भारत के किले नामों की लंबी सूची की तरह नहीं, कुछ परिवारों में बाँटकर पढ़ें तो सबसे आसानी से याद होते हैं। राजपूत राज्यों ने पूरे राजस्थान में पहाड़ी किले खड़े किए। मराठों ने सह्याद्रि और कोंकण तट पर पहाड़ी और समुद्री किलों की एक पूरी कड़ी संभाली, जबकि दक्कन के सुल्तानों और मुगलों ने अपनी राजधानियों के लिए परकोटे वाले दुर्ग बनाए। उनके बाद यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने तट की किलेबंदी की। UNESCO ने अब तक चार बार किलों को अपनी सूची में जोड़ा है, यानी 1983, 2007, 2013 और 2025 में। भारतीय किलों पर ज्यादातर सवाल इन्हीं चार सूचियों और इनके पीछे के परिवारों से शुरू होते हैं।
इस विषय में आते समय ज्यादातर पाठक दो गलत धारणाएँ लेकर आते हैं। पहली यह कि जो किले मशहूर हैं, वही UNESCO वाले किले हैं। मेहरानगढ़, गोलकुंडा, ग्वालियर और जंजीरा चारों मशहूर हैं, लेकिन इनमें से एक भी विश्व धरोहर स्थल नहीं है। दूसरी धारणा यह कि किले का “प्रकार” इस बात से तय होता है कि उसे किसने बनवाया। असल में किले का प्रकार उस जमीन से तय होता है जिस पर वह खड़ा है। यह नोट दोनों बातें साफ करता है, और इसके लिए 27 किलों की एक तालिका देता है जिन पर साइट पर अलग से विस्तार से लिखा गया है।
एक नजर में भारत के किले
नीचे की तालिका भारत के किलों की सूची है, और इसमें वह हर किला है जिस पर साइट पर अलग स्टडी नोट मौजूद है। हर पंक्ति में राज्य, मुख्य निर्माता या राजवंश, स्रोतों में दिया गया काल, जमीन का प्रकार और UNESCO दर्जा दिया गया है। राजस्थान के जो छह किले 2013 में एक साथ सूची में आए, उनकी पूरी श्रृंखला को अलग से राजस्थान के पहाड़ी किले वाला नोट समझाता है।
| किला | राज्य | मुख्य निर्माता या राजवंश | काल | प्रकार | UNESCO दर्जा |
|---|---|---|---|---|---|
| आगरा किला | उत्तर प्रदेश | अकबर; शाहजहाँ के संगमरमर के महल | 1565 से 1573 के बीच दोबारा बना | नदी किनारे का मैदानी किला | विश्व धरोहर स्थल, 1983 |
| लाल किला | दिल्ली | शाहजहाँ | 1638 से 1648 | नदी किनारे का मैदानी किला (महल-किला) | विश्व धरोहर स्थल, 2007 (लाल किला परिसर) |
| पुराना किला | दिल्ली | हुमायूँ, फिर शेरशाह सूरी | 1533; 1540 से 1545 के बीच दोबारा बना | यमुना के पुराने किनारे पर मैदानी किला | सूची में नहीं |
| चित्तौड़गढ़ किला | राजस्थान | मोरी वंश, फिर मेवाड़ के गुहिल और सिसोदिया | 8वीं से 16वीं सदी | पठार पर बना पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2013 |
| कुंभलगढ़ किला | राजस्थान | मेवाड़ के राणा कुंभा, वास्तुकार मंडन के साथ | 1443 से 1458 | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2013 |
| रणथंभौर का किला | राजस्थान | चौहान (चाहमान) | 12वीं सदी से किलेबंदी का रिकॉर्ड मिलता है | जंगल वाला पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2013 |
| आमेर किला | राजस्थान | कछवाहा: राजा मान सिंह प्रथम, मिर्जा राजा जय सिंह प्रथम | 1592 से; 17वीं सदी में और निर्माण जुड़े | पहाड़ी महल-किला | विश्व धरोहर स्थल, 2013 (आंबेर नाम से) |
| जैसलमेर किला | राजस्थान | भाटी राजपूतों के रावल जैसल | स्थापना 1156 (ASI के ब्योरे में 1155) | रेगिस्तानी इलाके में पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2013 |
| मेहरानगढ़ किला | राजस्थान | राठौड़ों के राव जोधा | लगभग 1459 | पहाड़ी किला | सूची में नहीं |
| जूनागढ़ किला | राजस्थान | बीकानेर के राजा राय सिंह | 1589 से 1594 (गजेटियर में: 1588 से 1593) | समतल रेगिस्तानी जमीन पर खाई वाला मैदानी किला | सूची में नहीं |
| ग्वालियर किला | मध्य प्रदेश | कई शासकों के हाथ रहा; तोमरों ने मान मंदिर बनवाया | लगभग 525 ईस्वी से रिकॉर्ड; तोमर शासन 1398 से 1518 | पठार पर बना पहाड़ी किला | संभावित सूची, 2024 |
