वर्ण विच्छेद का मतलब है किसी शब्द को उसके मूल वर्णों में तोड़कर, उसी क्रम में लिखना जिसमें वे बोले जाते हैं। “कमल” का वर्ण विच्छेद है क् + अ + म् + अ + ल् + अ। हर व्यंजन आधे रूप (हल्) में लिखा जाता है और उसके बाद उसमें छिपा स्वर अलग से। यह अभ्यास वर्तनी की नींव है, क्योंकि जो विद्यार्थी शब्द के भीतर के वर्ण साफ देख लेता है, वह संधि, अनुप्रास और सही वर्तनी तीनों में कम गलती करता है।
ज्यादातर गलतियाँ तीन जगह होती हैं। पहली, “क” को एक वर्ण मान लेना, जबकि उसमें क् और अ दो वर्ण हैं। दूसरी, रेफ वाले शब्दों में र् को गलत जगह रख देना, जैसे “धर्म” में र् को म् के बाद लिख देना। तीसरी, वर्ण विच्छेद को संधि विच्छेद समझ लेना। यह नोट हर तरह के शब्द के लिए नियम देता है, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के मानक से मिलान करता है और पृथ्वी, विद्यार्थी जैसे उन शब्दों को हल करता है जो सबसे ज्यादा पूछे जाते हैं।
वर्ण विच्छेद एक नजर में
नीचे की तालिका पूरे अध्याय का सार है। नियम अलग-अलग खंडों में आगे विस्तार से हैं।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वर्ण क्या है | वह मूल ध्वनि जिसके और टुकड़े न हो सकें (कामताप्रसाद गुरु) |
| वर्ण विच्छेद | शब्द के सभी स्वर और व्यंजन अलग-अलग, बोलने के क्रम में लिखना |
| मानक स्वर | 11: अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ (साथ में अं, अः) |
| मानक व्यंजन | मूल 33; कुल 40 (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र, ड़, ढ़ और विशिष्ट व्यंजन ळ जोड़कर) |
| पहला नियम | व्यंजन हमेशा हल् रूप (क्, म्) में, फिर उसका स्वर |
| सबसे आम चूक | अकारांत व्यंजन का छिपा अ छोड़ देना |
| र के रूप | रेफ (धर्म), पदेन (प्रकाश), ट्र-ड्र (राष्ट्र) |
| मानक स्रोत | केंद्रीय हिंदी निदेशालय, ‘देवनागरी लिपि तथा हिंदी वर्तनी का मानकीकरण’ (2024 संस्करण) |
वर्ण, अक्षर और वर्ण विच्छेद में फर्क
वर्ण विच्छेद समझने से पहले यह साफ होना चाहिए कि वर्ण किसे कहते हैं। कामताप्रसाद गुरु के हिंदी व्याकरण के अनुसार वर्ण वह मूल ध्वनि है जिसके खंड न हो सकें, जैसे अ, इ, क्, ख्। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की पुस्तिका इसी को लिपि की ओर से कहती है: वर्ण ध्वनियों के लिखित रूप हैं, और उनके क्रमबद्ध समूह को वर्णमाला कहते हैं।
इसका सीधा असर यह है कि जो “क” हम लिखते हैं, वह एक वर्ण नहीं, दो वर्णों का मेल है: क् और अ। वर्णमाला में भी व्यंजन आम तौर पर अ के साथ मिलाकर लिखे जाते हैं, ताकि उन्हें बोला जा सके। वर्ण विच्छेद इसी मेल को खोलकर दिखाता है।
तीन मिलते-जुलते अभ्यास अक्सर आपस में उलझ जाते हैं। इन्हें एक ही शब्द पर आजमाकर देखिए:
| अभ्यास | क्या करता है | “विद्यालय” पर |
|---|---|---|
| वर्ण विच्छेद | हर स्वर और व्यंजन अलग | व् + इ + द् + य् + आ + ल् + अ + य् + अ |
| अक्षर (syllable) विभाजन | बोलने की इकाइयाँ | वि-द्या-ल-य |
| संधि विच्छेद | दो शब्दों का मेल खोलना | विद्या + आलय |
