मार्च 1963। वहीं उसी वेबसाइट का एक टाइमलाइन ग्राफिक 15 मई 1963 की तारीख देता है और नई संस्था को विदेश मंत्रालय के तहत रखता है। साल तय है, महीना नहीं। इसलिए याद रखने लायक तथ्य 1963 है। बल हर साल 20 दिसंबर को अपना स्थापना दिवस मनाता है।

एक युद्ध से निकले दो बल

1962 के युद्ध से अलग-अलग कामों वाले दो बल निकले। ITBP का गठन 24 अक्टूबर 1962 को चीन से लगे हिमालयी मोर्चे के लिए हुआ। वहीं स्पेशल सर्विस बॉडी को मोर्चे के पीछे रहने वाले लोगों के साथ काम करने के लिए बनाया गया। मकसद का यही बँटवारा बताता है कि आज दोनों अलग-अलग सीमाओं पर क्यों हैं: एक चीन सीमा पर है, और दूसरा नेपाल और भूटान की सीमाओं पर।

ब्यूरो से सीमा रक्षक बल तक

कारगिल समीक्षा समिति की रिपोर्ट के बाद बने मंत्रियों के समूह ने ‘एक सीमा, एक बल’ की सिफारिश की। मकसद यह था कि हर स्थलीय सीमा के हर हिस्से की जवाबदेही एक ही बल की हो। वाजपेयी सरकार ने इसे मान लिया। गृह मंत्रालय अब इसे ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ कहता है। SSB के लिए बदलाव कई चरणों में आए:

  • 1966: स्पेशल सर्विस बॉडी का नाम बदलकर स्पेशल सर्विस ब्यूरो किया गया।
  • 15 जनवरी 2001: यह कैबिनेट सचिवालय से निकलकर गृह मंत्रालय के तहत आ गया।
  • 19 जून 2001: इसे भारत-नेपाल सीमा सौंपी गई और उस सीमा के लिए प्रमुख खुफिया एजेंसी (Lead Intelligence Agency) घोषित किया गया।
  • 15 दिसंबर 2003: स्पेशल सर्विस ब्यूरो का नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल किया गया।
  • 12 मार्च 2004: इसे भारत-भूटान सीमा सौंपी गई और वहाँ भी प्रमुख खुफिया एजेंसी बनाया गया।
  • 27 मार्च 2004: उप-प्रधानमंत्री के हाथों इसे राष्ट्रपति का निशान (President’s Colour) मिला।
  • 20 दिसंबर 2007: सशस्त्र सीमा बल अधिनियम को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली।
  • 1 अगस्त 2009: SSB नियम लागू हुए।

2001 और 2003 वाली पंक्तियों को साथ रखकर पढ़िए। सीमा की ड्यूटी और गृह मंत्रालय में जाना पहले हुआ, और नया नाम उसके दो साल से भी ज्यादा बाद आया। प्रमुख खुफिया एजेंसी वह एजेंसी है जो किसी सीमा पर खुफिया जानकारी जुटाने और साझा करने की अगुवाई करती है। यानी इन दोनों सीमाओं पर SSB पहरेदार भी है, और जानकारी जुटाने वाला मुख्य स्रोत भी।

SSB अधिनियम, 2007 क्या कहता है?

यह बल 44 साल तक अपने किसी कानून के बिना चला, उसके बाद संसद ने इसे कानूनी आधार दिया। सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007, यानी 2007 का अधिनियम संख्या 53, को 20 दिसंबर 2007 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिली। यह कब से लागू होगा, यह फैसला सरकार की अधिसूचना पर छोड़ा गया। अधिनियम का ज्यादातर वजन तीन धाराओं पर टिका है:

  • धारा 4 “भारत की सीमाओं की सुरक्षा पक्की करने और केंद्र सरकार द्वारा सौंपे जाने वाले ऐसे अन्य कर्तव्यों के पालन के लिए सशस्त्र सीमा बल नाम का संघ का एक सशस्त्र बल” बनाती है।
  • धारा 5 बल का सामान्य अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण केंद्र सरकार को देती है। कमान और देखरेख केंद्र के नियुक्त किए महानिदेशक के पास रहती है।
  • धारा 7 के तहत हर सदस्य भारत के किसी भी हिस्से में, और भारत के बाहर भी, सेवा देने के लिए बाध्य है।