| झांसी किला | उत्तर प्रदेश | ओरछा के बीर सिंह देव (बुंदेला) | 1613 | ग्रेनाइट की चट्टान पर पहाड़ी किला | संभावित सूची, 2025 (बुंदेला श्रृंखला) |
| गोलकुंडा किला | तेलंगाना | काकतीय, फिर कुतुबशाही | 13वीं सदी; कुतुबशाही शासन 1518 से 1687 | परकोटे वाले शहर के ऊपर पहाड़ी दुर्ग | संभावित सूची, 2010 और 2014 |
| दौलताबाद किला | महाराष्ट्र | यादव (देवगिरि), बाद में तुगलक, बहमनी, निजामशाही और मुगल | लगभग 1187; 1327 में नाम बदला; 1633 में मुगलों का कब्जा | खड़ी कटी ढलानों वाले शंकु जैसे पहाड़ पर किला | सूची में नहीं |
| शिवनेरी किला | महाराष्ट्र | शायद यादव; बाद में निजामशाही | सल्तनत से पहले का; 1630 में शिवाजी का जन्म यहीं हुआ | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| राजगड किला | महाराष्ट्र | शिवाजी | लगभग 1646 से 1648 | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| रायगड किला | महाराष्ट्र | शिवाजी, हिरोजी इंदुलकर की देखरेख में दोबारा बना | 1656 में कब्जा; लगभग 1662 में दोबारा बना; 1674 में राज्याभिषेक | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| प्रतापगड किला | महाराष्ट्र | शिवाजी, मोरोपंत त्र्यंबक पिंगले के जरिए | 1656 | पहाड़ी-वन किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| लोहगड किला | महाराष्ट्र | निजामशाही, फिर मराठा | 1489 तक किला बन चुका था; 1648 में शिवाजी ने जीता | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| साल्हेर किला | महाराष्ट्र | बागलान के राठौड़ सरदार, मुगल, फिर मराठा | लगभग 1671 में मराठों का कब्जा; 1672 में युद्ध | पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| पन्हाला किला | महाराष्ट्र | शिलाहार, बीजापुर, फिर शिवाजी | 1191-92 में रिकॉर्ड में; 1659 में शिवाजी ने जीता | पहाड़ी-पठार किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| सिंधुदुर्ग किला | महाराष्ट्र | शिवाजी | 1664 से 1667 | द्वीप किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| विजयदुर्ग किला | महाराष्ट्र | शिलाहार भोज द्वितीय (ऐसा माना जाता है), शिवाजी, फिर आंग्रे | लगभग 1192 से 1205; शिवाजी लगभग 1653 | अंतरीप पर तटीय किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| जंजीरा किला | महाराष्ट्र | सिद्दी | मौजूदा दीवारें 1694 से 1707 | समुद्र के बीच द्वीप किला | संभावित सूची, 2024 (कोंकण तटीय श्रृंखला) |
| जिंजी किला | तमिलनाडु | विजयनगर के अधीन जिंजी के नायक | 16वीं सदी और 17वीं सदी की शुरुआत | तीन पहाड़ियों पर फैला पहाड़ी किला | विश्व धरोहर स्थल, 2025 |
| बेकल किला | केरल | केलाडी नायकों के शिवप्पा नायक | 17वीं सदी का मध्य | अंतरीप पर समुद्री किला | सूची में नहीं |
| फोर्ट विलियम | पश्चिम बंगाल | ईस्ट इंडिया कंपनी, रॉबर्ट क्लाइव की खींची रूपरेखा पर | 1757-58 में शुरू; लगभग 1773 से 1781 के बीच पूरा | नदी किनारे बुर्जों वाला मैदानी किला | सूची में नहीं |
आखिरी कॉलम को ऊपर से नीचे पढ़िए, एक पैटर्न अपने आप दिखने लगेगा। 27 में से सत्रह किले विश्व धरोहर के घटक हैं, चार भारत की संभावित सूची में हैं और छह का UNESCO से कोई दर्जा नहीं है। सूची में दर्ज श्रृंखलाओं के तीन घटकों पर अभी साइट पर अलग नोट नहीं है: राजस्थान का गागरोन, और कोंकण तट के खांदेरी और सुवर्णदुर्ग।
भारत के किलों के प्रकार
किलों को बाँटने का सबसे पुराना भारतीय तरीका जमीन के आधार पर है, और यह अर्थशास्त्र से आता है। अर्थशास्त्र राजकाज पर लिखा गया ग्रंथ है, जिसे कौटिल्य का माना जाता है। इसकी दूसरी पुस्तक राजा से कहती है कि किलेबंदी उस जमीन पर करे जो बचाव के लिए सबसे अच्छी हो, और फिर चार तरह के किले गिनाती है:
- औदक, यानी जल दुर्ग: नदी के बीच का द्वीप, या नीची जमीन से घिरा हुआ मैदान।
- पार्वत, यानी गिरि दुर्ग: पथरीला इलाका या कोई गुफा।
- धान्वन, यानी धन्व (मरु) दुर्ग: बिना पानी का वीरान इलाका।