संधि विच्छेद में आप शब्दों के स्तर पर काम करते हैं, जबकि वर्ण विच्छेद में वर्णों के स्तर पर। संधि के नियम हिंदी संधि वाले नोट में विस्तार से हैं, और वहाँ भी वर्ण विच्छेद की समझ ही काम आती है, क्योंकि दीर्घ संधि में आ + आ का मेल तभी दिखता है जब आप वर्ण अलग करके देखें।
मानक वर्णमाला: कौन-से वर्ण गिने जाएँ
वर्ण विच्छेद सही तभी होगा जब आपको पता हो कि कौन-सी इकाई अपने आप में एक वर्ण है। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की 2024 वाली संशोधित पुस्तिका के अनुसार हिंदी में 11 स्वर हैं, और अनुस्वार और विसर्ग (अं, अः) स्वरों के साथ अलग से दिखाए जाते हैं। संस्कृत में चलने वाले ॠ और लृ हिंदी की मानक वर्णमाला में नहीं हैं।
व्यंजनों में 33 मूल व्यंजन हैं: क से म तक 25 स्पर्श, य, र, ल, व अंतःस्थ, और श, ष, स, ह ऊष्म। इनके अलावा क्ष, त्र, ज्ञ, श्र चार संयुक्त व्यंजन हैं, ड़ और ढ़ दो उत्क्षिप्त व्यंजन, और 2024 के संस्करण में ळ को विशिष्ट व्यंजन के रूप में जगह दी गई है। इस तरह व्यंजनों की कुल संख्या 40 बताई गई है। पूरी वर्णमाला, उच्चारण-स्थान के साथ, हिंदी वर्णमाला वाले नोट में है।
वर्ण विच्छेद के लिए इसका मतलब साफ है। संयुक्त व्यंजन वर्णमाला में दिखते जरूर हैं, पर वे खुद दो-दो वर्णों से बने हैं, इसलिए विच्छेद में उन्हें तोड़ा जाता है। ड़ और ढ़ मूल वर्ण माने जाते हैं, इसलिए वे नहीं टूटते।
वर्ण विच्छेद के मुख्य नियम
हर शब्द पर एक ही तरीका चलता है: बाएँ से दाएँ पढ़िए, हर व्यंजन को हल् रूप में लिखिए, और उसके बाद जो स्वर उसमें लगा है, उसे अलग वर्ण के रूप में लिखिए। नीचे के नियम इसी तरीके को अलग-अलग तरह के शब्दों पर लागू करते हैं।
नियम 1: व्यंजन हल् रूप में, छिपा अ अलग
जिस व्यंजन पर कोई मात्रा नहीं है, उसमें अ छिपा रहता है। विच्छेद में वह अ लिखना जरूरी है, चाहे बोलते समय शब्द के आखिर का अ सुनाई न दे। “भारत” बोलने में “भारत्” जैसा लगता है, पर विच्छेद है भ् + आ + र् + अ + त् + अ।
- कमल = क् + अ + म् + अ + ल् + अ
- भारत = भ् + आ + र् + अ + त् + अ
- नगर = न् + अ + ग् + अ + र् + अ
नियम 2: मात्रा का मतलब स्वर
हर मात्रा एक स्वर का निशान है। इसलिए मात्रा वाले व्यंजन को दो हिस्सों में लिखिए: हल् व्यंजन और पूरा स्वर। “की” में ी की मात्रा है, तो की = क् + ई। शब्द की शुरुआत में स्वर अपने पूरे रूप में आता है, जैसे “आम” में आ।
- किताब = क् + इ + त् + आ + ब् + अ
- सूरज = स् + ऊ + र् + अ + ज् + अ
- आशा = आ + श् + आ
- औरत = औ + र् + अ + त् + अ
नियम 3: आधा व्यंजन यानी हल्, उसके बाद अगला व्यंजन
जहाँ आधा अक्षर लिखा है, वहाँ उस व्यंजन के बाद कोई स्वर नहीं आता। विच्छेद में वह हल् रूप में लिखा जाता है और सीधे अगला व्यंजन आता है। दोहरे व्यंजन (पक्का, सत्ता) में वही व्यंजन दो बार हल् रूप में आता है।
- विद्या = व् + इ + द् + य् + आ
- पक्का = प् + अ + क् + क् + आ
- सत्य = स् + अ + त् + य् + अ
- उज्ज्वल = उ + ज् + ज् + व् + अ + ल् + अ
नियम 4: क्ष, त्र, ज्ञ, श्र टूटते हैं