धारा 4 के शब्द “ऐसे अन्य कर्तव्य” ही इस बल को नेपाल और भूटान से दूर तैनात होने का रास्ता देते हैं, जैसे जम्मू-कश्मीर में या वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित जिलों में। अधिनियम सक्रिय ड्यूटी (active duty) की परिभाषा में वह यूनिट भी गिनता है जो किसी पिकेट, यानी छोटी गार्ड चौकी, पर तैनात हो, या भारत की सीमाओं के साथ गश्त या पहरे की ड्यूटी पर हो। व्यावहारिक नतीजा यह है कि नेपाल सीमा पर रोज की गश्त भी कानून की उसी परिभाषा में आती है, जिसमें दुश्मन के खिलाफ अभियान आते हैं।

बल की वेबसाइट उसके काम उसी तरह गिनाती है, जैसे अधिनियम और नियम उन्हें तय करते हैं:

  • सौंपी गई सीमाओं की हिफाजत करना और सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा का भाव जगाना;
  • सीमा पार के अपराध, तस्करी और दूसरी गैरकानूनी गतिविधियों को रोकना;
  • भारत में बिना इजाजत घुसने या यहाँ से बिना इजाजत बाहर जाने को रोकना;
  • अपनी जिम्मेदारी वाले इलाके में सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाना;
  • केंद्र सरकार का सौंपा हुआ कोई भी दूसरा काम करना।

चौथा काम 1963 वाली सोच को कानून तक ले आता है। सिविक एक्शन वह कल्याण का काम है जो बल अपने इलाके के निवासियों के लिए चलाता है। यानी सीमा की आबादी का भरोसा जीतना आज भी सीमा की रखवाली के काम का हिस्सा है।

खुली नेपाल सीमा की निगरानी मुश्किल क्यों है?

मुश्किल इसलिए है क्योंकि कानून खुद मानकर चलता है कि लोग सीमा पार करेंगे। 26 जुलाई 2017 को राज्यसभा में गृह मंत्रालय ने एक जवाब में कहा कि सीमा के आर-पार भारतीय और नेपाली नागरिकों की आवाजाही “भारत-नेपाल शांति और मैत्री संधि, 1950 से तय होती है, जो दोनों देशों के नागरिकों को सीमा के आर-पार बेरोकटोक आने-जाने की सुविधा देती है”। उसी जवाब में इस सीमा को “खुली, आसानी से पार की जा सकने वाली (porous) और घनी आबादी वाली” बताया गया। SSB की वेबसाइट यह भी जोड़ती है कि भूटान सीमा पर भी वीजा या पासपोर्ट की कोई औपचारिकता नहीं है। दोनों देशों के रिश्तों में इस संधि की बड़ी जगह भारत-नेपाल संबंध वाले नोट में समझाई गई है।

ये दोनों सीमाएँ मिलकर सात राज्यों को छूती हैं:

  • भारत-नेपाल, 1,751 किलोमीटर: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम।
  • भारत-भूटान, 699 किलोमीटर: सिक्किम, पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश।

बाड़ वाली सीमा को ताला लगे उस गेट की तरह समझिए, जिस पर पहरेदार खड़ा है। वहाँ बिना इजाजत पार करने वाला हर व्यक्ति शक के घेरे में होता है। खुली सीमा रेलवे स्टेशन के ज्यादा करीब है। वहाँ हजारों लोग कानूनी तौर पर गुजरते हैं, और पहरेदार का काम भीड़ में उन गिने-चुने लोगों को पहचानना है जो इसका गलत फायदा उठाते हैं। लेकिन पैमाने पर आकर यह तुलना टूट जाती है। स्टेशन के कुछ ही दरवाजे होते हैं, जबकि यह सीमा 2,450 किलोमीटर लंबी है और लगभग किसी भी जगह से पैदल पार की जा सकती है। SSB की अपनी वेबसाइट इस काम को “तय दुश्मनों वाली प्रतिबंधित सीमा की सुरक्षा से शायद ज्यादा कठिन” बताती है।

इसलिए यहाँ काम रोकने का नहीं, जाँचने का है। 2017 के जवाब में इसके तरीके गिनाए गए थे:

  • गश्त करना और नाके लगाना, यानी सड़कों और रास्तों पर अस्थायी चेकपॉइंट;
  • सीमा पार करने वालों की जाँच, कभी अचानक और कभी SSB के अपने सूत्रों या सहयोगी एजेंसियों से मिली खास सूचना पर;
  • बल के साथ-साथ राज्य पुलिस की चौकसी;
  • नेपाल के साथ नियमित बातचीत, जिसमें गृह सचिव स्तर की वार्ता और सीमा प्रबंधन पर संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) शामिल हैं।

गृह मंत्रालय की 2024-25 की रिपोर्ट दोनों सीमाओं पर मुख्य चुनौती यह बताती है कि “आतंकवादियों और अपराधियों द्वारा खुली सीमा के दुरुपयोग” को रोका जाए। रिपोर्ट इस काम के लिए बने नेटवर्क को भी गिनाती है:

  • नेपाल सीमा पर 539 सीमा चौकियाँ और भूटान सीमा पर 195, हर एक अपने आप में पूरी चौकी, जहाँ से सीमा के एक हिस्से पर नजर रखी जाती है;
  • उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और बिहार में नेपाल सीमा के साथ 1,299.80 किलोमीटर सड़कों की मंजूरी;
  • नेपाल सीमा पर रक्सौल (3 जून 2016), जोगबनी (15 नवंबर 2016) और रुपईडीहा (1 जून 2023) में, और भूटान सीमा पर असम के दरंगा (8 अगस्त 2024) में एकीकृत चेक पोस्ट (Integrated Check Post)।

एकीकृत चेक पोस्ट किसी औपचारिक क्रॉसिंग पर सामान और लोगों की सरकारी जाँच को एक ही जगह ले आता है। खुली सीमा पर अच्छी तरह चलने वाली औपचारिक क्रॉसिंग कानूनी आवाजाही को उसी रास्ते से गुजरने की वजह देती है। सीमा प्रबंधन वाला नोट भारत की बाकी स्थलीय सीमाओं पर इसी व्यवस्था को समझाता है।

पश्चिम बंगाल दोनों सीमाओं पर पड़ता है, और उसके उत्तरी सिरे पर सिलीगुड़ी गलियारा है। 2024 के स्थापना दिवस पर गृह मंत्री ने वहाँ SSB की तैनाती को पूरे देश के लिए भरोसे की वजह बताया। चिकन्स नेक वाला नोट समझाता है कि यह पट्टी इतनी अहम क्यों है।

SSB का ढाँचा कैसा है और यह कहाँ-कहाँ तैनात है?

SSB का ढाँचा नई दिल्ली के फोर्स मुख्यालय से शुरू होकर बटालियन तक जाता है, जो इसकी बुनियादी फील्ड यूनिट है। गृह मंत्रालय की 2024-25 की रिपोर्ट यह ढाँचा इस तरह बताती है:

  • 1 फोर्स मुख्यालय;
  • 6 फ्रंटियर और 18 सेक्टर, यानी कमान की क्षेत्रीय और बीच की परतें;
  • 73 बटालियनें;
  • 12 प्रशिक्षण संस्थान, जिनमें 4 रिक्रूट्स ट्रेनिंग सेंटर और 2 सेंट्रल ट्रेनिंग सेंटर से लेकर SSB अकादमी और एक काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल तक शामिल हैं;
  • 3 कंपोजिट अस्पताल, साथ में भंडार और वर्कशॉप।

रिपोर्ट के मुताबिक 31 दिसंबर 2024 को बल का मौजूदा संख्या बल 94,202 था। CAPF में महिलाओं वाली उसकी तालिका उसी तारीख को SSB में 4,116 महिलाएँ गिनती है। यह वहाँ दर्ज मौजूदा संख्या बल का 4.46% है। गृह मंत्री ने जनवरी 2024 में लक्ष्य रखा कि 2026 तक यह हिस्सा 6% हो जाए, यानी मौजूदा से करीब एक-तिहाई ज्यादा।

सीमाओं के अलावा SSB आंतरिक सुरक्षा और उग्रवाद-रोधी ड्यूटी भी करता है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट इसकी तैनाती इन जगहों पर बताती है:

  • जम्मू-कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश;
  • असम;
  • छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के वामपंथी उग्रवाद वाले इलाके।