- वनदुर्ग, यानी वन दुर्ग: पानी और झाड़ियों से भरी जमीन।
इसके बाद ग्रंथ इन्हें दर्जे में रखता है। उसके मुताबिक जल दुर्ग और गिरि दुर्ग घनी आबादी वाले केंद्रों के लिए ठीक हैं, जबकि मरु दुर्ग और वन दुर्ग वीराने में बसी बस्तियाँ हैं। यह एक पंक्ति भारतीय इतिहास की बहुत सी बातें समझा देती है। राजधानियाँ नदियों के पीछे और पहाड़ियों पर बसीं, जबकि रेगिस्तान और जंगल के किले शरणस्थल और सीमा की चौकियाँ बने।
यह बंटवारा सिर्फ पुराना सिद्धांत नहीं है। राजस्थान के पहाड़ी किलों के लिए भारत के नामांकन में इन्हीं चार श्रेणियों का इस्तेमाल हुआ। UNESCO के मूल्यांकनकर्ता भी दर्ज करते हैं कि छह किले इन्हीं श्रेणियों को ध्यान में रखकर चुने गए थे: गागरोन नदी वाले किले के तौर पर, रणथंभौर वन दुर्ग के तौर पर, जैसलमेर मरु दुर्ग के तौर पर और बाकी तीन पहाड़ी किलों के तौर पर।
तालिका के 27 किलों पर यह बंटवारा लागू करें तो ये चार वर्ग चार व्यावहारिक प्रकार बन जाते हैं, जिन्हें आजकल की किताबें इस्तेमाल करती हैं:
- पहाड़ी किले: यह सबसे बड़ा समूह है, जिसमें चित्तौड़गढ़ और कुंभलगढ़ से लेकर रायगड, गोलकुंडा, ग्वालियर और जिंजी तक आते हैं। खड़ी चट्टान अपने आप में एक दीवार है जिसे किसी को बनाना नहीं पड़ा। इसलिए निर्माताओं ने पत्थर वहीं लगाया जहाँ चट्टान में कोई खाली जगह छूटी थी।
- समुद्री और द्वीप किले: सिंधुदुर्ग और जंजीरा द्वीपों पर खड़े हैं, जबकि विजयदुर्ग और बेकल समुद्र में निकली अंतरीपों पर हैं। अर्थशास्त्र का नदी के बीच वाला द्वीप इनके सबसे करीब की शास्त्रीय श्रेणी है। लेकिन ये किले खुले समुद्र की ओर हैं, जिसकी चर्चा ग्रंथ में नहीं है, इसलिए यह मेल ढीला ही बैठता है।
- मैदानी किले: आगरा, लाल किला, पुराना किला, जूनागढ़ और फोर्ट विलियम। यहाँ इस्तेमाल करने के लिए कोई चट्टान नहीं थी, तो ये ऊँची दीवारों, बुर्जों और खाइयों के भरोसे रहे। जूनागढ़ कौटिल्य के हिसाब से मरु दुर्ग है, लेकिन वह समतल रेत पर खड़ा है।
- नदी और संगम के किले: गागरोन वहाँ बना है जहाँ आहू नदी काली सिंध से मिलती है, और इसके तीन तरफ पानी है। आगरा, लाल किला और फोर्ट विलियम भी एक तरफ नदी रखते हैं, इसलिए ये कुछ हद तक जल दुर्ग भी हैं।
मराठा श्रृंखला इसमें और बारीक नाम जोड़ती है। संस्कृति मंत्रालय के वर्गीकरण को PIB ने जुलाई 2025 में जारी किया था। इसके मुताबिक बारह किलों में से छह पहाड़ी किले हैं, प्रतापगड पहाड़ी-वन किला है, पन्हाला पहाड़ी-पठार किला है, विजयदुर्ग तटीय किला है, और खांदेरी, सुवर्णदुर्ग और सिंधुदुर्ग द्वीप किले हैं। ये नाम कोई नई प्रणाली नहीं हैं। ये अर्थशास्त्र के ही विचार हैं, जिन्हें आपस में मिलाकर और तराशकर बनाया गया है।
एक सावधानी इस बंटवारे को ईमानदार रखती है। ये श्रेणियाँ बताती हैं कि किला किस जमीन का इस्तेमाल करता है, न कि उसकी स्थापत्य शैली क्या है। जैसलमेर पहाड़ी किला भी है और मरु दुर्ग भी। रणथंभौर पहाड़ी किला भी है और वन दुर्ग भी। यानी एक किले पर दो नाम लग सकते हैं।
निर्माताओं के हिसाब से भारत के प्रमुख किले
किलों के पीछे के परिवार उतने ही अहम हैं जितनी उनके नीचे की जमीन, क्योंकि हर परिवार ने अलग खतरे को ध्यान में रखकर किले बनाए। चार समूहों में वे लगभग सारे किले आ जाते हैं जिनसे किसी अभ्यर्थी का सामना होता है।
राजपूतों के पहाड़ी किले
राजपूत राज्यों ने 8वीं से 18वीं सदी के बीच अपने किले बनाए और बार-बार दोबारा बनाए। उन्हें दिल्ली, क्षेत्रीय सल्तनतों और मुगलों के दबाव को झेलने के लिए बनाया गया था। चित्तौड़गढ़ मेवाड़ की राजधानी था और इसने 1303, 1534-35 और 1567-68 में घेराबंदी झेली। कुंभलगढ़ की योजना राणा कुंभा के समय एक ही अभियान में बनी। जैसलमेर के भीतर एक पूरा शहर है, जिसमें स्थापना के समय से आज तक लोग रहते आए हैं।