ये चार संयुक्त व्यंजन वर्णमाला में अलग दिखते हैं, पर निदेशालय की पुस्तिका खुद इनके घटक बताती है: क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ, श्र = श् + र। विच्छेद में इन्हें हल् रूप में खोलकर लिखिए।
| शब्द | वर्ण विच्छेद |
|---|---|
| परीक्षा | प् + अ + र् + ई + क् + ष् + आ |
| क्षत्रिय | क् + ष् + अ + त् + र् + इ + य् + अ |
| ज्ञान | ज् + ञ् + आ + न् + अ |
| श्रम | श् + र् + अ + म् + अ |
| मित्र | म् + इ + त् + र् + अ |
नियम 5: र के तीन रूप और र् की जगह
यह वर्ण विच्छेद का सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला नियम है। निदेशालय के अनुसार संयुक्त र के तीन रूप चलते हैं: प्रकार (पदेन), धर्म (रेफ) और राष्ट्र (ट्र)। नियम यह है कि अगर संयुक्ताक्षर में र् पहला वर्ण हो, तो वह रेफ बनकर अगले अक्षर के ऊपर चला जाता है। अगर र् बाद में आए, तो वह पिछले व्यंजन के नीचे पदेन के रूप में लगता है।
इसका मतलब है कि रेफ भले ही “म” के ऊपर लिखा हो, बोला वह “म” से पहले जाता है। इसलिए विच्छेद में र् को उस अक्षर से पहले लिखिए जिस पर रेफ लगा है। पदेन र् उस व्यंजन के बाद आता है जिसके नीचे वह लगा है।
| रूप | शब्द | वर्ण विच्छेद |
|---|---|---|
| रेफ | धर्म | ध् + अ + र् + म् + अ |
| रेफ | आशीर्वाद | आ + श् + ई + र् + व् + आ + द् + अ |
| रेफ | पूर्व | प् + ऊ + र् + व् + अ |
| पदेन | प्रकाश | प् + र् + अ + क् + आ + श् + अ |
| पदेन | क्रम | क् + र् + अ + म् + अ |
| ट्र | राष्ट्र | र् + आ + ष् + ट् + र् + अ |
नियम 6: ऋ स्वर है, व्यंजन नहीं
ृ की मात्रा ऋ स्वर की है, र की नहीं। इसलिए “कृपा” में क् के बाद ऋ आएगा, र् नहीं: क् + ऋ + प् + आ। यह गलती इसलिए होती है क्योंकि ऋ का उच्चारण हिंदी में “रि” जैसा होता है, पर लिखने में वह एक अलग स्वर है।
- कृपा = क् + ऋ + प् + आ
- हृदय = ह् + ऋ + द् + अ + य् + अ
- कृष्ण = क् + ऋ + ष् + ण् + अ
नियम 7: अनुस्वार, चंद्रबिंदु और विसर्ग
निदेशालय की पुस्तिका कहती है कि अनुस्वार एक व्यंजन है और चंद्रबिंदु स्वर की अनुनासिकता का गुण, और दोनों अर्थ बदलते हैं। इसी वजह से दोनों का विच्छेद अलग ढंग से होता है। ज्यादातर पाठ्यपुस्तकें अनुस्वार को उसके स्वर के साथ जोड़कर अं के रूप में लिखती हैं, और चंद्रबिंदु को उसके स्वर पर ही रहने देती हैं।
- संत = स् + अं + त् + अ
- गंगा = ग् + अं + ग् + आ
- चाँद = च् + आँ + द् + अ
- आँख = आँ + ख् + अ
- दुःख = द् + उः + ख् + अ
एक बात ध्यान रखिए। कुछ किताबें अनुस्वार को अलग चिह्न (स् + अ + ं + त् + अ) या उसकी नासिक्य ध्वनि (स् + अ + न् + त् + अ) के रूप में भी लिखती हैं। तीनों तरीके एक ही बात दिखाते हैं। परीक्षा में वही तरीका अपनाइए जो आपकी पाठ्यपुस्तक में है, और पूरी कॉपी में एक ही तरीका रखिए।
नियम 8: ड़, ढ़ और नुक्ता वाले वर्ण नहीं टूटते