इस काम की ज्यादातर सार्वजनिक जानकारी स्थापना दिवस के भाषणों से आती है, इसलिए यह सरकार का अपना ब्योरा है। 20 दिसंबर 2024 को गृह मंत्री ने बताया कि SSB के जवानों ने जम्मू-कश्मीर में 19 से ज्यादा आतंकवादियों को मार गिराया और 14 को गिरफ्तार किया। उन्होंने यह भी कहा कि सात साल में बल ने 600 से ज्यादा माओवादियों को गिरफ्तार किया है। CRPF और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर बिहार और झारखंड को नक्सल-मुक्त बनाने का श्रेय भी उन्होंने इस बल को दिया। इसे सरकार का आकलन मानिए, क्योंकि मंत्रालय की अपनी रिपोर्ट में अब भी दोनों राज्यों के LWE प्रभावित इलाकों में SSB की तैनाती दर्ज है।

खुद सीमा पर इसका रिकॉर्ड ज्यादातर तस्करी और मानव तस्करी से जुड़ा है। 1 जनवरी 2023 से 31 दिसंबर 2024 के बीच के लिए गृह मंत्रालय की रिपोर्ट ये आँकड़े गिनाती है:

  • नशीले पदार्थों के 1,026 मामले, जिनमें 539 लोग गिरफ्तार हुए और 16,494.6 किलोग्राम माल जब्त हुआ;
  • गाँजा, अफीम और पोस्त की 3,663.6 एकड़ अवैध फसल नष्ट की गई।

मानव तस्करी पर गृह मंत्री ने 2024 के स्थापना दिवस पर बताया कि SSB ने 183 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया और 301 पीड़ितों को छुड़ाया, जिनमें 231 लड़कियाँ थीं। जिस सीमा को लोग बेरोकटोक पार करते हैं, वहाँ जाँच इसी तरह के नुकसान को पकड़ने के लिए होती है।

SSB, ITBP, BSF और असम राइफल्स से कैसे अलग है?

चारों बल स्थलीय सीमाओं की रखवाली करते हैं। ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ के तहत हर बल खास पड़ोसी देशों से बँधा है। यह तालिका गृह मंत्रालय की 2024-25 की रिपोर्ट पर आधारित है।

बिंदुSSBITBPBSFअसम राइफल्स
शुरुआतस्पेशल सर्विस बॉडी, 1963 की शुरुआत24 अक्टूबर 1962 को गठन1965 में 25 बटालियनों के साथ गठन1835 में कछार लेवी के रूप में गठन
किस सीमा की रखवालीनेपाल (1,751 किलोमीटर) और भूटान (699 किलोमीटर)चीन (3,488 किलोमीटर)पाकिस्तान (3,323 किलोमीटर) और बांग्लादेश (4,096.7 किलोमीटर)म्यांमार (1,643 किलोमीटर)
मुख्यालयनई दिल्लीनई दिल्लीनई दिल्लीशिलांग
सीमा से बाहर का कामजम्मू-कश्मीर और असम में आंतरिक सुरक्षा; LWE इलाकेहिमालयी आपदाओं में सबसे पहले पहुँचने वाला बलछत्तीसगढ़ और ओडिशा में नक्सल-विरोधी अभियानपूर्वोत्तर में उग्रवाद-रोधी अभियान
गृह मंत्रालय की सूची में जगहपाँच CAPF में से एकपाँच CAPF में से एकपाँच CAPF में से एकअलग से, सबसे पुराने अर्धसैनिक बल के रूप में

सीमा वाली पंक्ति याद कर लीजिए, क्योंकि वही हर बल को उसके पड़ोसियों से जोड़ती है। आखिरी पंक्ति बताती है कि किताबें CAPF की गिनती पर एकमत क्यों नहीं हैं: गृह मंत्रालय की रिपोर्ट पाँच बल गिनती है और असम राइफल्स का ब्योरा अलग से देती है।

आज का SSB: एक अदालती फैसला, एक नया कानून और सीमा के गाँव

SSB की हाल की खबरें सीमा के बारे में कम हैं। वे ज्यादातर इसके अफसरों के बारे में हैं, और उन गाँवों के बारे में जिनकी यह रखवाली करता है। इनमें से ज्यादातर खबरें 2025 और 2026 की हैं।