ये किले सिर्फ सैनिक छावनी नहीं थे, राजदरबार भी थे। UNESCO के मूल्यांकनकर्ताओं ने सूची के छह किलों को “असल में किलेबंद नगर” कहा, जिनकी दीवारों के भीतर महल, मंदिर और पानी की व्यवस्थाएँ थीं। दो मशहूर राजपूत किले इस श्रृंखला से बाहर हैं। जोधपुर का मेहरानगढ़ पुराने राजपरिवार का है और उसे एक संग्रहालय ट्रस्ट चलाता है। बीकानेर का जूनागढ़ समतल जमीन पर बना मैदानी किला है, पहाड़ी किला है ही नहीं।
मराठों के पहाड़ी और समुद्री किले
मराठा किले राजधानियों का समूह कम और एक जाल ज्यादा हैं। UNESCO बारह ऐसे किलों का जिक्र करता है जिन्हें मराठों ने 17वीं सदी के आखिर से 19वीं सदी की शुरुआत के बीच बनाया, अपनाया या बढ़ाया। इन्हें तट और पहाड़ पर इस तरह रखा गया था कि इलाके पर पकड़ बनी रहे और व्यापार सुरक्षित रहे।
शिवाजी ने दोनों तरह की जमीन का इस्तेमाल किया:
- पहाड़ी किले राज्य को भीतरी इलाकों तक ले गए। राजगड उनकी सरकार की पहली गद्दी था, और रायगड, जहाँ 6 जून 1674 को उनका राज्याभिषेक हुआ, दूसरी।
- समुद्री किले राज्य को तट तक ले गए। 1664 से 1667 के बीच बना सिंधुदुर्ग नौसैनिक अड्डे के तौर पर बनाया गया था। इसका मकसद जंजीरा के सिद्दियों, अंग्रेजों और पुर्तगालियों पर लगाम रखना भी था।
UNESCO के ब्योरे में “अपनाया” शब्द अहम है, क्योंकि इनमें से कई किले मराठों से पुराने हैं:
- पन्हाला 1191-92 में शिलाहारों के अधीन रिकॉर्ड में मिलता है।
- लोहगड 1489 तक किला बन चुका था।
- तमिलनाडु का जिंजी 1677 में मराठों के कब्जे से पहले नायकों का गढ़ था।
जंजीरा इसका मशहूर अपवाद है। सिद्दियों ने मराठों की हर घेराबंदी के सामने इसे बचाए रखा, और यह इस श्रृंखला में शामिल नहीं है।
दक्कन सल्तनत और मुगलों के दुर्ग
सल्तनतों और मुगलों ने अपनी राजधानियों के लिए दुर्ग बनाए, और उनके किलों में यह साफ दिखता है। दीवारों के भीतर एक महल-नगर, जिसकी पूरी बनावट दरबार को ध्यान में रखकर तय की गई।
दक्कन में दौलताबाद पहले यादवों की राजधानी देवगिरि था। 1327 में मुहम्मद बिन तुगलक ने इसका नाम बदला और अपना दरबार यहाँ ले आया। इसकी खड़ी कटी चट्टान और अंधेरे घुमावदार रास्ते ने इसे ऐसा किला बनाया जो 1633 में सीधे हमले से नहीं, नाकेबंदी से गिरा। गोलकुंडा काकतीयों के मिट्टी के किले से बढ़कर कुतुबशाही राजधानी बना, और 1687 की मुगल घेराबंदी तक टिका रहा।
उत्तर में मुगलों का पैटर्न दिल्ली से आगरा और फिर वापस दिल्ली तक चलता है:
- पुराना किला: हुमायूँ का 1533 का दीनपनाह, जिसे शेरशाह सूरी ने 1540 से 1545 के बीच दोबारा बनवाया।
- आगरा किला: अकबर ने 1565 से 1573 के बीच इसे लाल बलुआ पत्थर से दोबारा बनवाया, और इसके भीतर शाहजहाँ के सफेद संगमरमर के महल हैं।
- लाल किला: शाहजहाँ ने 1638 से 1648 के बीच शाहजहानाबाद के लिए यह महल-किला बनवाया। यह पुराने सलीमगढ़ के बगल में है, जिसे इस्लाम शाह सूरी ने 1546 में बनवाया था।
लाल किले पर UNESCO का बयान इसे उस मुगल निर्माण परंपरा का शिखर बताता है जो 1526 में शुरू हुई थी और जिसमें इस्लामी, फारसी, तैमूरी और हिंदू परंपराएँ घुली-मिली थीं। राजपूत किले भी इस परंपरा से अछूते नहीं रहे। आमेर के आंगन एक राजपूत पहाड़ी किले के भीतर मुगल योजना पर बने हैं। इसीलिए इन दोनों समूहों को साथ-साथ पढ़ना सबसे अच्छा है।
यूरोपीय और दूसरे तटीय किले
तट के किलों का अपना इतिहास है, और यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने उसका सिर्फ एक हिस्सा लिखा। सबसे पहले पुर्तगाली आए। दीव जिला प्रशासन के मुताबिक दीव का किला 1535 में गुजरात के बहादुर शाह के साथ हुए गठबंधन के तहत बना और 1546 में दोबारा बनाया गया।
इसके बाद अंग्रेज किलेबंद व्यापारिक चौकियों के साथ आए:
- फोर्ट सेंट जॉर्ज, मद्रास (अब चेन्नई), 1644 में बना और आज इसमें राज्य के विधायी और प्रशासनिक दफ्तर हैं।
- फोर्ट विलियम, कोलकाता, 1757 के बाद हुगली किनारे आठ कोनों वाले बुर्जदार दुर्ग के रूप में दोबारा बना। सेना ने दिसंबर 2024 में इसका नाम बदलकर विजय दुर्ग कर दिया।