ड़ और ढ़ उत्क्षिप्त व्यंजन हैं, यानी मूल वर्ण। इन्हें ड् या ढ् में नहीं तोड़ा जाता: पेड़ = प् + ए + ड़् + अ, पढ़ाई = प् + अ + ढ़् + आ + ई। नुक्ता वाले ज़, फ़ जैसे वर्ण भी एक ही वर्ण माने जाते हैं। वैसे निदेशालय की सलाह है कि हिंदी में आत्मसात् हो चुके उर्दू शब्दों (कलम, किला, दाग) में नुक्ता न लगाया जाए।
सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले शब्दों का वर्ण विच्छेद
नीचे वे शब्द हैं जो अभ्यास पुस्तिकाओं और प्रश्नपत्रों में बार-बार आते हैं। पहले खुद हल कीजिए, फिर तालिका से मिलाइए। आखिरी कॉलम में वर्णों की गिनती है, क्योंकि “इस शब्द में कितने वर्ण हैं” भी एक आम प्रश्न है।
| शब्द | वर्ण विच्छेद | वर्ण |
|---|---|---|
| पृथ्वी | प् + ऋ + थ् + व् + ई | 5 |
| विद्यार्थी | व् + इ + द् + य् + आ + र् + थ् + ई | 8 |
| विद्यालय | व् + इ + द् + य् + आ + ल् + अ + य् + अ | 9 |
| स्त्री | स् + त् + र् + ई | 4 |
| द्वार | द् + व् + आ + र् + अ | 5 |
| ब्रह्मा | ब् + र् + अ + ह् + म् + आ | 6 |
| चिह्न | च् + इ + ह् + न् + अ | 5 |
| संस्कृति | स् + अं + स् + क् + ऋ + त् + इ | 7 |
| उत्तर | उ + त् + त् + अ + र् + अ | 6 |
| प्रार्थना | प् + र् + आ + र् + थ् + अ + न् + आ | 8 |
| परिश्रम | प् + अ + र् + इ + श् + र् + अ + म् + अ | 9 |
| ज्योति | ज् + य् + ओ + त् + इ | 5 |
| स्वास्थ्य | स् + व् + आ + स् + थ् + य् + अ | 7 |
| कर्तव्य | क् + अ + र् + त् + अ + व् + य् + अ | 8 |
| ट्रेन | ट् + र् + ए + न् + अ | 5 |
“पृथ्वी” और “विद्यार्थी” सबसे ज्यादा खोजे जाने वाले शब्द हैं, और दोनों में एक-एक जाल है। पृथ्वी में ृ को र् समझने की गलती होती है, जबकि वह ऋ है। विद्यार्थी में रेफ “थी” पर लगा है, इसलिए र् को थ् से पहले लिखना है, बाद में नहीं।
आम गलतियाँ और उनसे बचने का तरीका
वर्ण विच्छेद में नंबर ज्यादातर छोटी-छोटी चूकों से कटते हैं, नियम न जानने से नहीं। हर गलती के साथ उसका सही रूप देखिए:
- छिपा अ छोड़ देना: “कमल = क् + म् + ल्” गलत है। सही है क् + अ + म् + अ + ल् + अ।
- रेफ की जगह उलटना: “धर्म = ध् + अ + म् + र् + अ” गलत है। रेफ म पर लगा है, पर बोला म से पहले जाता है, इसलिए ध् + अ + र् + म् + अ।
- ऋ को र् लिखना: “कृपा = क् + र् + इ + प् + आ” गलत है। सही है क् + ऋ + प् + आ।
- संयुक्त व्यंजन न तोड़ना: “क्ष” को एक वर्ण लिख देना। विच्छेद में क् + ष् लिखिए।
- मात्रा को व्यंजन के साथ छोड़ देना: “की = की” लिख देना। सही है क् + ई।
- हल् चिह्न भूल जाना: “क + अ” लिखने से व्यंजन में दो बार अ आ जाता है। व्यंजन हमेशा हल् रूप (क्) में लिखिए।
- संधि विच्छेद लिख देना: “विद्यालय = विद्या + आलय” वर्ण विच्छेद नहीं है।
हल् चिह्न के बारे में एक और बात। निदेशालय के मानक के अनुसार शब्द के आखिर में हल् चिह्न हिंदी की प्रकृति के अनुरूप नहीं है, इसलिए “जगत” सामान्य लेखन में बिना हल् के लिखा जाता है। पर व्याकरण के नियम दिखाते समय, जैसे जगत् + ईश में, हल् लगाया जा सकता है। वर्ण विच्छेद भी ऐसा ही व्याकरणिक अभ्यास है, इसलिए वहाँ हर स्वर-रहित व्यंजन पर हल् लगेगा। सही वर्तनी के बाकी नियमों के लिए हिंदी वर्तनी और विराम चिह्न वाला नोट देखिए।