2025 का फैसला और 2026 का अधिनियम

23 मई 2025 को जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस उज्जल भुइयाँ की सुप्रीम कोर्ट बेंच ने SSB समेत सभी CAPF का कैडर रिव्यू छह महीने के भीतर करने का आदेश दिया। याचिकाएँ इन बलों के अपने अफसरों की थीं, जिन्होंने दूसरी माँगों के साथ IPS प्रतिनियुक्ति खत्म करने की माँग भी की थी। कैडर अफसर वे हैं जिनकी भर्ती सीधे बल में होती है, आमतौर पर सहायक कमांडेंट के रूप में। प्रतिनियुक्ति वाले पदों पर भारतीय पुलिस सेवा से उधार लिए गए अफसर बैठते हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक कोर्ट ने CAPF को संगठित ग्रुप A सेवाएँ (Organised Group A Services) माना। यह दर्जा किसी सेवा के अपने अफसरों की व्यवस्थित करियर तरक्की से जुड़ा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड तक के प्रतिनियुक्ति वाले पद दो साल के भीतर धीरे-धीरे घटाए जाएँ। केंद्र की पुनर्विचार याचिका 28 अक्टूबर 2025 को खारिज हो गई।

संसद ने इसका जवाब एक कानून से दिया। CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में पेश हुआ। 1 अप्रैल को राज्यसभा ने इसे पास किया और 2 अप्रैल को लोकसभा ने। 9 अप्रैल को राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी। यह पाँच बलों पर लागू होता है, जिनमें SSB भी है, लेकिन असम राइफल्स इनमें शामिल नहीं है। वरिष्ठ पदों पर यह IPS से प्रतिनियुक्ति इस तरह तय करता है:

  • महानिरीक्षक के 50% पद;
  • अपर महानिदेशक के कम से कम 67% पद;
  • विशेष महानिदेशक और महानिदेशक के सभी पद।

आकाशवाणी की खबर के मुताबिक यह अधिनियम केंद्र को ऐसे सेवा नियम बनाने की ताकत भी देता है, जो इनसे टकराने वाले कानूनों और अदालती फैसलों पर भारी पड़ें। सरकार का तर्क है कि अफसरों की सेवा शर्तों के लिए एक ही ढाँचा हो। लेकिन 2025 का फैसला प्रतिनियुक्ति घटाना चाहता था, और उससे यह टकराव खुद अधिनियम के पाठ में दिखता है। 2026 के अधिनियम वाला नोट दोनों पक्षों के तर्क सामने रखता है।

सीमा के गाँव और नेपाल से बातचीत

4 अप्रैल 2025 को केंद्रीय कैबिनेट ने वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम-II को मंजूरी दी, और इसके लिए 2028-29 तक 6,839 करोड़ रुपये रखे। यह उत्तरी सीमा को छोड़कर बाकी स्थलीय सीमाओं से लगे ब्लॉकों के गाँवों के लिए है, क्योंकि उत्तरी सीमा पहले चरण में आ चुकी है। इसकी राज्यों की सूची में SSB की दोनों सीमाओं वाले सभी राज्य आते हैं। इसका घोषित मकसद निवासियों को “सीमा रक्षक बलों की आँख और कान” बनाना है। यानी 1963 वाली सोच, कि सीमा की आबादी आत्मविश्वास से भरी हो, अब एक विकास योजना की शक्ल में चल रही है।

यह सीमा दोनों देशों के आपसी एजेंडे पर भी बनी रहती है। सीमा प्रबंधन और सुरक्षा पर भारत-नेपाल संयुक्त कार्य समूह की 14वीं बैठक 20-21 अगस्त 2026 को देहरादून में हुई। डीडी इंडिया की खबर के मुताबिक एजेंडे में ये मुद्दे थे:

  • सीमा पार के अपराध;
  • एकीकृत चेक पोस्ट, सड़कों और रेल संपर्कों का बेहतर इस्तेमाल;
  • अतिक्रमण हटाना और सीमा स्तंभों की देखभाल।

अतिक्रमण SSB के लिए भी जीता-जागता मुद्दा है। 2024 के स्थापना दिवस पर गृह मंत्री ने बताया कि बल ने नो मैन्स लैंड से 1,100 से ज्यादा अतिक्रमण हटाए हैं। नो मैन्स लैंड सीमा रेखा के साथ वह पट्टी है जिसे दोनों पक्ष खाली रखते हैं। देहरादून बैठक वाला नोट समझाता है कि खुली सीमा को इस तरह की परत-दर-परत व्यवस्था की जरूरत क्यों है।