भारतीय ताकतों ने भी इसी तट पर पकड़ रखी। जंजीरा के सिद्दियों, बेकल में केलाडी नायकों और विजयदुर्ग में आंग्रे के नेतृत्व वाली मराठा नौसेना, सबने इस तट की किलेबंदी की। कोंकण तट के लिए भारत की 2024 की संभावित सूची वाली प्रविष्टि इस तट पर पुर्तगालियों, सिद्दियों, डचों, अंग्रेजों और मराठों के कब्जे का सिलसिला दर्ज करती है। पश्चिमी तट की होड़ में कई ताकतें शामिल थीं। यह सिर्फ यूरोपीयों और भारतीयों के बीच की लड़ाई नहीं थी।
UNESCO सूची में भारत के किले
भारत में चार विश्व धरोहर संपत्तियाँ किले हैं, जो 1983 से 2025 के बीच सूची में दर्ज हुईं। पहली दो अकेले मुगल दुर्ग हैं। आखिरी दो श्रृंखलाबद्ध संपत्तियाँ (serial properties) हैं, यानी एक ही सूची-प्रविष्टि जिसमें कई अलग-अलग स्थल हैं, और जिनका पूरा अर्थ तभी बनता है जब उन्हें साथ देखा जाए।
| संपत्ति | सूची में दर्ज | घटक | मानदंड | निर्माता |
|---|---|---|---|---|
| आगरा किला | 1983, 7वाँ सत्र, फ्लोरेंस | 1 | (iii) | मुगल |
| लाल किला परिसर | 2007, 31वाँ सत्र, क्राइस्टचर्च | 1 (सलीमगढ़ के साथ लाल किला) | (ii), (iii) और (vi) | सूरी और मुगल, बाद में अंग्रेजों के जोड़े निर्माण के साथ |
| राजस्थान के पहाड़ी किले | 21 जून 2013, 37वाँ सत्र, नोम पेन्ह | 6 | (ii) और (iii) | राजपूत राज्य |
| भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य | 11 जुलाई 2025, 47वाँ सत्र, पेरिस | 12 | (iv) और (vi) | मराठा, नए किलों के साथ पुराने किलों पर भी |
घटकों को ठीक-ठीक याद कर लेना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में यही सूचियाँ पूछी जाती हैं:
- राजस्थान के पहाड़ी किले: चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथंभौर, गागरोन, आंबेर और जैसलमेर।
- भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य: महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगड, खांदेरी, रायगड, राजगड, प्रतापगड, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग, और तमिलनाडु का जिंजी। PIB इसे भारत की 44वीं विश्व धरोहर संपत्ति के रूप में दर्ज करता है।
मानदंडों को आसान शब्दों में याद रखें तो उन्हें अलग रखना आसान होता है:
- मानदंड (ii): विचारों का कोई अहम आदान-प्रदान।
- मानदंड (iii): किसी सभ्यता या परंपरा का असाधारण सबूत।
- मानदंड (iv): किसी तरह की इमारत या भू-दृश्य का बेहतरीन उदाहरण।
- मानदंड (vi): दुनिया भर के लिए अहम घटनाओं या विचारों से सीधा जुड़ाव।
लाल किले पर (vi) इसलिए लागू होता है क्योंकि इसने अंग्रेजी राज की ओर बदलाव देखा, और आज भी भारत की आजादी का जश्न यहीं मनाया जाता है।
भारत की संभावित सूची, यानी वह छोटी सूची जिसमें से आगे के नामांकन चुने जाते हैं, में किलों की छह और प्रविष्टियाँ हैं:
- 2010: हैदराबाद के कुतुबशाही स्मारक, जिनमें गोलकुंडा किला शामिल है।
- 2014: दक्कन सल्तनत के स्मारक और किले, जिनके घटक गुलबर्गा, बीदर, बीजापुर और हैदराबाद में हैं।
- 2014: अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग में थेम्बांग किलेबंद गाँव।
- 3 जनवरी 2024: कोंकण तट की किलेबंदियाँ, यानी अर्नाला और वसई से लेकर जंजीरा और वेंगुर्ला की डच फैक्ट्री वाले किले तक नौ किले।
- 8 फरवरी 2024: मध्य प्रदेश का ग्वालियर किला।
- 11 फरवरी 2025: बुंदेलों के महल-किले, यानी झांसी किले समेत छह स्थल।
एक दोहराव लोगों को अक्सर उलझा देता है। विजयदुर्ग और सुवर्णदुर्ग 2024 की कोंकण वाली संभावित सूची प्रविष्टि में हैं, और 2025 में मराठा श्रृंखला के हिस्से के रूप में विश्व धरोहर सूची में भी दर्ज हो गए। संभावित सूची की प्रविष्टि सिर्फ एक प्रस्ताव होती है। इसलिए कोई किला एक प्रविष्टि में प्रस्तावित रह सकता है, जबकि दूसरी प्रविष्टि के जरिए वह सूची में दर्ज हो चुका हो।
आज भारत के किले: संरक्षण और हाल के बदलाव