वर्ण विच्छेद बाकी व्याकरण में कहाँ काम आता है
वर्ण विच्छेद अपने आप में छोटा अध्याय है, पर इसकी समझ कई दूसरे अध्यायों की चाबी है। संधि में स्वरों का मेल, समास के बाद बनने वाली वर्तनी, और अनुप्रास में वर्णों की आवृत्ति, तीनों तभी साफ दिखते हैं जब आप शब्द के अंदर के वर्ण देख पाते हैं। समास और संधि का फर्क हिंदी समास वाले नोट में है, और अनुप्रास में वर्णों की आवृत्ति कैसे पहचानें, यह अलंकार वाले नोट में आएगा।
परीक्षाओं में यह विषय कई रूप में आता है। CBSE के 2025-26 के हिंदी B पाठ्यक्रम में कक्षा 9 में अनुस्वार और अनुनासिक पर एक-एक अंक के अलग प्रश्न हैं, और वहाँ अं और आँ का फर्क वही है जो ऊपर नियम 7 में है। राज्य स्तर की भर्ती और शिक्षक पात्रता परीक्षाओं के सामान्य हिंदी में “सही वर्ण विच्छेद चुनिए” या “इस शब्द में कितने वर्ण हैं” जैसे बहुविकल्पीय प्रश्न आम हैं। सिविल सेवा के अनिवार्य हिंदी प्रश्नपत्र में यह सीधे नहीं पूछा जाता, पर वहाँ वर्तनी की गलतियों पर नंबर कटते हैं, और उनकी जड़ अक्सर यहीं होती है। पूरे व्याकरण का क्रम अनिवार्य हिंदी व्याकरण गाइड में है, और सबसे आम चूकें अनिवार्य हिंदी की आम गलतियाँ वाले नोट में।
इस अध्याय पर एक हफ्ता लगाने की जरूरत नहीं है। रोज दस शब्दों का विच्छेद लिखिए, उनमें दो रेफ वाले, दो संयुक्त व्यंजन वाले और एक ऋ वाला जरूर रखिए। दो-तीन दिन में हाथ नियम पकड़ लेता है, और फिर वर्तनी की गलतियाँ अपने आप कम होने लगती हैं।
अभ्यास प्रश्न
पहले दस शब्दों का वर्ण विच्छेद कीजिए। उसके बाद के प्रश्न नियमों और वर्णों की गिनती पर हैं। उत्तर इस खंड के अंत में हैं।
- कमल
- पृथ्वी
- विद्यार्थी
- धर्म
- प्रकाश
- परीक्षा
- ज्ञान
- कृपा
- चाँद
- राष्ट्र
- “श्रम” में कितने वर्ण हैं?
- “दुःख” का वर्ण विच्छेद कीजिए और बताइए कि विसर्ग किस स्वर के साथ लिखा जाता है।
- वर्ण विच्छेद और संधि विच्छेद में एक अंतर “हिमालय” के उदाहरण से समझाइए।
- “पेड़” के विच्छेद में ड़ को क्यों नहीं तोड़ा जाता?
उत्तर
- क् + अ + म् + अ + ल् + अ
- प् + ऋ + थ् + व् + ई
- व् + इ + द् + य् + आ + र् + थ् + ई
- ध् + अ + र् + म् + अ (रेफ होने से र् पहले)
- प् + र् + अ + क् + आ + श् + अ (पदेन र् व्यंजन के बाद)
- प् + अ + र् + ई + क् + ष् + आ
- ज् + ञ् + आ + न् + अ
- क् + ऋ + प् + आ
- च् + आँ + द् + अ
- र् + आ + ष् + ट् + र् + अ
- पाँच वर्ण: श् + र् + अ + म् + अ। आखिरी म में छिपा अ गिनना न भूलें, वरना गिनती चार रह जाती है।
- द् + उः + ख् + अ। विसर्ग अपने से पहले वाले स्वर (उ) के साथ लिखा जाता है।
- वर्ण विच्छेद: ह् + इ + म् + आ + ल् + अ + य् + अ। संधि विच्छेद: हिम + आलय। पहला वर्णों को अलग करता है, दूसरा दो शब्दों के मेल को।
- ड़ उत्क्षिप्त व्यंजन है और मानक वर्णमाला में एक मूल वर्ण माना जाता है, इसलिए पेड़ = प् + ए + ड़् + अ।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वर्ण विच्छेद किसे कहते हैं?