परीक्षा के लिए सशस्त्र सीमा बल कैसे पढ़ें

SSB GS पेपर III का विषय है। पाठ्यक्रम की दो पंक्तियाँ इससे सीधे जुड़ती हैं: पहली, सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा की चुनौतियाँ; दूसरी, विभिन्न सुरक्षा बल और उनका अधिदेश (mandate)। खुली सीमा का विषय भारत-नेपाल और भारत-भूटान संबंधों के जरिए पेपर II में भी आता है। साइट के प्रश्न बैंक में मुख्य परीक्षा का कोई सवाल इस बल का नाम नहीं लेता। सवाल खुली सीमाओं के बारे में पूछे जाते हैं, और यह भी कि उन्हें कौन संभालता है। मुख्य परीक्षा 2016 के GS पेपर III में पूछा गया था: “कठिन भू-भाग और कुछ देशों के साथ शत्रुतापूर्ण संबंधों के कारण सीमा प्रबंधन एक जटिल काम है। प्रभावी सीमा प्रबंधन की चुनौतियों और रणनीतियों को स्पष्ट कीजिए।” इस सवाल के अच्छे जवाब में खुली सीमा वाला पक्ष चाहिए, और वह पक्ष SSB में ही मिलता है।

रिवीजन के लिए ये तथ्य साथ रखिए:

  • शुरुआत: स्पेशल सर्विस बॉडी, 1963, 1962 के युद्ध के बाद; 1966 से स्पेशल सर्विस ब्यूरो; 15 दिसंबर 2003 से सशस्त्र सीमा बल।
  • मंत्रालय: 15 जनवरी 2001 तक कैबिनेट सचिवालय, फिर गृह मंत्रालय।
  • सीमाएँ: नेपाल (1,751 किलोमीटर) 19 जून 2001 से और भूटान (699 किलोमीटर) 12 मार्च 2004 से; दोनों पर SSB प्रमुख खुफिया एजेंसी है।
  • कानून: SSB अधिनियम, 2007 (2007 का अधिनियम संख्या 53), 20 दिसंबर 2007 को मंजूरी; नियम 1 अगस्त 2009 से।
  • पहचान: आदर्श वाक्य सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व; स्थापना दिवस 20 दिसंबर; मुख्यालय नई दिल्ली में।
  • कर्तव्य: इसके कानूनी कामों में सिविक एक्शन प्रोग्राम शामिल है, जो 1963 में मिली जिम्मेदारी की विरासत है।
  • आकार: 31 दिसंबर 2024 को 73 बटालियनों में 94,202 कर्मी।

इस बल पर ज्यादातर गलतियाँ चार उलझनों से होती हैं:

उलझनकैसे अलग रखें
SSB बल और SSB इंटरव्यूसर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड NDA जैसी अफसर प्रवेश परीक्षाओं के लिए बुद्धि और व्यक्तित्व परीक्षण लेता है; सीमा की रखवाली से इसका कोई लेना-देना नहीं है
नाम 2001 में बदला या 2003 में2001 में गृह मंत्रालय और नेपाल सीमा मिली; सशस्त्र सीमा बल नाम 15 दिसंबर 2003 से है
1962 से जुड़ा बल: SSB या ITBPदोनों की जड़ें 1962 के युद्ध में हैं; ITBP चीन सीमा की रखवाली करता है, और SSB नेपाल और भूटान की सीमाओं की
सबसे बड़ा CAPFBSF नहीं: गृह मंत्रालय की 2024-25 की रिपोर्ट CRPF का स्वीकृत संख्या बल 3,30,983 बताती है, जबकि BSF का 2,72,450

जो दो बल स्थलीय सीमाओं की रखवाली नहीं करते, उन्हें अलग खाने में रखिए: आंतरिक सुरक्षा के लिए CRPF, और हवाई अड्डों जैसे प्रतिष्ठानों के लिए CISF

SSB अपने आकार से कहीं ज्यादा ध्यान का हकदार है। इसे खुली सीमा के लिए बने बल की तरह पढ़िए, फिर बाकी सब अपने आप जुड़ता जाएगा, 1963 की जिम्मेदारी से लेकर वाइब्रेंट विलेजेज योजना तक। बात यह है कि इस सीमा पर रेखा के किनारे रहने वाले लोग खुद इसकी सुरक्षा का हिस्सा हैं। सीमा प्रबंधन का जो जवाब यह बात कहेगा, वह सिर्फ बाड़ और चौकियाँ गिनाने वाले जवाब से अलग पढ़ा जाएगा।

सामान्य प्रश्न

SSB का फुल फॉर्म क्या है?