ज्यादातर बड़े किले केंद्र सरकार के संरक्षण में हैं, कुछ राज्यों के संरक्षण में हैं, और कुछ अब भी निजी ट्रस्टों या सेना के पास हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) उन स्मारकों की देखभाल करता है जिन्हें प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया है। PIB ने 2 दिसंबर 2024 को इनकी संख्या 3,697 बताई।
यह बंटवारा ऊपर के किलों में साफ दिखता है:
- ASI (केंद्र): आगरा किला, लाल किला, पुराना किला, गोलकुंडा, ग्वालियर, दौलताबाद, झांसी, बेकल, जंजीरा, और बारह मराठा घटकों में से आठ, जिनमें रायगड, शिवनेरी और जिंजी शामिल हैं।
- राज्य विभाग: महाराष्ट्र का पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय साल्हेर, राजगड, खांदेरी और प्रतापगड की रक्षा करता है, और राजस्थान अपने स्मारक कानून के तहत गागरोन और आमेर की रक्षा करता है।
- निजी ट्रस्ट: मेहरानगढ़ और जूनागढ़ केंद्र के संरक्षण में नहीं हैं। जोधपुर और बीकानेर के पुराने राजपरिवारों के ट्रस्ट इन्हें संग्रहालय के रूप में चलाते हैं।
- सेना: फोर्ट विलियम एक चालू मुख्यालय है, और आगरा किले का एक हिस्सा अब भी सेना के इस्तेमाल में है।
UNESCO का दर्जा जिम्मेदारियों की एक दूसरी परत जोड़ देता है। सूची में दर्ज हर संपत्ति को अपनी संरक्षण स्थिति की रिपोर्ट देनी होती है। राजस्थान के पहाड़ी किलों की 2013 के बाद कई बार समीक्षा हो चुकी है, जिसमें चित्तौड़गढ़ के पास खनन और जैसलमेर के प्रबंधन जैसे मुद्दे उठे।
2024 से 2026 के बीच की तारीखवार घटनाएँ ये हैं:
- 3 जनवरी 2024: कोंकण के तटीय किले संभावित सूची में आए।
- 8 फरवरी 2024: ग्वालियर किला संभावित सूची में आया।
- दिसंबर 2024: सेना ने कोलकाता के फोर्ट विलियम का नाम बदलकर विजय दुर्ग किया।
- 11 फरवरी 2025: झांसी किले समेत बुंदेला महल-किले संभावित सूची में आए।
- 11 जुलाई 2025: भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य पेरिस में 47वें सत्र में सूची में दर्ज हुए। PIB के मुताबिक 20 में से 18 सदस्य देशों (States Parties) ने इस नामांकन का समर्थन किया।
परीक्षा के लिए भारत के किले कैसे पढ़ें
किले सिलेबस के तीन हिस्सों में आते हैं:
- कला और संस्कृति (GS पेपर I): किलों और महलों का स्थापत्य, राजपूत पहाड़ी किलों से लेकर मुगल दुर्गों तक।
- मध्यकालीन और आधुनिक काल की शुरुआत का इतिहास: वे घेराबंदियाँ और राजधानियाँ जो किसी किले को किसी शासक से जोड़ती हैं, अलाउद्दीन खिलजी से लेकर औरंगजेब और शिवाजी तक।
- धरोहर और संरक्षण: UNESCO के मानदंड, श्रृंखलाबद्ध संपत्तियाँ और ASI और राज्यों के संरक्षण का बंटवारा।
यह विषय धरोहर के जरिए भी पूछा जाता है और दीवारों के पीछे की राजनीति के जरिए भी। मुख्य परीक्षा 2018 के GS पेपर I में पूछा गया: “भारतीय कला धरोहर की रक्षा करना इस समय की जरूरत है। चर्चा कीजिए।” संरक्षण का बंटवारा और संभावित सूची उस उत्तर के लिए तैयार सामग्री हैं। इतिहास वैकल्पिक विषय 2020 के पेपर I में उम्मीदवारों से इस दावे पर टिप्पणी करने को कहा गया कि “आमुक्तमाल्यदा किले, ब्राह्मणों और बिखरे हुए जनजातीय समूहों के आपसी रिश्ते पर बहुत जोर देता है”। इससे पता चलता है कि किलों को सिर्फ इमारत के तौर पर नहीं, राज्य की ताकत के औजार के तौर पर भी जाँचा जाता है। प्रीलिम्स की बात करें तो Anantam IAS के प्रीलिम्स प्रश्न बैंक में 2013 से 2026 तक के 1,403 प्रश्नों में से 94 कला और संस्कृति के तहत टैग किए गए हैं।
इन बातों को तब तक दोहराइए जब तक ये अपने आप याद न आने लगें:
- UNESCO की चार किला संपत्तियाँ: आगरा किला (1983), लाल किला परिसर (2007), राजस्थान के पहाड़ी किले (2013) और भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य (2025)।
- घटक: राजस्थान में 6 और मराठा श्रृंखला में 12, जिनमें से 11 महाराष्ट्र में और एक, जिंजी, तमिलनाडु में।
- मानदंड: आगरा (iii); लाल किला (ii), (iii) और (vi); राजस्थान (ii) और (iii); मराठा (iv) और (vi)।