किसी शब्द में मौजूद सभी स्वरों और व्यंजनों को अलग-अलग करके, बोलने के क्रम में लिखना वर्ण विच्छेद कहलाता है। इसमें हर व्यंजन हल् रूप में लिखा जाता है और उसके बाद उसका स्वर। जैसे कमल का वर्ण विच्छेद क् + अ + म् + अ + ल् + अ है।
पृथ्वी का वर्ण विच्छेद क्या है?
पृथ्वी का वर्ण विच्छेद है प् + ऋ + थ् + व् + ई, यानी इसमें पाँच वर्ण हैं। यहाँ ृ की मात्रा ऋ स्वर की है, र की नहीं। आधा थ हल् रूप में आता है और उसके बाद व् और ई।
विद्यार्थी का वर्ण विच्छेद कैसे करें?
विद्यार्थी का वर्ण विच्छेद है व् + इ + द् + य् + आ + र् + थ् + ई। इसमें रेफ थी के ऊपर लगा है, पर वह थ से पहले बोला जाता है, इसलिए र् को थ् से पहले लिखा जाता है। कुल वर्ण आठ हैं।
रेफ वाले शब्दों में र् कहाँ लिखते हैं?
रेफ जिस अक्षर के ऊपर लगा हो, र् उसी अक्षर से पहले लिखा जाता है, क्योंकि उच्चारण में वह पहले आता है। धर्म का विच्छेद ध् + अ + र् + म् + अ है। इसके उलट पदेन र, जैसे प्रकाश में, व्यंजन के बाद लिखा जाता है।
क्ष, त्र, ज्ञ और श्र का वर्ण विच्छेद क्या है?
केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अनुसार क्ष = क् + ष, त्र = त् + र, ज्ञ = ज् + ञ और श्र = श् + र। विच्छेद में इन्हें हल् रूप में खोलकर लिखा जाता है, जैसे ज्ञान = ज् + ञ् + आ + न् + अ। ये वर्णमाला में दिखते हैं, पर मूल वर्ण नहीं हैं।
अनुस्वार और चंद्रबिंदु का वर्ण विच्छेद कैसे होता है?
ज्यादातर पाठ्यपुस्तकें अनुस्वार को उसके स्वर के साथ अं के रूप में लिखती हैं, जैसे संत = स् + अं + त् + अ। चंद्रबिंदु स्वर का ही गुण है, इसलिए वह स्वर के साथ रहता है, जैसे चाँद = च् + आँ + द् + अ। कुछ किताबें अनुस्वार को अलग चिह्न के रूप में भी लिखती हैं, इसलिए अपनी पाठ्यपुस्तक वाला तरीका अपनाइए।
हिंदी में कितने स्वर और व्यंजन माने जाते हैं?
केंद्रीय हिंदी निदेशालय के 2024 वाले संस्करण के अनुसार हिंदी में 11 स्वर हैं और 33 मूल व्यंजन। चार संयुक्त व्यंजन, ड़ और ढ़, और विशिष्ट व्यंजन ळ जोड़कर व्यंजनों की कुल संख्या 40 बताई गई है। अनुस्वार और विसर्ग अं और अः के रूप में स्वरों के साथ दिखाए जाते हैं।
वर्ण विच्छेद और संधि विच्छेद में क्या अंतर है?
वर्ण विच्छेद शब्द को उसके एक-एक वर्ण तक तोड़ता है, जबकि संधि विच्छेद दो शब्दों के मेल को खोलता है। हिमालय का वर्ण विच्छेद ह् + इ + म् + आ + ल् + अ + य् + अ है, जबकि संधि विच्छेद हिम + आलय। दोनों अलग प्रश्न हैं और उत्तर भी अलग लिखे जाते हैं।
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