सीमा बल वाले अर्थ में SSB का फुल फॉर्म है सशस्त्र सीमा बल, जिसका मतलब है हथियारबंद सीमा बल। यह वह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है जो गृह मंत्रालय के तहत नेपाल और भूटान से लगी भारत की सीमाओं की रखवाली करता है। 15 दिसंबर 2003 तक इसी बल को स्पेशल सर्विस ब्यूरो कहा जाता था।

क्या SSB इंटरव्यू का सशस्त्र सीमा बल से कोई संबंध है?

नहीं। SSB इंटरव्यू सर्विसेज सिलेक्शन बोर्ड लेता है। यह बोर्ड NDA जैसी लिखित परीक्षाओं के बाद, सेनाओं में अफसर प्रशिक्षण के लिए उम्मीदवारों को परखता है। इसका उस सीमा बल से कोई संबंध नहीं है, जिसके नाम के पहले अक्षर भी यही हैं।

सशस्त्र सीमा बल किन सीमाओं की रखवाली करता है?

SSB 1,751 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल सीमा की रखवाली करता है, जो इसे 19 जून 2001 को मिली। साथ ही 699 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा भी इसके पास है, जो 12 मार्च 2004 को सौंपी गई। दोनों सीमाओं के लिए यह प्रमुख खुफिया एजेंसी भी है। दोनों मिलकर 2,450 किलोमीटर खुली सीमा बनती हैं।

SSB स्थापना दिवस कब मनाया जाता है?

SSB स्थापना दिवस हर साल 20 दिसंबर को मनाया जाता है। 61वाँ स्थापना दिवस समारोह 20 दिसंबर 2024 को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हुआ। बल अपनी शुरुआत 1963 से मानता है, जब 1962 के युद्ध के बाद स्पेशल सर्विस बॉडी बनाई गई थी।

सशस्त्र सीमा बल का आदर्श वाक्य क्या है?

इसका आदर्श वाक्य है ‘सेवा, सुरक्षा और बंधुत्व’। यह उस बल पर ठीक बैठता है जिसकी शुरुआत सीमावर्ती समुदायों के साथ काम करने से हुई, और जो आज भी रखवाली की ड्यूटी के साथ-साथ सिविक एक्शन प्रोग्राम चलाता है।

क्या SSB भारतीय सेना का हिस्सा है?

नहीं। SSB गृह मंत्रालय के तहत संघ का एक सशस्त्र बल है। इसका गठन सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 से हुआ है, और इसकी कमान एक महानिदेशक के हाथ में है। थलसेना रक्षा मंत्रालय का बल है, और गृह मंत्रालय के सीमा बँटवारे में नेपाल और भूटान की सीमाएँ SSB को दी गई हैं।

कोई SSB में अफसर के तौर पर कैसे शामिल हो सकता है?

शुरुआती स्तर के अफसर, यानी सहायक कमांडेंट, संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सहायक कमांडेंट) परीक्षा से भर्ती होते हैं। 2026 की अधिसूचना में 349 संभावित रिक्तियों में से 53 SSB के लिए थीं। वरिष्ठ पदों पर भारतीय पुलिस सेवा से प्रतिनियुक्ति पर आए अफसर भी होते हैं।

भारत-नेपाल सीमा को खुली सीमा क्यों कहा जाता है?

1950 की शांति और मैत्री संधि के तहत भारत और नेपाल के नागरिक बिना पासपोर्ट या वीजा के सीमा के आर-पार बेरोकटोक आ-जा सकते हैं। इसलिए SSB कानूनी आवाजाही को नहीं रोकता। यह गश्त करता है, चेकपॉइंट लगाता है, और दुरुपयोग पकड़ने के लिए लोगों की अचानक या खास खुफिया सूचना पर जाँच करता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रीलिम्स MCQ

1. सशस्त्र सीमा बल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना चीन के साथ 1962 के युद्ध के बाद हुई थी। 2. इसे 2004 में भारत-नेपाल सीमा का सीमा रक्षक बल बनाया गया। 3. यह 2007 में पारित एक अधिनियम से संचालित होता है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1 और 2
  • (b) केवल 1 और 3
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) भारत-नेपाल सीमा की जिम्मेदारी 19 जून 2001 को मिली थी; 2004 भारत-भूटान सीमा की जिम्मेदारी मिलने का साल है।

2. निम्नलिखित में से किस सीमा की रखवाली सशस्त्र सीमा बल करता है?