- अर्थशास्त्र के प्रकार: औदक (जल), पार्वत (गिरि), धान्वन (मरु) और वनदुर्ग (वन)।
- मराठा नाम: प्रतापगड पहाड़ी-वन, पन्हाला पहाड़ी-पठार और विजयदुर्ग तटीय किला है; खांदेरी, सुवर्णदुर्ग और सिंधुदुर्ग द्वीप किले हैं।
- संभावित सूची के किले: गोलकुंडा (2010 और 2014), ग्वालियर (2024), कोंकण के तटीय किले (2024) और झांसी समेत बुंदेला किले (2025)।
- संरक्षण कानून: AMASR अधिनियम, 1958, जिसके तहत दिसंबर 2024 तक 3,697 राष्ट्रीय स्मारक हैं।
पाँच उलझनें अंक कटवाती हैं:
- मशहूर और सूची में दर्ज: मेहरानगढ़, गोलकुंडा, ग्वालियर, जंजीरा और दौलताबाद विश्व धरोहर स्थल नहीं हैं।
- आमेर और आंबेर: दोनों एक ही किला हैं; UNESCO इसे आंबेर (Amber) लिखता है।
- विजय दुर्ग और विजयदुर्ग: पहला कोलकाता के फोर्ट विलियम का सेना का दिया नया नाम है, दूसरा सिंधुदुर्ग जिले का मराठा समुद्री किला है।
- जंजीरा और सिंधुदुर्ग: दोनों द्वीप किले हैं, लेकिन 2025 की श्रृंखला में सिर्फ सिंधुदुर्ग है; जंजीरा पर सिद्दियों ने मराठों के खिलाफ कब्जा बनाए रखा।
- लाल किला और आगरा किला: UNESCO आगरा किले को भी “आगरा का लाल किला” कहता है, इसलिए नाम से पहले शहर पढ़िए।
दोनों श्रृंखलाबद्ध सूचियाँ ही वह जोड़ी हैं जिनकी तुलना करनी चाहिए:
| पहलू | राजस्थान के पहाड़ी किले | भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य |
|---|---|---|
| सूची में दर्ज | 2013, नोम पेन्ह | 2025, पेरिस |
| घटक | 6 | 12 |
| राज्य | राजस्थान | महाराष्ट्र (11) और तमिलनाडु (1) |
| मानदंड | (ii) और (iii) | (iv) और (vi) |
| जमीन के प्रकार | पहाड़, नदी, जंगल और रेगिस्तान | पहाड़ी, पहाड़ी-वन, पहाड़ी-पठार, तटीय और द्वीप |
| संरक्षण | 4 ASI, 2 राज्य | 8 ASI, 4 राज्य |
भारत के किले उस अभ्यर्थी का साथ देते हैं जो रटने से पहले छाँटता है। जब हर किला निर्माता के हिसाब से किसी परिवार में और जमीन के हिसाब से किसी वर्ग में बैठ जाता है, तो सवाल में आया कोई नया नाम भी ऐसा किला बन जाता है जिसे आप सही जगह रख सकते हैं। तब धरोहर, राजपूत राजनीति या मराठा ताकत पर लिखा एक उत्तर पूरी श्रृंखला से सामग्री ले सकता है।
सामान्य प्रश्न
भारत के कितने किले UNESCO विश्व धरोहर स्थल हैं?
भारत की चार विश्व धरोहर संपत्तियाँ किले हैं: आगरा किला (1983), लाल किला परिसर (2007), राजस्थान के पहाड़ी किले (2013) और भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य (2025)। आखिरी दो श्रृंखलाबद्ध सूचियाँ हैं, जिनमें 6 और 12 किले हैं। इस तरह कुल 20 किला स्थल आते हैं, बशर्ते लाल किले और उससे सटे सलीमगढ़ को एक परिसर गिना जाए।
भारत के किलों के प्रकार कौन-से हैं?
अर्थशास्त्र जमीन के आधार पर चार प्रकार बताता है: जल दुर्ग, गिरि दुर्ग, मरु दुर्ग और वन दुर्ग। आजकल के ब्योरे भारत के किलों को पहाड़ी किले, समुद्री और द्वीप किले, मैदानी किले और नदी वाले किलों में बाँटते हैं, और मराठा सूची इसमें पहाड़ी-वन और पहाड़ी-पठार किले जैसे नाम जोड़ती है।
भारत के कौन-से किले UNESCO की संभावित सूची में हैं?
संभावित सूची में गोलकुंडा किला है, जो 2010 की कुतुबशाही प्रविष्टि और 2014 की दक्कन सल्तनत प्रविष्टि के जरिए आता है। ग्वालियर किला भी है, जिसे फरवरी 2024 में जोड़ा गया। इसके अलावा इसमें जंजीरा समेत 2024 के कोंकण तटीय किले, झांसी किले समेत 2025 के बुंदेला महल-किले और अरुणाचल प्रदेश का थेम्बांग किलेबंद गाँव भी शामिल हैं।
कौन-से मराठा किले विश्व धरोहर स्थल हैं?
भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य में बारह किले हैं: महाराष्ट्र के साल्हेर, शिवनेरी, लोहगड, खांदेरी, रायगड, राजगड, प्रतापगड, सुवर्णदुर्ग, पन्हाला, विजयदुर्ग और सिंधुदुर्ग, और तमिलनाडु का जिंजी। इन्हें 11 जुलाई 2025 को पेरिस में विश्व धरोहर समिति के 47वें सत्र में सूची में दर्ज किया गया।
क्या गोलकुंडा किला UNESCO विश्व धरोहर स्थल है?