  • (a) भारत-म्यांमार
  • (b) भारत-भूटान
  • (c) भारत-चीन
  • (d) भारत-बांग्लादेश

उत्तर: (b) ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ के तहत SSB के पास भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाएँ हैं।

3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारतीय और नेपाली नागरिकों की अपनी सीमा के आर-पार आवाजाही शांति और मैत्री संधि, 1950 से संचालित होती है। 2. दोनों देशों के नागरिकों को स्थलीय सीमा पार करने के लिए वीजा चाहिए। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 2
  • (c) 1 और 2 दोनों
  • (d) न तो 1 और न ही 2

उत्तर: (a) 1950 की संधि बेरोकटोक आवाजाही की व्यवस्था करती है, इसलिए सीमा पार करने के लिए पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं होती।

4. स्पेशल सर्विस ब्यूरो का नाम बदलकर सशस्त्र सीमा बल किस वर्ष रखा गया?

  • (a) 1966
  • (b) 2001
  • (c) 2003
  • (d) 2007

उत्तर: (c) बल की अपनी टाइमलाइन के मुताबिक नाम 15 दिसंबर 2003 को बदला गया; 1966 वह साल है जब स्पेशल सर्विस बॉडी, स्पेशल सर्विस ब्यूरो बनी।

5. सशस्त्र सीमा बल अधिनियम, 2007 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बल का गठन संघ के सशस्त्र बल के रूप में किया गया है। 2. इसके सदस्य भारत के बाहर सेवा देने के लिए बाध्य हैं। 3. बल की कमान थलसेना प्रमुख के पास है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  • (a) केवल 1
  • (b) केवल 1 और 2
  • (c) केवल 2 और 3
  • (d) 1, 2 और 3

उत्तर: (b) धारा 4 और 7 पहले दो कथनों से जुड़ी हैं; धारा 5 कमान केंद्र के नियुक्त किए महानिदेशक को सौंपती है।

मुख्य परीक्षा प्रश्न

  1. दक्षिण एशिया के ज्यादातर देशों और म्यांमार के साथ लगी लंबी, आसानी से पार की जा सकने वाली सीमाओं को देखते हुए, भारत की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियाँ सीमा प्रबंधन से किस हद तक जुड़ी हुई हैं? (10 अंक, 200 शब्द) पिछले वर्ष का प्रश्न: मुख्य परीक्षा 2013, GS पेपर III।
  2. सशस्त्र सीमा बल की शुरुआत 1963 में सीमावर्ती आबादी का मनोबल बढ़ाने वाले बल के रूप में हुई थी, और यह सीमा रक्षक बल 2001 में जाकर बना। इस शुरुआत का खुली भारत-नेपाल सीमा की रखवाली के इसके तरीके पर क्या असर पड़ता है, परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  3. खुली सीमा रोजी-रोटी और रिश्तेदारियों को बनाए रखती है, लेकिन इससे मानव तस्करी और सामान की तस्करी के लिए भी जगह बनती है। भारत, भारत-नेपाल सीमा को बंद किए बिना उसकी निगरानी कैसे कर सकता है, चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
  4. ‘एक सीमा, एक सीमा रक्षक बल’ के सिद्धांत को समझाइए। भारत की स्थलीय सीमाओं के संदर्भ में इसके फायदे और कमियाँ क्या हैं? (10 अंक, 150 शब्द)
  5. CAPF (सामान्य प्रशासन) अधिनियम, 2026, CAPF के वरिष्ठ पदों पर IPS प्रतिनियुक्ति को कानूनी रूप देता है। सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले की रोशनी में इस तरीके के पक्ष और विपक्ष के तर्कों का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)

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Written by

Rahul Puri Sir

Director & Mentor · Anantam IAS

Rahul Puri is the Director & Mentor at Anantam IAS. He leads the institution's teaching philosophy — focused not on syllabus completion but on the thinking, clarity and consistency that actually crack UPSC. A long-time mentor to hundreds of civil services aspirants and interview toppers (including AIR 28, 48, 56, 73, 96, 106, 116, 143 in CSE 2025), he anchors Anantam's flagship Interview Guidance Programme.

Specialises in · Institutional leadership, mentoring and programme design Experience · 10+ years Visit website ↗

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