नहीं। गोलकुंडा किला भारत की संभावित सूची में है, यानी आगे के नामांकनों की छोटी सूची में, लेकिन इसे अभी विश्व धरोहर सूची में दर्ज नहीं किया गया है। यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के तहत केंद्र के संरक्षण में है।
भारत के किलों की रक्षा कौन करता है?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण उन किलों की रक्षा करता है जिन्हें AMASR अधिनियम, 1958 के तहत राष्ट्रीय महत्व का घोषित किया गया है, जैसे आगरा किला, लाल किला और गोलकुंडा। राज्यों के पुरातत्व विभाग दूसरे किलों की रक्षा करते हैं, जैसे महाराष्ट्र में प्रतापगड और राजगड। वहीं मेहरानगढ़ और जूनागढ़ जैसे कुछ किले पुराने राजपरिवारों के ट्रस्ट चलाते हैं।
राजस्थान के पहाड़ी किलों में वन दुर्ग कौन-सा है?
राजस्थान के पहाड़ी किलों की श्रृंखला में रणथंभौर वन दुर्ग है। यह एक पहाड़ी पर उस इलाके के भीतर खड़ा है जो आज रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान है, और इसके चारों ओर का घना जंगल इसकी सुरक्षा का हिस्सा था।
पहाड़ी किले और समुद्री किले में क्या अंतर है?
पहाड़ी किला किसी ऊँचाई, जैसे खड़ी चट्टान, पहाड़ी की धार या पठार, को अपना मुख्य बचाव बनाता है, और दीवारें सिर्फ वहीं जोड़ता है जहाँ चट्टान में खाली जगह हो। समुद्री किला पानी का इस्तेमाल करता है। वह सिंधुदुर्ग की तरह किसी द्वीप पर या विजयदुर्ग की तरह किसी अंतरीप पर खड़ा होता है, ताकि हमलावरों को नाव से या जमीन की किसी पतली पट्टी से होकर आना पड़े।
अभ्यास प्रश्न
प्रीलिम्स MCQ
1. भारत में UNESCO की किला सूचियों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आगरा किला लाल किला परिसर से पहले विश्व धरोहर सूची में दर्ज हुआ था। 2. जंजीरा किला भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य का एक घटक है। 3. तमिलनाडु का जिंजी किला भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य का एक घटक है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 1 और 3
- (c) केवल 2 और 3
- (d) 1, 2 और 3
उत्तर: (b) आगरा किला 1983 में और लाल किला परिसर 2007 में सूची में दर्ज हुआ। जिंजी मराठा श्रृंखला का 12वाँ घटक है, जबकि जंजीरा इसका घटक नहीं है।
2. अर्थशास्त्र में बताए गए किले के प्रकार और उसके अर्थ के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. औदक : जल दुर्ग 2. पार्वत : गिरि दुर्ग 3. धान्वन : वन दुर्ग। ऊपर दिए गए युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
- (a) केवल एक
- (b) केवल दो
- (c) सभी तीन
- (d) कोई नहीं
उत्तर: (b) धान्वन मरु दुर्ग है; वन दुर्ग को वनदुर्ग कहा गया है।
3. निम्नलिखित में से कौन-सा किला भारत की संभावित सूची में है, लेकिन विश्व धरोहर सूची में दर्ज नहीं हुआ है?
- (a) कुंभलगढ़ किला
- (b) रायगड किला
- (c) ग्वालियर किला
- (d) आगरा किला
उत्तर: (c) ग्वालियर किला फरवरी 2024 में संभावित सूची में आया; बाकी तीनों सूची में दर्ज संपत्तियों के घटक हैं।
4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मेहरानगढ़ किला राजस्थान के पहाड़ी किलों का एक घटक है। 2. सलीमगढ़ किला लाल किला परिसर विश्व धरोहर संपत्ति का हिस्सा है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 और 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर: (b) मेहरानगढ़ राजस्थान वाली श्रृंखला से बाहर है, जबकि 1546 में इस्लाम शाह सूरी का बनवाया सलीमगढ़ लाल किला परिसर का हिस्सा है।
5. भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य के घटकों में से किसे पहाड़ी-वन किले के रूप में वर्गीकृत किया गया है?
- (a) पन्हाला
- (b) प्रतापगड
- (c) विजयदुर्ग
- (d) साल्हेर
उत्तर: (b) प्रतापगड पहाड़ी-वन किला है; पन्हाला पहाड़ी-पठार किला, विजयदुर्ग तटीय किला और साल्हेर पहाड़ी किला है।
मुख्य परीक्षा प्रश्न
- अर्थशास्त्र ने किलों को उस जमीन के आधार पर बाँटा जिसका वे इस्तेमाल करते थे। परीक्षण कीजिए कि यह विचार पूरे भारत में किलों के फैलाव को समझने में कैसे मदद करता है। (15 अंक, 250 शब्द)
- श्रृंखलाबद्ध विश्व धरोहर संपत्तियों के रूप में राजस्थान के पहाड़ी किलों और भारत के मराठा सैन्य परिदृश्य की तुलना कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- मुगल किले सिर्फ सैनिक निर्माण नहीं, बल्कि महल-नगर के रूप में बनाए गए थे। आगरा किले और लाल किले के संदर्भ में चर्चा कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)
- 16वीं से 18वीं सदी के बीच भारत के पश्चिमी तट की किलेबंदी कई ताकतों ने की। इस होड़ में समुद्री किलों की भूमिका पर चर्चा कीजिए। (15 अंक, 250 शब्द)
- भारत के किलों का संरक्षण केंद्र, राज्यों और निजी मालिकों के बीच बंटा हुआ है। संरक्षण के लिए इस बंटवारे से पैदा होने वाली चुनौतियों का परीक्षण कीजिए। (10 अंक, 150 शब्द)